गले में शॉल, कंधे पर राइफल! आतंकियों से लोहा लेने मैदान में उतरीं जम्मू की महिलाएं, खुद संभाला सर्च ऑपरेशन

जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़ और रियासी जैसे आतंकग्रस्त जिलों में महिलाएं ग्राम रक्षा दल वीडीजी के रूप में सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही हैं। सर्दियों में पुरुष सदस्यों के बाहर जाने पर ये महिलाएं राइफल लेकर गश्त करती हैं और आतंकियों का सामना करने का प्रशिक्षण लेती हैं। इन्होंने कई बार आतंकियों को मार गिराने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे गांवों में सुरक्षा मजबूत हुई है।

Jan 16, 2026 - 10:43
गले में शॉल, कंधे पर राइफल! आतंकियों से लोहा लेने मैदान में उतरीं जम्मू की महिलाएं, खुद संभाला सर्च ऑपरेशन

जंगलों की खामोशी को चीरतीं, कंधों पर बंदूक संभाले ये साहसी वीडीजी महिलाएं अब आतंकियों की दहशत का जवाब बन चुकी हैं। जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़ और रियासी के कई इलाकों में ये वीरांगनाएं दिन-रात पहरा देकर अपने परिवारों ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की ढाल बन गई हैं।

ठंडी हवाओं और कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच, जब पुरुष सदस्य रोजगार के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों की ओर निकल जाते हैं, तब गांवों की सुरक्षा की कमान ये महिलाएं थाम लेती हैं। दुर्गम जंगलों में लगातार गश्त करते हुए ये महिला दस्ते आतंकियों की हर हलचल पर नजर रखती हैं और किसी भी खतरे का डटकर सामना करती हैं।

भद्रवाह के एसपी विनोद शर्मा के अनुसार, इन महिला वीडीजी को हथियार संचालन, नाका चेकिंग, पेट्रोलिंग और खतरे की स्थिति में त्वरित कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण प्रशिक्षण दिए जाते हैं। कई महिलाएं आज भी प्रशिक्षण जारी रखते हुए अपनी क्षमताओं को और मजबूत कर रही हैं। थ्री-नॉट-थ्री राइफल से लैस ये महिलाएं उन दुर्गम गांवों की सुरक्षा संभाल रही हैं, जहां पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं कि यदि आप इनसे बात करेंगे, तो महसूस करेंगे कि इनमें देशभक्ति और राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा का जज्बा कितनी गहराई से भरा हुआ है। उनके शब्दों में नहीं, उनके हौसलों में देशप्रेम झलकता है।

याद दिला दें कि 2009 में राजौरी के कलसी इलाके की बहादुर गुज्जर युवती रुखसाना कौसर ने एक आतंकी को मौत के घाट उतारकर पूरे देश को गर्व महसूस कराया था। उनकी इसी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जो शांति काल में दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है।

डोडा और किश्तवाड़ इलाके भी महिला बहादुरी की ऐसी कई घटनाओं के साक्षी रहे हैं, जहां महिला वीडीजी ने अपने पुरुष साथियों के साथ मिलकर आतंकियों का सफाया करने में अहम भूमिका निभाई। एसपी विनोद शर्मा के अनुसार, इन जिलों में पुरुषों की अनुपस्थिति में महिलाएं अब एक भरोसेमंद सुरक्षा बल के रूप में उभरकर सामने आई हैं, जो बिना किसी भय के आतंकियों को चुनौती दे रही हैं।

वीडीजी की खासियत यह है कि इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय की महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर सेवा दे रही हैं। 21 वर्षीय शिवानी, जो सिविली गांव की वीडीजी सदस्य हैं, कहती हैं कि उन्हें हर परिस्थिति में लड़ने का प्रशिक्षण मिला है और वे पूरी तरह तैयार हैं देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए।

भद्रवाह के विधायक दिलीप सिंह परिहार का कहना है कि वीडीजी महिलाओं की मौजूदगी मात्र से ही आतंकियों के हौसले पस्त हो जाते हैं और वे गांवों में घुसने से पहले सौ बार सोचते हैं।