भारतीय क्रिकेट टीम की हालिया फॉर्म पर ये क्या बोल गए रोहित शर्मा, जानकर फैंस भी होंगे हैरान!
मुंबई इंडियंस टीम IPL 2026 के अपने आखिरी लीग मुकाबले में 24 मई को राजस्थान रॉयल्स से भिड़ेगी। यह सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि सीजन के सबसे खास दिनों में से एक ESA डे भी है, जो सपनों, उम्मीद और खेल के खूबसूरत रिश्ते का जश्न मनाता है।
फैंस के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं, जहां उन्हें अपने आइडल क्रिकेटरों को सामने मैदान में खेलते देखने का सुनहरा मौका मिलने वाला है। इस बड़े मुकाबले से पहले मुंबई के बादशाह रोहित शर्मा एमआई चर्चा में नजर आए, जहां उन्होंने दिल छू लेने वाली बातें कीं और अपनी प्यारी मुस्कान से सभी का दिल जीत लिया।
ESA डे पर होने वाले इस खास आयोजन में वानखेड़े स्टेडियम 20,000 से ज्यादा बच्चों की खुशियों से गूंज उठेगा। इसी को लेकर रोहित ने कहा कि हम बखूबी समझते हैं कि यह मैच उन नन्हें दर्शकों के लिए कितना कीमती है, जो दूर-दूर से सिर्फ हमें चीयर करने आते हैं। टीम के हर खिलाड़ी के लिए यह मुकाबला खास मायने रखता है।
इन बच्चों के सामने खेलना एक अनोखा एहसास है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। हम निश्चित रूप से चाहते हैं कि मैच का नतीजा हमारे पक्ष में जाए ताकि ये नन्हें चेहरे मुस्कुराते हुए घर लौटें, लेकिन यह मुकाबला जीत-हार से कहीं आगे है।
हम जानते हैं कि ये बच्चे पूरे साल कितनी चुनौतियों से गुज़रते हैं और उनके लिए अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को लाइव खेलते देखना कितना बड़ा पल होता है। हमारा दायित्व है कि हम उन्हें ऐसा अनुभव दें, जिसे वे जिंदगीभर याद रखें और हर लम्हा खुशी से भर जाए।
अपने सफर की शुरुआत से लेकर दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट सितारों में शामिल होने तक की कहानी को याद करते हुए रोहित ने उन युवा बच्चों के लिए खास संदेश भी दिया, जो अपने सपनों की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। जब पूछा गया कि सफलता के लिए सबसे जरूरी क्या है—टैलेंट, अनुशासन, धैर्य या खुद पर विश्वास—तो रोहित ने बेहद सरल और दिल से जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि हर उम्र का दौर अलग होता है। यहां 6 से 18 साल के बच्चे आते हैं और इतनी कम उम्र में उन पर दबाव डालना सही नहीं। उन्हें बस खेल का मजा लेना चाहिए, दोस्तों के साथ खेलना चाहिए और खेल को महसूस करना चाहिए। मेरा सफर भी इसी तरह शुरू हुआ था—बिना दबाव, सिर्फ जुनून और मजे के साथ।
उन्होंने आगे बताया कि वक्त और परिस्थितियां आपको खुद सिखाती हैं कि किस मोड़ पर क्या जरूरी है। जिस खेल से प्यार है, उसे दिल से खेलिए… किसी की मजबूरी में नहीं। खेल की असली खूबसूरती उसमें छिपी आजादी में है।
क्रिकेट के बदलते चेहरों पर बात करते हुए रोहित ने कहा कि जब हमने खेलना शुरू किया था, तब 130-140 का स्कोर काफी माना जाता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज कोई भी टोटल सुरक्षित नहीं लगता और यही बताता है कि खेल कितनी तेजी से बदल रहा है।
खिलाड़ी अब ज्यादा बहादुर और निडर हो चुके हैं। पहले जहां सुरक्षित खेलना ही तरीका था, वहीं अब खिलाड़ी जोखिम लेने से नहीं घबराते। आने वाले सालों में यह खेल और भी ऊंचाइयों तक जाएगा।
लगभग दो दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को याद करते हुए रोहित ने कहा कि इस खेल ने उन्हें जिंदगी के अनगिनत सबक दिए हैं।
उन्होंने बताया कि डेब्यू से लेकर आज तक कई उतार-चढ़ाव आए, जिनसे उन्होंने सीखा कि आगे बढ़ने के लिए क्या जरूरी है। हर सफर आसान नहीं होता। ऊंचाइयों के साथ-साथ मुश्किल दौर भी आते हैं और असली सीख वहीं मिलती है।
भारत और मुंबई इंडियंस की कप्तानी से मिली सीख पर रोहित ने बताया कि कप्तानी ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। कप्तान बनने पर सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि पूरी टीम की चिंता करनी होती है।
अगर आपने शतक भी लगा दिया हो, लेकिन टीम हार जाए तो वह दर्द अंदर तक खलता है। जब तक टीम जीत हासिल न करे, कप्तान का मन शांत नहीं होता—यह जिम्मेदारी दिल और दिमाग दोनों पर असर डालती है।
रोहित ने यह भी कहा कि क्रिकेट ने उन्हें इंसान के तौर पर भी गढ़ा है और आज जो कुछ वो हैं, उसमें इस खेल का सबसे बड़ा योगदान है।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि भारत विश्व क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे। वह चाहते हैं कि हर क्षेत्र में भारत चमके और क्रिकेट हमेशा उसकी पहचान बने।
पिछले तीन सालों में भारत ने जो हासिल किया है—2024 वर्ल्ड कप, विमेंस वर्ल्ड कप, अंडर-19 वर्ल्ड कप, ICC चैंपियंस ट्रॉफी और एक और T20 वर्ल्ड कप—वह किसी सुनहरे अध्याय से कम नहीं।