‘ब्राह्मण होना योग्यता नहीं!’ संघ प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, किसी भी जाति का व्यक्ति बन सकता है प्रमुख
मुंबई में आयोजित RSS की व्याख्यानमाला में सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन की फंडिंग, जाति व्यवस्था, भाषा विवाद, घर वापसी और अवैध प्रवासियों जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है और सभी जातियों के लिए काम करता है. कार्यक्रम में कई चर्चित हस्तियां भी मौजूद रहीं.
मुंबई में चल रही ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ के दूसरे दिन माहौल तब और गर्मा गया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंच से कई बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ में किसी भी जाति का व्यक्ति शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है। न तो अनुसूचित जाति या जनजाति होना रुकावट है, और न ही ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता। भागवत ने बताया कि शुरुआती दौर में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन आज संघ हर वर्ग और हर समुदाय के लिए काम कर रहा है।
कार्यक्रम में भागवत ने आरएसएस की फंडिंग को लेकर वर्षों से उठते सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लोगों में जिज्ञासा रहती है कि संघ को पैसा कहां से मिलता है, जबकि सच यह है कि संगठन अपने स्वयंसेवकों के सहयोग और सादगीपूर्ण परंपराओं से चलता है। यात्रा के दौरान कार्यकर्ता बाहर खर्च करने के बजाय स्वयंसेवकों के घर रुकते हैं और वही भोजन करते हैं, जिससे संगठन का ढांचा मजबूत और आत्मनिर्भर बना रहता है।
‘100 Years of Sangh Journey – New Horizons’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में संघ की कार्यशैली से लेकर जाति व्यवस्था, भाषा विवाद, धर्मांतरण और अवैध प्रवासियों जैसे संवेदनशील विषयों पर गहन चर्चा हुई। भागवत ने कहा कि अंग्रेजी भाषा से किसी तरह की दुश्मनी नहीं है, लेकिन जहां संभव हो, मातृभाषा या हिंदी का उपयोग करना ही भारतीय आत्मा के करीब ले जाता है।
मुस्लिम बहुल इलाकों में काम करने की चुनौतियों पर बोलते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अपशब्दों या उकसावे पर प्रतिक्रिया देने से टकराव बढ़ता है, इसलिए संयम ही बेहतर रास्ता है। भाषा विवाद पर उन्होंने साफ कहा कि यह “स्थानीय बीमारी” है, जिसे फैलने से रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।
घर वापसी पर भागवत ने दोटूक कहा कि अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन जहां जबरन धर्मांतरण हुआ है, वहां लोगों को उनकी इच्छा के अनुसार वापस लाना जरूरी है। उन्होंने नारायण वामनराव का उदाहरण देते हुए बताया कि वे ईसाई बने और उनकी पसंद का सम्मान किया गया, लेकिन जिनकी मर्जी के खिलाफ धर्म बदला गया, उन्हें पूरी गरिमा के साथ वापस लाया जाना चाहिए।
अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाए, ताकि देश की जनसंख्या और संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवसाय का अवसर हमेशा भारतीयों को मिलना चाहिए, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।
कार्यक्रम में फिल्मी दुनिया और प्रशासनिक सेवा की कई जानी-मानी हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें अनन्या पांडे, करण जौहर, जैकी श्रॉफ, वरिष्ठ IAS अधिकारी मिलिंद म्हैस्कर और मनीषा म्हैस्कर शामिल थे। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह आयोजन बेहद खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है।