तिहाड़ जाएंगे राजपाल यादव! कोर्ट ने ठुकराई जमानत, दलीलों का नहीं पड़ा कोई असर, बढ़ी मुश्किलें!
राजपाल यादव की रिहाई की उम्मीदों पर पानी फिरा है. उन्हें कोर्ट से राहत नहीं मिली है. दिल्ली कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राजपाल की ओर से कई दलीलें दी गईं लेकिन कोर्ट ने बदले में उन्हें जमकर फटकार लगाई.
फिल्मी दुनिया के मशहूर एक्टर और कॉमेडी के बादशाह राजपाल यादव इन दिनों जिंदगी के सबसे बड़े संकट से जूझ रहे हैं. 9 करोड़ रुपये का कर्ज न चुका पाने के मामले में उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया हुआ है. 12 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई, लेकिन उम्मीदों के उलट उन्हें जमानत नहीं मिली. अदालत ने उनकी दलीलों पर सख्त रुख अपनाया और साफ कहा कि गलती उनकी खुद की है.
जमानत की उम्मीद टूटी, कोर्ट ने लगाई फटकार
राजपाल की सजा को रोककर जमानत पर रिहा करने की याचिका पर हाई कोर्ट ने मुरली प्रोजेक्ट कंपनी को नोटिस तो जारी किया, लेकिन तत्काल राहत देने से मना कर दिया. अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी. राजपाल ने शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए अस्थायी जमानत मांगी थी. बता दें कि 5 फरवरी से एक्टर न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं.
सुनवाई के दौरान राजपाल के वकील ने कोर्ट को बताया कि अभी भी पैसों की बात एक्टर से करनी बाकी है. इस पर अदालत नाराज हो गई और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि राजपाल जेल में कोर्ट की वजह से नहीं, बल्कि अपनी गलतियों की वजह से हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब उन्होंने खुद अपना दोष स्वीकार किया है, तो सजा को निलंबित करने का कोई आधार नहीं बनता.
जस्टिस शर्मा ने आगे कहा कि राजपाल कई दफा मान चुके हैं कि उन्होंने ये रकम ली थी और लौटाने का वादा भी किया था. तय समय तक भुगतान न करने के कारण ही 6 महीने की कैद की सजा सुनाई गई है. अदालत का कहना था कि वादाखिलाफी करने पर ही उन्हें जेल में रहना पड़ रहा है.
राजपाल के वकील ने दलील दी कि 3 करोड़ से ज्यादा की रकम चुका दी गई है. लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए दो टूक कहा कि आपको 25-30 मौके दिए गए थे, फिर भी आपने खुद बताया था कि आप भुगतान करने में असमर्थ हैं. ऐसे में अब अचानक जमानत की मांग क्यों की जा रही है?
कोर्ट में राजपाल की ओर से रखी गई दलीलें
हाई कोर्ट का सवाल– जब आप मान चुके हैं कि पैसा उधार लिया था, गुनाह कबूल कर चुके हैं और चुकाने का वादा भी किया था, तो अब सजा रोकने की मांग क्यों?
राजपाल के वकील– उस समय हमने कहा था कि हम समझौता करना चाहते हैं. राजपाल ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए खुद सरेंडर किया है. फिल्म के लिए लिए गए 5 करोड़ के निवेश को लौटाने के लिए ही संघर्ष कर रहे हैं. 3 करोड़ से ज्यादा राशि चुका भी चुके हैं.
हाई कोर्ट– ये बहस आखिर हो क्यों रही है? खुद आपने कहा था कि राशि लौटाएंगे, लेकिन सालों तक भुगतान नहीं किया. आदेश का पालन न करने के कारण ही जेल जाना पड़ा. आप बार-बार मौके मिलने के बाद भी वादा नहीं निभा पाए, इसलिए अब केस को फिर से खोलने का सवाल नहीं उठता.
अदालत ने यह भी कहा कि आप समझौते की संभावनाएं तलाशते रहे, लेकिन 25-30 मौकों के बाद भी रकम चुकाने में देरी की. सहानुभूति अपनी जगह है, लेकिन कानून सब पर समान है.
राजपाल के वकील– हमें 2.10 करोड़ रुपये जमा करने हैं और हमें उद्योग जगत व पब्लिक से मदद मिल रही है.
हाई कोर्ट– इसका मामले से कोई लेना-देना नहीं. अगर आप राशि जमा करने को तैयार हैं, तो सुनवाई आगे बढ़ेगी.
वकील– हम सिक्योरिटी अमाउंट जमा करने को तैयार हैं, लेकिन परिवार में शादी है इसलिए जमानत जरूरी है.
क्या है पूरा विवाद?
राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लगभग 9 करोड़ रुपये कर्ज में लिए थे. खुद डायरेक्ट की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई, जिसकी वजह से वे तय समय पर पैसा नहीं लौटा पाए. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा और बिजनेसमैन की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई.
अदालत ने राजपाल को कई बार रकम चुकाने का मौका दिया, लेकिन भुगतान न होने पर आखिरकार उन पर सख्त कार्रवाई हुई और उन्हें जेल की सजा मिली.