अंकिता भंडारी को सच में इंसाफ मिला… या किसी कीमत पर दबा दिया गया सच? उम्रकैद के 8 महीने बाद फिर क्यों धधक उठा उत्तराखंड?

अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के 8 महीने बाद फिर क्यों भड़का उत्तराखंड? वायरल ऑडियो-वीडियो, वीआईपी एंगल और CBI जांच की मांग ने केस को फिर सुर्खियों में ला दिया. पढ़ें अंकिता भंडारी मर्डर केस की पूरी कहानी.

Jan 8, 2026 - 11:40
अंकिता भंडारी को सच में इंसाफ मिला… या किसी कीमत पर दबा दिया गया सच? उम्रकैद के 8 महीने बाद फिर क्यों धधक उठा उत्तराखंड?

पूरे देश को हिला देने वाली अंकिता भंडारी की हत्या की गूंज एक बार फिर उत्तराखंड की वादियों में गूंज रही है. 18 सितंबर 2022 को हुई इस दर्दनाक वारदात की लाश 24 सितंबर को मिली थी, और लंबे इंतजार के बाद मई 2025 में कोर्ट ने बीजेपी नेता के बेटे पुलकित आर्य और उसके साथियों अंकित गुप्ता व सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुना दी थी. तीन साल चार महीने की लड़ाई के बाद आया यह फैसला इंसाफ जैसा लगा, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं—आखिर सज़ा के सिर्फ 8 महीने बाद सड़कों पर उबाल क्यों? लोग फिर से क्यों कह रहे हैं कि *अंकिता को अभी पूरा इंसाफ नहीं मिला?

क्या सच में अदालत का फैसला अधूरा था? क्या वास्तविक अपराधी कोई और है—कोई ऐसा ताकतवर वीआईपी जिसे बचाने के लिए सब कुछ छिपाया गया? क्या कानून की किताबों को मोड़कर किसी प्रभावशाली शख्स के लिए एक बड़ा ड्रामा रचा गया? आखिर ऐसी क्या बात सामने आई कि उत्तराखंड में माहौल इतना गर्म हो गया कि खुद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सफाई देनी पड़ी? देश भर में यही सवाल गूंज रहा है कि तीन साल बाद यह केस अचानक सुर्खियों की आग में कैसे झुलसने लगा?

कहानी का ताज़ा मोड़ आया 29 दिसंबर को, जब पुलकित आर्य और उसके साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और केस शांत होता दिखा. लेकिन उसी दिन उर्मिला सनावर नाम की एक महिला ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला वीडियो जारी कर सबकुछ उलटकर रख दिया. उर्मिला ने दावा किया कि अंकिता की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसने रिजॉर्ट में मौजूद एक वीवीआईपी को ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने से मना कर दिया था. वह रिजॉर्ट जहां अंकिता महज़ 20 दिन पहले जॉइन हुई थी.

वीडियो सामने आया ही था कि उर्मिला ने एक ऑडियो भी रिलीज कर दिया, जिसमें सीधे-सीधे एक बड़े वीआईपी नेता पर आरोप लगाया गया. ऑडियो में कहा गया कि यही वीआईपी अंकिता की मौत का असली जिम्मेदार है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 जनवरी को आदेश देकर इस वीआईपी का नाम लेने या दिखाने पर रोक लगा दी, क्योंकि यह नेता खुद कोर्ट पहुंच गया था. यानी आरोप ऐसे हैं, जिनके कारण कोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा.

अब चाहे नाम सामने न आए, लेकिन इस ऑडियो-वीडियो में क्या कहा गया—इसी ने पूरे उत्तराखंड में भूचाल ला दिया है. लोग रातों-रात सड़कों पर उतर आए, जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए, और मांग उठी कि उस वीआईपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए. माहौल इतना गर्म हो चुका है कि हर तरफ एक ही आवाज गूंज रही है—*“अंकिता को पूरा इंसाफ दो!”*

उर्मिला सनावर खुद को हरिद्वार के पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी बताती है और उसी के साथ बातचीत का ऑडियो उसने सार्वजनिक किया है. इस ऑडियो में राठौर कथित रूप से बता रहा है कि अंकिता की हत्या किस तरह हुई और इसमें उस वीआईपी की क्या भूमिका थी. इस ऑडियो ने आग में घी डालने का काम किया और मामला कुछ ही घंटों में फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में छा गया.

ऑडियो-वीडियो सामने आते ही राज्यभर में गुस्सा फूट पड़ा. जनता और कई राजनीतिक नेता मांग कर रहे हैं कि केस की जांच दोबारा हो और इसे सीबीआई को सौंपा जाए. खुद अंकिता के पिता ने मुख्यमंत्री धामी से मिलकर कहा कि नए सबूतों के बाद जांच फिर से शुरू की जाए. मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर लोगों का धरना जारी है और माहौल लगातार उग्र होता जा रहा है.

तीन साल पहले जिस एसआईटी ने जांच की थी, उसके सदस्य और हरिद्वार ग्रामीण एसपी शेखर सुयाल का कहना है कि उस समय भी वीआईपी एंगल की जांच की गई थी, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला. लेकिन अब नए आरोपों, नई गवाही और वायरल ऑडियो-वीडियो ने पूरी कहानी ही बदल दी है.

लोगों के भारी विरोध और बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार को मजबूरन एक नई एसआईटी गठित करनी पड़ी है. इस एसआईटी ने उर्मिला सनावर से कई घंटे पूछताछ की और उसके दावों पर विस्तार से सवाल किए. इस नए तूफान ने फिर से अंकिता भंडारी के केस को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है—अब देखना यह है कि क्या इस बार सच की सारी परतें खुल पाएंगी या नहीं.