लोकसभा बना रणक्षेत्र, चेयर पर पेपर उछालने पर 8 सांसदों पर बड़ी कार्रवाई
संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में उस वक्त भारी हंगामा हो गया जब विपक्षी सांसदों ने चेयर की ओर कागज उछाले. इस अमर्यादित आचरण के बाद स्पीकर ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मणिकम टैगौर और गुरजीत औजला समेत 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया है.
लोकसभा में मंगलवार का दिन तब अचानक तनाव से भर गया जब विपक्ष के आठ सांसदों ने पीठासीन अधिकारी की ओर कागज फेंक दिए। इस अभूतपूर्व कदम के बाद सदन में भारी शोर-शराबा शुरू हो गया और हालात बिगड़ते देख स्पीकर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी आठों सांसदों को पूरे बजट सत्र से निलंबित कर दिया। इनमें सात कांग्रेस सांसद और CPI(M) के एक सांसद शामिल हैं, जिससे विपक्ष और भी भड़क उठा।
घटना के बाद सदन का माहौल इतना गर्म हो गया कि कार्यवाही को बार-बार रोकना पड़ा। दोपहर बाद जब चर्चा चल रही थी, तभी विपक्षी सदस्य अचानक वेल की ओर बढ़े और जोरदार नारेबाजी के बीच पेपर फेंकने लगे। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख कार्यवाही पहले तीन बजे तक स्थगित की गई, लेकिन हंगामा शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
स्पीकर ने दिखाई सख्ती, ध्वनिमत से पारित हुआ प्रस्ताव
तीन बजे जब चौथी बार सदन की कार्यवाही शुरू की गई, तो पीठासीन अधिकारी ने अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पेपर उछालने वाले सभी सांसदों को बाकी सत्र से निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। आश्चर्य की बात यह रही कि सदन ने इसे ध्वनिमत से तुरंत मंजूरी दे दी और फैसला लागू कर दिया गया।
इन आठ सांसदों पर गिरी गाज
संसदीय नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मणिकम टैगोर, गुरजीत औजला, राजा वडिंग, हिबी ईडन, किरण रेड्डी, प्रशांत पोडोले, वेंकट रमन और डीन कुरियोकोज को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। प्रस्ताव पारित होने के बाद भी विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए और चेयर की ओर फिर से कागज फेंककर विरोध जताया, जिससे माहौल और बिगड़ गया।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अपमान कर रहा है। निलंबित सांसदों ने सदन से बाहर निकलते ही संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने धरना शुरू कर दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इसी बीच राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी विरोध में शामिल हो गए, जिसके बाद संसद परिसर में माहौल और उग्र हो गया। विपक्ष का साफ कहना है कि सरकार असहमति की आवाज को कुचलना चाहती है और निलंबन इसी रणनीति का हिस्सा है।