785 दिन का इंतज़ार, घरेलू मेहनत और धमाकेदार वापसी — भारतीय क्रिकेट के ‘सिंड्रेला मैन’ बने ईशान किशन

ईशान किशन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ रायपुर टी20 मैच में 76 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली. ईशान किशन ने मेहनत से अपनी वापसी का अध्याय लिखा है. ईशान ने घरेलू क्रिकेट में रन बनाए और फिर से भारतीय टीम में दोबारा जगह बनाई.

Jan 24, 2026 - 11:19
785 दिन का इंतज़ार, घरेलू मेहनत और धमाकेदार वापसी — भारतीय क्रिकेट के ‘सिंड्रेला मैन’ बने ईशान किशन

ईशान किशन की टीम इंडिया में वापसी किसी फिल्मी चमत्कार से कम नहीं लगती. मानो ‘सिंड्रेला मैन’ की असल जिंदगी वाली कहानी दोबारा जी उठी हो—एक ऐसा खिलाड़ी जो खेल से बेइंतहा मोहब्बत करता है, लेकिन किस्मत ने उसे लंबा इंतज़ार, दर्द और संघर्ष का कड़वा दौर झेलने पर मजबूर कर दिया. और फिर शुरू हुआ वह सफर, जहां उसे खुद को पूरी दुनिया के सामने फिर से साबित करना था.

यह ब्रेक ईशान की पसंद नहीं, मजबूरी थी. बीसीसीआई ने साफ कह दिया था—वापसी तभी मिलेगी, जब घरेलू क्रिकेट में दमदार रन निकले. भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे नाम हुए, जिन्हें कभी भविष्य का सितारा कहा गया, लेकिन वक्त के साथ वे गुमनामी में खो गए—विनोद कांबली से लेकर पृथ्वी शॉ तक. ऐसे में लगने लगा था कि ईशान भी शायद उसी लिस्ट का हिस्सा बन जाएंगे.

लेकिन ईशान किशन ने जिंदगी से हार मानने का ऑप्शन चुना ही नहीं. टीम इंडिया से पूरे 785 दिन दूर रहने के बावजूद उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में उन्होंने पुराने रंग की हल्की झलक दी थी, लेकिन रायपुर के दूसरे मैच में उन्होंने ऐसा तूफान मचाया कि पूरे क्रिकेट जगत को एहसास हो गया—ईशान अभी खत्म नहीं, बल्कि पहले से ज्यादा खतरनाक हो चुके हैं.

सिर्फ 32 गेंदों पर 76 रन ठोककर उन्होंने भारत को ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया. मैच के बाद मोहम्मद कैफ ने X पर लिखा—‘ईशान की असली ताकत है उनका भरोसा और मेहनत. हर गिरावट के बाद उठने का हुनर ही उन्हें खास बनाता है. यही होता है सच्चा कमबैक.’

Ishan Kishan’s strength is his belief and hard work. That's what makes him rise after every fall. Real come back for him.

रायपुर की पिच पर ईशान किसी जुझारू फाइटर की तरह बल्लेबाजी कर रहे थे—हर गेंद पर हमला, हर शॉट में दम. कई बार तो बल्ला भी हवा में उड़ता दिखा. हालात ऐसे हो गए कि मैदान में मौजूद फील्डर्स को भी हेलमेट ज्यादा टाइट बांधने की जरूरत महसूस हो रही थी.

वर्तमान में जीने का अनमोल मंत्र
बड़े झटकों के बाद खिलाड़ी अक्सर भविष्य की चिंता में उलझ जाते हैं, जिससे करियर और बिगड़ जाता है. विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज सालों से कहते आए हैं—‘वर्तमान में जियो.’ ईशान ने भी यही रास्ता पकड़ा. जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक उन्होंने घरेलू क्रिकेट में जमकर रन बरसाए. टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले उन्होंने झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिताई. 10 पारियों में 517 रन—और स्ट्राइक रेट लगभग 197!

मैच के बाद ईशान बोले—‘जिंदगी लंबी है, और छोटे संघर्ष ही आपको मजबूत बनाते हैं. इसलिए मैंने सीखा कि वर्तमान में रहो, शांत रहो और वही करो जो उस वक्त जरूरी हो.’ भारतीय टीम से लौटकर किसी खिलाड़ी का घरेलू क्रिकेट खेलना हमेशा सबका ध्यान खींचता है. जैसे कोहली दिल्ली के लिए उतरे हों या रोहित मुंबई की जर्सी में मैदान पर उतरे हों—जुनून और प्रेरणा दोनों मिलती है.

ईशान भले अभी सुपरस्टार की कैटिगरी में न आते हों, लेकिन उनका दोहरा वनडे शतक उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग साबित करता है. झारखंड जैसी उभरती टीम के लिए उनका अनुभव खजाने से कम नहीं. उन्होंने कुमार कुशाग्र, अनुकूल रॉय और रॉबिन मिंज जैसे युवाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय टीम को प्राथमिकता देना शुरू किया—और यहीं से उनके खेल में एक नई चमक आई. ईशान ने कहा, ‘लौटकर आप उदाहरण बनना चाहते हैं. हमारी टीम का इतिहास भले बड़ा न हो, पर हम सब मिलकर आगे बढ़ना चाहते थे. घरेलू क्रिकेट में हमारा फोकस टीम को फायदा पहुंचाने पर था. साथियों की मेहनत देखकर मैंने भी बहुत कुछ सीखा.’

गंभीर का भरोसा और टीम इंडिया का मजबूत कंधा
किसी भी खिलाड़ी की वापसी तभी मजबूत होती है जब सिस्टम उस पर भरोसा करे. गौतम गंभीर भले कितनी भी आलोचनाओं से घिरे हों, लेकिन खिलाड़ियों के साथ उनकी बॉन्डिंग गजब की रही है. ईशान के मामले में भी यही साफ दिखा. ईशान ने बताया—‘सेलेक्शन के बाद गंभीर सर ने कहा कि घरेलू क्रिकेट में जो कर रहे थे, वही करो. कोई दबाव नहीं, सिर्फ आजादी. टीम का माहौल भी ऐसा था कि सब एक-दूसरे को बेहतर करना चाहते थे.’

मैच के बाद सूर्यकुमार यादव का ईशान को गले लगाना और गंभीर का पीठ थपथपाना यह बताने के लिए काफी था कि टीम उनके इस सुनहरे कमबैक के पीछे मजबूती से खड़ी है.