प्रकाश बराइक मामला: राज्यसभा में ममता बनर्जी की ताकत घटी, आज तीसरे सांसद ने पद छोड़ा
Prakash Baraik: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही ममता बनर्जी की पार्टी टूट का सामना कर रही है। पार्षदों के बाद विधायक और अब सांसद लगातार इस्तीफा दे रहे हैं। गुरुवार को प्रकाश बरेक ने संसद पद से इस्तीफा दे दिया है।, India News in Hindi - Hindustan
कांग्रेस में संभावित विलय की चर्चाओं के बीच ममता बनर्जी पर एक और बड़ा राजनीतिक तूफान गिरा है। गुरुवार को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने अचानक पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। हैरानी की बात यह है कि यह एक हफ्ते में तीसरा इस्तीफा है। इससे पहले 10 जून को सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा सदस्यता छोड़कर पार्टी कैम्प में हलचल मचा दी थी।
13 सांसदों वाली टीएमसी की राज्यसभा शक्ति अब केवल 10 पर सिमट गई है, जिससे पार्टी के भीतर गहरा असंतोष साफ दिखाई देने लगा है। वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे और सुष्मिता देव पहले ही पद छोड़ चुके थे, और सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में तीन और सांसद इस्तीफा दाग सकते हैं। हालांकि इन नामों पर फिलहाल रहस्य की चादर पड़ी हुई है।
रे ने इस्तीफे से पहले टीएमसी की पिछली सरकार पर भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य-शिक्षा की बदहाल व्यवस्था जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। दूसरी ओर, सुष्मिता देव ने अपनी चुप्पी तोड़ी नहीं, लेकिन उनका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मिलना राजनीतिक गलियारों में कई बड़े सवाल खड़े कर गया है।
लोकसभा में भी हालात कम विस्फोटक नहीं हैं। खबरें हैं कि लगभग 20 सांसदों का एक गुट पार्टी लाइन से अलग होकर बगावत की राह पर चल पड़ा है। यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, काकोली घोष दस्तीदार और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े नाम इसमें शामिल बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह समूह काकोली घोष की अगुवाई में एनडीए को समर्थन देने की चिट्ठी स्पीकर ओम बिरला को सौंप सकता है।
4 मई को घोषित नतीजों में टीएमसी ने 80 सीटें जीतकर मजबूती दिखाई थी, लेकिन खुद ममता बनर्जी सीट हार गई थीं, जिसने पार्टी के अंदरूनी विवादों को और गहरा कर दिया। इसके बाद रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बाहर का रास्ता दिखाया गया, जिसकी अगुवाई में अब तक करीब 60 विधायक बागी हो चुके थे। ताजा खबरों के अनुसार यह संख्या बढ़कर 64 तक पहुंच गई है।
इसी बीच ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ दिल्ली पहुंचीं, जहां वे INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल हुईं। इसी दौरान सांसदों की बगावत ने पार्टी को हिलाकर रख दिया। ममता की सोनिया गांधी से मुलाकात ने कांग्रेस-टीएमसी विलय की अटकलों में और तेज़ी भर दी।
इसके बाद अभिषेक और राहुल गांधी की अहम बैठक ने सियासी गलियारों में चर्चा और भी गर्म कर दी। हालांकि अभी तक दोनों पार्टियां किसी भी विलय योजना से साफ इनकार कर रही हैं। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होने के बाद 1998 में टीएमसी की स्थापना की थी, और अब एक बार फिर राजनीतिक समीकरण बड़ी करवट लेता दिखाई दे रहा है।