जयपुर हिंसा: मस्जिद के पास रेलिंग हटते ही हालात बेकाबू, उग्र भीड़ ने पुलिस को निशाना बनाया

जयपुर के चौमू में धार्मिक स्थल के पास पत्थरों को लेकर दो समुदायों में हिंसा भड़क गई। पुलिस ने शांत कराने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसमें कई पुलिस वाले घायल हो गए। फिलहाल, चौमू में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है।

Dec 26, 2025 - 11:20
जयपुर हिंसा: मस्जिद के पास रेलिंग हटते ही हालात बेकाबू, उग्र भीड़ ने पुलिस को निशाना बनाया

जयपुर के पास बसे चौमू शहर में देर रात वह अफरातफरी मच गई जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक धार्मिक स्थल के बाहर वर्षों से पड़े पत्थरों को हटाने की कार्रवाई अचानक दो समुदायों के बीच तनाव की चिंगारी बन गई। कुछ ही मिनटों में मामला इतना बिगड़ गया कि इलाके में दहशत फैल गई और हालात काबू से बाहर होते नजर आए।

पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति शांत कराने की कोशिश की, लेकिन गुस्साई भीड़ ने कानून-व्यवस्था संभाल रही टीम पर ही पथराव शुरू कर दिया। पीटीआई के मुताबिक, इस हमले में चार पुलिसकर्मी चोटिल हो गए और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। फिलहाल तनाव के बादल छंट चुके हैं और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है।

जयपुर के पश्चिम डीसीपी हनुमान प्रसाद मीना ने बताया कि कलंदरी मस्जिद के पास अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। एक पक्ष ने जहां खुद अतिक्रमण हटाया, वहीं कुछ लोगों ने लोहे के कोण लगाकर ढांचे को फिर से खड़ा करने का प्रयास किया। पुलिस जैसे ही इन निर्माणों को हटाने पहुंची, भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया। अधिकारी ने कहा कि हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है और फिलहाल माहौल शांत है।

चौमू शहर, जो जयपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, वहां बस स्टैंड के पास मौजूद मस्जिद के बाहर पड़े पत्थरों को हटाने के दौरान यह विवाद 25-26 दिसंबर की रात करीब 3 बजे भड़क उठा। आधी रात के बाद अचानक बढ़े तनाव ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया और स्थानीय लोगों में भय का माहौल दिखाई देने लगा।

स्थिति काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। उच्च अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात को संभालने में जुट गए। देर रात चली इस पूरी कार्रवाई ने शहर में अस्थिरता का माहौल बना दिया था, जिसे नियंत्रित करने में टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

चौमू में 26 दिसंबर की सुबह 7 बजे से 27 दिसंबर सुबह 7 बजे तक इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम सिर्फ और सिर्फ शांति बहाल रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है, ताकि हालात पूरी तरह सामान्य हो सकें।

मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि जिस स्थल के बाहर पत्थर पड़े थे, वे लगभग 45 साल पुराने थे। ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर करने के लिए इन्हें हटाने का काम शुरू किया गया, लेकिन इसी प्रक्रिया ने तनाव की आग को हवा दे दी। वर्षों पुरानी चीज़ों के हटाए जाने को लेकर कुछ लोग असहज थे, जिसकी वजह से विवाद ने तूल पकड़ लिया।

प्रशासन ने इससे पहले संबंधित समुदायों के प्रतिनिधियों से बातचीत भी की थी और आपसी सहमति बनने के बाद ही पत्थर हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। यानी फैसला सबकी सहमति से लिया गया था, लेकिन फिर भी अचानक हालात पलट गए और माहौल गरमा गया।

पत्थर हटाने का काम शांतिपूर्वक पूरा भी हो चुका था, लेकिन जैसे ही वहां रेलिंग लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई, कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप में बदल गया और मामूली विवाद ने बड़ी घटना का रूप ले लिया।