UGC के नए नियमों पर आज बड़ा फैसला संभव! सुप्रीम कोर्ट में PIL की सुनवाई, CJI जस्टिस सूर्यकांत खुद करेंगे सुनवाई

यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है. नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा, जबकि सामान्य वर्ग को संभावित पीड़ित के रूप में शामिल नहीं किया गया है.

Jan 29, 2026 - 11:23
UGC के नए नियमों पर आज बड़ा फैसला संभव! सुप्रीम कोर्ट में PIL की सुनवाई, CJI जस्टिस सूर्यकांत खुद करेंगे सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में आज एक बेहद चर्चित सुनवाई होने जा रही है, जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए ‘भेदभाव विरोधी नियमों’ को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार किया जाएगा. यह मामला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ के समक्ष रखा गया है. बुधवार को याचिका का तत्काल उल्लेख होने के बाद कोर्ट ने बिना देरी सुनवाई करने का फैसला लिया था, जिससे इस मुद्दे पर देशभर की निगाहें टिक गई हैं.

याचिका दाखिल करने वालों का कहना है कि यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों पर अनुचित भार डालते हैं और उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जा रहा है. अदालत को बताया गया कि इस नीति के खिलाफ कई स्थानों पर विरोध और नाराजगी देखी जा रही है. इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह हालात से अच्छी तरह वाकिफ है और याचिका में मौजूद कुछ तकनीकी खामियों को जल्द ठीक करने के निर्देश दिए.

यूजीसी के नए नियमों में आखिर क्या है?

नए नियमों के तहत देश के हर उच्च शिक्षण संस्थान में अनिवार्य रूप से ‘समानता समितियों’ का गठन करना पड़ेगा. इन समितियों का मुख्य काम होगा—किसी भी तरह के भेदभाव की शिकायत की जांच करना और परिसर में समानता तथा न्यायपूर्ण माहौल सुनिश्चित करना. नियमों के मुताबिक इन समितियों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग समुदायों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी कर दी गई है.

दुरुपयोग की आशंका और बढ़ती चिंताएं

ये नए प्रावधान साल 2012 के पुराने सलाहात्मक नियमों की जगह लागू किए गए हैं. आलोचकों का आरोप है कि इनमें प्रक्रियाओं को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है और इससे गलत तरीके से इस्तेमाल होने का खतरा बढ़ जाता है. सबसे बड़ी आपत्ति इस बात को लेकर है कि नए ढांचे में ओबीसी समुदायों को भी संभावित पीड़ितों की सूची में शामिल किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग को इससे बाहर रखा गया है—जो उन्हें स्थायी रूप से दोषी मानने जैसा लगता है.

कई राज्यों में भड़का छात्र आंदोलन

इन नियमों के विरोध में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किए हैं. स्थिति गर्माती देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि किसी भी छात्र के साथ नए नियमों के तहत कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कानून का दुरुपयोग बिल्कुल न हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थानों पर भी इस नियम को सही ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी होगी.