बुलडोजर, सियासत और खून-खराबा—फैज-ए-इलाही मस्जिद से तुर्कमान गेट तक आखिर हुआ क्या? पूरी इनसाइड स्टोरी

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुई हिंसा के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है. कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थरबाजी हुई थी. अब इस मामले में पुलिस ने 30 पत्थरबाजों की पहचान कर ली है. फिलहाल इलाका शांत है.

Jan 8, 2026 - 11:44
बुलडोजर, सियासत और खून-खराबा—फैज-ए-इलाही मस्जिद से तुर्कमान गेट तक आखिर हुआ क्या? पूरी इनसाइड स्टोरी

12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट की एक बेंच ने एक बड़ा और सख्त आदेश जारी किया, जिसने पूरे शहर में हलचल मचा दी. कोर्ट ने स्पष्ट हिदायत दी कि तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान में फैले अवैध कब्जों को तुरंत हटाया जाए. ये कोई छोटी जमीन नहीं थी—पूरे 38,940 स्क्वायर फीट इलाके पर फैला यह अतिक्रमण सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर तक पहुंच चुका था. अदालत ने इसे साफ करने के लिए तीन महीने की समयसीमा निर्धारित कर दी.

MCD ने आदेश मिलते ही प्रक्रिया शुरू की और सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया. 24 नवंबर और 16 दिसंबर 2025 को दो चरणों में पर्सनल हियरिंग हुई, जिसमें मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी से लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड, DDA, L&DO और रेवेन्यू विभाग तक के अधिकारी मौजूद रहे. इन बैठकों के बाद 22 दिसंबर को MCD ने अंतिम फैसला लिया कि अब अतिक्रमण हर हाल में हटाया जाएगा.

फिर 7 जनवरी 2026 की आधी रात—एक ऐसा वक्त जब शहर सो रहा था—MCD ने अचानक डेमोलिशन ड्राइव शुरू कर दी. दूसरी तरफ, मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी इस कार्रवाई के खिलाफ पहले ही हाईकोर्ट पहुंच चुकी थी. कोर्ट ने MCD, DDA, शहरी विकास मंत्रालय, L&DO और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है. इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी.

हिंसा के दौरान क्या हुआ?

जब MCD के 17 बुलडोज़र देर रात मौके पर पहुंचे, तो माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. कुछ ही घंटों में 2,000 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई और नारेबाजी शुरू हो गई. धीरे-धीरे यह भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पत्थर फेंकने लगी. पुलिस ने 30 लोगों की पहचान की है, जिनमें कई ने अपना चेहरा मास्क या तौलिये से छुपा रखा था.

उपद्रव में कम से कम 5 पुलिसकर्मी घायल हुए—हेड कॉन्स्टेबल जय सिंह, कॉन्स्टेबल विक्रम, रवींद्र, संदीप और एक SHO. कॉन्स्टेबल विक्रम के सिर पर गंभीर चोट दर्ज की गई. जब हालात काबू से बाहर होने लगे, तो पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में—करीब 4 से 5 दर्जन—आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को पीछे धकेला.

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई को वक्फ की संपत्ति पर प्रहार बताया और कहा कि वक्फ को इस केस में पार्टी ही नहीं बनाया गया. उनका कहना है कि कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया था, लेकिन वक्फ बोर्ड की गजट नोटिफिकेशन को अदालत के सामने पेश नहीं किया गया. उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड और मैनेजमेंट कमेटी को सुप्रीम कोर्ट जाकर स्टेटस क्वो की मांग करने की सलाह दी.

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन इतने गंभीर सामाजिक मुद्दे पर कार्रवाई से पहले बातचीत जरूरी थी. उन्होंने ठंड के मौसम का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे वक्त में लोगों को परेशान करना किसी भी तरह उचित नहीं था.

केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने इस डेमोलिशन ड्राइव को बेहद चिंताजनक बताया और इसे आपातकाल के काले दिनों की याद दिलाने वाला कदम कहा, जिसने सोशल मीडिया पर बहस तेज कर दी.

पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने कांस्टेबल संदीप के बयान पर चांदनी महल थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. केस दंगा फैलाने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और ड्यूटी में बाधा डालने की धाराओं में दर्ज हुआ है. सेंट्रल दिल्ली के पुलिस कमिश्नर मधुर वर्मा ने बताया कि 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कुल 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

पुलिस ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष SIT गठित की है, जो अब तक करीब 50 संदिग्धों की पहचान कर चुकी है. एक टीम पत्थरबाजों को पहचानने और पकड़ने में जुटी है, जबकि दूसरी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और भड़काऊ कंटेंट की जांच कर रही है. CCTV फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग की मदद से उपद्रवियों को तलाशा जा रहा है, वहीं इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है.