‘घूसखोर पंडित’ टाइटल विवाद पर योगी सरकार सख़्त! एक्शन के बीच नीरज पांडे ने तोड़ी चुप्पी, लिया बड़ा फैसला
फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल को लेकर विवाद जारी है. पंडित और ब्राह्मण समाज के लोग विरोध कर रहे हैं. फिल्ममेकर नीरज पांडे ने स्पष्ट किया है कि ये एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और किसी जाति या समुदाय का अपमान नहीं करता. उधर यूपी सरकार भी मूवी के खिलाफ सख्त हो गई है.
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का शीर्षक इन दिनों जबरदस्त बवाल का कारण बना हुआ है। रिलीज से पहले ही यह मूवी भारी विरोध और कानूनी पचड़ों में फंस गई है। कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरकर टाइटल बदलने की मांग कर रहे हैं। ब्राह्मण और पंडित समाज के लोग इसे अपनी आस्था पर चोट बताकर फिल्म को बैन करने तक की मांग उठा रहे हैं। देखते ही देखते मामला एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल गया है।
नीरज पांडे का बड़ा बयान
बढ़ते विरोध के बीच आखिरकार लेखक नीरज पांडे सामने आए और उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट जारी किया। नीरज ने साफ कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ पूरी तरह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें इस्तेमाल किया गया ‘पंडत’ शब्द किसी जाति या समुदाय से जुड़ा नहीं है। यह सिर्फ एक किरदार का संवाद-आधारित नाम है, जो कहानी की जरूरत के हिसाब से रखा गया है। उन्होंने दोहराया कि फिल्म किसी खास समूह पर टिप्पणी नहीं करती और इसका फोकस सिर्फ एक इंसान के फैसलों और उसके किए गए कामों पर है।
नीरज ने आगे कहा कि एक जिम्मेदार फिल्ममेकर के तौर पर वे हमेशा ऐसी कहानियां पेश करते हैं जो समाज को सोचने पर मजबूर करें। उन्होंने लिखा कि पिछली फिल्मों की तरह इस फिल्म को भी ईमानदारी से बनाया गया है ताकि दर्शक पूरी तरह एंटरटेन हो सकें। नीरज का कहना है कि उनका मकसद किसी भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि एक दमदार कहानी सामने लाना है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म के टाइटल ने कुछ लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया है, और इसे ध्यान में रखते हुए टीम ने फिलहाल प्रमोशनल एक्टिविटीज रोकने का फैसला लिया है। नीरज ने अपील की कि लोग फिल्म को पूरे रूप में देखें, उसके संदर्भ को समझें और कुछ सेकंड की झलक देखकर उसे जज न करें। उन्होंने बताया कि वे बहुत जल्द फिल्म दर्शकों के सामने लाने के लिए उत्साहित हैं।
यूपी सरकार का बड़ा कदम
विवाद बढ़ते ही यूपी सरकार भी हरकत में आ गई और फिल्म के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के आदेश दिए। हजरतगंज थाने में डायरेक्टर रितेश शाह और उनकी टीम पर केस दर्ज किया गया है, जिसमें आरोप है कि फिल्म समाज में सौहार्द बिगाड़ सकती है। इसी बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी नोटिस जारी करते हुए सूचना प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। आयोग का कहना है कि ऐसे टाइटल किसी समुदाय को निशाना बनाते हैं और उन्हें अपमानित करने का काम करते हैं। यहां तक दावा किया गया है कि यह शीर्षक बिना उचित रजिस्ट्रेशन के इस्तेमाल किया गया है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट इंस्पेक्टर अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे जिंदगी एक आखिरी मौका देती है अपनी गलतियों को सुधारने का। उनके साथ नुसरत भरुचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेराय, कीकू शारदा और श्रद्धा दास जैसे कलाकार अहम किरदारों में दिखेंगे। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है और रिलीज से पहले ही सुर्खियों के केंद्र में पहुंच चुकी है।