गलवान टीजर से चीन भड़का, भारत ने पलटवार का छुपा सच उजागर किया
भारत सरकार ने सलमान खान की फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' पर चीनी मीडिया के दावों का खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में 'कलात्मक स्वतंत्रता' है और फिल्म निर्माताओं को फिल्में बनाने का अधिकार है। चीनी मीडिया ने आरोप लगाया था कि फिल्म गलवान झड़प के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। भारत ने कहा कि फिल्म में सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
केंद्र सरकार ने सलमान खान की बहुचर्चित फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ पर चीनी मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को दो टूक कहा कि भारत में कलात्मक अभिव्यक्ति को खुली छूट मिली हुई है और हर फिल्मकार को उसे इस्तेमाल करने का पूरा हक है।
चीनी मीडिया द्वारा लगाए गए इस आरोप के बाद यह प्रतिक्रिया सामने आई कि फिल्म में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दिखाया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में रचनात्मक स्वतंत्रता किसी भी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं होती, इसलिए फिल्म निर्माताओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
यह फिल्म 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान मोर्चे पर भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई ऐतिहासिक भिड़ंत पर आधारित है। फिल्म में सलमान खान, 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं, जो चीनी सेना की घुसपैठ रोकते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
भारत ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की थी कि उस खतरनाक झड़प में देश के 20 जवान शहीद हुए थे। वहीं चीन, जिसने पहले किसी भी नुकसान से इनकार कर दिया था, बाद में दावा करने लगा कि उसके केवल चार सैनिक मारे गए, जिस पर भी दुनियाभर में सवाल खड़े हुए।
NDTV की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत एक ऐसा देश है जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता गहरी जड़ें रखती है। फिल्मों के माध्यम से कहानियां कहने को यहां संवैधानिक संरक्षण है और हर भारतीय फिल्म निर्देशक को अपनी सोच के मुताबिक कहानी गढ़ने की आजादी दी गई है।
सरकारी सूत्रों ने आगे कहा कि अगर किसी पक्ष को किसी भी दृश्य पर आपत्ति है, तो वह सीधे रक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांग सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म निर्माण में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए इस विवाद को बेवजह तूल दिया जा रहा है।
जून 2020 के टकराव के बाद भारत और चीन के संबंधों में गहरा तनाव पैदा हो गया था। दोनों देशों ने LAC के पास अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी। इसी बीच चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में फिल्म के कई दृश्यों को तथ्यहीन बताते हुए विवाद को और भड़काने की कोशिश की।
ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि बॉलीवुड की कहानियां भावनाओं और मनोरंजन पर आधारित होती हैं, लेकिन वे असल इतिहास को बदल नहीं सकतीं। लेख में यह भी लिखा गया कि PLA अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हर कीमत पर खड़ा रहेगा, चाहे कोई भी फिल्म उसे कैसे दिखाए।
चौंकाने वाली बात यह है कि उसी लेख में झूठा दावा किया गया कि गलवान घाटी वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी हिस्से में आती है। रिपोर्ट ने भारत पर उकसावे का आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों ने LAC पार की थी, जबकि दुनिया जानती है कि इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और ये दावे महज राजनीतिक प्रोपेगंडा हैं।