नोएडा हिंसा मामला: दो घंटे में आग फैली, 7.5 घंटे तक कई क्षेत्रों में उपद्रव जारी
आपके द्वारा दिया गया लेख अधूरा है, इसलिए 3–4 लाइन का पूरा और सटीक SEO‑optimized meta description बनाना संभव नहीं है। कृपया पूरा न्यूज़ आर्टिकल या पूर्ण कंटेंट भेजें, ताकि मैं सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करते हुए ठीक 150–160 कैरेक्टर में आकर्षक और पूर्ण विवरण तैयार कर सकूं।
चार दिनों से सुलग रहा वेतन वृद्धि का विवाद सोमवार की सुबह अचानक भड़क उठा और पूरा गौतमबुद्धनगर मानो आग के धधकते मैदान में बदल गया। सुबह करीब 9 बजे फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी से शुरू हुआ शांत प्रदर्शन कुछ ही मिनटों में उग्र रूप ले बैठा। देखते ही देखते स्थिति ऐसी बेकाबू हुई कि शहर के कई हिस्सों में तनाव फैल गया। हालात को थामने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।
वेतन बढ़ोतरी की मांग ने सोमवार को हिंसक रूप तब लिया जब नोएडा की 300 से ज्यादा कंपनियां मजदूरों के आक्रोश का निशाना बन गईं। सड़क पर उतरे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने 100 से अधिक वाहनों में तोड़फोड़ की और 20 से ज्यादा गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस पूरे बवाल में 10 पुलिसकर्मियों सहित 30 से अधिक लोग घायल हो गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
दिनभर मचे हंगामे के बाद सरकार ने देर रात बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि का ऐलान कर दिया। नई मजदूरी दरें एक अप्रैल 2026 से लागू होंगी और विभिन्न श्रेणियों में मजदूरों के वेतन में करीब 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इसे तत्काल राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि सरकार ने वेज बोर्ड के माध्यम से स्थायी समाधान की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही है।
नोएडा आंत्रप्रिन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन के अनुसार, इस बेकाबू प्रदर्शन में 300 से अधिक कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है और उससे जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
चार दिनों से simmer कर रहे असंतोष ने सोमवार को तब विस्फोटक रूप ले लिया जब मदरसंस कंपनी फेज-2 में मजदूरों ने पुलिस की गाड़ियों पर जमकर गुस्सा निकाला। कुछ मिनटों में ही कई वाहनों को आग लगा दी गई और देखते ही देखते प्रदर्शन पूरे शहर में तूफान की तरह फैल गया। हालात इतने बिगड़ गए कि शहर का हर बड़ा औद्योगिक सेक्टर तनाव की गिरफ्त में आ गया।
फेज-2 और एनएसईजेड के बाद सेक्टर-57, 58, 59, 62, 63, 64 और 65 तक मजदूरों का विशाल जत्था सड़कों पर उतर आया। जुलूस आगे बढ़ता गया और रास्ते में पड़ने वाली कंपनियों के कांच और गेट टूटते चले गए। कई फैक्ट्रियों के अंदर घुसकर भी तोड़फोड़ की गई, जिससे उद्योग जगत में हड़कंप मच गया।
सेक्टर-63 में मौजूद मारुति सर्विस सेंटर भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गया, जहां कई गाड़ियों में आग लगा दी गई और शोरूम को नुकसान पहुंचाया गया। पूरे दिन सड़कों पर भीड़ भटकती रही, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस अधिकारियों ने समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन हालात उनके काबू से बाहर रहे। दोपहर बाद पीएसी और पुलिस बल ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया और शहर में धीरे-धीरे शांति बहाल करने की कोशिशें शुरू कीं।