चीन-पाकिस्तान की मिसाइल आर्मी कितनी खतरनाक? भारत के सामने खड़ा हुआ सबसे बड़ा युद्धी चैलेंज!
पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है.
दक्षिण एशिया में तनाव एक बार फिर विस्फोटक स्तर पर पहुंच रहा है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन अपनी मिसाइल मारक क्षमता को तेज रफ्तार से बढ़ा रहे हैं. SIPRI 2025, अमेरिकी पेंटागन की रिपोर्ट और कई रणनीतिक संस्थानों की नई जानकारियां बताती हैं कि दोनों देशों की बढ़ती रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत की सुरक्षा पर भारी दबाव डाल रही हैं. ये मिसाइलें परमाणु हथियारों से लेकर हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक तक सक्षम हैं, जो किसी भी संकट में भारत को दो तरफ़ा खतरे में डाल सकती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले सालों में ये चुनौती और भी आक्रामक हो सकती है.
पाकिस्तान की नई रॉकेट फोर्स: ARFC ने बढ़ाई भारत की चिंता
पाकिस्तान ने अगस्त 2025 में अचानक अपनी नई आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) लॉन्च कर सभी को चौंका दिया. यह फोर्स खास तौर पर नॉन-न्यूक्लियर, लंबी दूरी और सटीक हमलों वाली मिसाइलों के लिए बनाई गई है. मई 2025 के भारत-पाक संघर्ष में मिली असफलताओं के बाद इस कमांड की जरूरत महसूस हुई थी. बताया जा रहा है कि ARFC को चीन की PLARF की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसमें फतह-सीरीज की मिसाइलों को रीढ़ माना जाता है.
हालांकि पाकिस्तान की मिसाइल फोर्स आकार में भारत और चीन से छोटी है, लेकिन इसका विस्तार बेहद तेज़ी से हो रहा है. अनुमान है कि इसके पास 100–200 से ज्यादा मोबाइल लॉन्चर मौजूद हैं, जिन पर SRBM और MRBM तैनात हैं. SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के पास तकरीबन 170 परमाणु वॉरहेड भी हैं, जिससे खतरे का दायरा और बढ़ जाता है.
पाकिस्तान की मिसाइलें: सटीक, खतरनाक और चीन की टेक्नोलॉजी से लैस
फतह सीरीज समेत कई मिसाइलें सैचुरेशन अटैक यानी एक साथ भारी संख्या में लॉन्च किए जाने की क्षमता रखती हैं. चीन से प्राप्त नई तकनीक, विशेषकर PL-15 जैसी एडवांस्ड मिसाइलों ने पाकिस्तान की मारक क्षमता को नई दिशा दी है. यह सिस्टम इतना मोबाइल और हिट-एंड-रन डिजाइन में है कि भारत की पारंपरिक डिफेंस इसमें कमजोर पड़ सकती है.
चीन की मिसाइल फोर्स: दुनिया की सबसे घातक और तेज़ी से बढ़ती ताकत
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) आज दुनिया की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक मिसाइल फोर्स मानी जाती है. पेंटागन की 2025 रिपोर्ट के अनुसार PLARF के पास 1250 से ज्यादा ग्राउंड-बेस्ड बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें मौजूद हैं. चीन के पास 600 से अधिक परमाणु वॉरहेड बताए जा रहे हैं, और अंदेशा है कि ये संख्या 2030 तक 1000 का आंकड़ा पार कर सकती है. चीन की यह तेजी विश्व सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत है.
PLARF की क्षमता: SRBM से ICBM तक विनाशकारी रेंज
चीन के पास 900+ SRBM, 1300 MRBM, 500 IRBM और 400 से अधिक ICBM हैं, जिसमें 12,000 किमी से अधिक की रेंज वाला DF-41 भी शामिल है. इसके अलावा हाइपरसोनिक DF-17 मिसाइलें 5+ मैक की स्पीड से उड़ान भर सकती हैं, जिन्हें रोकना लगभग असंभव माना जाता है. 320 से अधिक नए मिसाइल साइलो, सबमरीन-लॉन्च JL-3 और स्पेस-बेस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम चीन को सुपर-मिसाइल पावर बनाते हैं. भारत के उत्तरी क्षेत्र इन मिसाइलों की सीधी रेंज में आते हैं.
भारत की मिसाइल फोर्स: मजबूत लेकिन संख्या में पीछे
भारत की मिसाइल क्षमता मजबूत है, लेकिन चीन और पाकिस्तान की संयुक्त वृद्धि के मुकाबले संख्या, गति और रेंज के स्तर पर अभी भी कई कमियां मौजूद हैं. SIPRI 2025 के अनुसार भारत के पास लगभग 180 परमाणु वॉरहेड हैं. हालांकि भारत की अग्नि सीरीज और ब्रह्मोस जैसे हथियार शक्तिशाली हैं, पर दो-मोर्चे के युद्ध में इनकी पर्याप्त तैनाती चुनौती बन सकती है.
दो-मोर्चे का खतरा: पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन
पाकिस्तान की ARFC सीमा पर त्वरित हमलों और सटीक स्ट्राइक्स के लिए बड़ी चुनौती है. मई 2025 के संघर्ष में पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल क्षमता का आक्रामक प्रदर्शन भी किया था. दूसरी ओर चीन तिब्बत से पूरे भारत को निशाने पर ले सकता है, और उसकी हाइपरसोनिक मिसाइलें S-400 जैसे डिफेंस सिस्टम को भी चकमा दे सकती हैं. अगर दोनों देश संयुक्त रणनीति से हमला करें, तो मिसाइलों की बाढ़ भारत के एयर डिफेंस को ओवरलोड कर सकती है.
भारत की तैयारी: नई मिसाइल फोर्स से लेकर हाई-टेक डिफेंस तक
भारत तेजी से अपनी इंडिजेनस मिसाइलों—अग्नि वेरिएंट, ब्रह्मोस 2 और हाइपरसोनिक तकनीक—को आगे बढ़ा रहा है. S-400 और संभावित S-500 डिफेंस सिस्टम भारत की ढाल मजबूत कर रहे हैं. सेना प्रमुख ने भी भारतीय रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की जरूरत पर जोर दिया है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि चीन-पाक का बढ़ता गठजोड़ किसी भी छोटे तनाव को बड़े युद्ध में बदल सकता है.
अंततः, पाकिस्तान की मिसाइल शक्ति सीमित लेकिन बेहद केंद्रित और खतरनाक है, जबकि चीन की मिसाइल क्षमता विशाल, आधुनिक और लगातार विस्तार कर रही है. भारत को रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमता को अभूतपूर्व गति से बढ़ाना होगा.