'नर्वस नाइंटीज' का शिकार! ISRO का PSLV रॉकेट लगातार दूसरी बार फेल, जानिए क्या हुआ गड़बड़

इसरो का PSLV-C62 मिशन 12 जनवरी 2026 को फेल हो गया. चार स्टेज का रॉकेट 90% सही काम करता है, फिर फेल हो जाता है. तीसरे स्टेज में रोल रेट डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ डिस्टर्ब होने के कारण 16 सैटेलाइट्स (अन्वेषा सहित) सही ऑर्बिट में नहीं पहुंचे. यह लगातार दूसरी असफलता (C61 के बाद) है, जिससे ISRO, DRDO, NSIL और देश को 500-800 करोड़ रुपये का वित्तीय व इज्जत को बड़ा झटका लगा है.

Jan 12, 2026 - 13:12
'नर्वस नाइंटीज' का शिकार! ISRO का PSLV रॉकेट लगातार दूसरी बार फेल, जानिए क्या हुआ गड़बड़

भारतीय अंतरिक्ष मिशन इतिहास में आज का दिन बेहद भारी साबित हुआ। 2026 की पहली लॉन्चिंग के रूप में PSLV-C62 से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सुबह 10:18 बजे शानदार लिफ्टऑफ के कुछ ही मिनट बाद सब कुछ बदल गया। तीसरे स्टेज यानी PS3 के अंत में अचानक ऐसी तकनीकी गड़बड़ी आई कि रॉकेट अपनी गति और दिशा दोनों खो बैठा। उड़ान पाथ डिस्टर्ब हुआ, रोल रेट अनियंत्रित हो गई और मिशन धीरे-धीरे असफलता की ओर बढ़ गया।

इस गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर उस पेलोड पर हुआ, जो इस मिशन का दिल था—DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट और उसके साथ उड़ रहे अन्य 15 छोटे सैटेलाइट। कुल 16 पेलोड्स सही कक्षा तक पहुंच ही नहीं पाए और अंतरिक्ष में भटक गए या वायुमंडल में जलकर खत्म हो गए। ISRO चीफ वी. नारायणन ने पुष्टि की कि PS3 का प्रदर्शन अंत तक सामान्य दिख रहा था, लेकिन उसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरा कंट्रोल सिस्टम बिगाड़ दिया। वैज्ञानिक अब हर डेटा फ्रेम का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं।

आखिर चूक कहां हुई?

PSLV-C62 की सबसे बड़ी समस्या उसी तीसरे स्टेज में सामने आई, जहां ठोस ईंधन वाला मोटर लगा होता है। शुरुआती रिपोर्ट्स संकेत दे रही हैं कि किसी महत्वपूर्ण बिंदु पर मोटर का व्यवहार अपेक्षा के अनुसार नहीं रहा। हैरानी की बात यह है कि बिल्कुल ऐसी ही दिक्कत 2025 के PSLV-C61 मिशन में भी सामने आई थी, जिसमें चैंबर प्रेशर गिर गया था और EOS-09 सैटेलाइट खो गया था। उस समय पूरे PSLV बेड़े को रोककर समीक्षा हुई, सुधार किए गए, फिर भी वही समस्या दोबारा उभर आई। अब नई फेलियर एनालिसिस कमिटी जांच में जुट गई है।

कितना बड़ा नुकसान?

यह असफल लॉन्च न सिर्फ ISRO बल्कि पूरे देश, DRDO, NSIL और सैन्य रणनीतियों के लिए गंभीर झटका है। एक बड़ी तकनीकी क्षमता, बहुमूल्य डेटा, महीनों की तैयारी और करोड़ों रुपये—सब एक पल में ध्वस्त हो गए। यह सिर्फ तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि भारत के स्पेस प्रोग्राम की रफ्तार पर लगा अचानक ब्रेक है, जिसे फिर से पटरी पर लाना आसान नहीं होगा।

वित्तीय नुकसान

प्रतिष्ठा को धक्का

देश और रक्षा क्षेत्र पर असर

ISRO ने आश्वस्त किया है कि डेटा का गहन विश्लेषण जारी है और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी। PSLV अब भी दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्चर्स में गिना जाता है, लेकिन लगातार दो बार तीसरे स्टेज में गड़बड़ी एक गंभीर संकेत है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सॉलिड मोटर की और गहराई से टेस्टिंग और सुधार की जरूरत है। इतिहास गवाह है कि ISRO ने हर असफलता को सीख में बदला है—लेकिन इस बार दांव बड़ा है, और उम्मीदें भी।

PSLV-C61 की असफलता की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं?

मई 2025 में हुए PSLV-C61 मिशन में भी तीसरा स्टेज ही समस्या की जड़ था, जब थ्रस्ट कम पड़ने से सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया। अगस्त 2025 में ISRO प्रमुख ने बताया था कि कमिटी ने जांच पूरी कर ली है और रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजी जा रही है। मगर आश्चर्य की बात है कि जनवरी 2026 तक वह रिपोर्ट आम जनता के सामने नहीं आई।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि त्रुटि की वजह चैंबर प्रेशर में गिरावट, निर्माण संबंधी कमजोरी या नोजल-कैसिंग में कोई खामी हो सकती है। ISRO ने स्वीकार किया कि समस्या मौजूद थी, पर पूरी रिपोर्ट जारी नहीं की गई—जो कि संस्था की परंपरा के अनुरूप है, जहां फेलियर रिपोर्ट पहले PMO तक पहुंचती है, फिर तय होता है कि उसे सार्वजनिक किया जाए या नहीं। लेकिन अब, दोबारा वही दिक्कत आने से पारदर्शिता पर सवाल तेज हो गए हैं।

लगातार दूसरी बार PSLV का तीसरा स्टेज विफल हुआ है—और यह सिर्फ तकनीकी खबर नहीं, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक चेतावनी है।