बेखौफ खेल, ट्रेंडसेटर अंदाज़! कैसे वैभव सूर्यवंशी बने भारत के पहले ‘डिजिटल क्रिकेट स्टार’, U-19 वर्ल्ड कप का क्रेज भी आसमान पर

अंडर-19 वर्ल्ड कप भारत के लिए हमेशा नए सितारों का मंच रहा है, लेकिन इस बार फैन्स का क्रेज सिर्फ एक नाम- वैभव सूर्यवंशी के लिए है.14 साल का यह बल्लेबाज पहले से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्टार बन चुका है और उसकी बैखौफ बैटिंग देखने के लिए लोग टूर्नामेंट को फॉलो कर रहे हैं.

Jan 16, 2026 - 10:39
बेखौफ खेल, ट्रेंडसेटर अंदाज़! कैसे वैभव सूर्यवंशी बने भारत के पहले ‘डिजिटल क्रिकेट स्टार’, U-19 वर्ल्ड कप का क्रेज भी आसमान पर

अंडर-19 वर्ल्ड कप का बिगुल बज चुका है और हमेशा की तरह यह टूर्नामेंट भारत के लिए नई प्रतिभाओं की खदान बनकर सामने आया है. इसी मंच ने देश को विराट कोहली, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा और शुभमन गिल जैसे दिग्गज दिए, जिन्होंने आगे जाकर विश्व क्रिकेट पर राज किया. भारतीय क्रिकेट के लिए यह प्रतियोगिता एक ऐसी मशीन बन चुकी है, जो हर बार नई पीढ़ी को सामने लेकर आती है.

लेकिन इस बार सारी सुर्खियां सिर्फ एक नाम पर टिक गई हैं—वैभव सूर्यवंशी. उनकी कहानी बाकी खिलाड़ियों जैसी बिल्कुल नहीं है. वजह सिर्फ उनका खेल नहीं, बल्कि उनकी उम्र, उन पर बनी अभूतपूर्व सोशल मीडिया हाइप और डिजिटल फॉलोइंग है, जिसने उन्हें पहले ही एक उभरता सुपरस्टार बना दिया है.

चौंकाने वाली बात यह है कि लाखों फैन्स इस बार सिर्फ वैभव सूर्यवंशी को देखने के लिए U-19 वर्ल्ड कप फॉलो कर रहे हैं.

1. सिर्फ 14 साल—इतने छोटे खिलाड़ी का इतना बड़ा मंच पर जलवा

वैभव की सबसे बड़ी खासियत है उनकी अद्भुत कम उम्र. मात्र 14 साल 294 दिन में U-19 वर्ल्ड कप खेलना किसी सपने से कम नहीं. आम तौर पर भारत में खिलाड़ी 17-18 साल की उम्र में यहां पहुंचते हैं. ऐसे में हर किसी के मन में सवाल है—क्या वैभव अगला U-19 वर्ल्ड कप भी खेल सकते हैं?

लेकिन यहां सामने आता है एक अहम नियम. 2016 के बाद BCCI ने तय किया कि जो खिलाड़ी एक बार U-19 वर्ल्ड कप खेल ले, वह उम्र सही होने के बावजूद दोबारा यह टूर्नामेंट नहीं खेल सकता. यह नियम जूनियर कमेटी की सिफारिश पर लागू किया गया था.

इससे पहले कई भारतीय खिलाड़ी दो-दो वर्ल्ड कप खेल चुके थे, जैसे—

रवींद्र जडेजा: 2006, 2008

विजय जोल: 2012, 2014

आवेश खान, सरफराज खान, रिकी भुई: 2014, 2016

लेकिन 2016 के बाद यह रास्ता बंद हो गया. इसलिए वैभव भले ही उम्र के हिसाब से योग्य हों, फिर भी वे दूसरा वर्ल्ड कप नहीं खेल पाएंगे.

2. U-19 से पहले ही स्टार—सोशल मीडिया ने बना दिया नया हीरो

वैभव की कहानी का दूसरा धमाकेदार पहलू है उनकी पहले से मौजूद पॉपुलैरिटी. जहां बाकी भारतीय खिलाड़ी U-19 के बाद पहचाने जाते हैं, वैभव पहले ही लाइमलाइट में आ चुके हैं. उनकी बल्लेबाजी की क्लिप्स लाखों व्यूज बटोर चुकी हैं, और 'बेबी बॉस' जैसे नामों ने उन्हें पहले से ही सेलिब्रिटी बना दिया है.

YouTube हाइलाइट्स

Instagram रील्स

डेटा-स्टैट्स वायरल मॉमेंट्स

डिजिटल स्काउटिंग

इन सबने मिलकर वैभव को U-19 में कदम रखने से पहले ही एक 'डिजिटल स्टार' बना दिया है.

3. निडर खेल—आज के तेज क्रिकेट का नया चेहरा

वैभव की बैटिंग का सबसे बड़ा आकर्षण है उनका बेखौफ अंदाज़. बड़े शॉट्स खेलने में झिझक नहीं, स्ट्राइक-रेट आसमान छूता और मौके बनाने का हुनर. यही मॉडर्न T20 क्रिकेट की मांग है. इसी वजह से फैन्स सिर्फ उनके रन नहीं, बल्कि उनका स्टाइल फॉलो कर रहे हैं.

फैन्स का साफ कहना है—

“इस बार U-19 वर्ल्ड कप, वैभव सूर्यवंशी की बैटिंग देखने के लिए देखा जा रहा है।”

ये लाइन सुनने में भले ही ओवर द टॉप लगे, लेकिन यह बताती है कि क्रिकेट अब खिलाड़ी और फैन के बीच बनने वाले कनेक्शन पर भी टिका है.

4. तुलना और उम्मीदें—लेकिन नया सिस्टम बदल चुका है

भारत में हर नए खिलाड़ी की तुलना जडेजा, गिल, कोहली और रोहित से की जाती रही है. फर्क बस यह है कि वे U-19 के बाद फेमस हुए और वैभव पहले ही सोशल मीडिया की दुनिया में चमक चुके हैं.

पुराना सिस्टम:

पहले प्रदर्शन → फिर पहचान

नया सिस्टम:

पहचान + प्रदर्शन → दोनों साथ-साथ

5. अब सबसे बड़ा सवाल—क्या वैभव की हाइप टिक पाएगी?

A. तकनीकी परीक्षा

U-19 स्तर पर तेज रफ्तार गेंदें, उछाल, रिस्ट स्पिन और मैच प्रेशर हर खिलाड़ी की असली परीक्षा लेते हैं. यहीं पता चलेगा कि वैभव सिर्फ हाइलाइट्स वाले स्टार हैं या एक मजबूत, भरोसेमंद बल्लेबाज.

B. फिटनेस और शरीर का विकास

15 से 20 साल की उम्र शरीर के बदलाव का दौर होती है. इसी दौरान खिलाड़ी का असली क्रिकेटिंग टेम्परामेंट बनता है…