क्या ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया? मद्रास HC ने केंद्र को दी सलाह

मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की संभावना तलाशे। अदालत ने अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता पर चिंता जताई और जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया, ताकि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाया जा सके। याचिकाकर्ता ने बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को खतरे से बचाने की मांग की है।

Dec 26, 2025 - 11:22
क्या ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया? मद्रास HC ने केंद्र को दी सलाह

ऑस्ट्रेलिया का बड़ा फैसला अब भारत में भी हलचल मचा रहा है। दुनिया के पहले देश के रूप में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह लॉक कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम के बाद अब भारत में भी ऐसे ही कड़े नियम लाने पर गहन चर्चा शुरू हो गई है, जो करोड़ों परिवारों को सीधे प्रभावित कर सकता है।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र सरकार को जोरदार सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की राह पर चलते हुए ऐसा ही कानून लाने की संभावना तलाशे, जिससे 16 वर्ष से नीचे के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल बिल्कुल न कर सकें। अदालत ने इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया।

मामला साल 2018 की उस जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसे मदुरै के निवासी एस विजयकुमार ने दायर किया था। उन्होंने अदालत को चेताया था कि इंटरनेट पर अश्लील और हानिकारक सामग्री बेहद आसानी से उपलब्ध है, जिससे छोटे बच्चे सबसे ज़्यादा खतरे में हैं। उन्होंने दोनों बाल अधिकार संरक्षण आयोगों से ISP के जरिए जागरूकता फैलाने की मांग भी की थी।

याचिका में यह साफ कहा गया था कि ऑनलाइन पोर्नोग्राफी और चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज सामग्री बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा वार कर रही है। कम उम्र के बच्चों तक ऐसी सामग्री पहुंचना उनके भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक विकास के लिए खतरनाक हो सकता है।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि CSAM से जुड़ी वेबसाइट और URL लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए इन पर पूर्ण रोक लगाना मुश्किल है। अदालत ने कहा कि असली लड़ाई यूजर लेवल पर है, जहां पैरेंटल कंट्रोल और जागरूकता ही बच्चों को बचाने का सबसे मजबूत हथियार बनेगी।

इसी को देखते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र से अपेक्षा जताई कि वह ऑस्ट्रेलिया की तरह ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध पर गंभीरता से विचार करे। अदालत ने इसे समय की मांग और बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य कदम बताया।

साथ ही, अंतरिम राहत के रूप में हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक ऐसा कानून नहीं बन जाता, तब तक संबंधित विभाग जागरूकता अभियानों को और तेज़ और प्रभावी बनाएं, ताकि माता-पिता और बच्चे दोनों डिजिटल खतरों को पहचान सकें और उनसे सुरक्षित रह सकें।