अमेरिका की वेनेजुएला स्ट्राइक जैसी सैन्य क्षमता भारत के पास भी, क्या बदल जाएगा समीकरण!
भारत के पास AH-64E अपाचे, CH-47F चिनूक और AGM-114 हेलफायर जैसे अमेरिकी हथियार अब उसकी सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं. वेनेजुएला हमले में इस्तेमाल हुए ये हथियार भारत की रक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशनों और सीमा सुरक्षा में इनकी तैनाती से देश की सैन्य क्षमता और प्रतिक्रिया गति मजबूत हुई है.
वेनेजुएला पर हुए अचानक अमेरिकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, और ट्रंप के गुप्त आदेश पर चला यह एक्शन किसी हॉलीवुड फिल्म से कम नहीं लगा. फाइटर जेट, घातक हेलिकॉप्टर और हाई-टेक मिसाइलों की बारिश ने कराकस का आसमान हिला दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं—इसी तरह के सुपर-पावरफुल हथियार भारत भी अपनी सेना में शामिल कर चुका है?
भारतीय सेना और वायुसेना ने अमेरिका से बोइंग एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, सीएच-47एफ चिनूक ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें खरीदी हैं. दिलचस्प बात यह है कि वही हथियार, जिनसे अमेरिका ने वेनेजुएला में कहर बरपाया, अब भारत की रक्षा ढाल बन चुके हैं.
वेनेजुएला की राजधानी में जहां अपाचे ने जमीन पर छिपे टारगेट्स को तबाह किया, वहीं चिनूक ने स्पेशल कमांडो उतारकर ऑपरेशन को नए मुकाम पर पहुंचा दिया. भारत ने 2015 से 2020 के बीच इन घातक मशीनों की खरीद की, ताकि चीन और पाकिस्तान के मोर्चों पर दबदबा बनाया जा सके. भारत के पास फिलहाल 22 अपाचे और 15 चिनूक मौजूद हैं.
एएच-64ई अपाचे को दुनिया का सबसे खतरनाक अटैक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो टैंकों, बंकरों और दुश्मन पोस्ट को चंद सेकंड में खत्म करने की ताकत रखता है. अमेरिका ने वेनेजुएला में इसे बेहद कम ऊंचाई पर उड़ाकर मिसाइल बरसाने के लिए इस्तेमाल किया. भारत इन हेलिकॉप्टरों को सीमाओं पर हाई-इंटेंसिटी मिशनों और चौकसी के लिए तैनात करता है.
इसकी खासियत यह है कि यह रात के अंधेरे में भी सटीक हमले कर सकता है और दुश्मन के बेस पर बिना शोर किए पहुंच सकता है. यही वजह है कि इसे दुनिया में ‘नाइट हंटर’ भी कहा जाता है.
भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग: भारत ने 2019 में अपाचे को सेना में शामिल किया और इसके बाद इन्हें पठानकोट और जोरहाट जैसे रणनीतिक बेस पर तैनात किया गया. LAC पर चीन की गतिविधियों के दौरान इनकी गश्त बेहद काम आई. 2025 में पहाड़ों में हुए एक मुश्किल ऑपरेशन में ये सप्लाई और रेकी में बड़े काम आए. उत्तराखंड बाढ़ के दौरान भी इन हेलिकॉप्टरों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई.
सीएच-47एफ चिनूक एक सुपर हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर है, जो भारी तोपों से लेकर दर्जनों सैनिकों तक—सबको एक साथ लेकर उड़ सकता है. वेनेजुएला हमले में अमेरिका ने इसे कमांडो उतारने और ऑपरेशन सपोर्ट के लिए उपयोग किया. भारत में यह दुर्गम और ऊंचे इलाकों में लॉजिस्टिक्स की रीढ़ माना जाता है.
रात में कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और स्पेशल मिशन पूरा करने में चिनूक की क्षमता अद्भुत है. वेनेजुएला ऑपरेशन में भी यही वजह थी कि अमेरिकी फोर्सेस ने इसे फ्रंटलाइन पर भेजा.
भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग: 2019 में इंडक्ट होने के बाद से चिनूक चंडीगढ़ बेस से सियाचिन ग्लेशियर तक सप्लाई पहुंचा रहा है. 2020 की गलवान झड़प के समय यह सैनिकों और उपकरणों को तेजी से पहुंचाने में जुटा रहा. 2023 की हिमाचल बाढ़ और 2024 की असम बाढ़ में राहत सामग्री पहुंचाकर इसने कई जिंदगियां बचाईं.
एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल एक प्रिसीजन स्ट्राइक हथियार है, जो टैंकों, बिल्डिंग्स और दुश्मन ठिकानों को ध्वस्त कर देती है. वेनेजुएला में अपाचे से दागी गई इन मिसाइलों ने कई दुश्मन ठिकानों को पल भर में मिटा दिया. भारत भी इन मिसाइलों को अपाचे के साथ मुख्य रूप से एंटी-टैंक मिशनों में इस्तेमाल करता है.
भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग: हेलफायर मिसाइलें 2019 में भारत की सेना का हिस्सा बनीं. LAC पर चीन के खिलाफ इनकी टेस्ट फायरिंग सफल रही. 2025 के एक बड़े सैन्य अभ्यास में इन मिसाइलों ने टैंक टारगेट्स को इतनी सटीकता से हिट किया कि विदेशी विशेषज्ञ भी हैरान रह गए. अभी ये ट्रेनिंग और बॉर्डर सिक्योरिटी में अहम भूमिका निभा रही हैं.
स्पष्ट है कि ये अमेरिकी हथियार भारत की रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं. वेनेजुएला हमले ने साबित कर दिया कि आधुनिक हथियार युद्ध का पूरा परिदृश्य बदल सकते हैं. भारत ने अमेरिका से 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा की डील में इन्हें खरीदा और विशेषज्ञों का मानना है कि LAC और LOC पर इनका प्रभावी असर दिखेगा. भारत इनका उपयोग केवल रक्षा और शांति की सुरक्षा के लिए करता है.