मार्केट में हाहाकार! अचानक फूटा बुलबुला - चांदी ₹85,000 धड़ाम, सोने ने भी जमीन पकड़ी

सोने और चांदी की कीमतों में आज रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई है. चांदी एक ही दिन में लगभग 66 हजार रुपये सस्ती होकर इतिहास का सबसे बड़ा क्रैश बनी. अचानक आई इस तेज गिरावट से कीमती धातुओं के बाजार में हलचल मच गई. निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है.

Jan 30, 2026 - 17:51
मार्केट में हाहाकार! अचानक फूटा बुलबुला - चांदी ₹85,000 धड़ाम, सोने ने भी जमीन पकड़ी

नई दिल्ली से आई एक चौंकाने वाली खबर ने शुक्रवार की सुबह पूरे मार्केट को हिला दिया। महीनों से ऊंचाइयों पर दौड़ रही सोने-चांदी की कीमतें अचानक गोता लगाती नजर आईं। एमसीएक्स पर चांदी ने अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए लगभग 66 हजार रुपये का फ्री-फॉल लिया और 4 लाख का आंकड़ा छूने के बाद सीधे 3.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब आ गई। सोना भी पीछे नहीं रहा और करीब 7 प्रतिशत टूटकर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास जा पहुंचा। यह गिरावट निवेशकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रही।

एक दिन पहले तक चांदी 4 लाख रूपये को छूने की दहलीज पर थी, लेकिन आज सुबह से ही मार्केट में भारी दबाव दिखाई देने लगा। दोपहर 3.40 बजे तक चांदी करीब 66 हजार रुपये यानी 16.70 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट के साथ 3.34 लाख रुपये पर फिसल गई। इसी दौरान सोने ने भी 10,954 रुपये का गोता लगाया और 1,58,449 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ पहुंचा, जिसमें 6.47 प्रतिशत की तेज गिरावट देखी गई। चांदी के इतिहास में एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट पहले कभी दर्ज नहीं हुई थी।

पिछले महीने जनवरी में सोने की कीमतें लगातार ऊपर की ओर भाग रही थीं और इसके पीछे दुनिया भर में बढ़ती मांग सबसे बड़ा कारण रही। आर्थिक अनिश्चितताओं के माहौल में क्रिप्टो कंपनियों से लेकर दुनिया के सेंट्रल बैंक तक सोने की ओर तेजी से झुक रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए, जब उन्होंने ईरान पर परमाणु समझौते को लेकर दबाव बनाया और ईरान ने अमेरिका-इजराइल के खिलाफ कड़ी चेतावनी दे डाली। इस माहौल में Tether के CEO की घोषणा ने बाजार को और उत्तेजित कर दिया कि कंपनी अपने पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा सोने में निवेश करेगी।

लेकिन कीमतों के गिरने की असली वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ताज़ा फैसला रहा। फेड ने 2026 की पहली बैठक में ब्याज दरों को 3.50%-3.75% पर स्थिर रखकर बाजार को संकेत दिया कि आर्थिक हालात अब थोड़ा संभल रहे हैं। बेहतर लेबर मार्केट और स्थिर बेरोजगारी दर के चलते यह कदम उठाया गया। इससे पहले 2025 में लगातार तीन बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी, जब महंगाई और बेरोजगारी दोनों बढ़ रही थीं। हालांकि फेड ने यह भी साफ कर दिया कि महंगाई अब भी उम्मीद से ज्यादा ऊंची बनी हुई है, जिससे बाजार में अनिश्चितता और तेज हो गई।