2000 KM रेंज, ब्रह्मोस से तेज रफ्तार! दिल्ली से बटन दबते ही किराना हिल्स बनेगा मलबा, सामने आएगा तबाही का खौफनाक मंजर

Golden Horizon ALBM: भारत अपने मिसाइल सिस्टम को नई टेक्नोलॉजी से लगातार अपडेट कर रहा है. अग्नि सीरीज, ब्रह्मोस, अस्त्र जैसी कैटेगरी की मिसाइलें दुश्मनों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. इस बीच, इज़रायल ने भारत को ऐसी मिसाइल का ऑफर दिया है, जो सात तहों में छुपे दुश्मन के सैन्य ठिकानों को पलक झपकते ही मलबा बना सकती है.

Feb 23, 2026 - 10:55
2000 KM रेंज, ब्रह्मोस से तेज रफ्तार! दिल्ली से बटन दबते ही किराना हिल्स बनेगा मलबा, सामने आएगा तबाही का खौफनाक मंजर

आज की हाई-टेक जंग में मिसाइलें युद्ध की दिशा और नतीजे दोनों बदलने की ताकत रखती हैं. सिर्फ एक कमांड से हजारों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन के सबसे सुरक्षित ठिकाने को कुछ ही मिनटों में ध्वस्त किया जा सकता है. दुनिया की कई ताकतें इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों पर निर्भर हैं, जिनकी मारक क्षमता और सटीकता दोनों हैरत में डाल देती हैं. भारत भी अग्नि सीरीज जैसी विध्वंसक मिसाइलों के जरिए इस क्लब का मजबूत हिस्सा बन चुका है. अब भारतीय वैज्ञानिक ऐसी नई तकनीक पर काम कर रहे हैं जो बंकर बस्टर हथियारों को नई परिभाषा दे सकती है.

इसी बीच इज़रायल ने भारत के सामने एक चौंका देने वाला प्रस्ताव रखा है—‘गोल्डन होराइजन’ एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM), जिसे अब तक की सबसे खतरनाक और रणनीतिक मिसाइलों में गिना जा रहा है. बताया जा रहा है कि यह मिसाइल डीप स्ट्राइक क्षमता में ब्रह्मोस जैसे मशहूर हथियार को भी पीछे छोड़ सकती है. इसकी घातक क्षमता और स्पीड ने रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्डन होराइजन को लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है, जिससे दूर बैठे दुश्मन के हाई-सिक्योरिटी टार्गेट भी आसानी से निशाने पर आ जाएंगे. इसकी मारक दूरी 1500 से 2000 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जबकि न्यूनतम रेंज लगभग 1000 किलोमीटर बताई जाती है. यह क्षमता भारत को दुश्मन की धरती के भीतर गहराई तक वार करने की ताकत देने वाली है.

इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना के Su-30MKI युद्धक विमानों में इंटीग्रेट करने की योजना सामने आई है. गोल्डन होराइजन खासतौर पर भूमिगत न्यूक्लियर फैसिलिटी, हैवी-प्रोटेक्टेड कमांड बंकर और कंक्रीट से घिरे दुश्मन के स्ट्रक्चर को चकनाचूर करने के लिए डिजाइन की गई है. यह एक ऐसी स्ट्राइक वेपन कैटेगरी होगी जिसे रोकना लगभग नामुमकिन माना जाएगा.

भारतीय वायुसेना पहले से इज़रायल की कई हाई-प्रिसिजन मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही है, जैसे एयर लोरा (400 किमी) और रैम्पेज (250 किमी). लेकिन गोल्डन होराइजन इन सब से कई गुना ज्यादा घातक, एडवांस्ड और रणनीतिक रूप से निर्णायक हथियार माना जा रहा है. इसकी शक्ति इसे पूरी तरह अलग लीग में खड़ा करती है.

यह मिसाइल बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी में उड़ान भरती है और अंतिम फेज में 6100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हाइपरसोनिक स्पीड हासिल कर लेती है. इतनी जबरदस्त रफ्तार से टकराने पर जो ऊर्जा पैदा होती है, वह गहरे भूमिगत ठिकानों और बेहद मजबूत संरचनाओं को भी ध्वस्त कर सकती है. यही वजह है कि इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव बताया जाता है.

हालांकि भारत की ओर से इस मिसाइल की खरीद पर अभी तक आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन शुरुआती स्तर की बातचीत जरूर जारी है. अगर यह हथियार भविष्य में भारतीय हथियारागार का हिस्सा बनता है, तो भारत की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और देश की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाई मिलेगी.