पटना–हाजीपुर की दूरी होगी मिनटों में खत्म! सर्ररर से दौड़ेगी रफ्तार — नया ब्रिज लगभग तैयार

पटना-हाजीपुर को जोड़ने वाला नया फोर लेन ब्रिज जल्द शुरू होने जा रहा है। यह पुल गांधी सेतु पर बढ़ते दबाव को कम करेगा। परियोजना अंतिम चरण में है और साल के अंत तक इसके खुलने की उम्मीद है। नया ब्रिज यात्रियों को मिनटों में तेज और सुरक्षित यात्रा का फायदा देगा।

Feb 1, 2026 - 10:33
पटना–हाजीपुर की दूरी होगी मिनटों में खत्म! सर्ररर से दौड़ेगी रफ्तार — नया ब्रिज लगभग तैयार

पटना और हाजीपुर के बीच रोजाना सफर करने वालों के लिए बेहद बड़ी राहत की खबर सामने आई है। वर्षों से महात्मा गांधी सेतु पर लगने वाले अंतहीन जाम से जूझ रहे लोगों की परेशानी अब आखिरकार खत्म होने जा रही है। पथ निर्माण विभाग द्वारा सेतु के समानान्तर बनाए जा रहे नए फोर लेन ब्रिज का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक यह भव्य पुल पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इस नए पुल के बनते ही पटना से हाजीपुर के बीच सफर न सिर्फ आसान होगा, बल्कि लोगों को घंटों की यातायात अव्यवस्था से स्थाई राहत मिलेगी।

करीब साढ़े चार दशक पुराने महात्मा गांधी सेतु पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसके समानान्तर एक अतिरिक्त फोर लेन ब्रिज बनाने का बड़ा फैसला लिया था। भारत सरकार की अनुशंसा पर 14.5 किलोमीटर लंबे एप्रोच रोड को जोड़ते हुए 5.5 किलोमीटर के इस विशालकाय पुल का निर्माण कार्य 2021 में शुरू हुआ। एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को यह जिम्मेदारी सौंपी गई और विभाग के अनुसार अब तक लगभग 60% काम पूरा भी हो चुका है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए दिसंबर 2026 तक पूरा ब्रिज बनकर तैयार होने की पूरी संभावना है।

नए पुल के चालू होते ही दक्षिण और उत्तर बिहार के बीच यातायात का खेल पूरी तरह बदलने वाला है। पटना, जहानाबाद, गया, औरंगाबाद जैसे जिलों से उत्तर बिहार पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा, वहीं छपरा, वैशाली, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और गोपालगंज जैसे जिलों से पटना की कनेक्टिविटी और भी मजबूत हो जाएगी। महात्मा गांधी सेतु के पुराने ढांचे में कुछ साल पहले बड़े बदलाव किए गए थे, लेकिन बढ़ती वाहन संख्या के कारण यातायात का दबाव लगातार बना रहा।

इसी स्थाई समस्या को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने इस समानान्तर ब्रिज के निर्माण की योजना को हरी झंडी दी और इसके लिए 2926.42 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि भी स्वीकृत की। अब जैसे-जैसे निर्माण कार्य अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों में इस नए पुल को लेकर उत्साह और उम्मीदें भी बढ़ती जा रही हैं। माना जा रहा है कि यह पुल आने वाले वर्षों में बिहार की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था दोनों को एक नई रफ्तार देगा।