महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा ट्विस्ट! क्या अब दो नहीं तीन गठबंधन? पुणे में ठाकरे ब्रदर्स–कांग्रेस की दोस्ती के संकेत
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में महायुति और महाविकास अघाड़ी की टूट से सियासी मुकाबला और तेज हो गया है. पुणे पीएमसी में उभरे तीसरे गठबंधन ने पवार परिवार को एक मंच पर ला दिया है. वहीं बीजेपी और शिंदे शिवसेना के सामने ठाकरे ब्रदर्स और कांग्रेस नई राजनीतिक केमिस्ट्री बनाते दिखाई दे रहे हैं.
महाराष्ट्र की सियासत में इस वक्त ऐसा भूचाल आया है, जिसने बीएमसी समेत 29 नगर निगम चुनावों के सभी पुराने गठबंधन गणित को तहस-नहस कर दिया है. बीजेपी की अगुवाई वाला महायुति हो या विपक्षी महाविकास अघाड़ी—दोनों में ऐसी दरारें पड़ीं कि पूरा चुनावी परिदृश्य ही बदल गया है. अब मैदान में एक तीसरा और बिल्कुल नया मोर्चा उभरता दिख रहा है, जो पूरे राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है.
बीजेपी ने जहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ दोस्ती बरकरार रखी, वहीं अजित पवार की एनसीपी को सीधे तौर पर बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके बाद अजित पवार ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अपने चाचा शरद पवार की पार्टी से हाथ मिला लिया. दिलचस्प यह भी है कि मुंबई में उद्धव और राज ठाकरे के गठबंधन से अलग हुई कांग्रेस ने पुणे में उन्हीं ठाकरे ब्रदर्स का साथ पकड़ लिया है, जिससे नए समीकरण और भी रोचक हो गए हैं.
मुंबई का बीएमसी और पुणे का पीएमसी, दोनों ही नगर निगम चुनावों में इस बार तीन-तीन गठबंधन आमने-सामने हैं. राज्य की दो सबसे बड़ी नगरपालिकाओं में चुनावी मुकाबला इतना तगड़ा हो चुका है कि हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंकने को मजबूर हो गई है. जनता भी इस बार देख रही है कि कौन सा गठबंधन किस शहर में अपनी पकड़ मजबूत कर पाता है.
बीजेपी–शिंदे का मजबूत लेकिन अधूरा गठबंधन
राज्य की सत्ता संभाल रहे देवेंद्र फडणवीस के महायुति में बीजेपी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल थी. तीनों ने मिलकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन नगर निगम चुनाव आते-आते इस दोस्ती में बड़ी दरार फैल गई. अजित पवार डिप्टी सीएम हैं और उनकी पार्टी के कई मंत्री सरकार में शामिल हैं, फिर भी बीजेपी ने स्थानीय चुनावों में उन्हें दरकिनार कर दिया.
अब बीजेपी और शिंदे गुट मिलकर बीएमसी समेत 29 नगर निगम में जोरदार तरीके से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं अजित पवार की एनसीपी इसमें महायुति का हिस्सा नहीं है. मुंबई से लेकर नागपुर और पुणे तक बीजेपी–शिंदे गठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ उतर चुका है. फडणवीस पहले ही साफ कर चुके हैं कि शिवसेना ही बीजेपी की नैचुरल साथी है, और इस चुनाव में यही समीकरण सबसे ज्यादा चमकता दिख रहा है.
पवार परिवार की अनोखी सियासी जुगलबंदी
मahayuti से दूरी बनते ही अजित पवार ने नई रणनीति तैयार कर ली. मुंबई के बीएमसी चुनाव में उनकी एनसीपी अकेले मैदान में है, लेकिन पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में उन्होंने चाचा शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के साथ हाथ मिला लिया है. यह गठबंधन राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.
शरद पवार की पार्टी पहले महाविकास अघाड़ी का हिस्सा थी, लेकिन अब उसने भी नगर निगम चुनावों के लिए अलग रास्ता चुन लिया है. मुंबई में भले ही उनके पत्ते अभी बंद हों, लेकिन पुणे में दोनों पवार गुटों की दोस्ती खुलकर सामने आ गई है. इस गठबंधन की टाइमिंग भी चौंकाने वाली है, क्योंकि अजित पवार पुणे के प्रभारी मंत्री हैं और उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है.
सीट शेयरिंग को लेकर भी दोनों के बीच गंभीर बातचीत हुई है. शरद पवार गुट ने करीब 40–45 सीटों की मांग रखी है, जबकि अजित पवार 30 सीटें देने को तैयार बताए जाते हैं. अगर यह समझौता होता है तो पवार परिवार अन्य नगर निगमों में भी साथ उतर सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में यह दूसरा शक्तिशाली गठबंधन बन जाएगा.
ठाकरे ब्रदर्स के साथ कांग्रेस का बड़ा दांव
पुणे में तेजी से बदलते समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए ठाकरे ब्रदर्स के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया. मुंबई में हालांकि कांग्रेस ने उद्धव और राज ठाकरे के गठबंधन से दूरी बनाई थी, लेकिन पुणे के पीएमसी चुनाव में वह उन्हीं दोनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उतरने को तैयार हो गई है. इससे चुनावी माहौल में नई हलचल मच गई है.
पुणे नगर निगम में कांग्रेस अब शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के साथ संयुक्त रूप से अपनी किस्मत आजमाएगी. कांग्रेस ने औपचारिक रूप से शिवसेना (यूबीटी) को प्रस्ताव भेजा है और तीनों दलों के बीच सीट बंटवारा लगभग तय हो चुका है. कुल 41 वार्ड और 165 सीटों पर इस नए गठजोड़ की रणनीति अंतिम रूप लेने वाली है.
इस तरह महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे का तीसरा बड़ा गठबंधन उभरकर सामने आ रहा है. कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि पुणे में वह किसी हाल में अजित पवार गुट से हाथ नहीं मिलाएगी, जबकि अजित पवार लगातार कांग्रेस को साथ आने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे थे. कांग्रेस नेता मोहन जोशी के मुताबिक मुंबई की कोर कमेटी ने ठाकरे गुट के साथ गठबंधन पर मुहर लगा दी है और सीट शेयरिंग भी लगभग तय है.