राम मंदिर दान मामला: प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही टिन्नू की मासिक लाखों कमाई का खुलासा

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अभी थमा नहीं था कि अब एक और बड़ा घोटाला सामने आता दिख रहा है. इस मामले में भी टिन्नू यादव शामिल था.

Jul 3, 2026 - 11:03
राम मंदिर दान मामला: प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही टिन्नू की मासिक लाखों कमाई का खुलासा

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बीच अब एक और चौंकाने वाला राज सामने आया है। जांच में उजागर हुआ है कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू नाम का व्यक्ति वीआईपी दर्शन के नाम पर हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई कर रहा था। एसआईटी की ताज़ा रिपोर्ट ने पूरे गैंग के काले कारनामों से पर्दा उठा दिया है, जिससे मंदिर प्रशासन भी सकते में है।

जांच सूत्र बताते हैं कि टिन्नू ने बाकायदा एक टीम बना रखी थी, जो खास श्रद्धालुओं को लाइन से बचाकर वीआईपी दर्शन कराने का ‘गुप्त खेल’ चलाती थी। गैंग के कई सदस्य अब जेल भी भेजे जा चुके हैं। रोजाना कमाई का बंटवारा होता था और यह धंधा प्राण प्रतिष्ठा के बाद और ज्यादा तेज़ी से बढ़ा। एसआईटी को शक है कि इस जाल में मंदिर के कुछ और कर्मचारी और बाहरी लोग भी फंसे हो सकते हैं।

मंदिर में आम श्रद्धालुओं को लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना होता है, जबकि वीआईपी पास वाले कुछ ही मिनट में दर्शन कर लेते हैं। ये पास ट्रस्ट की ओर से बिल्कुल मुफ्त दिए जाते हैं, लेकिन टिन्नू गैंग इन्हें ‘कमाई का हथियार’ बनाए हुए था। श्रद्धालुओं को आसान और तेज दर्शन का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।

ताज़ा जानकारी के मुताबिक गैंग ने अपना जाल शहर भर के होटलों, होम स्टे और धर्मशालाओं तक फैला रखा था। वहां रुकने वाले श्रद्धालुओं को मालिकों के जरिए ‘एक्सक्लूसिव वीआईपी दर्शन’ का लालच दिया जाता था। आम तौर पर 500 से 1000 रुपये प्रति व्यक्ति लिए जाते थे, जबकि संपन्न दिखने वाले यात्रियों से दो हजार या उससे भी अधिक रकम वसूली जाती थी।

होटल वाले श्रद्धालुओं की डिटेल टिन्नू एंड कंपनी तक पहुंचाते थे, जिसके बाद यह पूरा रैकेट सक्रिय हो जाता था। श्रद्धालुओं के नाम पर तुरंत वीआईपी पास तैयार होते और कुछ ही देर में उन्हें विशेष मार्ग से दर्शन करा दिया जाता था। यह प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित थी कि कोई आसानी से शक तक नहीं कर सकता था।

सूत्र बताते हैं कि होटल और होम स्टे से श्रद्धालुओं को लाने की जिम्मेदारी अनुकल्प, करुणेश, मनीष, अविनाश और लवकुश जैसे लोगों पर थी। टिन्नू खुद पास बनवाने का काम करता था, हालांकि उसे पास बनाने का अधिकार नहीं था। इसके लिए वह चंपत, अनिल मिश्र और गोपाल राव की आईडी का अवैध रूप से इस्तेमाल करता था। इस पूरे नेटवर्क में कई और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है।

इस रैकेट का एक और बड़ा नाम ‘छोटू’ है, जो वीआईपी रूट के पास मौजूद रहता था और देखने में सबसे छोटा खिलाड़ी लगने के बावजूद असली ‘फिक्सर’ था। कहा जाता था कि जिसे भी वीआईपी दर्शन चाहिए, छोटू से संपर्क करे और मिनटों में काम हो जाएगा। रकम का बंटवारा पहले से तय था और खास मौकों पर इनकी कमाई कई गुना बढ़ जाती थी।