ईरान में सरकार की सख़्ती, सड़कें बनीं जंग का मैदान! हिंसक झड़पें तेज़, दुनिया भर में असर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वो ईरान के लोगों की मदद के लिए तैयार हैं. ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के 14 दिन हो चुके हैं. इस प्रदर्शन में हिंसा लगातार बढ़ रही है.

Jan 12, 2026 - 12:02
ईरान में सरकार की सख़्ती, सड़कें बनीं जंग का मैदान! हिंसक झड़पें तेज़, दुनिया भर में असर

ईरान में पिछले तीन दिनों से चल रही कड़ी कार्रवाई के बावजूद जनविरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को देशभर की सड़कों पर गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा और हजारों लोग खुलेआम सरकार के खिलाफ नारे लगाते दिखे।

चश्मदीदों के बयान बताते हैं कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दमन की रफ्तार तेज़ कर दी है। हालात बेकाबू होते देख प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं लगभग ठप कर दी हैं, जिससे देश की असल तस्वीर दुनिया तक पहुंच ही नहीं पा रही।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार का इंटरनेट ब्लैकआउट पिछले बड़े विद्रोह के मुकाबले कहीं ज़्यादा गंभीर है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पहुंच सीमित होने के कारण ईरान के अंदर हो रही घटनाओं का सही आकलन बेहद मुश्किल हो गया है।

लगातार 14 दिनों से उबल रहे इन प्रदर्शनों में हिंसा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर आम नागरिक और प्रदर्शनकारी शामिल हैं। देश के सौ से ज़्यादा शहरों में विरोध की आग फैल चुकी है।

स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने सुरक्षा बलों को कार्रवाई और तेज़ करने का आदेश दिया है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में लिखा कि “ईरान आज़ादी की ओर बढ़ रहा है,” जिससे अंतरराष्ट्रीय बहस और तेज़ हो गई है।

वहीं देश के जनरल प्रॉसिक्यूटर मोहम्मद काज़ेम मोवाहेदी आज़ाद ने आदेश दिया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमों की प्रक्रिया बेहद तेज़ कर दी जाए। उनका कहना है कि सभी “दंगाइयों” पर एक ही आरोप लगेगा—ख़ुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ना—और इसकी सज़ा मौत है।

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने एक पोस्ट में लिखा कि “बहुत जल्द ईश्वर ईरानी जनता के दिलों में जीत की भावना जगाएगा।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अटकलों का दौर तेज़ हो गया है।

कुछ लोगों का मानना है कि ख़ामेनेई को समझ आ गया है कि जनता अब सत्ता परिवर्तन के करीब पहुंच चुकी है, जबकि अन्य का कहना है कि यह संदेश उनके समर्थकों को आश्वस्त करने के लिए दिया गया है कि शासन अभी भी मजबूत है।

आईआरआईबी न्यूज़ के अनुसार जनरल प्रॉसिक्यूटर ने देशभर के दफ़्तरों को आदेश दिया है कि आरोप पत्र तुरंत जारी किए जाएं और मुकदमों की तैयारी बिना देरी के पूरी की जाए।

उनका कहना है कि अपराधों की श्रेणी एक ही है—चाहे किसी ने दंगाइयों की मदद की हो, संपत्ति का नुकसान कराया हो, या हथियार उठाकर नागरिकों में दहशत फैलाई हो—सब पर कठोर कार्रवाई होगी।

यहां तक कि उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो विदेशी ताकतों की मदद से देश में अस्थिरता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका बयान स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने के पक्ष में नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखकर एक बार फिर इस मुद्दे पर आग में घी डाल दिया कि “ईरान पहले कभी इतनी आज़ादी की चाह में नहीं देखा गया। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।” यह बयान ईरानी सरकार को और भड़का सकता है।

यूरोपियन कमीशन ने भी ईरानी जनता के संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि तेहरान से लेकर दुनिया के कई देशों में आज़ादी की आवाज़ गूंज रही है। यूरोप ने हिंसक दमन की कड़ी आलोचना की और तुरंत सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग की।

अमेरिका में ओआईएसी संगठन ने भी व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन करते हुए मांग की कि ईरान की “ग़ैरक़ानूनी सरकार” को जवाबदेह ठहराया जाए और जनता के संघर्ष को पूरा समर्थन दिया जाए।

उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा है कि वॉशिंगटन और इसराइल पर आरोप लगाना कोई भ्रम नहीं, बल्कि हालात की सच्चाई है—क्योंकि यही ताकतें देश में हिंसक विद्रोह भड़काने की कोशिश कर रही हैं।