‘कब्र खुदेगी…’ नारे से JNU में फिर बवाल! ABVP बोली– ये है हिंदू विरोधी सोच

जेएनयू कैंपस में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी का वीडियो वायरल होने से विवाद खड़ा हो गया है. साबरमती हॉस्टल के बाहर छात्रों ने 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' के नारे लगाए. ABVP ने इसे हिंदू विरोधी मानसिकता बताया है, जबकि JNUSU ने इसे विचारधारा की लड़ाई कहा है.

Jan 6, 2026 - 12:44
‘कब्र खुदेगी…’ नारे से JNU में फिर बवाल! ABVP बोली– ये है हिंदू विरोधी सोच

दिल्ली का मशहूर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार मामला ऐसा कि सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मच गई है। देर रात साबरमती हॉस्टल के बाहर वायरल हुए 35 सेकंड के वीडियो में कुछ छात्र कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ तीखे और उग्र नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने इंटरनेट पर आग की तरह फैलकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुए हमले की छठी बरसी पर आयोजित सभा के दौरान सामने आया। साथ ही छात्रों में हालिया कोर्ट के एक फैसले को लेकर भी गुस्सा देखा गया, जिसके विरोध में चर्चा और नारेबाजी रातभर चली। हालांकि अब तक दिल्ली पुलिस को इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है।

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में इस नारेबाजी को ‘एंटी इंडिया थॉट’ का नाम दिया गया और इसे शरजील इमाम तथा उमर खालिद के समर्थन में बताया गया। वीडियो के सामने आते ही कई लोगों ने इसे विश्वविद्यालय की विचारधारा को खतरनाक तरीके से मोड़ने की कोशिश करार दिया और जमकर प्रतिक्रिया दी।

जेएनयू छात्र संगठनों की सफाई: वैचारिक विरोध, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं

JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इन आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया और कहा कि यह सभा 5 जनवरी की हिंसा को याद करने के लिए आयोजित की गई थी। उनका कहना है कि नारों का निशाना कोई व्यक्ति नहीं बल्कि वह वैचारिक ढांचा है, जिसे वे ‘फासीवादी’ मानते हैं। SFI की उपाध्यक्ष गोपिका ने भी यही दोहराया कि विरोध हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ था, न कि किसी खास नेता के खिलाफ।

राजनीति में बढ़ी हलचल: कपिल मिश्रा और मंत्रियों का हमला

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, इसलिए सपोले बिलबिला रहे हैं’। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सली, आतंकी और दंगाइयों के समर्थक हताश हैं क्योंकि उनके खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। उनका बयान भी चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

वहीं यूपी के मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि JNU में जो छात्र ऐसे नारे लगा रहे हैं, वे देश के पैसे से पढ़कर ‘विदेशी मानसिकता’ फैलाते हैं और देश को ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए। उनके बयान ने भी मामले को और उग्र बना दिया है।

ABVP का आरोप: ‘अर्बन नक्सल’ और हिंदू विरोधी मानसिकता

ABVP जेएनयू अध्यक्ष मयंक पांचाल ने इस नारेबाजी को देश-विरोधी मानसिकता बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। उनका दावा है कि नारों में हिंदू विरोधी भावना साफ झलकती है। ABVP ने इसे ‘इंटेलेक्चुअल टेररिज्म’ बताते हुए सोशल मीडिया पर छात्रों के खिलाफ मुहिम भी शुरू कर दी है। संगठन के नेताओं का मानना है कि यह प्रदर्शन उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में किया गया था।

6 साल पुरानी चोट आज भी ताज़ा

5 जनवरी 2020 को जेएनयू में नकाबपोशों द्वारा किए गए हमले के 6 साल बाद भी हमलावरों का न पकड़ जाना छात्रों के लिए बड़ा सवाल है। हर साल की तरह इस बार भी छात्र इस दिन को ‘क्रूर हमला दिवस’ के रूप में याद करते हैं। इसी गुस्से और ताजा कोर्ट फैसले के विरोध ने मिलकर विश्वविद्यालय में फिर से विवाद का बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है।