जेल से सरकार चलाएंगे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री? JPC की बैठक में हुआ ऐसा क्या कि मच गया हंगामा!

संयुक्त संसदीय समिति JPC ने 7 जनवरी को एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें जेल से सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों से संबंधित तीन विधेयकों पर चर्चा हुई। समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि कुछ राजनीतिक दलों ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने जोर दिया कि जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र के लिए अपमानजनक है, जबकि मोदी सरकार कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहती है।

Jan 8, 2026 - 11:42
जेल से सरकार चलाएंगे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री? JPC की बैठक में हुआ ऐसा क्या कि मच गया हंगामा!

बुधवार, 7 जनवरी को हुई संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बेहद महत्वपूर्ण बैठक ने पूरे राजनीतिक माहौल में गर्मी बढ़ा दी। 31 सदस्यों वाली यह समिति अपनी तीसरी बैठक में ऐसे तीन बड़े विधेयकों पर चर्चा के लिए बैठी, जो उन प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की सत्ता पर सीधा असर डालते हैं, जो जेल में रहते हुए भी सरकार चलाने की कोशिश करते हैं।

करीब तीन घंटे चली इस बैठक में जेपीसी ने 130वां संविधान संशोधन विधेयक 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 को बारीकी से खंगाला। ये प्रस्ताव आने वाले समय में भारतीय राजनीति का पूरा चेहरा बदल सकते हैं।

बैठक के बाद समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कुछ राजनीतिक दलों को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया। यह रवैया खुद में कई सवाल खड़े करता है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

सारंगी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी सरकार कानून की सीमाओं में रहकर काम करना चाहती है, जबकि कुछ दल ऐसे हैं जो कानूनी दायरे से बाहर जाकर सत्ता चलाने का सपना देखते हैं। उन्होंने दो टूक कहा—जेल से सरकार चलाने की कोशिश लोकतंत्र का अनादर है और देश के लिए बेहद शर्मनाक।

बैठक के दौरान विपक्षी दल के एक सांसद ने जोर देकर कहा कि इन विधेयकों पर विपक्ष की राय भी अनिवार्य रूप से सुनी जानी चाहिए, ताकि ये कानून एकतरफा न बनें और लोकतंत्र मजबूत हो।

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2025 में इन तीनों विधेयकों को लोकसभा में पेश किया था। प्रस्तावों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी केंद्रीय/राज्य मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है और 30 दिनों तक हिरासत में बना रहता है, तो 31वें दिन उसकी कुर्सी स्वतः छिन जाएगी—चाहे वह इस्तीफा दे या न दे। यह नियम सत्ता के गलियारों में बड़ा भूचाल ला सकता है।