क्या तारिक रहमान बनने जा रहे हैं बांग्लादेश के नए PM? भारत पर BNP का बड़ा बयान, शेख हसीना खेमे में मचा घमासान!

बांग्लादेश में 12 फरवरी को नई सरकार के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिसमें तारिक रहमान की बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच कड़ा मुकाबला है। जुलाई-अगस्त 2024 के हिंसक आंदोलन के बाद यह पहला चुनाव है। भारत इन परिणामों पर करीब से नजर रख रहा है, क्योंकि यह भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत किसी भी नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाएगा।

Feb 12, 2026 - 11:05
क्या तारिक रहमान बनने जा रहे हैं बांग्लादेश के नए PM? भारत पर BNP का बड़ा बयान, शेख हसीना खेमे में मचा घमासान!

12 फरवरी बांग्लादेश के इतिहास में एक ऐसा दिन बनने वाला है, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। सत्ता से शेख हसीना की विदाई और जुलाई–अगस्त 2024 के उथल–पुथल भरे विरोध प्रदर्शनों के बाद पहली बार जनता अपने नए नेता का चुनाव करने जा रही है। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि वह फैसला है जो आने वाले समय में बांग्लादेश की दिशा और दशा दोनों तय करेगा।

राजनीतिक तस्वीर पर नजर डालें तो तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को शुरुआती बढ़त मिलती दिख रही है। लेकिन माहौल पूरी तरह अनिश्चित है, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी अपने मजबूत जनाधार की वजह से बड़ा राजनीतिक धमाका कर सकती है। कई सर्वेक्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि बीएनपी और जमात के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का होने वाला है।

भारत भी इस चुनाव पर पूरे ध्यान के साथ नजर टिकाए बैठा है। वजह साफ है—सत्ता में कौन आता है, इसका सीधा असर भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा, पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता और पूरे क्षेत्र के भू-राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम बन गया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ढाका में आने वाली किसी भी सरकार के साथ सहयोग और रिश्तों को मजबूती देने की नीति जारी रहेगी, ठीक उसी तरह जैसे शेख हसीना के समय में था। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अब तक बीएनपी या जमात—दोनों की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वे भारत के साथ संबंधों की अपनी रणनीति को कमजोर करने का इरादा रखते हों।

बीएनपी की संभावित वापसी के साथ चीन और अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी भी इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना देती है। भारत के आर्थिक व सामरिक हितों के बीच यह चुनाव दक्षिण एशिया की राजनीति का एक नया अध्याय खोल सकता है। यही कारण है कि जहां ढाका की जनता परिणाम को लेकर बेचैन है, वहीं नई दिल्ली में भी उत्सुकता का माहौल किसी भी तरह कम नहीं है।