सिर्फ 1 फिल्म बनाई, उसी के लिए मिला नेशनल अवॉर्ड... लेकिन सम्मान वाले दिन ही हो गई मौत
अवतार कृष्ण कौल की फिल्म 27 डाउन ने हिंदी सिनेमा में अपनी अनोखी शैली से खास पहचान बनाई। उन्हें इस कृति के लिए प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड मिला। अफसोस की बात है कि सम्मान वाले दिन ही उनका निधन हो गया। उनकी संवेदनशील रचनात्मकता आज भी दर्शकों के मन में जीवित है।
हिंदी सिनेमा की दुनिया में एक ऐसा नाम दर्ज है, जिसने केवल एक फिल्म बनाकर इतिहास रच दिया और फिर दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गया। यह कहानी है उस प्रतिभाशाली निर्देशक की, जिसने सिर्फ एक कृति से अपने हुनर का ऐसा निशान छोड़ा कि आज भी लोग हैरान रह जाते हैं।
अवतार कृष्ण कौल… वह फिल्ममेकर जिसने मात्र एक फिल्म ‘27 डाउन’ बनाई, लेकिन इस एक ही फिल्म ने उन्हें रातों-रात प्रसिद्ध कर दिया। यह फिल्म इतनी दमदार साबित हुई कि इसे पूरे दो नेशनल अवॉर्ड मिले, जो किसी भी नए निर्देशक के लिए किसी सपने से कम नहीं थे।
लेकिन किस्मत का खेल भी अजीब होता है। जिस दिन उनकी इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिलने का ऐलान हुआ, उसी दिन 34 वर्षीय अवतार कृष्ण कौल इस दुनिया से रुख़सत हो गए। उनकी आकस्मिक मौत ने पूरे फिल्म जगत को हिला दिया था।
कश्मीर के एक कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे अवतार कृष्ण बचपन से ही कला और फिल्मों के दीवाने थे। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा, लेकिन सपनों को कभी मरने नहीं दिया। क्लास IV की नौकरी से शुरुआत की, फिर मौका मिला विदेश जाने का। न्यूयॉर्क में पढ़ाई पूरी की और यहीं बस गए।
कुछ समय बाद वे भारत लौटे और हिंदी सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की और 1974 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म बनाने का फैसला किया। मशहूर लेखक रमेश बक्शी के उपन्यास ‘अठारह सूरज के पौधे’ को आधार बनाकर उन्होंने ‘27 डाउन’ को जन्म दिया।
इस फिल्म में राखी ने शालिनी का किरदार निभाया, जबकि एम.के. रैना ने संजय की भूमिका से लोगों का दिल जीत लिया। कहानी थी एक ऐसे इंसान की, जो जिम्मेदारियों और अपने सपनों के बीच उलझकर रह जाता है। कौल ने इसे लिखा, फिल्माया और कमाल कर दिखाया।
‘27 डाउन’ को मिले दो नेशनल अवॉर्ड किसी चमत्कार से कम नहीं थे। लेकिन इसी बीच एक मनहूस दिन ने सब कुछ बदल दिया। बताया जाता है कि मुंबई के समुद्र किनारे किसी को डूबने से बचाने की कोशिश में अवतार कृष्ण कौल खुद लहरों की चपेट में आ गए और उनकी जान चली गई।
दर्दनाक बात तो यह है कि जिस दिन उनकी मृत्यु हुई, उसी दिन उनके नाम नेशनल अवॉर्ड का ऐलान हुआ था। वह अपनी सबसे बड़ी सफलता को देखते भी नहीं पाए। सिर्फ 34 साल की उम्र में उनका अंत हो गया।
अवतार कृष्ण कौल भले ही सिर्फ एक फिल्म बनाकर चले गए, लेकिन उनकी यह एक ही रचना भारतीय सिनेमा की विरासत में अमर हो चुकी है। उन्होंने दुनिया को एक ऐसी फिल्म दी, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा — एक ऐसा तोहफा जिसे समय भी मिटा नहीं सकता।