अहंकारी रावण का अंत माता सीता के अपमान...', महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष पर बरसे CM धामी
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उत्तराखंड में मंगलवार का दिन राजनीतिक सरगर्मी से भरा रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नारी सम्मान, लोकतंत्र में अधिकार’ पर आयोजित विशेष सत्र में विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित न होने पर उन्होंने विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया और अपनी बात को मजबूत करने के लिए महाभारत और रामायण के प्रसंगों का भी जिक्र किया।
सदन में मौजूद सदस्यों को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि यह चर्चा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के संघर्ष और सपनों को सलाम करने का अवसर है। उन्होंने राज्य निर्माण में योगदान देने वाले सभी लोगों को नमन किया और खासतौर पर उन महिलाओं को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने उत्तराखंड की बुनियाद को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर विधानसभाओं में एकजुट समर्थन की अपील करते हुए कहा कि भारत की सनातन संस्कृति में स्त्री शक्ति को सदैव सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। उन्होंने मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी परंपरा महिलाओं को सिर्फ पूजनीय ही नहीं मानती, बल्कि उन्हें शक्ति, समृद्धि और ज्ञान का स्रोत भी समझती है।
अपने संबोधन में धामी ने उन महान भारतीय महिलाओं का उल्लेख किया जिन्होंने अपनी विलक्षण क्षमता और साहस से दुनिया में नई मिसालें कायम कीं। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला जैसी हस्तियों को भारत की प्रेरक शक्ति बताते हुए कहा कि इन महिलाओं ने आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और दृढ़ता की नई परिभाषा लिखी है।
उन्होंने आगे उत्तराखंड की वीरांगनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस पहाड़ी राज्य की मातृशक्ति ने समय-समय पर अपने संघर्षों और बलिदानों से इतिहास रचा है। तिलू रौतेली की बाल-साहसिक लड़ाइयों से लेकर जिया रानी की अदम्य वीरता तक, रानी कर्णावती की पराक्रमी गाथाओं से लेकर गौरा देवी के चिपको आंदोलन तक—हर अध्याय में महिलाओं का अटूट साहस दर्ज है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की लड़ाई हो या समाज सुधार के किसी आंदोलन की शुरुआत—हर मोड़ पर महिलाओं ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर नेतृत्व किया है। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं को अवसर मिलता है, वे सिर्फ योगदान नहीं देतीं, बल्कि नेतृत्व करके बदलाव लाती हैं और इतिहास लिखती हैं।
महिला सशक्तिकरण को समाज की प्रगति की रीढ़ बताते हुए धामी ने कहा कि कोई भी देश तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक उसकी महिलाएं सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर न हों। उन्होंने कहा कि एक महिला की सफलता सिर्फ उसके परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेश किए गए महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की ऐतिहासिक पहल थी। यह सिर्फ संख्या बढ़ाने का कदम नहीं, बल्कि देश की नीतियों में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प था।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बिल को पारित कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की थी और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इसे आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया गया। लेकिन ‘इंडिया’ गठबंधन और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया, जिसके कारण यह बिल पारित नहीं हो सका और महिलाओं को उनका हक मिलने से रोक दिया गया।
सीएम धामी ने बिल के असफल होने पर विपक्ष की प्रतिक्रिया की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सदन में जब वोट कम पड़े, तो विपक्षी सदस्यों ने मेजें थपथपाकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस दृश्य ने उन्हें महाभारत के उस दर्दनाक क्षण की याद दिला दी, जब कौरवों ने द्रौपदी का अपमान किया था और दुर्योधन व उसके साथियों ने शर्म की जगह उत्साह दिखाया था।