बजट 2026 में होम बायर्स की लॉटरी? EMI घटेगी या टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत—सबकी निगाहें सरकार पर

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अब सुधार से आगे बढ़कर रिकॉर्ड ग्रोथ की ओर है, जिसे बजट 2026 से एक बड़े बूस्ट की उम्मीद है. मध्यम वर्ग से लेकर लक्ज़री इन्वेस्टर तक, हर कोई इस बार बड़े वित्तीय सुधारों की आस लगाए बैठा है.

Jan 13, 2026 - 12:22
बजट 2026 में होम बायर्स की लॉटरी? EMI घटेगी या टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत—सबकी निगाहें सरकार पर

केंद्रीय बजट 2026 के करीब आते ही भारत का रियल एस्टेट सेक्टर जबरदस्त हलचल से भर गया है. बाजार अब सिर्फ रिकवरी नहीं कर रहा, बल्कि तेज रफ्तार में एक नए सुपर-ग्रोथ फेज में प्रवेश कर चुका है. महामारी और ग्लोबल संकटों की मार झेल चुका यह सेक्टर अब पूरी उम्मीद के साथ बजट को देख रहा है कि सरकार कोई ऐसा बड़ा कदम उठाएगी जो इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दे.

सबसे बड़ी उम्मीद उन लोगों की है जो पहली बार घर खरीदने का सपनों का सफर शुरू करना चाहते हैं. लोगों को भरोसा है कि इस बार सरकार होम लोन की ब्याज दरों में राहत, सब्सिडी में बढ़ोतरी और लोन चुकाने के लिए ज्यादा समय जैसी सुविधाएं दे सकती है. खासकर मेट्रो शहरों में EMI के बढ़ते दबाव से परेशान खरीदार बजट से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं. वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट पर सरकार का बढ़ता ध्यान बाजार में नई ऊर्जा लाने की ओर इशारा कर रहा है.

एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन का मानना है कि अब रियल एस्टेट की असली चमक छोटे शहरों में नजर आ रही है. उनके मुताबिक टियर-2 और टियर-3 शहर न सिर्फ किफायती दामों पर शानदार प्रोजेक्ट्स दे रहे हैं बल्कि असली खरीदारों की जरूरतों पर भी पूरा खरे उतर रहे हैं. बड़े डेवलपर्स का इन इलाकों में आना साबित करता है कि असली डिमांड यहीं है. वे कहते हैं कि नीति सुधार और GST में राहत ने ‘रिवर्स माइग्रेशन’ को तेजी दी है और बजट से उम्मीद है कि टैक्स इंसेंटिव और बेहतर लिक्विडिटी इस सेगमेंट को और मजबूत बनाएंगे.

सिपयत्रा के फाउंडर और पर्सनल फाइनेंस प्रोफेशनल हर्ष गुप्ता का कहना है कि आम निवेशक अब आसान और साफ नियमों की मांग कर रहा है. उनका मानना है कि बजट में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स को सरल बनाना बेहद जरूरी है, ताकि अधिक लोग स्टॉक मार्केट और डिजिटल इन्वेस्टमेंट्स से जुड़ सकें. वे गोल्ड बॉन्ड और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों के लिए भी पारदर्शी नियमों की आवश्यकता पर जोर देते हैं. हर्ष का कहना है कि यदि सरकार लंबी अवधि के निवेशकों को स्पष्ट टैक्स बेनेफिट दे, तो देश में वित्तीय समावेशन में क्रांतिकारी तेजी आ सकती है.

व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन के फाउंडर नवदीप सरदाना के मुताबिक रियल एस्टेट सेक्टर की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं. पिछले साल ऑफिस स्पेस और प्रीमियम प्रॉपर्टी की मांग में भारी उछाल देखने को मिला है, जिससे अब लक्जरी रियल एस्टेट बाजार की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. वे कहते हैं कि हाई-नेट-वर्थ इन्वेस्टर्स चाहते हैं कि सेक्शन 54 और 54F के तहत 10 करोड़ की कैपिटल गेन सीमा को बढ़ाया जाए ताकि बड़े सौदों में आसानी हो. साथ ही इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार ग्रीन फाइनेंसिंग, स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी और आसान फंडिंग पर बड़ा कदम उठाएगी. NRI निवेशकों के लिए TDS नियमों में राहत विदेशी पूंजी को और गति दे सकती है.

एलांते ग्रुप की AVP और कमर्शियल सेल्स हेड, हेनम खनेजा का कहना है कि यह बजट सेक्टर में नई जान डाल सकता है. वह बताती हैं कि ऊंची ब्याज दरों के बीच होम लोन पर अतिरिक्त टैक्स लाभ ग्राहकों का आत्मविश्वास बढ़ाएंगे. इसके साथ ही मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट और डेटा सेंटर्स जैसे भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए सरकार को मजबूत नीतियां और वित्तीय सहायता देनी होगी ताकि कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश का प्रवाह तेज हो सके.