यूपी की राजनीति में हलचल! ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद सपा का बड़ा ऑफर, क्या BJP की बढ़ी टेंशन
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी सपा ने इस समुदाय को एक प्रस्ताव दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह घटनाक्रम भारतीय जनता पार्टी भाजपा के लिए चिंता का विषय बनता है और राज्य की राजनीति में क्या परिवर्तन आते हैं।
लखनऊ की ठंडी सुबह में अचानक गर्माहट तब बढ़ गई, जब कुशीनगर के भाजपा विधायक पंचानंद पाठक के घर करीब 40 ब्राह्मण विधायक जुट गए। विधानमंडल सत्र के बीच हुई इस गुप्तनुमा बैठक ने राजनीति गलियारों में तेज हलचल पैदा कर दी। बाहर से इसे सामाजिक बैठक बताया गया, लेकिन अंदरखाने चल रही चर्चाओं ने नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत दे दिए। सोशल मीडिया पर विपक्षी नेताओं ने इस मुलाकात को लेकर नये तीर चलाने शुरू कर दिए।
कुछ ही दिन पहले क्षत्रिय और फिर कुर्मी समुदाय की बैठकों ने माहौल वैसे ही गर्म कर रखा था, ऐसे में ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने अटकलों को और हवा दे दी। विपक्ष पहले से ही भाजपा पर ब्राह्मणों की उपेक्षा के आरोप लगाता रहा है, इसलिए इस बैठक को शक्ति प्रदर्शन की तरह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह जमावड़ा सरकार और संगठन दोनों को एकजुटता का एक जोरदार संदेश देने की कोशिश था।
इधर, सपा महासचिव शिवपाल यादव ने मौके पर तंज कसते हुए भाजपा विधायकों को खुलेआम अपनी पार्टी ज्वाइन करने का न्योता दे दिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पीछे नहीं रहे और एक्स पर तीखी चुटकी लेते हुए इस बैठक पर सवाल खड़े कर दिए। राजनीतिक माहौल अचानक बेहद दिलचस्प हो उठा है।
मंगलवार को राजधानी में विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर हुई बैठक में करीब 40 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी शामिल हुए, जिनमें अधिकतर पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रतिनिधि थे। हैरानी की बात यह रही कि अन्य दलों के कई ब्राह्मण विधायक भी इस बैठक का हिस्सा बने। यह उपस्थिति खुद कई संकेत छोड़ गई कि मामला सिर्फ एक ‘भोज’ तक सीमित नहीं था।
बताया जाता है कि बैठक में समाज की एकजुटता, हालिया विवादों और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ब्राह्मण समाज को निशाना बनाए जाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही यह भी उठाया गया कि भाजपा को मिली बड़ी जीत में ब्राह्मणों की निर्णायक भूमिका रही, फिर भी संगठन और सरकार में उनकी अनदेखी होती रही है। कई विधायकों ने साफ कहा कि दूसरी जातियों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है।
बैठक में शामिल होने वालों में रत्नाकर मिश्रा, शलभ मणि त्रिपाठी, ऋषि त्रिपाठी, प्रेमनारायण पांडेय, प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्रा, अंकुर राज तिवारी, विनय द्विवेदी और एमएलसी साकेत मिश्रा जैसे प्रमुख चेहरे मौजूद थे। हालांकि आयोजक विधायक पंचानंद पाठक का कहना है कि यह केवल एक पारिवारिक भोज था, जिसमें प्रदेश के ब्राह्मण और भूमिहार समुदाय के जनप्रतिनिधि शामिल हुए और आपसी मेल-मिलाप का माहौल था।
पाठक ने दावा किया कि बातचीत सामान्य परिवारिक मुद्दों और परस्पर सहयोग पर आधारित थी, राजनीति से इसका कोई संबंध नहीं था। लेकिन विपक्ष इसे लेकर लगातार हमलावर है। अखिलेश यादव ने लिखा कि जब ‘बड़ी बैठकें’ हो ही रही हैं तो मुख्यमंत्री को उन भोजों की भी याद कर लेनी चाहिए, जिन्हें विधायक उनके खिलाफ कर चुके हैं। वहीं शिवपाल यादव ने कहा कि भाजपा जातिवाद फैलाती है और जो विधायक नाराज हैं, सपा में उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा।