ईरान युद्ध की आहट के बीच बड़ा सवाल: क्या पाकिस्तान कूदेगा जंग में? सऊदी की घबराहट, मुनीर संग तेहरान पर बड़ी रणनीति

अमेरिका-इजरायल और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब भी सीधे निशाने पर आ गया है. सऊदी ऑयल फील्ड पर ड्रोन हमल हो रहे हैं. इस बीच सऊदी रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अहम बैठक हुई. इसमें ईरान के हमलों को रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की गई, जिससे पाकिस्तान की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

Mar 7, 2026 - 11:35
ईरान युद्ध की आहट के बीच बड़ा सवाल: क्या पाकिस्तान कूदेगा जंग में? सऊदी की घबराहट, मुनीर संग तेहरान पर बड़ी रणनीति

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान का गुस्सा अब खाड़ी देशों पर फट पड़ा है, खासकर उन मुल्कों पर जो वॉशिंगटन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. शुरुआत में ईरान केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा था, लेकिन ताजा हालात ने दुनिया को चौंका दिया है—अब सऊदी अरब के तेल कुओं तक को टारगेट किया जा रहा है. इसी तनाव के बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मुलाकात ने भू-राजनीतिक समीकरणों में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पाकिस्तान भी ईरान के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरेगा?

रियाद में हुई ये मुलाकात सिर्फ कूटनीति की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि दोनों देशों के बीच मौजूद सामरिक रक्षा समझौते के तहत बेहद अहम बातचीत हुई. ईरान के बढ़ते हमलों को रोकने, सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और आने वाली चुनौतियों का सामना करने को लेकर इस मीटिंग में गहन चर्चा की गई. इस बैठक ने साफ कर दिया कि हालात पहले ही बेहद गंभीर हो चुके हैं और अब किसी भी पल बड़ा फैसला सामने आ सकता है.

सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके पुष्टि की कि बातचीत का केंद्र बिंदु ईरान के हमले और उन्हें रोकने के जरूरी कदम थे. उन्होंने कहा कि यह चर्चा ‘ज्वाइंट स्ट्रैटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट’ के तहत हुई है और इस तरह की कार्रवाई पूरे क्षेत्र की स्थिरता को हिला देती है. इस बयान ने संकेत दे दिया कि सऊदी अब किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं ले रहा और पाकिस्तान का रोल अब पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गया है.

सऊदी के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर धावा, तनाव चरम पर

हालिया हमलों ने खाड़ी क्षेत्र को हिला कर रख दिया है. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने छह ड्रोन मार गिराए, जो सीधे शायबा ऑयल फील्ड की ओर बढ़ रहे थे—यह वही विशाल तेल क्षेत्र है जो यूएई की सीमा से सटा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, चार अलग-अलग अटैक वेव में कुल 16 ड्रोन दागे गए थे, जिन्हें रेगिस्तान में इंटरसेप्ट किया गया. इसके बाद दो बैलिस्टिक मिसाइलें भी लॉन्च की गईं, लेकिन उन्हें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास ही तबाह कर दिया गया.

ये पहला मौका है जब ईरान ने सीधे सऊदी के तेल भंडारों को निशाना बनाया है. 2019 में जरूर इसी क्षेत्र पर हमला हुआ था, लेकिन तब हमलावर हूती विद्रोही थे—ईरान की सीधी कार्रवाई नहीं. अब जबकि हमला ईरान की ओर से हुआ है, खतरे का स्तर कई गुना बढ़ चुका है. हालांकि ड्रोन किस दिशा से आए, इस पर आधिकारिक जानकारी अभी तक जारी नहीं की गई है.

المتحدث الرسمي لـ #وزارة_الدفاع: اعتراض وتدمير 4 مسيّرات في الربع الخالي متجهة إلى حقل شيبة. pic.twitter.com/dWdDaGgcTv

ईरान-सऊदी तनाव में पाकिस्तान की नई भूमिका

इस तेजी से बदलते हालात में पाकिस्तान भी अब अपने पत्ते खुलकर खेलता दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में बड़ा दावा किया कि सऊदी पर ईरान की कम प्रतिक्रिया के पीछे पाकिस्तानी कूटनीति का हाथ है. उन्होंने कहा कि अपने रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने ईरान को चेतावनी दी कि वह सऊदी के खिलाफ हमले बढ़ाने से पहले इस समझौते को ध्यान में रखे.

इशाक डार के मुताबिक, ईरान ने यह आश्वासन मांग लिया था कि सऊदी की जमीन पाकिस्तान की तरफ से उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी, और पाकिस्तान ने यह भरोसा दे भी दिया. यह बयान बताता है कि पाकिस्तान अब सिर्फ मध्यस्थ नहीं, बल्कि इस पूरे विवाद में एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है.

क्या अब युद्ध का दायरा और बढ़ेगा?

अब तक खाड़ी देश सीधे इस तनाव में शामिल नहीं थे, और अमेरिका ने भी इन देशों की जमीन का उपयोग अपने हमलों के लिए नहीं किया. लेकिन अगर ईरान के हमले इसी तरह बढ़ते रहे और सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो गया तो पूरा क्षेत्र एक बड़े भू-रणनीतिक टकराव में फंस सकता है. यह संघर्ष सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दक्षिण एशिया तक इसका असर पहुंचेगा—जहां पाकिस्तान और ईरान की लंबी साझा सीमा है.

फिलहाल पाकिस्तान ने कूटनीति के जरिए हालात शांत करने की कोशिश की है, लेकिन यदि ईरान ने सऊदी पर बड़े पैमाने पर हमले जारी रखे, तो रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव बढ़ना तय है. आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, यह पूरी दुनिया की नजर में सबसे बड़ा सवाल है.