बड़ा खुलासा: 135 अरब में बिकी पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन PIA, खरीदार का नाम सामने आया

पाकिस्तान एयरलाइन PIA को शहबाज शरीफ सरकार ने 135 अरब रुपये में बेच दिया है। यह सौदा देश के गहराते आर्थिक संकट को उजागर करता है। सरकार इसे सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। फैसले के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

Dec 24, 2025 - 12:05
बड़ा खुलासा: 135 अरब में बिकी पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन PIA, खरीदार का नाम सामने आया

कर्ज़ में डूबा पाकिस्तान एक बार फिर सुर्खियों में है, और वजह है उसकी बिखरती अर्थव्यवस्था। IMF और दोस्त देशों की मदद भी अब इस डूबते जहाज़ को बचा नहीं पा रही। हालात इतने बिगड़ गए कि शहबाज शरीफ सरकार को अपनी ही राष्ट्रीय एयरलाइन PIA को बेचने का कड़वा फैसला लेना पड़ा। मंगलवार को पाकिस्तान ने इस ऐतिहासिक प्राइवेटाइजेशन प्रक्रिया को पूरा करते हुए PIA को एक स्थानीय इन्वेस्टमेंट कंपनी की अगुवाई वाले कंसोर्टियम के हवाले कर दिया।

इस्लामाबाद में हुई खास सेरेमनी के दौरान तीन दावेदार—लकी सीमेंट, एयरब्लू और इन्वेस्टमेंट फर्म आरिफ हबीब—ने अपनी सीलबंद बोली एक पारदर्शी बॉक्स में जमा की। माहौल रोमांच से भरा था और जब दूसरे चरण में बिड्स खोली गईं, तो सबसे बड़ा धमाका करते हुए आरिफ हबीब ग्रुप सबसे ऊंचे बिडर के रूप में उभर कर सामने आया।

PIA की कमान अब आरिफ हबीब के हाथ
सरकार ने पहले ही PIA की रेफरेंस कीमत 100 अरब रुपये तय कर दी थी। नियमों के मुताबिक, सबसे ऊंची बोली लगाने वाले दो दावेदारों को अंतिम मुकाबले का मौका दिया गया। लकी सीमेंट और आरिफ हबीब, दोनों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी और लगातार बोली बढ़ाते रहे। आखिरकार तब सबको हैरत में डालते हुए आरिफ हबीब ग्रुप ने 135 अरब रुपये का ऑफर दे दिया—और उसी पल बाज़ी उनके नाम हो गई।

शहबाज सरकार की बड़ी रणनीति
रिपोर्टें बताती हैं कि सरकार PIA के 75% शेयर बेचने की तैयारी में थी, जबकि सफल खरीदार को बाकी 25% स्टेक हासिल करने के लिए 90 दिन का वक्त मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती 75% हिस्सेदारी की बिक्री से मिलने वाली रकम में से 92.5% राशि PIA में दोबारा निवेश की जाएगी, जबकि सिर्फ 7.5% सरकार तक पहुंचेगी। नए मालिक को अगले पांच वर्षों में 80 अरब रुपये का अतिरिक्त निवेश भी करना होगा।

लाइव टेलीविजन पर दिखा 'PIA का सौदा'
पारदर्शिता दिखाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पूरे बिडिंग प्रोसेस को लाइव प्रसारित किया, जिसे लाखों लोगों ने देखा। यह एयरलाइन को बेचने की दूसरी कोशिश थी—पहली बार पिछले साल कीमत न मिलने के कारण योजना रद्द करनी पड़ी थी। इस ऐतिहासिक नीलामी के बाद PM शहबाज शरीफ ने अधिकारियों और प्राइवेटाइजेशन कमीशन को उनकी भूमिका के लिए सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया।

कभी आसमान की शान थी PIA, अब दर्दनाक अंत
कभी दुनिया की टॉप एयरलाइंस में गिनी जाने वाली PIA की कहानी आज एक चेतावनी बन चुकी है। एक समय इसका दबदबा इतना था कि कई देशों ने PIA से प्रेरणा लेकर अपनी एयरलाइंस शुरू की थीं। लेकिन लगातार मिसमैनेजमेंट, भ्रष्टाचार और खराब फैसलों ने इस दिग्गज कंपनी को घुटनों पर ला दिया। नतीजा यह कि पाकिस्तान के पास इसे बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।