'कुत्तों का दिमाग नहीं पढ़ सकते कि कब काटेगा', स्ट्रीट डॉग पर सुनवाई के दौरान बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई जारी है, जिसमें पीठ ने टिप्पणी की कि कुत्तों के मन को नहीं पढ़ा जा सकता कि वे कब काटेंगे। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने पहले संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर नसबंदी, टीकाकरण के बाद आश्रयों में भेजने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर चल रही सुनवाई एक बार फिर सुर्खियों में है। अदालत ने बेहद गंभीर लहजे में कहा कि किसी भी पल कुत्ता किस मानसिक स्थिति में है, यह समझ पाना असंभव है—और यही अनिश्चितता लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन जाती है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों से सिर्फ रेबीज का खतरा नहीं बढ़ता, बल्कि सड़क हादसों में भी ये बड़ी भूमिका निभाते हैं। वहीं डॉग लवर्स का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि देश के सभी कुत्तों को आश्रय गृह में रखना न तो व्यावहारिक है, न ही आर्थिक रूप से संभव। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे मुद्दे को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से ही हल किया जा सकता है।
सिब्बल ने यह भी कहा कि हर कुत्ते को पकड़ना समाधान नहीं हो सकता। लेकिन इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि रोकथाम हमेशा इलाज से कहीं बेहतर होती है, और इस दिशा में गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।
जस्टिस मेहता ने आगे बताया कि अदालत केवल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वर्तमान कानूनों और नियमों का पालन सही तरीके से हो—जो अब तक नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन राज्यों ने अब तक जवाब नहीं भेजा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।