HeroF-2’ ने हिला दिया पाकिस्तान! BLA अटैक से दहशत, अमेरिका–चीन के लिए भी बजने लगी खतरे की घंटी

बलूचिस्तान में BLA के दशकों के सबसे बड़े हमले ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका और चीन को भी चेताया है. विदेशी निवेश, CPEC और खनिज संसाधनों का दोहन BLA के विद्रोह की मुख्य वजह बन रहे हैं. बढ़ते हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं.

Feb 2, 2026 - 10:34
HeroF-2’ ने हिला दिया पाकिस्तान! BLA अटैक से दहशत, अमेरिका–चीन के लिए भी बजने लगी खतरे की घंटी

पाकिस्तान के अशांत और बार-बार उथल-पुथल से जूझते बलूचिस्तान में शनिवार को ऐसा कहर टूटा, जिसे पिछले कई दशकों में सबसे भयावह हमला बताया जा रहा है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी BLA ने अलग-अलग जिलों में एक साथ आत्मघाती धमाकों और ताबड़तोड़ गोलीबारी की बौछार कर पूरे प्रांत को दहशत में डाल दिया.

BLA ने इस बड़े ऑपरेशन को ‘हेरोफ-2’ यानी काला तूफान नाम दिया, और सच में पूरा प्रांत कुछ घंटों के भीतर आग और खून का मैदान बन गया. हमले इतने संगठित और व्यापक थे कि इसमें आम नागरिक, पुलिस चौकियां, सेना और अर्धसैनिक ठिकानों तक किसी को नहीं छोड़ा गया. हिंसा की यह लहर बलूचिस्तान के इतिहास की सबसे खतरनाक घटनाओं में शामिल हो गई.

इस हमले ने न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा को झकझोर दिया, बल्कि अमेरिका और चीन तक में चिंता की लहर दौड़ा दी है. यह इलाका प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा और कीमती खनिजों से भरा है, और इसी वजह से पाकिस्तान, चीन CPEC और अब अमेरिका—तीनों की नजरें यहां के संसाधनों पर टिकी हैं. लेकिन यही बात स्थानीय विद्रोहियों के आक्रोश को और भड़काती है.

विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने हमलों को वैश्विक चेतावनी बताते हुए लिखा कि बलूचिस्तान में यह हिंसा उन देशों के लिए सीधी चुनौती है, खासकर अमेरिका के लिए, जो यहां के कीमती खनिजों में भारी निवेश करने की तैयारी में है. BLA की मूल शिकायत यही है कि बाहरी ताकतें संसाधनों को लूटती हैं, लेकिन स्थानीय लोग गरीबी में ही दफन रह जाते हैं.

‘काला तूफान’ की भयावह पटकथा

बलूची साहित्य से लिया गया नाम ‘हेरोफ-2’ अपने पूरे अर्थ को साबित करता दिखा. 2024 के ‘हेरोफ-1’ की तुलना में यह हमला कई गुना बड़ा, हिंसक और अधिक संगठित था. सुरक्षात्मक सूत्रों के अनुसार, क्वेटा, मस्तुंग, ग्वादर, पंजगुर, केच, कलात और नुश्की सहित 15 से ज्यादा इलाकों में एक साथ धमाके, गोलीबारी और आत्मघाती हमले किए गए.

क्वेटा में पुलिस थानों और मोबाइल यूनिट्स पर गोलियों की बरसात कर दी गई. मस्तुंग सेंट्रल जेल से करीब 30 कैदियों को छुड़ाकर भाग निकाला गया, जबकि ग्वादर में मजदूरों के कैंप पर हमला इतना भीषण था कि महिलाओं और बच्चों सहित 11 लोगों की मौके पर मौत हो गई. पूरे प्रदेश में अफरा-तफरी मची रही.

खुफिया सूत्रों ने बताया कि इस हमले में 800 से 1000 BLA लड़ाके शामिल थे, जिनमें कई महिलाएं भी थीं. मरने वालों की संख्या अलग-अलग दावों में अलग दिखाई दे रही है—सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 नागरिक और 17 जवान मारे गए, जबकि सेना ने 145 विद्रोहियों को ढेर करने का दावा किया. दूसरी ओर, BLA ने पलटकर कहा कि उनके केवल 7 लड़ाके मारे गए और 84 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी ढेर हुए.

रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्वादर में मजदूरों के जिस कैंप पर हमला हुआ था, वहां परिवार सहित काम कर रहे लोग निशाने पर थे. कलात में डिप्टी कमिश्नर ऑफिस और पुलिस लाइंस के पास भीषण झड़पें हुईं, जबकि नुश्की में डिप्टी कमिश्नर हुसैन हजारा और उनके परिवार को जबरन उठा लिया गया.

पसनी में कोस्ट गार्ड पोस्ट पर हमला, बोलन और लक पास में हथियारबंद घेराबंदी, किला सैफुल्लाह-रखनी में हाईवे बंद और नसीराबाद में रेलवे लाइन पर लगाए गए बम निष्क्रिय किए गए—पूरे प्रांत में मानो युद्ध का माहौल बन गया.

बलूचिस्तान की अहमियत आखिर इतनी क्यों?

पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है. यह ईरान और अफगानिस्तान से सटा है और अरब सागर तक सीधी पहुंच रखता है. यहां स्थित ग्वादर पोर्ट CPEC का केंद्र है, जिसे चीन अपनी ऊर्जा और व्यापारिक जरूरतों के लिए जीवनरेखा मानता है.

सूई गैस फील्ड और रेको दिक जैसे इलाके पाकिस्तान और विदेशी निवेशकों के लिए सोने की खान साबित हो सकते हैं. अमेरिका ने हाल ही में रेको दिक में 1.25 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. चीन पहले ही CPEC को अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का सबसे कीमती हिस्सा मान रहा है.

लेकिन यही विदेशी दखल BLA को सबसे ज्यादा चुभता है. संगठन का कहना है कि बलूचिस्तान की धरती से निकला सोना, गैस और खनिज बाहर वालों की झोली में चला जाता है, जबकि स्थानीय लोग दशकों से गरीबी और उपेक्षा झेल रहे हैं.

सुरक्षा एजेंसियों की सबसे कठिन चुनौती

1948 से चल रहा बलूच विद्रोह अब अपने सबसे उग्र और संगठित रूप में दिख रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बड़े आर्थिक हित सीधे BLA जैसी संगठनों से टकरा चुके हैं. 2023 और 2024 में चीनी इंजीनियरों पर लगातार हमले इसका साफ प्रमाण हैं.

माहिरों की मानें तो विदेशी निवेश, स्थानीय असंतोष और राजनीतिक उपेक्षा एक ऐसा विस्फोटक मिश्रण बन चुके हैं, जिसे बिना बड़े सुधारों के शांत करना लगभग असंभव है—और यही संकट आने वाले समय में वाशिंगटन और बीजिंग की सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है.