ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में बड़ा ट्विस्ट! राहुल गांधी ने क्यों नहीं किए साइन, कांग्रेस ने बताई अंदरूनी वजह

राहुल गांधी ने संसदीय परंपराओं के कारण स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। कांग्रेस ने 118 सांसदों के साथ नोटिस देकर स्पीकर पर पक्षपात के आरोप लगाए। टीएमसी ने इससे पहले स्पीकर से बातचीत की अपील की थी।

Feb 10, 2026 - 16:28
ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में बड़ा ट्विस्ट! राहुल गांधी ने क्यों नहीं किए साइन, कांग्रेस ने बताई अंदरूनी वजह

संसद की गरम होती सियासत के बीच एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव वाले नोटिस पर हस्ताक्षर करने से खुद को अलग रखा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई हलचल मच गई है।

सूत्र बताते हैं कि संसदीय मर्यादाओं और लंबे समय से चली आ रही परंपराओं को ध्यान में रखते हुए कोई भी विपक्षी नेता आमतौर पर स्पीकर को हटाने की मांग पर अपनी सहमति नहीं देता—और राहुल गांधी का कदम भी इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है।

इसी बीच खबर है कि स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को नोटिस की विस्तृत जांच करने और स्थिति के मुताबिक आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। इससे आगामी सत्र और भी राजनीतिक रूप से तपा हुआ नजर आ रहा है।

उधर, कांग्रेस ने स्पीकर के खिलाफ आधिकारिक तौर पर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस थमा दिया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि “आज दोपहर 1:14 बजे हमने रूल 94C के तहत स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस जमा किया।”

पार्टी से मिली जानकारी के अनुसार, इस नोटिस पर अब तक 118 सांसदों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया है। वहीं शशि थरूर ने भी पार्टी की रणनीति का समर्थन किया और कहा कि वे पूरी तरह तैयार हैं और जो भी निर्णय पार्टी ले रही है, वे उसके साथ मजबूती से खड़े हैं।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जो नोटिस साझा किया, उसमें स्पीकर पर ‘पक्षपात’ करने और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका न देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

नोटिस में चार बड़ी घटनाओं का उल्लेख है—सबसे प्रमुख वह पल जब राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान राहुल ने 2020 के चीन स्टैंडऑफ का जिक्र करते हुए जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित यादों का हवाला दिया था।

नोटिस में आठ सांसदों के निलंबन, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई टिप्पणी और स्पीकर के उस बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था—ये सभी मुद्दे अब राजनीतिक तूफान को और तेज कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने खुलासा किया कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस से अनुरोध किया था कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले स्पीकर से वार्ता की जाए, ताकि समाधान की कोई गुंजाइश निकले।

टीएमसी ने साफ कहा है कि अगर दो से तीन दिनों के भीतर स्पीकर विपक्ष की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते, तो पार्टी बिना हिचकिचाहट इस नोटिस पर हस्ताक्षर कर देगी, जिससे सियासी हलचल और तेज होना तय है।