बांग्लादेश की सियासत में बड़ा मोड़: 17 साल बाद लौटे खालिदा जिया के बेटे, पीएम पद की रेस तेज
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 वर्षों के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं. बीएनपी ने उनके स्वागत के लिए 50 लाख समर्थकों को जुटाने का लक्ष्य रखा है. यह वापसी फरवरी में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले हो रही है जिसमें तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं.
बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बड़ा धमाका होने जा रहा है, क्योंकि बीएनपी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल बाद गुरुवार को स्वदेश लौट रहे हैं. लंबे निर्वासन के बाद उनकी यह वापसी सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि राजनीतिक भूचाल पैदा करने वाली मानी जा रही है. बीएनपी ने दावा किया है कि उनके स्वागत के लिए लगभग 50 लाख समर्थक सड़कों पर उतरेंगे, जिसे फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले ताकत दिखाने की सबसे बड़ी कवायद माना जा रहा है. इसी वजह से तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत चेहरा बताया जा रहा है.
60 वर्षीय तारिक रहमान इस वक्त बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और पार्टी को भरोसा है कि 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव में उन्हें भारी समर्थन मिलेगा. लंदन से उनकी वापसी ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल चुका है. पिछले साल छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता से बाहर होना पड़ा और उनकी पार्टी बैन हो गई, जिसके बाद से बीएनपी बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी समीकरण पलटकर रख दिए हैं.
1991 से लेकर अब तक, छोटी अंतरिम सरकारों को छोड़ दिया जाए तो बांग्लादेश की सत्ता पर ज्यादातर खालिदा जिया और शेख हसीना का ही वर्चस्व रहा है. यही वजह है कि तारिक की वापसी को इस राजनीतिक चक्र में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. उनके आने से सत्ता का खेल एक नए मोड़ पर पहुंच सकता है.
अमेरिका की इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट की दिसंबर रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है, जिसमें कहा गया है कि बीएनपी सबसे ज्यादा सीटें जीतने की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही इस्लामिक पार्टी ‘जमात-ए-इस्लामी’ भी चुनावी दौड़ में है, जो राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है.
तारिक रहमान की वापसी सिर्फ राजनीति नहीं, उनका निजी संघर्ष भी इससे गहराई से जुड़ा है. उनकी मां खालिदा जिया कई महीनों से गंभीर बीमार हैं, और पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से वह अब बांग्लादेश लौटने का निर्णय ले पाए. उनके लिए यह एक भावुक और निर्णायक क्षण माना जा रहा है.
बीएनपी नेताओं का कहना है कि तारिक रहमान के लिए ऐतिहासिक स्वागत की तैयारी की जा रही है. एयरपोर्ट से लेकर मुख्य सभा स्थल तक का पूरा मार्ग समर्थकों से पाटने की योजना है, और पार्टी 50 लाख से ज्यादा लोगों की मौजूदगी का दावा कर रही है. यह नज़ारा बांग्लादेश की राजनीति में शायद पहले कभी नहीं देखा गया होगा.
बीएनपी के वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिजवी ने कहा कि यह क्षण देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित होगा. उनकी मानें तो तारिक की वापसी बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की सबसे बड़ी शुरुआत है.
तारिक रहमान 2008 से लंदन में रह रहे थे और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर कई गंभीर मामलों में सजा सुनाई गई थी, जिनमें शेख हसीना की हत्या की साजिश का मामला भी शामिल था. लेकिन हसीना के हटने के बाद सभी आरोप रद्द कर दिए गए, जिससे उनकी वतन वापसी में खड़ी सभी कानूनी दीवारें गिर गईं. अब वह नए सियासी अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं.
तारिक रहमान, जो 17 सालों से लंदन में रह रहे थे, अब एक नए राजनीतिक तूफान के साथ बांग्लादेश की जमीन पर कदम रखने वाले हैं.