भारत-पाक तनाव पर चीन की एंट्री! हथियार सप्लाई के बाद अब खुद को बता रहा ‘पीसमेकर’

साल 2025 खत्म होने को है. ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा खत्म नहीं हो रही है. अब 7 महीने बाद चीन ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा दावा कर रहा है. चीन ने कहा है कि इस जंग में उसने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की. ध्यान रहे कि ऐसा दावा करने वाला चीन ही है जिसने मई में हुई इस लड़ाई में पाकिस्तान को न सिर्फ हथियारों से मदद की बल्कि उसे लाइव इनपुट भी दिए.

Dec 31, 2025 - 11:03
भारत-पाक तनाव पर चीन की एंट्री! हथियार सप्लाई के बाद अब खुद को बता रहा ‘पीसमेकर’

अमेरिका के बाद अब चीन ने भी एक चौंकाने वाला दावा कर दिया है. बीजिंग का कहना है कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़े तनाव में उसने सीधे हस्तक्षेप करते हुए मध्यस्थ की भूमिका निभाई. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिम्पोज़ियम में कहा कि भारत-पाक तनाव उन प्रमुख वैश्विक ‘हॉटस्पॉट्स’ में शामिल था, जहां चीन ने सक्रिय रूप से दखल दिया.

बीजिंग में आयोजित इस कार्यक्रम में वांग ने दुनिया की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी. उनका कहना था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक किसी भी दौर में इतने लोकल वॉर और क्रॉस-बॉर्डर संघर्ष एक साथ भड़कते नहीं देखे गए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल खतरनाक रफ्तार से फैल रही है.

वांग ने दावा किया कि चीन ने वैश्विक शांति के लिए एक निष्पक्ष और नैतिक स्टैंड लेते हुए हर उस जगह हस्तक्षेप किया, जहां विवाद बढ़ने का खतरा था. उनकी मानें तो चीन का यही ‘फेयर एप्रोच’ लंबे समय तक चलने वाली स्थायी शांति का रास्ता बन सकता है.

चीन के विदेश मंत्री यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि इस साल दुनिया भर में अस्थिरता तेजी से बढ़ी और कई जगह युद्ध जैसी स्थितियां पैदा हुईं. इस पृष्ठभूमि में चीन ने खुद को एक शांतिदूत की तरह प्रस्तुत किया और हर संवेदनशील मुद्दे पर बैलेंस्ड भूमिका निभाने की कोशिश की.

वांग के मुताबिक चीन ने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु विवाद, फिलिस्तीन-इजरायल संकट, कंबोडिया-थाईलैंड तनाव और सबसे अहम—भारत-पाकिस्तान टकराव जैसे मामलों में अपनी तरफ से मध्यस्थता की. उन्होंने कहा कि यह ‘चीनी तरीका’ बातचीत और समाधान को आगे बढ़ाता है.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच मई में भयंकर सैन्य टकराव हुआ था. भारत ने जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी ढांचों को तबाह कर दिया था. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के एयरबेस को भी सटीक निशाना बनाया था.

भारत ने तीसरे पक्ष की बातचीत को साफ-साफ नकार दिया

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी बाहरी दखलंदाजी को सख्ती से खारिज कर दिया. नई दिल्ली का कहना रहा कि चार दिन का यह टकराव बिना किसी मध्यस्थ देश की मदद के, सीधे दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की बातचीत से सुलझा था. 13 मई को विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट कहा कि मध्यस्थता का दावा पूरी तरह गलत है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और पाकिस्तान के DGMOs ने 10 मई 2025 को दोपहर 15:35 बजे सीधे बात की थी और समाधान पर पहुंच गए थे. भारत लगातार दोहराता रहा है कि भारत-पाक रिश्तों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती और यह नीति वह दशकों से अपनाए हुए है.

ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका पर खड़े हुए बड़े सवाल

चीन भले ही खुद को शांतिदूत बताता रहे, लेकिन इस संघर्ष में उसकी भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध रही. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने इस युद्ध के दौरान भारी मात्रा में चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया. चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है और उसका 81 प्रतिशत से ज्यादा मिलिट्री इक्विपमेंट चीन से आता है.

यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में भी साफ कहा गया कि भारत-पाक चार दिन के संघर्ष के दौरान चीन के हथियारों को एक ‘लाइव टेस्टिंग लैब’ की तरह इस्तेमाल किया गया. इस जंग में पहली बार चीन के आधुनिक हथियार HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइल और J-10 फाइटर जेट वास्तविक युद्ध में आजमाए गए.

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि चीन ने पाकिस्तान को भारतीय सेना से जुड़े लाइव इनपुट तक उपलब्ध कराए. भारतीय वायुसेना ने चीन की PL-15 मिसाइल को भारतीय सीमा के अंदर ही मार गिराया था, जो किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने में विफल रही.

भारतीय सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया कि चीन ने इस टकराव को अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के परीक्षण का मौका बना लिया. लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने भी कहा था कि चीन ने पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर सपोर्ट दिया और पूरे ऑपरेशन को एक प्रयोगशाला की तरह उपयोग किया.