अमेरिका की नींद उड़ी! भारत-EU ट्रेड डील फाइनल, PM मोदी ने किया धमाकेदार ऐलान
भारत और ईयू के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील फाइनल हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसकी घोषणा की है। उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताते हुए कहा कि यह समझौता भारत के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है। इससे दुनिया का भारत पर भरोसा और बढ़ेगा।
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जबरदस्त घोषणा करते हुए बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड एग्रीमेंट आखिरकार हो गया है। मोदी ने कहा कि यह ऐतिहासिक डील न सिर्फ भारत की वैश्विक छवि को नई उड़ान देगी, बल्कि दुनिया का भरोसा भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत करेगी। यह समझौता दुनिया की कुल जीडीपी के करीब 25% हिस्से और ग्लोबल ट्रेड के लगभग एक-तिहाई पर असर डालता है, जो इसे बेहद प्रभावशाली बनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन को लेकर दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता का भी मजबूत प्रमाण है।
भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत करीब 17 साल पहले यानी 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में यह बीच में ही रुक गई। बाद में जून 2022 में चर्चा दोबारा शुरू हुई और लगातार 18 दौर की मैराथन वार्ताओं के बाद यह मेगा डील अब पूरी तरह से फाइनल हो चुकी है। इस समझौते से भारत के टेक्सटाइल्स, लेदर-फुटवियर, जेम्स-एंड-जूलरी, केमिकल्स और समुद्री उत्पादों जैसे प्रमुख सेक्टर्स को भारी राहत मिलने वाली है, क्योंकि यूरोपियन यूनियन में इन पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क में अब बड़ी कटौती होगी। फिलहाल भारतीय वस्तुओं पर EU का औसत टैरिफ 3.8% है, जबकि समुद्री उत्पादों पर 26%, केमिकल्स पर 12.8% और लेदर गुड्स पर 17% तक शुल्क लगता है। इसके मुकाबले EU से आने वाले उत्पादों पर भारत लगभग 9.3% आयात शुल्क वसूलता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यह समझौता दो विशाल आर्थिक शक्तियों के बीच तालमेल और विश्वास का शानदार उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस डील के दूरगामी प्रभाव होंगे और करोड़ों लोगों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिससे भारत की आर्थिक यात्रा को असाधारण गति मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेज़ी से उभरते ऊर्जा बाजारों में से एक है और यह क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि आगामी वर्षों में भारत तेल और गैस उद्योग में 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनिंग हब बनने जा रहा है, जिसकी क्षमता 260 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 300 मीट्रिक टन तक पहुंचाई जाएगी।