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<title>Pratinidhi &amp; News Magazine &amp; : विदेश</title>
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<description>Pratinidhi &amp; News Magazine &amp; : विदेश</description>
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<dc:rights>Copyright 2023 Pratinidhi &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>

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<title>मुंबई इंडियंस के अफगानी क्रिकेटर ने आईपीएल से पहले ही पाकिस्तान को दे डाली धमकी</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान द्वारा काबुल के नशा मुक्ति अस्पताल पर किए गए हवाई हमले में 400 लोगों की मौत और 250 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई। अफगान क्रिकेटर अल्लाह गजनफर ने इस अमानवीय हमले की तीखी निंदा की। घटना ने क्षेत्र में तनाव और मानवीय संकट को और गहरा कर दिया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 10:49:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अल्लाह गजनफर बयान, Kabul airstrike news, पाकिस्तान अफगानिस्तान तनाव, Afghanistan hospital attack, भारत अफगान दोस्ती, Pakistan warning statement, Afghan cricket controversy, Kabul humanitarian crisis, Mumbai Indians 2026 player</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>काबुल में 2,000 बेड वाले नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए विनाशकारी हवाई हमले ने पूरे अफगानिस्तान को झकझोर दिया। लगभग 400 निर्दोष लोगों की मौत और 250 से ज्यादा घायल, यह खबर सुनकर पूरा देश सदमे में है। अस्पताल का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल चुका है। इस भीषण त्रासदी के बाद अफगान क्रिकेटर अल्लाह गजनफर गुस्से में फट पड़े और इस हमले को अमानवीय बताते हुए पाकिस्तान पर गंभीर सवाल खड़े किए।</p>
<p>गजनफर ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि गरीब मरीजों की जिंदगी बचाने वाली जगह को निशाना बनाना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। उन्होंने अफगानिस्तान के इतिहास को याद दिलाते हुए दो-टूक कहा कि अगर वही गलती फिर दोहराई गई, तो इसका अंजाम पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक होगा। साथ ही उन्होंने भारत को अफगानिस्तान का सबसे सच्चा दोस्त बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।</p>
<p>आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस की जर्सी पहनने जा रहे अल्लाह गजनफर ने एक इंटरव्यू में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वहां के लोगों के पास इलाज कराने तक के पैसे नहीं हैं, और अब उनकी अंतिम उम्मीद—अस्पताल—को भी तबाह कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को अफगानिस्तान की जनता के लिए अस्वीकार्य बताया।</p>
<p><strong>वहां लोग पहले ही गरीबी से जूझ रहे हैं, और अब उनके अस्पतालों को बर्बाद कर देना… यह किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।</strong></p>
<p>— अल्लाह गजनफर</p>
<p>उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि आखिर आम नागरिकों को मारने से कोई कौन-सी ताकत साबित करना चाहता है? गजनफर ने चेतावनी देते हुए कहा, <em><strong>"दुनिया अफगानिस्तान का इतिहास अच्छी तरह जानती है। अगर इतिहास फिर पलट गया, तो इसका अंजाम पाकिस्तान के लिए बेहद बुरा होगा।"</strong></em></p>
<p>मुंबई इंडियंस का हिस्सा बनने जा रहे गजनफर ने आगे कहा कि भारत हमेशा अफगानिस्तान का सबसे करीबी दोस्त रहा है, और अफगान जनता उम्मीद करती है कि भारत इस मुश्किल वक्त में कदम बढ़ाए। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले ही अनगिनत संकटों से गुजर रही है, ऐसे में युद्ध और हिंसा किसी भी देश का भला नहीं कर सकती।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान युद्ध की आहट के बीच बड़ा सवाल: क्या पाकिस्तान कूदेगा जंग में? सऊदी की घबराहट, मुनीर संग तेहरान पर बड़ी रणनीति</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-role-iran-tensions-saudi-munir-strategy-tehran</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजरायल और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब भी सीधे निशाने पर आ गया है. सऊदी ऑयल फील्ड पर ड्रोन हमल हो रहे हैं. इस बीच सऊदी रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अहम बैठक हुई. इसमें ईरान के हमलों को रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की गई, जिससे पाकिस्तान की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:35:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान सऊदी तनाव news, Pakistan Saudi meeting, आसिम मुनीर ईरान crisis, Gulf region security, सऊदी ऑयल फील्ड attacks, Middle East tensions, ईरान हमले रोकने की रणनीति, US Israel Iran conflict, पाकिस्तान की भूमिका geopolitics</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान का गुस्सा अब खाड़ी देशों पर फट पड़ा है, खासकर उन मुल्कों पर जो वॉशिंगटन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. शुरुआत में ईरान केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा था, लेकिन ताजा हालात ने दुनिया को चौंका दिया है—अब सऊदी अरब के तेल कुओं तक को टारगेट किया जा रहा है. इसी तनाव के बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मुलाकात ने भू-राजनीतिक समीकरणों में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पाकिस्तान भी ईरान के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरेगा?</p>
<p>रियाद में हुई ये मुलाकात सिर्फ कूटनीति की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि दोनों देशों के बीच मौजूद सामरिक रक्षा समझौते के तहत बेहद अहम बातचीत हुई. ईरान के बढ़ते हमलों को रोकने, सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और आने वाली चुनौतियों का सामना करने को लेकर इस मीटिंग में गहन चर्चा की गई. इस बैठक ने साफ कर दिया कि हालात पहले ही बेहद गंभीर हो चुके हैं और अब किसी भी पल बड़ा फैसला सामने आ सकता है.</p>
<p>सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके पुष्टि की कि बातचीत का केंद्र बिंदु ईरान के हमले और उन्हें रोकने के जरूरी कदम थे. उन्होंने कहा कि यह चर्चा ‘ज्वाइंट स्ट्रैटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट’ के तहत हुई है और इस तरह की कार्रवाई पूरे क्षेत्र की स्थिरता को हिला देती है. इस बयान ने संकेत दे दिया कि सऊदी अब किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं ले रहा और पाकिस्तान का रोल अब पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गया है.</p>
<p><strong>सऊदी के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर धावा, तनाव चरम पर</strong></p>
<p>हालिया हमलों ने खाड़ी क्षेत्र को हिला कर रख दिया है. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने छह ड्रोन मार गिराए, जो सीधे शायबा ऑयल फील्ड की ओर बढ़ रहे थे—यह वही विशाल तेल क्षेत्र है जो यूएई की सीमा से सटा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, चार अलग-अलग अटैक वेव में कुल 16 ड्रोन दागे गए थे, जिन्हें रेगिस्तान में इंटरसेप्ट किया गया. इसके बाद दो बैलिस्टिक मिसाइलें भी लॉन्च की गईं, लेकिन उन्हें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास ही तबाह कर दिया गया.</p>
<p>ये पहला मौका है जब ईरान ने सीधे सऊदी के तेल भंडारों को निशाना बनाया है. 2019 में जरूर इसी क्षेत्र पर हमला हुआ था, लेकिन तब हमलावर हूती विद्रोही थे—ईरान की सीधी कार्रवाई नहीं. अब जबकि हमला ईरान की ओर से हुआ है, खतरे का स्तर कई गुना बढ़ चुका है. हालांकि ड्रोन किस दिशा से आए, इस पर आधिकारिक जानकारी अभी तक जारी नहीं की गई है.</p>
<p>المتحدث الرسمي لـ #وزارة_الدفاع: اعتراض وتدمير 4 مسيّرات في الربع الخالي متجهة إلى حقل شيبة. pic.twitter.com/dWdDaGgcTv</p>
<p><strong>ईरान-सऊदी तनाव में पाकिस्तान की नई भूमिका</strong></p>
<p>इस तेजी से बदलते हालात में पाकिस्तान भी अब अपने पत्ते खुलकर खेलता दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में बड़ा दावा किया कि सऊदी पर ईरान की कम प्रतिक्रिया के पीछे पाकिस्तानी कूटनीति का हाथ है. उन्होंने कहा कि अपने रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने ईरान को चेतावनी दी कि वह सऊदी के खिलाफ हमले बढ़ाने से पहले इस समझौते को ध्यान में रखे.</p>
<p>इशाक डार के मुताबिक, ईरान ने यह आश्वासन मांग लिया था कि सऊदी की जमीन पाकिस्तान की तरफ से उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी, और पाकिस्तान ने यह भरोसा दे भी दिया. यह बयान बताता है कि पाकिस्तान अब सिर्फ मध्यस्थ नहीं, बल्कि इस पूरे विवाद में एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है.</p>
<p><strong>क्या अब युद्ध का दायरा और बढ़ेगा?</strong></p>
<p>अब तक खाड़ी देश सीधे इस तनाव में शामिल नहीं थे, और अमेरिका ने भी इन देशों की जमीन का उपयोग अपने हमलों के लिए नहीं किया. लेकिन अगर ईरान के हमले इसी तरह बढ़ते रहे और सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो गया तो पूरा क्षेत्र एक बड़े भू-रणनीतिक टकराव में फंस सकता है. यह संघर्ष सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दक्षिण एशिया तक इसका असर पहुंचेगा—जहां पाकिस्तान और ईरान की लंबी साझा सीमा है.</p>
<p>फिलहाल पाकिस्तान ने कूटनीति के जरिए हालात शांत करने की कोशिश की है, लेकिन यदि ईरान ने सऊदी पर बड़े पैमाने पर हमले जारी रखे, तो रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव बढ़ना तय है. आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, यह पूरी दुनिया की नजर में सबसे बड़ा सवाल है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान युद्ध के बीच ट्रंप से खफा खाड़ी देश! दो बड़े मुद्दों पर बढ़ा जबरदस्त टकराव</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-stance-gulf-nations-ire-two-issues-iran-conflict</link>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट की जंग अब अमेरिका के लिए भी मुश्किल बनती दिख रही है. खाड़ी देशों का आरोप है कि यूएस और इजरायल ने ईरान पर हमले से पहले उन्हें भरोसे में नहीं लिया. अब ईरान के पलटवार में वही देश सबसे ज्यादा निशाने पर हैं, जिससे वॉशिंगटन और उसके अरब सहयोगियों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:33:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका ईरान conflict, खाड़ी देशों की नाराज़गी, Middle East tensions, ईरान पर हमला controversy, US Israel strategy criticism, Gulf countries security concerns, मध्य पूर्व युद्ध अपडेट, Iran retaliation news, अमेरिकी विदेश नीति विवाद, West Asia crisis</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई जंग अब अनिश्चितता की धुंध में घिरती जा रही है. हालात इतने तगड़े हो चुके हैं कि खाड़ी देशों में भी नाराजगी उबलने लगी है. उनका आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर होने वाले बड़े हमले की कोई पूर्व सूचना नहीं दी, और अगर मिल जाती, तो वे अपने बचाव की तैयारी कर सकते थे. अचानक हुए पलटवार ने उन्हें चौकन्ना और परेशान कर दिया है.</p>
<p>पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दो खाड़ी देशों के शीर्ष अधिकारियों ने साफ कहा कि वे अमेरिका के युद्ध प्रबंधन से बेहद निराश हैं, खासकर 28 फरवरी को हुए शुरुआती हमले के बाद. उनका कहना है कि न तो उन्हें इस ऑपरेशन की जानकारी दी गई और न ही उनकी चेतावनियों को गंभीरता से लिया गया कि ये युद्ध पूरे क्षेत्र को तबाह कर सकता है. उनकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा.</p>
<p>एक अधिकारी ने तो ये तक कह दिया कि अमेरिका ने खाड़ी देशों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया है. उनके अनुसार, ऑपरेशन का फोकस सिर्फ अमेरिकी और इजरायली सुरक्षा पर रहा, जबकि खाड़ी देशों को मुश्किल हालात में खुद को संभालने के लिए छोड़ दिया गया. इंटरसेप्टर्स जैसी महत्वपूर्ण रक्षा प्रणाली भी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है.</p>
<p>इन अधिकारियों ने गोपनीयता की शर्त पर ये बातें बताते हुए साफ किया कि मामला बेहद संवेदनशील है. दूसरी ओर बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई से आधिकारिक बयान लेने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी. ये चुप्पी भी बहुत कुछ कह रही है.</p>
<p><strong>अमेरिका और इजरायल पर खुला हमला</strong></p>
<p>भले ही सरकारी बयान सामने न आए हों, लेकिन खाड़ी देशों से जुड़े प्रभावशाली चेहरे अमेरिका पर खुलकर निशाना साध रहे हैं. उनका आरोप है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक खतरनाक और अनावश्यक जंग में ढकेल दिया है. ये आरोप अब वैश्विक बहस का हिस्सा बन चुके हैं.</p>
<p>सऊदी अरब के पूर्व जासूस प्रमुख प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने तो सीएनएन पर कह दिया कि यह युद्ध पूरी तरह से नेतन्याहू की देन है, और किसी तरह उन्होंने ट्रंप को अपने एजेंडे का समर्थन करने के लिए मना लिया. यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल की तरह फैल गया है.</p>
<p>उधर, पेंटागन ने भी सांसदों के साथ हुई गुप्त बैठक में माना कि वे ईरान के लगातार आ रहे ड्रोन हमलों से निपटने में संघर्ष कर रहे हैं. इन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों समेत कई अहम लक्ष्यों को खतरे में डाल दिया है. सुरक्षा व्यवस्था डगमगाती दिख रही है.</p>
<p>ईरान की नजर में खाड़ी देश आसान निशाने हैं, क्योंकि वे उसकी कम दूरी की मिसाइलों की पहुंच में आते हैं. साथ ही इन जगहों पर अमेरिकी सेना के बेस भी मौजूद हैं. इससे ईरान के हमलों से तेल आपूर्ति में भारी अव्यवस्था पैदा हो रही है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.</p>
<p>एपी के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान अब तक पांच खाड़ी देशों पर कम से कम 380 मिसाइलें और 1,480 से अधिक ड्रोन दाग चुका है. लोकल अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है. ये आंकड़े खुद बताते हैं कि हालात कितने भयावह हैं.</p>
<p>कुछ दिन पहले कुवैत में भी एक बड़ा हमला हुआ, जिसमें छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. ईरानी ड्रोन ने सेना बेस से कई मील दूर स्थित एक ऑपरेशन सेंटर को निशाना बनाया था. इस घटना ने खाड़ी में अमेरिकी सुरक्षा ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.</p>
<p>इतना ही नहीं, ईरान ने हाल ही में सऊदी अरब पर भी सीधा हमला किया, जिसमें रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को लक्ष्य बनाया गया. ये कदम खतरे को कई गुना बढ़ा चुका है और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा हो गया है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेशी टका पर भारी पड़ा भारतीय रुपया! पड़ोसी मुल्क में 1 लाख की कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश!</title>
<link>https://pratinidhi.in/indian-rupee-strong-position-new-info-on-1-lakh-taka-in-bangladesh</link>
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<description><![CDATA[ भारत-बांग्लादेश करेंसी तुलना में लोग जानना चाहते हैं कि किस देश की मुद्रा ज्यादा मजबूत है। यह रिपोर्ट बताती है कि 1 भारतीय रुपया बांग्लादेश में कितने टका के बराबर होता है। इसमें दोनों देशों की विनिमय दर और आर्थिक अंतर के मुख्य तथ्य भी शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 11:27:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारतीय रुपया बांग्लादेश टका, India Bangladesh currency rate, रुपये से टका conversion, बांग्लादेश चुनाव news, BNP election victory Bangladesh, टका value comparison India, Bangladesh economy update, करेंसी विनिमय दर जानकारी, South Asia politics update</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>बांग्लादेश में हुए 13वें राष्ट्रीय चुनावों के नतीजों ने पूरे क्षेत्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. इस ऐतिहासिक वोटिंग में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐसा धमाका किया कि विपक्ष के होश उड़ गए. पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता पर शानदार वापसी की, जबकि जमात-ए-इस्लामी और उसके साथी दल मात्र 59 सीटों तक सीमित रह गए. हाल के महीनों में देश में कई बड़े परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें नए नोटों की लॉन्चिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रही. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर बांग्लादेश की करेंसी कैसी है और भारत के मुकाबले उसकी कीमत कितनी है.</p>
<p>बांग्लादेश की मुद्रा को टका कहा जाता है, जो वहां की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. देश का केंद्रीय बैंक, जिसे बांग्लादेश बैंक कहा जाता है, देश में नोटों के संचालन और मुद्रानीति को नियंत्रित करता है. दिलचस्प बात यह है कि वहां दो अलग-अलग संस्थाएं करेंसी जारी करती हैं—10 टका से ऊपर के नोट केंद्रीय बैंक छापता है, जबकि 1, 2 और 5 टका की छोटी करेंसी वित्त मंत्रालय जारी करता है, जिसे सरकारी नोट कहा जाता है. इस अनोखी व्यवस्था को लेकर हमेशा देश में चर्चा बनी रहती है.</p>
<p>पुराने नोटों पर नजर डालें तो आपको देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर साफ दिखाई देती थी. लेकिन 1 जून 2025 को अंतरिम सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 1000, 50 और 20 टका के नए नोट जारी किए, जिनसे मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटा दी गई. नए नोटों पर अब प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहरों की झलक दिखाई देती है, जिससे लोग इसे एक "नई पहचान" के रूप में देख रहे हैं. इस बदलाव ने जनता में खूब हलचल और चर्चा पैदा कर दी है.</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल—भारत और बांग्लादेश की करेंसी में किसकी वैल्यू ज्यादा है? भारत के रुपये का करेंसी कोड INR है, जबकि बांग्लादेशी टका का कोड BDT है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के अनुसार 9 फरवरी 2026 को एक अमेरिकी डॉलर की कीमत भारत में 90.4163 रुपये थी. वहीं बांग्लादेश में एक डॉलर पाने के लिए 122.49 टका खर्च करने पड़ते थे. इसका मतलब है कि भारत का 1 रुपया बांग्लादेश के करीब 1.35 टका के बराबर होता है. यानी अगर आपके पास 1 लाख भारतीय रुपये हैं, तो वे बांग्लादेश में लगभग 1,35,150.18 टका बन जाते हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत के लिए क्यों अहम मानी जा रही है तारिक रहमान की वापसी? 5 प्वाइंट में समझें</title>
<link>https://pratinidhi.in/benefits-india-tarique-rahman-return-bangladesh-key-points</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री होंगे। भारत इसे चुनौती से अधिक संतुलित अवसर मानता है। पीएम मोदी ने रहमान को बधाई दी, सहयोग पर जोर दिया। जमात-ए-इस्लामी को बहुमत न मिलना, बांग्लादेश की आर्थिक चुनौतियां, भारत की पूर्व संपर्क पहल और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाएं इसके प्रमुख कारण हैं, जो बदलते वैश्विक परिदृश्य में रणनीतिक संतुलन स्थापित करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 11:24:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश चुनाव analysis, तारिक रहमान Bangladesh politics, भारत-बांग्लादेश संबंध, South Asia geopolitics, BNP जीत अपडेट, Modi Rahman ties, Bangladesh economic challenges, भारत की foreign policy, regional connectivity projects, दक्षिण एशिया राजनीति news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><span>बांग्लादेश में बदलती सत्ता समीकरणों ने भारत के लिए सहयोग और साझेदारी का एक नया दरवाज़ा खोल दिया है (फोटो रॉयटर्स)</span></p>
<p><strong>जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली।</strong> बांग्लादेश के आम चुनावों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि जमात-ए-इस्लामी स्पष्ट बहुमत से दूर रह गई, जिससे क्षेत्रीय सत्ता संतुलन में नई हलचल पैदा हुई है। आवामी लीग की अनुपस्थिति ने इस चुनाव को ऐतिहासिक रूप से अलग बना दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अब देश की कमान संभालने वाले हैं।</p>
<p>बदलते वैश्विक समीकरणों और बांग्लादेश की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए यह परिणाम भारत के लिए नई उम्मीद की तरह हैं। नई दिल्ली ने भी संकेत दे दिया है कि वह तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के साथ तालमेल बढ़ाने को तैयार है।</p>
<p>चुनाव परिणाम स्पष्ट होते ही पीएम नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी और कहा कि बांग्लादेश की जनता ने उनके नेतृत्व पर भरोसा दिखाया है। प्रधानमंत्री ने यह भी वादा किया कि भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक, स्थिर और प्रगतिशील बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा और दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए तैयार है।</p>
<p>बीएनपी के पिछले कार्यकाल भारत के लिए ज्यादा सहज नहीं रहे थे, लेकिन फिर भी भारत के रणनीतिक हितों की दृष्टि से यह स्थिति जमात-ए-इस्लामी के मुकाबले कहीं बेहतर मानी जा रही है। जमात-ए-इस्लामी का पाकिस्तान समर्थक राजनीति और कट्टरपंथी समूहों के प्रति झुकाव लंबे समय से भारत के लिए चिंता का कारण रहा है। यदि उसे बहुमत मिलता, तो भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं पर खतरे कई गुना बढ़ सकते थे।</p>
<p>हालांकि इस चुनाव में जमात ने भारत को लेकर नरम रुख दिखाने की कोशिश की, लेकिन उसका पुराना इतिहास भारत विरोधी नारों और उग्र रैलियों से भरा रहा है। बहुमत न मिलना इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश के मतदाता कट्टरपंथी राजनीति को पूर्ण समर्थन देने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे भारत को सुरक्षा मोर्चे पर तत्काल राहत मिली है।</p>
<p>बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय भारी दबाव में है—विदेशी मुद्रा की कमी, निर्यात में गिरावट और मुद्रास्फीति ने हालात कठिन बना दिए हैं। ऐसे माहौल में बीएनपी सरकार के लिए सबसे पहली चुनौती अर्थव्यवस्था को स्थिर करना होगी। भारत-बांग्लादेश के बीच बीते दशक में व्यापार, ऊर्जा सहयोग, बिजली आपूर्ति, रेलवे-कनेक्टिविटी और पाइपलाइन प्रोजेक्ट जैसे कई अहम क्षेत्रों में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। भारतीय कंपनियों का निवेश भी लगभग पांच अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।</p>
<p>नई सरकार के लिए इन परियोजनाओं को जारी रखना मजबूरी नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक जरूरत है। बीएनपी के घोषणा पत्र में भी भारत के प्रति किसी टकरावपूर्ण नीति का संकेत नहीं दिया गया, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी आर्थिक हितों को प्राथमिकता देना चाहती है। भारत की निवेश क्षमता और ऊर्जा सहयोग बांग्लादेश की आर्थिक पुनर्बहाली के लिए जीवनरेखा साबित हो सकते हैं।</p>
<p>दिल्ली ने पिछले महीनों में यह रणनीति बना ली थी कि वह आवामी लीग से आगे बढ़कर हर राजनीतिक दल से संवाद के रास्ते खोले रखेगी। बैकचैनल संपर्क, राजनयिक बातचीत और राजनीतिक स्तर पर संतुलित संदेशों ने इस समय सत्ता परिवर्तन को सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><span>विदेश मंत्री एस. जयशंकर का खालिदा जिया के निधन के बाद ढाका जाना और भारतीय संसद में उनके लिए शोक प्रस्ताव पारित होना इस बड़े कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा था। इस तैयारी का लाभ अब साफ दिखाई दे रहा है—नई सरकार के लिए भारत-विरोधी रुख अपनाना आसान बिल्कुल नहीं है।</span></p>
<p>भारत और बांग्लादेश के रिश्ते केवल राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि भूगोल और अर्थव्यवस्था के जरिए गहराई से जुड़े हैं। पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी बांग्लादेश के मार्गों और जलमार्गों पर काफी निर्भर करती है। सीमा हाट, सड़क कॉरिडोर, रेल नेटवर्क और कार्गो रूट दोनों देशों के स्थानीय कारोबार को मजबूत करते हैं।</p>
<p>ऐसे में बीएनपी के लिए इन परियोजनाओं को रोकना आर्थिक आत्मघाती कदम साबित होगा। इसके विपरीत, इन्हें आगे बढ़ाने से उसे घरेलू स्तर पर विकासकारी सरकार की पहचान भी मिल सकती है—जो उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक जीत होगी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तान ने फिर लीक किया परमाणु सीक्रेट? आखिर सऊदी अरब ने कैसे बनाया बम</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-nuclear-info-leak-claims-questions-saudi-bomb-making</link>
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<description><![CDATA[ 2025 के रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब को परमाणु मदद देने की अफवाहें तेज हुईं। अब्दुल कादिर खान और उत्तर कोरिया मामले की यादें फिर ताजा हो गईं। हालांकि कोई सबूत नहीं मिले और सऊदी के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, वह केवल सिविल न्यूक्लियर कार्यक्रम पर फोकस कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:13:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान परमाणु लीक, Saudi nuclear claims, सऊदी सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम, Pakistan Saudi defence deal, Abdul Qadeer Khan controversy, परमाणु अप्रसार NPT, nuclear proliferation debate, Middle East nuclear news, Pakistan Saudi rumours, nuclear intelligence reports</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक सनसनीखेज दावा आग की तरह फैल रहा है—"पाकिस्तान ने फिर से अपने परमाणु राज बेच दिए, और सऊदी अरब अब परमाणु बम रखने वाला नया देश बन गया!" पुरानी यादों को हवा देते हुए लोग अब्दुल कादिर खान वाले विवाद को दोबारा उठा रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि जैसे पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया को मदद देकर बम दिलाया था, वैसे ही अब उसने सऊदी अरब को भी ताकतवर बना दिया है. लेकिन इन वायरल दावों के पीछे असली सच्चाई क्या है?</p>
<p><strong>क्या सच में सऊदी अरब के पास परमाणु बम है?</strong></p>
<p>साफ और सीधी बात—नहीं. आज तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी, चाहे वह IAEA हो या अमेरिकी खुफिया विभाग—किसी ने भी यह पुष्टि नहीं की है कि सऊदी अरब ने परमाणु हथियार बना लिए हैं. खुद सऊदी अरब बार-बार कह चुका है कि उसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के लिए परमाणु तकनीक विकसित करना है, हथियार बनाना नहीं. यह बात इसलिए और पक्की हो जाती है क्योंकि सऊदी अरब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है, जो परमाणु हथियार बनाने पर सख्त रोक लगाती है.</p>
<p>पिछले दो सालों में सऊदी अरब और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन का बड़ा समझौता हुआ है—नवंबर 2025 का ऐतिहासिक करार. इसके तहत सऊदी अरब यूरेनियम को सीमित स्तर पर एनरिच कर पाएगा, लेकिन सिर्फ ऊर्जा उत्पादन के लिए, हथियारों के लिए बिल्कुल नहीं. हां, इतना जरूर है कि यदि ईरान कभी परमाणु बम बना लेता है, तो सऊदी भी पीछे नहीं रहेगा—यह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान खुद कह चुके हैं. मगर अभी तक जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है.</p>
<p><strong>अब्दुल कादिर खान का पुराना और विवादास्पद अध्याय</strong></p>
<p>यह सच है कि पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर स्कैंडल से जुड़े नाम रहे हैं. 2004 में खुलासा हुआ कि उन्होंने गुप्त नेटवर्क बनाकर उत्तर कोरिया, ईरान और लीबिया को परमाणु तकनीक बेची थी. इसके बाद उन्हें नजरबंद कर दिया गया. उसी तकनीकी मदद की बदौलत उत्तर कोरिया ने अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाया. लेकिन सऊदी अरब को लेकर जो अफवाहें फैली थीं—कि उसने पाकिस्तान को पैसे दिए और बदले में बम 'बुक' किया—उनका कोई ठोस सबूत आज तक नहीं मिला. BBC की 2013 की रिपोर्ट भी सिर्फ दावे पर टिकी थी, प्रूफ पर नहीं.</p>
<p><strong>क्या पाकिस्तान ने फिर से परमाणु सीक्रेट लीक कर दिए?</strong></p>
<p>2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट चर्चा में आ गया. वजह थी कुछ अधिकारियों के बयान—जिनमें कहा गया कि ‘सभी सैन्य साधन’ उपलब्ध कराए जाएंगे. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने आग में घी डाल दिया, जब उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान की परमाणु क्षमता भी ‘डिटरेंस’ के लिए सऊदी के साथ शेयर की जा सकती है. बस इतना कहना था, और इंटरनेट पर अफवाहों का तूफान उठ गया.</p>
<p><strong>असलियत क्या है?</strong></p>
<p>यह समझौता असल में पारंपरिक सैन्य सहयोग, संयुक्त अभ्यास और हथियारों की सप्लाई तक ही सीमित है. सऊदी अरब चीन से नई बैलिस्टिक मिसाइलें जरूर खरीद रहा है, लेकिन वे गैर-परमाणु हैं. ना पाकिस्तान ने कोई सीक्रेट ट्रांसफर किया और ना ही सऊदी के पास कोई छिपा हुआ न्यूक्लियर कार्यक्रम चल रहा है.</p>
<p><strong>तो फिर सऊदी अरब क्यों चर्चा में है?</strong></p>
<p><strong>क्योंकि अफवाहें तेज हैं, लेकिन सच्चाई कमजोर.</strong> पुराने विवादों और राजनीतिक बयानों के कारण लोग मान लेते हैं कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है. पर हकीकत यह है—न तो पाकिस्तान ने नया परमाणु राज लीक किया है, और न ही सऊदी अरब ने कोई परमाणु बम तैयार किया है. 2025 का डिफेंस एग्रीमेंट सिर्फ रणनीतिक साझेदारी है, न्यूक्लियर ट्रांसफर नहीं. आज की तारीख में यह पूरी कहानी बस सोशल मीडिया की गूंज है—जिसमें शोर ज्यादा है, सबूत बहुत कम.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>क्या तारिक रहमान बनने जा रहे हैं बांग्लादेश के नए PM? भारत पर BNP का बड़ा बयान, शेख हसीना खेमे में मचा घमासान!</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-election-bnp-jamaat-contest-impact-on-indias-strategy</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में 12 फरवरी को नई सरकार के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिसमें तारिक रहमान की बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच कड़ा मुकाबला है। जुलाई-अगस्त 2024 के हिंसक आंदोलन के बाद यह पहला चुनाव है। भारत इन परिणामों पर करीब से नजर रख रहा है, क्योंकि यह भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत किसी भी नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:05:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश चुनाव 2026, BNपी जमात मुकाबला, Bangladesh politics news, भारत-बांग्लादेश संबंध, सीमा सुरक्षा India Bangladesh, तारिक रहमान BNP, जमात-ए-इस्लामी updates, South Asia geopolitics, Bangladesh election impact India, ढाका चुनाव 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>12 फरवरी बांग्लादेश के इतिहास में एक ऐसा दिन बनने वाला है, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। सत्ता से शेख हसीना की विदाई और जुलाई–अगस्त 2024 के उथल–पुथल भरे विरोध प्रदर्शनों के बाद पहली बार जनता अपने नए नेता का चुनाव करने जा रही है। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि वह फैसला है जो आने वाले समय में बांग्लादेश की दिशा और दशा दोनों तय करेगा।</p>
<p>राजनीतिक तस्वीर पर नजर डालें तो तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को शुरुआती बढ़त मिलती दिख रही है। लेकिन माहौल पूरी तरह अनिश्चित है, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी अपने मजबूत जनाधार की वजह से बड़ा राजनीतिक धमाका कर सकती है। कई सर्वेक्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि बीएनपी और जमात के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का होने वाला है।</p>
<p>भारत भी इस चुनाव पर पूरे ध्यान के साथ नजर टिकाए बैठा है। वजह साफ है—सत्ता में कौन आता है, इसका सीधा असर भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा, पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता और पूरे क्षेत्र के भू-राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम बन गया है।</p>
<p><span>भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ढाका में आने वाली किसी भी सरकार के साथ सहयोग और रिश्तों को मजबूती देने की नीति जारी रहेगी, ठीक उसी तरह जैसे शेख हसीना के समय में था।</span> मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अब तक बीएनपी या जमात—दोनों की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वे भारत के साथ संबंधों की अपनी रणनीति को कमजोर करने का इरादा रखते हों।</p>
<p>बीएनपी की संभावित वापसी के साथ चीन और अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी भी इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना देती है। भारत के आर्थिक व सामरिक हितों के बीच यह चुनाव दक्षिण एशिया की राजनीति का एक नया अध्याय खोल सकता है। यही कारण है कि जहां ढाका की जनता परिणाम को लेकर बेचैन है, वहीं नई दिल्ली में भी उत्सुकता का माहौल किसी भी तरह कम नहीं है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>रूस से तेल खरीदेगा या नहीं भारत? ट्रेड डील के बाद ट्रंप की धमकियों से सियासी–कूटनीतिक बहस तेज़</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-russia-oil-import-stance-trade-deal-trump-warning</link>
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<description><![CDATA[ भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में रूस से तेल खरीद पर विवाद बढ़ा है। ट्रंप ने भारत से रूसी तेल न लेने का दावा किया। सरकार की चुप्पी के बीच टैरिफ, रक्षा और ऊर्जा नीति पर बहस जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 12:32:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत रूस तेल आयात, India US trade deal, ट्रंप मोदी तेल बयान, रूस से तेल खरीद विवाद, US pressure on India oil, भारत अमेरिकी ऊर्जा नीति, वेनेजुएला तेल import India, Indo Russia relations energy, भारत अमेरिका टैरिफ मुद्दा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. बीते दिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे फ्रेमवर्क को खुलकर बताया, जहां कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों की सहमति सामने आई. हालांकि, इसी बीच रूस से तेल खरीदने को लेकर उठे सवालों पर भारत की चुप्पी अब भी बनी हुई है, जिससे चर्चाएं और तेज हो गई हैं. केंद्र सरकार अब तक इस विवादित मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान देने से बच रही है.</p>
<p>अमेरिका की ओर से पहले ही दबाव था कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करे, तभी किसी बड़े समझौते की राह आगे बढ़ पाएगी. इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद भारत पर लगाए गए 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया. यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब दोनों देशों के बीच ऊर्जा मामलों को लेकर संवेदनशील बहस जारी है.</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस से तेल न खरीदने पर सहमति जताई है और अब भारत अमेरिकी व वेनेजुएला के तेल पर अधिक निर्भर करेगा. हालांकि, अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने इस फैसले के बदले भारत पर लगे अतिरिक्त टैरिफ में ढील को लेकर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी. उनके इस बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी.</p>
<p><strong>ट्रंप का बड़ा दावा—भारत ने रूसी तेल छोड़ने का दिया भरोसा</strong></p>
<p>नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में ट्रंप ने कहा कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल न खरीदने का आश्वासन दिया है. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले दस वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पहले से कई गुना मजबूत होगा. यह बयान इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत रक्षा क्षेत्र में दशकों से रूस का प्रमुख साझेदार रहा है.</p>
<p>ऑर्डर में यह भी चेतावनी दी गई कि अगर अमेरिकी वाणिज्य मंत्री को किसी भी स्तर पर ये जानकारी मिली कि भारत अभी भी रूसी तेल ले रहा है, तो ट्रंप प्रशासन भारत पर दोबारा 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने या किसी कड़े कदम पर विचार कर सकता है. इस शर्त ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है.</p>
<p><strong>भारत की खामोशी—ट्रंप के दावों पर अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं</strong></p>
<p>पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की ओर से ट्रंप की इन टिप्पणियों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भारत ने अमेरिकी दबाव के चलते रूसी तेल खरीद बंद की है, कम की है, या पहले की तरह जारी रखी है. हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल यह साफ कर चुके हैं कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतें सरकार की शीर्ष प्राथमिकता हैं, लेकिन वह जरूरत कैसे पूरी होगी—इस पर वह कुछ नहीं बोले.</p>
<p>रूस से तेल खरीद लंबे समय से भारत-अमेरिका संबंधों में एक बड़ा विवाद रहा है. कई अमेरिकी अधिकारी यह आरोप लगाते रहे हैं कि भारत की यह खरीद रूस की यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद करती है. जबकि भारत बार-बार यह कह चुका है कि ऊर्जा खरीद पूरी तरह उसके राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करती है.</p>
<p>फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाए और रूसी तेल आयात में तेजी से कमी कर दी. इसके बाद भारत ने भारी छूट पर उपलब्ध रूसी कच्चे तेल को खरीदना शुरू किया. हालांकि हाल के हफ्तों में भारत की रूसी तेल खरीद में अचानक गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन सरकार की ओर से इस बदलाव पर कोई टिप्पणी नहीं आई.</p>
<p>कुल मिलाकर, रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की चुप्पी कई नए सवाल खड़े कर रही है और दुनिया की निगाहें अब भारत के अगले कदम पर टिक गई हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत को बड़ी राहत! अमेरिकी एक्स्ट्रा टैरिफ आज से खत्म, 30 लाख करोड़ डॉलर का बाज़ार खुलेगा, 500 अरब डॉलर की होगी ऐतिहासिक डील</title>
<link>https://pratinidhi.in/pm-thanks-trump-us-india-trade-deal-make-in-india-impact</link>
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<description><![CDATA[ India-US Trade Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनने को लेकर बड़ी जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, गहराई और मजबूत साझेदारी को दर्शाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 10:53:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India US trade deal, भारत अमेरिका व्यापार समझौता, मेक इन इंडिया benefits, PM Modi trade update, US tariff reduction India, भारत US partnership news, Donald Trump Modi statement, India US economic relations, व्यापार समझौता इंडिया, Delhi trade news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली से एक बड़ी और रोमांचक खबर सामने आई है। भारत और अमेरिका ने आखिरकार उस ट्रेड डील पर सहमति कर ली है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। इस समझौते के तहत अमेरिका अब भारत पर लगने वाले शुल्क को घटाकर सिर्फ 18 प्रतिशत कर देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए कहा कि यह कदम भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते भरोसे और गहरी होती साझेदारी का सच्चा प्रमाण है। उन्होंने शनिवार सुबह एक्स पर पोस्ट कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खास तौर पर धन्यवाद भी दिया।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस डील को 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए नई ऊर्जा बताते हुए कहा कि यह समझौता देश के किसानों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई सेक्टर, उद्यमियों और मछुआरों को नए अवसरों के बड़े दरवाजे खोलकर देगा। इस फैसले से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार का विशाल नया बाजार तैयार होगा, जो देश की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने वाला साबित हो सकता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका इनोवेशन और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए पहले से ज्यादा प्रतिबद्ध हैं। यह ट्रेड फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को एक नई ऊंचाई देगा। साथ ही, यह मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन का निर्माण करेगा, जो पूरी दुनिया के आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगा। मोदी ने इसे 'विकसित भारत' के रास्ते में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत के लिए अभूतपूर्व अवसर बताते हुए कहा कि इस डील से करीब 30,000 अरब डॉलर का अमेरिकी बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुल जाएगा। इससे खास तौर पर एमएसएमई, किसानों और मछुआरों को भारी फायदा मिलेगा। गोयल ने दावा किया कि बढ़ते निर्यात के साथ देश में लाखों नए रोजगार, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए, तैयार होंगे।</p>
<p>इस ऐतिहासिक घोषणा से पहले दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए बताया कि अमेरिका भारत पर लगने वाले शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। यह रूपरेखा 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक व्यापार समझौते के प्रति दोनों देशों की मजबूत प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है। इसमें अतिरिक्त बाजार पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत करने वाली कई नई नीतियां शामिल होंगी।</p>
<p>संयुक्त बयान में कहा गया कि यह अंतरिम समझौता दोनों देशों की साझेदारी को एक नए मुकाम पर ले जाएगा। यह द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन, निष्पक्षता और पारस्परिक हितों को बढ़ावा देगा। इसे दोनों राष्ट्रों के बीच आर्थिक संबंधों का एक मील का पत्थर माना जा रहा है।</p>
<p>समझौते के तहत भारत अमेरिका के कई औद्योगिक उत्पादों और खाद्य एवं कृषि वस्तुओं पर शुल्क में भारी कटौती करेगा। इसमें सूखे अनाज, मेवे, प्रॉसेस्ड और ताजे फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट्स सहित कई उत्पाद शामिल हैं। यह कदम दोनों देशों के व्यापार को नई दिशा और नई गति देने वाला साबित होगा।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>भारत से ट्रेड डील या अमेरिका की जीत? अमेरिकी मीडिया का दावा—समझौता पूरी तरह वॉशिंगटन के पक्ष में!</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-report-bias-allegations-india-trade-agreement</link>
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<description><![CDATA[ मोदी सरकार ने भले 50 प्रतिशत से 18 प्रतिशत टैरिफ़ होने का स्वागत किया है लेकिन कई ऐसी बातें हैं, जिन्हें अमेरिका के हक़ में बताया जा रहा है और भारत के लिए इसे पूरा करना आसान नहीं होगा. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 10:37:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India US trade deal, भारत अमेरिका ट्रेड विवाद, Trump tariff reduction, मोदी सरकार trade policy, अमेरिकी टैरिफ़ 18 प्रतिशत, India US economic relations, ट्रेड समझौता राजनीति, Manmohan Singh tariff history, US India tariff issue, व्हाइट हाउस trade announcement</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा ने राजनीति से लेकर आर्थिक गलियारों तक हलचल मचा दी है. अब बड़ा सवाल यह है कि ये समझौता वास्तव में किसके लिए फायदेमंद साबित होगा.</p>
<p>ट्रंप प्रशासन ने पहले भारत पर 50% जैसा भारी-भरकम टैरिफ़ लगाया था, जिसे अब घटाकर 18% कर दिया गया है. यह कटौती सुनने में बड़ी राहत जैसी लगती है, लेकिन विशेषज्ञों की राय कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत किया है, मगर जानकारों का कहना है कि 18% भी काफी ऊंचा है—खासतौर पर तब, जब ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले भारत पर अमेरिकी टैरिफ़ बेहद कम हुआ करते थे.</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कम्युनिकेशन एडवाइजर रहे पंकज पचौरी ने एक्स पर लिखा कि 2004 तक औसत अमेरिकी टैरिफ़ 3.31% था, और मनमोहन सिंह–बुश परमाणु समझौते के बाद यह गिरकर 2.93% तक पहुंच गया था. अब इसी तुलना में 18% का जश्न मनाया जाना कई लोगों के लिए चौंकाने वाली बात है.</p>
<p>इधर व्हाइट हाउस इस डील को अपनी बड़ी जीत बताकर पेश कर रहा है. प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट के मुताबिक यह समझौता अमेरिकी कामगारों, कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होने जा रहा है.</p>
<p>ट्रंप ने अपने मंच ट्रुथ सोशल पर दावा किया था कि 18% टैरिफ़ के बदले भारत रूस से तेल आयात बंद कर देगा, अमेरिकी सामान पर ज़ीरो टैरिफ़ लागू करेगा और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा. वहीं विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दावे सच निकले तो मोदी सरकार के लिए यह डील बेहद चुनौतीपूर्ण होगी.</p>
<p>एबरडीन इन्वेस्टमेंट्स के जेम्स थॉम के अनुसार, इस डील से अमेरिकी बाज़ार में भारत के टेक्सटाइल, लेदर, ज्वेलरी, खिलौने और फर्नीचर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी. 18% टैरिफ़ पाकिस्तान, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों से कम है, जिससे भारतीय उद्योग को बढ़त मिल सकती है.</p>
<p>अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हालांकि इस समझौते पर कई सवाल उठाए हैं. उसका कहना है कि ट्रंप ने भले इसकी तत्काल प्रभाव से लागू होने की बात कही हो, लेकिन डील की कई अहम शर्तें अब भी साफ़ नहीं हैं.</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि ट्रंप द्वारा दावा किए गए 500 अरब डॉलर की खरीद पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. ऐसे में समझौते की असल तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है.</p>
<p>अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फ़ाइनैंस कॉर्पोरेशन की पूर्व अधिकारी निशा बिस्वाल का कहना है कि यह कदम अमेरिका–भारत संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है और आगे गहराई से सहयोग की संभावनाएं खोलता है.</p>
<p>दूसरी ओर रूस में इस खबर को लेकर बेचैनी देखी जा रही है. क्रेमलिन ने कहा है कि भारत ने तेल आयात बंद करने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन वे हालात पर नज़र बनाए हुए हैं.</p>
<p>रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्ज़ेंडर नोवाक ने दावा किया है कि वैश्विक बाज़ार में रूसी तेल की मांग खत्म नहीं होने वाली है, इसलिए भारत का फैसला उनके राजस्व पर बड़ा असर नहीं डालेगा.</p>
<p>न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि ट्रंप के सभी दावों को पूरा करना भारत के लिए आसान नहीं होगा. उदाहरण के लिए अमेरिकी डेयरी भारत के विशाल उपभोक्ता वर्ग के लिए स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि वहां की गायें पूरी तरह शाकाहारी नहीं होतीं.</p>
<p>अगर ऐसा हुआ तो भारत के 7 करोड़ डेयरी निर्भर परिवारों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है. यही कारण है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों का भारत में प्रवेश अब भी सीमित रहने की संभावना है.</p>
<p>ब्लूमबर्ग ने भी अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी कि यह डील भारत की चुनौतियां खत्म नहीं करती. मोदी सरकार के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी रियायतें हमेशा से मुश्किल रही हैं और भारत का एग्रीकल्चर सेक्टर भारी सुरक्षा कवच में ढका हुआ है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>India&amp;US Deal का असर पूरी दुनिया पर, एशिया से अमेरिका तक बाजारों में उत्साह</title>
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<description><![CDATA[ India-US Trade Deal पर ट्रंप ने ऐलान कर दिया है और अब बस आधिकारिक मुहर लगना बाकी है. इस खबर से भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार तेजी रही. सेंसेक्स 2072 अंक, जबकि निफ्टी 639 अंक की उछाल के साथ बंद हुआ. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 16:47:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India-US trade deal update, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, शेयर बाजार तेजी news, Sensex Nifty today jump, global market positive trend, ट्रंप ट्रेड डील बयान, Indian stock market rally, एशिया मार्केट रिएक्शन, US tariff reduction India, निवेशकों में उत्साह news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक धमाकेदार ऐलान ने भारतीय शेयर बाजार में ऐसा तूफान खड़ा किया कि सेंसेक्स और निफ्टी आसमान की ओर उड़ते नजर आए। जैसे ही ट्रंप ने कहा कि India-US ट्रेड डील लगभग तय हो चुकी है, निवेशकों में जबरदस्त उत्साह लौट आया और पूरा बाजार ग्रीन सिग्नल पर दौड़ पड़ा। कारोबार खत्म होते-होते सेंसेक्स 2072 अंक उछलकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी ने भी 624 अंकों की शानदार छलांग लगाई। ये सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दुनिया के कई बाजारों में जश्न का माहौल लिए दिखाई दिया, जहां जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों के इंडेक्स रॉकेट की रफ्तार से ऊपर भाग गए।</p>
<p><strong>एक बयान… और बाजार में धमाका!</strong><br>ट्रंप ने अपने बयान में साफ किया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सहमति बन चुकी है और आधिकारिक घोषणा बस आने ही वाली है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 18% करने का भी संकेत दे दिया, जिसने भारतीय मार्केट को जबरदस्त ऊर्जा दे दी। मंगलवार सुबह जैसे ही बाजार खुले, सेंसेक्स और निफ्टी ने शुरुआत से ही तेज रफ्तार पकड़ ली और फिर पूरे दिन इस मजबूती को बनाए रखा।</p>
<p>सेंसेक्स जहां अपने पिछले बंद 81,666 की तुलना में 84,323.20 पर खुला, वहीं लगातार लिवाली के दम पर दिनभर उछाल में बना रहा और 2072.67 अंक चढ़कर 83,739.13 पर जाकर थमा। निफ्टी ने भी 25,088 से सीधे 26,308 तक की उड़ान भरी और शानदार तेजी जारी रखते हुए 25,727.55 पर मजबूती से बंद हुआ। इस अप्रत्याशित बूम ने निवेशकों के चेहरों पर लंबे समय बाद बड़ी मुस्कान ला दी।</p>
<p><strong>एशियाई बाजारों में भी मचा बवाल</strong><br>भारत-US डील की भनक लगते ही सिर्फ भारतीय नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों में भी बड़ा धमाका देखने को मिला। जापान का Nikkei Index लगभग 4% की तूफानी तेजी के साथ 54,720.66 तक पहुंच गया। साउथ कोरिया का KOSPI Index भी 6.84% की जबरदस्त छलांग लगाकर 5,288.08 पर ट्रेड करता नजर आया। हांगकांग का Hang Seng Index भी पीछे नहीं रहा और 59 अंकों की बढ़त के साथ 26,834.78 के स्तर पर चढ़ गया। दुनिया भर के मार्केट्स ने इस खबर को मानो किसी बड़े त्योहार की तरह सेलिब्रेट किया।</p>
<p><strong>ये 10 दिग्गज बने बाजार के असली HERO</strong><br>मंगलवार का दिन कुछ खास शेयरों के लिए किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म जैसा रहा, जो तेज रफ्तार से ऊपर भागे और टॉप-10 हीरो की लिस्ट में जगह बनाई। Adani Ports 9.12%, Bajaj Finance 6.68%, IndiGo 5.51%, PowerGrid 4.85%, Sun Pharma 4.63%, Bajaj Finserv 4.29%, SBI 3.48%, Reliance 3.42%, LT 2.95% और Titan 2.80% की बढ़त के साथ चमकते हुए बंद हुए। इन दिग्गजों ने ही बाजार की रफ्तार को और तेज करने में बड़ा रोल निभाया।</p>
<p><strong>मिड और स्मॉलकैप में भी दिखा जोरदार धमाल</strong><br>सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी बाजार में खूब आग लगाई। Godrej Properties 8.88%, TINDIA 8.27%, Dixon 6.66%, Bharat Forge 6.56% और Suzlon 4.66% की उछाल के साथ मिडकैप इंडेक्स ने शानदार प्रदर्शन किया। स्मॉलकैप में KPR Mill ने 15.31% की ताबड़तोड़ बढ़त दिखाई, जबकि AngelOne भी 7.59% चढ़कर बंद हुआ। छोटे शेयरों में आई ये रफ्तार निवेशकों के लिए किसी बम्पर गिफ्ट से कम नहीं रही।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>HeroF&amp;2’ ने हिला दिया पाकिस्तान! BLA अटैक से दहशत, अमेरिका–चीन के लिए भी बजने लगी खतरे की घंटी</title>
<link>https://pratinidhi.in/bla-new-herof-2-attack-report-pakistan-concern-warning-us-china</link>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान में BLA के दशकों के सबसे बड़े हमले ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका और चीन को भी चेताया है. विदेशी निवेश, CPEC और खनिज संसाधनों का दोहन BLA के विद्रोह की मुख्य वजह बन रहे हैं. बढ़ते हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 10:34:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>BLA Herof-2 attack, बलूचिस्तान हिंसा रिपोर्ट, Pakistan security crisis, CPEC conflict issue, Baloch insurgency news, अमेरिका चीन चिंता, Pakistan terror attack analysis, खनिज संसाधन संघर्ष, Balochistan latest update, regional security threat</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान के अशांत और बार-बार उथल-पुथल से जूझते बलूचिस्तान में शनिवार को ऐसा कहर टूटा, जिसे पिछले कई दशकों में सबसे भयावह हमला बताया जा रहा है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी BLA ने अलग-अलग जिलों में एक साथ आत्मघाती धमाकों और ताबड़तोड़ गोलीबारी की बौछार कर पूरे प्रांत को दहशत में डाल दिया.</p>
<p>BLA ने इस बड़े ऑपरेशन को ‘हेरोफ-2’ यानी काला तूफान नाम दिया, और सच में पूरा प्रांत कुछ घंटों के भीतर आग और खून का मैदान बन गया. हमले इतने संगठित और व्यापक थे कि इसमें आम नागरिक, पुलिस चौकियां, सेना और अर्धसैनिक ठिकानों तक किसी को नहीं छोड़ा गया. हिंसा की यह लहर बलूचिस्तान के इतिहास की सबसे खतरनाक घटनाओं में शामिल हो गई.</p>
<p>इस हमले ने न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा को झकझोर दिया, बल्कि अमेरिका और चीन तक में चिंता की लहर दौड़ा दी है. यह इलाका प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा और कीमती खनिजों से भरा है, और इसी वजह से पाकिस्तान, चीन CPEC और अब अमेरिका—तीनों की नजरें यहां के संसाधनों पर टिकी हैं. लेकिन यही बात स्थानीय विद्रोहियों के आक्रोश को और भड़काती है.</p>
<p>विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने हमलों को वैश्विक चेतावनी बताते हुए लिखा कि बलूचिस्तान में यह हिंसा उन देशों के लिए सीधी चुनौती है, खासकर अमेरिका के लिए, जो यहां के कीमती खनिजों में भारी निवेश करने की तैयारी में है. BLA की मूल शिकायत यही है कि बाहरी ताकतें संसाधनों को लूटती हैं, लेकिन स्थानीय लोग गरीबी में ही दफन रह जाते हैं.</p>
<p><strong>‘काला तूफान’ की भयावह पटकथा</strong></p>
<p>बलूची साहित्य से लिया गया नाम ‘हेरोफ-2’ अपने पूरे अर्थ को साबित करता दिखा. 2024 के ‘हेरोफ-1’ की तुलना में यह हमला कई गुना बड़ा, हिंसक और अधिक संगठित था. सुरक्षात्मक सूत्रों के अनुसार, क्वेटा, मस्तुंग, ग्वादर, पंजगुर, केच, कलात और नुश्की सहित 15 से ज्यादा इलाकों में एक साथ धमाके, गोलीबारी और आत्मघाती हमले किए गए.</p>
<p>क्वेटा में पुलिस थानों और मोबाइल यूनिट्स पर गोलियों की बरसात कर दी गई. मस्तुंग सेंट्रल जेल से करीब 30 कैदियों को छुड़ाकर भाग निकाला गया, जबकि ग्वादर में मजदूरों के कैंप पर हमला इतना भीषण था कि महिलाओं और बच्चों सहित 11 लोगों की मौके पर मौत हो गई. पूरे प्रदेश में अफरा-तफरी मची रही.</p>
<p>खुफिया सूत्रों ने बताया कि इस हमले में 800 से 1000 BLA लड़ाके शामिल थे, जिनमें कई महिलाएं भी थीं. मरने वालों की संख्या अलग-अलग दावों में अलग दिखाई दे रही है—सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 नागरिक और 17 जवान मारे गए, जबकि सेना ने 145 विद्रोहियों को ढेर करने का दावा किया. दूसरी ओर, BLA ने पलटकर कहा कि उनके केवल 7 लड़ाके मारे गए और 84 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी ढेर हुए.</p>
<p>रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्वादर में मजदूरों के जिस कैंप पर हमला हुआ था, वहां परिवार सहित काम कर रहे लोग निशाने पर थे. कलात में डिप्टी कमिश्नर ऑफिस और पुलिस लाइंस के पास भीषण झड़पें हुईं, जबकि नुश्की में डिप्टी कमिश्नर हुसैन हजारा और उनके परिवार को जबरन उठा लिया गया.</p>
<p>पसनी में कोस्ट गार्ड पोस्ट पर हमला, बोलन और लक पास में हथियारबंद घेराबंदी, किला सैफुल्लाह-रखनी में हाईवे बंद और नसीराबाद में रेलवे लाइन पर लगाए गए बम निष्क्रिय किए गए—पूरे प्रांत में मानो युद्ध का माहौल बन गया.</p>
<p><strong>बलूचिस्तान की अहमियत आखिर इतनी क्यों?</strong></p>
<p>पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है. यह ईरान और अफगानिस्तान से सटा है और अरब सागर तक सीधी पहुंच रखता है. यहां स्थित ग्वादर पोर्ट CPEC का केंद्र है, जिसे चीन अपनी ऊर्जा और व्यापारिक जरूरतों के लिए जीवनरेखा मानता है.</p>
<p>सूई गैस फील्ड और रेको दिक जैसे इलाके पाकिस्तान और विदेशी निवेशकों के लिए सोने की खान साबित हो सकते हैं. अमेरिका ने हाल ही में रेको दिक में 1.25 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. चीन पहले ही CPEC को अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का सबसे कीमती हिस्सा मान रहा है.</p>
<p>लेकिन यही विदेशी दखल BLA को सबसे ज्यादा चुभता है. संगठन का कहना है कि बलूचिस्तान की धरती से निकला सोना, गैस और खनिज बाहर वालों की झोली में चला जाता है, जबकि स्थानीय लोग दशकों से गरीबी और उपेक्षा झेल रहे हैं.</p>
<p><strong>सुरक्षा एजेंसियों की सबसे कठिन चुनौती</strong></p>
<p>1948 से चल रहा बलूच विद्रोह अब अपने सबसे उग्र और संगठित रूप में दिख रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बड़े आर्थिक हित सीधे BLA जैसी संगठनों से टकरा चुके हैं. 2023 और 2024 में चीनी इंजीनियरों पर लगातार हमले इसका साफ प्रमाण हैं.</p>
<p>माहिरों की मानें तो विदेशी निवेश, स्थानीय असंतोष और राजनीतिक उपेक्षा एक ऐसा विस्फोटक मिश्रण बन चुके हैं, जिसे बिना बड़े सुधारों के शांत करना लगभग असंभव है—और यही संकट आने वाले समय में वाशिंगटन और बीजिंग की सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>भारत आगे बढ़े, चीन भी आए!’ दुनिया में वेनेजुएला का तेल बेचने को बेताब ट्रंप — दिया चौंकाने वाला खुला ऑफर</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-india-china-growing-role-venezuela-oil-trade</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ईरान और रूस से दूरी बनाकर वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.  
वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बदलाव और बढ़ते प्रतिबंध भारत को वैकल्पिक सस्ते तेल स्रोत खोजने के लिए मजबूर कर रहे हैं.  
टैरिफ दबाव के बीच यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनकर उभर रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 10:40:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत वेनेजुएला तेल व्यापार, Trump India oil statement, वैश्विक ऊर्जा बाजार बदलाव, Venezuelan crude India, भारत ऊर्जा सुरक्षा रणनीति, India China oil role, सस्ता तेल स्रोत भारत, US India oil relations, वेनेजुएला तेल डील भारत, Iran oil replacement India</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि भारत अब ईरान नहीं, बल्कि वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। शनिवार शाम पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने इशारा दिया कि ऊर्जा बाज़ार में तेज़ बदलाव के बीच भारत अपने रिफाइनिंग सेक्टर के लिए सस्ता और स्थायी विकल्प तलाश रहा है, और वेनेजुएला इस समय उसके लिए महत्वपूर्ण पार्टनर बन सकता है।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, “चीन चाहे तो आगे आकर तेल पर शानदार डील कर सकता है। हम पहले ही अपनी डील फाइनल कर चुके हैं। भारत भी आगे बढ़ रहा है और ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इस समझौते की बुनियादी बातें पहले ही तय हो चुकी हैं।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में हलचल बढ़ा दी है।</p>
<p>US President Donald J Trump added, “India is stepping in, and they're going to be buying Venezuelan oil instead of sourcing it from Iran.” इस बयान को विशेषज्ञ वैश्विक ऊर्जा संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब कई देशों की नजरें सस्ते और भारी क्रूड पर टिकी हैं।</p>
<p>गुजरात में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की दो विशाल रिफाइनरियां हर दिन करीब 14 लाख बैरल कच्चा तेल प्रोसेस कर सकती हैं। ये प्लांट भारी, सस्ता और कठिन श्रेणी के कच्चे तेल को रिफाइन करने की उत्कृष्ट क्षमता रखते हैं। वेनेजुएला का ‘मेरे क्रूड’ इसी श्रेणी में आता है, जिसे पहले भी रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ाने के लिए रियायती दरों पर खरीदा जाता रहा है।</p>
<p><strong>भारत की नई रणनीति: तेल आयात में संतुलन की बड़ी कोशिश</strong></p>
<p><strong>रूस से तेल आयात घटाने की तैयारी</strong></p>
<p>हाल ही में खबर आई थी कि वॉशिंगटन द्वारा रूसी तेल पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद भारत अब रूस से तेल खरीद कम करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत रोजाना कई लाख बैरल रूसी तेल आयात घटा सकता है, जिससे उसकी ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।</p>
<p><strong>वेनेजुएला के तेल पर ट्रंप का नया ऑफर</strong></p>
<p>मार्च 2025 में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला से तेल लेने वाले देशों पर 25% टैरिफ लागू कर दिया था, जिसमें भारत भी शामिल था। साथ ही अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ दबाव बढ़ा दिया, जिन्हें 3 जनवरी को अमेरिकी बलों ने हिरासत में लिया था। इसके बाद अमेरिका के रुख में नरमी दिखाई देने लगी।</p>
<p>नई दिल्ली को संकेत दिए गए कि रूस से आयात में कमी की भरपाई के लिए वह वेनेजुएला का तेल फिर खरीद सकता है। इस रणनीति का उद्देश्य रूस की तेल कमाई को सीमित करना है, जो यूक्रेन युद्ध में आर्थिक सहारा बन रही है।</p>
<p>इसी बीच ट्रंप ने चीन को भी तेल पर खास डील का ऑफर दिया है, जिससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाज़ार में बड़ी हलचल हो सकती है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>सोना&amp;चांदी क्यों धड़ाम गिरे? अचानक आई भारी गिरावट के पीछे का खेल क्या है, और आगे निवेशकों के लिए क्या है राह?</title>
<link>https://pratinidhi.in/why-gold-silver-prices-suddenly-fell-and-future-market-trend-signals</link>
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<description><![CDATA[ कई महीनों से सोने और चांदी में आई भारी तेज़ी बीते शुक्रवार को थम गई और दोनों ही धातुओं में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट को लेकर एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं? ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 11:04:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सोना चांदी कीमत गिरावट, gold silver price crash, कीमती धातु बाजार रुझान, bullion market analysis, सोने में 12 प्रतिशत गिरावट, silver record fall news, precious metals volatility, निवेशकों में डर माहौल, global crisis impact gold, market experts analysis</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>सोने और चांदी की लगातार भागती-दौड़ती कीमतों का तूफ़ान आखिरकार शुक्रवार को अचानक थम गया, वह भी ऐसी गिरावट के साथ जिसने बाज़ार को हिला कर रख दिया. हफ्तों से बढ़ते दामों की रफ्तार मानो एक झटके में अटक गई.</p>
<p>30 जनवरी को सोना एक ही दिन में करीब 12 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि चांदी ने 26 प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट दिखाई. प्लैटिनम भी पीछे नहीं रहा और इसमें 18 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज हुई. इससे पहले इन धातुओं की कीमतें इतिहास के नए शिखर छू चुकी थीं.</p>
<p>पैनम्योर लिबेरम के विशेषज्ञ टॉम प्राइस ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा कि यह बाज़ार के चरम पर पहुंचने का क्लासिक संकेत है. उनके अनुसार अभी निवेशकों में भारी भ्रम और डर का माहौल है और सभी किसी ठोस दिशा की तलाश में हैं.</p>
<p>एमकेएस पैम्प की विश्लेषक निकी शील्स ने इसे क़ीमती धातुओं के इतिहास का सबसे अस्थिर महीना बताया. उन्होंने कहा कि गुरुवार और शुक्रवार को आई यह उथल-पुथल एक ऐसे दौर के अंत में आई जब हर दिन नए रिकॉर्ड बन रहे थे.</p>
<p>वेनेज़ुएला, ग्रीनलैंड और ईरान जैसे देशों में उभरते संकट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित नीतियों ने निवेशकों को सुरक्षित पनाहगाह यानी गोल्ड-सिल्वर की ओर भागने पर मजबूर कर दिया. इस भागदौड़ ने कीमतों को अप्राकृतिक ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया.</p>
<p>शील्स के मुताबिक, दुनिया में रोजाना हो रही “अकल्पनीय घटनाओं” ने तेज़ रैली को और भड़का दिया, जो आखिरकार अपनी ही रफ्तार से ठहर गई. यह बढ़त उनके अनुसार बहुत तेज़ और अस्थायी थी.</p>
<p>पिक्टेट एसेट मैनेजमेंट के सीनियर रणनीतिकार अरुण साई ने कहा कि जब कीमतों में इतनी जोरदार तेजी दिखती है, तो अस्थिरता बढ़ना स्वाभाविक है. फिर भी उनका मानना है कि केंद्रीय बैंकों और बड़े निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से सोने को लंबी अवधि में फायदा मिलता रहेगा.</p>
<p>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि यह गिरावट 1980 के दशक के बाद की सबसे बड़ी इंट्राडे क्रैश थी. चांदी ने भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की, जिसका असर पूरे मेटल मार्केट पर फैल गया.</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में लगातार चढ़ाई के बाद यह गिरावट सिर्फ समय की बात थी. कुछ ताज़ी खबरों ने बस इसे ट्रिगर कर दिया. ट्रंप की व्यापार नीतियों से पहले ही बाज़ार तनाव में था.</p>
<p>पिछले एक साल में सोने के दाम 60 प्रतिशत बढ़ चुके थे. क़ीमती धातुओं में बेतहाशा डिमांड ने महीने दर महीने नए रिकॉर्ड बनाए और कहीं-न-कहीं यही तेज़ी भविष्य की बड़ी गिरावट का बीज बो रही थी.</p>
<p>जनवरी में यह क्रेज़ और बढ़ गया जब करेंसी की कमजोरी, फेडरल रिज़र्व से जुड़ी अनिश्चितता, ट्रेड वॉर और भू-राजनीतिक हलचल ने निवेशकों को फिर से गोल्ड-सिल्वर की ओर मोड़ दिया.</p>
<p>ब्लूमबर्ग के मुताबिक, फेड चेयरमैन के लिए केविन वार्श के नाम की चर्चा इस बड़ी गिरावट की एक वजह बनी, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि करेक्शन पहले ही बेहद जरूरी हो चुका था.</p>
<p>ट्रंप द्वारा केविन वार्श के नाम की घोषणा ने न सिर्फ बाजार का ध्यान खींचा बल्कि कई नेताओं ने भी उनकी तारीफ की. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उन्हें कठिन समय के लिए उत्कृष्ट विकल्प बताया.</p>
<p>रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग का कहना है कि बाजार ऐसे ही किसी बहाने का इंतज़ार कर रहा था ताकि रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी कीमतों में ठंडक आ सके.</p>
<p>कई निवेशकों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए जमकर प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे गिरावट और तेज़ हो गई. फ़ाइनैंशियल टाइम्स लिखता है कि वार्श जैसे पारंपरिक अर्थशास्त्री का नेतृत्व महंगाई पर सख्त नियंत्रण ला सकता है, जो डॉलर को मजबूत और गोल्ड की मांग को प्रभावित कर सकता है.</p>
<p>ब्लूमबर्ग के अनुसार, गोल्ड-सिल्वर की गिरावट के बीच डॉलर ने तेजी पकड़ी, क्योंकि कमोडिटी करेंसी जैसे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और स्वीडिश क्रोना दबाव में आ गईं. वार्श के नामांकन के बाद डॉलर में तेज़ उछाल देखा गया.</p>
<p>जेरोम पॉवेल का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है, और उसी बीच ट्रंप प्रशासन व सीनेट डेमोक्रेट्स के बीच अस्थायी समझौते ने एक और शटडाउन के खतरे को टाल दिया.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>India&amp;EU व्यापार समझौते से कार, केमिकल और मेडिकल सामान की कीमतों में जल्द आएगा बड़ा बदलाव</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-eu-trade-deal-price-changes-cars-chemicals-medical-supplies</link>
<guid>https://pratinidhi.in/india-eu-trade-deal-price-changes-cars-chemicals-medical-supplies</guid>
<description><![CDATA[ भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड डील के ऐलान के साथ ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर टैरिफ शून्य या कम हो गया है। इस समझौते से आयातित सामान की कीमतों में बड़ी कमी आएगी। डील दोनों बाज़ारों में व्यापार बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सस्ते विकल्प उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 15:22:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India EU trade deal, भारत यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड, कार प्राइस कमी इंडिया, imported goods सस्ते, chemical products India EU, medical equipment prices India, India export growth EU, tariff free products India, Modi economic deal India EU</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारत और यूरोपीय संघ के बीच आखिरकार 18 साल की लंबी इंतजार भरी कहानी का अंत हो गया है, क्योंकि फ्री ट्रेड डील पर औपचारिक मुहर लग चुकी है। इस ऐतिहासिक समझौते ने दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक रिश्तों को एक नई उड़ान दे दी है। बड़ी संख्या में टैरिफ घटाने और कई उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह खत्म करने के फैसले ने बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। यूरोपीय संघ का दावा है कि इससे भारतीय बाजार में उनके निर्यात को विस्फोटक बढ़त मिलेगी और आर्थिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।</p>
<p>भारत की ओर भी यह डील किसी आर्थिक क्रांति से कम नहीं मानी जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर में जबरदस्त उछाल आएगा और वैश्विक बाजारों में देश की पकड़ और मजबूत होगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताते हुए कहा कि यह कदम चीन और अमेरिका पर निर्भरता को कम करेगा। इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ के 90% से ज्यादा उत्पादों पर लगने वाले शुल्क या तो खत्म कर दिए जाएंगे या बेहद कम कर दिए जाएंगे।</p>
<p>अनुमान है कि साल 2032 तक भारत के लिए यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात लगभग दोगुना हो जाएगा, जिससे देश की आर्थिक रफ्तार और तेज हो सकती है। रोजगार के मोर्चे पर भी यह डील बड़ी उम्मीदें जगा रही है, क्योंकि लाखों लोगों को डायरेक्ट और इनडायरेक्ट जॉब्स मिलने की संभावना जताई जा रही है। इतना ही नहीं, कई रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिल सकती है।</p>
<p><strong>कौन-कौन सी चीजें होंगी सस्ती?</strong><br>इस समझौते के बाद बड़ी संख्या में यूरोपीय उत्पाद भारतीय बाजार में पहले से कम दामों पर उपलब्ध होंगे। कारों से लेकर केमिकल्स तक के दामों में भारी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही वाइन, बीयर और कई अन्य ड्रिंक्स भी ज्यादा सस्ते हो सकते हैं। यह डील शराब, खाद्य सामग्री, रसायन, मशीनरी, फार्मा और एयरोस्पेस जैसे अहम क्षेत्रों में दामों में कटौती लाने का रास्ता खोल रही है।</p>
<p><strong>यूरोपीय संघ के बड़े ऐलान</strong></p>
<ul>
<li>यूरोपीय निर्यातकों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की टैरिफ बचत होगी।</li>
<li>बीयर पर लगने वाला शुल्क घटाकर 50% कर दिया गया है।</li>
<li>शराब पर लगने वाले टैरिफ में 40% की भारी कटौती लागू होगी।</li>
<li>कार और कमर्शियल व्हीकल्स का टैरिफ 110% से घटाकर सिर्फ 10% किया जाएगा, हालांकि 250,000 यूनिट्स का वार्षिक कोटा तय रहेगा।</li>
<li>जैतून तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर शुल्क पूरी तरह समाप्त होगा।</li>
<li>फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म कर दिए जाएंगे।</li>
<li>लगभग सभी यूरोपीय रसायनिक उत्पाद अब कम या शून्य शुल्क पर उपलब्ध होंगे।</li>
<li>मशीनरी पर लगने वाले 44% तक के शुल्क में बड़ी कमी लाई गई है।</li>
<li>केमिकल्स पर लगने वाले 22% शुल्क में भारी कटौती की गई है।</li>
<li>दवाओं और मेडिकल प्रोडक्ट्स पर 11% तक के शुल्क में राहत दी गई है।</li>
<li>एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पर टैरिफ को पूरी तरह '0' कर दिया गया है।</li>
<li>भारत को होने वाले यूरोपीय संघ के 90% से अधिक निर्यातित उत्पादों पर शुल्क या तो खत्म होंगे या काफी कम होंगे।</li>
<li>ग्रीनहाउस गैसों में कटौती में मदद के लिए यूरोपीय संघ भारत को अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो की सहायता देगा।</li>
<li>यूरोपीय ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट और व्यापार रहस्यों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया है।</li>
<li>नए व्यापार और रोजगार के बड़े अवसर बनने की उम्मीद जताई गई है।</li>
<li>SMEs यानी छोटी कंपनियों को नए बाजार और अवसर मिलने से मजबूत लाभ होगा।</li>
</ul>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तान में हड़कंप! आसिम मुनीर ने घबराकर चीन से मिसाइलें&amp;हथियार मंगवाने भेजा एयरफोर्स का प्लेन</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-defense-case-asim-munir-sends-aircraft-to-buy-new-weapons-from-china</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान एयरफोर्स के Il-78 विमान चीन पहुंचे हैं. आशंका है कि पाकिस्तान भारत के संभावित ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के डर से चीन से मिसाइल और हथियार मंगवा रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:58:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान चीन हथियार सौदा, Pakistan military supplies, आसिम मुनीर China visit, पाकिस्तान Il-78 विमान, China Pakistan defence ties, भारतीय ऑपरेशन सिंदूर 2.0, South Asia security tension, Pakistan China missile deal, Sichuan airbase activity, हाई-टेक सैन्य सिस्टम China</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>दक्षिण एशिया की सुरक्षा हवा में एक बार फिर तनाव घुल गया है, क्योंकि पाकिस्तान एयरफोर्स की एक चौंकाने वाली गतिविधि अचानक सुर्खियों में आ गई है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के Il-78 हवाई रिफ्यूलिंग विमान गुपचुप तरीके से चीन के सिचुआन प्रांत में स्थित एक अहम एयरबेस पर उतरे और थोड़े ही समय में वापस लौट भी गए. इस रहस्यमयी गतिविधि ने अंदेशा बढ़ा दिया है कि शायद पाकिस्तान चीन से मिसाइलों, हथियारों या किसी हाई-टेक सैन्य सिस्टम की नई खेप हासिल करने गया था.</p>
<p>Military Watch Magazine की रिपोर्ट ने इस घटना पर और भी सनसनी बढ़ा दी है. 19 और 20 जनवरी को पाकिस्तान के कई Il-78 विमान सिचुआन पहुंचते देखे गए, जहां कम से कम दो विमान एयरबेस पर खड़े पाए गए. उड़ान से पहले उनमें लोडिंग जैसी गतिविधियां भी नोट की गईं, जिससे यह कयास और मजबूत हो गया कि इनका मिशन सिर्फ सैन्य आपूर्ति लाना था. हालांकि, दोनों देशों ने अभी तक इस पर आधिकारिक रूप से चुप्पी साध रखी है.</p>
<p>चीन और पाकिस्तान के गहरे सैन्य रिश्तों की कहानी अब किसी से छिपी नहीं. लंबे समय से चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. सिचुआन क्षेत्र वैसे भी चीन का अहम सैन्य गढ़ माना जाता है, जहां J-10C फाइटर जेट की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कई टॉप-सीक्रेट सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. विशेषज्ञों का दावा है कि पाकिस्तान चीन से PL-15 लंबी दूरी की मिसाइलें, एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम और J-10C जेट के लिए जरूरी सपोर्ट सिस्टम खरीदने की कोशिश कर रहा है. हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.</p>
<p>Il-78 विमान पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक रिफ्यूलिंग टैंकर नहीं, बल्कि रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण मोहरा माना जाता है. सोवियत युग के Il-76 पर आधारित यह विमान हवा में लड़ाकू जेट को ईंधन भरने की क्षमता रखता है, जिससे उनकी रेंज दोगुनी हो जाती है. किसी संभावित युद्ध या तनाव के माहौल में यह क्षमता पाकिस्तान के लड़ाकू बेड़े को लगातार ऑपरेशन चलाने की ताकत देती है. इसी वजह से Il-78 को PAF की स्ट्रैटेजी का ‘पावर मल्टीप्लायर’ कहा जाता है.</p>
<p>कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की इस जल्दबाज़ी की वजह भारत को लेकर बढ़ती चिंता भी है. सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर reportedly इस बात से आशंकित हैं कि भारत भविष्य में 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसा कोई नया सैन्य अभियान शुरू कर सकता है. पिछले ऑपरेशन में भारतीय सेना की सटीक स्ट्राइक क्षमता और टेक्नोलॉजी ने पाकिस्तान को हिला दिया था. तभी से पाकिस्तान अपनी एयर डिफेंस और मिसाइल क्षमताओं को तेज़ी से अपग्रेड कर रहा है.</p>
<p>याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पहले से चीन के J-10C फाइटर जेट और कई चीनी मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा था. अब चीन से संभावित नई खेप इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान किसी भी नए टकराव की स्थिति में पहले से तैयार रहना चाहता है. यह स्थिति पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव का नया अध्याय खोल सकती है.</p>
<p>इसी बीच खबरें यह भी हैं कि पाकिस्तान अब चीन के 5वीं पीढ़ी के J-35 स्टील्थ फाइटर जेट पर नजर गड़ाए बैठा है. यदि यह डील आगे बढ़ती है तो दक्षिण एशिया का सैन्य संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और भारत-पाकिस्तान-चीन का त्रिकोणीय समीकरण और अधिक पेचीदा हो सकता है. विशेषज्ञ इसे आने वाले समय की सबसे बड़े रणनीतिक बदलावों में से एक मान रहे हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>‘ईरान की ओर बढ़ रहा हमारा जहाज’ &amp; ट्रंप की धमकी पर शिया देश का पलटवार: हमारी उंगली भी ट्रिगर पर</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-warning-tehran-response-as-ships-move-toward-iran</link>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि USS अब्राहम लिंकन समेत अमेरिकी सैन्य आर्माडा मिडिल ईस्ट पहुंच रहे हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हमले की तैयारी हो रही है. ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. ईरान में प्रदर्शन और फांसी पर भी बयान दिए गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 11:21:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका ईरान तनाव, Trump Iran warning, तेहरान प्रतिक्रिया news, USS Abraham Lincoln carrier, Middle East crisis, ईरान विरोध प्रदर्शन, US military armada, डोनाल्ड ट्रंप बयान, Iran Revolutionary Guards</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>तेहरान से उठी हलचल के बीच हालात अचानक रोमांचक मोड़ ले चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर धमाके जैसी चेतावनी देते हुए दावा किया है कि अमेरिका का विशाल नौसैनिक ‘आर्माडा’ सीधे ईरान की ओर बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर भी पीछे हटने को तैयार नहीं, उन्होंने साफ कहा कि उनका हाथ भी ट्रिगर पर है। दोनों देशों की तल्खी ऐसे वक्त में बढ़ी है जब ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बना रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यह सैन्य हलचल ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए जरूरी है।</p>
<p>पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका का विशाल युद्धक बेड़ा तेजी से ईरान की दिशा में बढ़ रहा है और हर कदम पर नजर रखी जा रही है। एक अलग बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका का ‘आर्माडा’ रास्ते में है और संभव है कि उसका उपयोग न करना पड़े, लेकिन तैयारियां पूरी हैं। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स कुछ ही दिनों में मिडिल ईस्ट पहुंच सकते हैं, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>वहीं, सवाल यह उठ रहा है कि अपने एयरबेस और सैनिकों की सुरक्षा के लिए अमेरिका आगे क्या कदम उठाएगा? एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर संभावित ईरानी हमलों की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। पिछले हफ्ते एशिया-प्रशांत क्षेत्र से शुरू हुई यह सैन्य गतिविधियां अमेरिका को किसी भी अचानक बढ़ते तनाव का तुरंत जवाब देने की क्षमता देती हैं। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्याचार जारी रखता है या अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करता है तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करने में देर नहीं करेगा।</p>
<p>स्थिति और गंभीर तब हुई जब ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की धमकियों के चलते ईरान को प्रदर्शनकारियों की फांसी रोकनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने करीब 840 फांसियों को रद्द कर दिया, और चेतावनी दी कि अगर ऐसा दोबारा हुआ तो ईरान को पहले से भी ज्यादा कड़ा झटका लगेगा। ट्रंप के अनुसार, यह जवाब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हुए अमेरिकी हमलों से कहीं अधिक शक्तिशाली होगा। दिसंबर के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को झकझोर दिया, और सख्त कार्रवाई के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। मानवाधिकार समूहों के मुताबिक अब तक कम से कम 5,002 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि ईरान सरकार 3,117 मौतों की पुष्टि करती है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत को बड़ी राहत? ट्रंप 25% टैरिफ हटाने की तैयारी में, अमेरिकी वित्त मंत्री का बड़ा संकेत</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-india-trade-trump-considering-proposal-to-eliminate-25-percent-tariff</link>
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<description><![CDATA[ मुझे पूरा आर्टिकल प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए मैं 3-4 लाइनों की पूर्ण और सटीक SEO‑optimized summary तैयार नहीं कर सकता। कृपया पूरा न्यूज़ कंटेंट भेज दें, ताकि मैं आपकी सभी आवश्यकताओं के अनुसार सही meta description लिख सकूं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 11:15:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका भारत टैरिफ न्यूज़, India US trade tensions, 25 percent tariff हटाने की खबर, Russian oil price cap debate, US India diplomacy talks, अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार अपडेट, G7 oil cap policy, India exports tariff impact, US Russia oil sanctions</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>स्कॉट बेसेंट का हालिया बयान अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचा रहा है. उन्होंने इशारा दिया कि भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को निकट भविष्य में खत्म करने का रास्ता खुल सकता है. यानी अगर कूटनीतिक माहौल सकारात्मक रहा और बातचीत तेज हुई, तो अमेरिका भारत को बड़ी राहत दे सकता है. यह संकेत उस समय आया है जब दुनिया भर में तेल व्यापार और रूस से जुड़े प्रतिबंधों पर बहस चरम पर है.</p>
<p><strong>भारत पर अमेरिका का कितना टैरिफ लागू है?</strong></p>
<p>फिलहाल अमेरिका भारत से आने वाले विभिन्न उत्पादों पर कुल मिलाकर लगभग 50% तक का भारी टैरिफ वसूल रहा है. इसमें 25% सामान्य शुल्क है, जो भारतीय निर्यात के करीब 55% हिस्से को प्रभावित कर रहा है. इसके अलावा अगस्त 2025 से अतिरिक्त 25% का “ऑयल पेनल्टी टैरिफ” लगाया गया, जिसका उद्देश्य रूस से भारत की तेल खरीद पर दबाव बनाना है.</p>
<p><strong>रूसी तेल पर अमेरिका, G7 और यूरोप का प्राइस कैप गेम</strong></p>
<p>रूस के तेल को निशाना बनाते हुए अमेरिका, G7 और यूरोपीय देशों ने प्राइस कैप का कड़ा सिस्टम लागू कर रखा है. वर्तमान में यह सीमा जनवरी 2026 तक 47.60 डॉलर प्रति बैरल तय है, जो 1 फरवरी 2026 को घटकर 44.10 डॉलर रह जाएगी. नियम बेहद सख्त है—अगर रूस इससे ज्यादा कीमत पर तेल बेचता है, तो उसे बीमा, शिपिंग और फाइनेंस जैसी आवश्यक सेवाओं से वंचित कर दिया जाएगा.</p>
<p><strong>अमेरिका का 500% टैरिफ वाला धमाकेदार बिल</strong></p>
<p>अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि उसके दबाव का असर दिखने लगा है और भारत ने रूसी तेल की खरीद में कमी की है. खबरें बताती हैं कि रिलायंस जैसी दिग्गज भारतीय रिफाइनरियों ने जनवरी 2026 में रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया. वहीं भारत का स्पष्ट कहना है कि उसकी ऊर्जा नीति सिर्फ राष्ट्रीय हित और किफायती दामों पर आधारित है, लेकिन वह अमेरिका के 500% टैरिफ वाले नए बिल पर कड़ी नजर रखे हुए है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Gold–Silver Crash: ट्रंप के एक बयान से हिला बाजार! चांदी ₹20,000 टूटी, सोना ₹4,000 धड़ाम — अभी पढ़ें</title>
<link>https://pratinidhi.in/gold-silver-price-drop-trump-factor-silver-down-20000-gold-down-4000-reasons</link>
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<description><![CDATA[ Gold-Silver Crash: सोना और चांदी की कीमतों में लगातार जारी तेजी पर गुरुवार को अचानक ब्रेक लग गया. एक झटके में चांदी का वायदा भाव 20,000 रुपये के आस-पास कम हो गया, तो सोना भी 4000 रुपये से ज्यादा सस्ता हुआ है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:04:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सोना चांदी price crash, gold silver rate today, चांदी 20000 गिरावट वजह, सोना 4000 सस्ता news, MCX gold silver update, ट्रंप फैक्टर market impact, silver price today India, gold rate गिरावट कारण, bullion market crash India</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले कई दिनों से आसमान छूती सोना-चांदी की कीमतों ने निवेशकों में जबरदस्त हलचल मचा रखी थी, लेकिन गुरुवार की सुबह बाजार खुलते ही ऐसा पलटवार हुआ कि हर कोई दंग रह गया। MCX पर गोल्ड-सिल्वर के रेट्स अचानक धराशायी हो गए। चांदी एक ही झटके में पूरे 20 हजार रुपये प्रति किलो टूट गई, जबकि सोना भी 4 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया। इस अचानक आए प्राइस क्रैश के पीछे की सबसे चौंकाने वाली वजह है—डोनाल्ड ट्रंप कनेक्शन!</p>
<p><strong>Silver Crash ने बाजार में मचा दी खलबली</strong><br>बुधवार को 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी 3,25,602 रुपये पर बंद हुई थी, और तेजी इतनी थी कि निवेशक नए रिकॉर्ड की उम्मीद लगा बैठे थे। लेकिन गुरुवार को MCX खुलते ही चांदी का रेट सीधे 3,05,753 रुपये पर आ गिरा। महज कुछ मिनटों में 1 किलो सिल्वर लगभग 19,849 रुपये सस्ती हो गई। बाजार में सन्नाटा और तनाव दोनों एक साथ देखने को मिला।</p>
<p><strong>सोना भी ढह गया—तेजी के सारे रिकॉर्ड टूटे</strong><br>सोना पिछले तीन दिनों से लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा था और लाइफ टाइम हाई बनाने में व्यस्त था। लेकिन गुरुवार को तस्वीर अचानक बदल गई। 5 फरवरी एक्सपायरी वाला सोना बुधवार को 1,52,862 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद था, जो गिरकर 1,48,777 रुपये रह गया। यानी चंद घंटों में गोल्ड 4,085 रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे लुढ़क गया।</p>
<p><strong>Gold-Silver क्रैश के पीछे छिपा ट्रंप फैक्टर</strong><br>इस भारी गिरावट की असली जड़ मानी जा रही है डोनाल्ड ट्रंप की हालिया बयानबाजी। पिछले कुछ दिनों से ट्रंप लगातार टैरिफ की धमकियों से ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा रहे थे—चाहे मामला वेनेजुएला का हो, ईरान का या फिर ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप पर टैरिफ अटैक की चेतावनी का। डर बढ़ा, तो निवेशक सुरक्षित ठिकाने यानी सोना-चांदी की तरफ भागे, और रेट्स उड़ान भरते गए।</p>
<p>लेकिन अब ट्रंप के सुर बदल गए हैं। उन्होंने हालिया बयानों में तनाव कम करने की कोशिश की, और जैसे ही मार्केट को भरोसा मिला—गोल्ड और सिल्वर की चमक अचानक फीकी पड़ गई। मांग कम हुई और रेट्स इतिहास की बड़ी गिरावट का शिकार हो गए।</p>
<p><strong>Greenland बयान ने बदला गेम</strong><br>ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने एक नया नरम बयान दिया, जिसे विशेषज्ञ मार्केट के लिए ‘कूलिंग स्टेटमेंट’ बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और NATO दोनों को खुश करने वाला समझौता किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ग्रीनलैंड से जुड़ी कार्रवाई यूरोप से आने वाले निवेश को नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन मार्केट ने राहत की सांस ली—और कीमती धातुओं के दाम ढह गए।</p>
<p><strong>India-US Deal पर गर्माहट, लेकिन Gold-Silver पर ठंडा असर</strong><br>स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के बाद ट्रंप ने PM नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि भारत-अमेरिका के बीच जल्द ही एक ‘शानदार ट्रेड डील’ होने वाली है। इस बयान का पॉजिटिव असर शेयर बाजार पर तो दिखा, लेकिन सोना-चांदी के निवेशकों पर इसका उल्टा असर पड़ा। जैसे ही ग्लोबल टेंशन कम होने के संकेत मिले, गोल्ड-सिल्वर की कीमतें ढेर हो गईं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत से ब्रह्मोस, पाकिस्तान से JF&amp;17! इंडोनेशिया का डबल गेम या बड़ी रणनीति? अंदर की बात जानिए</title>
<link>https://pratinidhi.in/indonesia-defense-policy-questions-brahmos-jf17-purchase-details</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की मुस्लिम देशों में तेजी से डिमांड बढ़ रही है. लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर, सूडान के साथ 1.5 अरब डॉलर के सौदे हुए. सऊदी अरब से 4 अरब डॉलर की बातचीत चल रही है. बांग्लादेश, इंडोनेशिया, अजरबैजान भी रुचि दिखा रहे हैं. इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल सौदा फाइनल करने के साथ JF-17 पर विचार कर रहा है, जिससे भारत चिंतित है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 13:12:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Indonesia BrahMos deal, Pakistan JF-17 demand, Muslim countries fighter jet, Indonesia defence policy, India security concern, JF-17 Thunder features, BrahMos missile India, Pakistan China fighter jet, global defence news Hindi</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स ने मुस्लिम देशों के बीच मानो तहलका मचा दिया है। पाकिस्तान-चीन की संयुक्त इंजीनियरिंग से बना यह जेट अचानक दुनिया के कई इस्लामिक देशों की पहली पसंद बनता जा रहा है। लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर का मेगा डील, सूडान से 1.5 अरब डॉलर का करार और सऊदी अरब के साथ करीब 4 अरब डॉलर की बातचीत—सब मिलकर इस जेट को सुर्खियों में ला रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसकी खरीद को लेकर गंभीरता से सोच रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर JF-17 की मांग इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड अमेरिका के घटते वैश्विक असर का सीधा संकेत है।</p>
<p><strong>JF-17 की बिक्री तेज क्यों हो रही है?</strong></p>
<p>JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल, आधुनिक और किफायती फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान की PAC और चीन की चेंगदू एयरोस्पेस ने मिलकर तैयार किया है। सस्ता रखरखाव, आधुनिक हथियार और आसान ऑपरेशन इसे छोटे और मध्यम बजट वाले देशों के लिए बेहद आकर्षक बनाते हैं। पाकिस्तान अब इसे मुस्लिम देशों में बड़े पैमाने पर बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>ये डील्स न सिर्फ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती हैं, बल्कि चीन की वैश्विक हथियार रणनीति को भी बढ़ावा देती हैं। दोनों देशों के लिए JF-17 एक महत्वपूर्ण स्ट्रेटजिक कार्ड बन चुका है।</p>
<p><strong>अमेरिकी प्रभाव में गिरावट क्यों?</strong></p>
<p>विश्लेषकों के मुताबिक, यह पूरी तस्वीर अमेरिका की सिकुड़ती पकड़ को दर्शाती है। सालों तक सऊदी अरब और खाड़ी देश अमेरिकी हथियार और सुरक्षा सिस्टम पर निर्भर रहे, लेकिन अब वे नई राहें तलाश रहे हैं। चीन के जेट्स और पाकिस्तान की रक्षा सप्लाई लाइनों से उन्हें विकल्प मिल गया है, जिससे अमेरिका की पकड़ कमजोर पड़ रही है।</p>
<p>अगर अमेरिका दबाव बनाएगा तो ये देश और ज्यादा चीन-पाकिस्तान ब्लॉक की ओर झुक सकते हैं। इसीलिए वॉशिंगटन इस समय बेहद सावधानी से कदम रख रहा है। ट्रंप दौर में ईरान पर हमला न करने का फैसला भी इसी बदलते प्रभाव का बड़ा संकेत था।</p>
<p><strong>इंडोनेशिया: JF-17 में दिलचस्पी, लेकिन ब्रह्मोस भी नजर में</strong></p>
<p>भारत के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द इंडोनेशिया का दोहरी नीति वाला रुख है। एक ओर वह भारत के साथ 450 मिलियन डॉलर के ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को लगभग अंतिम रूप देने वाला है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के JF-17 की खरीद पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है।</p>
<p>हाल ही में इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के एयर चीफ की इस्लामाबाद में मुलाकात हुई, जहां पाकिस्तान ने 40 JF-17 की पेशकश की। इतना ही नहीं, इंडोनेशिया पाकिस्तानी कॉम्बैट ड्रोन खरीदने की सोच भी रहा है।</p>
<p>भारत इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन के खिलाफ बेहद अहम रणनीतिक साझेदार मानता है। ऐसे में चीन-पाकिस्तानी हथियार खरीदना भारत और इंडोनेशिया के बीच भरोसे को कमजोर कर सकता है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को उलझा सकता है। साथ ही बांग्लादेश द्वारा JF-17 में रुचि दिखाना भी पाकिस्तान की बढ़ती क्षेत्रीय पैठ का संकेत है।</p>
<p><strong>ब्रह्मोस मिसाइल क्यों इतना बड़ा गेम-चेंजर है?</strong></p>
<p>ब्रह्मोस भारतीय और रूसी तकनीक से बनी दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। 300 किमी की जबरदस्त रेंज और मैक-3 से अधिक की रफ्तार इसे दुश्मन के लिए लगभग अजेय बना देती है। फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम इसे लॉन्च के बाद खुद लक्ष्य ढूंढने में सक्षम बनाता है।</p>
<p>मई 2023 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ब्रह्मोस ने पाकिस्तान के 12 में से 11 प्रमुख एयरबेस को भारी नुकसान पहुँचाया था। इस हमले ने पाकिस्तान की रक्षा पंक्ति को हिला दिया था और खुद शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया था कि हमला अप्रत्याशित था।</p>
<p>इंडोनेशिया ब्रह्मोस को नतूना सागर में अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए खरीदना चाहता है। फिलीपींस भी इसे खरीदकर अपनी समुद्री सुरक्षा को कई गुना बढ़ा चुका है।</p>
<p><strong>भारत की चिंता क्या है और आगे क्या हो सकता है?</strong></p>
<p>भारत के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडोनेशिया का JF-17 को लेकर अचानक सक्रिय होना ब्रह्मोस डील के बीच एक गलत संकेत दे रहा है। इससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ सकता है। नवंबर 2023 में दोनों देशों की रक्षा वार्ता में ब्रह्मोस पर बड़ा प्रगति हुई थी और अब सिर्फ रूस की मंजूरी बाकी है।</p>
<p>इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की 2025 गणतंत्र दिवस यात्रा के दौरान भी इस सौदे पर गंभीर चर्चा हुई थी। ब्रह्मोस इंडोनेशिया की सैन्य आधुनिकता के लिए बड़ा कदम साबित होगा, लेकिन JF-17 की खरीद इस समीकरण को उलझा सकती है।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>‘भारत निवेश लाता है, पाकिस्तान सिर्फ बहाने!’ ट्रंप के करीबी ने PAK को आईना दिखाया, बयान से मचा हड़कंप</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-ally-slams-pakistan-policies-amid-rising-investment-in-india</link>
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<description><![CDATA[ सांसद रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक अहमियत पाकिस्तान से कहीं अधिक है. उनके मुताबिक भारत अमेरिका से निवेश लेने के साथ वहां निवेश भी करता है. जबकि पाकिस्तान ऐसा पारस्परिक निवेश संबंध नहीं निभाता. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत US relations, ट्रंप सहयोगी बयान, Pakistan policies criticism, भारत निवेश growth, US India strategic partnership, रिच मैककॉर्मिक statement, India vs Pakistan comparison, Indian talent in US, US foreign policy India, अमेरिका भारत महत्व</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका के असरदार सांसद रिच मैककॉर्मिक ने एक धमाकेदार बयान देकर वॉशिंगटन की राजनीति में हलचल मचा दी है. CSIS के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने भारत की बढ़ती ताकत और उसकी वैश्विक अहमियत को नजरअंदाज किया, तो इसकी कीमत उसे बेहद महंगी चुकानी पड़ सकती है. उनके मुताबिक, आज की दुनिया में भारत वह शक्ति है जिसे कोई अनदेखा करने की गलती नहीं कर सकता.</p>
<p>मैककॉर्मिक ने पाकिस्तान और भारत की तुलना करते हुए कहा कि करीब 30 करोड़ की आबादी होने के बावजूद पाकिस्तान अमेरिका के लिए निवेश का कोई बड़ा स्रोत नहीं बन पाया. इसके उलट भारत लगातार विदेशी पूंजी आकर्षित कर रहा है और साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है. उन्होंने इसे स्पष्ट संकेत बताया कि भारत आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर अमेरिका का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद भागीदार है.</p>
<p>सांसद ने भारत की प्रतिभा और कौशल की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ टैलेंट पैदा नहीं करता, बल्कि यह टैलेंट अमेरिका की टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य सेवाओं और रिसर्च सेक्टर की रीढ़ बन चुका है. भारतीय विशेषज्ञों की क्षमताओं ने अमेरिका को कई वैश्विक चुनौतियों में मजबूत स्थिति दिलाई है, जो दोनों देशों की साझेदारी को और गहरा बनाती है.</p>
<p>कार्यक्रम में मौजूद भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद अमी बेरा भी पूरी तरह मैककॉर्मिक के साथ खड़े दिखाई दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका की पाकिस्तान के साथ कोई ठोस रणनीतिक साझेदारी नहीं है और न ही अमेरिकी कंपनियां वहां बड़ी रकम निवेश कर रही हैं. इसके बिल्कुल उलट, भारत आज अमेरिकी निवेश का सबसे भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य बन चुका है.</p>
<p>हालांकि हाल के दिनों में भारत-अमेरिका संबंधों में कुछ तनातनी देखी गई है, खासकर तब जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाकर कुल शुल्क को 50 फीसदी तक पहुंचा दिया. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि भारत द्वारा बड़ी मात्रा में रूसी तेल की खरीद इस तनाव की एक महत्वपूर्ण वजह है.</p>
<p>इस मुद्दे पर मैककॉर्मिक ने कहा कि भले ही अमेरिका भारत की रूसी तेल पर निर्भरता से खुश नहीं है, लेकिन वह यह भी समझता है कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “सकारात्मक रूप से राष्ट्रवादी” बताते हुए कहा कि सस्ता रूसी तेल भारत की आर्थिक रफ्तार को तेज करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से कांपा पाकिस्तान! क्या अब अपने ही वजूद पर आ गया है खतरा?</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-concerned-over-trump-iran-action-plan-internal-instability-risk</link>
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<description><![CDATA[ ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले के बीच पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है, खासकर बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की आशंका को लेकर. पाकिस्तान को डर है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से सीमा पार उग्रवाद, हथियार तस्करी और शरणार्थी संकट बढ़ सकता है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 13:11:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका ईरान तनाव, पाकिस्तान ईरान सीमा संकट, बलूचिस्तान unrest news, Iran regime change impact, पाकिस्तान सुरक्षा चिंता, US Iran attack fear, सिस्तान बलूचिस्तान conflict, cross border extremism issue, Iran Pakistan geopolitical tension</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित हमले की भनक ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। इस खतरे के साये में इस्लामाबाद को डर सताने लगा है कि अगर तेहरान में सत्ता उलटती है, तो उसके बाद भड़कने वाली आग सीधी पाकिस्तान तक पहुंच सकती है। खासकर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान का अशांत बलूचिस्तान, ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान से बिल्कुल सटा हुआ है, जहां लंबे समय से अलगाव की लहर उठती रही है।</p>
<p>पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि ईरान में अशांति बढ़ते ही बलूचिस्तान में सक्रिय समूह और उग्र हो सकते हैं। डिप्लोमैट्स तक यह चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ईरान की शासन व्यवस्था ढही, तो उसके झटके पाकिस्तान को बुरी तरह हिला देंगे।</p>
<p>प्रमुख अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में प्रकाशित एक गहन विश्लेषण में पाक विशेषज्ञों और अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस्लामाबाद किसी भी कीमत पर ईरान में सत्ता बदलाव नहीं चाहता। लेख के मुताबिक, अगर तेहरान अस्थिर होता है, तो पाकिस्तान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।</p>
<p>करीब 900 किलोमीटर लंबी साझा सीमा के कारण ईरान की हर हलचल पाकिस्तान के लिए सीधा खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में गड़बड़ी बढ़ी, तो सीमा पार से हथियारों की तस्करी, उग्रवाद, शरणार्थियों की बाढ़ और आर्थिक संकट—सभी एक साथ पाकिस्तान पर टूट सकते हैं।</p>
<p>ईरान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि चाहे हालात भीतर से बदलें या बाहरी दखलअंदाजी से, इसके असर से पाकिस्तान बच नहीं पाएगा।</p>
<p>इस पूरी स्थिति में पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता बलूचिस्तान है, क्योंकि ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में रहने वाले बलूच, पाकिस्तान के बलूचों से जातीय और सांस्कृतिक रूप से गहरे जुड़े हैं। यही रिश्ता संकट को और जटिल बना देता है।</p>
<p>अगर ईरान अस्थिर होता है, तो बलूच विद्रोही नेटवर्क को नया सहारा मिल सकता है। वे सुरक्षित ठिकानों का फायदा उठाकर सीमा पार हमले तेज कर सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में आतंकवाद पर जो नियंत्रण पाने की वर्षों लंबी कोशिश की है, वह एक झटके में ध्वस्त हो सकती है।</p>
<p>बलूचिस्तान के कई उग्र गुट लगातार सुरक्षाबलों और चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाते रहे हैं। यहां चल रहा चीन का मेगा प्रोजेक्ट CPEC किसी भी नई उथल-पुथल से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। विद्रोहियों ने पहले भी कहा है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, और अगर आंदोलन भड़का तो प्रांत के टूटने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।</p>
<p>पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम याद दिलाते हैं कि पहले भी जब ईरान-इजरायल के बीच तनाव बढ़ा था, पाकिस्तान ने खुलकर ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया था।</p>
<p>वे आगाह करते हैं कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह का बाहरी सैन्य, साइबर या आर्थिक हस्तक्षेप पूरी स्थिति को भयंकर बना देगा और पहले से दबाव झेल रहे ईरान को और अस्थिर कर देगा—जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा।</p>
<p>अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान की वापसी के बाद लाखों शरणार्थियों ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी। ऐसे में अगर ईरान में सत्ता उलटफेर होता है या अमेरिकी दखल बढ़ता है, तो पाकिस्तान को एक और विशाल शरणार्थी संकट से जूझना पड़ सकता है—जिसके लिए वह बिल्कुल तैयार नहीं है।</p>
<p>IMF के कर्ज पर चल रही पाक अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त शरणार्थियों का बोझ किसी भी समय इसे ढहा सकता है।</p>
<p>पाकिस्तानी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान में होने वाला कोई भी जोर-जबरदस्ती का राजनीतिक बदलाव पूरी मध्य-पूर्व में दरारें गहरा देगा। इससे प्रॉक्सी वॉर बढ़ेंगे, और चीन, रूस, तुर्की जैसी शक्तियां भी इस संघर्ष में खिंच सकती हैं।</p>
<p>ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी कामगारों से मिलने वाली कमाई—तीनों के लिए पाकिस्तान खाड़ी देशों की स्थिरता पर निर्भर है। अगर यह क्षेत्र ही हिल गया, तो पाकिस्तान के लिए आर्थिक अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स तक कह रही हैं कि अगर ईरान में सत्ता गिरती है, तो पाकिस्तान के लिए यह एक विनाशकारी रणनीतिक झटका होगा—जिसका असर आने वाले वर्षों तक दिखेगा।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भयानक हादसा LIVE! थाईलैंड में चलती ट्रेन पर गिरी क्रेन, 22 की मौत — चीख&amp;पुकार से कांपी पटरी</title>
<link>https://pratinidhi.in/thailand-crane-collapse-on-train-22-dead-30-injured</link>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के पास एक ट्रेन पटरी से उतर गई, जिसमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हो गए। यह हादसा नाखोन रत्चासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुआ, जब एक हाई-स्पीड रेल परियोजना पर काम कर रही निर्माण क्रेन ट्रेन के एक डिब्बे पर गिर गई। ट्रेन बैंकॉक से उत्तरपूर्वी थाईलैंड जा रही थी। बचाव कार्य जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 12:20:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>थाईलैंड ट्रेन हादसा, Bangkok train accident, निर्माण क्रेन गिरने की घटना, Nakhon Ratchasima accident, Thailand high speed rail project, ट्रेन पटरी से उतरने का हादसा, Sikhiu district news, Thailand railway crash, अंतरराष्ट्रीय दुर्घटना समाचार, Bangkok to Ubon Ratchathani train accident</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जहां ट्रेन के पटरी से उतरने पर कम से कम 22 लोगों की जान चली गई। इस भयावह हादसे में करीब 30 यात्री बुरी तरह घायल हो गए, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।</p>
<p>एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकॉक से उत्तरपूर्व की ओर जा रही ट्रेन अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जब एक भारी-भरकम निर्माण क्रेन सीधे ट्रेन के एक डिब्बे पर आ गिरी। नाखोन रत्चासिमा प्रांत के पुलिस प्रमुख थचापोन चिन्नावोंग ने पुष्टि की कि मरने वालों की संख्या 22 तक पहुंच गई है, जबकि 30 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।</p>
<p>यह भीषण हादसा सिखियो जिले में हुआ, जो बैंकॉक से लगभग 230 किलोमीटर दूर स्थित है। हादसे के वक्त यह ट्रेन उबोन रत्चथानी प्रांत की ओर बढ़ रही थी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसा इतना तेज था कि कई डिब्बे जोरदार आवाज के साथ पटरी से उछल गए।</p>
<p>स्थानीय मीडिया का कहना है कि एक हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर काम कर रही क्रेन अचानक असंतुलित होकर नीचे गिर गई और गुजरती ट्रेन से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ट्रेन में थोड़े समय के लिए आग भी लग गई, लेकिन पुलिस ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और बचाव दल लगातार राहत कार्य में जुटे हुए हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चीन&amp;पाकिस्तान की मिसाइल आर्मी कितनी खतरनाक? भारत के सामने खड़ा हुआ सबसे बड़ा युद्धी चैलेंज!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 10:46:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान चीन मिसाइल खतरा, India security challenge, ARFC Pakistan missile, China PLARF missiles, South Asia defence tension, भारत मिसाइल क्षमता, Agni BrahMos comparison, दो मोर्चे का खतरा India, Pakistan Fateh series missiles, nuclear missile threat India</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>दक्षिण एशिया में तनाव एक बार फिर विस्फोटक स्तर पर पहुंच रहा है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन अपनी मिसाइल मारक क्षमता को तेज रफ्तार से बढ़ा रहे हैं. SIPRI 2025, अमेरिकी पेंटागन की रिपोर्ट और कई रणनीतिक संस्थानों की नई जानकारियां बताती हैं कि दोनों देशों की बढ़ती रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत की सुरक्षा पर भारी दबाव डाल रही हैं. ये मिसाइलें परमाणु हथियारों से लेकर हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक तक सक्षम हैं, जो किसी भी संकट में भारत को दो तरफ़ा खतरे में डाल सकती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले सालों में ये चुनौती और भी आक्रामक हो सकती है.</p>
<p><strong>पाकिस्तान की नई रॉकेट फोर्स: ARFC ने बढ़ाई भारत की चिंता</strong></p>
<p>पाकिस्तान ने अगस्त 2025 में अचानक अपनी नई आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) लॉन्च कर सभी को चौंका दिया. यह फोर्स खास तौर पर नॉन-न्यूक्लियर, लंबी दूरी और सटीक हमलों वाली मिसाइलों के लिए बनाई गई है. मई 2025 के भारत-पाक संघर्ष में मिली असफलताओं के बाद इस कमांड की जरूरत महसूस हुई थी. बताया जा रहा है कि ARFC को चीन की PLARF की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसमें फतह-सीरीज की मिसाइलों को रीढ़ माना जाता है.</p>
<p>हालांकि पाकिस्तान की मिसाइल फोर्स आकार में भारत और चीन से छोटी है, लेकिन इसका विस्तार बेहद तेज़ी से हो रहा है. अनुमान है कि इसके पास 100–200 से ज्यादा मोबाइल लॉन्चर मौजूद हैं, जिन पर SRBM और MRBM तैनात हैं. SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के पास तकरीबन 170 परमाणु वॉरहेड भी हैं, जिससे खतरे का दायरा और बढ़ जाता है.</p>
<p><strong>पाकिस्तान की मिसाइलें: सटीक, खतरनाक और चीन की टेक्नोलॉजी से लैस</strong></p>
<p>फतह सीरीज समेत कई मिसाइलें सैचुरेशन अटैक यानी एक साथ भारी संख्या में लॉन्च किए जाने की क्षमता रखती हैं. चीन से प्राप्त नई तकनीक, विशेषकर PL-15 जैसी एडवांस्ड मिसाइलों ने पाकिस्तान की मारक क्षमता को नई दिशा दी है. यह सिस्टम इतना मोबाइल और हिट-एंड-रन डिजाइन में है कि भारत की पारंपरिक डिफेंस इसमें कमजोर पड़ सकती है.</p>
<p><strong>चीन की मिसाइल फोर्स: दुनिया की सबसे घातक और तेज़ी से बढ़ती ताकत</strong></p>
<p>चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) आज दुनिया की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक मिसाइल फोर्स मानी जाती है. पेंटागन की 2025 रिपोर्ट के अनुसार PLARF के पास 1250 से ज्यादा ग्राउंड-बेस्ड बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें मौजूद हैं. चीन के पास 600 से अधिक परमाणु वॉरहेड बताए जा रहे हैं, और अंदेशा है कि ये संख्या 2030 तक 1000 का आंकड़ा पार कर सकती है. चीन की यह तेजी विश्व सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत है.</p>
<p><strong>PLARF की क्षमता: SRBM से ICBM तक विनाशकारी रेंज</strong></p>
<p>चीन के पास 900+ SRBM, 1300 MRBM, 500 IRBM और 400 से अधिक ICBM हैं, जिसमें 12,000 किमी से अधिक की रेंज वाला DF-41 भी शामिल है. इसके अलावा हाइपरसोनिक DF-17 मिसाइलें 5+ मैक की स्पीड से उड़ान भर सकती हैं, जिन्हें रोकना लगभग असंभव माना जाता है. 320 से अधिक नए मिसाइल साइलो, सबमरीन-लॉन्च JL-3 और स्पेस-बेस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम चीन को सुपर-मिसाइल पावर बनाते हैं. भारत के उत्तरी क्षेत्र इन मिसाइलों की सीधी रेंज में आते हैं.</p>
<p><strong>भारत की मिसाइल फोर्स: मजबूत लेकिन संख्या में पीछे</strong></p>
<p>भारत की मिसाइल क्षमता मजबूत है, लेकिन चीन और पाकिस्तान की संयुक्त वृद्धि के मुकाबले संख्या, गति और रेंज के स्तर पर अभी भी कई कमियां मौजूद हैं. SIPRI 2025 के अनुसार भारत के पास लगभग 180 परमाणु वॉरहेड हैं. हालांकि भारत की अग्नि सीरीज और ब्रह्मोस जैसे हथियार शक्तिशाली हैं, पर दो-मोर्चे के युद्ध में इनकी पर्याप्त तैनाती चुनौती बन सकती है.</p>
<p><strong>दो-मोर्चे का खतरा: पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन</strong></p>
<p>पाकिस्तान की ARFC सीमा पर त्वरित हमलों और सटीक स्ट्राइक्स के लिए बड़ी चुनौती है. मई 2025 के संघर्ष में पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल क्षमता का आक्रामक प्रदर्शन भी किया था. दूसरी ओर चीन तिब्बत से पूरे भारत को निशाने पर ले सकता है, और उसकी हाइपरसोनिक मिसाइलें S-400 जैसे डिफेंस सिस्टम को भी चकमा दे सकती हैं. अगर दोनों देश संयुक्त रणनीति से हमला करें, तो मिसाइलों की बाढ़ भारत के एयर डिफेंस को ओवरलोड कर सकती है.</p>
<p><strong>भारत की तैयारी: नई मिसाइल फोर्स से लेकर हाई-टेक डिफेंस तक</strong></p>
<p>भारत तेजी से अपनी इंडिजेनस मिसाइलों—अग्नि वेरिएंट, ब्रह्मोस 2 और हाइपरसोनिक तकनीक—को आगे बढ़ा रहा है. S-400 और संभावित S-500 डिफेंस सिस्टम भारत की ढाल मजबूत कर रहे हैं. सेना प्रमुख ने भी भारतीय रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की जरूरत पर जोर दिया है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि चीन-पाक का बढ़ता गठजोड़ किसी भी छोटे तनाव को बड़े युद्ध में बदल सकता है.</p>
<p>अंततः, पाकिस्तान की मिसाइल शक्ति सीमित लेकिन बेहद केंद्रित और खतरनाक है, जबकि चीन की मिसाइल क्षमता विशाल, आधुनिक और लगातार विस्तार कर रही है. भारत को रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमता को अभूतपूर्व गति से बढ़ाना होगा.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>PAK Commentator का चौंकाने वाला दावा: ‘हमारा एटम बम भारत नहीं, Israel और US के लिए!’ न्यूक्लियर बयान से मचा बवाल</title>
<link>https://pratinidhi.in/pak-expert-new-claim-on-nuclear-policy-india-israel-us</link>
<guid>https://pratinidhi.in/pak-expert-new-claim-on-nuclear-policy-india-israel-us</guid>
<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने परमाणु बम पर अपनी एक अहम पॉलिसी का खुलासा किया है. पाकिस्तान ने माना है कि वो परंपरागत युद्ध में भारत से नहीं जीत सकता है, इसलिए वो &#039;नो फर्स्ट यूज&#039; पॉलिसी पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा है. सीनियर पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी ने कहा है कि पाकिस्तान का परमाणु बम अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के खिलाफ है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 16:26:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान परमाणु नीति, India Pakistan nuclear tension, नो फर्स्ट यूज़ policy, Pakistan anti India stance, Najam Sethi statement, India Pakistan war strategy, परमाणु हथियार विवाद, South Asia security news, Pakistan nuclear doctrine</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान की परमाणु नीति को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी का कहना है कि भारत के खिलाफ पारंपरिक युद्ध में टिक पाना पाकिस्तान के लिए लगभग नामुमकिन है, इसलिए वह कभी भी ‘नो फर्स्ट यूज़’ की नीति अपनाने पर सहमत नहीं होगा. सेठी के मुताबिक, ऐसी किसी प्रतिबद्धता पर हस्ताक्षर करना पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति को कमजोर कर देगा.</p>
<p>दुनिया न्यूज से बातचीत में नजम सेठी ने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान का परमाणु हथियार किसी इस्लामिक देश के लिए नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भारत के खिलाफ तैयार किया गया है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान न इज़राइल पर हमला करेगा और न ही अमेरिका पर—उसका परमाणु भंडार पूरी तरह से ‘एंटी इंडिया’ सोच के तहत रखा गया है. सेठी ने इसे पाकिस्तान की एक रक्षात्मक मजबूरी बताया.</p>
<p>सेठी ने खुलासा किया कि पाकिस्तान अब तक भारत के साथ ‘नो फर्स्ट यूज़’ समझौते पर हस्ताक्षर करने से लगातार बचता आया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पाकिस्तान पर दबाव डालता है कि वह इस वचनबद्धता को स्वीकार करे, जिसमें यह तय होता है कि वह किसी भी संघर्ष में सबसे पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा. कई देशों ने इस तरह के समझौते पहले ही कर लिए हैं, लेकिन पाकिस्तान पीछे हट रहा है.</p>
<p>इसी बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को लगातार डर है कि अमेरिका—खासकर ट्रंप प्रशासन—उसे इस्तेमाल करने के बाद हमेशा की तरह किनारे कर देगा. सेठी के अनुसार, वैश्विक राजनीति में पाकिस्तान की स्थिति लगातार अस्थिर होती जा रही है, जिससे उसकी सुरक्षा चिंताएं और बढ़ जाती हैं.</p>
<p>नजम सेठी ने यह स्वीकार करते हुए बड़ा बयान दिया कि पाकिस्तान अपनी ‘डिफेंसिव पोजिशन’ के कारण किसी समझौते पर साइन नहीं कर सकता. उनका कहना था कि यदि भारत कभी पारंपरिक युद्ध छेड़ता है तो पाकिस्तान अधिक देर तक टिक ही नहीं पाएगा, इसलिए उसकी अंतिम मजबूती परमाणु हथियार ही हैं. उनके अनुसार, यह पाकिस्तान के अस्तित्व से जुड़ा मसला बन चुका है, क्योंकि किसी और देश से उसे कोई खतरा नहीं है.</p>
<p>सेठी ने आगे चेतावनी दी कि जब तक पाकिस्तान के पास परमाणु बम है, उस पर वैश्विक प्रेशर बना रहेगा. दुनिया को हमेशा शंका रहेगी कि इस तकनीक को वह किसी धनवान इस्लामिक राष्ट्र को सौंप सकता है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है. यही वजह है कि पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.</p>
<p>गौरतलब है कि नजम सेठी पहले भी कई बार मान चुके हैं कि भारत के खिलाफ पारंपरिक युद्ध जीत पाना पाकिस्तान के लिए असंभव है, और यही उसकी आक्रामक परमाणु नीति का सबसे बड़ा कारण बताया जाता है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>डोनाल्ड ट्रंप भारत आएंगे! खास सहयोगी सर्जियो गोर बोले – ‘दोस्तों में कई बार असहमति होती है…</title>
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<description><![CDATA[ भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने आधिकारिक तौर पर अपना पद संभाल लिया है. अपने पहले संबोधन में उन्होंने भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल &#039;पॉक्स सिलिका&#039; (PaxSilica) में शामिल होने का न्योता दिया. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 13:17:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप इंडिया विजिट, भारत अमेरिका रिश्ते, सर्जियो गोर स्टेटमेंट, इंडिया यूएस डिप्लोमैसी, ट्रंप मोदी फ्रेंडशिप, PaxSilica initiative India, दिल्ली राजनयिक बातचीत, India US trade deal, अमेरिकी राजदूत भारत, Indo US strategic ties</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली पहुंचते ही नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ऐसा बयान दिया है जिसने भारत-अमेरिका रिश्तों में नई हलचल पैदा कर दी है. पदभार संभालते ही गोर ने इशारा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत जल्द भारत की जमीन पर कदम रख सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध सिर्फ साझा हितों तक सीमित नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर की मजबूत दोस्ती पर टिके हुए हैं. गोर ने कहा कि असली दोस्तों में मतभेद होना स्वाभाविक है, पर वे हमेशा बातचीत से हर दूरी मिटा लेते हैं.</p>
<p>अपने संबोधन में गोर भारतीयों की अद्भुत ऊर्जा, नवाचार की क्षमता और आध्यात्मिक गहराई की खूब सराहना करते नजर आए. उन्होंने कहा कि वे भारत के हर हिस्से की यात्रा करना चाहते हैं ताकि इस विविधताओं से भरे देश को और करीब से जान सकें. गोर का कहना था कि भारत की ताकत उसकी संस्कृति और लोगों की दृढ़ इच्छाशक्ति में छिपी है.</p>
<p>द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि ट्रेड डील पर अगली अहम बातचीत कल होने वाली है. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश पढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके लिए ‘बहुत खास दोस्त’ हैं. गोर के मुताबिक मोदी और ट्रंप की बॉन्डिंग बिल्कुल वास्तविक और भरोसे से भरी है.</p>
<p>#WATCH | Delhi: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा—“मैंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ दुनिया भर में यात्रा की है और मैं कह सकता हूँ कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी दोस्ती बेहद सच्ची है...”</p>
<p><strong>भारत अब अमेरिका की बड़ी रणनीतिक पहल का हिस्सा!</strong></p>
<p>एक बड़े ऐलान में सर्जियो गोर ने बताया कि भारत अगले महीने ‘पॉक्स सिलिका’ (PaxSilica) पहल में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने जा रहा है. यह अमेरिका की अगुवाई वाली हाई-टेक रणनीति है, जिसका लक्ष्य खनिजों, सेमीकंडक्टर्स, एआई और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक अटूट और सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करना है. यह कदम दोनों देशों के तकनीकी भविष्य को नई दिशा देगा.</p>
<p>गोर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका व्यापार के अलावा सुरक्षा, ऊर्जा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में भी साझेदारी को और गहरा करेंगे. उन्होंने वादा किया कि यह रिश्ते 21वीं सदी की सबसे प्रभावशाली वैश्विक साझेदारी बनकर उभरेंगे.</p>
<p><strong>क्या है ‘पॉक्स सिलिका’ और इसमें भारत की अहमियत?</strong></p>
<p>राजदूत गोर ने ‘पॉक्स सिलिका’ को एक वैश्विक नवाचार-आधारित चेन बताया, जो महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर ऊर्जा संसाधनों, सेमीकंडक्टर्स और लॉजिस्टिक्स को एकजुट करती है. अभी हाल ही में जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इज़रायल इससे जुड़े थे, और अब भारत को भी पूर्ण सदस्य के रूप में बुलाया गया है. गोर के शब्दों में—नई तकनीक के युग में भारत और अमेरिका का साथ काम करना अब विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी है.</p>
<p><strong>ट्रेड डील पर बढ़ी हलचल, कूटनीति का नया दौर</strong></p>
<p>लंबे समय से अटकी ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों पक्ष बेहद सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर कल एक और महत्वपूर्ण कॉल होने वाली है. सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि ट्रंप और पीएम मोदी की दोस्ती को उन्होंने खुद बेहद करीब से महसूस किया है. गोर ने बताया कि 2013 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और ट्रंप के कार्यकाल में वे हजारों संघीय नियुक्तियों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान में सरकार की सख़्ती, सड़कें बनीं जंग का मैदान! हिंसक झड़पें तेज़, दुनिया भर में असर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वो ईरान के लोगों की मदद के लिए तैयार हैं. ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के 14 दिन हो चुके हैं. इस प्रदर्शन में हिंसा लगातार बढ़ रही है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:02:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान विरोध प्रदर्शन, Iran protests violence, ईरान इंटरनेट ब्लैकआउट, Iran government crackdown, अमेरिका ट्रंप ईरान बयान, ईरान में दंगे हालात, Iran human rights crisis, ईरान सुरक्षा बल कार्रवाई, Iran unrest news, ईरान सरकार विरोध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>ईरान में पिछले तीन दिनों से चल रही कड़ी कार्रवाई के बावजूद जनविरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को देशभर की सड़कों पर गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा और हजारों लोग खुलेआम सरकार के खिलाफ नारे लगाते दिखे।</p>
<p>चश्मदीदों के बयान बताते हैं कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दमन की रफ्तार तेज़ कर दी है। हालात बेकाबू होते देख प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं लगभग ठप कर दी हैं, जिससे देश की असल तस्वीर दुनिया तक पहुंच ही नहीं पा रही।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार इस बार का इंटरनेट ब्लैकआउट पिछले बड़े विद्रोह के मुकाबले कहीं ज़्यादा गंभीर है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पहुंच सीमित होने के कारण ईरान के अंदर हो रही घटनाओं का सही आकलन बेहद मुश्किल हो गया है।</p>
<p>लगातार 14 दिनों से उबल रहे इन प्रदर्शनों में हिंसा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर आम नागरिक और प्रदर्शनकारी शामिल हैं। देश के सौ से ज़्यादा शहरों में विरोध की आग फैल चुकी है।</p>
<p>स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने सुरक्षा बलों को कार्रवाई और तेज़ करने का आदेश दिया है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में लिखा कि “ईरान आज़ादी की ओर बढ़ रहा है,” जिससे अंतरराष्ट्रीय बहस और तेज़ हो गई है।</p>
<p>वहीं देश के जनरल प्रॉसिक्यूटर मोहम्मद काज़ेम मोवाहेदी आज़ाद ने आदेश दिया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमों की प्रक्रिया बेहद तेज़ कर दी जाए। उनका कहना है कि सभी “दंगाइयों” पर एक ही आरोप लगेगा—ख़ुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ना—और इसकी सज़ा मौत है।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने एक पोस्ट में लिखा कि “बहुत जल्द ईश्वर ईरानी जनता के दिलों में जीत की भावना जगाएगा।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अटकलों का दौर तेज़ हो गया है।</p>
<p>कुछ लोगों का मानना है कि ख़ामेनेई को समझ आ गया है कि जनता अब सत्ता परिवर्तन के करीब पहुंच चुकी है, जबकि अन्य का कहना है कि यह संदेश उनके समर्थकों को आश्वस्त करने के लिए दिया गया है कि शासन अभी भी मजबूत है।</p>
<p>आईआरआईबी न्यूज़ के अनुसार जनरल प्रॉसिक्यूटर ने देशभर के दफ़्तरों को आदेश दिया है कि आरोप पत्र तुरंत जारी किए जाएं और मुकदमों की तैयारी बिना देरी के पूरी की जाए।</p>
<p>उनका कहना है कि अपराधों की श्रेणी एक ही है—चाहे किसी ने दंगाइयों की मदद की हो, संपत्ति का नुकसान कराया हो, या हथियार उठाकर नागरिकों में दहशत फैलाई हो—सब पर कठोर कार्रवाई होगी।</p>
<p>यहां तक कि उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो विदेशी ताकतों की मदद से देश में अस्थिरता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका बयान स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने के पक्ष में नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखकर एक बार फिर इस मुद्दे पर आग में घी डाल दिया कि “ईरान पहले कभी इतनी आज़ादी की चाह में नहीं देखा गया। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।” यह बयान ईरानी सरकार को और भड़का सकता है।</p>
<p>यूरोपियन कमीशन ने भी ईरानी जनता के संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि तेहरान से लेकर दुनिया के कई देशों में आज़ादी की आवाज़ गूंज रही है। यूरोप ने हिंसक दमन की कड़ी आलोचना की और तुरंत सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग की।</p>
<p>अमेरिका में ओआईएसी संगठन ने भी व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन करते हुए मांग की कि ईरान की “ग़ैरक़ानूनी सरकार” को जवाबदेह ठहराया जाए और जनता के संघर्ष को पूरा समर्थन दिया जाए।</p>
<p>उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा है कि वॉशिंगटन और इसराइल पर आरोप लगाना कोई भ्रम नहीं, बल्कि हालात की सच्चाई है—क्योंकि यही ताकतें देश में हिंसक विद्रोह भड़काने की कोशिश कर रही हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मिलिए ‘चाइनीज ट्रंप’ से! हू&amp;बहू Donald Trump की मिमिक्री, वीडियो देखकर चकरा गए लोग</title>
<link>https://pratinidhi.in/chinese-artist-trump-impersonation-in-church-videos-go-viral</link>
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<description><![CDATA[ दुनिया की खबरों के केंद्र में अक्सर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रहते हैं, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक &#039;चाइनीज ट्रंप&#039; भी वायरल है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 10:52:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चाइनीज ट्रंप वीडियो, Donald Trump lookalike China, रयान चेन ट्रंप डुप्लिकेट, सोशल मीडिया वायरल ट्रंप, ट्रंप इम्पर्सनेटर चीन, मजेदार पॉलिटिकल कंटेंट, ट्रंप स्टाइल वीडियो, Chinese Trump viral news, Chongqing Trump artist</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा किसी न किसी कारण सुर्खियों में बने रहते हैं, और अब उसी तूफानी पॉपुलैरिटी के बीच इंटरनेट पर एक नया चेहरा धमाल मचा रहा है—‘चाइनीज ट्रंप’। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस शख्स का अंदाज इतना जबरदस्त है कि लोग देखते ही दंग रह जाते हैं। ट्रंप जैसे बोलना, चलना, हाथों की वही स्टाइल… सब कुछ इतना सटीक कि कई दर्शक पहले ही पल में कन्फ्यूज हो जाते हैं। हर तरफ बस एक ही सवाल गूंज रहा है—आखिर ये है कौन?</p>
<p><strong>‘चाइनीज ट्रंप’ की दिलचस्प पहचान</strong></p>
<p>यह वायरल सेंसेशन हैं रयान चेन, जो चीन के चोंगकिंग शहर से आते हैं। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों में देखे जाते हैं और हर क्लिप में उनका ट्रंप अवतार कुछ नया ही दिखा जाता है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और हाव-भाव इतने हू‑बहू हैं कि लोग अनायास हंस पड़ते हैं, फिर दोबारा देखने से खुद को रोक नहीं पाते। हालांकि चेहरा पूरी तरह ट्रंप जैसा नहीं, लेकिन अंदाज इतना दमदार है कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>राजनीति नहीं, संस्कृति है असली ‘कंटेंट’</strong></p>
<p>AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, रयान की खासियत यह है कि वह राजनीतिक मुद्दों से पूरी तरह दूरी रखते हैं। उनके वीडियो न तो चुनावों पर होते हैं, न नीतियों पर—बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, खाने-पीने और लोकल संस्कृति पर केंद्रित रहते हैं। यही सरल और हल्का-फुल्का अंदाज रयान को बाकी मिमिक्री आर्टिस्ट्स से अलग बनाता है।</p>
<p><strong>देखें उनका वायरल अंदाज</strong></p>
<p>वीडियो में रयान चेन बिल्कुल ट्रंप की तरह हाथ फैलाकर बोलते हैं और उनकी आवाज व एक्सप्रेशन इतनी सटीकता से कॉपी करते हैं कि लोग हैरान रह जाते हैं। कई वीडियो में वे अमेरिका की सड़कों पर ट्रंप स्टाइल में चलते दिखते हैं और दुकानों में लोगों का रिएक्शन देखने लायक होता है। एक क्लिप में लोग उन्हें देखकर इतना खुश होते हैं कि वीडियो मिनटों में वायरल हो जाता है।</p>
<p>सोशल मीडिया पर उनका फैनबेस लगातार बढ़ रहा है और कई लोग कहते दिखते हैं कि ट्रंप का ऐसा ‘चीनी वर्जन’ उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।</p>
<p><strong>‘मैं कॉमेडियन नहीं, कल्चरल ब्रिज हूं’</strong></p>
<p>रयान का कहना है कि वह खुद को कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक जोड़ने वाला व्यक्तित्व मानते हैं। उनके वीडियो ज़्यादातर अंग्रेजी में होते हैं, जिनमें चीनी सबटाइटल्स भी शामिल किए जाते हैं ताकि हर दर्शक उनसे आसानी से जुड़ सके। कभी वे चोंगकिंग का तीखा खाना चखते हैं, तो कभी स्थानीय गलियों में मजेदार बातचीत करते नजर आते हैं। कई बार विदेशी टूरिस्ट्स भी उनसे मिलकर खूब आनंद लेते हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका गए बिना ट्रंप जैसा इतना परफेक्ट अंदाज?</strong></p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रयान लंबे समय तक कभी अमेरिका में रहे ही नहीं। इसके बावजूद उनकी अंग्रेजी, लहजा और बोलने की टाइमिंग इतनी स्वाभाविक है कि कई लोग उन्हें अमेरिकी समझ बैठते हैं। रयान बताते हैं कि उन्होंने सालों तक ट्रंप के भाषण, इंटरव्यू और डिबेट्स को बेहद बारीकी से स्टडी किया है। उनके अनुसार, असली नकल वही है जिसमें आवाज के साथ-साथ रिदम, ठहराव और बॉडी लैंग्वेज भी पूरी तरह कैद हो जाए।</p>
<p><strong>शौक से शुरू हुआ सफर, अब बना बड़ी पहचान</strong></p>
<p>आज रयान चेन एक फुल‑टाइम कंटेंट क्रिएटर बन चुके हैं और उनकी लोकप्रियता सोशल मीडिया से आगे निकलकर ब्रांड्स की दुनिया में भी पहुंच चुकी है। टेक, फूड और ऑटोमोबाइल जैसी कई प्रमुख कंपनियां उनके साथ काम कर रही हैं। लाइव इवेंट्स, प्रमोशन्स और कॉरपोरेट अपीयरेंसेज़ से वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। और खास बात—रयान को अब अमेरिकी वीजा भी मिल चुका है, जिससे उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मजबूत हो गई है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Donald Trump का गुस्सा फूटा: ‘वेनेजुएला में पैसा डाला तो अंजाम भुगतोगे!’ अमेरिकी तेल कंपनी के CEO को खुली चेतावनी</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-warns-us-oil-company-chief-investing-in-venezuela-not-appropriate</link>
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<description><![CDATA[ Donald Trump ने अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारियों को Venezuela Oil Sector में निवेश की योजनाओं के संबंध में बुलाया था, लेकिन बैठक के बाद दिग्गज एक्सॉन मोबिल के सीईओ पर राष्ट्रपति भड़के हुए नजर आए. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 10:49:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप वेनेजुएला तेल विवाद, Venezuela oil sector crisis, अमेरिकी तेल कंपनियां मीटिंग, Exxon Mobil CEO statement, वेनेजुएला राजनीतिक संकट, Donald Trump warning, व्हाइट हाउस तेल बैठक, Venezuela investment risk, ट्रंप मादुरो tension, US Venezuela oil policy</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका की धमाकेदार स्ट्राइक के बाद वेनेजुएला की सियासत में भूचाल आ चुका है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े Venezuea Oil Sector पर अपना कब्जा जमाने का दावा कर माहौल और गरमा दिया। अब इस तेल के अपार खजाने से अरबों कमाने की तैयारी में उन्होंने अपने प्लान को तेज़ी से आगे बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में ट्रंप ने अमेरिका की 17 दिग्गज तेल कंपनियों के CEOs को व्हाइट हाउस बुलाकर अपना मास्टर प्लान सामने रख दिया। लेकिन इसी मीटिंग में एक बयान ने ट्रंप का पारा आसमान पर पहुंचा दिया।</p>
<p><strong>17 तेल कंपनियों के दिग्गजों संग ट्रंप की हाई-लेवल मीटिंग</strong><br>वेनेजुएला के करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार को फिर से दुनिया के सामने चमकाने के लिए ट्रंप ने तेल उद्योग के 17 दिग्गज नेताओं को एक अहम बैठक में तलब किया। उन्होंने कंपनियों को वेनेजुएला में हालिया राजनीतिक उलटफेर के बाद लगभग 100 अरब डॉलर झोंकने पर विचार करने को कहा। मगर इसी दौरान Exxon Mobil के CEO डैरेन वुड्स ने अपने पुराने कड़वे अनुभवों का हवाला देकर माहौल एक झटके में बदल दिया।</p>
<p><strong>Exxon CEO ने सुनाए पुराने दर्द, गिनाई मुश्किलें</strong><br>वुड्स ने मीटिंग में साफ कहा कि उनकी संपत्तियां वेनेजुएला में दो बार जब्त की जा चुकी हैं और तीसरी बार जाने से पहले बेहद बड़े कानूनी बदलाव जरूरी हैं। उन्होंने सख्त स्वर में बताया कि मौजूदा कानून और बिजनेस स्ट्रक्चर निवेश को सुरक्षित नहीं बनाते और इस माहौल में कोई भी कंपनी वहां पैसा लगाने का जोखिम नहीं उठाएगी। वुड्स ने वेनेजुएला के हाइड्रोकार्बन एक्ट में बड़े सुधार की मांग भी सामने रखी।</p>
<p>CEO वुड्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक कानूनी सुधार नहीं होते, वेनेजुएला में टिकाऊ निवेश की बात करना नामुमकिन है। उन्होंने ट्रंप को सलाह देते हुए कहा कि देश को निवेश के लिहाज से आकर्षक बनाने से पहले खुद वेनेजुएला सरकार को अपने नियम-कानून में बड़े बदलाव करने ही होंगे।</p>
<p><strong>ट्रंप भड़के, एक्सॉन को दी बड़ी धमकी</strong><br>वुड्स की बात ट्रंप को इतनी नागवार गुजरी कि मीटिंग खत्म होते ही उन्होंने प्रेस के सामने खुलकर अपना गुस्सा भी जताया। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि एक्सॉन का रवैया उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आया और वे कंपनी को वेनेजुएला प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर करने का फैसला भी ले सकते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि एक्सॉन मोबिल ने "बहुत चालाकी" दिखाई है और इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>ट्रंप का ऐलान– ‘कौन वेनेजुएला में काम करेगा, यह हम तय करेंगे’</strong><br>ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि पिछले नुकसान की भरपाई की मांग करने वाली कंपनियों का वह साथ देंगे, लेकिन पुरानी गलतियों का ठीकरा अमेरिका के सिर पर नहीं फोड़ा जाएगा। उन्होंने दोहराया कि वेनेजुएला में किस कंपनी को परमिशन मिलेगी और किसे नहीं– यह पूरी तरह उनके प्रशासन की मर्जी पर निर्भर करेगा। यानी अब तेल के इस खेल में असली खिलाड़ी सिर्फ व्हाइट हाउस होगा।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, एक्सॉन, कॉनोकोफिलिप्स और शेवरॉन कभी वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA के मजबूत पार्टनर थे, लेकिन 2004 से 2007 के बीच राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया ने हालात बदल दिए। इसके बाद कंपनियों ने कानूनी लड़ाई शुरू की और अदालतों ने वेनेजुएला पर इन तीन दिग्गजों का करीब 13 अरब डॉलर से अधिक बकाया मान लिया।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप की धमकी से कांपा ईरान! एयरस्पेस सील, सेना हाई अलर्ट पर — क्या होने वाला है बड़ा अमेरिकी हमला?</title>
<link>https://pratinidhi.in/iran-closes-airspace-after-trump-warning-military-on-alert-fears-us-action</link>
<guid>https://pratinidhi.in/iran-closes-airspace-after-trump-warning-military-on-alert-fears-us-action</guid>
<description><![CDATA[ ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर लिया है और अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन को अमेरिकी हमले की आशंका है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 11:18:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान इंटरनेट ब्लैकआउट, Iran protests 2026, ट्रंप चेतावनी ईरान, Iran airspace बंद, ईरान सेना अलर्ट, Iran economic crisis, मानवाधिकार उल्लंघन ईरान, Tehran unrest news, Middle East tension, Iran US conflict news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>ईरान में गुरुवार रात 8 जनवरी 2026 को अचानक पूरे देश की डिजिटल सांसें थम गईं, जब तेहरान से लेकर कई अहम शहरों तक इंटरनेट और फोन नेटवर्क पूरी तरह बंद कर दिए गए. निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के आह्वान पर उठी जनलहर इतनी तेज रही कि सरकार ने अफरा-तफरी में संचार सेवाएं काट दीं. ट्रंप की कड़ी चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया और सेना को फुल अलर्ट पर भेज दिया. लगातार बढ़ते आर्थिक संकट की आग अब शासन की नींव तक पहुंच चुकी है, और 12 दिनों से उबल रहे प्रदर्शनों में मौतों का आंकड़ा लगातार भयावह होता जा रहा है.</p>
<p>एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्टें बताती हैं कि लगभग हर प्रांत में विरोध की चिंगारी भड़क चुकी है. बेगुनाह बच्चों समेत कम से कम 38 नागरिकों की जान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में जा चुकी है, जबकि सैकड़ों घायल हालत में अस्पतालों में जिंदगी से जूझ रहे हैं. क्लाउडफ्लेयर और नेटब्लॉक्स जैसे डिजिटल राइट्स समूहों ने भी पुष्टि की कि इंटरनेट ब्लैकआउट कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सरकार का सीधा दखल है. नेटब्लॉक्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि देशभर में कनेक्टिविटी लगभग ठप है, जिससे लोगों की बातचीत और सूचना तक पहुंच बुरी तरह बाधित हो गई है.</p>
<p><strong>ट्रंप की सख्त चेतावनी से ईरान में बढ़ी खलबली</strong></p>
<p>दुबई से किए गए लैंडलाइन और मोबाइल कॉल्स तक ईरान में नहीं पहुंच पा रहे—यानी डिजिटल पर्दा पूरी तरह गिर चुका है. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरानी शासन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाता रहा, तो अमेरिका “बेहद कड़े कदम” उठाएगा. एक इंटरव्यू में ट्रंप ने खुलकर चेताया, “अगर वे अपने ही लोगों को मारेंगे, तो हम बहुत जोरदार जवाब देंगे.” उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इसे मानवाधिकारों की लड़ाई बताते हुए कहा कि अमेरिका उन सभी ईरानियों के साथ है जो अपनी आज़ादी की आवाज बुलंद कर रहे हैं.</p>
<p>वेंस ने आगे कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दबाना ईरानी नेतृत्व की नासमझी है और उनके लिए बेहतर होता कि वे अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर वार्ता करते. वहीं रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी अयातुल्ला अली खामेनेई को सीधे चेताया कि अगर हिंसा जारी रही, तो राष्ट्रपति ट्रंप “मारक कदम” उठाने में देर नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता ईरान की सड़कों पर न्याय मांग रहे हर नागरिक के साथ खड़ी है.</p>
<p><strong>“ईरान जल्द होगा आज़ाद”—पोम्पियो ने बढ़ाया मनोबल</strong></p>
<p>पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री और सीआईए प्रमुख माइक पोम्पियो ने भी प्रदर्शनकारियों की बहादुरी की खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि तेहरान की रातों को रोशन कर रहे इन साहसी नागरिकों को देखकर दुनिया प्रेरित हो रही है, और वह दिन दूर नहीं जब ईरानी जनता एक स्वतंत्र देश में खुलकर सांस ले सकेगी. यह आंदोलन शाह के बेटे रजा पहलवी के लिए भी एक निर्णायक पल बन गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग पहली बार इतनी मजबूती के साथ उनके समर्थन में सामने आए हैं. कई शहरों में बाजार, दुकानें और मंडियां बंद रहीं, जबकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब तक कम से कम 39 लोग मारे जा चुके हैं और 2,260 से ज्यादा गिरफ्तार किए जा चुके हैं.</p>
<p>आर्थिक कुप्रबंधन से भड़का यह जनआंदोलन अब ईरान की धर्मशासित सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, और हालात हर गुजरते दिन के साथ और विस्फोटक होते जा रहे हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>माइक्रोसॉफ्ट छोड़ रूस में झाड़ू उठाने को मजबूर भारतीय इंजीनियर! सैलरी जानकर उड़ जाएंगे होश</title>
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<description><![CDATA[ Jobs in Russia: रूस में वर्कर्स की कमी हो गई है, जिस वजह से अब विदेशी वर्कर्स हायर किए जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर वर्कर्स भारत से पहुंच रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 17:39:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस jobs news, India to Russia workers, Russian labour shortage, भारतीय वर्कर्स रूस, Russia cleaning jobs, high salary abroad India, software engineer Russia, विदेश नौकरी ट्रेंड, Russia work migration, Indian youth abroad jobs</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>रूस में इस समय मजदूरों की इतनी भारी कमी है कि कंपनियां विदेशों से तेजी के साथ वर्कर्स बुला रही हैं, और हैरानी की बात यह है कि भारतीय युवक इस दौड़ में सबसे आगे निकल चुके हैं। देश में तरह-तरह की नौकरियां खाली पड़ी हैं, जिनमें सड़क साफ करने जैसे बुनियादी काम भी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं।</p>
<p>खास बात यह है कि रूस में सड़क सफाई करने वालों की अचानक मांग आसमान छूने लगी है। स्थानीय लोगों की कमी ने कंपनियों को मजबूर कर दिया है कि वे भारत जैसे देशों से युवाओं की भर्ती करें, ताकि कामकाज बिना रुके चलता रहे।</p>
<p>इसी बीच एक भारतीय युवक की कहानी सुर्खियां बटोर रही है, जिसने माइक्रोसॉफ्ट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर रूस में क्लीनिंग का काम शुरू कर दिया। अब वह वहां सड़कों पर झाड़ू लगाने और उन्हें साफ रखने की जिम्मेदारी निभा रहा है।</p>
<p>उस युवक के अनुसार, रूस में मिलने वाली मजदूरी इतनी जबरदस्त है कि उसे अब छह फिगर की सैलरी मिल रही है—इतनी कमाई उसे भारत में अपनी इंजीनियरिंग जॉब से भी नहीं मिल पाती थी। उसका कहना है कि आर्थिक स्थिरता ने उसकी लाइफ पूरी तरह बदल दी है।</p>
<p>उसने यह भी खुलासा किया कि कोडिंग की नौकरी ने उसे मानसिक रूप से थका दिया था, जबकि क्लीनिंग का काम भले ही शारीरिक हो, लेकिन दिमाग को शांति देता है। रूस में स्थिर कमाई और शानदार वर्क-लाइफ बैलेंस अब उसे इस नए पेशे में टिके रहने की ताकत दे रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>500% टैरिफ की धमकी! भारत की तेज़ रफ्तार ग्रोथ से बौखलाए ट्रंप, क्या ट्रेड वॉर की हदें पार करेंगे?</title>
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<description><![CDATA[ रूस से तेल खऱीदने के नाम अमेरिका भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ थोपने की तैयारी कर चुका है. इस संबंध में ट्रंप को अधिकार देने वाले बिल को अप्रूवल मिल चुका है. पर सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यूं है? क्या भारत की तरक्की से अमेरिकी राष्ट्रपति जल भुन गए है? ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 17:34:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप 500% टैरिफ भारत, Russia oil sanctions India, भारत अमेरिका ट्रेड वॉर, India economy growth news, ट्रंप रूस पॉलिसी असर, US India relations tension, भारत चीन टैरिफ इश्यू, global trade politics India, ट्रंप नई नीति विवाद, Russia petroleum imports India</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>डोनाल्ड ट्रंप की नई नीतियों ने एक बार फिर पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। ताज़ा कदम के रूप में उन्होंने ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025’ पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके तहत रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर आसमान छूने वाले टैरिफ लगाने की शक्ति मिल गई है। हैरानी की बात यह है कि भारत और चीन जैसे देशों से आने वाले सामान पर यह टैरिफ 500% तक पहुंच सकता है। यह दंडात्मक कार्रवाई उन देशों के खिलाफ है, जो रूस के तेल और यूरेनियम व्यापार में शामिल रहते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है—क्या ट्रंप यह सब सिर्फ रूस-यूक्रेन विवाद के लिए कर रहे हैं, या फिर भारत की तेज़ी से बढ़ती ताकत उन्हें बेचैन कर रही है?</p>
<p>भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार दुनिया को चौंका रही है। अनुमान है कि 2025-26 में भारत की जीडीपी 7.4% की अविश्वसनीय रफ्तार से बढ़ेगी, जो वैश्विक मंदी के दौर में किसी चमत्कार से कम नहीं। ऐसे में चर्चा यह भी गर्म है कि क्या ट्रंप का यह टैरिफ बम भारत की आर्थिक उड़ान को रोकने का तरीका है। क्या भारत की उभरती ताकत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश को चुनौती देती दिख रही है?</p>
<p><strong>1-ट्रंप की सैंक्शन पॉलिसी का असली खेल</strong></p>
<p>ट्रंप हमेशा से ‘अमेरिका फर्स्ट’ के मुखर समर्थक रहे हैं, और 2025 में सत्ता में लौटते ही उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को अपने एजेंडे का केंद्र बना दिया। सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ मिलकर तैयार किया गया यह बिल उन देशों को निशाना बनाता है जो रूस से सस्ता तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को मज़बूत कर रहे हैं। खास तौर पर भारत, चीन और ब्राजील को इस कानून में प्रमुख टारगेट बनाया गया है क्योंकि ये तीनों रूसी तेल के बड़े आयातक हैं।</p>
<p>कानून का नियम बिल्कुल साफ है—अगर रूस शांति वार्ता से पीछे हटता है या बातचीत से इनकार करता है, तो उसके तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। यह टैरिफ सीधे उन देशों के निर्यात पर लगेगा। हालांकि, अगर कभी शांति समझौता हो जाता है या युद्धविराम लागू होता है, तो इन नियमों में ढील मिल सकती है। लेकिन अभी के माहौल में यह बिल रूस पर दबाव डालने के साथ-साथ बाकी देशों को झुकाने का भी साधन बन चुका है। ट्रंप पहले ही भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा चुके हैं, जिससे कुछ भारतीय उत्पादों पर टैक्स 50% तक पहुंच गया है। वजह वही—रूस के साथ भारत का ऊर्जा व्यापार।</p>
<p>ट्रंप का कहना है कि अगर भारत रूसी तेल पर लगाम नहीं लगाता तो टैरिफ और बढ़ेंगे, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत पहले ही अपनी खरीद घटा चुका है। भारत ने साफ कहा कि पीएम मोदी की ओर से रूसी तेल बंद करने का कोई आश्वासन नहीं दिया गया था। वहीं, सीनेटर ग्राहम के मुताबिक भारत के राजदूत ने 25% टैरिफ हटाने की मांग की थी। इन सबके बीच एक बात साफ है—ट्रंप का लक्ष्य सिर्फ रूस नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का संतुलन अमेरिका की ओर मोड़ना है।</p>
<p><strong>2-रूस तो बहाना है, असली निशाना कोई और</strong></p>
<p>ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह बिल रूस को दंडित करने के लिए है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि खुद अमेरिका रूस से यूरेनियम और कई महत्वपूर्ण खनिज खरीदता रहता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने उजागर किया कि अमेरिकी कंपनियां परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पैलेडियम, उर्वरक और कई रसायन रूस से आयात कर रही हैं। ऐसे में भारत पर तेल व्यापार रोकने का दबाव बनाना, भारतीय दृष्टिकोण से पूरी तरह दोहरा रवैया लगता है।</p>
<p>एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब भारतीय पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम खरीदता है और भारत की आलोचना क्यों करता है, तो ट्रंप ने सवाल टालते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। यह प्रतिक्रिया पूरी दुनिया में सवाल खड़े करने के लिए काफी थी।</p>
<p><strong>3-भारत की 6.5% ग्रोथ नहीं, बल्कि एक ‘आर्थिक विस्फोट’</strong></p>
<p>ताज़ा आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की GDP 2025-26 में 7.4% तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्ष की 6.5% वृद्धि से कहीं अधिक है। रॉयटर्स, CNBC और इकोनॉमिक टाइम्स जैसी एजेंसियों का कहना है कि यह तेज़ी तब देखने को मिल रही है जब दुनिया अमेरिकी टैरिफ और महंगाई से जूझ रही है। यह उछाल साबित करता है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का नया ऊर्जा केंद्र बन चुका है और आने वाले वर्षों में दुनिया की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;सर, प्लीज़ क्या मैं आपसे मिल सकता हूं&amp;apos;, ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर अब क्या नई बात कही</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-new-statement-on-meeting-pm-modi</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दिनों में पीएम नरेंद्र मोदी और टैरिफ़ पर कई दावे किए हैं. उन्होंने व्यापार तनाव का मुद्दा भी उठाया. इसके बावजूद हर बयान में मोदी संग अपने मजबूत रिश्तों को दोहराया. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 12:13:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप मोदी मीटिंग बयान, India US trade tensions, अमेरिकी टैरिफ़ भारत रूस तेल, नरेंद्र मोदी ट्रंप रिश्ते, Donald Trump latest statement, भारत अमेरिका राजनीति, US India defense deal controversy, अपाचे हेलीकॉप्टर डील इंडिया, international relations news, Modi Trump meeting claim</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसा बयान दे दिया है, जिसने भारतीय राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक हलचल मचा दी है.</p>
<p>कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने भारत को चेताया था कि अगर वह रूस के साथ अपना व्यापार धीमा नहीं करता, तो अमेरिका किसी भी वक्त टैरिफ़ बढ़ा सकता है. अब उन्होंने एक नया दावा जोड़ते हुए कहा है कि पीएम मोदी खुद उनसे मिलने की गुज़ारिश करने आए थे और कहा था— “सर, प्लीज़ क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?”</p>
<p>ट्रंप का दावा है कि भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ़ का असर इतना गहरा है कि अब भारत रूस से तेल की खरीद कम करने पर मजबूर हुआ है. हालांकि भारतीय मीडिया इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहा है और तथ्यों के साथ बता रहा है कि ट्रंप द्वारा बताए गए आंकड़े सही नहीं हैं.</p>
<p>टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट साफ करती है कि भारत ने 68 नहीं, बल्कि सिर्फ 28 अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदे हैं— जिनमें से 22 की डील 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान हुई थी, जबकि बाकी छह हेलीकॉप्टर का सौदा 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुआ था.</p>
<p>एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि मोदी उन्हें खुश रखना चाहते थे और इसी वजह से तेल आयात घटाया गया. उन्होंने मोदी को “बहुत अच्छा इंसान” बताते हुए कहा कि भारत उन्हीं को खुश करने की कोशिश कर रहा था.</p>
<p>कैनेडी सेंटर में हाउस रिपब्लिकन कार्यक्रम के दौरान भी ट्रंप भारत और मोदी का ज़िक्र करने से नहीं रुके. उन्होंने कहा कि एफ-35 लड़ाकू विमान पाने में समय लगता है और भारत ने अपाचे हेलीकॉप्टर को लेकर उनसे शिकायत की थी कि वे पाँच साल से इंतज़ार कर रहे हैं.</p>
<p>यहीं नहीं, ट्रंप ने फिर अपना 68 हेलीकॉप्टर वाला दावा दोहराते हुए जोड़ा कि मोदी उनसे मिलने खुद आए थे. उन्होंने कहा— “मैंने हां कहा क्योंकि हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं, भले ही टैरिफ़ के कारण वे मुझसे खुश नहीं रहते।”</p>
<p>ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका की कमाई अब इन टैरिफ़ से “बहुत तेजी से बढ़ रही है” और भारत को रूस से तेल आयात कम करने पर मजबूर होना पड़ा है.</p>
<p>ट्रंप के इन बयानों पर भारत की राजनीति तुरंत गरमा गई. कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर ट्रंप का वीडियो साझा करते हुए मोदी पर निशाना साधा और लिखा— “ट्रंप कहते हैं मोदी ने खुद उनसे मिलने की भीख मांगी। याद है? यही वजह थी कि ट्रंप गेट पर उन्हें रिसीव करने तक नहीं आए थे।”</p>
<p>कांग्रेस ने पीएम मोदी के कई कैरिकेचर भी पोस्ट किए, जिनमें वह पूछते दिख रहे हैं— “सर, क्या मैं आपसे मिलने आ सकता हूं प्लीज़?” यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.</p>
<p>इसी बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने भी ट्रंप को आड़े हाथों लिया. एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि ट्रंप को जियोपॉलिटिक्स की समझ नहीं है और वे सिर्फ टैरिफ़ व तेल की बिक्री में उलझे रहते हैं.</p>
<p>बॉल्टन ने कहा, “चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों से तालमेल मजबूत करना जरूरी है, लेकिन ट्रंप ने भारत पर तो टैरिफ़ लगाया, चीन पर नहीं— जबकि चीन रूस से कई गुना ज्यादा तेल खरीदता है।”</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप की नीतियों ने अमेरिका-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचाया है और काश दोनों नेताओं के बीच दोबारा बातचीत बहाल करने का कोई रास्ता होता.</p>
<p>रविवार की फ्लाइट में ट्रंप के साथ मौजूद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी बड़ा दावा जोड़ा. उन्होंने कहा कि 25% टैरिफ़ की वजह से भारत के राजदूत उनसे मिलने पहुंचे थे और उन्हें बताया कि भारत अब रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है— ताकि ट्रंप टैरिफ़ में ढील देने के लिए तैयार हो जाएं.</p>
<p>भारत, अमेरिका, रूस और टैरिफ़ की इस राजनीति में आगे क्या मोड़ आएगा, यह पूरी दुनिया की निगाहों में है— लेकिन ट्रंप के बयान ने एक बार फिर वैश्विक बहस को नई आग दे दी है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>‘कोकीन तस्कर’ को व्हाइट हाउस का न्योता? ट्रंप ने फोन पर की 1 घंटे लंबी बातचीत—अंदरखाने की कहानी!</title>
<link>https://pratinidhi.in/questions-raised-over-trump-inviting-alleged-drug-accused-to-white-house-and-hour-long-call</link>
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<description><![CDATA[ कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई बातचीत में ड्रग तस्करी और वेनेजुएला जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई. ट्रंप ने पहले पेट्रो को &#039;बीमार आदमी&#039; कहकर धमकाया था, लेकिन अब उन्होंने पेट्रो को अच्छा इंसान बताया और व्हाइट हाउस में उनसे मिलने जा रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:04:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump Colombia talks, ट्रंप पेट्रो बातचीत, White House meeting news, ड्रग तस्करी चर्चा, US Colombia relations, वेनेजुएला संकट अपडेट, अंतरराष्ट्रीय राजनीति खबर, Trump Petro call, foreign policy update, अमेरिका लैटिन अमेरिका संबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ ही दिनों पहले जिन्हें ट्रंप खुलेआम ‘Sick Man’ कहकर धमका रहे थे, उन्हीं कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो से बातचीत करना अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ‘सम्मान’ की बात बन गई है. ट्रंप ने बड़े विनम्र अंदाज़ में कहा कि उन्होंने पेट्रो के साथ ड्रग्स सहित कई विवादित मुद्दों पर बात की, जिन पर दोनों की राय अक्सर बिल्कुल उलट रहती है. कभी अपमान, कभी तारीफ—ट्रंप के तेवर आखिर क्या मोड़ ले लें, कोई नहीं जानता.</p>
<p>अभी हाल तक ट्रंप पेट्रो को ‘कोकीन तस्कर’ बताकर निशाना साध रहे थे, लेकिन अब अचानक उनका रुख नरम पड़ गया है. खबर है कि दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर विस्तार से बातचीत हुई. इतना ही नहीं, ट्रंप ने पेट्रो को व्हाइट हाउस में मुलाक़ात के लिए भी न्योता दे दिया है.</p>
<p>ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखते हुए पेट्रो की जमकर तारीफ की और उनके ‘लहजे’ की सराहना की. उन्होंने साफ कहा कि वे जल्द ही उनसे आमने-सामने मिलने की उम्मीद करते हैं. ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि यह अहम बैठक व्हाइट हाउस में आयोजित की जाएगी.</p>
<p>याद दिला दें कि यह वही ट्रंप हैं जिन्होंने कुछ ही दिन पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाने के बाद पेट्रो पर भी सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया था. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कोलंबिया को ‘बहुत बीमार’ और उसके शासनाध्यक्ष को ‘कोकीन बनाने वाला शख्स’ बता डाला था.</p>
<p>लेकिन अब माहौल बदला हुआ दिखाई देता है. ट्रंप की धमकियों के बाद बुधवार की रात कोलंबिया में हजारों लोग पेट्रो के समर्थन में सड़कों पर उतर आए. इसी रैली में पेट्रो ने बताया कि उन्होंने ट्रंप से लगभग एक घंटे तक बातचीत की है.</p>
<p>बोगोटा के डाउनटाउन क्षेत्र में जमा भारी भीड़ को संबोधित करते हुए पेट्रो ने बताया कि बातचीत का मुख्य फोकस दो बड़े मुद्दे थे—वेनेजुएला की स्थिति और ड्रग तस्करी. दिलचस्प बात यह रही कि इसी रैली में कुछ मिनट पहले पेट्रो के इशारे पर भीड़ अमेरिका विरोधी नारे लगा रही थी.</p>
<p>पेट्रो ने दावा किया कि कोलंबिया के कुछ प्रभावशाली नेता, जिनका संबंध नार्को-नेटवर्क से माना जाता है, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने पेट्रो के बारे में झूठे तथ्य रखे. उनका कहना है कि इसी गलत जानकारी ने इस पूरे कूटनीतिक विवाद को जन्म दिया.</p>
<p>उन्होंने कहा कि यही लोग अमेरिका और कोलंबिया के बीच पैदा हुए मौजूदा तनाव के असली जिम्मेदार हैं. उन्होंने इस स्थिति को ‘कूटनीतिक’ और ‘मौखिक’ संकट का नाम दिया और कहा कि इसे शांत तरीके से सुलझाया जा सकता है.</p>
<p>ट्रंप से बातचीत के बाद पेट्रो ने सोशल मीडिया एक्स पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि अमेरिकी निवेश के सहारे ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका और लैटिन अमेरिका के बीच बड़ा गठजोड़ संभव है, लेकिन अमेरिका को इस क्षेत्र को केवल तेल का स्रोत समझने की गलती नहीं करनी चाहिए.</p>
<p>पेट्रो ने अपने पोस्ट के साथ एक बेहद प्रतीकात्मक तस्वीर भी साझा की—एक जगुआर और एक गंजा बाज (बाल्ड ईगल) एक-दूसरे को गले लगाते हुए. हाल के महीनों में पेट्रो कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि अमेरिका अगर कोलंबिया पर हमला करता है, तो ‘जगुआर जाग उठेगा’. कोलंबिया में जगुआर शक्ति और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है.</p>
<p>ट्रंप का अचानक नरम पड़ जाना इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि पेट्रो ने वेनेजुएला में हुए अमेरिकी ऑपरेशन की खुलकर निंदा की थी. उन्होंने इसे ‘गुलाम बनाने वालों का हमला’ बताया था और इसकी तुलना 1937 में स्पेन के गुएर्निका पर नाजी बमबारी से की थी.</p>
<p>वर्षों से कोलंबिया लैटिन अमेरिका में अमेरिका का सबसे मजबूत सहयोगी रहा है. ड्रग्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अमेरिका और कोलंबिया की साझेदारी तीन दशक पुरानी है. दोनों देश मिलकर कोकीन तस्करी पर रोक, विद्रोहियों से निपटने और ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए काम करते रहे हैं. इसके बावजूद हाल के दिनों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव तेज़ी से बढ़ रहा था.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>‘अब ईरान की बारी!’ अमेरिकी रणनीतिकार का खौफनाक खुलासा—ट्रंप का अगला टारगेट तय, दुनिया कांपी</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-expert-warns-trumps-next-target-iran-major-crisis-ahead</link>
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<description><![CDATA[ रणनीतिकार जेफरी सैक्स ने कहा कि अमेरिका इजरायल के दबाव में युद्ध चुनता है. उन्होंने चेताया कि उसका अगला निशाना ईरान हो सकता है. सैक्स के मुताबिक यह कदम वेनेजुएला से भी ज्यादा खतरनाक साबित होगा. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 18:20:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप ईरान टेंशन, US foreign policy crisis, जेफरी सैक्स बयान, Iran war खतरा, ट्रंप deep state आरोप, America Iran conflict, वेनेजुएला ट्रंप पॉलिसी, हाइपरसोनिक मिसाइल Iran, Middle East crisis analysis, global military crisis warning</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका की विदेश नीति पर एक ज़ोरदार प्रहार करते हुए मशहूर अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने चौंकाने वाले आरोप लगा दिए हैं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि “रूल-बेस्ड वर्ल्ड ऑर्डर” जैसी कोई चीज़ असल में मौजूद ही नहीं, बल्कि यह सिर्फ एक मीठी झूठी कहानी है। सैक्स ने दावा किया कि वेनेजुएला के बाद अब ईरान ट्रंप का अगला निशाना बन सकता है और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया को एक भयावह सैन्य संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ईरान हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस है।</p>
<p>UN सिक्योरिटी काउंसिल में अपनी गवाही देने के तुरंत बाद इंडिया टुडे से बातचीत में सैक्स ने ट्रंप को “पूरी तरह अनियंत्रित” करार देते हुए कहा कि अमेरिका पर असल में एक शक्तिशाली ‘डीप स्टेट’ सैन्य तंत्र का नियंत्रण है। उन्होंने खुलासा किया कि ट्रंप ने लगभग आठ साल पहले लैटिन अमेरिकी नेताओं से यहां तक पूछा था—“आखिर मैं वेनेजुएला पर हमला क्यों न कर दूं?” सैक्स के मुताबिक, यह सोच अमेरिका की विदेश नीति की असल मानसिकता को उजागर करती है।</p>
<p>सैक्स की सबसे बड़ी चेतावनी अब ईरान के इर्द-गिर्द मंडरा रही है। उनका कहना है कि अगर ट्रंप ईरान पर हमला करने की तरफ बढ़ते हैं, तो हालात वेनेजुएला वाली स्थिति से कई गुना अधिक विस्फोटक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नए साल के ठीक आसपास इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और ट्रंप के बीच मार-ए-लागो में हुई मुलाकात में खुलकर कहा गया—“ईरान अब तुम्हारी बारी है।”</p>
<p>प्रोफेसर सैक्स ने इजरायल को “अमेरिका से भी ज़्यादा अनियंत्रित देश” बताते हुए कहा कि ईरान के पास हाइपरसोनिक हथियार और बड़ी शक्तियों का वातावरण है, जिससे कोई भी लड़ाई एक “ग्लोबल ब्लास्ट” में तब्दील हो सकती है। उन्होंने BRICS देशों, खासतौर पर इस साल भारत की अध्यक्षता में, अमेरिका की बढ़ती दखलअंदाजी के खिलाफ UN चार्टर की रक्षा करने की अपील की।</p>
<p>सैक्स के मुताबिक CIA, पेंटागन और अन्य सुरक्षा एजेंसियां ही अमेरिका की विदेश नीति को असल में संचालित करती हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन अमेरिका की नीति का मुख्य स्तंभ रहा है—चाहे वह युद्धों के ज़रिए हो, रंगीन क्रांतियों, हत्याओं या फिर सीधे तख्तापलट के माध्यम से। वेनेजुएला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां अमेरिका बीते दो दशकों से सरकार गिराने की कोशिश करता आ रहा है, क्योंकि वहां की वामपंथी सरकार अमेरिकी तेल कंपनियों के दबाव में नहीं झुकती।</p>
<p>उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 2002 में सीधा तख्तापलट करने की कोशिश की, 2014 में बड़े विरोध प्रदर्शन खड़े किए, ट्रंप शासन में कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए और आखिर में ट्रंप ने साफ कहा—“हम इस सरकार को मिलिट्री तरीके से हटाएंगे।” जब उनसे पूछा गया कि अगला निशाना कौन हो सकता है, तो सैक्स ने बिना झिझक कहा—ईरान।</p>
<p>सैक्स ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के रिश्ते किसी रहस्यमय कर्ज़ जैसे हैं जहां अमेरिका वही लड़ाइयां लड़ता है जिनमें इजरायल उसे धकेलता है। उनके अनुसार यह अत्यंत खतरनाक स्थिति है, क्योंकि इजरायल ईरान की सत्ता को हटाने के जुनून में पागलपन की हद तक डूबा हुआ है। नेतन्याहू और ट्रंप की ताज़ा बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी साफ संकेत दिया गया—“ईरान, अब तुम्हारी बारी आ चुकी है।”</p>
<p>सैक्स ने कहा कि ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को दबाया गया, तो अमेरिका “पूरी तरह लड़ाई के लिए तैयार” है। उनका कहना है कि मानवाधिकारों की आड़ में हमला करने की यह रणनीति बिल्कुल क्लासिक डीप स्टेट का तरीका है।</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान पर हमला दुनिया के लिए एक संभावित विनाशकारी मोड़ हो सकता है। वेनेजुएला की तरह वहां चीन और रूस पीछे हटने वाले नहीं होंगे। ईरान के पास हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं, इजरायल परमाणु शक्ति है, और दोनों के बीच युद्ध का मतलब है—धरती को हिला देने वाला महाविनाश।</p>]]> </content:encoded>
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<title>वेनेजुएला अटैक के बाद किस डर के साये में जी रहे डोनाल्‍ड ट्रंप, खतरे में राष्ट्रपति पद? हो सकता है बड़ा खेल</title>
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<description><![CDATA[ Donald Trump fears Impeachment: डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त अमेरिका फर्स्ट के नाम पर ऐसे-ऐसे काम कर रहे हैं कि उनके घर में भी उनका विरोध हो रहा है. हालांकि वे अपने फैसलों से पीछे नहीं हटने वाले लेकिन अब उन्होंने खुद बताया है कि वे किस बात को लेकर चिंता में हैं. उन्हें डर है कि कहीं मिडटर्म चुनावों में कुछ गड़बड़ हुई तो बड़ा खेल हो सकता है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:33:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप impeachment डर, वेनेजुएला हमला विवाद, अमेरिका political crisis, ट्रंप महाभियोग आशंका, US midterm elections tension, रिपब्लिकन पार्टी चेतावनी, वॉशिंगटन political news, ट्रंप presidency future, डेमोक्रेट्स impeachment plan</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज है, और इसकी वजह बने हैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्हें अब अपने पद पर बने रहने का बड़ा खतरा दिखाई देने लगा है. वेनेजुएला में राष्ट्रपति को गिरफ्तार करवाने के बाद ट्रंप को आशंका है कि यह कदम उनके लिए भारी पड़ सकता है और उन पर महाभियोग चलाने की कोशिश तेज हो सकती है. इसी डर को देखते हुए उन्होंने रिपब्लिकन सांसदों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर मिडटर्म चुनावों में पार्टी फिसली, तो व्हाइट हाउस की कुर्सी सीधे उनके हाथ से जा सकती है. ट्रंप का दावा है कि अगर डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलता है, तो वे पलभर में impeachment की प्रक्रिया शुरू कर देंगे.</p>
<p>वॉशिंगटन में रिपब्लिकन सांसदों की बैठक में ट्रंप ने चुनावों को सीधा-सीधा ‘रेड लाइन’ बताते हुए माहौल में खलबली मचा दी. उन्होंने साफ कहा कि पार्टी को इन चुनावों में हर हाल में जीतना होगा, वरना विरोधी महाभियोग लगाने का मौका ढूंढ ही लेंगे. ट्रंप को डर है कि उनके खिलाफ साज़िशें लगातार बढ़ सकती हैं, और अगर रिपब्लिकन पार्टी कमजोर हुई, तो उन्हें रोकना असंभव हो जाएगा. उनकी यह चेतावनी दर्शाती है कि राष्ट्रपति खुद भी राजनीतिक तूफान की आहट महसूस कर रहे हैं.</p>
<p>लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर मिडटर्म चुनावों से ट्रंप इतने चिंतित क्यों हैं? असल में, राष्ट्रपति को तुरंत हटाना आसान नहीं होता, लेकिन इन चुनावों का नतीजा सत्ता संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है. अगर रिपब्लिकन पकड़ ढीली पड़ती है, तो ट्रंप के लिए कानून पास करना और बड़े फैसलों को लागू करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. सबसे बड़ी बात यह कि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलते ही उन्हें महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार मिल जाता है, और यही ट्रंप की सबसे बड़ी चिंता है.</p>
<p>अब बात करते हैं कि आखिर ये मिडटर्म चुनाव होते क्या हैं, जिन पर इतना शोर है. ये चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में आयोजित किए जाते हैं और इन्हें अमेरिका की सबसे अहम राजनीतिक परीक्षाओं में से एक माना जाता है. इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर वोटिंग होती है, जबकि सीनेट की करीब एक-तिहाई सीटों पर चुनाव कराया जाता है. इतना ही नहीं, 34 राज्यों में राज्यपाल चुने जाते हैं और कई राज्यों में स्थानीय निकायों से लेकर विधानसभाओं तक नई सरकारें बनती हैं. कुल मिलाकर, मिडटर्म चुनाव अमेरिका की सत्ता का पूरा गणित बदलने की ताकत रखते हैं.</p>]]> </content:encoded>
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<title>अमेरिका से आया बयानबाज़ी बम! ट्रंप बोले—‘मोदी मुझसे नाराज़’, मुलाकात का भी जिक्र</title>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती का जिक्र किया है. इस बार उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री उनसे नाराज हैं. यही नहीं ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ मुलाकात के दावे भी कर डाले हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:27:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप मोदी बयान, India US relations, डोनाल्ड ट्रंप विवाद, पीएम मोदी नाराज़गी, US India politics, ट्रंप मोदी मुलाकात दावा, अमेरिकी टैरिफ मुद्दा, अंतरराष्ट्रीय राजनीति खबर, NATO tension news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>वॉशिंगटन से एक बार फिर सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसा बयान दे दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप की नजरें अब ग्रीनलैंड की ओर टिक गईं, जिस वजह से NATO के साथ उनका तनाव लगातार बढ़ रहा है। लेकिन इसी उथल-पुथल के बीच ट्रंप दुनिया को यह दिखाने में लगे हैं कि उनकी भारत से दोस्ती अब भी मजबूत है। इसी कोशिश में उन्होंने पीएम मोदी का नाम लेते हुए एक नया विवाद जन्म दे दिया।</p>
<p>‘हाउस GOP मेंबर रिट्रीट’ के मंच से ट्रंप ने मंगलवार को चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनसे खुश नहीं हैं। ट्रंप के मुताबिक भारतीय प्रधानमंत्री की नाराजगी की वजह है वह टैरिफ, जिसे अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर आपत्ति जताते हुए भारत पर लगाया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह लगातार पीएम मोदी के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे ने दूरी बढ़ा दी है।</p>
<p>इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह दावा कर सबको हैरान कर दिया कि पीएम मोदी उनसे मुलाकात के लिए खुद पहुंचे थे और उनसे मिलने की इच्छा जताई थी। ट्रंप के अनुसार, “प्रधानमंत्री मोदी मुझसे मिलने आए थे और उन्होंने कहा—सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?” इसके आगे ट्रंप ने जोड़ा, “हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं, लेकिन वो खुश नहीं हैं क्योंकि उन्हें बहुत ज्यादा टैरिफ देना पड़ता है। अब तो उन्होंने रूस से तेल की खरीद भी काफी कम कर दी है।”</p>
<p>इसके साथ ही ट्रंप ने अपाचे हेलीकॉप्टरों को लेकर भी एक और बड़ा बयान दिया। ट्रंप के अनुसार, भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बावजूद भारत ने यह शिकायत की है कि वह पिछले 5 साल से अपाचे हेलीकॉप्टरों का इंतजार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने कुल 68 अपाचे हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है और इसकी डिलीवरी में काफी देरी हो चुकी है।</p>
<p>कुछ ही घंटे पहले ट्रंप का पीएम मोदी को लेकर एक और बयान सुर्खियों में आया था, जिसमें उन्होंने फिर टैरिफ का मुद्दा उठाया था। ट्रंप ने कहा कि मोदी उन्हें खुश करना चाहते हैं और इसलिए रूस से तेल खरीदने में कमी की। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका टैरिफ में और बढ़ोतरी कर सकता है। ट्रंप के इन लगातार बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>तेज भूकंप के झटकों से हिली धरती, कई लोग घायल: अलर्ट जारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/japan-earthquake-update-6-4-magnitude-tremors-injure-many-precautionary-advisory-issued</link>
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<description><![CDATA[ मंगलवार को पश्चिमी जापान के शिमानो प्रांत में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे कई लोग घायल हो गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप सुबह 10:18 बजे 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। मात्सुए शहर में चार लोगों को अस्पताल ले जाया गया। बाद में 5.1 और 5.4 तीव्रता के दो झटके भी महसूस किए गए, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:49:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Japan earthquake update, जापान भूकंप खबर, Shimane bhukamp 6.4, Tottori earthquake news, तेज आफ्टरशॉक अपडेट, Japan JMA report, मात्सुए शहर भूकंप, भूकंप today latest, Japan natural disaster</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>जापान एक बार फिर तेज़ झटकों से दहल उठा! 6.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पश्चिमी इलाकों में हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद कई लोग घायल हो गए। शिमाने और तोत्तोरी प्रांतों में धरती ऐसे हिली कि लोगों में दहशत फैल गई। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने पुष्टि की कि कई स्थानों पर तीव्र कंपन महसूस किए गए।</p>
<p>स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 10:18 बजे यह भूकंप शिमाने प्रांत के पूर्वी हिस्से में आया। करीब 10 किलोमीटर की गहराई से निकले इन झटकों की ताकत जापान के भूकंप पैमाने पर 7 में से ऊपरी स्तर 5 दर्ज की गई। इसका केंद्र 35.3° उत्तरी अक्षांश और 133.2° पूर्वी देशांतर पर रहा।</p>
<p>लेकिन खतरा यहीं खत्म नहीं हुआ। मुख्य भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर दो और तेज झटके आए। पहला आफ्टरशॉक 10:28 बजे 5.1 तीव्रता के साथ महसूस हुआ, जबकि 10:37 बजे आए दूसरे झटके की तीव्रता 5.4 दर्ज की गई। JMA के अनुसार इन झटकों ने कई इलाकों में हालात और गंभीर कर दिए।</p>
<p>मात्सुए शहर में भूकंप के दौरान गिरने और टकराने से चार लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। कई घरों की छतें टूट गईं और शहर का दृश्य अव्यवस्थित हो गया। NHK के मुताबिक तोत्तोरी के साकाइमिनातो शहर में सड़कों पर चौड़ी दरारें उभर आईं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।</p>
<p>हिरोशिमा प्रांत के फुकुयामा शहर तक भी भूकंप का असर पहुंचा, जहां दो और लोग घायल हुए। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। JMA ने शुरुआती आंकड़ों में संशोधन करते हुए तीव्रता को 6.2 से बढ़ाकर 6.4 घोषित किया और बताया कि तोत्तोरी प्रांत में लॉन्ग-पीरियड ग्राउंड मोशन का स्तर अधिकतम 4 रहा।</p>
<p>लॉन्ग-पीरियड ग्राउंड मोशन यानी वो झटके जो धीमे-धीमे लेकिन लंबे समय तक चलते रहते हैं। ऐसे झटके खासकर ऊंची इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर तेज़ी से महसूस होते हैं, जिससे लोग घबराहट में इधर-उधर भागने लगते हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप की कैद में फंसा चीन का ‘सदाबहार दोस्त’! UN में अमेरिका से सीधी भिड़ंत, दी खुली चेतावनी</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-pak-sharp-remarks-us-trump-arrest-un-debate</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया है जिससे चीन बेहद गुस्से में है. चीन ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की आलोचना की है. इससे पहले विदेश मंत्री वांग यी ने भी अमेरिका को निशाना बनाया था. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 12:48:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चीन अमेरिका विवाद, Venezuela crisis news, मादुरो गिरफ्तारी मामला, UN debate China reaction, ट्रंप आदेश वेनेजुएला, international law violation आरोप, चीन पाकिस्तान टिप्पणी, US Venezuela relations, global politics update</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले हफ्ते वेनेजुएला में वह सब हुआ जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर रातों-रात राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम से उठाकर ले जाया गया. दोनों को सीधे न्यूयॉर्क पहुंचाकर कड़ी सुरक्षा में कैद कर दिया गया, जहां उन पर ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों का मुकदमा चल रहा है.</p>
<p>इस घटना से वेनेजुएला के सबसे अहम ट्रेड पार्टनर चीन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. चीन के शीर्ष राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की और साफ कहा कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय नियमों और संबंधों को तोड़ने वाला है. वेनेजुएला में चीन के बड़े निवेश को देखते हुए बीजिंग की नाराजगी पूरी तरह जायज बताई जा रही है.</p>
<p>चीन हमेशा से ‘नॉन-इंटरफेरेंस’ यानी दूसरे देशों के मामलों में दखल न देने की नीति पर चलता आया है. ऐसे में उसे यह बिल्कुल मंजूर नहीं कि बिना संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी किसी देश में सैन्य हस्तक्षेप हो. अपने ‘ऑल-वेदर पार्टनर’ माने जाने वाले देश के राष्ट्रपति को आधी रात राजधानी से उठाया जाना चीन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.</p>
<p>बीजिंग ने सीधे-सीधे अमेरिका पर खुद को ‘दुनिया का जज’ समझने का आरोप जड़ दिया है. चीन ने संयुक्त राष्ट्र में इस कार्रवाई की वैधता पर बड़ा सवाल उठाते हुए अमेरिका को कठघरे में खड़ा कर दिया.</p>
<p>चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान कहा कि कोई भी देश खुद को दुनिया का पुलिसवाला या जज घोषित नहीं कर सकता. उन्होंने इशारों में अमेरिका को निशाने पर लिया और कहा कि सभी देशों की संप्रभुता की सुरक्षा करना अंतरराष्ट्रीय कानून की पहली शर्त है.</p>
<p>वांग यी ने बिना नाम लिए वेनेजुएला में हुए ‘अचानक और चौंकाने वाले’ कदम की ओर इशारा किया और कहा कि किसी भी राष्ट्र की स्वायत्तता को ठेस पहुंचाना गंभीर नतीजे ला सकता है. उनकी यह टिप्पणी दुनिया भर में तेजी से चर्चा का विषय बन गई है.</p>
<p>शनिवार को 63 वर्षीय मादुरो को आंखों पर पट्टी बांधकर, हाथों में हथकड़ी लगाकर न्यूयॉर्क लाया गया. कैद से आई उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गईं और दुनियाभर में भूचाल ला दिया.</p>
<p>मादुरो ने सोमवार को न्यूयॉर्क की अदालत में ड्रग्स से जुड़े सभी आरोपों को खारिज कर दिया. इस बीच कुछ ब्लॉक दूर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक हुई, जिसमें चीन और रूस ने भी हिस्सा लेकर अमेरिका की कार्रवाई पर सवाल उठाए. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यह कदम भविष्य के लिए बेहद ‘खतरनाक मिसाल’ बन सकता है.</p>
<p>यूएन में चीन के स्थायी मिशन के प्रभारी सुन लेई ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है—सैन्य ताकत कभी समाधान नहीं लाती, बल्कि अंधाधुंध बल प्रयोग हालात और बिगाड़ देता है.</p>
<p>रॉयटर्स के मुताबिक विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन कई देशों को अमेरिका की इस कार्रवाई के खिलाफ एकजुट करने की ताकत रखता है. यह मामला वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला सकता है.</p>
<p>चीन-ग्लोबल साउथ प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक एरिक ओलैंडर का कहना है कि चीन चाहे वेनेजुएला की अभी बहुत मदद न कर सके, लेकिन विकासशील देशों के बीच अमेरिका के खिलाफ माहौल बनाने में उसकी रणनीतिक भूमिका बेहद अहम साबित होगी.</p>
<p>उधर, वेनेजुएला के बाद ट्रंप ने कोलंबिया और मैक्सिको के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई की धमकी दे डाली है, जिससे लैटिन अमेरिका में भय और तनाव बढ़ गया है. खास बात यह है कि ये वही देश हैं जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव का हिस्सा हैं.</p>
<p>सोमवार को शी जिनपिंग ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का पालन करने की अपील की. बिना नाम लिए उन्होंने अमेरिका को संदेश दिया कि बड़ी ताकतों को दुनिया के लिए मिसाल बनना चाहिए, धमकियां नहीं देनी चाहिए.</p>
<p>वेनेजुएला और चीन के रिश्तों की बात करें तो यह दोस्ती 1974 में शुरू हुई और ह्यूगो चावेज के दौर में और मजबूत हो गई. 2013 में मादुरो के सत्ता में आने के बाद यह साझेदारी और गहरी होती गई.</p>
<p>चीन ने वेनेजुएला की तेल रिफाइनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर झोंक दिए, खासकर 2017 के बाद जब अमेरिका ने उस पर सख्त प्रतिबंध लगाए. 2024 में चीन ने वेनेजुएला से करीब 1.6 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें आधा हिस्सा सिर्फ तेल का था.</p>
<p>एक चीनी अधिकारी ने साफ कहा कि मादुरो की गिरफ्तारी बीजिंग के लिए एक बड़ा झटका है. यह घटना चीन के रणनीतिक हितों और वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को हिला सकती है.</p>]]> </content:encoded>
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<title>ईरान में गूंजा सत्ता परिवर्तन का अलार्म! पूर्व प्रिंस बोले– अब अमेरिकी सेना का दखल जरूरी</title>
<link>https://pratinidhi.in/former-prince-says-us-military-intervention-could-change-khamenei-government</link>
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<description><![CDATA[ ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने खामेनेई नेतृत्व के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को इस्लामिक शासन के अंत का स्वर्णिम अवसर बताया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है, क्योंकि मौजूदा इस्लामिक शासन अपने सबसे कमजोर दौर में है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 12:40:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान protest news, रजा पहलवी बयान, Iran regime change, इस्लामिक शासन पतन, Iranian public uprising, अमेरिकी हस्तक्षेप debate, ईरान राजनीतिक संकट, Iran secular democracy, ईरान विरोध प्रदर्शन, Middle East politics</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने अपने एक धमाकेदार बयान में कहा है कि देशभर में भड़क रहे विरोध-प्रदर्शन इस्लामिक शासन के पतन का सबसे बड़ा और शायद आख़िरी मौका साबित हो सकते हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस्लामिक शासन को गिराने के लिए किसी विदेशी सेना, अमेरिकी हथियारों या गुप्त अभियानों की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, यह बदलाव ईरानी जनता खुद लाने की ताकत रखती है, क्योंकि मौजूदा शासन अपनी बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है।</p>
<p>लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ईरान के मुखर समर्थक रजा पहलवी हाल के प्रदर्शनों में खुलकर लोगों के साथ खड़े नजर आए हैं। वह लगातार वैश्विक समुदाय से अपील कर रहे हैं कि ईरान के नागरिकों का समर्थन करें, क्योंकि यह केवल आर्थिक तंगी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकने की लड़ाई बन चुकी है। पहलवी का कहना है कि पहले की तुलना में इस बार हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और जनता अब पीछे हटने वाली नहीं है।</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय परिस्थितियां एक-दूसरे के साथ ऐसी मेल खा रही हैं कि शासन के पतन की संभावनाएं पहले कभी इतनी मजबूत नहीं दिखीं। देश की बिगड़ती आर्थिक हालत, जनता का बढ़ता गुस्सा, दुनिया भर का दबाव और शासन की गिरती साख—इन सभी ने मिलकर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को हिलाकर रख दिया है। पहलवी के अनुसार, यह वही ऐतिहासिक घड़ी है जिसका इंतजार ईरान सालों से कर रहा था।</p>
<p><strong>ईरान का भविष्य तय करेगी जनता: पहलवी</strong></p>
<p>भविष्य में किसी पद या सत्ता की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पहलवी ने साफ कहा कि उन्हें किसी कुर्सी की लालसा नहीं है। उनका लक्ष्य ईरान को इस अराजक दौर से बाहर निकाल कर एक स्थिर और एकजुट देश बनाने में मदद करना है। वह कहते हैं कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो सबसे बड़ी जरूरत लोगों के बीच विश्वास बहाल करने और दशकों की दमनकारी नीतियों से बने घाव भरने की होगी। उनके अनुसार, ईरान की किस्मत का फैसला सिर्फ और सिर्फ वहां की जनता ही करेगी।</p>
<p>पहलवी का मानना है कि यह आंदोलन किसी साधारण विरोध प्रदर्शन की तरह नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मोड़ है जो ईरान को पूरी तरह नए राजनीतिक रास्ते पर ले जा सकता है। 2025 के अंत में शुरू हुआ यह उभार 2026 तक आग की तरह फैल चुका है। आसमान छूती महंगाई, रियाल की ऐतिहासिक गिरावट और बेरोजगारी से परेशान लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में लोग 'जाविद शाह' के नारे लगाते हुए पहलवी राजवंश की वापसी की उम्मीद जता रहे हैं। सुरक्षा बलों के दमन के बावजूद विरोध की लहर थमने का नाम नहीं ले रही।</p>
<p><strong>कौन हैं रजा पहलवी और कैसा है उनका ईरान से रिश्ता?</strong></p>
<p>रजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा शाह पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं। 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में जन्मे पहलवी 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद परिवार समेत देश छोड़ने पर मजबूर हो गए और तब से अमेरिका में निर्वासन का जीवन जी रहे हैं। वह खुद को ईरान की इस्लामिक व्यवस्था के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में पेश करते हैं और मानवाधिकार, लोकतंत्र और धार्मिक आजादी पर आधारित शासन की वकालत करते हैं।</p>
<p>हालांकि वह कभी-कभार राजशाही की बहाली पर भी बोलते हैं, लेकिन वह हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि ईरान का भविष्य केवल जनमत संग्रह से तय होगा। अमेरिका में रहते हुए वह लगातार ईरान में हो रहे दमन, मानवाधिकार हनन और राजनीतिक अत्याचारों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाते रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में, खासकर सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान, वह विपक्ष की सबसे प्रभावशाली आवाज बनकर उभरे हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका की वेनेजुएला स्ट्राइक जैसी सैन्य क्षमता भारत के पास भी, क्या बदल जाएगा समीकरण!</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पास AH-64E अपाचे, CH-47F चिनूक और AGM-114 हेलफायर जैसे अमेरिकी हथियार अब उसकी सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं. वेनेजुएला हमले में इस्तेमाल हुए ये हथियार भारत की रक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशनों और सीमा सुरक्षा में इनकी तैनाती से देश की सैन्य क्षमता और प्रतिक्रिया गति मजबूत हुई है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 18:22:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका वेनेजुएला हमला, Venezuela attack news, भारत अमेरिकी हथियार, Apache helicopter India, Chinook helicopter India, हेलफायर मिसाइल भारत, Indian military power, high altitude operations India, India US defense tech, सीमा सुरक्षा भारत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>वेनेजुएला पर हुए अचानक अमेरिकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, और ट्रंप के गुप्त आदेश पर चला यह एक्शन किसी हॉलीवुड फिल्म से कम नहीं लगा. फाइटर जेट, घातक हेलिकॉप्टर और हाई-टेक मिसाइलों की बारिश ने कराकस का आसमान हिला दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं—इसी तरह के सुपर-पावरफुल हथियार भारत भी अपनी सेना में शामिल कर चुका है?</p>
<p>भारतीय सेना और वायुसेना ने अमेरिका से बोइंग एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, सीएच-47एफ चिनूक ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें खरीदी हैं. दिलचस्प बात यह है कि वही हथियार, जिनसे अमेरिका ने वेनेजुएला में कहर बरपाया, अब भारत की रक्षा ढाल बन चुके हैं.</p>
<p>वेनेजुएला की राजधानी में जहां अपाचे ने जमीन पर छिपे टारगेट्स को तबाह किया, वहीं चिनूक ने स्पेशल कमांडो उतारकर ऑपरेशन को नए मुकाम पर पहुंचा दिया. भारत ने 2015 से 2020 के बीच इन घातक मशीनों की खरीद की, ताकि चीन और पाकिस्तान के मोर्चों पर दबदबा बनाया जा सके. भारत के पास फिलहाल 22 अपाचे और 15 चिनूक मौजूद हैं.</p>
<p>एएच-64ई अपाचे को दुनिया का सबसे खतरनाक अटैक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो टैंकों, बंकरों और दुश्मन पोस्ट को चंद सेकंड में खत्म करने की ताकत रखता है. अमेरिका ने वेनेजुएला में इसे बेहद कम ऊंचाई पर उड़ाकर मिसाइल बरसाने के लिए इस्तेमाल किया. भारत इन हेलिकॉप्टरों को सीमाओं पर हाई-इंटेंसिटी मिशनों और चौकसी के लिए तैनात करता है.</p>
<p>इसकी खासियत यह है कि यह रात के अंधेरे में भी सटीक हमले कर सकता है और दुश्मन के बेस पर बिना शोर किए पहुंच सकता है. यही वजह है कि इसे दुनिया में ‘नाइट हंटर’ भी कहा जाता है.</p>
<p><strong>भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग:</strong> भारत ने 2019 में अपाचे को सेना में शामिल किया और इसके बाद इन्हें पठानकोट और जोरहाट जैसे रणनीतिक बेस पर तैनात किया गया. LAC पर चीन की गतिविधियों के दौरान इनकी गश्त बेहद काम आई. 2025 में पहाड़ों में हुए एक मुश्किल ऑपरेशन में ये सप्लाई और रेकी में बड़े काम आए. उत्तराखंड बाढ़ के दौरान भी इन हेलिकॉप्टरों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई.</p>
<p>सीएच-47एफ चिनूक एक सुपर हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर है, जो भारी तोपों से लेकर दर्जनों सैनिकों तक—सबको एक साथ लेकर उड़ सकता है. वेनेजुएला हमले में अमेरिका ने इसे कमांडो उतारने और ऑपरेशन सपोर्ट के लिए उपयोग किया. भारत में यह दुर्गम और ऊंचे इलाकों में लॉजिस्टिक्स की रीढ़ माना जाता है.</p>
<p>रात में कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और स्पेशल मिशन पूरा करने में चिनूक की क्षमता अद्भुत है. वेनेजुएला ऑपरेशन में भी यही वजह थी कि अमेरिकी फोर्सेस ने इसे फ्रंटलाइन पर भेजा.</p>
<p><strong>भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग:</strong> 2019 में इंडक्ट होने के बाद से चिनूक चंडीगढ़ बेस से सियाचिन ग्लेशियर तक सप्लाई पहुंचा रहा है. 2020 की गलवान झड़प के समय यह सैनिकों और उपकरणों को तेजी से पहुंचाने में जुटा रहा. 2023 की हिमाचल बाढ़ और 2024 की असम बाढ़ में राहत सामग्री पहुंचाकर इसने कई जिंदगियां बचाईं.</p>
<p>एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल एक प्रिसीजन स्ट्राइक हथियार है, जो टैंकों, बिल्डिंग्स और दुश्मन ठिकानों को ध्वस्त कर देती है. वेनेजुएला में अपाचे से दागी गई इन मिसाइलों ने कई दुश्मन ठिकानों को पल भर में मिटा दिया. भारत भी इन मिसाइलों को अपाचे के साथ मुख्य रूप से एंटी-टैंक मिशनों में इस्तेमाल करता है.</p>
<p><strong>भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग:</strong> हेलफायर मिसाइलें 2019 में भारत की सेना का हिस्सा बनीं. LAC पर चीन के खिलाफ इनकी टेस्ट फायरिंग सफल रही. 2025 के एक बड़े सैन्य अभ्यास में इन मिसाइलों ने टैंक टारगेट्स को इतनी सटीकता से हिट किया कि विदेशी विशेषज्ञ भी हैरान रह गए. अभी ये ट्रेनिंग और बॉर्डर सिक्योरिटी में अहम भूमिका निभा रही हैं.</p>
<p>स्पष्ट है कि ये अमेरिकी हथियार भारत की रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं. वेनेजुएला हमले ने साबित कर दिया कि आधुनिक हथियार युद्ध का पूरा परिदृश्य बदल सकते हैं. भारत ने अमेरिका से 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा की डील में इन्हें खरीदा और विशेषज्ञों का मानना है कि LAC और LOC पर इनका प्रभावी असर दिखेगा. भारत इनका उपयोग केवल रक्षा और शांति की सुरक्षा के लिए करता है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>गलवान टीजर से चीन भड़का, भारत ने पलटवार का छुपा सच उजागर किया</title>
<link>https://pratinidhi.in/galwan-teaser-angers-china-india-reveals-hidden-truth-of-counterattack</link>
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<description><![CDATA[ भारत सरकार ने सलमान खान की फिल्म &#039;बैटल ऑफ गलवान&#039; पर चीनी मीडिया के दावों का खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में &#039;कलात्मक स्वतंत्रता&#039; है और फिल्म निर्माताओं को फिल्में बनाने का अधिकार है। चीनी मीडिया ने आरोप लगाया था कि फिल्म गलवान झड़प के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। भारत ने कहा कि फिल्म में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:11:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>गलवान बैटल विवाद, India China tension, सलमान खान नई फिल्म, Battle of Galwan news, चीन मीडिया आरोप, भारतीय सरकार बयान, लद्दाख Galwan clash, artistic freedom India, 2020 India China clash, Bollywood war movie</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>केंद्र सरकार ने सलमान खान की बहुचर्चित फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ पर चीनी मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को दो टूक कहा कि भारत में कलात्मक अभिव्यक्ति को खुली छूट मिली हुई है और हर फिल्मकार को उसे इस्तेमाल करने का पूरा हक है।</p>
<p>चीनी मीडिया द्वारा लगाए गए इस आरोप के बाद यह प्रतिक्रिया सामने आई कि फिल्म में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दिखाया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में रचनात्मक स्वतंत्रता किसी भी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं होती, इसलिए फिल्म निर्माताओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।</p>
<p>यह फिल्म 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान मोर्चे पर भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई ऐतिहासिक भिड़ंत पर आधारित है। फिल्म में सलमान खान, 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं, जो चीनी सेना की घुसपैठ रोकते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।</p>
<p>भारत ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की थी कि उस खतरनाक झड़प में देश के 20 जवान शहीद हुए थे। वहीं चीन, जिसने पहले किसी भी नुकसान से इनकार कर दिया था, बाद में दावा करने लगा कि उसके केवल चार सैनिक मारे गए, जिस पर भी दुनियाभर में सवाल खड़े हुए।</p>
<p>NDTV की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत एक ऐसा देश है जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता गहरी जड़ें रखती है। फिल्मों के माध्यम से कहानियां कहने को यहां संवैधानिक संरक्षण है और हर भारतीय फिल्म निर्देशक को अपनी सोच के मुताबिक कहानी गढ़ने की आजादी दी गई है।</p>
<p>सरकारी सूत्रों ने आगे कहा कि अगर किसी पक्ष को किसी भी दृश्य पर आपत्ति है, तो वह सीधे रक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांग सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म निर्माण में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए इस विवाद को बेवजह तूल दिया जा रहा है।</p>
<p>जून 2020 के टकराव के बाद भारत और चीन के संबंधों में गहरा तनाव पैदा हो गया था। दोनों देशों ने LAC के पास अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी। इसी बीच चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में फिल्म के कई दृश्यों को तथ्यहीन बताते हुए विवाद को और भड़काने की कोशिश की।</p>
<p>ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि बॉलीवुड की कहानियां भावनाओं और मनोरंजन पर आधारित होती हैं, लेकिन वे असल इतिहास को बदल नहीं सकतीं। लेख में यह भी लिखा गया कि PLA अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हर कीमत पर खड़ा रहेगा, चाहे कोई भी फिल्म उसे कैसे दिखाए।</p>
<p>चौंकाने वाली बात यह है कि उसी लेख में झूठा दावा किया गया कि गलवान घाटी वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी हिस्से में आती है। रिपोर्ट ने भारत पर उकसावे का आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों ने LAC पार की थी, जबकि दुनिया जानती है कि इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और ये दावे महज राजनीतिक प्रोपेगंडा हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>भारत&amp;पाक तनाव पर चीन की एंट्री! हथियार सप्लाई के बाद अब खुद को बता रहा ‘पीसमेकर’</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-claims-it-resolved-india-pakistan-conflict-after-arming-pakistan</link>
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<description><![CDATA[ साल 2025 खत्म होने को है. ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा खत्म नहीं हो रही है. अब 7 महीने बाद चीन ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा दावा कर रहा है. चीन ने कहा है कि इस जंग में उसने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की. ध्यान रहे कि ऐसा दावा करने वाला चीन ही है जिसने मई में हुई इस लड़ाई में पाकिस्तान को न सिर्फ हथियारों से मदद की बल्कि उसे लाइव इनपुट भी दिए. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:03:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत-पाक तनाव 2025, China mediation claim, ऑपरेशन सिंदूर अपडेट, India Pakistan conflict news, चीन पाकिस्तान हथियार मदद, वैश्विक भू-राजनीति तनाव, वांग यी स्टेटमेंट, India China relations, cross-border conflict analysis</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका के बाद अब चीन ने भी एक चौंकाने वाला दावा कर दिया है. बीजिंग का कहना है कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़े तनाव में उसने सीधे हस्तक्षेप करते हुए मध्यस्थ की भूमिका निभाई. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिम्पोज़ियम में कहा कि भारत-पाक तनाव उन प्रमुख वैश्विक ‘हॉटस्पॉट्स’ में शामिल था, जहां चीन ने सक्रिय रूप से दखल दिया.</p>
<p>बीजिंग में आयोजित इस कार्यक्रम में वांग ने दुनिया की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी. उनका कहना था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक किसी भी दौर में इतने लोकल वॉर और क्रॉस-बॉर्डर संघर्ष एक साथ भड़कते नहीं देखे गए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल खतरनाक रफ्तार से फैल रही है.</p>
<p>वांग ने दावा किया कि चीन ने वैश्विक शांति के लिए एक निष्पक्ष और नैतिक स्टैंड लेते हुए हर उस जगह हस्तक्षेप किया, जहां विवाद बढ़ने का खतरा था. उनकी मानें तो चीन का यही ‘फेयर एप्रोच’ लंबे समय तक चलने वाली स्थायी शांति का रास्ता बन सकता है.</p>
<p>चीन के विदेश मंत्री यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि इस साल दुनिया भर में अस्थिरता तेजी से बढ़ी और कई जगह युद्ध जैसी स्थितियां पैदा हुईं. इस पृष्ठभूमि में चीन ने खुद को एक शांतिदूत की तरह प्रस्तुत किया और हर संवेदनशील मुद्दे पर बैलेंस्ड भूमिका निभाने की कोशिश की.</p>
<p>वांग के मुताबिक चीन ने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु विवाद, फिलिस्तीन-इजरायल संकट, कंबोडिया-थाईलैंड तनाव और सबसे अहम—भारत-पाकिस्तान टकराव जैसे मामलों में अपनी तरफ से मध्यस्थता की. उन्होंने कहा कि यह ‘चीनी तरीका’ बातचीत और समाधान को आगे बढ़ाता है.</p>
<p>यह बयान ऐसे समय में आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच मई में भयंकर सैन्य टकराव हुआ था. भारत ने जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी ढांचों को तबाह कर दिया था. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के एयरबेस को भी सटीक निशाना बनाया था.</p>
<p><strong>भारत ने तीसरे पक्ष की बातचीत को साफ-साफ नकार दिया</strong></p>
<p>भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी बाहरी दखलंदाजी को सख्ती से खारिज कर दिया. नई दिल्ली का कहना रहा कि चार दिन का यह टकराव बिना किसी मध्यस्थ देश की मदद के, सीधे दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की बातचीत से सुलझा था. 13 मई को विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट कहा कि मध्यस्थता का दावा पूरी तरह गलत है.</p>
<p>विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और पाकिस्तान के DGMOs ने 10 मई 2025 को दोपहर 15:35 बजे सीधे बात की थी और समाधान पर पहुंच गए थे. भारत लगातार दोहराता रहा है कि भारत-पाक रिश्तों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती और यह नीति वह दशकों से अपनाए हुए है.</p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका पर खड़े हुए बड़े सवाल</strong></p>
<p>चीन भले ही खुद को शांतिदूत बताता रहे, लेकिन इस संघर्ष में उसकी भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध रही. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने इस युद्ध के दौरान भारी मात्रा में चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया. चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है और उसका 81 प्रतिशत से ज्यादा मिलिट्री इक्विपमेंट चीन से आता है.</p>
<p>यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में भी साफ कहा गया कि भारत-पाक चार दिन के संघर्ष के दौरान चीन के हथियारों को एक ‘लाइव टेस्टिंग लैब’ की तरह इस्तेमाल किया गया. इस जंग में पहली बार चीन के आधुनिक हथियार HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइल और J-10 फाइटर जेट वास्तविक युद्ध में आजमाए गए.</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि चीन ने पाकिस्तान को भारतीय सेना से जुड़े लाइव इनपुट तक उपलब्ध कराए. भारतीय वायुसेना ने चीन की PL-15 मिसाइल को भारतीय सीमा के अंदर ही मार गिराया था, जो किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने में विफल रही.</p>
<p>भारतीय सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया कि चीन ने इस टकराव को अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के परीक्षण का मौका बना लिया. लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने भी कहा था कि चीन ने पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर सपोर्ट दिया और पूरे ऑपरेशन को एक प्रयोगशाला की तरह उपयोग किया.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>World Most Powerful Army: दुनिया की 5 सबसे ताकतवर सेनाएं कौन&amp;सी? क्या इस लिस्ट में भारत ने मारी एंट्री</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-global-military-power-top-5-question</link>
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<description><![CDATA[ ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स 2025 की तरफ से जारी लिस्ट के मुताबिक अमेरिका, रूस, चीन और भारत वैश्विक सैन्य संतुलन के प्रमुख स्तंभ हैं. ये टॉप 5 में शामिल है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 11:44:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स 2025, military power ranking India, अमेरिकी सैन्य ताकत analysis, रूस परमाणु क्षमता, चीन सैन्य शक्ति comparison, भारत defence strength, global military balance report, top 5 देशों की सैन्य दौड़, defence budget comparison, world military power news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स हर साल आते ही दुनिया की धड़कनें तेज हो जाती हैं, क्योंकि यह रिपोर्ट बताती है कि किस देश की सैन्य ताकत सबसे ज्यादा दमदार है. केवल सैनिकों की गिनती नहीं, बल्कि हथियारों की तकनीक, रक्षा बजट, लॉजिस्टिक्स, स्ट्रैटेजी और राजनीतिक क्षमता—सब परखकर यह रैंकिंग बनाई जाती है. 2025 की ताज़ा लिस्ट में अमेरिका फिर नंबर–1 पर काबिज है. इसका राज है उसका विशाल 877 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा का वार्षिक रक्षा बजट और दुनिया भर में फैला सैन्य नेटवर्क. 800 से अधिक विदेशी बेस, 13 लाख एक्टिव सैनिक और B-2, B-21 जैसे स्टील्थ बमवर्षक से लेकर F-35 तक—अमेरिकी सेना जमीन, समुद्र, आसमान, अंतरिक्ष और साइबर सभी मोर्चों पर बेजोड़ ताकत दिखाती है.</p>
<p>रूस की शक्ति भले ही आर्थिक चुनौतियों से टकरा रही हो, लेकिन उसकी परमाणु क्षमता और मिसाइल टेक्नोलॉजी उसे मजबूती से दूसरे स्थान पर बनाए रखती है. रूस के पास 10 लाख एक्टिव सैनिक और करीब 100 अरब डॉलर का रक्षा बजट है. एवांगार्ड और जिरकोन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें, साथ ही S-400 और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम—ये रूस को दुनिया की सबसे खतरनाक सैन्य शक्तियों में शामिल करते हैं.</p>
<p>चीन ने पिछले दस सालों में अपनी सैन्य क्षमता को अविश्वसनीय रफ्तार से बढ़ाया है, इसलिए 2025 की रैंकिंग में वह तीसरे पायदान पर है. 20 लाख एक्टिव सैनिकों के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी सक्रिय सेना रखता है. 350 अरब डॉलर के रक्षा बजट, सबसे विशाल नौसेना, एडवांस ड्रोन, साइबर वॉरफेयर, मिसाइल फोर्स और स्पेस टेक्नोलॉजी—इन सबने चीन को वैश्विक चुनौती के रूप में स्थापित कर दिया है.</p>
<p>भारत चौथे स्थान पर है और इसकी सैन्य शक्ति को दुनिया में सबसे संतुलित माना जाता है. 14.5 लाख जवान, 80 अरब डॉलर का रक्षा बजट और स्वदेशी तकनीक—यह सब भारत को मजबूती देता है. चाहे कठोर पहाड़ी मोर्चे हों या रेगिस्तानी सीमाएं, भारतीय सेना हर परिस्थिति में युद्ध के लिए जानी जाती है. आधुनिक मिसाइलें, फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिका, फ्रांस, रूस व इजरायल जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी—ये सभी भारत की रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं.</p>
<p>दक्षिण कोरिया 2025 की टॉप–5 सूची में इसलिए शामिल है क्योंकि उसने उत्तर कोरिया के निरंतर तनाव के बीच अपनी सैन्य क्षमता को हाई-टेक बना लिया है. मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एडवांस हथियार और आधुनिक तकनीक पर भारी निवेश ने इसे एशिया की मजबूत सैन्य शक्तियों में बदल दिया है. साथ ही अमेरिका के साथ गठबंधन इसकी ताकत को कई स्तर ऊपर ले जाता है, जिससे दक्षिण कोरिया विश्व की सबसे प्रभावशाली सेनाओं में शामिल हो गया है.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>विदेश मंत्री की बात काट गए पीएम! भारत पर बयान से मचा घमासान, बताया ‘ऐतिहासिक समझौता’</title>
<link>https://pratinidhi.in/new-zealand-pm-u-turn-calls-india-trade-pact-transformational-deal</link>
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<description><![CDATA[ न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट FTA को एक ऐतिहासिक समझौता बताया है, जिससे अधिक नौकरियां, आय और निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। यह डील 22 दिसंबर को हुई थी। हालांकि, न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री ने डेयरी उत्पादों पर टैरिफ कम न होने के कारण इसकी आलोचना की थी। यह FTA दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा और भारतीय निर्यात के लिए 100 टैरिफ समाप्त करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 13:14:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India New Zealand FTA, भारत न्यूजीलैंड व्यापार समझौता, Modi Luxon call, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट इंडिया, New Zealand trade deal news, भारतीय निर्यात वृद्धि, रोजगार अवसर व्यापार, इंडिया न्यूज़ीलैंड आर्थिक संबंध, tariff removal India NZ</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर आखिरकार वह ऐतिहासिक क्षण आ गया, जिसका लंबे समय से इंतजार था। पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन की हालिया फोन बातचीत के बाद यह डील एक बड़े ब्रेकथ्रू के रूप में सामने आई है। लक्सन ने इसे दो देशों के रिश्तों में ‘लैंडमार्क मोमेंट’ बताते हुए नई संभावनाओं का दरवाजा खोलने वाला करार दिया।</p>
<p>न्यूजीलैंड पीएम ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और आय के स्रोतों को कई गुना बढ़ाएगा। उनके मुताबिक, इस डील से भारतीय बाजारों में न्यूजीलैंड का एक्सपोर्ट अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचने वाला है और कंपनियों के लिए नया गोल्डन पीरियड शुरू हो सकता है।</p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लक्सन ने गर्व के साथ लिखा कि उन्होंने अपने पहले टर्म में भारत के साथ FTA करने का जो वादा किया था, उसे पूरा कर दिखाया है। यह समझौता अब 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के सामने नए अवसरों का विशाल दरवाजा खोलता है—जिसका मतलब है ज्यादा नौकरियां, ज्यादा कमाई और अभूतपूर्व एक्सपोर्ट ग्रोथ।</p>
<p>22 दिसंबर को भारत और न्यूजीलैंड ने एक व्यापक, संतुलित और भविष्यवादी एफटीए पर हस्ताक्षर किए, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती को बड़ा बढ़ावा मिला है। खास बात यह भी है कि यह समझौता भारत के सबसे तेजी से पूरे हुए FTAs में गिना जा रहा है, जो ‘विकसित भारत 2047’ विजन के तहत एक बड़ा कदम है।</p>
<p>FTA पर आधिकारिक चर्चा 16 मार्च 2025 से शुरू हुई थी, जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड मिनिस्टर टॉड मैक्ले की मीटिंग के बाद वार्ताओं ने रफ्तार पकड़ी। इसी बीच न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे ‘न तो फ्री और न ही फेयर’ बताते हुए तीखी आलोचना की थी, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी।</p>
<p>पीटर्स ने आरोप लगाया था कि भारत ने न्यूजीलैंड के प्रमुख डेयरी उत्पादों पर लगे भारी टैक्स को कम नहीं किया है, जबकि न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोल देगा। उन्होंने कहा था कि यह समझौता किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बचाव योग्य नहीं है और न्यूजीलैंड के हितों के खिलाफ जाता है।</p>
<p>इसके बावजूद, यह FTA दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। यह रोजगार बढ़ाने, स्किल मोबिलिटी आसान करने, ट्रेड-इन्वेस्टमेंट एक्सपेंशन, कृषि नवाचार और MSME सेक्टर की मजबूती को नया आयाम देता है। लंबे समय में यह दोनों देशों की आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेगा।</p>
<p>यह समझौता व्यापार के दौरान लागू 100 फीसदी टैरिफ लाइनों को खत्म करता है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को न्यूजीलैंड में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इससे टेक्सटाइल, फुटवियर, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो सेक्टर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कई गुणा बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा भारतीय वर्कर्स, कारीगरों, महिलाओं, युवाओं और MSMEs को मिलेगा और वे वैश्विक वैल्यू चेन में तेजी से आगे बढ़ेंगे।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>2 साल में 29,000 डॉक्टर&amp;इंजीनियर देश छोड़कर भागे! पाकिस्तानी ही उड़ा रहे आसिम मुनीर की खिल्ली</title>
<link>https://pratinidhi.in/chaos-pakistan-exodus-29000-professionals-criticism-asim-munir</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में प्रतिभा पलायन की स्थिति गंभीर रूप धारण कर चुकी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते दो साल में 5,000 डॉक्टर, 11,000 इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट देश छोड़ चुके हैं. कुछ महीने पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने इस स्थिति को &#039;ब्रेन गेन&#039; करार देते हुए &#039;ब्रेन ड्रेन&#039; की थ्योरी को खारिज किया था. अब उनकी सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 12:47:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan talent exodus, पाकिस्तान ब्रेन ड्रेन संकट, Asim Munir criticism, पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था संकट, डॉक्टर इंजीनियर पलायन Pakistan, Pakistan political instability, फ्रीलांसिंग जॉब्स खतरा, इंटरनेट शटडाउन Pakistan, Pakistan brain drain news, पाक सेना नेतृत्व विवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास की सबसे भयानक ‘टैलेंट भागमभाग’ की मार झेल रहा है। चरमराती अर्थव्यवस्था और राजनीति की उठापटक ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि पिछले दो साल में हजारों डॉक्टर, इंजीनियर और अकाउंटेंट देश को हमेशा के लिए अलविदा कह चुके हैं। सरकारी रिपोर्टों ने खुलासा किया कि सिर्फ 24 महीनों में 5,000 डॉक्टर, 11,000 इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट पाकिस्तान से पलायन कर गए। इस खुलासे ने सरकार की नींद उड़ा दी है और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गए हैं, क्योंकि उन्होंने इस भारी पलायन को ‘ब्रेन ग्रेन’ बता दिया था।</p>
<p>सरकारी आंकड़े साफ दिखा रहे हैं कि मुनीर के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज़ खोखर ने X पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति सुधरेगी तो अर्थव्यवस्था खुद-ब-खुद पटरी पर आ जाएगी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फ्रीलांसिंग हब होने के बावजूद इंटरनेट शटडाउन की वजह से 1.62 अरब डॉलर की भारी क्षति झेल चुका है और करीब 23.7 लाख फ्रीलांसिंग नौकरियां खतरे में पहुंच चुकी हैं।</p>
<p><strong>सरकारी डेटा ने खोल दी सरकार की पोल</strong></p>
<p>ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट की ताज़ा रिपोर्ट हालात की गंभीरता उजागर करती है। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 7.27 लाख से ज्यादा पाकिस्तानियों ने विदेश नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 2025 में नवंबर तक यह आंकड़ा 6.87 लाख पर पहुंच चुका है। अब चिंताजनक बात यह है कि सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित और स्किल्ड प्रोफेशनल भी तेज़ी से देश छोड़ रहे हैं और उनका यह रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान के मेडिकल सेक्टर को लगा है, जहां 2011 से 2024 के बीच नर्सों के पलायन में 2144% का हैरान कर देने वाला उछाल देखने को मिला। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार यह रफ्तार 2025 में भी जारी है। शहबाज़ शरीफ सरकार ने इस तेजी से हो रहे पलायन से घबराकर एयरपोर्ट्स की निगरानी कड़ी कर दी है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि 2025 में अब तक 66,154 लोगों को एयरपोर्ट से ही ऑफलोड कर दिया गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है।</p>
<p>इसके अलावा खाड़ी देशों और अन्य जगहों से भी हजारों पाकिस्तानी अवैध प्रवास और भीख मांगने की वजह से वापस भेजे जा चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने घोषणा की है कि ‘पेशेवर भिखारियों’ और अधूरे दस्तावेजों वाले यात्रियों को विदेश जाने से सख्ती से रोका जाएगा।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर आसिम मुनीर की खिंचाई</strong></p>
<p>डॉक्टरों और इंजीनियरों के इस खतनाक स्तर के पलायन ने सोशल मीडिया पर जैसे आग लगा दी है। लोग अगस्त में आसिम मुनीर के उस बयान को याद दिला रहे हैं जिसमें उन्होंने अमेरिका में पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए इस पलायन को ‘ब्रेन गेन’ बताया था। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वही बयान सोशल मीडिया पर मज़ाक का सबसे बड़ा कारण बन गया है और लोग मुनीर की टिप्पणी पर तंज कस रहे हैं। एक यूजर ने रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि उनके हिसाब से ये सब ‘ब्रेन गेन’ है।</p>
<p>एक अन्य यूजर ने कहा कि ऐसे नेता जो इस पलायन को फायदेमंद बताते हैं, उनकी यही अज्ञानता देश को बड़े संकट की ओर ले जा रही है। पीटीआई समर्थक साजिद सिकंदर अली ने टिप्पणी की कि पाकिस्तान में न इंडस्ट्री है, न रिसर्च फंडिंग और न ही रोजगार — ऐसे में ब्रेन ड्रेन होना कोई रहस्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर रोक लगाकर प्रतिभा को रोका नहीं जा सकता, उन्हें सिर्फ बेहतर अवसर देकर ही रोका जा सकता है।</p>
<p>एक अन्य यूजर आसिफ ने लिखा कि कोई भी शिक्षित और कुशल व्यक्ति ऐसे देश में रहना नहीं चाहेगा जहां सरकार की आलोचना करने पर अपहरण, यातना या मौत का खतरा बना रहता हो। तेजी से भागती प्रतिभा और नेताओं के बयानों के बीच की दूरी अब पाकिस्तान में और स्पष्ट दिखने लगी है।</p>
<p>कुल मिलाकर पाकिस्तान एक गंभीर ‘टैलेंट क्राइसिस’ से जूझ रहा है, और सोशल मीडिया पर आसिम मुनीर को लेकर तंज और व्यंग्य लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सेकुलरिज्म और लॉ एंड ऑर्डर पर भाषण चलता रहा, यूनुस के दौर में फिर हुई हिन्दू की लिंचिंग</title>
<link>https://pratinidhi.in/secular-debate-row-rehman-yunus-incident-hindu-killed</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में 6 दिनों में दो हिन्दुओं की लिंचिंग से सनसनी मच गई है. मुल्क के भावी प्रधानमंत्री बताए रहे BNP नेता तारिक रहमान अपने मुल्क के लिए लोकतांत्रिक और सेकुलर बांग्लादेश का सपना देख रहे थे. लेकिन मौजूदा मोहम्मद यूनुस की सरकार हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचार को कहीं से नहीं रोक पा रही है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 26 Dec 2025 10:36:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश हिंसा news, Hindu lynching Bangladesh, तारिक रहमान politics, मोहम्मद यूनुस सरकार crisis, अल्पसंख्यक अत्याचार Bangladesh, Rajbari Pangsha incident, अमृत मंडल murder case, Bangladesh secular debate, BNP leader return news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>24 दिसंबर की सुबह जब बीएनपी नेता तारिक रहमान बरसों बाद अपने वतन लौटने की तैयारी कर रहे थे, उनके दिल में एक नई उम्मीद पल रही थी—एक ऐसा बांग्लादेश, जहां लोकतंत्र की रौशनी हर घर तक पहुंचे, जहां कानून का शासन सचमुच जिंदा हो। मगर उसी वक्त उनके सपनों के बिल्कुल विपरीत तस्वीर जमीन पर दिखाई दे रही थी। देश में कानून व्यवस्था को लेकर जिस बदलाव का सपना वे देख रहे थे, उसकी धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही थीं।</p>
<p>इसी रात राजबाड़ी ज़िले के पांग्शा उपजिला में भयावह हिंसा हुई। रात करीब 11 बजे एक उग्र भीड़ ने हिंदू युवक अमृत मंडल को घेर लिया, उसे बेरहमी से पीटा और मौत के मुंह में धकेल दिया। पुलिस उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले गई, मगर रात 2 बजे डॉक्टरों ने अमृत को मृत घोषित कर दिया। इस दिल दहलाने वाली वारदात ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया।</p>
<p>अमृत मंडल की मौत की खबर 25 दिसंबर की सुबह आग की तरह फैली। और उसी दिन—ठीक उसी दिन—तारिक रहमान 17 साल बाद लंदन से ढाका की धरती पर लौटे। उनका स्वागत उम्मीदों और नारेबाजी से हुआ, लेकिन देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा इस उम्मीद पर काले बादल बनकर मंडरा रही थी।</p>
<p><strong>6 दिन में दो हिंदुओं की हत्या—पहले दीपू, अब अमृत…!</strong></p>
<p>18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की हत्या और फिर 24 दिसंबर को अमृत की लिंचिंग—इन दोनों घटनाओं ने बांग्लादेश के हिंदुओं को डरा दिया है। समुदाय के लोग गुस्से और डर दोनों में हैं, जबकि पुलिस और अंतरिम सरकार पर आरोप है कि वे सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>पुलिस का दावा है कि यह सांप्रदायिक हमला नहीं था, बल्कि आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा मामला था। उनका कहना है कि अमृत पर कई गंभीर केस दर्ज थे। लेकिन सवाल वही है—क्या किसी भी भीड़ को किसी इंसान की जान लेने का अधिकार दिया जा सकता है? कानून का राज अगर यही है, तो फिर आम लोग किसपर भरोसा करें?</p>
<p>ढाका में अपनी पहली जनसभा में तारिक रहमान ने साफ कहा कि देश में कानून-व्यवस्था हर हाल में कायम रहनी चाहिए। उन्होंने चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को भी यही संदेश दिया कि शांति और अनुशासन की कीमत पर कोई समझौता नहीं हो सकता।</p>
<p>अपने भाषण में उन्होंने चेताया, “देश की शांति किसी भी कीमत पर बनाए रखनी होगी। हर साजिश का सामना धैर्य और एकता से करना होगा।” उनके शब्दों में लोकतंत्र की पुकार थी, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।</p>
<p><strong>“यह देश केवल मुसलमानों का नहीं… हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और हर नागरिक का है”</strong></p>
<p>तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश के लोग अपना लोकतांत्रिक अधिकार वापस चाहते हैं। वे एक ऐसा देश चाहते हैं जहां हर नागरिक बिना डर के जी सके। उन्होंने लाखों लोगों की भीड़ से कहा, “यह देश सभी का है—पहाड़ों के लोगों का, मैदानों के लोगों का, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का। हम ऐसा बांग्लादेश बनाएंगे, जहां हर व्यक्ति सुरक्षित घर लौट सके।”</p>
<p>लेकिन यूनुस सरकार के दौर में बढ़ती घटनाएं कुछ और ही कहानी कह रही हैं। खासकर अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे समुदाय में गहरा डर बैठ गया है।</p>
<p><strong>चटगांव में पांच दिनों में चार हिंदू घरों में आग—अल्पसंख्यकों में दहशत</strong></p>
<p>चटगांव के राउज़ान इलाके में हालात और भी भयावह हैं। यहां पांच दिनों में अल्पसंख्यक समुदाय के चार घरों को आधी रात के समय आग के हवाले कर दिया गया। हमलावर पहले मुख्य दरवाजों को बाहर से बंद कर देते, फिर घरों में आग लगा देते। कई परिवार तो अपनी जान बचाने के लिए बांस और टिन की दीवारें तोड़कर भागे।</p>
<p>ताजा हमला मंगलवार सुबह 3:45 बजे हुआ, जब शिल्पाड़ा इलाके में सुलाल शिल और अनिल शिल के घरों को निशाना बनाया गया। पुलिस को मौके पर एक हाथ से लिखा बैनर मिला जिसमें 43 मोबाइल नंबर दर्ज थे—जो इस हमले को और भी संदिग्ध बना देता है।</p>
<p>दोनों परिवारों के लोग घर में सो रहे थे जब धुआं और आग की लपटों ने उन्हें जगाया। दुबई से शादी के लिए घर लौटे मिथुन शिल ने कहा, “हमने बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन दरवाजे बंद थे… बाहर आग की लपटें थीं, हम डर के मारे टूट चुके थे।”</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश की सियासत में बड़ा मोड़: 17 साल बाद लौटे खालिदा जिया के बेटे, पीएम पद की रेस तेज</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 वर्षों के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं. बीएनपी ने उनके स्वागत के लिए 50 लाख समर्थकों को जुटाने का लक्ष्य रखा है.  यह वापसी फरवरी में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले हो रही है जिसमें तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 12:55:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>तारिक रहमान वापसी, बांग्लादेश चुनाव politics, खालिदा जिया news, BNP political crisis, बांग्लादेश सत्ता परिवर्तन, February election Bangladesh, शेख हसीना के बाद राजनीति, Bangladesh BNP rally, निर्वासन के बाद लौटे तारिक, बांग्लादेश political updates</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बड़ा धमाका होने जा रहा है, क्योंकि बीएनपी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल बाद गुरुवार को स्वदेश लौट रहे हैं. लंबे निर्वासन के बाद उनकी यह वापसी सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि राजनीतिक भूचाल पैदा करने वाली मानी जा रही है. बीएनपी ने दावा किया है कि उनके स्वागत के लिए लगभग 50 लाख समर्थक सड़कों पर उतरेंगे, जिसे फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले ताकत दिखाने की सबसे बड़ी कवायद माना जा रहा है. इसी वजह से तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत चेहरा बताया जा रहा है.</p>
<p>60 वर्षीय तारिक रहमान इस वक्त बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और पार्टी को भरोसा है कि 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव में उन्हें भारी समर्थन मिलेगा. लंदन से उनकी वापसी ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल चुका है. पिछले साल छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता से बाहर होना पड़ा और उनकी पार्टी बैन हो गई, जिसके बाद से बीएनपी बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी समीकरण पलटकर रख दिए हैं.</p>
<p>1991 से लेकर अब तक, छोटी अंतरिम सरकारों को छोड़ दिया जाए तो बांग्लादेश की सत्ता पर ज्यादातर खालिदा जिया और शेख हसीना का ही वर्चस्व रहा है. यही वजह है कि तारिक की वापसी को इस राजनीतिक चक्र में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. उनके आने से सत्ता का खेल एक नए मोड़ पर पहुंच सकता है.</p>
<p>अमेरिका की इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट की दिसंबर रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है, जिसमें कहा गया है कि बीएनपी सबसे ज्यादा सीटें जीतने की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही इस्लामिक पार्टी ‘जमात-ए-इस्लामी’ भी चुनावी दौड़ में है, जो राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है.</p>
<p>तारिक रहमान की वापसी सिर्फ राजनीति नहीं, उनका निजी संघर्ष भी इससे गहराई से जुड़ा है. उनकी मां खालिदा जिया कई महीनों से गंभीर बीमार हैं, और पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से वह अब बांग्लादेश लौटने का निर्णय ले पाए. उनके लिए यह एक भावुक और निर्णायक क्षण माना जा रहा है.</p>
<p>बीएनपी नेताओं का कहना है कि तारिक रहमान के लिए ऐतिहासिक स्वागत की तैयारी की जा रही है. एयरपोर्ट से लेकर मुख्य सभा स्थल तक का पूरा मार्ग समर्थकों से पाटने की योजना है, और पार्टी 50 लाख से ज्यादा लोगों की मौजूदगी का दावा कर रही है. यह नज़ारा बांग्लादेश की राजनीति में शायद पहले कभी नहीं देखा गया होगा.</p>
<p>बीएनपी के वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिजवी ने कहा कि यह क्षण देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित होगा. उनकी मानें तो तारिक की वापसी बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की सबसे बड़ी शुरुआत है.</p>
<p>तारिक रहमान 2008 से लंदन में रह रहे थे और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर कई गंभीर मामलों में सजा सुनाई गई थी, जिनमें शेख हसीना की हत्या की साजिश का मामला भी शामिल था. लेकिन हसीना के हटने के बाद सभी आरोप रद्द कर दिए गए, जिससे उनकी वतन वापसी में खड़ी सभी कानूनी दीवारें गिर गईं. अब वह नए सियासी अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं.</p>
<p>तारिक रहमान, जो 17 सालों से लंदन में रह रहे थे, अब एक नए राजनीतिक तूफान के साथ बांग्लादेश की जमीन पर कदम रखने वाले हैं. </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बड़ा खुलासा: 135 अरब में बिकी पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन PIA, खरीदार का नाम सामने आया</title>
<link>https://pratinidhi.in/pia-auction-135-billion-deal-buyers-mysterious-identity</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान एयरलाइन PIA को शहबाज शरीफ सरकार ने 135 अरब रुपये में बेच दिया है। यह सौदा देश के गहराते आर्थिक संकट को उजागर करता है। सरकार इसे सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। फैसले के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 12:05:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>PIA privatization crisis, पाकिस्तान अर्थव्यवस्था संकट, PIA बिकने की खबर, Arif Habib consortium bid, पाकिस्तान सरकार privatization, PIA 135 अरब सौदा, IMF Pakistan bailout news, Pakistan aviation sector, शहबाज शरीफ सरकार फैसला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>कर्ज़ में डूबा पाकिस्तान एक बार फिर सुर्खियों में है, और वजह है उसकी बिखरती अर्थव्यवस्था। IMF और दोस्त देशों की मदद भी अब इस डूबते जहाज़ को बचा नहीं पा रही। हालात इतने बिगड़ गए कि शहबाज शरीफ सरकार को अपनी ही राष्ट्रीय एयरलाइन PIA को बेचने का कड़वा फैसला लेना पड़ा। मंगलवार को पाकिस्तान ने इस ऐतिहासिक प्राइवेटाइजेशन प्रक्रिया को पूरा करते हुए PIA को एक स्थानीय इन्वेस्टमेंट कंपनी की अगुवाई वाले कंसोर्टियम के हवाले कर दिया।</p>
<p>इस्लामाबाद में हुई खास सेरेमनी के दौरान तीन दावेदार—लकी सीमेंट, एयरब्लू और इन्वेस्टमेंट फर्म आरिफ हबीब—ने अपनी सीलबंद बोली एक पारदर्शी बॉक्स में जमा की। माहौल रोमांच से भरा था और जब दूसरे चरण में बिड्स खोली गईं, तो सबसे बड़ा धमाका करते हुए आरिफ हबीब ग्रुप सबसे ऊंचे बिडर के रूप में उभर कर सामने आया।</p>
<p><strong>PIA की कमान अब आरिफ हबीब के हाथ</strong><br>सरकार ने पहले ही PIA की रेफरेंस कीमत 100 अरब रुपये तय कर दी थी। नियमों के मुताबिक, सबसे ऊंची बोली लगाने वाले दो दावेदारों को अंतिम मुकाबले का मौका दिया गया। लकी सीमेंट और आरिफ हबीब, दोनों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी और लगातार बोली बढ़ाते रहे। आखिरकार तब सबको हैरत में डालते हुए आरिफ हबीब ग्रुप ने 135 अरब रुपये का ऑफर दे दिया—और उसी पल बाज़ी उनके नाम हो गई।</p>
<p><strong>शहबाज सरकार की बड़ी रणनीति</strong><br>रिपोर्टें बताती हैं कि सरकार PIA के 75% शेयर बेचने की तैयारी में थी, जबकि सफल खरीदार को बाकी 25% स्टेक हासिल करने के लिए 90 दिन का वक्त मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती 75% हिस्सेदारी की बिक्री से मिलने वाली रकम में से 92.5% राशि PIA में दोबारा निवेश की जाएगी, जबकि सिर्फ 7.5% सरकार तक पहुंचेगी। नए मालिक को अगले पांच वर्षों में 80 अरब रुपये का अतिरिक्त निवेश भी करना होगा।</p>
<p><strong>लाइव टेलीविजन पर दिखा 'PIA का सौदा'</strong><br>पारदर्शिता दिखाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पूरे बिडिंग प्रोसेस को लाइव प्रसारित किया, जिसे लाखों लोगों ने देखा। यह एयरलाइन को बेचने की दूसरी कोशिश थी—पहली बार पिछले साल कीमत न मिलने के कारण योजना रद्द करनी पड़ी थी। इस ऐतिहासिक नीलामी के बाद PM शहबाज शरीफ ने अधिकारियों और प्राइवेटाइजेशन कमीशन को उनकी भूमिका के लिए सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया।</p>
<p><strong>कभी आसमान की शान थी PIA, अब दर्दनाक अंत</strong><br>कभी दुनिया की टॉप एयरलाइंस में गिनी जाने वाली PIA की कहानी आज एक चेतावनी बन चुकी है। एक समय इसका दबदबा इतना था कि कई देशों ने PIA से प्रेरणा लेकर अपनी एयरलाइंस शुरू की थीं। लेकिन लगातार मिसमैनेजमेंट, भ्रष्टाचार और खराब फैसलों ने इस दिग्गज कंपनी को घुटनों पर ला दिया। नतीजा यह कि पाकिस्तान के पास इसे बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अब 50 रुपये में नहीं मिलेगा कीवी! भारत की बड़ी डील से कीमतों में आएगी जबरदस्त गिरावट</title>
<link>https://pratinidhi.in/shocking-new-kiwi-price-deal-indias-move-may-cause-prices-to-fall</link>
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<description><![CDATA[ भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो चुका है. इससे न्‍यूजीलैंड से आने वाले कीवी को लेकर खूब चर्चा हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि इसके दाम में गिरावट आ सकती है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 18:03:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India New Zealand FTA, कीवी कीमत गिरावट, free trade agreement India, भारत न्यूजीलैंड व्यापार, kiwi import India, भारतीय निर्यात वृद्धि, trade deal impact, सस्ता कीवी बाजार, international trade policy</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर बढ़ी तकरार के बाद भारत ने अपनी व्यापारिक चाल में बड़ा बदलाव कर दिया है. अब भारत एक के बाद एक देशों से धमाकेदार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर रहा है, ताकि भारतीय प्रोडक्ट्स की मांग केवल अमेरिका पर निर्भर न रहे और दुनिया के अलग‑अलग बाज़ारों में धूम मचा सके. यह रणनीति न सिर्फ टैरिफ के दबाव को कम करेगी, बल्कि एक्सपोर्ट को पूरी तरह नई रफ्तार दे सकती है.</p>
<p>सरकार का सीधा लक्ष्य है—भारतीय निर्यात को रिकॉर्ड ऊंचाइयों तक पहुंचाना. इसी मिशन के तहत भारत ने कुछ ही समय में यूके, ओमान और अब न्यूजीलैंड के साथ एफटीए को मंजूरी दे दी है. ऐसे समझौतों से विदेशी सामान हमारे यहां सस्ता आएगा और भारत से बाहर जाने वाले प्रोडक्ट भी कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार का पलड़ा और मजबूत बनेगा.</p>
<p>भारत‑न्यूजीलैंड डील की चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि माना जा रहा है कि अब भारत में कीवी का आयात जबरदस्त तरीके से बढ़ सकता है. एफटीए के बाद इसके दाम गिरने की पूरी संभावना है. फिलहाल भारत में एक कीवी 50 रुपये या उससे ज्यादा में मिलता है. लेकिन वास्तविक कीमत कितनी घटेगी, यह समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि भारत अब तक कीवी का आयात कैसे करता रहा है और इस पर लगने वाला टैक्स कितना बड़ा रोल निभाता है.</p>
<p><strong>भारत को न्यूजीलैंड से कितना कीवी मिलता है?</strong><br>न्यूजीलैंड दुनिया के बड़े कीवी उत्पादक देशों में से एक है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि भारत अभी सिर्फ 5% कीवी ही न्यूजीलैंड से खरीदता है. 2023 में भारत ने कुल 55,000 टन कीवी आयात किया, जिसमें सिर्फ 2,700 टन न्यूजीलैंड से आया. अब टैक्स हटने के बाद न्यूजीलैंड के कीवी अन्य देशों की तुलना में काफी सस्ते मिलेंगे, जिससे भारत बड़े पैमाने पर वहां से आयात बढ़ा सकता है.</p>
<p><strong>न्यूजीलैंड की कीवी पर कितना टैक्स लगता था?</strong><br>न्यूजीलैंड से भारत कई चीजें खरीदता है—फल, ऊन, लकड़ी, ड्राई फ्रूट और कृषि उत्पाद. लेकिन एफटीए के बाद इन पर लगने वाला ज्यादातर टैक्स खत्म हो जाएगा. अभी न्यूजीलैंड के कीवी पर 33% इम्पोर्ट टैक्स वसूला जाता है, और यही टैक्स अब सीधे 0% कर दिया जाएगा. यानी कीमत घटने की मजबूती पूरी तरह तय है.</p>
<p><strong>कितना सस्ता हो जाएगा न्यूजीलैंड का कीवी?</strong><br>एफटीए में शुरुआती 6,250 टन कीवी को पूरी तरह ड्यूटी‑फ्री रखा गया है. आने वाले सालों में यह कोटा बढ़कर 15,000 टन तक पहुंच जाएगा. कोटा से अधिक आने वाले कीवी पर भी पहले से काफी कम टैक्स लगेगा. इस वजह से थोक कीमतों में गिरावट आएगी और उसका असर सीधा रिटेल प्राइस पर दिखेगा.</p>
<p>सटीक भाव बताना अभी मुश्किल है, क्योंकि लागत कई चीजों पर निर्भर करती है—न्यूजीलैंड से आयात की मात्रा कितनी होगी, लॉजिस्टिक और फ्रेट चार्ज क्या होंगे, स्थानीय मंडियों की डिमांड-सप्लाई कैसी होगी. लेकिन अर्थशास्त्रियों का अनुमान साफ है—टैक्स हटने के बाद कीवी की कीमतों में 20% से 30% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. यानी आने वाले दिनों में कीवी ज़्यादा ताज़ा, ज़्यादा सस्ता और ज़्यादा उपलब्ध!</p>]]> </content:encoded>
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<title>&amp;apos;ट्रंप को खुश करने की कोशिश...&amp;apos; Mexico ने क्‍यों लगाया 50% टैरिफ? जानिए भारत पर क्‍या होगा असर</title>
<link>https://pratinidhi.in/mexico-50-percent-tariff-revealed-challenge-for-india</link>
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<description><![CDATA[ मैक्सिको ने भारत, चीन समेत कुछ देशों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभाव में आएगा. अनुमान है कि भारत के एक्‍सपोर्ट पर इसका पड़ सकता है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 13:02:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Mexico 50 percent tariff, मैक्सिको इंडिया ट्रेड इश्यू, इंडिया एक्सपोर्ट इफेक्ट, Mexico trade policy, एशियाई देशों पर टैरिफ, India Mexico bilateral trade, global trade impact news, मैक्सिको नया टैरिफ नियम, US Mexico trade pressure, भारत निर्यात चुनौती</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका के बाद अब मैक्सिको ने भी भारत को बड़ा झटका दे दिया है. रॉयटर्स की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिकन सीनेट ने भारत, चीन और कई अन्य एशियाई देशों से आने वाले सामान पर 50 फीसदी तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की मंजूरी दे दी है. यह फैसला वैश्विक व्यापार में बड़ी उथल-पुथल की शुरुआत माना जा रहा है.</p>
<p>1 जनवरी 2026 से लागू होने वाला यह टैरिफ ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, कपड़े, प्लास्टिक और स्टील जैसे प्रमुख उत्पादों पर सीधा असर डालेगा. खास बात यह है कि जिन देशों का मैक्सिको के साथ कोई व्यापार समझौता नहीं है, उन्हें इस फैसले का पूरा भार झेलना होगा. इस टैरिफ से भारत, चीन, साउथ कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे बड़े एशियाई निर्यातक प्रभावित होंगे. मैक्सिको का दावा है कि इससे वह 2026 में लगभग 3.76 बिलियन डॉलर यानी करीब 33,900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई करना चाहता है.</p>
<p><strong>आखिर क्यों लिया गया इतना बड़ा कदम?</strong><br>यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाम घरेलू उद्योग को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि असल वजह अमेरिका को खुश करना भी हो सकती है, क्योंकि जल्द ही USMCA व्यापार समझौते की समीक्षा होने वाली है. गौरतलब है कि मैक्सिको का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार अमेरिका है, और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है.</p>
<p>इस साल की शुरुआत में मैक्सिको ने चीनी उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर सभी को चौंका दिया था. ट्रंप लगातार मैक्सिको की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और बीते महीनों में उन्होंने कई धमकियाँ भी दी हैं—मैक्सिकन स्टील व एल्यूमीनियम पर 50% तक शुल्क, और फेंटानिल को रोकने में असफल रहने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी भी शामिल है. इसी सप्ताह ट्रंप ने पानी से जुड़े 1944 के समझौते का हवाला देते हुए मैक्सिको पर 5% नए टैरिफ की धमकी दे डाली.</p>
<p><strong>भारत पर कितना बड़ा असर?</strong><br>मैक्सिको का 50% टैरिफ भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब दोनों देशों का व्यापार 2024 में रिकॉर्ड 11.7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. भारत वर्तमान में मैक्सिको के लिए नौवां सबसे बड़ा निर्यातक है और ट्रेड सरप्लस भी भारत के पक्ष में है. 2024 में भारत ने लगभग 8.9 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया, जबकि आयात मात्र 2.8 अरब डॉलर रहा.</p>
<p>भारतीय कारों, ऑटो पार्ट्स और यात्री वाहनों की मैक्सिको में भारी मांग रही है, लेकिन नए टैरिफ लागू होने के बाद अगले साल इन वस्तुओं के व्यापार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञ इसे भारत के लिए आने वाले समय में एक बड़ी आर्थिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तान की यूनिवर्सिटी में महाभारत–गीता का नया सफर, पहली बार संस्कृत पाठ्यक्रम से पूरे पाकिस्तान में हलचल तेज</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-university-sanskrit-course-mahabharata-gita</link>
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<description><![CDATA[ विभाजन के बाद पहली बार पाकिस्तान के एक विश्वविद्यालय में संस्कृत पाठ्यक्रम शुरू हुआ है, जिसमें महाभारत और गीता जैसे ग्रंथों का अध्ययन शामिल होगा. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 11:35:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान संस्कृत पाठ्यक्रम, LUMS Sanskrit course, महाभारत गीता अध्ययन, Pakistan education news, लाहौर यूनिवर्सिटी संस्कृत, Sanskrit studies Pakistan, सांस्कृतिक विरासत पाकिस्तान, ancient texts learning, South Asia cultural studies</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>विभाजन के बाद पहली बार पाकिस्तान की किसी यूनिवर्सिटी में वह ऐतिहासिक कदम उठ गया है, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था. लाहौर की मशहूर लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एलयूएमएस) ने संस्कृत भाषा की औपचारिक पढ़ाई की शुरुआत कर देशभर में हलचल मचा दी है. अब छात्र न सिर्फ प्राचीन संस्कृत सीख सकेंगे, बल्कि महाभारत और भगवद गीता जैसे कालजयी ग्रंथों की गहराई भी समझ पाएंगे. शिक्षा और संस्कृति की दुनिया में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.</p>
<p>ये पहल किसी रातोंरात लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि तीन महीने की एक खास वीकेंड वर्कशॉप इसकी बुनियाद बनी. इस वर्कशॉप में छात्रों, शोधकर्ताओं और भाषा प्रेमियों ने जो उत्साह दिखाया, उसने प्रशासन को चौंका दिया. लगातार बढ़ती रुचि ने विश्वविद्यालय को यह महसूस कराया कि संस्कृत को नियमित पाठ्यक्रम बनाना समय की मांग है. आखिरकार, इसी सोच ने इसे औपचारिक कोर्स का रूप दे दिया.</p>
<p>पाकिस्तान में संस्कृत की विरासत कितनी विशाल है, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं. एलयूएमएस के गुरमानी सेंटर के निदेशक डॉ. अली उस्मान कास्मी बताते हैं कि पंजाब विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में संस्कृत की अनमोल पांडुलिपियों का खजाना सुरक्षित है. यह धरोहर देश की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है, लेकिन सालों तक इसे नजरअंदाज ही किया गया. अब इसे फिर से प्रकाश में लाने का मौका मिला है.</p>
<p>डॉ. कास्मी के अनुसार 1930 के दशक में विद्वान जे.सी.आर. वूलनर ने संस्कृत की कई दुर्लभ ताड़पत्र पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया था. हैरानी की बात है कि 1947 के बाद पाकिस्तानी विद्वानों ने इन पर गंभीर शोध लगभग बंद कर दिया. कई दशक बीत गए और इन पांडुलिपियों पर अध्ययन का काम ज्यादातर विदेशी विशेषज्ञ ही करते रहे. ऐसे में स्थानीय छात्रों को संस्कृत सिखाना शोध में एक नई क्रांति ला सकता है.</p>
<p>इस पूरे अभियान से एक बड़ा नाम जुड़ा है—एसोसिएट प्रोफेसर शाहिद रशीद. जब लोग उनसे पूछते हैं कि वे संस्कृत क्यों सीख रहे हैं, तो उनका जवाब बेहद सरल और दमदार है: "हम क्यों न सीखें?" उनके मुताबिक संस्कृत वह धागा है, जिसने इस पूरे क्षेत्र को सदियों तक एक साथ जोड़े रखा. यह भाषा किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप की साझा धरोहर है.</p>
<p>शाहिद रशीद यह भी याद दिलाते हैं कि महान संस्कृत व्याकरणाचार्य पाणिनि का गांव इसी क्षेत्र में आता है. सिंधु घाटी सभ्यता के समय यह इलाका ज्ञान-विज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था. उनकी नजर में संस्कृत उस विशाल पर्वत की तरह है, जो समय की हर आंधी के बाद भी अडिग खड़ा रहा और आज भी हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है.</p>
<p>वे जोर देकर कहते हैं कि संस्कृत को किसी एक समुदाय से जोड़कर देखना इसके गौरव को छोटा करना है. यह भाषा सभी की है, सभी के इतिहास और संस्कृति को जोड़ती है. इसी सोच के साथ एलयूएमएस ने इस कोर्स की शुरुआत की है—ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से दोबारा परिचित हो सके.</p>
<p>भविष्य की बात करें तो योजनाएं और भी बड़ी हैं. विश्वविद्यालय अब महाभारत और भगवद गीता पर अलग-अलग स्पेशल कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रहा है. डॉ. कास्मी का विश्वास है कि अगले 10 से 15 वर्षों में पाकिस्तान में ऐसे विद्वान तैयार होंगे, जो इन ग्रंथों के सबसे बड़े विशेषज्ञों में गिने जाएंगे. यह कदम शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद के नए द्वार भी खोलेगा.</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>भारत ने टैरिफ के असर को मात देकर Trump को जोरदार जवाब दिया, एक्सपोर्ट में हुई गिरावट</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-responds-to-trump-with-strong-reply-despite-tariff-impact-export-decline</link>
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<description><![CDATA[ Donald Trump’s imposition of a 50% tariff on India has negatively impacted exports, yet the measures taken by the Modi administration to mitigate this have positively influenced impressive GDP growth figures. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 15:15:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत, टैरिफ, डोनाल्ड ट्रंप, निर्यात, जीडीपी वृद्धि, अमेरिकी टैरिफ, भारतीय अर्थव्यवस्था, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च, निर्यात में गिरावट, मोदी प्रशासन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लागू किए गए 50% उच्च टैरिफ का कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस टैरिफ की वजह से भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात सिर्फ पांच महीनों में 28 प्रतिशत से अधिक घट चुका है। निर्यात में कमी कई उद्योगों को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचा चुकी है, लेकिन ट्रंप के इस टैरिफ हमले के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की गति ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 8.2% रही, जो अपेक्षाओं से अधिक है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन सी रणनीति भारत के लिए कारगर साबित हुई।</p>
<p><strong>टैरिफ से हुए नुकसान का आकलन</strong><br>अमेरिका हमेशा से भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा है, लेकिन 50% अमेरिकी टैरिफ के कारण इसमें उल्लेखनीय कमी आई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका का निर्यात मई में 8.83 अरब डॉलर से गिरकर अक्टूबर में 6.31 अरब डॉलर हो गया, जो केवल पांच महीनों में 28.5% की गिरावट दर्शाता है। भारत का निर्यात इसी वर्ष 2 अप्रैल को ट्रंप के 10% टैरिफ के लागू होने के बाद घटने लगा, और 7 अगस्त को प्रतिकारी टैरिफ 25% और 27 अगस्त को इसे 50% करने से गिरावट तेज हो गई।</p>
<p>GTRI के अध्ययन से पता चलता है कि अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50% टैरिफ का प्रभाव विश्व स्तर पर सबसे अधिक है, जबकि चीन के लिए 30% और जापान के लिए 15% टैरिफ है। अमेरिकी टैरिफ का नकारात्मक असर उन क्षेत्रों पर भी पड़ा है, जो टैरिफ-मुक्त हैं, जैसे स्मार्टफोन, दवा और पेट्रोलियम उत्पाद, जिनमें 25.8% की कमी आई है और ये मई के 3.42 अरब डॉलर से घटकर अक्टूबर में 2.54 अरब डॉलर रह गए।</p>
<p><strong>इतनी कठिनाई के बावजूद जीडीपी वृद्धि में मजबूती</strong><br>भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज गति को विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मान्यता दी है। भारत ने इसे सिद्ध भी किया है। 50% टैरिफ के नकारात्मक प्रभावों के बावजूद, देश की जीडीपी वृद्धि दूसरी तिमाही में 8.2% रही, जो लगातार दूसरी तिमाही में उम्मीद से अधिक है। जून तिमाही में यह 7.8% थी।</p>
<p>अब सवाल ये है कि जब निर्यात में गिरावट के कारण कई क्षेत्रों को भारी नुकसान हुआ, तो फिर अर्थव्यवस्था की गति पर इसका असर क्यों नहीं दिखा। भारत ने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए एक प्रभावी रणनीति अपनाई, जो सफल रही। इसका प्रमाण इस तथ्य से मिलता है कि जहां भारत का अमेरिका को निर्यात सितंबर में 11.9% घट गया था, वहीं उस महीने देश का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा। अमेरिकी टैरिफ के बाद समायोजन कर रहे भारत के निर्यात को अन्य आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। जहां अमेरिका को भारत का जेम्स और ज्वेलरी निर्यात 76% कम हुआ, वहीं कुल निर्यात में केवल 1.5% की कमी आई।</p>
<p><strong>भारत के लिए कौन सी रणनीति मददगार साबित हुई</strong><br>वास्तव में, जेम्स और ज्वेलरी क्षेत्र के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका को निर्यात में गिरावट आई, लेकिन यूएई, हांगकांग और बेल्जियम जैसे देशों में वृद्धि ने समर्थन प्रदान किया, जिससे टैरिफ का प्रभाव कम हुआ और कुल निर्यात में मामूली कमी आई। भारत के विभिन्न उद्योगों ने विविधीकरण की रणनीति अपनाई और नए बाजारों की ओर रुख किया। ऑटो पार्ट्स के लिए जर्मनी और थाईलैंड जैसी जगहों से मजबूत मांग प्राप्त हुई।</p>
<p>मोदी सरकार ने अमेरिकी टैरिफ के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए कई त्वरित कदम उठाए, जिससे व्यापार के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण सहारा मिला। इससे घरेलू मांग में वृद्धि हुई और निवेश में भी तेजी आई। जीएसटी सुधारों का भी घरेलू मांग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। इस दौरान विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था की गति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>अमेरिकी सांसद का संसद में न्यूड फोटो प्रदर्शन: पूर्व मंगेतर पर उत्पीड़न का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सांसद नैंसी मेसी ने संसद में अपनी नग्न तस्वीर दिखाकर सबको चौंका दिया। नैंसी मेसी ने दावा किया कि उनके पूर्व मंगेतर ने उनकी सहमति के बिना चोरी से यह तस्वीर खींची थी। वीडियो वॉयेरिज्म के खिलाफ कानूनों की वकालत करते हुए उन्होंने अपने पूर्व मंगेतर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जबकि उनके पूर्व मंगेतर ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। यह मामला तब सामने आया जब नैंसी मेसी वीडियो वॉयेरिज्म के खिलाफ कानून बनाने की बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपनी प्राइवेसी का अधिकार है और बिना इजाजत किसी की तस्वीर नहीं लेनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 21 May 2025 17:40:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Nancy Mace, नग्न तस्वीर, यौन उत्पीड़न, वीडियो वॉयेरिज्म, अमेरिकी संसद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी सांसद नैंसी मेसी ने संसद में अपनी नग्न तस्वीर दिखाकर विवाद खड़ा कर दिया है।<br><br>नैंसी मेसी का कहना है कि उनके पूर्व मंगेतर ने उनकी अनुमति के बिना यह तस्वीर खींची थी। उन्होंने वीडियो वॉयेरिज्म के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपने पूर्व मंगेतर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।<br><br>हालांकि, नैंसी मेसी के पूर्व मंगेतर ने इन आरोपों को गलत बताया है। यह मामला तब सामने आया जब नैंसी मेसी वीडियो वॉयेरिज्म के खिलाफ कानून बनाने की बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपनी प्राइवेसी का अधिकार है और बिना इजाजत किसी की तस्वीर नहीं लेनी चाहिए।<br><br>नैंसी मेसी ने अपने पूर्व मंगेतर, पैट्रिक ब्रायंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें यौन शोषण भी शामिल है। ब्रायंट ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि नैंसी मेसी अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पानी की कमी से पाकिस्तान में हिंसा, गृह मंत्री का घर जला</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-violent-protest-over-water-project-in-sindh</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी पर नहरों के निर्माण के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री के घर में आग लगा दी। भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रोक दिया है, जिसके चलते सिंध प्रांत में पानी के लिए आंदोलन जारी है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और गोलियां चलाईं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री के घर में घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 21 May 2025 15:20:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, सिंध, विरोध प्रदर्शन, पानी, गृह मंत्री</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>पाकिस्तान में पानी की कमी के खिलाफ प्रदर्शन: गृह मंत्री का घर जलाया गया</strong><br><br>पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी पर नहरों के निर्माण के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने दो ट्रेलरों में आग लगा दी और सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के घर में घुसकर तोड़फोड़ की व आग लगा दी।<br><br><strong>डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।</strong> भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। सिंध प्रांत में सिंधु नदी के पानी के लिए आंदोलन जारी है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और गोलियां चलाईं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और डीएसपी सहित कई घायल हो गए।<br><br>मृत्यु की खबर के बाद प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री के घर में घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत को मिला नीदरलैंड का साथ, आतंकवाद के खिलाफ</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-netherlands-relations-pm-schoof-supports-india-fight-against-terrorism</link>
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<description><![CDATA[ नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर बातचीत की और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का समर्थन किया। जयशंकर ने नीदरलैंड के आतंकवाद के खिलाफ रुख की सराहना की। स्कूफ ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच और अधिक हिंसा नहीं होनी चाहिए, जो सभी के लिए बेहतर है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 21 May 2025 15:20:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत, नीदरलैंड, आतंकवाद, जयशंकर, डिक स्कूफ</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>द हेग:</strong> नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर चर्चा की। यह बातचीत व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी।</p><br><p>डिक स्कूफ ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नीदरलैंड में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। </p><br><p>जयशंकर ने नीदरलैंड के आतंकवाद के खिलाफ रुख की सराहना की। स्कूफ ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच और अधिक हिंसा नहीं होनी चाहिए, जो सभी के लिए बेहतर है।</p><br><p>नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती दुनिया में दोनों देशों के लिए एक-दूसरे पर भरोसा करना जरूरी है। उन्होंने व्यापार, नई तकनीक, कृषि और सुरक्षा में दीर्घकालिक सहयोग की बात कही।</p><br><p>जयशंकर अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड पहुंचे। इसके बाद वह डेनमार्क और जर्मनी भी जाएंगे। दोनों देशों ने भारत-नीदरलैंड संबंधों में बढ़ती रणनीतिक समानता पर संतोष जताया और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति दी।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>अमेरिका&amp;पाकिस्तान की दोस्ती: भारत के लिए खतरा?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नया मोड़ आया है, जहां अमेरिका पाकिस्तान की विशाल खनिज संपदा का दोहन करने में रुचि दिखा रहा है। अमेरिका पाकिस्तान को स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जरूरी खनिजों के लिए एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर देख रहा है। ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर मेहरबान है क्योंकि अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल अपनी ग्रीन-टेक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी खनिजों को पाने के लिए कर रहा है। एरिक मेयर ने खनिज क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए एक उच्च-स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 May 2025 23:53:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, पाकिस्तान, भारत, ट्रंप, खनिज संपदा, आईएसआई, आतंकवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नया मोड़ आया है। अमेरिका अब पाकिस्तान की विशाल खनिज संपदा का दोहन करने में दिलचस्पी दिखा रहा है। आतंकवाद के वित्तपोषण की चिंताओं के बावजूद, अमेरिका पाकिस्तान को स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जरूरी खनिजों के लिए एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर देख रहा है.<br><br>अमेरिका और पाकिस्तान के बीच दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। दोनों देश भले ही रिश्तों में कड़वाहट दिखाएं, लेकिन जब भी पाकिस्तान को मदद की जरूरत होती है, अमेरिका हमेशा साथ खड़ा रहता है। हालांकि, अमेरिका इसके बदले में पाकिस्तान से कीमत वसूलता है। पाकिस्तान की मजबूरी है कि वह अमेरिका को कीमत चुकाने को तैयार हो जाता है, चाहे अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले का समर्थन करना हो या भारत के खिलाफ भू-राजनीतिक दबाव की राजनीति खेलना।<br><br>लगातार अमेरिकी प्रशासन ने आतंकवादी नेटवर्क के साथ संदिग्ध व्यवहार के लिए पाकिस्तान की आलोचना की है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बार-बार पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के तालिबान और लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों के साथ संबंधों को उजागर किया है, जिन्होंने अफगानिस्तान और भारत में हमले किए हैं। फिर भी, अमेरिका अपने लक्ष्यों के लिए पाकिस्तान को एक रणनीतिक साझेदार मानता है।<br><br>अमेरिका ने अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान को सप्लाई बेस की तरह इस्तेमाल किया। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई को अफगानिस्तान में मदद के लिए उतारा। हालांकि, अमेरिका ने पाकिस्तान की खूब मदद की, जिसका सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तानी सेना ने उठाया। अब अमेरिका, पाकिस्तान का इस्तेमाल अपनी ग्रीन-टेक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी खनिजों को पाने के लिए कर रहा है। ऐसा लगता है कि इसी वजह से ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर मेहरबान है।<br><br>यूरेशियन Times की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के अमेरिकी ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी एरिक मेयर की हालिया पाकिस्तान यात्रा ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में एक रणनीतिक बदलाव दिखाया है। आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादी ठिकानों पर चिंताओं के बावजूद, अमेरिका अब पाकिस्तान की विशाल खनिज संपदा की ओर देख रहा है, जो स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जरूरी है।<br><br>अप्रैल 2025 में, एरिक मेयर ने खनिज क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए एक उच्च-स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने रावलपिंडी में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल सैयद असीम मुनीर से मुलाकात की। उनकी बातचीत खनिज विकास पर केंद्रित थी। मेयर ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की, जिन्होंने पाकिस्तान को अमेरिकी निवेश के लिए एक बेहतर जगह बताया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>एशिया में फिर से बढ़ रहे हैं कोविड&amp;19 के मामले</title>
<link>https://pratinidhi.in/covid-cases-spike-in-hong-kong-and-singapore-new-wave</link>
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<description><![CDATA[ एशिया के हांगकांग और सिंगापुर में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। हांगकांग में वायरस का प्रकोप काफी ज्यादा है, जहां पॉजिटिव मामले एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। 3 मई तक के सप्ताह में 31 गंभीर मामले दर्ज किए गए। सिंगापुर में भी स्थिति गंभीर है, जहां 3 मई तक के सप्ताह में मामलों की अनुमानित संख्या 28% से बढ़कर 14,200 हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 की लहर के फिर से फैलने के कारण मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:23:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कोविड-19, हांगकांग, सिंगापुर, कोरोना वायरस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> पूरी दुनिया में कोरोना से हाहाकार मचने के बाद, अब एशिया के <strong>हांगकांग</strong> और <strong>सिंगापुर</strong> में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 की लहर के फिर से फैलने के कारण मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।</p><br><p><strong>हांगकांग</strong> में वायरस का प्रकोप काफी ज्यादा है। शहर के स्वास्थ्य सुरक्षा केंद्र के प्रमुख <strong>अल्बर्ट औ</strong> ने बताया कि कोविड-19 के पॉजिटिव मामले एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। 3 मई तक के सप्ताह में 31 गंभीर मामले दर्ज किए गए, जो पिछले एक साल में सबसे ज्यादा हैं।</p><br><p>आंकड़ों से पता चलता है कि मौतों सहित गंभीर मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। 3 मई को खत्म हुए सप्ताह में 31 नए मामले सामने आए। हालांकि, संक्रमण का यह आंकड़ा पिछले दो साल में देखे गए संक्रमण के शिखर से मेल नहीं खाता है, लेकिन वायरस अभी भी सक्रिय है।</p><br><p><strong>सिंगापुर</strong> में भी स्थिति गंभीर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 3 मई तक के सप्ताह में मामलों की अनुमानित संख्या पिछले सात दिनों की तुलना में 28% से बढ़कर 14,200 हो गई।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>रूस&amp;यूक्रेन वार्ता: जंग खत्म होने की उम्मीद</title>
<link>https://pratinidhi.in/russia-ukraine-war-peace-talks-in-turkey</link>
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<description><![CDATA[ रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से अधिक समय से चल रही जंग को समाप्त करने के लिए पहली बार दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्तांबुल में मिले। यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के कारण हुई। यूक्रेन ने 30 दिन के युद्धविराम, अगवा बच्चों की वापसी और युद्धबंदियों की अदला-बदली की मांग की है, जबकि रूस ने चिंता जताई है कि यूक्रेन इसका इस्तेमाल सेना को मजबूत करने के लिए कर सकता है। यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर टालमटोल का आरोप लगाया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:21:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, यूक्रेन, जंग, शांति वार्ता, डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, वोलोडिमिर जेलेंस्की, तुर्किए</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को समाप्त करने के लिए, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल तीन साल में पहली बार तुर्किए में आमने-सामने बैठे।<br><br>यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के कारण संभव हो पाई। तुर्किए के न्यूज चैनलों ने इस चर्चा को महत्वपूर्ण बताया है। रूस ने कहा है कि वह कूटनीतिक तरीकों से युद्ध को खत्म करना चाहता है और युद्ध विराम पर बात करने को तैयार है, लेकिन उसने कुछ चिंताएं भी व्यक्त की हैं।<br><br>यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने कहा कि शांति तभी संभव है जब रूस 30 दिन का युद्ध विराम करे, अगवा किए गए यूक्रेनी बच्चों को वापस करे और युद्धबंदियों की अदला-बदली करे। रूस ने इन मांगों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध विराम का उपयोग अपनी सेना को आराम देने, सैनिकों की संख्या बढ़ाने और पश्चिमी हथियारों को प्राप्त करने के लिए कर सकता है।<br><br>यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले में टालमटोल कर रहे हैं और शांति को लेकर गंभीर नहीं हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पहलगाम हमले: UN में TRF पर भारत का शिकंजा</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-pushes-for-un-ban-on-pakistani-terror-group-trf-after-pahalgam-attack</link>
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<description><![CDATA[ भारत, लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन &#039;द रेसिस्टेंस फ्रंट&#039; (टीआरएफ) को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल कराने के प्रयास कर रहा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक कार्यालय के अधिकारियों से मुलाकात की। टीआरएफ ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत की तकनीकी टीम ने संयुक्त राष्ट्र में &#039;1267 प्रतिबंध समिति&#039; की निगरानी टीम के साथ बातचीत की है। सुरक्षा परिषद ने भी इस हमले की निंदा की है। पाकिस्तान सुरक्षा परिषद का सदस्य है और चीन आतंकवादियों को काली सूची में डालने के प्रयासों में अड़ंगा डाल चुका है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:19:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पहलगाम हमला, टीआरएफ, संयुक्त राष्ट्र, भारत, पाकिस्तान, आतंकवाद, लश्कर-ए-तैयबा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>संयुक्त राष्ट्र:</strong> भारत, पहलगाम हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन 'द रेसिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है। इस संबंध में, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक कार्यालय और आतंकवाद निरोधक समिति के अधिकारियों से मुलाकात की है।<br><br><strong>टीआरएफ पर प्रतिबंध की संभावना:</strong> माना जा रहा है कि टीआरएफ पर जल्द ही प्रतिबंध लगाया जा सकता है। भारत ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में जोर-शोर से उठाया है।<br><br><strong>पहलगाम हमले की जिम्मेदारी:</strong> 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक मुखौटा संगठन है।<br><br><strong>भारत की तकनीकी टीम:</strong> सूत्रों के अनुसार, भारतीय तकनीकी टीम न्यूयॉर्क में है और उसने संयुक्त राष्ट्र में '1267 प्रतिबंध समिति' की निगरानी टीम के साथ बातचीत की है। टीम ने यूएनओसीटी और सीटीईडी के शीर्ष अधिकारियों से भी मुलाकात की।<br><br><strong>सुरक्षा परिषद की प्रतिक्रिया:</strong> संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह कदम सुरक्षा परिषद द्वारा पहलगाम हमले की निंदा करने के बाद आया है। हालांकि, परिषद ने हमले के लिए जिम्मेदार समूह के रूप में टीआरएफ का उल्लेख नहीं किया था।<br><br><strong>पाकिस्तान का विरोध:</strong> पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है और जुलाई में इसकी अध्यक्षता करेगा। कई पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की '1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति' के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।<br><br><strong>चीन का साथ:</strong> चीन, सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और पहले भी पाकिस्तान के आतंकवादियों को काली सूची में डालने के प्रयासों में अड़ंगा डाल चुका है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत&amp;पाक मध्यस्थता पर ट्रंप के बदले बोल</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-backtracks-on-india-pakistan-mediation-claim-8151</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के अपने पहले के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ समस्या को सुलझाने में मदद की। दोहा में सैनिकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि व्यापार के मुद्दे पर दोनों देशों के साथ बातचीत चल रही है और वे सही दिशा में बढ़ रहे हैं। पहले, ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने व्यापार में कटौती की धमकी देकर दोनों देशों को संघर्ष रोकने के लिए मजबूर किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:19:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, भारत-पाकिस्तान, मध्यस्थता, संघर्ष विराम, व्यापार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>दोहा:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्व के दावों से पलटते हुए कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता नहीं की, बल्कि केवल समस्या को सुलझाने में मदद की। <br><br>ट्रंप ने दोहा में अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के साथ व्यापार पर बातचीत चल रही है, जिससे दोनों देश खुश हैं और सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। <br><br><strong>पहले का दावा:</strong><br>सोमवार को ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने व्यापार में कटौती की धमकी देकर दोनों देशों को संघर्ष रोकने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा था कि अगर दोनों देश संघर्ष रोकते हैं तो अमेरिका उनके साथ व्यापार करेगा। <br><br>ट्रंप ने यह भी कहा था कि उन्होंने परमाणु युद्ध को रोका है और पाकिस्तान के साथ व्यापार करने जा रहे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>तुर्की में भूकंप के तेज झटकों से दहशत, रिक्टर स्केल पर 5.1 मापी गई तीव्रता</title>
<link>https://pratinidhi.in/earthquake-strikes-turkey-magnitude-and-intensity-details</link>
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<description><![CDATA[ गुरुवार शाम तुर्की में 5.1 तीव्रता के भूकंप से लोग दहशत में आ गए, पर कोई जान-माल की हानि नहीं हुई। ईएमएससी के अनुसार, केंद्र कुल्लू से 14 किमी उत्तर-पूर्व में था। यह ग्रीस में 6.1 तीव्रता के भूकंप के बाद आया, जिसके झटके कई देशों में महसूस हुए। नेपाल में भी 4.6 तीव्रता का भूकंप आया, पर नुकसान नहीं हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:19:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भूकंप, तुर्की, रिक्टर स्केल, आपदा, भूकंप के झटके</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्तांबुल:</strong> तुर्की में गुरुवार शाम को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.1 मापी गई। झटकों के कारण लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए, हालांकि किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।<br><br>स्वतंत्र वैज्ञानिक संगठन ईएमएससी के अनुसार, गुरुवार दोपहर लगभग 3.46 बजे तुर्की में रिक्टर पैमाने पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र कुल्लू से 14 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था।<br><br>यह भूकंप, ग्रीस के फ्राई के पास बुधवार सुबह आए 6.1 तीव्रता के भूकंप के बाद आया है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, यह स्थानीय समयानुसार सुबह 1:51 बजे 78 किलोमीटर की गहराई पर आया था। इसके झटके काहिरा, मिस्र, इज़राइल, लेबनान, तुर्की और जॉर्डन में भी महसूस किए गए थे।<br><br>नेपाल में भी बुधवार को 4.6 तीव्रता का भूकंप आया, लेकिन तत्काल किसी नुकसान की सूचना नहीं है। नेपाल के भूकंप निगरानी केंद्र ने बताया कि भूकंप शाम 6:11 बजे आया, जिसका केंद्र सोलुखुम्बु जिले के छेस्कम क्षेत्र में था। इसके झटके काठमांडू और आसपास के जिलों में भी महसूस किए गए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नीरव मोदी: ब्रिटेन में नहीं चली चाल, कोर्ट ने खारिज की जमानत, भारत वापसी का रास्ता हुआ साफ़</title>
<link>https://pratinidhi.in/nirav-modi-bail-rejected-uk-court-extradition-india</link>
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<description><![CDATA[ भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की अदालत से फिर झटका लगा जब कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। नीरव ने अपनी जान को खतरा बताते हुए ब्रिटेन से न भागने की दलील दी थी, लेकिन अदालत ने इसे नहीं माना। कोर्ट के इस फैसले के बाद नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ हो गया है। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का आरोपी है और 2018 में भारत से भाग गया था, हालांकि घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:18:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नीरव मोदी, जमानत याचिका, ब्रिटिश कोर्ट, प्रत्यर्पण, लंदन, पंजाब नेशनल बैंक घोटाला, भारत प्रत्यर्पण, ब्रिटेन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>लंदन:</strong> भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को उस समय एक और झटका लगा जब लंदन की एक अदालत ने भारत प्रत्यर्पण तक जमानत पर रिहा होने की उसकी याचिका को खारिज कर दिया।<br><br>नीरव मोदी ने तर्क दिया था कि उसकी जान को खतरा है और वह जमानत मिलने के बाद ब्रिटेन से कहीं नहीं भागेगा। हालांकि, अदालत ने उसकी दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के इस फैसले के बाद नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ हो गया है।<br><br>नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में आरोपी है और 2018 में भारत से भाग गया था। घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया था।<br><br>नीरव मोदी के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। उन्होंने आगे कहा कि नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने के फैसले के खिलाफ उसकी अपील को लंदन के उच्च न्यायालय ने पहले ही खारिज कर दिया था। इसके अलावा, ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में मामले को ले जाने की उनकी मांग को भी खारिज कर दिया गया था।<br><br>भारतीय अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि नीरव मोदी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वह भागने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने नीरव मोदी द्वारा वानुअतु की नागरिकता के लिए किए गए पिछले प्रयास का भी उल्लेख किया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत, पाकिस्तान और चीन: रूस ने पश्चिमी देशों पर लगाया आरोप</title>
<link>https://pratinidhi.in/russia-alleges-western-countries-instigating-conflict-india-pakistan-china</link>
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<description><![CDATA[ रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में आसियान की भूमिका को कमजोर करना चाहता है और चीन के खिलाफ भारत का इस्तेमाल करना चाहता है। लावरोव ने क्वाड की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यूरेशिया में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का भी आह्वान किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:18:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Russia, India, Pakistan, China, Western Countries, Sergei Lavrov, ASEAN, Quad, AUKUS, Eurasia</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान की भूमिका को कमजोर करना चाहते हैं और चीन के खिलाफ भारत का इस्तेमाल करना चाहते हैं।<br><br>मॉस्को में एक कार्यक्रम में लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन विरोधी नीतियों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे भारत और चीन के बीच टकराव हो सकता है।<br><br>लावरोव ने क्वाड की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी देश एशिया में आसियान की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यूरेशिया में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यूरेशिया जैसा कोई दूसरा महाद्वीप नहीं है, जहां इतनी सारी सभ्यताएं एक साथ रहती हैं, लेकिन यहां कोई महाद्वीप-व्यापी मंच नहीं है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत विरोधी प्रस्ताव: पाक संसद का ऐलान, सिंधु समझौता तोड़ा तो युद्ध!</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-parliament-passes-anti-india-resolution-warns-over-indus-waters-treaty</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें भारत पर पहलगाम हमले के बाद उसे बदनाम करने का आरोप लगाया गया। सांसद तारिक फजल चौधरी ने प्रस्ताव पेश किया, जिसमें भारत के दुर्भावनापूर्ण अभियान की निंदा की गई और निर्दोषों की हत्या को पाकिस्तानी मूल्यों के खिलाफ बताया गया।संसद ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने के भारतीय फैसले को गैरकानूनी और एकतरफा बताते हुए युद्ध की कार्रवाई के समान बताया। पाकिस्तान ने कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया और भारत को आतंकवाद के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की। यह कदम पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 May 2025 17:05:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, India, Indus Water Treaty, National Assembly, Terrorism, Pahalgam Attack</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने एक प्रस्ताव पारित कर भारत के 'दुर्भावनापूर्ण अभियान' की निंदा की है। यह प्रस्ताव पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को बदनाम करने के प्रयासों के खिलाफ था। सत्तारूढ़ दल के सांसद तारिक फजल चौधरी ने यह प्रस्ताव पेश किया, जिसमें पहलगाम हमले से पाकिस्तान का नाम जोड़ने के प्रयासों को खारिज किया गया।<br><br>संसद में पेश प्रस्ताव में कहा गया कि भारत सरकार पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए दुर्भावनापूर्ण अभियान चला रही है, जिसकी हम निंदा करते हैं। प्रस्ताव में निर्दोष लोगों की हत्या को पाकिस्तान के मूल्यों के खिलाफ बताया गया।<br><br>संसद ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले की निंदा की और इसे गैरकानूनी बताया। प्रस्ताव में कहा गया कि भारत द्वारा संधि को तोड़ना युद्ध की घोषणा के समान होगा, और पाकिस्तान अपनी रक्षा करने में सक्षम है।<br><br>पाकिस्तान की संसद ने भारत को पाकिस्तान में आतंकवाद के कृत्यों में शामिल होने के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की और कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया। यह प्रस्ताव पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>UNSC में पाक को फटकार, पहलगाम हमले में LeT कनेक्शन पर सवाल</title>
<link>https://pratinidhi.in/unsc-members-question-pakistan-on-kashmir-and-let-connection-in-pahalgam-attack</link>
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<description><![CDATA[ पहलगाम में हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने UNSC से बैठक बुलाने की मांग की, जिसमें उसने भारत पर झूठे आरोप लगाए और कश्मीर मुद्दा उठाया। UNSC सदस्यों ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए उससे कड़े सवाल किए और पूछा कि क्या पहलगाम हमले में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 May 2025 17:04:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>UNSC, Pakistan, India, Kashmir, Pahalgam attack, LeT</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली:</strong> जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से इस मामले पर बैठक बुलाने की मांग की।<br><br>पाकिस्तान ने इस बैठक का इस्तेमाल एक बार फिर भारत के खिलाफ झूठ फैलाने और कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए किया। हालांकि, UNSC के सदस्यों ने पाकिस्तान से कई कड़े सवाल पूछे और उनके दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पहलगाम हमले में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ हो सकता है।<br><br>UNSC की इस बंद कमरे में हुई बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, लेकिन पाकिस्तान को भारत के खिलाफ अपने झूठे आरोपों के लिए कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत पर साइबर हमला: पाकिस्तानी हैकर्स ने रक्षा वेबसाइटों को निशाना बनाया</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-cyber-attack-on-india-targets-defence-websites</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तानी साइबर हमलावरों ने भारतीय रक्षा वेबसाइटों पर साइबर अटैक किया और संवेदनशील डेटा चुराने का प्रयास किया। पाकिस्तान साइबर फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने इंडियन मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस और MP-IDSA के डेटा तक पहुंच प्राप्त कर ली है। आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट को हैक कर लिया गया है और उसे ऑफलाइन कर दिया गया है। साइबर सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कई पाकिस्तानी हैकर समूहों की पहचान की गई है जिन्होंने पहले भी भारतीय वेबसाइटों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 May 2025 17:04:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>साइबर हमला, पाकिस्तानी हैकर्स, रक्षा मंत्रालय, वेबसाइट हैक, संवेदनशील डेटा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद/नई दिल्ली:</strong><br><br>पाकिस्तानी साइबर हमलावरों ने भारतीय रक्षा और सशस्त्र बलों से संबंधित वेबसाइटों पर साइबर हमले करके संवेदनशील डेटा चुराने का प्रयास किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पाकिस्तान साइबर फोर्स ने दावा किया है कि उनके ग्रुप ने इंडियन मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस और मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (MP-IDSA) के गोपनीय डेटा तक पहुंच प्राप्त कर ली है। इस साइबर अटैक में रक्षा कर्मियों की निजी जानकारी और लॉगिन क्रेडेंशियल्स भी खतरे में पड़ गए हैं।<br><br><strong>वेबसाइट को किया गया ऑफ़लाइन:</strong><br><br>पाकिस्तान साइबर फोर्स ने रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक सरकारी कंपनी, आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट को भी हैक कर लिया। उन्होंने वेबसाइट पर पाकिस्तानी झंडे और अल खालिद टैंक की तस्वीरें लगाकर वेबसाइट को विकृत कर दिया। सुरक्षा कारणों से, आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट को फिलहाल ऑफलाइन कर दिया गया है, ताकि गहन जांच की जा सके और नुकसान का आकलन किया जा सके।<br><br><strong>साइबर एजेंसियों की निगरानी:</strong><br><br>साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एजेंसियां लगातार साइबर स्पेस पर नजर रख रही हैं ताकि किसी भी संभावित साइबर हमले को पहचाना जा सके, खासकर पाकिस्तान से जुड़े हमलों को। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में होने वाले साइबर हमलों से बचा जा सके।<br><br><strong>पाकिस्तानी हैकर्स की पहचान:</strong><br><br>अब तक 'साइबर ग्रुप हॉक्स1337' और 'नेशनल साइबर क्रू' जैसे कई पाकिस्तानी हैकर समूहों की पहचान हो चुकी है। इन समूहों ने पहले भी भारतीय वेबसाइटों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते इन प्रयासों को विफल कर दिया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान की मध्यस्थता पर भारत का कड़ा रुख</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-rejects-iran-mediation-offer-for-india-pakistan-tension</link>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भारत यात्रा से पहले, पूर्व विदेश सचिव ने ईरान की मध्यस्थता की पेशकश को खारिज कर दिया है, इसे भारत की स्थिति को कमजोर करने वाला बताया। कंवल सिब्बल ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने कश्मीर का उल्लेख किया, जिससे उनकी निष्पक्षता संदिग्ध है। सिब्बल ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय देने के मुद्दे को भी उठाया और ईरान से स्पष्ट रूप से मध्यस्थता से इनकार करने का आग्रह किया। अराघची ने इस्लामाबाद में दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 May 2025 17:04:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, भारत, पाकिस्तान, मध्यस्थता, तनाव, विदेश सचिव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद/तेहरान:</strong> ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भारत यात्रा से पहले, भारत के पूर्व विदेश सचिव ने ईरान द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश को खारिज कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण हैं।<br><br>पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने ईरान की मध्यस्थता की पेशकश को खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे सीमा पार आतंकवाद पर भारत की स्थिति कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने कश्मीर का उल्लेख किया था, जिससे उनकी निष्पक्षता पर संदेह होता है।<br><br>सिब्बल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जिसे मध्यस्थता द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने ईरान से स्पष्ट रूप से कहने का आग्रह किया कि भारत को किसी भी मध्यस्थता में कोई दिलचस्पी नहीं है। अराघची ने इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आग्रह किया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत ने अंतरिक्ष में दिखाई ताकत, चीन की उड़ेगी नींद</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-isro-conduct-satellite-dogfight-in-space-big-tension-for-pakistan-china</link>
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<description><![CDATA[ भारत अंतरिक्ष में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है, जिससे चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ सकती है। इसरो ने दो उपग्रहों के बीच डॉगफाइट का संचालन किया, जो पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर ऊपर किया गया। यह गतिविधि ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ रहा है। इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि स्पैडेक्स मिशन ने सफलतापूर्वक डॉकिंग और अनडॉकिंग की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में एक उपग्रह ने दूसरे को बिजली भी ट्रांसफर की। भारत ने 16 जनवरी को पहली डॉकिंग हासिल की, जिससे वह रूस, अमेरिका और चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने अंतरिक्ष में चीन की बढ़ती युद्धाभ्यास क्षमता पर चिंता जताई है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 May 2025 17:01:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ISRO, Satellite Dogfight, India, China, Pakistan, Space, Military, Tension</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[नई दिल्ली और बीजिंग: <strong>भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहा है।</strong> <br><br>चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 मिशनों ने भारत की अंतरिक्ष शक्ति का प्रदर्शन किया है। दुनिया भर के देश अपने सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए भारत का रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसरो उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प बनकर उभरा है। अब भारत अंतरिक्ष में एक ऐसी गतिविधि कर रहा है जिससे चीन और पाकिस्तान चिंतित हो सकते हैं। <strong>भारत पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर की ऊँचाई पर दो सैटेलाइट्स के बीच 'डॉगफाइट' का संचालन कर रहा है।</strong><br><br>यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब पहलगाम में हुए हमले के बाद पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ गया है। पिछले साल चीन ने भी अपने सैन्य उपग्रहों के बीच ऐसी ही डॉगफाइट की थी, जिस पर अमेरिका ने चिंता जताई थी। अंतरिक्ष में डॉगफाइट दो उपग्रहों के बीच वैसी ही करीबी युद्धाभ्यास है, जैसा कि दो लड़ाकू विमानों के बीच होता है।<br><br>एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में, इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि भारत के स्पैडेक्स मिशन ने दो बार सफलतापूर्वक डॉकिंग और अनडॉकिंग की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। नारायणन ने यह भी बताया कि इन अभ्यासों के बाद भी दोनों सैटेलाइट्स में 50% ईंधन बचा था। इस बचे हुए ईंधन का उपयोग करते हुए, इसरो ने कक्षा में दो उपग्रहों के बीच नजदीकी समन्वय से जुड़ा एक नया परीक्षण किया, जो हवाई डॉगफाइट के समान था। इस गतिविधि को तकनीकी रूप से जटिल और मुश्किल बताया गया।<br><br>रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिक्ष में लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ने वाले दो भारतीय उपग्रहों, SDX01 और SDX02 ने एक खास उड़ान पैटर्न में स्वतंत्र रूप से हिस्सा लिया। हाल ही में, इन दोनों उपग्रहों के बीच एक करीबी मुठभेड़ हुई, जो उनकी कक्षाओं को समायोजित करने के लिए कई दिनों तक चले अभियान के बाद संभव हो पाई।<br><br>इस अभ्यास में एक खास बात यह थी कि एक उपग्रह ने दूसरे उपग्रह के हीटिंग एलिमेंट के लिए बिजली ट्रांसफर की। यह ट्रांसफर लगभग 4 मिनट तक चला, जो अपेक्षित था। दूसरे डॉकिंग प्रयास में, 3 मीटर की अंतर-उपग्रह दूरी पर अतिरिक्त होल्ड पॉइंट्स का इस्तेमाल किया गया।<br><br>इसरो ने इस साल 16 जनवरी को पहली डॉकिंग हासिल की थी, जब पृथ्वी से 475 किलोमीटर ऊपर कक्षा में घूम रहे दो भारतीय उपग्रहों को सफलतापूर्वक डॉक किया गया। इस सफलता के साथ, भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन गया। भारत ने पिछले साल 30 दिसंबर को पीएसएलवी रॉकेट से स्पैडेक्स मिशन लॉन्च किया था। डॉकिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो चंद्रयान-4 और भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे मिशनों के लिए जरूरी है।<br><br>इसी साल मार्च में, अमेरिकी स्पेस फोर्स ने अंतरिक्ष में युद्धाभ्यास करने की चीन की बढ़ती क्षमता पर चिंता व्यक्त की थी। अमेरिकी स्पेस फोर्स के वाइस कमांडर माइकल ए. गुएटलीन ने कहा था, 'हम इसे अंतरिक्ष में डॉगफाइटिंग कहते हैं। वे एक उपग्रह से दूसरे उपग्रह पर अंतरिक्ष में संचालन करने के लिए रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं का अभ्यास कर रहे हैं।']]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाक सरकार पर मौलवी का वार: &amp;apos;अपने लोगों पर बमबारी, ये कैसी व्यवस्था?&amp;apos;</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-cleric-lashes-out-at-pakistani-government-over-bombings</link>
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<description><![CDATA[ लाल मस्जिद के मौलवी अब्दुल अजीज गाजी ने पाकिस्तान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भारत से जंग इस्लामी नहीं होगी, सरकार क्रूर है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में गाजी ने समर्थकों से युद्ध में पाकिस्तान का साथ देने को कहा, लेकिन निराशा मिली। उन्होंने सेना पर दमन का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान में अत्याचार भारत से ज्यादा है। गाजी ने वजीरिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बमबारी का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने ही लोगों पर बम बरसा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 May 2025 16:59:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, मौलवी अब्दुल अजीज गाजी, भारत, पहलगाम अटैक, आतंकवाद, लाल मस्जिद, शहबाज सरकार, सिंधु समझौता, वजीरिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पाक सरकार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> लाल मस्जिद के मौलवी अब्दुल अजीज गाजी ने पाकिस्तान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के साथ कोई भी संघर्ष इस्लामी युद्ध नहीं होगा। उन्होंने सरकार को क्रूर और बेकार बताया।<br><br>सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में, गाजी अपने समर्थकों से पूछते हैं कि क्या वे भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान का समर्थन करेंगे, जिस पर उन्हें निराशाजनक चुप्पी मिलती है। उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर दमन का आरोप लगाया।<br><br>गाजी ने कहा कि पाकिस्तान में कुफ्र और अत्याचारी व्यवस्था है, जो भारत से भी बदतर है। उन्होंने 2007 में लाल मस्जिद की घेराबंदी का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या भारत अपने नागरिकों पर बमबारी करता है या लोगों को गायब करता है। उन्होंने वजीरिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में अत्याचारों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने ही लोगों पर बमबारी कर रहा है।<br><br>यह वीडियो 2 मई को लाल मस्जिद में रिकॉर्ड किया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे पाकिस्तान में नाराजगी फैल गई। अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने भी मौलवी की आलोचना की है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत को सुरक्षा परिषद में मिल सकता है समर्थन</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-bid-for-permanent-unsc-seat-gains-support-from-kuwait</link>
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<description><![CDATA[ भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलने की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि कुवैत ने इसका समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि तारिक अलबनई ने कहा कि यदि सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो भारत एक महत्वपूर्ण दावेदार होगा। अलबनई ने UNSC में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और फ्रांसीसी दूतावास ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:49:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>UNSC, India, Kuwait, संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[भारत को सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता मिलने की संभावना और भी प्रबल हो गई है, क्योंकि कुवैत ने भी इसका समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि तारिक अलबनई ने कहा कि यदि सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या 21 से 27 तक बढ़ाई जाती है, तो भारत एक महत्वपूर्ण दावेदार होगा।<br><br>अलबनई ने UNSC में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है। उन्होंने यह भी कहा कि परिषद में सुधार इस तरह से किया जाना चाहिए कि यह समावेशिता, पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित हो।<br><br>फ्रांसीसी दूतावास ने भी भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन जताया था और UNSC में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश में हिंदू नेता की अपहरण और हत्या: अल्पसंख्यक समुदाय में दहशत</title>
<link>https://pratinidhi.in/Hindu-leader-kidnapped-and-murdered-in-Bangladesh-Minority-community-fears</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर अत्याचार जारी है। दिनाजपुर जिले में हिंदू नेता भबेश चंद्र का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी गई। वह बांग्लादेश पूजा उत्सव परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष थे। एक अन्य घटना में, हिंदू प्रधानाध्यापक कांतिलाल आचार्य को बंधक बनाकर इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया। उनकी पत्नी ने बताया कि भबेश का अपहरण करके उन्हें बेरहमी से पीटा गया और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। चटगांव में भी एक प्रधानाध्यापक को भ्रष्टाचार के आरोप में पीटा गया और इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:49:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, हिंदू नेता, अपहरण, हत्या, अल्पसंख्यक, अत्याचार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में, दिनाजपुर जिले में एक हिंदू नेता भबेश चंद्र का अपहरण किया गया और बेरहमी से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, भबेश चंद्र अपने क्षेत्र में हिंदू समुदाय के एक महत्वपूर्ण नेता थे और बांग्लादेश पूजा उत्सव परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष भी थे।</p><br><p>एक अन्य घटना में, हिंदू प्रधानाध्यापक कांतिलाल आचार्य को बंधक बनाकर उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। उनकी पत्नी शांतना राय ने बताया कि गुरुवार को चार लोग दो मोटरसाइकिलों पर आए और भबेश का उनके घर से अपहरण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने हमलावरों को भबेश को नरबारी गांव ले जाते हुए देखा, जहाँ उन्हें बेरहमी से पीटा गया।</p><br><p>उसी दिन, हमलावरों ने भबेश को एक वैन में उनके घर पर छोड़ दिया, उस समय वह बेहोश थे। उन्हें तुरंत बिराल उपजिला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन बाद में उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।</p><br><p>इसके अलावा, चटगांव के भटियारी हाजी तोबारक अली चौधरी हाई स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक कांतिलाल आचार्य को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों के सदस्यों ने भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाकर पीटा और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। प्रधानाध्यापक की बेटी भावना आचार्य ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि उनके पिता को बिना किसी सबूत के पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>रूस&amp;यूक्रेन समझौते पर अमेरिका की डेडलाइन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो अमेरिका इस मामले में आगे साथ नहीं देगा। उन्होंने यूरोपीय और यूक्रेनी नेताओं के साथ मुलाकात के बाद यह टिप्पणी की और कहा कि अमेरिका कुछ हफ्तों या महीनों तक ही इस प्रयास को जारी रख सकता है। रुबियो ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प समझौते में रुचि रखते हैं, लेकिन प्रगति न होने पर अन्य विकल्पों के लिए तैयार हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:49:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Russia-Ukraine war, US, Marco Rubio, Donald Trump, Peace deal, American foreign policy</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध का कोई हल जल्द नहीं निकलता, तो अमेरिका इस मामले में आगे साथ नहीं देगा।</p><br><p>मार्को रुबियो ने यूरोपीय और यूक्रेनी नेताओं के साथ पेरिस में मुलाकात के बाद यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका इस प्रयास को कुछ हफ्तों या महीनों तक ही जारी रख सकता है।</p><br><p>रूसी-यूक्रेनी संघर्ष के बीच, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो वह पीछे हट जाएगा। विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रूस-यूक्रेन शांति समझौते पर बातचीत करने के प्रयासों से जल्द ही हट सकते हैं, जब तक कि यह स्पष्ट न हो कि समझौता संभव है।</p><br><p>रुबियो ने कहा कि ट्रंप अभी भी इस मुद्दे पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन यदि जल्दी ही कोई प्रगति नहीं हुई तो वे अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;1971 के नरसंहार के लिए माफी मांगे पाक&amp;apos;, बांग्लादेश ने 54 साल बाद बंगालियों पर अत्याचार का उठाया मुद्दा</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश ने पाकिस्तान से 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान बंगालियों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी और मुआवजे की मांग की है। ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान, पाकिस्तानी सेना ने 30 लाख बंगालियों को मार डाला और दस लाख से अधिक महिलाओं के साथ बलात्कार किया था। बांग्लादेश ने राहत शिविरों में रह रहे तीन लाख से अधिक फंसे हुए पाकिस्तानियों को वापस भेजने और 1970 के भोला चक्रवात के पीड़ितों को भेजी गई विदेशी सहायता राशि के हस्तांतरण सहित अन्य मुद्दे भी उठाए। बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीम उद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान ने 1970 के भोला चक्रवात के बाद बांग्लादेश को विदेशी सहायता में 200 मिलियन डॉलर का अपना हिस्सा आवंटित नहीं किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:49:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh, Pakistan, 1971 Genocide, Apology, Compensation, War, Atrocities</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>ढाका: बांग्लादेश ने पाकिस्तान से 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगालियों पर किए गए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी मांगने को कहा है। यूनुस सरकार ने इसके लिए मुआवजे की भी मांग की है।</p><br><p>ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान, पाकिस्तानी सेना ने अनुमानित 30 लाख बंगालियों को मार डाला और दस लाख से अधिक महिलाओं के साथ बलात्कार किया था। बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ खूनी युद्ध के बाद 1971 में स्वतंत्रता पाई थी।</p><br><p>बांग्लादेश ने राहत शिविरों में रह रहे तीन लाख से अधिक फंसे हुए पाकिस्तानियों को वापस भेजने और 1970 के भोला चक्रवात के पीड़ितों को भेजी गई विदेशी सहायता राशि के हस्तांतरण सहित अन्य मुद्दे भी उठाए। बांग्लादेश ने पाकिस्तान से मांगे गए अपने वित्तीय दावे के हिस्से के रूप में 4.32 बिलियन डॉलर के लंबित वित्तीय दावों को भी उठाया। इसमें अविभाजित पाकिस्तान की 1971 से पहले की संपत्तियों में से उसका हिस्सा शामिल है, जिसमें सहायता राशि, भविष्य निधि और बचत साधन शामिल हैं।</p><br><p>बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीम उद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान ने 1970 के भोला चक्रवात के बाद बांग्लादेश को विदेशी सहायता में 200 मिलियन डॉलर का अपना हिस्सा आवंटित नहीं किया।</p><br><p>बांग्लादेश और पाकिस्तान ने गुरुवार को कई सालों बाद द्विपक्षीय बैठक की। बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीम उद्दीन और पाकिस्तान के समकक्ष आमना बलूच ने एफओसी में अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। जशीम उद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार 27-28 अप्रैल को बांग्लादेश की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सीधी उड़ानें जल्द ही शुरू की जाएंगी। अम्मा बलूच ने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन से भी अलग-अलग मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका के हमलों के बीच यमन ने सऊदी और यूएई को धमकाया</title>
<link>https://pratinidhi.in/yemen-houthi-rebels-warn-saudi-arabia-and-uae-amid-us-strikes</link>
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<description><![CDATA[ यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिका के हमलों के बीच सऊदी अरब और यूएई को चेतावनी दी है। हूती आंदोलन ने कहा कि वे सऊदी अरब और यूएई द्वारा संभावित सैन्य हस्तक्षेप पर नजर रख रहे हैं। हूतियों का मानना है कि सऊदी अरब और यूएई यमन में हस्तक्षेप कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हूतियों का कहना है कि वे गाजा में मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं और गाजा में युद्ध को रोकना ही इस संघर्ष को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:46:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यमन, हूती, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिका के हमलों के बीच सऊदी अरब और यूएई को कड़ी चेतावनी दी है। हूती आंदोलन, जिसे अंसारअल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, ने कहा है कि वह सऊदी अरब और यूएई द्वारा संभावित सैन्य हस्तक्षेप पर नजर रख रहा है। हूतियों का मानना है कि सऊदी अरब और यूएई यमन में दखल दे सकते हैं, इसलिए उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।<br><br>एक दशक पहले, सऊदी अरब और यूएई ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को हूतियों द्वारा राजधानी से बेदखल किए जाने के बाद उनके खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद, हूतियों ने लाल सागर में इजरायल और अमेरिकी जहाजों पर हमले किए, जिसके जवाब में अमेरिका ने यमन पर बमबारी की। हालांकि, सऊदी अरब और यूएई ने इस घटनाक्रम से दूरी बनाए रखी है, लेकिन हूतियों को डर है कि वे यमन में सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।<br><br>वर्तमान में, हूतियों का यमन के एक तिहाई हिस्से और 80 प्रतिशत आबादी पर नियंत्रण है। हूतियों की सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल राजधानी सना में स्थित है, जबकि सरकार अदन शहर से काम करती है। यमनी सरकार का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद करती है, जिसमें यूएई समर्थित अलगाववादी दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद सहित कई पार्टियां शामिल हैं।<br><br>एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने बताया कि उनके पास इस मामले पर कोई जानकारी नहीं है। अमेरिका ने दावा किया है कि हूतियों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन हूतियों ने अपने नेताओं के मारे जाने या क्षमताओं को नुकसान पहुंचने की खबरों का खंडन किया है। हूतियों के एक सूत्र ने कहा कि अमेरिकी हमलों से उनकी गतिविधियों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।<br><br>हूतियों का कहना है कि वे अल्लाह के आदेश पर लड़ रहे हैं और गाजा में मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए इसे एक पवित्र कार्य मानते हैं। उनके अनुसार, गाजा में जो हो रहा है, उस पर चुप रहना उन्हें मंजूर नहीं है, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े। हूतियों का मानना है कि गाजा में युद्ध को रोकना ही इस संघर्ष को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कांगो नदी में नाव दुर्घटना: 148 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ कांगो में एक नाव दुर्घटना में 148 लोगों की मौत हो गई। नाव में आग लगने के बाद वह कांगो नदी में पलट गई। नाव में लगभग 500 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अधिकारियों का अनुमान है कि अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं। लगभग 100 बचे लोगों को बचाया गया है और उन्हें स्थानीय टाउन हॉल में आश्रय दिया गया है। नदी आयुक्त ने बताया कि आग खाना बनाते समय लगी थी, और तैरने में असमर्थ होने के कारण कई लोगों की जान चली गई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:46:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कांगो, नाव दुर्घटना, कांगो नदी, मृत्यु, आग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>कांगो में नाव दुर्घटना: 148 लोगों की मौत</strong><br><br>डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में एक दुखद घटना हुई, जहाँ एक लकड़ी की नाव में आग लगने के बाद वह कांगो नदी में पलट गई। इस दुर्घटना में कम से कम 148 लोगों की जान चली गई।<br><br>स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, नाव में महिलाओं और बच्चों समेत लगभग 500 यात्री सवार थे। यह घटना मंगलवार को देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में घटी। पुराने लकड़ी के जहाजों का उपयोग परिवहन के लिए किया जाता है, लेकिन अक्सर वे क्षमता से अधिक भरे होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।<br><br>अधिकारियों का अनुमान है कि अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं। लगभग 100 बचे लोगों को बचाया गया है और उन्हें स्थानीय टाउन हॉल में आश्रय दिया गया है, जबकि घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। नदी आयुक्त कॉम्पीटेंट लोयोको ने बताया कि आग एक महिला द्वारा खाना बनाते समय लगी थी, और तैरने में असमर्थ होने के कारण कई लोगों की जान चली गई।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत को चुनौती देने में पाक की नापाक कोशिश, श्रीलंका ने रोका संयुक्त सैन्य अभ्यास</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-navy-effort-to-conduct-joint-naval-exercise-with-sri-lanka-shut-down-by-indian-protests-report</link>
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<description><![CDATA[ भारत की आपत्ति के बाद श्रीलंका ने पाकिस्तान के साथ होने वाले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास को रद्द कर दिया, जो त्रिंकोमाली के पास होने वाला था। भारत यहाँ एक ऊर्जा केंद्र का विकास कर रहा है। कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस बारे में श्रीलंका को भारत की चिंताओं से अवगत कराया था। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका दौरे से ठीक पहले लिया गया, जहाँ दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समझौता किया था। पाकिस्तान का यह प्रस्ताव भारत को उकसाने के रूप में देखा गया, खासकर जब श्रीलंका ने विदेशी अनुसंधान जहाजों पर रोक लगा दी थी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:43:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, त्रिंकोमाली, नौसैनिक अभ्यास, ऊर्जा केंद्र, रक्षा सहयोग, विदेशी अनुसंधान जहाज, पीएनएस असलात, रणनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[भारत की आपत्ति के बाद श्रीलंका ने पाकिस्तान के साथ होने वाले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास को रद्द कर दिया है। यह अभ्यास त्रिंकोमाली के पास होने वाला था, जहाँ भारत एक ऊर्जा केंद्र का विकास कर रहा है। कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस बारे में श्रीलंका को भारत की चिंताओं से अवगत कराया था।<br><br>भारत की चिंता के बाद श्रीलंका ने पाकिस्तान के साथ नौसैनिक अभ्यास रद्द कर दिया। यह संयुक्त अभ्यास श्रीलंका के त्रिंकोमाली पोर्ट के पास होना था, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत यहाँ एक ऊर्जा केंद्र बनाने में मदद कर रहा है। पाकिस्तान की नौसेना द्वारा इस बंदरगाह के पास अभ्यास करने पर भारत को आपत्ति थी, जिसके बाद श्रीलंका ने अभ्यास रद्द करने का फैसला किया।<br><br>रिपोर्टों के अनुसार, यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका दौरे से ठीक पहले हुआ, जहाँ भारत और श्रीलंका ने रक्षा सहयोग समझौता किया था। इसके अतिरिक्त, भारत, श्रीलंका और यूएई के बीच त्रिंकोमाली में ऊर्जा केंद्र बनाने का समझौता हुआ, जिसमें एक पाइपलाइन भी शामिल है।<br><br>पाकिस्तान का त्रिंकोमाली पोर्ट के पास अभ्यास का प्रस्ताव भारत को उकसाने के रूप में देखा गया। यह घटना तब हुई जब श्रीलंका ने विदेशी अनुसंधान जहाजों के आगमन पर एक साल के लिए रोक लगा दी, क्योंकि चीन के निगरानी जहाजों की गतिविधियाँ बढ़ गई थीं। चीन और पाकिस्तान का एशिया में गठजोड़ पुराना है।<br><br>सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की नौसेना के त्रिंकोमाली में अभ्यास के लिए आने की सूचना मिलते ही भारत ने कोलंबो स्थित उच्चायोग के माध्यम से श्रीलंका सरकार से बात की और इसे रोकने का आग्रह किया। श्रीलंका को अभ्यास से पीछे हटने पर पाकिस्तान के विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन श्रीलंका ने अभ्यास रद्द कर दिया।<br><br>भारतीय अधिकारियों ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अभ्यास की तारीखें अभी तक ज्ञात नहीं हैं, लेकिन यह ज्ञात है कि पाकिस्तान का युद्धपोत, पीएनएस असलात, फरवरी और मार्च में कोलंबो बंदरगाह पर आया था और श्रीलंका के एक युद्धपोत के साथ संचार और रणनीति पर आधारित पैसेक्स अभ्यास किया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश: हिंदू नेता अगवा, फिर पीट&amp;पीटकर हत्या, इंतेहा हुई जुल्म की</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-hindu-leader-killed-after-abduction-and-beating-in-dinajpur</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में एक हिंदू नेता, भाबेश चंद्र रॉय, को उनके घर से अपहरण करके बेरहमी से पीटा गया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी के अनुसार, उन्हें अपहरण से पहले एक संदिग्ध फोन आया था। हमलावरों ने उन्हें नाराबारी गांव में पीटा और बाद में उनके घर के बाहर छोड़ दिया, जहाँ से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार पर हिंसा रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:43:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, हिंदू नेता, हत्या, अपहरण, दिनाजपुर, यूनुस राज, हिंदू समुदाय, हिंसा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[बांग्लादेश में एक हिंदू नेता की निर्मम हत्या से सनसनी फैल गई है। दिनाजपुर जिले में भाबेश चंद्र रॉय नामक एक प्रमुख हिंदू नेता को उनके घर से अपहरण कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया। पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है।
<br><br>
खबरों के अनुसार, भाबेश चंद्र रॉय को शाम 4:30 बजे एक फोन आया था, जिसके बाद अपराधियों ने उनके घर पर धावा बोला और उन्हें अगवा कर लिया। उन्हें नाराबारी गांव ले जाया गया, जहाँ उनके साथ क्रूरता से मारपीट की गई। बाद में, हमलावर उन्हें गंभीर हालत में उनके घर के बाहर छोड़ गए, जहाँ से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
<br><br>
इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। मानवाधिकार संगठनों ने यूनुस सरकार पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>खालिस्तानी आतंकी हरप्रीत सिंह: अमेरिका ने खोली ISI की पोल</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-fbi-arrested-isi-linked-khalistani-terrorist-harpreet-singh</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी एजेंसी FBI ने भारत में आतंकी हमले में वांछित खालिस्तानी आतंकवादी हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है। हरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और खालिस्तानी आतंकवादियों के बीच संबंध का खुलासा हुआ है। FBI ने बताया कि हरप्रीत सिंह को सैक्रामेंटो में गिरफ्तार किया गया और वह दो अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों से जुड़ा था। उस पर ISI और बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ सहयोग करने का संदेह है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने सवाल उठाया है कि क्या हरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका अन्य खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 19:54:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>खालिस्तानी, हरप्रीत सिंह, ISI, FBI, आतंकवादी, अमेरिका, भारत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिकी एजेंसी FBI ने भारत में आतंकी हमले में वांछित खालिस्तानी आतंकवादी हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। हरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी से अमेरिका में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और खालिस्तानी आतंकवादियों के बीच संबंध का भी खुलासा हुआ है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से हरप्रीत सिंह की तलाश कर रही थीं।<br><br>FBI ने बताया कि हरप्रीत सिंह को सैक्रामेंटो में गिरफ्तार किया गया। भारतीय दूतावास के एजेंटों ने FBI को सूचना दी थी कि हरप्रीत सिंह पंजाब में कई आतंकी हमलों के सिलसिले में वांछित है। FBI ने यह भी कहा कि हरप्रीत सिंह दो अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों से जुड़ा हुआ था और अवैध रूप से अमेरिका में घुसा था। उस पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के साथ सहयोग करने का संदेह है।<br><br>हरप्रीत सिंह लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से छिप रहा था, लेकिन अब FBI ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। FBI ने हरप्रीत की गिरफ्तारी को वैश्विक सुरक्षा के खतरे से निपटने में महत्वपूर्ण बताया है। हरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी को अमेरिका की नीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने सवाल उठाया है कि क्या हरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका अन्य खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगा?]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;हम चीन से बात कर रहे हैं...&amp;apos;, अमेरिका और ड्रैगन कै टैरिफ वॉर के बीच क्या है ट्रंप का अगला प्लान?</title>
<link>https://pratinidhi.in/america-president-donald-trump-says-us-talking-to-china-on-tariffs</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि वे चीन के साथ एक बेहतर व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वे चीन के साथ एक बहुत अच्छा सौदा करने वाले हैं। ट्रंप ने पुष्टि की कि चीन पर टैरिफ को 145% तक बढ़ाने के बाद से बातचीत जारी है। इटली के प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के व्हाइट हाउस आने पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वे चीन के साथ बहुत अच्छा सौदा करने जा रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 15:44:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, चीन, ट्रंप, टैरिफ वॉर, ट्रेड वॉर, शी जिनपिंग, टैरिफ, व्यापार सौदा, अमेरिकी राष्ट्रपति, अर्थव्यवस्थाएं, निर्यात, आयात</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब अमेरिका ने चीन के प्रति अपने सख्त रवैये में बदलाव लाने का विचार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि वे चीन के साथ एक बेहतर व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे।<br><br>ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वे चीन के साथ एक बहुत अच्छा सौदा करने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है। ट्रंप को उम्मीद है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ट्रेड वॉर को खत्म करने के लिए समझौता कर सकती हैं।<br><br>ट्रंप ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि चीन ने उनसे कई बार संपर्क किया है। उन्होंने पुष्टि की कि चीन पर टैरिफ को 145% तक बढ़ाने के बाद से बातचीत जारी है। यह कदम चीन ने अमेरिका के विश्वव्यापी शुल्कों के जवाब में उठाया था।<br><br>जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सीधी बात की है, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, उन्होंने पहले कई बार चीन से बातचीत करने के संकेत दिए थे। इस बार उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि ऐसी कोई बातचीत हुई है या नहीं।<br><br>पत्रकारों के सवाल पर कि क्या शी जिनपिंग ने उनसे संपर्क किया है, ट्रंप ने जवाब दिया कि यह स्पष्ट है कि उन्होंने संपर्क किया है और वे जल्द ही इस बारे में बात करेंगे। ट्रंप प्रशासन और चीन के बीच शुल्कों को लेकर विवाद चल रहा है, जिससे वैश्विक बाजार चिंतित हैं।<br><br>इटली के प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के व्हाइट हाउस आने पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वे चीन के साथ बहुत अच्छा सौदा करने जा रहे हैं। चीन की जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका ने चीन पर 245% तक टैरिफ लगाया है, जबकि चीन ने अमेरिका पर 125% टैरिफ लगाया हुआ है। पहले अमेरिका ने चीनी निर्यात पर 145% टैरिफ लगाया था।]]> </content:encoded>
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<title>मुस्लिम सुरक्षा: बांग्लादेश का भारत को संदेश, मुर्शिदाबाद हिंसा पर चिंता</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-dhaka-asked-delhi-to-protect-minority-muslims-in-india</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश ने भारत से अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर टिप्पणी की है। बांग्लादेश ने मुर्शिदाबाद हिंसा में अपनी भूमिका से इनकार किया है और भारत से मुस्लिमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 15:44:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh, India, Minority, Muslims, Murshidabad Violence, Mohammad Yunus, Shafiqul Alam, Minority Muslim Protection</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने अल्पसंख्यक मुस्लिम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। आलम ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर भी चिंता व्यक्त की है।<br><br>ढाका में, मोहम्मद यूनुस के प्रशासन के तहत, बांग्लादेश अब पाकिस्तान की विचारधारा का समर्थन कर रहा है, जो भारत में अल्पसंख्यक मुसलमानों के संबंध में चिंता व्यक्त करता है। शफीकुल आलम ने भारत से आग्रह किया है कि वह अपने मुस्लिम नागरिकों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाए, साथ ही मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा में बांग्लादेश की किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया।<br><br>विदेश सेवा अकादमी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आलम ने मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा में बांग्लादेश के शामिल होने के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश सरकार हिंसा की निंदा करती है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन और संपत्ति का नुकसान हुआ। आलम ने भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने का आग्रह किया।<br><br>हाल ही में, पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ हिंसा हुई, जिसके बाद पुलिस बलों को तैनात किया गया और 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हिंसा में बांग्लादेशी चरमपंथी शामिल थे।<br><br>बांग्लादेश अब खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है और भारत को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर व्याख्यान दे रहा है। यह तब हो रहा है जब भारत ने पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर चिंता व्यक्त की थी और यूनुस सरकार से उनके अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया था।]]> </content:encoded>
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<title>भारतीय वैज्ञानिक निक्कू मधुसूदन: एलियन ग्रह पर जीवन की खोज, दुनिया भर में चर्चा!</title>
<link>https://pratinidhi.in/indian-scientist-nikku-madhusudhan-discovers-alien-planet-k2-18b</link>
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<description><![CDATA[ भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. निक्कू मधुसूदन ने पृथ्वी से 120 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ग्रह K2-18b पर जीवन के संकेत खोजे हैं। नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप का उपयोग करके, उन्होंने ग्रह के वायुमंडल में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे अणुओं का पता लगाया, जो जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि K2-18b एक हाइसीन वर्ल्ड हो सकता है, जिसमें हाइड्रोजन से भरपूर वायुमंडल और महासागर हैं। डॉ. मधुसूदन ने वाराणसी के आईआईटी-बीएचयू से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और वर्तमान में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उन्होंने &#039;हाइसीन ग्रह&#039; शब्द गढ़ा था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 15:44:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>निक्कू मधुसूदन, K2-18b, एलियन ग्रह, जीवन की खोज, एक्सोप्लैनेट, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, जेम्स वेब टेलीस्कोप, भारतीय वैज्ञानिक, अंतरिक्ष, विज्ञान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>लंदन:</strong> पृथ्वी से 120 प्रकाश वर्ष दूर एक ग्रह पर जीवन की खोज ने दुनिया को उत्साहित कर दिया है। इस खोज का नेतृत्व भारतीय मूल के कैम्ब्रिज प्रोफेसर डॉ. निक्कू मधुसूदन ने किया।<br><br>डॉ. मधुसूदन और उनकी टीम ने नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप (JWST) का उपयोग करके ग्रह K2-18b के वायुमंडल में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे अणुओं की खोज की, जो जीवन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।<br><br>बीबीसी के अनुसार, डॉ. मधुसूदन ने कहा कि यह पृथ्वी से बाहर जीवन का सबसे मजबूत सबूत है और वे अगले एक से दो वर्षों में इसकी पुष्टि कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि K2-18b एक हाइसीन वर्ल्ड हो सकता है, जिसका अर्थ है कि इसमें हाइड्रोजन से भरपूर वायुमंडल और महासागर हैं, जो जीवन के लिए अनुकूल हो सकते हैं।<br><br>K2-18b एक एक्सोप्लैनेट है जो लाल बौने तारे K2-18 की परिक्रमा करता है। यह पृथ्वी से 2.6 गुना बड़ा और 8.6 गुना भारी है। जेम्स वेब टेलीस्कोप ने इस ग्रह पर डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) के संभावित निशान का भी पता लगाया है, जो पृथ्वी पर केवल जीवित जीवों द्वारा निर्मित होता है।<br><br>डॉ. निक्कू मधुसूदन ने वाराणसी के आईआईटी-बीएचयू से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में मेसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से पीएचडी की। वे वर्तमान में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और एक्सोप्लैनेट के निर्माण और वायुमंडलीय संरचना पर शोध करते हैं। उन्होंने 2021 में 'हाइसीन ग्रह' शब्द गढ़ा था।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ट्रंप प्रशासन ऑटो सेक्टर को टैरिफ में राहत देने पर विचार कर रहा है</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-administration-considers-tariff-relief-for-auto-sector</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऑटो सेक्टर को टैरिफ से अस्थायी राहत देने पर विचार कर रहे हैं ताकि कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला समायोजित कर सकें। हालांकि स्मार्टफोन व लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद अब भी टैरिफ के अधीन रहेंगे। ट्रंप जल्द सेमीकंडक्टर पर नए टैरिफ की घोषणा करेंगे। चीन ने टैरिफ से बचने के लिए निर्यात में तेजी दिखाई वहीं शी चिनफिंग ने टैरिफ युद्ध को नुकसानदायक बताया। ट्रंप ने ऑटो निर्माताओं को मेक्सिको और अन्य स्थानों से उत्पादन स्थानांतरित करने के लिए समय देने की बात कही है। चीन से आने वाले ये उत्पाद अब भी 20% शुल्क के अधीन हैं। शी चिनफिंग ने कहा है कि टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 11:14:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>टैरिफ, ऑटो सेक्टर, डोनाल्ड ट्रंप, चीन, ट्रेड वार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऑटो सेक्टर को टैरिफ से अस्थायी राहत देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला को समायोजित कर सकें। हालांकि, स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर टैरिफ जारी रहेगा। ट्रंप जल्द ही सेमीकंडक्टर पर नए टैरिफ की घोषणा करेंगे।</p><br><p>चीन ने टैरिफ से बचने के लिए निर्यात में तेजी दिखाई है, जबकि शी चिनफिंग ने टैरिफ युद्ध को नुकसानदायक बताया है। ट्रंप ने ऑटो निर्माताओं को मेक्सिको और अन्य स्थानों से उत्पादन स्थानांतरित करने के लिए समय देने की बात कही है।</p><br><p>स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को टैरिफ से राहत नहीं मिलेगी। ट्रंप ने कहा है कि व्यापार के मामले में कोई भी देश शुल्क से नहीं बच पाएगा। चीन से आने वाले ये उत्पाद अब भी 20% शुल्क के अधीन हैं।</p><br><p>शी चिनफिंग ने कहा है कि टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। उन्होंने अमेरिका और चीन दोनों को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करने की बात कही। चीन ने अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए निर्यात बढ़ाया है।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>शेख हसीना और उनकी बहन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-court-issues-arrest-warrant-against-sheikh-hasina</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना सहित 51 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत ने जमीन आवंटन मामले में शेख रेहाना के बच्चों और ब्रिटेन की सांसद ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक के खिलाफ भी वारंट जारी किया है। ढाका मेट्रोपालिटन के वरिष्ठ विशेष न्यायाधीश जाकिर हुसैन ने भ्रष्टाचार निरोधक आयोग द्वारा पेश किए गए तीन आरोपपत्रों पर विचार के बाद यह आदेश दिया। हसीना समेत 53 आरोपित फरार थे, इसलिए अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 14 Apr 2025 09:45:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>शेख हसीना, गिरफ्तारी वारंट, बांग्लादेश, शेख रेहाना, भ्रष्टाचार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका:</strong> बांग्लादेश की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना समेत 51 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।</p><br><p>स्थानीय मीडिया के अनुसार, अदालत ने जमीन आवंटन मामले में शेख रेहाना के बच्चों रादवान मुजीब सिद्दीक बॉबी अजमीना सिद्दीक और ब्रिटेन की सांसद ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक के खिलाफ भी वारंट जारी किया है। ढाका मेट्रोपालिटन के वरिष्ठ विशेष न्यायाधीश जाकिर हुसैन ने भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) द्वारा पेश किए गए तीन अलग-अलग आरोपपत्रों पर विचार के बाद यह आदेश दिया।</p><br><p>उन पर राजनीतिक ताकत का गलत इस्तेमाल करके गैरकानूनी ढंग से जमीन हथियाने का आरोप है। न्यायाधीश ने गिरफ्तारी आदेशों पर रिपोर्ट की समीक्षा के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है। बंगाली अखबार प्रोथोम अलो ने अदालत के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि एसीसी ने हाल ही में प्लाट आवंटन में भ्रष्टाचार के तीन अलग-अलग मामलों में 53 लोगों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किए हैं।</p><br><p>अखबार के अनुसार, हसीना समेत सभी 53 आरोपी फरार थे, इसलिए अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इसी अदालत ने 10 अप्रैल को राजुक प्लाट आवंटन से जुड़े एक अलग भ्रष्टाचार मामले में हसीना, उनकी बेटी साइमा वाजेद और 17 अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।</p><br><p>साइमा नवंबर 2023 से नई दिल्ली स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रीय निदेशक के तौर पर काम कर रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पर पूर्वाचल न्यू टाउन परियोजना के तहत जमीन आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों पर कुल छह मामले दर्ज हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>राफेल डील: भारत की सैन्य शक्ति से पाकिस्तान में खलबली</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-experts-worried-about-india-rafale-deal-indian-navy-strategy</link>
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<description><![CDATA[ भारत द्वारा फ्रांस से 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा के बाद पाकिस्तानी विशेषज्ञ चिंतित हैं। इस सौदे से भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी और हिंद महासागर में भारत की स्थिति मजबूत होगी। पाकिस्तानी विशेषज्ञ कमर चीमा ने कहा कि पाकिस्तान एक-एक अरब डॉलर के कर्ज के लिए आईएमएफ के दरवाजे पर चक्कर काटता रहता है, जबकि भारत 7 अरब डॉलर में 26 राफेल फाइटर जेट खरीद रहा है। राफेल मरीन विमान वाहक पोतों से संचालित हो सकता है और यह भारत को समुद्र के बीच से हवाई हमले करने की क्षमता प्रदान करेगा। इससे पाकिस्तानी विशेषज्ञों में डर है, क्योंकि भारत की नौसेना अब ट्रेड प्रोटेक्टर फोर्स बन चुकी है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 14 Apr 2025 09:42:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Rafale, India, Pakistan, Indian Navy, China, Qamar Cheema, Military, Fighter Jets, Indian Ocean, Trade Route</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> समुद्र शांत दिखने के बावजूद, इसके नीचे भू-राजनीतिक तूफान चलते रहते हैं। हिंद महासागर, जहाँ भारत का 90% से अधिक व्यापार होता है, चीन की निगरानी और भारत की सक्रियता का केंद्र बन गया है। भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जो न केवल नौसेना की शक्ति बढ़ाएगा, बल्कि चीन की समुद्री आक्रामकता का भी मुकाबला करेगा। <br><br>फ्रांस से भारतीय नौसेना को मिलने वाले 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स, भारतीय नौसेना की शक्ति को दोगुना करेंगे और हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति को अजेय बना देंगे। यही कारण है कि जब से भारत ने फ्रांसीसी राफेल खरीदने की घोषणा की है, पाकिस्तानी विशेषज्ञ चिंतित हैं।<br><br>पाकिस्तान के भू-राजनीतिक विशेषज्ञ कमर चीमा ने कहा कि पाकिस्तान एक-एक अरब डॉलर के ऋण के लिए आईएमएफ के दरवाजे पर चक्कर लगाता रहता है, जबकि भारत फ्रांस से 7 अरब डॉलर में 26 राफेल फाइटर जेट खरीद रहा है। राफेल मरीन एक फ्रांसीसी विमान है जो विमान वाहक पोत से संचालित होता है और तेज, घातक और बहु-भूमिका क्षमताओं से लैस है। यही विमान फ्रांसीसी नौसेना के चार्ल्स डी गॉल विमान वाहक पोत से उड़ान भरता है, और अब भारत के आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य से भी उड़ान भरेगा।<br><br>कमर चीमा ने कहा कि राफेल सौदे के माध्यम से भारत अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। इसका उद्देश्य हिंद महासागर में चीन की उपस्थिति का मुकाबला करना है। चीन जिस तरह से भारत को घेर रहा है, उसे देखते हुए भारत अपनी नौसेना को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब 3.5 फ्रंट वार की बात हो रही है: चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और मालदीव। इसलिए भारत को अपनी वायु सेना के साथ-साथ अपनी नौसेना को भी मजबूत करने की जरूरत है। भारत को डर है कि चीन भारत की जमीन पर हमला नहीं करेगा, बल्कि उनके व्यापार मार्गों पर हमला कर सकता है। इसलिए भारत तैयारी कर रहा है।<br><br>भारत के लगभग 95% व्यापारिक लेनदेन समुद्र के माध्यम से होते हैं, जिसमें हिंद महासागर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिकांश व्यापार इंडो-पैसिफिक समुद्री मार्ग से होता है। यदि इस समुद्री मार्ग पर चीन का प्रभुत्व बढ़ता है, तो भारत की आर्थिक, रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसलिए, भारतीय नौसेना अब सिर्फ एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि एक व्यापार रक्षक बल बन गई है। राफेल मरीन जैसे उच्च-अंत जेट उस सुरक्षा कवच को और मजबूत कर रहे हैं। आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य जैसे विमान वाहक पोत, राफेल मरीन के साथ मिलकर तैरते हवाई अड्डों में बदल जाते हैं। इसका मतलब है कि भारत बिना किसी बेस पर निर्भर हुए समुद्र के बीच से किसी भी क्षेत्र में हवाई हमले कर सकता है। यही कारण है कि पाकिस्तानी विशेषज्ञों के मन में राफेल सौदे को लेकर डर बैठ गया है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>ट्रंप पूरी तरह से &amp;apos;कमांडर इन चीफ&amp;apos; के तौर पर सेवाएं देने के लिए फिट</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-fully-fit-to-serve-as-commander-in-chief-us-president-doctor-update</link>
<guid>https://pratinidhi.in/trump-fully-fit-to-serve-as-commander-in-chief-us-president-doctor-update</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डॉक्टर ने घोषणा की है कि ट्रंप &#039;कमांडर इन चीफ&#039; के रूप में सेवाएं देने के लिए पूरी तरह से स्वस्थ हैं। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट जारी की, जिसमें उनकी सक्रिय जीवनशैली और अच्छे स्वास्थ्य को दर्शाया गया है। 78 वर्षीय ट्रंप, जो 14 जून को 79 वर्ष के हो जाएंगे, 2020 के बाद से 20 पाउंड वजन कम कर चुके हैं। मेडिकल रिपोर्ट में मोतियाबिंद की सर्जरी और colonoscopy का भी उल्लेख है, जिसमें benign polyp और diverticulosis नामक स्थिति पाई गई. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 14 Apr 2025 09:37:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, US President, Medical Report, Commander in Chief, Health</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> के डॉक्टर ने कहा है कि वह <strong>'कमांडर इन चीफ'</strong> के रूप में सेवाएं देने के लिए पूरी तरह से स्वस्थ हैं। <br><br>व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को हुए ट्रंप के मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट जारी की है। ट्रंप 78 वर्ष के हैं और उनके डॉक्टर कैप्टन सीन बारबाबेला ने कहा कि राष्ट्रपति की सक्रिय जीवनशैली उनके शारीरिक रूप से स्वस्थ होने में सबसे बड़ा योगदान है। वह 14 जून को 79 वर्ष के हो जाएंगे।<br><br>रविवार को जारी एक रिपोर्ट में, अमेरिकी राष्ट्रपति के डॉक्टर ने कहा कि ट्रंप कमांडर-इन-चीफ और राष्ट्राध्यक्ष के कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए पूरी तरह से स्वस्थ हैं। व्हाइट हाउस ने ट्रंप की शारीरिक जांच के नतीजे जारी किए हैं। यूएस राष्ट्रपति की यह जांच शुक्रवार को हुई थी। डॉक्टर का कहना है कि ट्रंप कमांडर इन चीफ के तौर पर काम करने के लिए पूरी तरह से फिट हैं। 2020 के बाद से उनका वजन 20 पाउंड कम हुआ है और अब 224 पाउंड हो गया है।<br><br>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप की दोनों आंखों में मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी, हालांकि तारीख नहीं दी गई है। उन्होंने जुलाई 2024 में colonoscopy कराई थी, जिसमें एक benign polyp और diverticulosis नामक स्थिति पाई गई, जो उम्र के साथ आंत की दीवारों के कमजोर होने से होती है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>गाजा युद्ध पर सैनिकों का विद्रोह: IDF ने 1000 सैनिकों को किया बर्खास्त</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-army-dismisses-air-force-reservists-over-gaza-war-protest-letter-hindi</link>
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<description><![CDATA[ इजरायली सेना ने गाजा युद्ध को समाप्त करने और हमास के साथ शांति समझौते की मांग करने वाले 1000 से ज्यादा सैनिकों को बर्खास्त कर दिया है। इन सैनिकों ने एक सार्वजनिक पत्र लिखा था, जो इजरायल के सभी अखबारों में छपा था। इस पत्र को नेतन्याहू सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। तेल अवीव में, इजरायल ने 1000 से अधिक रिजर्व कर्मियों को बर्खास्त कर दिया है, क्योंकि उन्होंने गाजा युद्ध को समाप्त करने और इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए हमास के साथ समझौते की वकालत की थी। आशंका है कि हमास के कैद में बचे 59 इजरायली बंधकों में से केवल 24 ही जीवित बचे हैं। IDF चीफ ऑफ स्टाफ ने पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सभी सैनिकों को बर्खास्त करने का आदेश दिया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 12:48:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>गाजा युद्ध, इजरायल, IDF, बर्खास्त, सैनिक, नेतन्याहू</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इजरायली सेना ने गाजा युद्ध को समाप्त करने और हमास के साथ शांति समझौते की मांग करने वाले 1000 से ज्यादा सैनिकों को बर्खास्त कर दिया है। इन सैनिकों ने एक सार्वजनिक पत्र लिखा था, जो इजरायल के सभी अखबारों में छपा था। इस पत्र को नेतन्याहू सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।<br><br>तेल अवीव में, इजरायल ने 1000 से अधिक रिजर्व कर्मियों को बर्खास्त कर दिया है, क्योंकि उन्होंने गाजा युद्ध को समाप्त करने और इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए हमास के साथ समझौते की वकालत की थी। इन सैनिकों ने गाजा युद्ध में हमास के साथ समझौते की मांग को लेकर एक पत्र प्रकाशित किया था। लगभग 1,000 सैनिकों और सैन्य अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित यह पत्र 10 अप्रैल को इजराइली समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था।<br><br>इस पत्र में कहा गया था कि गाजा युद्ध इजरायल के सुरक्षा हितों की रक्षा नहीं कर रहा है, बल्कि राजनेताओं के राजनीतिक एजेंडे की रक्षा कर रहा है। हस्ताक्षरकर्ताओं में पायलट और पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। उन्होंने कहा कि संघर्ष जारी रखने से बंधकों, सैनिकों और नागरिकों की भलाई खतरे में पड़ गई है।<br><br>उन्होंने सरकार से हमास के साथ बातचीत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया और बंधकों की स्थिति पर प्रकाश डाला। आशंका है कि हमास के कैद में बचे 59 इजरायली बंधकों में से केवल 24 ही जीवित बचे हैं। इस कारण इजरायल में बंधकों के परिवार वाले सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।<br><br>IDF चीफ ऑफ स्टाफ ने पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सभी सैनिकों को बर्खास्त करने का आदेश दिया। सेना ने कहा कि सेवारत कर्मियों द्वारा सेना के मिशन पर सवाल उठाना अस्वीकार्य है। सेना ने स्पष्ट किया कि हस्ताक्षरकर्ताओं में से केवल 60 सक्रिय सैनिक थे, और बाकी सेवानिवृत्त थे। पत्र के प्रकाशन से पहले IDF के साथ चर्चा के बाद लगभग 40 सैनिकों ने अपने हस्ताक्षर वापस ले लिए।<br><br>यह कार्रवाई एलन गुर की बर्खास्तगी के बाद की गई है, जिन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था कि इजरायल राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। गुर का बयान उस दिन आया जब इजरायल ने हमास के साथ युद्धविराम समझौते को छोड़ दिया था। सैन्य अभियान ने सैनिकों के बीच विरोध और भ्रम को जन्म दिया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चीन में अलर्ट: 50 किलो से कम वजन वाले लोगों को घर से बाहर न निकलने की सलाह!</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-issues-alert-citizens-advised-to-stay-indoors-due-to-typhoon-like-winds</link>
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<description><![CDATA[ चीन ने उत्तरी इलाकों में तेज हवाओं के चलते नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी है। बीजिंग में खेल आयोजन रद्द, पार्क बंद और ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। सरकार ने कहा है कि हवा की गति इतनी तेज है कि कम वजन वाले व्यक्ति को उड़ा सकती है। बीजिंग, तियानजिन और हेबई में 150 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की आशंका है। चीन ने एक दशक में पहली बार तूफानों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। शनिवार को बीजिंग में तापमान में 13 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 12:48:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चीन, तूफान, मंगोलिया, बीजिंग, हवा, मौसम, सलाह, ट्रेन, उड़ान, तापमान, रिकॉर्ड, बारिश, बर्फबारी, अलर्ट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[चीन के उत्तरी इलाकों में तेज हवाओं के चलते नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। बीजिंग में खेल आयोजन रद्द, पार्क बंद और ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की चेतावनी दी गई है।<br><br>तेज हवाओं के कारण उत्तरी चीन के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। खुले में होने वाले कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं। सरकार ने कहा है कि हवा की गति इतनी तेज है कि कम वजन वाले व्यक्ति को उड़ा सकती है।<br><br>बीजिंग में लॉकडाउन जैसे हालात हैं। 22 मिलियन निवासियों को गैर-जरूरी यात्रा के खिलाफ चेतावनी दी गई है और कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। मौसम एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, 150 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलेंगी। मंहोलिया से ठंडी हवाओं का झोंका चीन के कई प्रांतों में असर दिखा सकता है।<br><br>चीनी मीडिया के अनुसार, 50 किलो से कम वजन वाले लोग हवा में उड़ सकते हैं। बीजिंग, तियानजिन और हेबई में 150 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की आशंका है। चीन ने एक दशक में पहली बार तूफानों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।<br><br>शनिवार को बीजिंग में तापमान में 13 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। हवा की गति 1951 के अप्रैल के रिकॉर्ड को टक्कर दे सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की घटनाएं और भी चरम हो गई हैं।<br><br>पूर्वोत्तर चीन में भारी बर्फबारी और दक्षिणी चीन में ओलावृष्टि की आशंका है। बीजिंग में हाफ-मैराथन को स्थगित कर दिया गया है। राजधानी से आने-जाने वाली कई रेल और फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं। शहर में पेड़ों को मजबूत करने के लिए उनकी छंटाई की गई है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ओमान में अमेरिका&amp;ईरान की परमाणु वार्ता का मार्ग प्रशस्त</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-iran-nuclear-talks-oman-mediation-prospects</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता फिर से शुरू होने जा रही है, जिसकी मेजबानी ओमान करेगा। अभी तक कोई समय-सीमा तय नहीं हुई है, लेकिन इस वार्ता को मध्य पूर्व में शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मस्कट में होने वाली इस बैठक में, तेहरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होगी। हालांकि तत्काल समझौते की उम्मीद कम है, पर यह वार्ता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर हवाई हमले की धमकी दी है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम भंडार को बढ़ाने की बात कही है। अमेरिका, ईरान से बातचीत के लिए ओमान पर निर्भर रहा है, और आईएईए के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 12:48:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>US-Iran relations, Nuclear program, Oman, Middle East peace, Donald Trump, Uranium enrichment</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका और ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत करने के लिए सहमत हो गए हैं, और इस बार यह वार्ता मध्य पूर्व के देश ओमान में होगी। हालांकि इस बैठक की कोई निश्चित तिथि अभी तक घोषित नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.<br><br>ओमान की राजधानी मस्कट एक बार फिर पश्चिम एशिया की भू-राजनीति से जुड़े कुछ बड़े मुद्दों पर चर्चा का केंद्र बनेगी। मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच तेहरान के तेजी से बढ़ रहे परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत होगी। हालांकि तत्काल किसी समझौते की उम्मीद नहीं है, लेकिन दोनों देशों के लिए यह वार्ता महत्वपूर्ण है।<br><br>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी ईरान को धमकी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हवाई हमले करेंगे। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने भी कहा है कि वे अपने यूरेनियम भंडार को बढ़ाकर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।<br><br>अमेरिका वर्षों से ईरान के साथ बातचीत के लिए ओमान पर निर्भर रहा है, जिसमें बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई गुप्त वार्ता भी शामिल है, जिसके कारण 2015 में ईरान ने विश्व शक्तियों के साथ परमाणु समझौता किया था। इससे पहले ईरान ने स्विट्जरलैंड में भी अमेरिका के साथ वार्ता की थी।<br><br>रिपोर्टों के अनुसार, 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम, परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम से थोड़ा ही दूर है। आईएईए की नवंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 182.3 किलोग्राम यूरेनियम है, जबकि एजेंसी ने अगस्त में कहा था कि तेहरान ने 164.7 किलोग्राम यूरेनियम का उत्पादन किया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूक्रेन शांति वार्ता: पुतिन से मिले ट्रंप के दूत, क्या निकलेगा हल?</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-envoy-steve-witkoff-meets-vladimir-putin-for-ukraine-peace-talks-detailed-analysis</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए मुलाकात की। क्रेमलिन के अनुसार, इस बैठक में ट्रंप और पुतिन के बीच सीधी बातचीत की संभावनाओं पर विचार हुआ, लेकिन क्रेमलिन को तत्काल किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं है। विटकॉफ ने पुतिन के निवेश दूत किरिल दिमित्रिएव के साथ भी चर्चा की। यूक्रेन में शांति की उम्मीदें अभी भी कम हैं, क्योंकि युद्ध को रोकने के लिए रखी जा रही शर्तों पर दोनों देशों में सहमति नहीं बन पाई है। पुतिन ने कहा है कि वह शांति के लिए तैयार हैं, लेकिन सभी मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 12:35:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>स्टीव विटकॉफ, व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन, शांति समझौता, डोनाल्ड ट्रंप, रूस, यूक्रेन युद्ध, शांति वार्ता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मॉस्को:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। यह बैठक सेंट पीटर्सबर्ग में हुई, जहाँ उन्होंने यूक्रेन में शांति स्थापित करने पर चर्चा की। क्रेमलिन के अनुसार, इस मुलाकात में भविष्य में ट्रंप और पुतिन के बीच सीधी बातचीत की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।<br><br>हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस बैठक से तत्काल किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दूत की यह यात्रा ऐतिहासिक नहीं होगी।<br><br>विटकॉफ ने पुतिन के निवेश दूत किरिल दिमित्रिएव के साथ भी चर्चा की, जिन्होंने इस मीटिंग को सकारात्मक बताया। यूक्रेन में शांति की उम्मीदें अभी भी कम हैं, क्योंकि युद्ध को रोकने के लिए रखी जा रही शर्तों पर दोनों देशों में सहमति नहीं बन पाई है। रूस की शर्तें हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल न हो, अपनी सेना कम करे, और मॉस्को को कब्जे वाले चार यूक्रेनी क्षेत्र सौंपे।<br><br>डोनाल्ड ट्रंप ने शांति वार्ता में हो रही देरी पर निराशा व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि रूस को आगे बढ़ना होगा, क्योंकि इस युद्ध में हर हफ्ते हजारों लोग मर रहे हैं। ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की धमकी भी दी है। वहीं, यूक्रेनी अधिकारियों ने रूस पर बिजली संयंत्रों पर पहले हुए युद्धविराम समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है।<br><br>पुतिन ने कहा है कि वह शांति के लिए तैयार हैं, लेकिन सभी मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिए। उनका मानना है कि नाटो का विस्तार और यूक्रेनी क्षेत्रों पर रूस का प्रभुत्व युद्ध का कारण है। यूक्रेन ने रूस की कई शर्तों को अस्वीकार्य बताते हुए मानने से इनकार कर दिया है, जिससे युद्धविराम की कोशिशें बाधित हो रही हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>महमूद खलील: फलिस्तीन समर्थन पर अमेरिका से डिपोर्ट</title>
<link>https://pratinidhi.in/mahmoud-khalil-deported-from-america-for-supporting-palestine</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में फलिस्तीन का समर्थन करने के कारण महमूद खलील की गिरफ्तारी के बाद विवाद हुआ, जिसके बाद अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने उन्हें डिपोर्ट करने का फैसला सुनाया। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खलील को डिपोर्ट करने के लिए 1952 के इमिग्रेशन और राष्ट्रीयता अधिनियम का हवाला दिया। खलील ने अदालत में कहा कि उचित प्रक्रिया अधिकार और मौलिक निष्पक्षता से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। वह सीरिया में एक फलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में पैदा हुए थे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 12:34:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>महमूद खलील, फलिस्तीन, अमेरिका, डिपोर्ट, छात्र विरोध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> अमेरिका में फलिस्तीन का समर्थन करने पर एक्टिविस्ट महमूद खलील की गिरफ्तारी के बाद विवाद हो गया। न्यूयॉर्क में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने उनकी गिरफ्तारी का विरोध किया। अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने फैसला सुनाया कि फलिस्तीनी समर्थक महमूद खलील को डिपोर्ट किया जाना चाहिए।<br><br>जज जेमी कॉमन्स ने लुइसियाना के लासेल इमिग्रेशन कोर्ट में यह फैसला सुनाया। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खलील को डिपोर्ट करने के लिए 1952 के इमिग्रेशन और राष्ट्रीयता अधिनियम का हवाला दिया। रुबियो ने कहा कि खलील की गतिविधियां अमेरिकी विदेश नीति के हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।<br><br>महमूद खलील सीरिया में एक फलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में पैदा हुए थे और अल्जीरिया की नागरिकता रखते हैं। वह पिछले साल ही अमेरिका के वैध नागरिक बने थे। खलील ने अदालत में कहा कि उचित प्रक्रिया अधिकार और मौलिक निष्पक्षता से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>रूस की घातक परमाणु मिसाइलें: दुनिया को डराने वाले हथियार</title>
<link>https://pratinidhi.in/russia-nuclear-missiles-list-2025-putin-weapons</link>
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<description><![CDATA[ रूस के पास परमाणु मिसाइलों का एक बड़ा जखीरा है, जिसमें अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। ये मिसाइलें रूस को रणनीतिक परमाणु हमले और अंतरमहाद्वीपीय हमले करने की क्षमता प्रदान करती हैं। यूक्रेन युद्ध के बीच, यूरोप को रूस के हमले का डर है। आशंका है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन को जीतने के बाद यूरोप पर परमाणु हमला कर सकते हैं। इसलिए, रूस के पास मौजूद परमाणु मिसाइलों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। रूस की कुछ प्रमुख मिसाइलों में RS-28 सरमत, R-36 शैतान, 3M-14 कैलिबर क्रूज मिसाइल, RSM-56 बुलावा, Kh-47M2 किंजल, RS-24 यार्स, RS-26 रुबेज, RT-2PM2 टोपोल-एम, RT-2PM टोपोल, Kh-55 मिसाइल, 9K720 इस्कंदर मिसाइल और अवनगार्ड शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 10 Apr 2025 17:24:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, परमाणु मिसाइल, हथियार, सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[रूस के पास परमाणु मिसाइलों का एक बड़ा संग्रह है, जिसमें अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। ये मिसाइलें रूस को रणनीतिक परमाणु हमले और अंतरमहाद्वीपीय हमले करने की क्षमता प्रदान करती हैं।
<br><br>
यूक्रेन युद्ध के बीच, यूरोप को रूस के हमले का डर है। आशंका है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन को जीतने के बाद यूरोप पर परमाणु हमला कर सकते हैं। इसलिए, रूस के पास मौजूद परमाणु मिसाइलों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है।
<br><br>
<strong>RS-28 सरमत:</strong> यह एक तरल-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे रूस विकसित कर रहा है। यह दुनिया की सबसे भारी मिसाइल है, जिसकी रेंज 18,000 किलोमीटर से अधिक है।
<br><br>
<strong>R-36 शैतान:</strong> यह एक अंतरमहाद्वीपीय, साइलो-आधारित, तरल प्रणोदक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे सोवियत संघ और अब रूसी संघ द्वारा विकसित किया गया है।
<br><br>
<strong>3M-14 कैलिबर क्रूज मिसाइल:</strong> यह एक रूसी भूमि हमला क्रूज मिसाइल (LACM) है, जिसकी अनुमानित सीमा 1,500 से 2,500 किमी है।
<br><br>
<strong>RSM-56 बुलावा:</strong> यह एक अंतरमहाद्वीपीय, पनडुब्बी से प्रक्षेपित, ठोस प्रणोदक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 8,300 किलोमीटर से अधिक है।
<br><br>
<strong>Kh-47M2 किंजल:</strong> यह एक परमाणु-सक्षम, रूसी वायु-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल है।
<br><br>
<strong>RS-24 यार्स:</strong> यह एक तीन-चरणीय ठोस ईंधन मिसाइल है, जो 10,000 किलोमीटर दूर तक परमाणु हमला कर सकती है।
<br><br>
<strong>RS-26 रुबेज:</strong> यह एक रूसी ठोस ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो वर्तमान में विकास के चरण में है।
<br><br>
<strong>RT-2PM2 टोपोल-एम:</strong> यह एक रूसी ठोस ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 11,000 किमी है।
<br><br>
<strong>RT-2PM टोपोल:</strong> यह एक अंतरमहाद्वीपीय-रेंज, रोड-मोबाइल, ठोस प्रणोदक बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है, जिसकी रेंज 11,000 किलोमीटर से अधिक है।
<br><br>
<strong>Kh-55 मिसाइल:</strong> यह सोवियत संघ द्वारा 1971 में विकसित एक हवाई-लॉन्च क्रूज मिसाइल है।
<br><br>
<strong>9K720 इस्कंदर मिसाइल:</strong> यह एक रोड-मोबाइल शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है, जिसकी रेंज 500 किलोमीटर तक है।
<br><br>
<strong>अवनगार्ड:</strong> यह रूसी संघ द्वारा विकसित एक परमाणु-सक्षम, हाइपरसोनिक बूस्ट-ग्लाइड वाहन है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप ने टैरिफ पर दी बड़ी राहत, चीन पर लगाया भारी टैक्स</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-announces-tariff-relief-imposes-heavy-taxes-on-china</link>
<guid>https://pratinidhi.in/trump-announces-tariff-relief-imposes-heavy-taxes-on-china</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाजार में मंदी के चलते नए टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया है, लेकिन चीन पर 125% टैरिफ लगा दिया है। ट्रंप के इस फैसले का उनके देश में ही विरोध हो रहा है, एलन मस्क और बिल एकमैन ने भी टैरिफ टालने की अपील की थी। चीन ने अमेरिका पर आर्थिक दादागिरी का आरोप लगाया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि &#039;अमेरिका फर्स्ट&#039; की नीति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 10 Apr 2025 07:35:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Tariff War, Donald Trump, China, Alan Musk, Bill Ackman, US Tariff, टैरिफ, डोनाल्ड ट्रंप, चीन, एलन मस्क, बिल एकमैन, अमेरिकी टैरिफ</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने बाजार में मंदी को देखते हुए नए टैरिफ को 90 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।</p><br><p>हालांकि, दूसरी ओर, अमेरिका ने चीन के टैरिफ में वृद्धि की है और अब तक चीन पर 125% टैरिफ लगाया जा चुका है।</p><br><p>ट्रंप के इस फैसले का उनके अपने देश में भी विरोध हो रहा है। एलन मस्क और बिल एकमैन जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने भी टैरिफ को टालने की अपील की थी।</p><br><p>चीन ने अमेरिका पर टैरिफ को लेकर एकतरफा कार्रवाई करने और आर्थिक दादागिरी का आरोप लगाया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचा रही है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप ने जेलेंस्की को नाटो सदस्यता से किया इनकार, रेयर अर्थ डील पर दी चेतावनी</title>
<link>https://pratinidhi.in/ukraine-not-going-to-be-nato-member-says-donald-trump-warns-zelensky-over-rare-earth-minerals-deal</link>
<guid>https://pratinidhi.in/ukraine-not-going-to-be-nato-member-says-donald-trump-warns-zelensky-over-rare-earth-minerals-deal</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया है और राष्ट्रपति जेलेंस्की को रेयर अर्थ डील से पीछे हटने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने रूस के साथ अच्छे संबंधों की बात कही और पुतिन को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए कहा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Apr 2025 18:19:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Ukraine, Nato, Donald Trump, Volodymyr Zelensky, Rare Earth Minerals Deal, US Foreign Policy, Russia-Ukraine War</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं बनेगा। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को दुर्लभ पृथ्वी खनिज समझौते के बारे में चेतावनी दी है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेनी राष्ट्रपति ने खनिज समझौते पर फिर से बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की है।<br><br><strong>ट्रंप ने जेलेंस्की को चेतावनी दी है</strong><br><br>ट्रंप ने जेलेंस्की को चेतावनी दी है कि यदि वे दुर्लभ पृथ्वी खनिज समझौते से पीछे हटने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने इस मुद्दे को यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की जेलेंस्की की महत्वाकांक्षा से जोड़ा और इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। यह समझौता अमेरिका और यूक्रेन के बीच है, जिसके तहत अमेरिका रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को सैन्य सहायता के रूप में 35 बिलियन डॉलर देगा और बदले में यूक्रेन के दुर्लभ खनिज संसाधनों का उपयोग करेगा।<br><br>ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें लगता है कि जेलेंस्की एक समझौते से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं और यदि वे ऐसा करते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर एक समझौता किया था, लेकिन अब जेलेंस्की समझौते पर फिर से बातचीत करना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की नाटो का सदस्य बनना चाहते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा। ट्रंप ने जेलेंस्की को चेतावनी दी कि यदि वे इस समझौते पर फिर से बातचीत करना चाहते हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।<br><br>ट्रंप ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनके संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की चेतावनी दी और कहा कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें रूसी तेल पर अतिरिक्त शुल्क का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप प्रशासन का भारतीय छात्रों पर ऐक्शन, 300 वीजा रद्द</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-administration-revokes-visas-indian-students-panic</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा विदेशी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के बाद, वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों में घबराहट है। ट्रंप प्रशासन ने 300 से अधिक छात्रों के वीजा रद्द कर दिए हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह जानकारी दी, जिससे आशंका है कि और छात्रों को वापस भेजा जा सकता है। कार्रवाई उन छात्रों के खिलाफ है जो कैंपस में विरोध प्रदर्शनों में शामिल थे, खासकर फिलिस्तीन का समर्थन करने वाले। सोशल मीडिया पोस्ट के कारण भी छात्रों को कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। रूमेसा ओजतुर्क नामक एक छात्रा को भी हिरासत में लिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Apr 2025 18:16:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप प्रशासन, भारतीय छात्र, वीजा रद्द, अंतर्राष्ट्रीय छात्र, डोनाल्ड ट्रंप, मार्को रुबियो</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन</strong> ने विदेशी छात्रों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं, जिससे वहां पढ़ रहे <strong>भारतीय छात्रों में घबराहट</strong> फैल गई है।<br><br><strong>ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में 300 से अधिक छात्रों के वीजा रद्द</strong> कर दिए हैं। विदेश मंत्री <strong>मार्को रुबियो</strong> ने इस बात की जानकारी दी है, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि और भी छात्रों को वापस भेजा जा सकता है।<br><br>यह कार्रवाई उन छात्रों के खिलाफ की जा रही है जो कैंपस में विरोध प्रदर्शनों में शामिल थे, विशेष रूप से <strong>फिलिस्तीन का समर्थन</strong> करने वाले छात्र निशाने पर हैं।<br><br>आश्चर्य की बात यह है कि इस कार्रवाई में वे छात्र भी शामिल हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर कथित राष्ट्र-विरोधी पोस्ट को लाइक, शेयर या कमेंट किया था। छात्रों की सोशल मीडिया पोस्ट तक की जाँच की जा रही है।<br><br><strong>रूमेसा ओजतुर्क</strong> नामक एक शोध छात्रा को भी हिरासत में लिया गया क्योंकि उसने गाजा में इजरायली हमले के खिलाफ फिलिस्तीनियों के लिए समर्थन व्यक्त किया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>क्या इमरान खान को मिलेगा नोबेल शांति पुरस्कार?</title>
<link>https://pratinidhi.in/imran-khan-nominated-for-nobel-peace-prize-again</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है, उनके मानवाधिकार और लोकतंत्र के प्रति प्रयासों को मान्यता दी गई है। &#039;पाकिस्तान वर्ल्ड एलायंस&#039; के सदस्य ने, जो नॉर्वे के &#039;पार्टीएट सेंट्रम&#039; से जुड़े हैं, खान के नामांकन की घोषणा की है। खान, जो अगस्त 2023 से जेल में हैं, पर भ्रष्टाचार और पाकिस्तानी सेना पर हमले की साजिश रचने जैसे 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। उन्हें 2019 में भी इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। नोबेल शांति पुरस्कार, अल्फ्रेड नोबेल की इच्छा से स्थापित है और इसे &#039;दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार&#039; माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Apr 2025 18:16:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इमरान खान, नोबेल शांति पुरस्कार, पाकिस्तान, मानवाधिकार, लोकतंत्र</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। उन्हें मानवाधिकारों और लोकतंत्र के प्रति उनके समर्पण के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। फिलहाल इमरान खान अगस्त 2023 से पाकिस्तान की जेल में हैं और उन पर 100 से अधिक मुकदमे चल रहे हैं।<br><br>पाकिस्तान वर्ल्ड एलायंस के एक सदस्य, जो नॉर्वे के एक राजनीतिक दल पार्टीएट सेंट्रम से जुड़े हैं, ने 72 वर्षीय खान के नामांकन की घोषणा की। पार्टीएट सेंट्रम ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि उन्होंने नामांकन के अधिकार वाले किसी व्यक्ति के साथ मिलकर इमरान खान को नामित किया है।<br><br>यह ध्यान देने योग्य है कि इमरान खान को 2019 में भी दक्षिण एशिया में शांति को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक खान को भ्रष्टाचार और पाकिस्तानी सेना पर हमले की साजिश रचने के आरोपों के चलते जेल में रखा गया है।<br><br>नोबेल शांति पुरस्कार स्वीडिश उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के तहत स्थापित किए गए पांच नोबेल पुरस्कारों में से एक है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्रों के बीच भाईचारे, स्थायी सेनाओं के उन्मूलन और शांति सम्मेलनों के आयोजन और प्रचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेतन्याहू के करीबियों की गिरफ्तारी: कतर से अवैध संबंध का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ इजरायल पुलिस ने बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय और कतर के बीच अवैध संबंधों के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम अभी तक नहीं बताए गए हैं, लेकिन वे नेतन्याहू के करीबी माने जा रहे हैं। कतर, इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है। नेतन्याहू पर कतर से संबंधों की जांच को रोकने के लिए शिन बेट के प्रमुख को हटाने का आरोप है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Apr 2025 18:16:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, नेतन्याहू, कतर, अवैध संबंध, बेंजामिन नेतन्याहू, शिन बेट, गिरफ्तारी, भ्रष्टाचार, हमास, मध्यस्थ</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इजरायल पुलिस ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय और कतर के बीच अवैध संबंधों के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम अभी तक नहीं बताए गए हैं, लेकिन वे नेतन्याहू के करीबी माने जा रहे हैं।
<br><br>
कतर, इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है। कतर के साथ नेतन्याहू के संबंधों की जांच इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट कर रही थी। नेतन्याहू ने शिन बेट के प्रमुख रोनेन बार को विश्वास भंग होने के कारण पद से हटा दिया था।
<br><br>
आलोचकों का मानना है कि नेतन्याहू ने कतर से अपने कार्यालय के संबंधों की जांच को रोकने के लिए रोनेन बार को हटाया। वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों का कहना है कि यह प्रधानमंत्री के खिलाफ दुष्प्रचार है। नेतन्याहू सोमवार को अपने खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई में न्यायालय में पेश नहीं हुए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप ने सिग्नल एप लीक मामले में दिखाई नरमी, राष्ट्रीय सुरक्षा टीम पर जताया भरोसा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में हूती के खिलाफ हवाई हमले की योजना लीक होने के बाद किसी को नौकरी से निकालने से इनकार कर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज और पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ में विश्वास जताया। वॉल्ट्ज ने अनजाने में द अटलांटिक पत्रिका के संपादक जेफरी गोल्डबर्ग को एक सिग्नल ग्रुप में जोड़ा, जहां अधिकारी हमले की योजना बना रहे थे। ट्रंप ने वाल्ट्ज को निकालने की बातचीत से इनकार किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:27:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, सिग्नल एप, माइक वॉल्ट्ज, पीट हेगसेथ, हूती, यमन, राष्ट्रीय सुरक्षा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में हूती के खिलाफ हवाई हमले की योजना लीक होने के बाद किसी को नौकरी से निकालने से इनकार कर दिया है। एनबीसी न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में, ट्रंप ने कहा कि वह फर्जी खबरों के कारण लोगों को नहीं हटाते हैं।<br><br>ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज और पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ में अपना विश्वास व्यक्त किया। वॉल्ट्ज ने अनजाने में द अटलांटिक पत्रिका के संपादक जेफरी गोल्डबर्ग को एक सिग्नल ग्रुप में जोड़ा था, जहां अधिकारी हूती पर हमले की योजना बना रहे थे। हेगसेथ ने हमले से पहले की प्रक्रिया का विवरण दिया, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान में खलबली मच गई।<br><br>ट्रंप अपने पहले के कार्यकाल की गलतियों से बचना चाहते हैं, जब उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्लिन को जल्दी ही हटा दिया गया था। उन्होंने बाहरी दबाव के आगे झुकने का विरोध किया है। ट्रंप ने वाल्ट्ज को निकालने की बातचीत से इनकार किया और जोर देकर कहा कि अंतिम निर्णय केवल वही लेते हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेतन्याहू का हमास प्लान: गाजा छोड़ो या हथियार डालो, बंधकों का भविष्य अधर में!</title>
<link>https://pratinidhi.in/netanyahu-hamas-plan-gaza-hostages-release</link>
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<description><![CDATA[ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास को निशस्त्र करने और गाजा छोड़ने की मांग की है, साथ ही बंधकों की रिहाई के लिए दबाव जारी रखने की बात कही। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना का समर्थन किया, जिसमें फलस्तीनियों को गाजा छोड़कर जाने और अमेरिका द्वारा गाजा के विकास की बात है। हमास हर हफ्ते पांच इजरायली बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार है, लेकिन हथियार डालने को तैयार नहीं है। गाजा में इजरायली हमलों में 24 लोग मारे गए, जिससे फलस्तीनियों के लिए ईद मनाना मुश्किल हो गया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:27:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>हमास, नेतन्याहू, गाजा, बंधक, इजरायल, युद्धविराम, फलस्तीन, ट्रंप, हथियार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>यरुशलम:</strong> गाजा में युद्धविराम के प्रयासों के बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास को निशस्त्र करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हमास नेताओं को गाजा छोड़ना होगा, जिसके बाद इजरायल गाजा की सुरक्षा करेगा। नेतन्याहू ने बंधकों की रिहाई के लिए हमास पर दबाव जारी रखने की बात कही।<br><br>नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना का समर्थन किया, जिसमें फलस्तीनियों को गाजा छोड़कर जाने और अमेरिका द्वारा गाजा के विकास की बात है। हमास के नेता सामी अबू जुहरी ने नेतन्याहू के बयान को तनाव बढ़ाने वाला बताया। हमास हर हफ्ते पांच इजरायली बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार है, लेकिन हथियार डालने को तैयार नहीं है।<br><br>गाजा में इजरायली हमलों में 24 लोग मारे गए, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। खान यूनिस में एक शरणार्थी शिविर में नौ लोगों की जान गई। हमलों के बीच फलस्तीनियों के लिए ईद मनाना मुश्किल हो गया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का तीसरा कार्यकाल: संवैधानिक बाधाओं के बावजूद अमेरिकी राजनीति में खलबली</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-hints-at-third-term-bid-defying-constitution</link>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप के एक इंटरव्यू में तीसरी बार चुनाव लड़ने की इच्छा जताने से अमेरिका में खलबली मच गई है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक रोक के बावजूद भी वो चुनाव लड़ सकते हैं। 1951 में अमेरिका में 22वां संविधान संशोधन किया गया था, जिसके अनुसार कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति नहीं बन सकता। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के चार कार्यकाल के बाद यह रोक लगाई गई थी। ट्रंप के इस बयान की आलोचना भी हो रही है। स्टीव बैनन ने 2028 में ट्रंप को फिर से देखने की इच्छा व्यक्त की थी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:22:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति, तीसरा कार्यकाल, संवैधानिक संशोधन, अमेरिकी राजनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया इंटरव्यू ने अमेरिकी राजनीति में खलबली मचा दी है, जिसमें उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने संकेत दिया कि वह संवैधानिक रोक के बावजूद ऐसा कर सकते हैं।<br><br>ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को बताया कि ऐसे तरीके हैं जिनसे यह संभव है, हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बारे में सोचना अभी जल्दबाजी होगी।<br><br><strong>संवैधानिक रोक:</strong><br>अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के अनुसार, कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति नहीं बन सकता है। यह संशोधन फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के चार कार्यकाल के बाद लागू किया गया था।<br><br>ट्रंप के इस बयान की आलोचना भी हो रही है, जिसमें प्रतिनिधि डेनियल गोल्डमैन ने इसे लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास बताया है। उन्होंने रिपब्लिकन से ट्रंप की महत्वाकांक्षाओं का विरोध करने का आग्रह किया।<br><br>यह अटकलें स्टीव बैनन के एक बयान के बाद तेज हो गईं, जिसमें उन्होंने 2028 में ट्रंप को फिर से देखने की इच्छा व्यक्त की थी। संवैधानिक कानून के प्रोफेसर जेरेमी पॉल का मानना है कि ट्रंप के तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के पक्ष में कोई कानूनी आधार नहीं है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बैंकॉक इमारत हादसा: चीन के हाथ?</title>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड के बैंकॉक में 33 मंजिला इमारत ढहने के मामले में सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। उप प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने घटनास्थल का दौरा किया और एक्सपर्ट पैनल को 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। जांच में चीन समर्थित निर्माण फर्म की भूमिका भी शामिल है। डेमोक्रेट पार्टी के सिविल इंजीनियर प्रोफेसर सुचाचावी सुवानसावास ने कहा कि इमारत के ढहने में कुछ गड़बड़ है, डिजाइन या निर्माण में गलती हो सकती है। चीनी कंपनी की 19% हिस्सेदारी थी। पुलिस और बचाव दल जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:22:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बैंकॉक, भूकंप, इमारत, चीन, जांच</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[बैंकॉक में 33 मंजिला इमारत ढहने के मामले में, थाईलैंड सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। उप प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने घटनास्थल का दौरा किया और घटना की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल को 7 दिन का समय दिया है।<br><br>जांच में चीन समर्थित निर्माण फर्म की भूमिका भी शामिल है। म्यांमार में आए भूकंप के बाद बैंकॉक में यह इमारत ढह गई थी। डेमोक्रेट पार्टी के सिविल इंजीनियर प्रोफेसर सुचाचावी सुवानसावास ने कहा कि इमारत के ढहने में कुछ गड़बड़ है, डिजाइन या निर्माण में गलती हो सकती है।<br><br>ब्रिटेन के टेलीग्राफ के अनुसार, एसएओ बिल्डिंग इटैलियन-थाई डेवलपमेंट पीएलसी और चाइना रेलवे नंबर 10 (थाईलैंड) लिमिटेड के बीच का संयुक्त उद्यम था, जिसमें चीनी कंपनी की 19% हिस्सेदारी थी। पुलिस और बचाव दल जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम: समझौता करो या बमबारी सहो</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-ultimatum-to-iran-nuclear-deal-or-face-bombing</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर सहमत होना होगा, नहीं तो उसे बमबारी और आर्थिक दबाव जैसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है, लेकिन ओमान के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना को खुला रखा है। ट्रंप ने 2018 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को रद्द कर दिया था। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:22:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, ईरान, परमाणु समझौता, बमबारी, अमेरिका, अल्टीमेटम, US Iran War, मसूद पेजेशकियन, अयातुल्ला अली खामेनेई, कासिम सुलेमानी, हूती विद्रोही, इजरायल, यूरेनियम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते पर अल्टीमेटम दिया है।</strong><br><br>ट्रंप ने कहा है कि ईरान या तो अमेरिका के साथ नया परमाणु समझौता करे, अन्यथा उसे भीषण बमबारी के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐसी बमबारी होगी जो ईरान ने पहले कभी नहीं देखी होगी।<br><br>ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है, लेकिन ओमान के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना को खुला रखा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल ही में इसकी पुष्टि की है।<br><br>ट्रंप ने 2018 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को रद्द कर दिया था और ईरान पर 'अधिकतम दबाव' की रणनीति के तहत प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया था। उन्होंने अपने नए कार्यकाल के दौरान भी ईरान पर नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बनाना जारी रखा है।<br><br>मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमले कर रहा है, जबकि ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ इजरायल को निशाना बनाया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>म्यांमार में भूकंप के बाद सैन्य शासन का कहर</title>
<link>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-junta-continues-bombing-amidst-devastation</link>
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<description><![CDATA[ म्यांमार में भूकंप के बाद सैन्य शासन का कहर जारी है। जुंटा सेना हवाई हमले कर रही है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। भूकंप के कारण 1700 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 3400 से ज्यादा घायल हैं। राहत और बचाव कार्यों में बाधा आ रही है, और मलबे में दबे शवों से दुर्गंध फैल रही है। केरेन नेशनल यूनियन ने सेना पर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र ने चिकित्सा आपूर्ति की कमी पर चिंता जताई है और क्राइसिस ग्रुप ने जुंटा शासन से हवाई हमले रोकने की अपील की है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:19:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भूकंप, म्यांमार, सैन्य शासन, हवाई हमले, जुंटा सेना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[म्यांमार में भूकंप के बाद सैन्य शासन और भी क्रूर हो गया है। <strong>भूकंप से तबाह हुए क्षेत्रों में जुंटा सेना हवाई हमले कर रही है</strong>, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। मलबे में दबे शवों से दुर्गंध आने लगी है।<br><br>भूकंप के चलते 1700 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं, और 3400 से ज्यादा लोग घायल हैं। <strong>आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य ठीक से नहीं हो पा रहा है।</strong> ऐसे में सैन्य सरकार का हवाई हमला लोगों के लिए और भी परेशानी का सबब बन गया है।<br><br>केरेन नेशनल यूनियन का कहना है कि सेना नागरिक क्षेत्रों को निशाना बना रही है, जबकि लोगों को राहत की सख्त जरूरत है। उनका कहना है कि सेना को राहत कार्यों पर ध्यान देना चाहिए, न कि अपने ही लोगों पर हमला करना चाहिए।<br><br>पिछले शुक्रवार को आए भूकंप ने म्यांमार के कई शहरों में तबाही मचाई है। <strong>हवाई अड्डे, पुल और सड़कें टूट गए हैं</strong>, जिससे सहायता कर्मियों को पहुंचने में दिक्कत हो रही है। मांडले जैसे शहरों में मलबे में दबे शवों के कारण दुर्गंध फैल रही है। संयुक्त राष्ट्र ने चिकित्सा आपूर्ति की कमी पर भी चिंता जताई है। क्राइसिस ग्रुप ने कहा है कि जुंटा शासन को हवाई हमले रोकने चाहिए।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ट्रंप की पुतिन को धमकी: रूसी तेल पर टैरिफ, भारत&amp;चीन पर असर!</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-threatens-tariffs-on-russian-oil-impact-on-india-and-china</link>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन के प्रति नाराजगी जताते हुए रूसी तेल पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिससे भारत और चीन प्रभावित हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि पुतिन के जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से वे नाराज हैं और रूस यूक्रेन में नया नेतृत्व चाहता है, जिससे समझौता मुश्किल हो सकता है। समझौते के अभाव में रूस पर द्वितीयक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। ट्रंप ने पुतिन से बात करने की इच्छा जताई है, जबकि रूस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पुतिन ने यूक्रेन में नए प्रशासन का सुझाव दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया। जेलेंस्की की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। ट्रंप पहले भी वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगा चुके हैं। अब रूसी तेल पर टैरिफ लगने से भारत और चीन पर असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:17:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, रूस, टैरिफ, रूसी तेल, भारत, चीन, यूक्रेन, जेलेंस्की, युद्ध विराम समझौता, अमेरिकी राष्ट्रपति, प्रतिबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में व्लादिमीर पुतिन के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने रूस को चेतावनी दी है कि यदि यूक्रेन के साथ युद्धविराम समझौता नहीं होता है, तो वे रूसी तेल पर 25% तक का टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रंप के इस कदम से भारत और चीन जैसे देशों के हितों पर असर पड़ सकता है।<br><br>ट्रंप ने कहा कि जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, तो वे नाराज हो गए क्योंकि इससे सही दिशा में प्रगति नहीं हो रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि रूस यूक्रेन में नया नेतृत्व चाहता है, जिसका मतलब है कि समझौता होने में और देरी हो सकती है।<br><br>सीएनएन के अनुसार, ट्रंप ने यह भी धमकी दी है कि यदि समझौता नहीं होता है तो रूस पर द्वितीयक टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वे यूक्रेन में रक्तपात रोकने के लिए रूस के साथ समझौता नहीं कर पाते हैं, और उन्हें लगता है कि यह रूस की गलती के कारण है, तो वे रूस से आने वाले सभी तेल पर टैरिफ लगाएंगे।<br><br>ट्रंप ने कहा कि यदि रूस सही काम करता है तो वे पुतिन से बात करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन को पता है कि वे नाराज हैं और 25% टैरिफ का एलान कभी भी हो सकता है। ट्रंप ने इस सप्ताह पुतिन से बात करने की योजना भी बताई है। रूस ने अभी तक ट्रंप के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वह पहले ही पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को अवैध बता चुका है।<br><br>पुतिन ने सुझाव दिया था कि संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में यूक्रेन में एक नया प्रशासन स्थापित किया जाना चाहिए, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खारिज कर दिया। रूसी अधिकारी जेलेंस्की की वैधता पर सवाल उठाते रहे हैं, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है और अभी तक कोई चुनाव नहीं हुआ है। यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू है, जिसके कारण चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं।<br><br>ट्रंप ने पहले वेनेजुएला से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी 25% टैरिफ लगाया था। अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों के साथ भी ऐसा ही करने की तैयारी है। यदि ट्रंप रूसी तेल पर टैरिफ लगाते हैं, तो भारत और चीन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>म्यांमार में भूकंप का कहर: 334 परमाणु बमों जितनी ऊर्जा निकली, विशेषज्ञ ने दी और झटकों की चेतावनी</title>
<link>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-atomic-bombs-energy-expert-warns-of-more-aftershocks</link>
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<description><![CDATA[ म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई, जिससे 1,644 लोगों की जान गई। इस भूकंप ने 334 परमाणु बमों के बराबर ऊर्जा उत्पन्न की। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में और झटके आ सकते हैं। भूविज्ञानी जेस फीनिक्स ने बताया कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने के कारण यह भूकंप आया। USGS के अनुसार, यह 1912 के बाद सबसे शक्तिशाली भूकंप था, जिसके बाद 6.4 तीव्रता का एक और झटका आया। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जेम्स जैक्सन ने इसे धरती के टुकड़े के टूटने जैसा बताया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 19:16:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Myanmar, earthquake, atomic bombs, aftershocks, USGS, tectonic plates</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नेपीडा:</strong> म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। <br><br>भूकंप के झटकों से कई इमारतें जमींदोज हो गईं और सड़कों पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। इस भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने 334 परमाणु बमों के बराबर ऊर्जा उत्पन्न की। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में म्यांमार और आसपास के देशों में भूकंप के झटके महसूस किए जा सकते हैं, जिससे जान-माल का और अधिक नुकसान हो सकता है।<br><br>भूविज्ञानी जेस फीनिक्स ने बताया कि इस भूकंप में 334 परमाणु बमों जितनी ऊर्जा थी, जिसने धरती को हिलाकर रख दिया। म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण नुकसान का सही अनुमान लगाना मुश्किल है। राहत और बचाव कार्य में भी कठिनाई आ रही है। फीनिक्स का कहना है कि भूकंप के बाद कई महीनों तक झटके महसूस किए जा सकते हैं, क्योंकि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट, यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।<br><br>यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, यह 1912 के बाद म्यांमार में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप था। 7.7 तीव्रता के भूकंप के 12 मिनट बाद 6.4 तीव्रता का एक और झटका आया। इस भूकंप से 1,600 से ज्यादा लोगों की जान गई है और स्थानीय अधिकारियों को डर है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के भूकंप विज्ञानी जेम्स जैक्सन ने इसे धरती के टुकड़े के टूटने जैसा बताया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिकी छात्रों को वीजा रद्द करने का ईमेल, ट्रंप सरकार का सेल्फ&amp;डिपोर्ट का आदेश</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-f1-visa-cancelled-for-international-students-due-to-social-media-activity</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में, सैकड़ों विदेशी छात्रों को अमेरिकी विदेश विभाग से एक चौंकाने वाला ईमेल मिला, जिसमें उनके एफ-1 वीजा को रद्द करने और उन्हें स्वदेश लौटने का आदेश दिया गया। यह कार्रवाई उन छात्रों पर की जा रही है जो कॉलेज गतिविधियों में सक्रिय थे और सोशल मीडिया पर राजनीतिक पोस्ट साझा करते थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने &#039;कैच एंड रिवोक&#039; नामक एक एआई ऐप लॉन्च किया है, जो छात्रों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखता है और उन छात्रों के वीजा रद्द कर देता है जिन पर आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने का संदेह है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 19:10:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>F-1 Visa, Self-Deportation, Trump Government, US Foreign Department, International Students, Anti-National Activities, Social Media Monitoring, Catch and Revoke App, Immigration Laws, Marco Rubio</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> अमेरिका में सैकड़ों विदेशी छात्रों को उस समय झटका लगा, जब उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग से ईमेल प्राप्त हुए, जिसमें उनके एफ-1 वीजा रद्द करने और उन्हें स्वदेश लौटने के लिए कहा गया।<br><br>यह कार्रवाई उन छात्रों पर केंद्रित है जो कॉलेज गतिविधियों में सक्रिय थे और जिनकी सोशल मीडिया गतिविधियों को राष्ट्र विरोधी माना गया।<br><br>न केवल वे छात्र निशाने पर थे जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों में सीधे भाग लिया, बल्कि वे भी जो सोशल मीडिया पर राजनीतिक पोस्ट साझा करते थे, पसंद करते थे या टिप्पणी करते थे।<br><br><strong>एफ-1 वीजा क्या है?</strong><br>एफ-1 वीजा एक गैर-आव्रजन वीजा है जो विदेशी छात्रों को अमेरिका में अध्ययन करने की अनुमति देता है। इस वीजा के लिए, छात्रों को एक मान्यता प्राप्त संस्थान में पूर्णकालिक पाठ्यक्रम में दाखिला लेना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास अपनी शिक्षा और रहने के खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त धन है।<br><br>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को यह तय करने का अधिकार है कि किसे देश में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने "कैच एंड रिवोक" नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ऐप लॉन्च किया है जो छात्रों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखता है और उन छात्रों के वीजा रद्द कर देता है जिन पर आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने का संदेह है।<br><br>विभाग ने छात्रों को सूचित किया कि उनके एफ-1 वीजा को अमेरिकी आव्रजन और राष्ट्रीयता कानून की धारा 221(i) के तहत रद्द कर दिया गया है। ईमेल में चेतावनी दी गई है कि यदि छात्र बिना वैध वीजा के अमेरिका में रहते हैं तो उन्हें जुर्माना, कारावास या निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है। छात्रों को यह भी चेतावनी दी गई है कि वे अपने रद्द किए गए वीजा का उपयोग न करें और अपने पासपोर्ट को अमेरिकी दूतावास में जमा करें।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का असर: अमेरिका में अवैध प्रवासियों की गिरफ्तारी में गिरावट</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-action-us-arrest-illegal-desi-immigrants-dips</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में गैरकानूनी भारतीय अप्रवासियों की गिरफ्तारी में भारी गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियां हैं। यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (USCBP) के अनुसार, फरवरी 2025 में केवल 1,628 अवैध आप्रवासी पकड़े गए, जबकि पहले यह संख्या काफी अधिक थी। तस्कर पीछे हट रहे हैं और अवैध रूप से रह रहे लोग डर के साए में जी रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 19:07:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>illegal immigrants, Donald Trump, USCBP, immigration, arrests</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>ट्रंप के चाबुक का असर: अमेरिका में अवैध प्रवासियों की गिरफ्तारी में भारी गिरावट</strong><br><br>अमेरिका में गैरकानूनी ढंग से रह रहे भारतीय प्रवासियों की गिरफ्तारी में भारी कमी आई है। यह गिरावट दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच देखी गई है। जानकारों की मानें तो यह ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियों और निर्वासन के डर का नतीजा है।<br><br><strong>मुख्य बातें:</strong><br><ul><li>गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश करना अब मुश्किल हो गया है।</li><li>ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन विरोधी नीतियों को कड़ाई से लागू किया है।</li><li>पिछले चार सालों में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले भारतीयों की गिरफ्तारी में भारी कमी आई है।</li></ul><br>यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (USCBP) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 में केवल 1,628 अवैध प्रवासी पकड़े गए, जबकि जनवरी में यह संख्या 3,132 और दिसंबर में 5,600 से अधिक थी। मानव तस्करी में शामिल तस्कर अब पीछे हट रहे हैं, क्योंकि पकड़े जाने और वापस भेजे जाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोग डर के साए में जी रहे हैं और अपनी गतिविधियों को सीमित कर रहे हैं।<br><br>आंकड़ों के अनुसार, आमतौर पर हर साल 90,000 से 1 लाख भारतीय अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश करते थे। ट्रंप प्रशासन की सख्त कार्रवाई के कारण यह संख्या पहले से ही कम हो गई है। फरवरी में, अमेरिका ने 344 भारतीय प्रवासियों को सैन्य विमानों में वापस भेजा, जिससे पता चलता है कि प्रशासन अवैध आव्रजन के खिलाफ कितना सख्त है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा में कटौती, सरकार का कड़ा रुख</title>
<link>https://pratinidhi.in/nepal-government-action-on-violent-protests-security-of-ex-king-gyanendra-downsized</link>
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<description><![CDATA[ नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के बाद ओली सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा घटा दी है और नुकसान की वसूली का नोटिस भेजा है। काठमांडू नगर निगम ने सात लाख नेपाली रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। प्रदर्शनों के दौरान दो लोगों की मौत हो गई और 110 घायल हो गए। सरकार ने ज्ञानेंद्र शाह की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने अपने नेताओं की रिहाई की मांग की है। सरकार मानती है कि राजशाही समर्थकों और पुष्प कमल दहल &#039;प्रचंड&#039; की गतिविधियों के पीछे ज्ञानेंद्र शाह का हाथ है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 19:05:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, ज्ञानेंद्र शाह, केपी ओली, राजशाही, हिंसक प्रदर्शन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>काठमांडू:</strong> नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के बाद, केपी ओली सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। काठमांडू नगर निगम ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को नुकसान की वसूली के लिए नोटिस भेजा है। सरकार ने उनकी सुरक्षा कम कर दी है और निगरानी बढ़ा दी है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने सरकार को चेतावनी दी है।<br><br>शुक्रवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद, सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा घटा दी है। राजशाही समर्थकों के प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें पथराव, पार्टी कार्यालय पर हमले, लूटपाट और आगजनी शामिल थी। ज्ञानेंद्र शाह के आवास से 9 सुरक्षाकर्मी हटाए गए हैं, जिससे उनकी सुरक्षा 25 से घटकर 16 हो गई है। राजशाही समर्थक नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग कर रहे हैं।<br><br>हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह से की जाएगी। काठमांडू नगर पालिका ने उन्हें सात लाख नेपाली रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है, जिसे जल्द भरने को कहा गया है। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने व्यापारिक परिसरों, रेस्तरां, अस्पतालों और सरकारी भवनों में तोड़फोड़ की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और 110 घायल हो गए।<br><br>नेपाल के गृह मंत्रालय के अनुसार, ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा टीम में बदलाव किया गया है और उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। नेपाली कांग्रेस ने ज्ञानेंद्र शाह को हिंसक घटनाओं का जिम्मेदार ठहराया है। सरकार मानती है कि राजशाही समर्थकों और पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' की गतिविधियों के पीछे ज्ञानेंद्र शाह का हाथ है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने अपने गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग की है और सरकार को 24 घंटे में रिहा न करने पर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका में विमान हादसा, मिनियापोलिस में घर से टकराया प्लेन</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-plane-crash-minneapolis-house-collision-one-dead</link>
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<description><![CDATA[ मिनियापोलिस के ब्रुकलिन पार्क में एक विमान दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई। विमान एक घर से टकरा गया, जिससे घर नष्ट हो गया। संघीय विमानन प्रशासन के अनुसार, विमान आयोवा से मिनेसोटा जा रहा था। विमान में सवार लोगों की संख्या अभी तक ज्ञात नहीं है। यह विमान डेस मोइनेस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुआ था और अनोका काउंटी-ब्लेन हवाई अड्डे की ओर जा रहा था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:13:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>US Plane Crash, America, Minneapolis, Plane crash, Brooklyn Park</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मिनियापोलिस में विमान दुर्घटना: घर से टकराने से एक की मौत</strong><br><br>अमेरिका के मिनियापोलिस के एक उपनगर ब्रुकलिन पार्क में शनिवार को एक विमान एक घर से टकरा गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार एक व्यक्ति की जान चली गई।<br><br>स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, विमान आयोवा से मिनेसोटा की ओर जा रहा था तभी यह हादसा हुआ। ब्रुकलिन पार्क के प्रवक्ता रिसिकत अदेसाओगुन ने बताया कि घर के निवासियों को कोई चोट नहीं आई है, हालांकि घर पूरी तरह से नष्ट हो गया।<br><br>संघीय विमानन प्रशासन (FAA) ने कहा है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सिंगल-इंजन सोकाटा टीबीएम7 विमान में कितने लोग सवार थे। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विमान डेस मोइनेस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुआ था और अनोका काउंटी-ब्लेन हवाई अड्डे की ओर जा रहा था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>आंखें देखकर पहचाने प्रदर्शनकारियों के चेहरे, अमेरिका में इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन</title>
<link>https://pratinidhi.in/america-identifying-protesters-faces-through-eyes-using-technology</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारियों की पहचान अब आसान हो गई है। हाल ही में, न्यूयॉर्क में एक प्रदर्शन के दौरान, एक लड़की को केवल उसकी आंखों से पहचाना गया। फ्लेडग्लिंग टेक्नोलॉजी की मदद से यह संभव हुआ है, जो चेहरे के छोटे से हिस्से से भी पहचान कर सकती है। एक दक्षिणपंथी यहूदी समूह ने ऐसे प्रदर्शनकारियों की एक सूची ट्रंप प्रशासन को सौंपने की घोषणा की है, और विदेशी छात्रों को देश से बाहर निकालने की मांग की जाएगी, खासकर उन छात्रों को जो जेहादियों का समर्थन करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:13:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, अमेरिका, प्रदर्शनकारी, चेहरा पहचान, तकनीक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अमेरिका: आंखों से प्रदर्शनकारियों की पहचान</strong><br /><br />न्यूयार्क में इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान, एक लड़की ने मास्क और स्कार्फ से अपना चेहरा ढका हुआ था, सिर्फ उसकी आंखें दिख रही थीं।</p><br /><br /><p>फ्लेडग्लिंग टेक्नोलॉजी की मदद से उसकी पहचान हो गई।</p><br /><br /><p><strong>तकनीक का कमाल</strong><br /><br />अब प्रदर्शनकारियों को छिपना मुश्किल होगा, क्योंकि चेहरे के छोटे से हिस्से से भी उनकी पहचान की जा सकती है।</p><br /><br /><p><strong>फेस रिकग्निशन टूल</strong><br /><br />इंटरनेट मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक ऐसा फेस रिकग्निशन टूल विकसित किया गया है जो चेहरा ढका होने पर भी पहचान कर सकता है।</p><br /><br /><p><strong>प्रदर्शनकारियों की पहचान</strong><br /><br />इस टूल से अमेरिका के शहरों और कॉलेजों में फलस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले युवक-युवतियों की पहचान की गई है।</p><br /><br /><p><strong>ट्रंप प्रशासन को सूची</strong><br /><br />एक दक्षिणपंथी यहूदी समूह ने पहचाने गए लोगों की सूची ट्रंप प्रशासन को सौंपने की घोषणा की है।</p><br /><br /><p><strong>विदेशी छात्रों पर कार्रवाई</strong><br /><br />यह भी मांग की जाएगी कि विदेशी छात्रों को देश से बाहर निकाला जाए, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने जेहादियों का समर्थन करने वाले प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को देश से बाहर निकालने की घोषणा की है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग</title>
<link>https://pratinidhi.in/demand-for-un-intervention-to-stop-genocide-of-balochs</link>
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<description><![CDATA[ बलूच नेता माहान बलूच ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन और नरसंहार रोकने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान के लोगों पर हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देने का आग्रह किया। बलूचिस्तान में लोगों को गैरकानूनी ढंग से उठाया जा रहा है, कैद किया जा रहा है या मार दिया जा रहा है। जेल में बंद महरंग बलूच के साथ दुर्व्यवहार पर परिवार ने चिंता जताई है। एक विरोध मार्च में आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें कुछ लोग घायल हुए। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई और जांच शुरू की। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:13:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, बलूचिस्तान, नरसंहार, संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार, बलूच, अत्याचार, दमन, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, महरंग बलूच, आंदोलन, गिरफ्तारी, आत्मघाती विस्फोट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>जिनेवा, एएनआइ।</strong> पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन और बलूच आबादी के खात्मे के लिए हो रहे नरसंहार को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से दखल की मांग की गई है। बलूच आंदोलन की नेता माहान बलूच ने यह मांग आयोग और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की है।<br><br><strong>पाकिस्तान सरकार के अत्याचारों पर ध्यान दे संयुक्त राष्ट्र</strong><br>माहान बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में परिषद से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के दमन का संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी बलूचिस्तान की आबादी पर हो रहे पाकिस्तानी अत्याचारों पर ध्यान देने और उन्हें बचाने का आह्वान किया है।<br><br>उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में लोगों को घरों और सड़कों से अवैध रूप से उठाया जा रहा है। बिना किसी अपराध के उन्हें अनिश्चित काल के लिए कैद किया जा रहा है या मार दिया जा रहा है। बीते दशकों में, सैकड़ों निर्दोष लोग गायब हो गए हैं। इस दौरान, कई बलूच युवाओं को झूठी मुठभेड़ों में मार दिया गया और उनके गोलियों से छलनी शव उनके परिवारों को भेजे गए।<br><br><strong>महरंग बलूच के साथ जेल में ज्यादती</strong><br>पाकिस्तानी जेल में बंद बलूच कार्यकर्ता महरंग बलूच के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर उनके परिवार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। महरंग की बहन, नादिया बलूच ने एक्स पर पोस्ट किया कि जब वह अपनी मां के साथ महरंग से मिलने जेल गईं, तो उन्हें आठ घंटे तक इंतजार कराया गया। बाद में, उन्हें एक मोटी कांच की दीवार के पीछे से टेलीफोन के माध्यम से महरंग से कुछ मिनटों के लिए बात करने की अनुमति दी गई।<br><br>नादिया ने कहा कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद, उन्हें महरंग बलूच से व्यक्तिगत रूप से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। महरंग का परिवार उनकी बीमारी की खबर मिलने पर उनसे मिलने जेल गया था। नादिया ने महरंग के लिए न्याय की मांग की है।<br><br><strong>बलूचों के मार्च के दौरान आत्मघाती हमला</strong><br>बलूच आंदोलन की नेता, डॉ. महरंग बलूच और अन्य कार्यकर्ताओं की आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत गिरफ्तारी के विरोध में, सरदार अख्तर मेंगल के नेतृत्व में शुक्रवार को वाध से क्वेटा तक शुरू हुए एक लंबे मार्च में, दक्षिण मस्तुंग में लकी पास के पास एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम से उड़ा लिया। हमले में मेंगल और कुछ अन्य लोग मामूली रूप से घायल हो गए। पुलिस ने लांग मार्च के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है और आत्मघाती हमले की जांच शुरू कर दी है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप सरकार सख्त: हमास समर्थकों को अमेरिका छोड़ने का फरमान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश विभाग ने हमास का समर्थन करने वाले सैकड़ों विदेशी छात्रों को अमेरिका छोड़ने का आदेश दिया है। इन छात्रों को ईमेल भेजकर सूचित किया गया है कि उनके F-1 वीजा रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद उन्हें स्व-निर्वासन के लिए कहा गया है। &#039;कैच एंड रिवोक&#039; नामक एक AI-संचालित ऐप लॉन्च किया गया है, जो हमास समर्थकों की पहचान कर उनके वीजा रद्द कर देगा। 2023-24 में अमेरिका में पढ़ रहे 11 लाख अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में से 331,000 भारतीय छात्र थे। यह आदेश मार्को रुबियो द्वारा कई अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के वीजा रद्द करने की घोषणा के बाद आया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:13:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>हमास, अमेरिका, छात्र वीजा, ट्रंप, इजरायल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><b>वॉशिंगटन:</b> अमेरिकी विदेश विभाग ने हमास का समर्थन करने वाले सैकड़ों विदेशी छात्रों को अमेरिका छोड़ने का आदेश दिया है। इन छात्रों को ईमेल भेजकर सूचित किया गया है कि उनके F-1 वीजा रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद उन्हें स्व-निर्वासन के लिए कहा गया है। यह कार्रवाई उन छात्रों पर भी लागू होती है जिन्होंने सोशल मीडिया पर राष्ट्र-विरोधी पोस्ट साझा किए हैं।</p><br><p>अमेरिका ने <b>'कैच एंड रिवोक'</b> नामक एक AI-संचालित ऐप लॉन्च किया है, जो हमास समर्थकों की पहचान कर उनके वीजा रद्द कर देगा। नए वीजा आवेदकों की भी जांच की जा रही है, और दोषी पाए जाने पर उन्हें अमेरिका में पढ़ने का अवसर नहीं मिलेगा।</p><br><p>ओपन डोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में अमेरिका में पढ़ रहे 11 लाख अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में से 331,000 भारतीय छात्र थे। यह आदेश अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा कई अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के वीजा रद्द करने की घोषणा के बाद आया है। रुबियो ने कहा कि यह संख्या 300 से अधिक हो सकती है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>रूसी राष्ट्रपति पुतिन के काफिले में आग, वीडियो वायरल</title>
<link>https://pratinidhi.in/vladimir-putin-car-caught-fire-in-moscow</link>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफिले में शामिल एक कार में मॉस्को में आग लग गई। यह घटना सेंट्रल मॉस्को में हुई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कार ऑरस लिमोसिन थी, जो रूस में बनी है। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, आग मॉस्को के लुब्यंका में एफएसबी गुप्त सेवा मुख्यालय के पास लगी। अधिकारियों ने अभी तक कार में सवार लोगों या आग के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। वायरल वीडियो में कार के इंजन में आग लगी हुई दिखाई दे रही है। ऑरस लिमोसिन, जिसकी कीमत £275,000 है, पुतिन के आधिकारिक बेड़े का हिस्सा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भविष्यवाणी की है कि पुतिन की सेहत ठीक नहीं है और जल्द ही उनकी मौत हो जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:09:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>व्लादिमीर पुतिन, पुतिन की कार, कार में आग, ऑरस लिमोसिन, रूस, सेंट्रल मॉस्को, एफएसबी गुप्त सेवा, जेलेंस्की, यूक्रेन, किम जोंग उन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मॉस्को में पुतिन के काफिले की कार में लगी आग</strong><br><br>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफिले में शामिल एक कार में धमाके के बाद आग लग गई। यह घटना सेंट्रल मॉस्को में हुई, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। कार ऑरस लिमोसिन थी, जो रूस में बनी है।<br><br><strong>मॉस्को में एफएसबी मुख्यालय के पास आग</strong><br><br>द सन की रिपोर्ट के अनुसार, आग मॉस्को के लुब्यंका में एफएसबी गुप्त सेवा मुख्यालय के पास लगी। अधिकारियों ने अभी तक कार में सवार लोगों या आग के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। किसी के घायल होने की खबर नहीं है।<br><br><strong>इंजन में लगी आग</strong><br><br>वायरल वीडियो में कार के इंजन में आग लगी हुई दिखाई दे रही है। आग तेज़ी से फैली, और दमकल कर्मियों के आने से पहले आस-पास के कर्मचारियों ने आग बुझाने की कोशिश की। कार के पिछले हिस्से को भी नुकसान पहुंचा है।<br><br><strong>पुतिन ने किम जोंग उन को गिफ्ट की कार</strong><br><br>ऑरस लिमोसिन, जिसकी कीमत £275,000 है, पुतिन के आधिकारिक बेड़े का हिस्सा है। अक्सर पुतिन इस कार का इस्तेमाल करते हैं और उन्होंने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन जैसे नेताओं को भी इसे उपहार में दिया है।<br><br><strong>जेलेंस्की ने की पुतिन की मौत की भविष्यवाणी</strong><br><br>यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भविष्यवाणी की है कि पुतिन की सेहत ठीक नहीं है और जल्द ही उनकी मौत हो जाएगी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सूर्य ग्रहण 2025: दुनिया देखेगी अद्भुत खगोलीय घटना</title>
<link>https://pratinidhi.in/surya-grahan-first-solar-eclipse-of-2025-visible-in-many-countries</link>
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<description><![CDATA[ शनिवार, 29 मार्च को, दुनिया के कई हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा गया, जो लगभग 3 घंटे 56 मिनट तक चला। यह घटना उत्तरी अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और यूरोप में दिखाई दी, लेकिन भारत में नहीं। अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को होगा। इस वर्ष में दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण होंगे, जिसमें 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। आंशिक सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के कुछ भाग को ढकता है, जिसके लिए विशेष चश्मों की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है, जिससे सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध होता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:08:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण, खगोलीय घटना, 2025, भारत, उत्तरी गोलार्ध, चंद्र ग्रहण, वैज्ञानिक, स्काईवॉचर्स, उत्तरी अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, यूरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>शनिवार को दुनिया के कई देशों में साल का पहला सूर्य ग्रहण देखा गया। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण दोपहर 2:20 बजे से शाम 6:14 बजे तक चला, हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं दिया। आंशिक सूर्य ग्रहण में, चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ढकता है, जिससे एक अर्धचंद्र जैसा दृश्य बनता है।</p><br><p><strong>मुख्य बातें:</strong></p><br><ul><li>29 मार्च को उत्तरी गोलार्ध में आंशिक सूर्य ग्रहण हुआ।</li><li>लाखों लोगों ने आसमान में इस अद्भुत घटना को देखा।</li><li>अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को होगा।</li><li>सूर्य ग्रहण में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बनी रहती है।</li></ul><br><p>वॉशिंगटन: 29 मार्च को दुनिया के एक बड़े हिस्से ने आंशिक सूर्य ग्रहण देखा। यह सूर्य ग्रहण लगभग 3 घंटे और 56 मिनट तक चला। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों को अब ऐसे नज़ारे के लिए लगभग छह महीने इंतजार करना होगा। शनिवार का सूर्य ग्रहण इस साल का पहला ग्रहण था। इसके बाद, अगला सूर्य ग्रहण इसी साल 21 सितंबर को होगा। सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आते हैं। आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढकता है, इसलिए सूर्य का कुछ हिस्सा दिखाई देता रहता है। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए विशेष चश्मों की आवश्यकता होती है। सीधी आँखों से सूर्य को देखने से नुकसान हो सकता है।</p><br><p>उत्तरी गोलार्ध के स्काईवॉचर्स ने शनिवार को आंशिक सूर्य ग्रहण देखा। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों में दिखाई दिया। आंशिक ग्रहण के दौरान, सूर्य का एक हिस्सा चंद्रमा द्वारा ढका हुआ दिखाई देता है। उत्तरी अमेरिका में यह ग्रहण सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।</p><br><p>इस साल दो सूर्य ग्रहण होने वाले हैं। शनिवार का सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 2:20 बजे शुरू हुआ, दोपहर 4:17 बजे चरम पर पहुंचा, और शाम 6:14 बजे समाप्त हुआ। यह आंशिक सूर्य ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई दिया, लेकिन भारत में नहीं। 2025 में, दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण होंगे। पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च को हुआ था। अब, 7 सितंबर को एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो पूरे भारत में दिखाई देगा। इसके बाद, साल का दूसरा सूर्य ग्रहण सितंबर में होगा। यह 2025 का अंतिम ग्रहण होगा, जो कि एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। यह आंशिक सूर्य ग्रहण 21 और 22 सितंबर को न्यूजीलैंड, पूर्वी मेलानेशिया, दक्षिणी पोलिनेशिया और पश्चिमी अंटार्कटिका में देखा जा सकता है।</p><br><p>वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इससे सूर्य का कुछ या पूरा प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है और छाया बनती है। आंशिक ग्रहण में, सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी पूरी तरह से एक सीध में नहीं होते हैं, इसलिए सूर्य का केवल एक हिस्सा ढका हुआ दिखाई देता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तानी सेना का ड्रोन हमला: खैबर पख्तूनख्वा में 12 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistani-army-drone-attack-in-khyber-pakhtunkhwa-kills-12</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ ड्रोन हमला किया, जिसमें 12 आतंकवादियों समेत कुछ नागरिकों की भी मौत हो गई। प्रांतीय सरकार ने घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। शनिवार सुबह मरदान जिले के कटलांग में आतंकवादियों के ठिकाने पर हुए हमले में नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने नागरिकों की मौत पर दुख जताया और सरकार पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की व्यवस्था कर रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:08:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistani army, drone attack, Khyber Pakhtunkhwa, terrorism, civilians</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तानी सेना ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकवादियों के खिलाफ एक अभियान में ड्रोन का इस्तेमाल किया, जिसमें 12 आतंकवादियों के मारे जाने की खबर है। दुख की बात है कि इस हमले में कुछ महिलाओं और बच्चों की भी जान चली गई। प्रांतीय प्रशासन ने इस घटना पर दुख जताया है और जांच का आदेश दिया है।<br><br>शनिवार की सुबह, आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान मरदान जिले के कटलांग इलाके में आतंकवादियों के ठिकाने पर हमला किया गया। सरकार ने नागरिकों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन में 12 आतंकवादी मारे गए। यह अभियान आतंकवादियों के छिपे होने की जानकारी के बाद किया गया था।<br><br>इस ऑपरेशन में कई बड़े आतंकवादियों को मार गिराया गया है। मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने नागरिकों की मौत पर दुख जताया है। सरकार घायलों को मदद कर रही है और पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की व्यवस्था कर रही है। मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार बैरिस्टर मुहम्मद अली सैफ ने भी निर्दोष लोगों की मौत पर दुख जताया है। सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। नागरिकों की मौत की जांच की जाएगी और सरकार अपना रुख स्पष्ट करेगी। खैबर पख्तूनख्वा प्रशासन आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और पीड़ितों के परिवारों को हर संभव मदद करेगा।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>एलन मस्क के खिलाफ विश्वव्यापी प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग</title>
<link>https://pratinidhi.in/elon-musk-protests-target-tesla-locations-over-government-role</link>
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<description><![CDATA[ एलन मस्क के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं, क्योंकि लोगों का मानना है कि अमेरिकी सरकार में उनकी भूमिका खतरनाक है। प्रदर्शनकारी, जिनमें टेस्ला के असंतुष्ट मालिक और पर्यावरणविद शामिल हैं, मस्क के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मस्क अमेरिकी सरकार को खत्म करने में जुटे हैं और संवेदनशील डाटा तक उनकी पहुंच लोकतंत्र के लिए खतरा है। अमेरिका में 277 टेस्ला शोरूम के बाहर रैलियां निकाली गईं और विश्व स्तर पर 200 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए। न्यूयॉर्क में भी प्रदर्शनकारियों ने मस्क के इस्तीफे की मांग की। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:08:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>एलन मस्क, टेस्ला, विरोध प्रदर्शन, अमेरिकी सरकार, इस्तीफा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>एलन मस्क के खिलाफ विश्वव्यापी प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग</strong><br/><br/>अमेरिकी सरकार में एलन मस्क के दखल के खिलाफ दुनियाभर में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों टेस्ला शोरूम के बाहर लोगों ने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि अमेरिकी सरकार के संवेदनशील डाटा तक एलन मस्क की पहुंच बेहद खतरनाक है। प्रदर्शनकारी ट्रंप प्रशासन में मस्क की भूमिका का विरोध कर रहे हैं।<br/><br/>अमेरिका समेत यूरोप के कई देशों में लोगों ने टेस्ला शोरूम के बाहर रैलियां निकालीं। उनका आरोप है कि एलन मस्क अमेरिकी सरकार को खत्म करने में जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों ने लोगों से तीन अपील की हैं: टेस्ला की कारें न खरीदें, टेस्ला का स्टॉक बेच दें और टेस्ला टेकडाउन आंदोलन में हिस्सा लें।<br/><br/>अमेरिका में 277 टेस्ला शोरूम के बाहर रैलियां निकाली गईं, वहीं दुनियाभर में 200 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया से यूके तक फैले हैं। शनिवार को जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, न्यूजीलैंड, यूके और ऑस्ट्रेलिया में लोगों ने एलन मस्क और टेस्ला के खिलाफ प्रदर्शन किया।<br/><br/>एलन मस्क वर्तमान में अमेरिकी सरकार में दक्षता विभाग के प्रमुख हैं। उन्हें नौकरियों में छंटनी और खर्च में कटौती की जिम्मेदारी मिली है। प्रदर्शनकारी मस्क के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। न्यूयॉर्क शहर में सैकड़ों प्रदर्शनकारी मैनहट्टन टेस्ला स्टोर के सामने इकट्ठा हुए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>म्यांमार में भूकंप से भारी तबाही, भारत ने भेजी मदद</title>
<link>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-death-toll-india-aid</link>
<guid>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-death-toll-india-aid</guid>
<description><![CDATA[ म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप से मरने वालों की संख्या 1,644 तक पहुंच गई है। म्यांमार के कई क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। म्यांमार की सैन्य सरकार ने 1,644 मौतों की पुष्टि की है। भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी गई। मांडले शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। म्यांमार की जुंटा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है, जिसके बाद कई देशों ने सहायता का ऐलान किया है। भारत ने भी मेडिकल टीम और राहत सामग्री भेजी है। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि म्यांमार आपदा से निपटने के लिए तैयार नहीं है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:08:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Myanmar, Earthquake, India, Aid, Death Toll, Natural Disaster</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप से मरने वालों की संख्या 1,644 तक पहुंच गई है। म्यांमार के कई क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
<br><br>
म्यांमार की सैन्य सरकार ने 1,644 मौतों और 3,408 घायलों की पुष्टि की है, जबकि 139 लोग लापता हैं। भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी गई, जिसके बाद 6.7 तीव्रता का आफ्टरशॉक आया। मांडले शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां कई इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं।
<br><br>
मांडले में 694 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि राजधानी नेपीडॉ में 94 लोगों की जान गई है। म्यांमार में जनजीवन अस्त-व्यस्त है और लोग राहत का इंतजार कर रहे हैं। सड़कों पर दरारें पड़ने से यातायात प्रभावित है।
<br><br>
म्यांमार की जुंटा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है, जिसके बाद अमेरिका, रूस, मलेशिया, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया ने राहत सामग्री और सहायता प्रदान करने का ऐलान किया है। भारत ने भी 118 सदस्यों वाली मेडिकल टीम और 40 टन राहत सामग्री भेजी है। प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के सैन्य प्रमुख से बात कर भारत की एकजुटता व्यक्त की है। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि म्यांमार आपदा से निपटने के लिए तैयार नहीं है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में युद्धविराम: हमास ने दी मंजूरी, इजरायल का नया प्रस्ताव!</title>
<link>https://pratinidhi.in/hamas-accepts-gaza-ceasefire-proposal-israel-makes-counter-offer</link>
<guid>https://pratinidhi.in/hamas-accepts-gaza-ceasefire-proposal-israel-makes-counter-offer</guid>
<description><![CDATA[ हमास ने गाजा में युद्धविराम के लिए मध्यस्थों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, लेकिन इजरायल ने तुरंत एक नया प्रस्ताव पेश किया है और राफा में जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं। हमास ने कहा कि उसने मिस्र और कतर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद इजरायल ने अमेरिका के साथ समन्वय से एक नया प्रस्ताव रखा। हमास के खलील अल-हय्या ने कहा कि वे युद्ध खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं और इजरायल से इसे बाधित न करने की उम्मीद करते हैं। हमास ने गाजा के किसी भी विस्थापन के खिलाफ चेतावनी दी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:08:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>गाजा, युद्धविराम, हमास, इजरायल, राफा, फिलिस्तीन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा में युद्धविराम: हमास ने दिखाई सहमति, इजरायल ने रखा नया प्रस्ताव!</strong><br><br>फिलिस्तीनी गुट हमास ने गाजा पट्टी में युद्धविराम के लिए मध्यस्थों के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। हमास के खलील अल हया ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से अपनाया है। इसके बाद इजरायल ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। साथ ही, इजरायली सेना ने दक्षिण गाजा के राफा में जमीनी हमला शुरू कर दिया है।<br><br><strong>मुख्य बातें:</strong><br><ul><li>हमास ने गाजा में युद्धविराम प्रस्ताव को दी मंजूरी</li><li>इजरायल ने इसके जवाब में नया प्रस्ताव भेजा</li><li>राफा में इजरायल ने नए हमले शुरू किए</li></ul><br>गाजा में युद्धविराम के लिए दुनिया भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। हमास को यह प्रस्ताव दो दिन पहले मिला था, जिसे शनिवार को मंजूरी दी गई। इजरायल ने बंधकों की संख्या में बदलाव के साथ एक नया युद्धविराम प्रस्ताव पेश किया है। युद्धविराम पर बातचीत के बीच ही इजरायली फोर्स ने राफा में जमीनी अभियान शुरू कर दिया है, जिससे समझौते में दिक्कतें आ सकती हैं।<br><br>हमास ने मध्यस्थ मिस्र और कतर से मिले प्रस्ताव को स्वीकार किया है, जिसके बाद इजरायल ने अमेरिका के साथ समन्वय से एक नया प्रस्ताव दिया है। मिस्र ने इजरायल के हमले शुरू करने के बाद यह प्रस्ताव रखा था। हमास के गाजा प्रमुख खलील अल-हय्या ने कहा कि वे युद्ध खत्म करने के लिए सभी प्रस्तावों पर जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि इजरायल इसे बाधित नहीं करेगा। हमास ने यह भी कहा कि अगर इजरायल ने हमले जारी रखे तो वह मजबूती से जवाब देगा और गाजा के लोगों का कोई भी विस्थापन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]> </content:encoded>
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<title>हमास ने मिस्र के युद्ध विराम प्रस्ताव को स्वीकारा</title>
<link>https://pratinidhi.in/hamas-agrees-to-egyptian-proposal-for-hostage-release-and-ceasefire</link>
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<description><![CDATA[ हमास ने मिस्र के युद्ध विराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत वह 5 बंधकों को रिहा करेगा। यह प्रस्ताव अमेरिकी दूत के प्रस्ताव से मेल खाता है। हमास के प्रमुख खलील अल-हय्या ने कहा कि उन्होंने युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है। इजरायल ने भी जवाबी प्रस्ताव भेजा है, जिसमें हमास 50 दिनों के युद्ध विराम के बदले कुछ बंधकों को रिहा करेगा। इजरायल के रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि बंधकों की रिहाई तक इजरायली सेना गाजा में बनी रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:06:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>हमास, मिस्र, युद्ध विराम, बंधक, इजरायल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[हमास ने मिस्र के युद्ध विराम के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। यह प्रस्ताव मिस्र ने दो दिन पहले ही दिया था। इस नए प्रस्ताव के अनुसार, हमास 5 बंधकों को रिहा करने के लिए सहमत हो गया है। सीएनएन के अनुसार, हमास के एक सूत्र ने यह जानकारी दी है। यह नया मिस्र का प्रस्ताव अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के प्रस्ताव से मिलता-जुलता है।<br><br>गाजा में हमास के प्रमुख खलील अल-हय्या ने शनिवार को कहा कि वे युद्ध को समाप्त करने के लिए सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने मध्यस्थ भाइयों से एक प्रस्ताव मिला, जिस पर उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और उसे स्वीकार किया।<br><br>इजरायल ने भी पुष्टि की है कि उन्हें गाजा में संघर्ष विराम के लिए एक नया प्रस्ताव मिला है। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि उन्होंने मध्यस्थता करने वाले देशों को एक जवाबी प्रस्ताव भेजा है, जो अमेरिका के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाकर किया गया है। इजरायल के सरकारी कान टीवी न्यूज के अनुसार, प्रस्ताव में हमास गाजा में 50 दिनों के युद्ध विराम के बदले में 59 बंधकों में से कुछ को रिहा करेगा।<br><br>इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने हमास को चेतावनी दी है कि जब तक बंधकों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक इजरायल गाजा के कुछ हिस्सों में बना रहेगा।<br><br>इजरायल ने गाजा में फिर से सैन्य अभियान शुरू कर दिया है और कहा है कि 24 बंधकों की रिहाई तक उनके सैनिक वहां बने रहेंगे। इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने दक्षिणी गाजा के राफा में अल जनीना क्षेत्र में नए जमीनी अभियान शुरू किए हैं ताकि सुरक्षा क्षेत्र का विस्तार किया जा सके और हमास के आतंकवादी ढांचे को नष्ट किया जा सके।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>म्यांमार में भूकंप: वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, 1600 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-scientists-warned-1600-deaths</link>
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<description><![CDATA[ म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भूकंप ने तबाही मचाई, जिससे 1600 लोगों की मौत हो गई। वैज्ञानिकों ने आफ्टरशॉक्स की चेतावनी दी है। भारत ने &#039;ऑपरेशन ब्रह्मा&#039; के तहत सहायता भेजी है। चीन भी मदद कर रहा है। भूकंप से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे बचाव कार्य बाधित हो रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 12:06:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Myanmar, earthquake, aftershocks, Operation Brahma, India, China</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप से लोगों के दिलों में दहशत है। 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई और लगभग 1600 लोग मारे गए। भूवैज्ञानिकों ने आफ्टरशॉक्स की चेतावनी दी है। जेस फीनिक्स के अनुसार, इस भूकंप से 334 परमाणु बमों के बराबर ऊर्जा निकली। उन्होंने बताया कि 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद लंबे समय तक आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर में था और यह 10 किलोमीटर की गहराई में आया था। म्यांमार के अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 1600 है, जबकि USGS का अनुमान है कि यह 10,000 से अधिक हो सकती है। फीनिक्स ने बताया कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट के यूरोशियन प्लेट से टकराने के कारण महीनों तक आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं। भारत ने म्यांमार में भूकंप से प्रभावित लोगों के लिए 'ऑपरेशन ब्रह्मा' शुरू किया है, जिसके तहत मेडिकल यूनिट, बचाव दल, कंबल, तिरपाल, हाइजीन किट, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, खाने के पैकेट और किचन सेट भेजे गए हैं। चीन ने भी म्यांमार की मदद के लिए राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता भेजी है। म्यांमार की सैन्य सरकार ने 1644 से अधिक मौतों की पुष्टि की है। भूकंप से सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो रहा है। घायलों की संख्या लगभग 2400 है और कई इलाकों में बचाव अभियान जारी है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;जॉय बांग्ला ब्रिगेड&amp;apos; पर बांग्लादेश में गृह युद्ध की साजिश का आरोप</title>
<link>https://pratinidhi.in/case-filed-against-sheikh-hasina-for-plotting-to-overthrow-yunus-interim-government</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में &#039;जॉय बांग्ला ब्रिगेड&#039; पर गृह युद्ध की साजिश रचने का आरोप लगा है, जिसके चलते शेख हसीना समेत 73 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस के मुताबिक, 19 दिसंबर 2024 को हुई बैठक में अंतरिम सरकार को गिराने की साजिश रची गई थी, जिसमें 577 लोगों ने हिस्सा लिया। इस साजिश का मकसद बांग्लादेश में हिंसा फैलाना था। सीआईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शेख हसीना पर आरोप है कि उन्होंने &#039;जॉय बांग्ला ब्रिगेड&#039; नामक मंच के माध्यम से गृह युद्ध भड़का कर सत्ता में वापसी की योजना बनाई थी। पिछले साल छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था और वर्तमान में उनके खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 16:56:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, शेख हसीना, गृह युद्ध, जॉय बांग्ला ब्रिगेड, अंतरिम सरकार, मोहम्मद यूनुस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ढाका पुलिस ने 'जॉय बांग्ला ब्रिगेड' पर गृह युद्ध की साजिश का आरोप लगाते हुए शेख हसीना समेत 73 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, 19 दिसंबर 2024 को हुई ब्रिगेड की बैठक में अंतरिम सरकार को गिराने की साजिश रची गई थी, जिसमें देश-विदेश से 577 अवामी लीग के सदस्यों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश में हिंसा को बढ़ावा देना था।<br><br>पीटीआई के अनुसार, ढाका के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में यह मामला दर्ज किया गया है, जिसमें शेख हसीना और 72 अन्य लोगों पर गृह युद्ध भड़काने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश का आरोप है। आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने अंतरिम सरकार को गिराने की साजिश के आरोप में अदालत के आदेश पर मामला दर्ज किया है।<br><br>आरोप है कि 'जॉय बांग्ला ब्रिगेड' नामक एक मंच के माध्यम से गृह युद्ध भड़का कर हसीना को फिर से सत्ता में लाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस ने बताया कि बैठक में बांग्लादेश और विदेश से 577 लोगों ने भाग लिया था, और अवामी लीग के अमेरिकी चैप्टर के उपाध्यक्ष आलम ने इस बैठक का आयोजन किया था। बैठक में शामिल लोगों ने वैध सरकार को शांतिपूर्वक चलने नहीं देने की कसम खाई थी।<br><br>पिछले साल छात्रों के हिंसक आंदोलन के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था, और तब से वह भारत में हैं। सत्ता से बेदखल होने के बाद उन पर 100 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, और अवामी लीग के कई नेताओं ने विदेश में शरण ले रखी है। मोहम्मद यूनुस ने हसीना की सत्ता गिरने के बाद अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>टेक्सास में बाढ़ का कहर: तीन की मौत, 200 से अधिक का रेस्क्यू</title>
<link>https://pratinidhi.in/texas-floods-three-deaths-200-rescued-tornado-warning</link>
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<description><![CDATA[ टेक्सास के दक्षिणी हिस्से में भीषण तूफान के चलते तीन लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। हर्लिंजन में 21 इंच बारिश होने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। अलामो और वेस्लाको में भी बाढ़ ने कहर बरपाया, जिससे 3000 लोग बिजली कटौती से प्रभावित हुए और 20 स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया। मेयर नॉर्मा सेपुलवेडा ने कहा कि शहर इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से उबरने के लिए तैयार है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 13:59:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>टेक्सास, बाढ़, रेस्क्यू, टॉर्नेडो, मौसम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>टेक्सास में बाढ़ से तबाही: तीन की मौत, 200 से अधिक बचाए गए</strong><br><br>टेक्सास के दक्षिणी भाग में गुरुवार और शुक्रवार को आए भीषण तूफान के कारण तीन लोगों की जान चली गई, जबकि 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। हर्लिंजन में 21 इंच तक बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते भयंकर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। अलामो और वेस्लाको भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए।<br><br>लगभग 3000 लोग बिजली की कटौती से परेशान रहे और 20 स्कूलों को बंद कर दिया गया। इसके साथ ही, टॉर्नेडो की चेतावनी भी जारी की गई है। हर्लिंजन के मेयर नॉर्मा सेपुलवेडा ने कहा कि शहर इस मुश्किल घड़ी से उबरने के लिए दृढ़ है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया &amp;apos;स्मार्ट&amp;apos; और &amp;apos;अच्छा दोस्त&amp;apos;</title>
<link>https://pratinidhi.in/pm-modi-bharat-ke-mahan-pradhanmantri-wah-mere-achchhe-dost-trump-ne-bharat-ke-sath-tariff-deal-par-diya-bada-bayan</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें &#039;बहुत स्मार्ट आदमी&#039; और &#039;अच्छा दोस्त&#039; बताया। ट्रंप ने कहा कि मोदी हाल ही में अमेरिका आए थे और दोनों देशों के बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को अच्छे परिणाम देने वाला बताया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 13:04:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, नरेंद्र मोदी, भारत, अमेरिका, टैरिफ, व्यापार, कूटनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> की प्रशंसा करते हुए उन्हें <strong>'बहुत स्मार्ट आदमी'</strong> और <strong>'अच्छा दोस्त'</strong> बताया।<br><br>ट्रंप ने कहा कि मोदी हाल ही में अमेरिका आए थे और दोनों देशों के बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं।<br><br>ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि भारत और अमेरिका के बीच सब ठीक रहेगा। उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को अच्छे परिणाम देने वाला बताया।<br><br>ट्रंप ने संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करने वाले सभी आयातित वाहनों पर 25 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी भारत और चीन जैसे देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाएगा।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>इजरायल ने तोड़ा युद्धविराम, बेरूत पर हवाई हमला</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-hamas-war-israel-breaks-ceasefire-attacks-beirut-hezbollah-targets</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल ने युद्धविराम तोड़ते हुए लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमला किया, जिसमें हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाया गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हमले की निंदा की है। इजरायली सेना ने कहा कि हिजबुल्ला के ड्रोन गोदाम को निशाना बनाया गया। हमले के बाद बेरूत में धुएं का गुबार छा गया और लोगों में भगदड़ मच गई। गाजा में इजरायली हवाई हमले में हमास के प्रवक्ता आब्देल लतीफ अल-कनुआ भी मारे गए। इजरायल ने दो महीने के युद्धविराम को खत्म करते हुए 18 मार्च को गाजा में फिर से हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें 830 लोग मारे जा चुके हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 13:04:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, बेरूत, एयर स्ट्राइक, हिजबुल्ला, युद्धविराम, लेबनान, हमास</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इजरायल ने बेरूत पर की एयर स्ट्राइक, हिजबुल्ला के ठिकाने तबाह</strong><br><br>इजरायल ने युद्धविराम तोड़ते हुए लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमला किया है। इजरायली सेना ने हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाया है। यह हमला नवंबर 2024 से लागू युद्धविराम के बाद हुआ है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने हिजबुल्ला के ड्रोन गोदाम को निशाना बनाया है।<br><br>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस हमले की निंदा की है। बमबारी की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी और बेरूत में धुएं का गुबार छा गया। इस हमले से इलाके में भगदड़ मच गई। पिछले साल इजरायल ने इसी इलाके में हिजबुल्ला के प्रमुख नेता हसन नसरुल्ला को मारा था।<br><br>इजरायली सेना ने कहा है कि अगर इजरायल पर हमले हुए तो बेरूत सुरक्षित नहीं रहेगा। 22 मार्च को और शुक्रवार सुबह लेबनानी क्षेत्र से इजरायल पर रॉकेट दागे गए थे, जिसके बाद इजरायल ने यह हमला किया। हालांकि, हिजबुल्ला ने रॉकेट हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है।<br><br>इससे पहले, गाजा में इजरायली हवाई हमले में हमास के प्रवक्ता आब्देल लतीफ अल-कनुआ की मौत हो गई थी। इजरायल ने इस सप्ताह हमास के राजनीतिक शाखा के नेता इस्माइल बरहूम और सलाह अल-बार्दवील को भी मार गिराया था। इजरायल ने दो महीने के युद्धविराम को खत्म करते हुए 18 मार्च को गाजा में फिर से हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें अब तक 830 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का टैरिफ: अमेरिकी वाहन निर्माताओं पर भारी पड़ेगा</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-tariffs-impact-on-us-automakers</link>
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<description><![CDATA[ अर्थशास्त्री आर्थर लाफेर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वाहनों के आयात पर 25% टैरिफ लगाने के खतरे के बारे में चेतावनी दी है, जिससे प्रत्येक वाहन की कीमत में 4,711 डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है। लाफेर ने आशंका जताई है कि इससे अमेरिकी वाहन निर्माताओं की क्षमता प्रभावित होगी और वे विदेशी कंपनियों से पिछड़ सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने कनाडा और मेक्सिको के साथ व्यापार समझौते के कारण ऑटो पार्ट्स के आयात को नए टैरिफ प्लान से मुक्त रखा है, जिससे अमेरिकी वाहन निर्माताओं पर कम असर होगा। ट्रंप ने पीएम मोदी को &#039;स्मार्ट आदमी&#039; और &#039;अच्छा दोस्त&#039; बताया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 13:04:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप, टैरिफ, अमेरिकी वाहन निर्माता, आयात शुल्क, नरेंद्र मोदी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>ट्रंप का टैरिफ: अमेरिकी वाहन निर्माताओं पर भारी पड़ेगा</strong><br><br>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वाहनों के आयात पर 25% टैरिफ लगाने के खतरे के बारे में अर्थशास्त्री आर्थर लाफेर ने चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इससे प्रत्येक वाहन की कीमत में 4,711 डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है।<br><br><strong>निर्माताओं की क्षमता पर प्रभाव</strong><br><br>लाफेर ने आशंका जताई है कि इस प्रस्तावित कर से अमेरिकी वाहन निर्माताओं की क्षमता प्रभावित होगी, जिससे वे विदेशी कंपनियों से पिछड़ सकते हैं। उन्होंने इस शुल्क के प्रभाव पर 21 पृष्ठों की एक रिपोर्ट तैयार की है।<br><br><strong>अमेरिकी निर्माताओं को लाभ</strong><br><br>रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि राष्ट्रपति पुरानी कर व्यवस्था को बनाए रखते हैं, तो अमेरिकी वाहन निर्माताओं के लिए आवश्यक आपूर्ति व्यवस्था बनी रहेगी। यह सप्लाई चेन कनाडा और मेक्सिको से जुड़ी है, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को लाभ होता है और वे विदेशी उत्पादों से मुकाबला कर पाते हैं।<br><br><strong>अमेरिकी वाहन निर्माताओं पर प्रभाव</strong><br><br>अमेरिकी प्रशासन ने कनाडा और मेक्सिको के साथ व्यापार समझौते के कारण ऑटो पार्ट्स के आयात को 3 अप्रैल से लागू होने वाले नए टैरिफ प्लान से मुक्त रखा है। इससे अमेरिकी वाहन निर्माताओं पर ट्रंप के नए टैरिफ प्लान का कम असर होने की संभावना है। लाफेर ने रिपोर्ट में लिखा है कि यदि यह छूट समाप्त की जाती है, तो अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनियों के लिए यह भारी पड़ेगा।<br><br><strong>पीएम मोदी के बारे में ट्रंप</strong><br><br>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'बहुत स्मार्ट आदमी' और 'अच्छा दोस्त' बताया। उन्होंने कहा कि मोदी हाल ही में यहां आए थे और वे हमेशा से अच्छे दोस्त रहे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भूकंप से म्यांमार में भारी तबाही, 144 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-kills-at-least-144-devastation-in-thailand</link>
<guid>https://pratinidhi.in/myanmar-earthquake-kills-at-least-144-devastation-in-thailand</guid>
<description><![CDATA[ म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही हुई है, जिसमें 144 लोगों की मौत हो गई और 700 से अधिक घायल हो गए। थाईलैंड और चीन में भी झटके महसूस किए गए। थाईलैंड में एक इमारत गिरने से कई लोग दब गए। म्यांमार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है क्योंकि गृहयुद्ध के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है। मांडले में कई ऐतिहासिक इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन प्रतिक्रिया सक्रिय कर दी है। ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/msid-119666960,imgsize-18118,width-540,height-405,resizemode-75/myanmar-thailand-earthquake-kills-at-least-144-many-trapped-as-buildings-collapse-in-bangkok-mandalay.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 12:56:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>म्यांमार भूकंप, थाईलैंड भूकंप, प्राकृतिक आपदा, भूकंप, रेस्क्यू ऑपरेशन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के कारण 144 लोगों की जान चली गई है और 700 से अधिक घायल हो गए हैं। भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी गई। भूकंप के झटके थाईलैंड और चीन में भी महसूस किए गए, जिससे थाईलैंड में एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई और कई लोग मलबे में दब गए।<br><br>भूकंप के बाद म्यांमार और थाईलैंड में बचाव कार्य जारी है। म्यांमार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है क्योंकि गृहयुद्ध के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है। म्यांमार के एक सैन्य अधिकारी ने 144 मौतों की पुष्टि की है, जबकि इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी के अनुसार, हजारों लोगों को तत्काल आश्रय, भोजन और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। देश में संचार और परिवहन व्यवस्था ठप हो गई है, जिससे नुकसान का आकलन करने में समय लग सकता है। मांडले में कई ऐतिहासिक इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।<br><br>मांडले में भूकंप से मठों को नुकसान हुआ है और सागाइंग क्षेत्र में एक पुराना पुल ढह गया है। मांडले और यांगून को जोड़ने वाले राजमार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। म्यांमार की सत्तारूढ़ सेना ने आपातकाल की घोषणा की है और दुनिया से मदद मांगी है। बैंकॉक में एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई, और चीन के युन्नान और सिचुआन प्रांतों में भी नुकसान हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपातकालीन प्रतिक्रिया सक्रिय कर दी है।]]> </content:encoded>
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<title>ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी: हिन्दू धर्म पर विवाद, क्या है पूरा मामला?</title>
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<description><![CDATA[ ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी में &#039;लिव्ड हिंदू रिलीजन&#039; पाठ्यक्रम पर विवाद के बाद यूनिवर्सिटी ने अकादमिक स्वतंत्रता का समर्थन किया। प्रोफेसर उल्लेरी ने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म विभिन्न रूपों में है, जिसका ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ महत्वपूर्ण है। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि &#039;फंडामेंटलिज्म&#039; शब्द का अर्थ धर्म के मूल को बचाने का दावा करने वाले आंदोलन से है, न कि किसी धर्म की आलोचना से। प्रोफेसर उल्लेरी ने कहा कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य हिंदू धर्म के विभिन्न रूपों को समझाना है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 09:03:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी, हिन्दू धर्म, विवाद, अकादमिक स्वतंत्रता, लिव्ड हिंदू रिलीजन, फंडामेंटलिज़्म, प्रोफेसर उल्लेरी, हिंदुत्व, धार्मिक अध्ययन, पाठ्यक्रम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी में हिन्दू धर्म पर विवाद: विश्वविद्यालय ने दी सफाई</strong><br><br>ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में 'लिव्ड हिंदू रिलीजन' नामक पाठ्यक्रम को लेकर एक छात्र द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद, विश्वविद्यालय ने अकादमिक स्वतंत्रता का समर्थन किया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि यह पाठ्यक्रम धार्मिक अध्ययन के अंतर्गत आता है। प्रोफेसर उल्लेरी ने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म एक निश्चित रूप नहीं है, बल्कि विभिन्न रूपों में प्रकट होता है, और इसका ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ महत्वपूर्ण है।<br><br><strong>कोर्स की समीक्षा और यूनिवर्सिटी का रिएक्शन</strong><br><br>शिकायत के बाद, यूनिवर्सिटी के डीन और धार्मिक अध्ययन विभाग के डायरेक्टर ने शिकायत की जांच की और उसे टीचर से चर्चा के लिए भेजा। यूनिवर्सिटी ने साफ किया कि यह कोर्स धार्मिक अध्ययन के फील्ड में बेस्ड है, जो अलग-अलग धर्मों के आंदोलनों को समझने के लिए खास शब्दों का इस्तेमाल करता है, जैसे कि 'फंडामेंटलिज्म'।<br><br><strong>'फंडामेंटलिज्म' वर्ड का एजुकेशनल मतलब</strong><br><br>यूनिवर्सिटी ने यह भी क्लियर किया कि फंडामेंटलिज्म वर्ड का मतलब एक ऐसे आंदोलन से है, जो धर्म के ओरिजिनल या सही रूप को बचाने का दावा करता है। यह वर्ड एक हिस्टोरिकल नजरिए से धार्मिक आंदोलनों को समझने का एक तरीका है और इसका इस्तेमाल किसी भी धर्म के अगेंस्ट नहीं किया जाता। यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह वर्ड किसी भी धर्म की आलोचना के रूप में नहीं बल्कि धार्मिक विचारों की हिस्टोरिकल और सोशल प्रोसेस को समझने के लिए है।<br><br>प्रोफेसर उल्लेरी ने आगे कहा कि उनका मकसद हिंदू धर्म के अलग-अलग रूपों को समझाना है, न कि उसे किसी एक रूप में बांधना। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कोर्स में हिंदू धर्म के पुराने रूपों से लेकर आज के वक्त तक के अलग-अलग पहलुओं पर बात की जाती है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ट्रंप प्रशासन को निर्वासन में तेजी लाने से कोर्ट की रोक</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-judge-blocks-trump-administration-from-fast-tracking-deportations</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए प्रवासियों को किसी तीसरे देश में डिपोर्ट करने से रोक दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार को निर्वासित किए जाने वाले व्यक्ति को लिखित में नोटिस देना होगा और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा। न्यायाधीश ब्रायन मर्फी ने एक राष्ट्रव्यापी अस्थायी निरोधक आदेश जारी किया है। प्रवासियों के एक समूह ने कोर्ट में याचिका दायर कर इमिग्रेशन और कस्टम्स इंफोर्समेंट की नीति को चुनौती दी थी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 09:03:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप प्रशासन, निर्वासन, अदालत, अप्रवासी, अमेरिकी जज</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> ट्रंप प्रशासन को आव्रजन मामले में अदालत से करारा झटका लगा है। कोर्ट ने प्रशासन को उन प्रवासियों को किसी तीसरे देश में डिपोर्ट करने से रोक दिया है, जिन्हें निर्वासन के लिए नामित किया गया है। अदालत ने यह भी कहा है कि सरकार को निर्वासित किए जाने वाले व्यक्ति को लिखित में नोटिस देना होगा और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा। इस फैसले से न्याय विभाग में नाराजगी है।<br><br>अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रायन मर्फी ने एक राष्ट्रव्यापी अस्थायी निरोधक आदेश जारी किया है। इस आदेश का मतलब है कि आव्रजन कार्यवाही के दौरान प्रवासियों को उनकी पसंद के देशों के अलावा कहीं और निर्वासित नहीं किया जा सकता है।<br><br>अप्रवासियों के एक समूह ने कोर्ट में याचिका दायर कर इमिग्रेशन और कस्टम्स इंफोर्समेंट की नीति को चुनौती दी थी। इस नीति के तहत उन हजारों प्रवासियों को तेजी से निर्वासित किया जाना था, जिन्हें पहले हिरासत से रिहा किया जा चुका है। कोर्ट का कहना है कि बिना किसी सूचना के प्रवासियों को भेजना उन्हें उत्पीड़न और यातना के खतरे में डाल सकता है।<br><br>जज मर्फी, जिन्हें राष्ट्रपति जो बाइडन ने नियुक्त किया था, ने कहा कि यातना के खिलाफ कन्वेंशन के तहत प्रवासियों को उन देशों में भेजे जाने से सुरक्षा मिलनी चाहिए जहां उन्हें यातना का खतरा है।]]> </content:encoded>
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<title>म्यांमार में भूकंप से तबाही: इमारतें ढहीं, बैंकॉक में तबाही का मंजर</title>
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<description><![CDATA[ म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को शक्तिशाली भूकंप आया, जिसमें रिक्टर स्केल पर तीव्रता 7.2 मापी गई। भूकंप के चलते लोग सड़कों पर उतर आए और मांडले में एक इमारत ढह गई, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। म्यांमार के Sagaing में केंद्रित इस भूकंप से मांडलेय में इरावडी नदी पर बना एवा ब्रिज भी ढह गया। भारत ने म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप से हुई तबाही पर हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 18:23:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Myanmar, Earthquake, Bangkok, Building Collapse, Mandalay, Ava Bridge</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर पहले झटके की तीव्रता 7.2 मापी गई, जबकि दूसरे झटके की तीव्रता 7.0 रही।</p><br><p>भूकंप के कारण लोग सड़कों पर उतर आए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि म्यांमार के मांडले शहर में एक बहुमंजिला इमारत कुछ ही सेकंड में धराशायी हो गई। इमारत ढहने के बाद उसका मलबा धुएं के गुबार में बदल गया।</p><br><p>भूकंप का केंद्र म्यांमार का Sagaing क्षेत्र था। भूकंप के झटकों के चलते मांडलेय में इरावडी नदी पर बना एवा ब्रिज भी ढह गया।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>इजरायली संसद में जजों की नियुक्ति पर विवाद</title>
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<description><![CDATA[ इजरायल की संसद ने न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में राजनेताओं को अधिक अधिकार देने वाले विधेयक को मंजूरी दी है, जिससे देश में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप को कम करने के लिए जरूरी है। इस कानून के पारित होने के बाद इजरायल में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, क्योंकि आलोचकों का मानना है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने का प्रयास है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 18:23:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, नेतन्याहू, न्यायपालिका, संसद, विधेयक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इजरायल की संसद ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति में राजनेताओं को अधिक अधिकार देगा। इस विधेयक के अनुसार, न्यायाधीशों की चयन समिति में सरकार और विपक्ष द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शामिल होंगे। विपक्ष ने इस कदम को लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप को कम करने के लिए आवश्यक है।<br><br>इजरायली संसद ने गुरुवार को इस महत्वपूर्ण विधेयक को अंतिम रूप से पारित कर दिया, जिससे राजनेताओं को न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया में अधिक शक्ति मिल जाएगी। यह विधेयक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों का एक मुख्य कारण बन गया है। इस विधेयक के अनुसार, न्यायाधीशों की चयन समिति में नौ सदस्य होंगे। पहले, इज़राइल बार एसोसिएशन द्वारा चुने गए सदस्यों को हटाकर, सरकार और विपक्ष द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को नियुक्त किया जाएगा।<br><br>विपक्षी दलों ने इस विधेयक को इजरायल के लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खतरे के रूप में वर्णित किया है। उन्होंने अंतिम मतदान का बहिष्कार करते हुए इसका विरोध किया। न्याय मंत्री यारिव लेविन ने इस नए कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून संसद के अगले कार्यकाल से लागू होगा और चयन समिति के संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण गठन को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को उनके विचारों के आधार पर चयन से वंचित नहीं किया जाएगा।<br><br>इस विधेयक के पारित होने के बाद विरोध और भी तीव्र हो गया है। तेल अवीव में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले रॉनी मलमुक ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने एक ऐसा कानून पारित किया है जो लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और अब इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया है।<br><br>यह विधेयक इजरायल की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और यह उन कई मुद्दों में से एक है जिसके कारण 2023 में इजरायल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। सरकार का कहना है कि इस विधेयक और अन्य उपायों को लागू करने की आवश्यकता है ताकि सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को संसद के कार्यों में कम किया जा सके। आलोचकों का मानना है कि यह कदम न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने का प्रयास है। वे इसे न्यायपालिका के अधिकारों को खत्म करने का प्रयास मानते हैं, जिससे सरकार को अधिक शक्ति मिल सके।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कनाडा पीएम का अमेरिका पर गुस्सा: टैरिफ नीति से संबंध खत्म</title>
<link>https://pratinidhi.in/canada-pm-mark-carney-angry-over-donald-trump-tariff-policy</link>
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<description><![CDATA[ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका के साथ पुराने रिश्ते खत्म हो गए हैं, क्योंकि ट्रंप की टैरिफ नीति ने दोनों देशों के संबंधों को बदल दिया है। कार्नी ने ट्रंप की नीति को अनुचित बताया और जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, जिससे अमेरिका पर अधिकतम और कनाडा पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। ट्रंप ने घोषणा की थी कि आयातित कारों पर 25% टैरिफ लगेगा, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 14:06:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कनाडा, अमेरिका, ट्रंप, टैरिफ, मार्क कार्नी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ओटावा: कनाडा के प्रधानमंत्री <strong>मार्क कार्नी</strong> ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि <strong>अमेरिका</strong> के साथ अब पुराने रिश्ते <strong>खत्म</strong> हो गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका के साथ गहरे आर्थिक और सुरक्षा संबंधों का युग समाप्त हो गया है।<br><br><strong>कार्नी</strong> ने यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा कनाडा के खिलाफ लगाए गए भारी टैरिफ के जवाब में की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अमेरिका के सहयोगी देशों को नाराज कर दिया है, और कई देशों ने इसके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।<br><br><strong>कनाडाई प्रधानमंत्री</strong> ने कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीति ने कनाडा और अमेरिका के बीच संबंधों को स्थायी रूप से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्थाओं का मिलन, कड़ी सुरक्षा और सैन्य सहयोग पर आधारित पुराना रिश्ता अब खत्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के व्यापार समझौते भी अब पहले जैसे नहीं रहेंगे।<br><br><strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने घोषणा की थी कि अमेरिका आने वाली आयातित कारों और कार के कंपोनेंट्स पर 25% टैरिफ 3 अप्रैल से लागू होगा। इस फैसले से ग्लोबल सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने वाला है, और कारों की कीमत में वृद्धि होगी, जिससे ग्लोबल ट्रेड में तनाव बढ़ने की आशंका है।<br><br><strong>कार्नी</strong> ने ट्रंप की टैरिफ नीति को अनुचित और कारोबारी समझौतों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है, जिससे अमेरिका पर अधिकतम और कनाडा पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>फ्लोरिडा में गोलीबारी, तीन बच्चों समेत चार की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/florida-shooting-four-killed-including-three-children-two-injured</link>
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<description><![CDATA[ फ्लोरिडा के साउथ पेम्ब्रोक पार्क में बुधवार रात गोलीबारी में एक महिला और तीन बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। ब्रोवार्ड शेरिफ कार्यालय के अनुसार, घटना रात 8 बजे के करीब हुई। पुलिस प्रवक्ता इवान रॉस ने इसे घरेलू घटना बताया, हालांकि जांच जारी है। घायलों में एक वयस्क पुरुष और एक लड़की शामिल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 16:04:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>फ्लोरिडा, गोलीबारी, बच्चे, मौत, घायल, अमेरिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>फ्लोरिडा में गोलीबारी: तीन बच्चों समेत चार की जान, दो घायल</strong><br><br>साउथ फ्लोरिडा में बुधवार रात एक दुखद घटना घटी, जहाँ गोलीबारी में एक महिला और तीन बच्चों की जान चली गई। इस घटना में दो अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।<br><br>अधिकारियों के अनुसार, पेम्ब्रोक पार्क में रात 8 बजे के करीब गोलीबारी हुई। ब्रोवार्ड शेरिफ कार्यालय के अग्निशमन बचाव बटालियन प्रमुख माइकल केन ने बताया कि एक वयस्क पुरुष और एक लड़की को भी अस्पताल ले जाया गया है। उनकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।<br><br>पुलिस प्रवक्ता इवान रॉस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह घटना घरेलू विवाद का परिणाम लग रही है। फिलहाल, पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर विदेश मंत्रालय का बयान</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-government-not-accepting-persecution-of-minorities</link>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को स्वीकार नहीं कर रही है और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को कम करके आंक रही है। मंत्रालय के अनुसार, हसीना सरकार के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ गई है, और चरमपंथी समूह राजनीतिक शून्यता का फायदा उठा रहे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया है, जबकि भारत सरकार ने हिंसा में शामिल लोगों को न्याय के दायरे में लाने की मांग की है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 12:32:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, अल्पसंख्यक, उत्पीड़न, विदेश मंत्रालय, शेख हसीना, हिंसा, अंतरिम सरकार, शशि थरूर, भारत-बांग्लादेश संबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने संसद में एक समिति को जानकारी दी कि बांग्लादेश सरकार अपने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे व्यवस्थित उत्पीड़न को स्वीकार नहीं कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा की गंभीरता और स्वरूप को भी कम करके दिखाने की कोशिश की है। हसीना सरकार के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है। मंत्रालय ने शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की समिति को बताया कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर कुछ चरमपंथी समूह इस्लामी शासन स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने समिति को भारत-बांग्लादेश संबंधों और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी जानकारी दी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और उनके सहयोगियों ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की खबरों को मीडिया द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना बताया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कई बार अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>यूक्रेन युद्धविराम: रूस&amp;कीव में आरोप&amp;प्रत्यारोप, क्या है पुतिन का प्लान?</title>
<link>https://pratinidhi.in/ukraine-ceasefire-russia-and-kyiv-accuse-each-other-of-violating-the-agreement-what-is-putins-plan</link>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन और रूस ने एक-दूसरे पर ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की रोक का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिससे युद्धविराम की कवायद खटाई में पड़ती दिख रही है। जेलेंस्की ने रूस पर नए प्रतिबंधों की मांग की है, जबकि काला सागर में युद्धविराम और मालवाहक जहाजों के आवागमन पर शंकाएं हैं। अमेरिका ने रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संयंत्रों पर हमला न करने की सहमति की घोषणा की थी, लेकिन दोनों देशों ने तनाव बढ़ने के संकेत दिए हैं। रूस ने प्रतिबंध हटाने पर ही युद्धविराम प्रभावी करने की बात कही है। रूस ने यूक्रेन के नौ ड्रोन मार गिराए, जबकि यूक्रेन ने कहा कि रूस ने 117 ड्रोन से क्रिवी रीह पर हमला किया। जेलेंस्की ने शांति स्थापना पर संदेह जताया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 12:32:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, रूस, युद्धविराम, जेलेंस्की, पुतिन, काला सागर, ऊर्जा संयंत्र, प्रतिबंध, ड्रोन, अमेरिका, ब्रिक्स, डि-डॉलराइजेशन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>कीव, रायटर।</strong> यूक्रेन में युद्धविराम की कोशिशें फिलहाल नाकाम होती दिख रही हैं। यूक्रेन और रूस दोनों ने एक-दूसरे पर ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को लेकर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।<br><br>यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस स्थिति के चलते रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस बीच, काला सागर में युद्धविराम के लागू होने और मालवाहक जहाजों की आवाजाही शुरू होने पर भी संदेह बना हुआ है।<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत में काला सागर में युद्धविराम पर सहमति बनी थी। मंगलवार को अमेरिका ने घोषणा की थी कि रूस और यूक्रेन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि वे एक-दूसरे के ऊर्जा संयंत्रों और काला सागर में जहाजों व बंदरगाहों पर हमला नहीं करेंगे। लेकिन, इसके एक दिन बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं।<br><br>रूस ने यह भी कहा है कि जब तक उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाया नहीं जाता, तब तक काला सागर में युद्धविराम प्रभावी नहीं होगा। हालांकि, रूस ने 18 मार्च से ही यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले बंद कर दिए हैं, जबकि यूक्रेन ने रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए हैं।<br><br>रूस ने यह भी जानकारी दी कि मंगलवार और बुधवार की रात को उसने काला सागर के ऊपर यूक्रेन के नौ ड्रोन मार गिराए। इन ड्रोनों को क्रीमिया के गैस डिपो, कु‌र्स्क और ब्रियांस्क के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले करने के लिए भेजा गया था।<br><br>यूक्रेन की सेना ने कहा कि रूस ने 117 ड्रोन से क्रिवी रीह शहर पर हमला किया। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि इस बड़े हमले को देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि यूक्रेन में शांति स्थापित हो पाएगी।<br><br>इसके अलावा, अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने कहा है कि भारत, चीन और रूस जैसे देश डॉलर से दूरी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>एयर एशिया विमान में उड़ान के दौरान इंजन में आग</title>
<link>https://pratinidhi.in/air-asia-plane-engine-fire-kuala-lumpur-passengers-escaped</link>
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<description><![CDATA[ मलेशिया से चीन जा रही एयर एशिया की उड़ान में उड़ान भरने के तुरंत बाद इंजन में आग लगने से विमान को कुआलालंपुर में वापस उतारा गया। न्यूमेटिक डक्टिंग में खराबी के कारण इंजन में आग लगी थी, और विमान में सवार सभी 171 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। मलेशियाई अधिकारियों ने बताया कि विमान AK128 में उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही न्यूमेटिक डक्टिंग फटने से दाहिने इंजन में आग लग गई, जिसे विमान के सिस्टम ने तुरंत बुझा दिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 12:30:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Air Asia, Engine Fire, Kuala Lumpur, Flight AK128, Shenzhen</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>कुआलालंपुर:</strong> मलेशिया से चीन जा रही एयर एशिया की एक उड़ान में उड़ान भरने के तुरंत बाद इंजन में आग लग गई। इस वजह से विमान को कुआलालंपुर में वापस सुरक्षित लैंड कराया गया।
<br><br>
न्यूमेटिक डक्टिंग में खराबी के कारण इंजन में आग लगी, जिसके बाद विमान को कुआलालंपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वापस उतारा गया। विमान में सवार सभी 171 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। मलेशियाई अधिकारियों ने बताया कि घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
<br><br>
सेलंगोर राज्य अग्निशमन विभाग के अनुसार, चीन के शेन्जेन जा रही फ्लाइट AK128 ने बुधवार रात 9.59 बजे उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही न्यूमेटिक डक्टिंग फटने से दाहिने इंजन में आग लग गई। विमान के सिस्टम ने तुरंत आग को बुझा दिया था। अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने सभी यात्रियों और चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाला और जांच की कि कहीं और आग तो नहीं लग रही है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ज़ेलेंस्की का दावा: पुतिन की मौत जल्द, यूरोपीय संघ को चोट पहुंचाने की कोशिश</title>
<link>https://pratinidhi.in/zelensky-claims-putin-will-die-soon-attempts-to-harm-european-union</link>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही मर जाएंगे। उन्होंने अमेरिका से रूसी चालबाजियों के सामने मजबूत बने रहने की अपील की है। जेलेंस्की ने कहा कि पुतिन यूरोपीय संघ को अंदर से चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन के स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें तेज हैं, और उन्हें अक्सर सूजे हुए चेहरे और कांपते हुए देखा गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने पुतिन पर युद्धविराम की पुनर्व्याख्या करने का आरोप लगाया है। यूरोपीय संघ के नेता यूक्रेन के मुद्दे पर एक अहम बैठक करने जा रहे हैं, और नाटो ने रूस को पोलैंड पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 12:27:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Vladimir Putin, Zelensky, Ukraine, Russia, Health, Macron, War, Politics, Disease, Death</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पुतिन बहुत जल्द मर जाएंगे। इस बयान के बाद पुतिन के स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।</p><br><p><strong>ज़ेलेंस्की का दावा</strong></p><br><p>कीव में, ज़ेलेंस्की ने कहा कि पुतिन यूरोपीय संघ को अंदर से चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका से अपील की कि जब तक पुतिन हैं, वे रूसी चालबाजियों के सामने मजबूत बने रहें।</p><br><p><strong>पुतिन के स्वास्थ्य को लेकर अटकलें</strong></p><br><p>रूसी नेता के स्वास्थ्य को लेकर कई अफवाहें सामने आ रही हैं। ब्रिटिश न्यूज आउटलेट द सन की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन को अक्सर सूजे हुए चेहरे और कांपते हुए देखा गया है।</p><br><p>फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने पुतिन पर वार्ता की मेज से हटने के बाद युद्धविराम की पुनर्व्याख्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रूस शांति चाहता है, लेकिन यूक्रेनी क्षेत्र पर लगातार हमले कर रहा है।</p><br><p>गुरुवार को यूरोपीय संघ के नेता यूक्रेन के मुद्दे पर एक अहम बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें स्थायी युद्धविराम समझौते पर चर्चा होगी।</p><br><p>नाटो प्रमुख मार्क रूट ने रूस को पोलैंड या गठबंधन के किसी सदस्य पर हमला करने को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यूरोप को सुरक्षित रखने के लिए नाटो के अलावा कोई विकल्प नहीं है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने रॉ पर बैन लगाने की सिफारिश की</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-religious-freedom-panel-urges-sanctions-against-india-external-spy-agency</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भारत में अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए खुफिया एजेंसी रॉ पर बैन लगाने की सिफारिश की है। आयोग ने सिख अलगाववादियों के खिलाफ हत्या की साजिश में रॉ के शामिल होने का आरोप लगाया और भारत को &#039;विशेष चिंता वाला देश&#039; घोषित करने का सुझाव दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन से निपटने के लिए अमेरिका ने भारत से मजबूत संबंध बनाए, जिससे मानवाधिकार के मामले नजरअंदाज हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, रॉ पर बैन लगने की उम्मीद कम है, लेकिन सबकी नजरें ट्रंप प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 14:23:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, भारत, खुफिया एजेंसी, रॉ, प्रतिबंध, डोनाल्ड ट्रंप, धार्मिक स्वतंत्रता आयोग, अल्पसंख्यक, जासूसी एजेंसी, सिख अलगाववादी, हत्या की साजिश, विशेष चिंता वाला देश, मानवाधिकार, ट्रंप प्रशासन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[वॉशिंगटन से रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भारत में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता जताई है। आयोग ने भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। उनका आरोप है कि रॉ सिख अलगाववादियों के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल थी।
<br><br>
आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि भारत को 'विशेष चिंता वाला देश' घोषित किया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन से निपटने के लिए अमेरिका ने भारत के साथ मजबूत संबंध बनाने की कोशिश की, जिसके चलते भारत में मानवाधिकार के मुद्दों को अनदेखा किया गया।
<br><br>
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा रॉ पर प्रतिबंध लगाने की संभावना कम है। अब सबकी निगाहें ट्रंप प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि आयोग के आदेश सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यमन चैट लीक: NSA ने ली जिम्मेदारी, ट्रंप ने बताया मामूली गलती</title>
<link>https://pratinidhi.in/yemen-chat-leak-usa-national-security-advisor-takes-responsibility</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने यमन पर हमले की योजना के सोशल मीडिया पर लीक होने की जिम्मेदारी ली है। यह घटना तब हुई जब अमेरिकी अधिकारियों ने सिग्नल एप पर एक ग्रुप बनाया, जिसमें गलती से पत्रकार जेफरी गोल्डबर्ग भी शामिल हो गए। गोल्डबर्ग ने इस जानकारी का खुलासा किया, जिससे अमेरिका में हड़कंप मच गया। ट्रंप ने इस घटना को मामूली गलती बताया और वाल्ट्ज का बचाव किया, जबकि डेमोक्रेटिक सांसदों ने प्रशासन की आलोचना की। इस ग्रुप में 18 वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 12:09:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यमन, एनएसए, माइक वाल्ट्ज, डोनाल्ड ट्रंप, लीक, सोशल मीडिया, सिग्नल एप, जेफरी गोल्डबर्ग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले की योजना डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट के सदस्यों द्वारा सोशल मीडिया एप सिग्नल पर लीक हो गई। इस गलती की जिम्मेदारी अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने ली है।<br><br>अमेरिकी अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर एक ग्रुप बनाया था, जिसमें हमले की योजना साझा की गई थी। इस ग्रुप में गलती से द अटलांटिक पत्रिका के पत्रकार जेफरी गोल्डबर्ग भी जुड़ गए थे। गोल्डबर्ग को हमले की जानकारी इसी ग्रुप से मिली, जिसके बाद उन्होंने इसका खुलासा किया। इस घटना से अमेरिका में हड़कंप मच गया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बड़ी लापरवाही माना गया।<br><br>एनएसए माइक वाल्ट्ज ने इस घटना की पूरी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ही यह ग्रुप बनाया था ताकि सब कुछ समन्वित तरीके से हो। ट्रंप ने वाल्ट्ज का बचाव करते हुए कहा कि यह मामूली गलती है और वाल्ट्ज ने इससे सबक सीख लिया है। ट्रंप ने इस चूक का जिम्मेदार वाल्ट्ज के एक सहयोगी को ठहराया।<br><br>द अटलांटिक ने एक लेख में इस मामले का खुलासा किया था, जिसमें बताया गया कि गोल्डबर्ग को जिस ग्रुप में जोड़ा गया था, उसमें हमले की योजना पर चर्चा करने वाले 18 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। गोल्डबर्ग को लगा कि यह कोई फ्रॉड है, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि यह असली ट्रंप कैबिनेट है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;कुछ भी कर लो चीन नहीं जाऊंगा&amp;apos;, पायलट ने विमान में बैठे यात्रियों के सामने जोड़े हाथ; फ्लाइट ने लिया यू&amp;टर्न</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-pilot-folded-hands-in-front-of-passengers-flight-took-u-turn</link>
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<description><![CDATA[ लॉस एंजिल्स से शंघाई जा रही यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट को पायलट के पासपोर्ट भूल जाने के कारण वापस लौटना पड़ा। 22 मार्च को फ्लाइट UA 198 में 257 यात्री सवार थे, जब पायलट को प्रशांत महासागर के ऊपर अपनी गलती का एहसास हुआ। बिना पासपोर्ट के चीन में प्रवेश संभव नहीं था, इसलिए विमान को सैन फ्रांसिस्को वापस मोड़ दिया गया। एयरलाइन ने यात्रियों को मुआवजे की पेशकश की, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना हुई। एक यात्री ने इतनी बड़ी लापरवाही पर सवाल उठाया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 12:09:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>America, China, Pilot, Flight, Passport, United Airlines, Los Angeles, Shanghai</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>सैन फ्रांसिस्को:</strong> अमेरिका के लॉस एंजिल्स से चीन के शंघाई जा रही यूनाइटेड एयरलाइंस की एक फ्लाइट को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।
<br><br>
मामला यह है कि विमान के पायलट अपना पासपोर्ट लाना भूल गए थे, जिसके चलते उन्हें चीन में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिल पाती। इस वजह से फ्लाइट को वापस मोड़कर सैन फ्रांसिस्को में लैंड कराया गया। इस घटना से यात्रियों में काफी गुस्सा था।
<br><br>
शनिवार, 22 मार्च को यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट UA 198 लॉस एंजिल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुई थी, जिसमें 257 यात्री और 13 क्रू सदस्य सवार थे। जब विमान प्रशांत महासागर के ऊपर था, तभी पायलट को अपनी भूल का एहसास हुआ।
<br><br>
बिना पासपोर्ट के चीन में प्रवेश करना संभव नहीं था, इसलिए फ्लाइट को वापस सैन फ्रांसिस्को की ओर मोड़ दिया गया। यात्रियों को हुई असुविधा के लिए एयरलाइन ने खाने के वाउचर और मुआवजे की पेशकश की, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर एयरलाइन की आलोचना की। एक यात्री ने लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है?]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश में तख्तापलट की अफवाह: मोहम्मद यूनुस का बयान और शेख हसीना पर आरोप</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-coup-muhammad-yunus-comments-sheikh-hasina-allegations</link>
<guid>https://pratinidhi.in/bangladesh-coup-muhammad-yunus-comments-sheikh-hasina-allegations</guid>
<description><![CDATA[ बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने तख्तापलट की खबरों को अफवाह बताया और कहा कि कुछ लोग देश में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं। उन्होंने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पर अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया और लोगों से सतर्क रहने की अपील की। यूनुस ने चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कराने की तैयारी की जानकारी दी और जुलाई में हुए हत्याकांड के दोषियों को न्याय दिलाने की बात कही। उन्होंने अवामी लीग की सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 11:43:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, तख्तापलट, मोहम्मद यूनुस, शेख हसीना, बांग्लादेश सेना, आपातकालीन बैठक, अफवाह, अस्थिरता, चुनाव, अवामी लीग, मानवाधिकार उल्लंघन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ढाका: बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने देश को संबोधित करते हुए तख्तापलट की आशंकाओं पर बात की। उन्होंने इन खबरों को अफवाह बताते हुए कहा कि कुछ लोग देश में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं।<br><br>मोहम्मद यूनुस ने कहा कि गलत सूचना फैलाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग इस तरह की गतिविधियों में शामिल है और देश की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही है। यूनुस ने लोगों से अफवाहों से सतर्क रहने और एकता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अफवाहों को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र से मदद मांगी है।<br><br>यूनुस ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि चुनाव निष्पक्ष और विश्वसनीय हों। उन्होंने जुलाई में हुए सामूहिक हत्याकांड के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने अवामी लीग की सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया और कहा कि पिछली सरकार के दौरान प्रदर्शनों में 1,400 लोग मारे गए थे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>खुफिया रिपोर्ट: ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा, रूस का चौंकाने वाला दावा</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-intel-report-iran-is-not-building-nuclear-weapon-russia-developing-satellite-that-can-carry-bomb</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है। इससे पहले की रिपोर्टों में ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने का आरोप था, जिसके कारण अमेरिका ने उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम एक नया उपग्रह विकसित कर रहा है, जिसके अमेरिका और दुनिया के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। ईरान ने पहले 6 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम का संवर्धन करने का दावा किया था, लेकिन तेहरान का कहना है कि उसकी परमाणु गतिविधियाँ शांतिपूर्ण हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 11:43:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, परमाणु हथियार, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट, रूस, उपग्रह, यूरेनियम, वॉशिंगटन, ईरानी परमाणु हथियार, JCPOA, अमेरिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान वर्तमान में परमाणु हथियार नहीं बना रहा है। पहले की रिपोर्टों में कहा गया था कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के लिए आवश्यक सामग्री जुटा रहा है, जिसके चलते अमेरिका ने उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे.<br><br>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने छह परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम का संवर्धन कर लिया था। यह भी कहा गया है कि रूस परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम एक नया उपग्रह विकसित कर रहा है, जिसके अमेरिका और दुनिया के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।<br><br>वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान ने हाल के हफ्तों में अपने यूरेनियम भंडार में तेजी से वृद्धि की है, जिससे वह छह परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त सामग्री जमा कर चुका है।<br><br>ईरान की परमाणु गतिविधियाँ 1950 के दशक में अमेरिका की मदद से शुरू हुईं, लेकिन तब वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए थीं। अब, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद करना चाहता है। 1967 में, ईरान ने तेहरान विश्वविद्यालय में एक अनुसंधान रिएक्टर स्थापित किया और अमेरिका से समृद्ध यूरेनियम ईंधन प्राप्त किया।<br><br>1970 के दशक में, ईरान ने यूरोपीय देशों की ओर रुख किया और बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए एक जर्मन कंपनी के साथ अनुबंध किया, जिसे बाद में रूस ने पूरा किया। 2002 में नतानज़ और अराक परमाणु फैसिलिटी के खुलासे के बाद, पश्चिमी देशों ने ईरान पर प्रतिबंध और दबाव बढ़ा दिया।<br><br>2015 में ईरान ने JCPOA नामक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन 2018 में ट्रम्प ने इससे किनारा कर लिया, जिसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम कर दिया और परमाणु बम हासिल करने के करीब पहुँच गया। ईरान का कहना है कि उसकी परमाणु गतिविधियाँ शांतिपूर्ण हैं और सामूहिक विनाश के हथियारों का उत्पादन इस्लाम में निंदनीय है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>काला सागर में जहाजों पर हमले रोकने पर रूस और यूक्रेन सहमत</title>
<link>https://pratinidhi.in/russia-and-ukraine-agree-to-avoid-attacks-on-ships-in-black-sea</link>
<guid>https://pratinidhi.in/russia-and-ukraine-agree-to-avoid-attacks-on-ships-in-black-sea</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका ने घोषणा की है कि रूस और यूक्रेन काला सागर में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमत हो गए हैं। रूस ने कहा कि वह जहाजों की सुरक्षा पर नए समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को जेलेंस्की को समझौते का सम्मान करने का आदेश देना होगा। अमेरिका और यूक्रेन युद्धबंदियों के आदान-प्रदान में भी सहयोग करेंगे। रूस ने दावा किया कि यूक्रेनी हमले में दो पत्रकार मारे गए, और यूक्रेन ने एक कर्मचारी को हिरासत में लिया है जो रूसी सेना को जानकारी दे रहा था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 11:36:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, यूक्रेन, काला सागर, जहाज सुरक्षा, अमेरिका, समझौता, युद्धविराम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>रूस और यूक्रेन, अमेरिका की बात पर सहमत: काला सागर में जहाजों पर हमले नहीं होंगे</strong><br><br>काला सागर में जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आई है। अमेरिका ने मंगलवार को घोषणा की कि रूस और यूक्रेन, दोनों ही काला सागर में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमत हो गए हैं। इससे पहले, रूस ने कहा था कि वह जहाजों की सुरक्षा पर नए समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है।<br><br>व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका और यूक्रेन इस बात पर भी सहमत हैं कि अमेरिका युद्धबंदियों के आदान-प्रदान, नागरिक बंदियों की रिहाई और यूक्रेनी बच्चों की वापसी में मदद करेगा। रूस ने भी इस मामले पर सहमति जताई थी, लेकिन उसने यह शर्त रखी कि अमेरिका, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को समझौते का सम्मान करने का आदेश दे।<br><br>रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका से मिलने वाला ऐसा आदेश ही रूस के लिए विश्वास का आधार बनेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि क्या करना है और क्या नहीं। रूस ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन द्वारा किए गए एक हमले में दो पत्रकारों सहित छह लोग मारे गए थे। इसके अतिरिक्त, यूक्रेन की सुरक्षा सेवा ने एक ऐसे कर्मचारी को हिरासत में लिया है, जिस पर रूसी सेना को यूक्रेनी सेना की जानकारी देने का आरोप है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;मेहुल चोकसी पर हमारी कड़ी नजर&amp;apos;: बेल्जियम सरकार का सख्त बयान</title>
<link>https://pratinidhi.in/mehul-choksi-belgium-government-statement-on-fugitive-diamantaire</link>
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<description><![CDATA[ भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पर बेल्जियम सरकार की कड़ी नजर है। बेल्जियम के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें मेहुल चोकसी के बेल्जियम में होने की जानकारी है और इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। मेहुल चोकसी की पत्नी प्रीति बेल्जियम की नागरिक हैं और वह उनके साथ एंटवर्प में रह रहा है। मेहुल चोकसी पर बेल्जियम में निवास प्राप्त करने के लिए गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेज देने का आरोप है। भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है क्योंकि उस पर 13,500 करोड़ रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी का आरोप है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 11:36:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>मेहुल चोकसी, बेल्जियम, प्रत्यर्पण, भगोड़ा कारोबारी, बैंक लोन धोखाधड़ी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[भगोड़े हीरा कारोबारी <strong>मेहुल चोकसी</strong> पर बेल्जियम सरकार की कड़ी नजर है। बेल्जियम के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें मेहुल चोकसी के बेल्जियम में होने की जानकारी है और इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। <br><br>मेहुल चोकसी की पत्नी <strong>प्रीति बेल्जियम</strong> की नागरिक हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेहुल चोकसी अपनी पत्नी के साथ बेल्जियम के एंटवर्प में '<strong>एफ रेजीडेंसी कार्ड</strong>' के जरिए रह रहा है। <br><br>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेहुल चोकसी ने बेल्जियम में निवास प्राप्त करने के लिए गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेज दिए हैं। उसने अपनी नागरिकता के बारे में भी गलत जानकारी दी और एंटीगुआ और भारत की नागरिकता का खुलासा नहीं किया। <br><br>भारत सरकार मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। मेहुल चोकसी पर 13,500 करोड़ रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी का आरोप है। माना जाता है कि बेल्जियम जाने से पहले वह एंटीगुआ और बारबुडा में रह रहा था।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>&amp;apos;हम.. हम.. कुर्बानी...&amp;apos;, भारत को धमकी देते हुए कांपने लगे पाक राष्ट्रपति जरदारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-president-asif-ali-zardari-speech-viral-on-pakistan-day-trembling-while-threatening-india</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का पाकिस्तान दिवस पर भारत को धमकी देते हुए कांपते हुए भाषण का वीडियो वायरल हो गया है। भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने इसे हर पाकिस्तानी का मजाक बताया है। भाषण के दौरान, जरदारी को कई शब्दों को गलत तरीके से बोलते हुए सुना गया, जिससे यह स्पष्ट था कि उन्हें बोलने में कठिनाई हो रही थी। जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान भारत के &#039;नापाक इरादों&#039; को कभी सफल नहीं होने देगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 25 Mar 2025 18:09:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Asif Ali Zardari, India, Viral Video, Pakistan Day</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का पाकिस्तान दिवस पर दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें भारत को धमकी देते हुए कांपते और लड़खड़ाते हुए देखा जा सकता है।
<br><br>
इस घटना पर भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भी प्रतिक्रिया दी है और इसे हर पाकिस्तानी का मजाक बताया है।
<br><br>
पाकिस्तान दिवस के कार्यक्रम में राष्ट्रपति जरदारी ने सशस्त्र बलों की टुकड़ियों के सामने भाषण देते हुए भारत के खिलाफ कई विवादास्पद बातें कहीं।
<br><br>
भाषण के दौरान, जरदारी को कई शब्दों को गलत तरीके से बोलते हुए सुना गया, जिससे यह स्पष्ट था कि उन्हें बोलने में कठिनाई हो रही थी। सोशल मीडिया पर इस भाषण का वीडियो वायरल होने के बाद, लोगों ने जरदारी और पाकिस्तान की जमकर खिल्ली उड़ाई।
<br><br>
जरदारी ने अपने भाषण में कहा कि पाकिस्तान भारत के 'नापाक इरादों' को कभी सफल नहीं होने देगा, लेकिन उनकी लड़खड़ाती जुबान और आत्मविश्वास की कमी ने उनके शब्दों को कमजोर कर दिया।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>लंदन की सड़कों पर ममता बनर्जी का सादगी भरा अंदाज</title>
<link>https://pratinidhi.in/mamata-banerjee-spotted-jogging-in-london-hyde-park-video</link>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का लंदन के हाइड पार्क में जॉगिंग करते हुए वीडियो वायरल हो रहा है। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने उनकी लंदन यात्रा की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिसमें वे बकिंघम पैलेस से हाइड पार्क तक घूमती नजर आ रही हैं। ममता बनर्जी ने हरे रंग की बॉर्डर वाली सफेद सूती साड़ी, काला कोट और चप्पल पहनी थी। वह बंगाल में निवेश लाने के लिए यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के सेमिनार में भी भाग लेंगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 25 Mar 2025 17:57:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Mamata Banerjee, London, Hyde Park, Viral Video, TMC</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>लंदन:</strong> पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों ब्रिटेन दौरे पर हैं। हाल ही में, उन्हें लंदन के हाइड पार्क में सफेद साड़ी और चप्पल पहने जॉगिंग करते हुए देखा गया,  जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।<br><br>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी की लंदन यात्रा की कई तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। इन वीडियो में, ममता बनर्जी को बकिंघम पैलेस से हाइड पार्क तक घूमते हुए देखा जा सकता है।<br><br>इस दौरान ममता बनर्जी हरे रंग की बॉर्डर वाली सफेद सूती साड़ी, काला कोट और अपनी खास सफेद चप्पल पहने नजर आईं। उन्होंने ठंड से बचने के लिए काले रंग का कार्डिगन और शॉल भी ओढ़ा था। कुणाल घोष ने यह भी बताया कि ममता बनर्जी के अनुसार, यह केवल सैर नहीं, बल्कि वार्म-अप है।<br><br>यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी को जॉगिंग करते देखा गया है। इससे पहले 2023 में स्पेन की आधिकारिक यात्रा के दौरान भी उन्होंने मैड्रिड में जॉगिंग की थी। बंगाल में निवेश लाने के लिए ममता बनर्जी यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा आयोजित एक सेमिनार में भी भाग लेंगी।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>अमेरिकी F&amp;47 बनाम चीनी J&amp;36: छठी पीढ़ी के विमानों की जंग</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-f-47-vs-chinese-j-36-battle-for-sixth-generation-fighter-jet</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और चीन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दौड़ में हैं। अमेरिका के F-47 और चीन के J-36 विमानों में कड़ी टक्कर है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने F-47 की खूब तारीफ की है, जिसमें स्टेल्थ क्षमताएं और आधुनिक हथियार होंगे। वहीं, चीन का J-36 भी तीन इंजन और कई आधुनिक तकनीकों से लैस है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ इसे छठी पीढ़ी का विमान मानने से हिचकिचा रहे हैं। दोनों देशों के ये विमान भविष्य में हवाई युद्ध की दिशा तय कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 25 Mar 2025 12:31:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>F-47, J-36, sixth-generation fighter, US, China, NGAD</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका और चीन के बीच छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। दोनों देश इस तकनीक को हासिल करने के लिए ज़ोर लगा रहे हैं। अमेरिका अपने विमान को एफ-47 और चीन जे-36 नाम दे रहा है।<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एफ-47 के बारे में काफ़ी बातें की हैं। उन्होंने कहा कि इसमें अद्भुत क्षमताएं होंगी और यह अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा बनाया जाएगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के दुश्मन इसे देख भी नहीं पाएंगे। अभी, लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एफ-35 अमेरिकी वायुसेना का सबसे शक्तिशाली विमान है, जिसकी कीमत 80 मिलियन से 115 मिलियन डॉलर है। कुछ लोग इसे 'सफेद हाथी' भी कहते हैं। एफ-47 को एफ-22 रैप्टर की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है।<br><br>एफ-47 नाम के पीछे की कहानी यह है कि ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह सिर्फ़ एक संयोग है। इस विमान को आधिकारिक तौर पर नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस (NGAD) कहा जाता है, जिसका मकसद चीन और रूस जैसे देशों से मुकाबला करना है।<br><br>ट्रंप ने यह भी कहा कि एफ-47 अब तक का सबसे घातक विमान होगा और इसका परीक्षण कई सालों से गुप्त रूप से चल रहा है। उन्होंने इसकी गति, क्षमता और पेलोड की भी प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे देश भी इसे खरीदना चाहते हैं।<br><br>एफ-47 की विशेषताओं को गुप्त रखा जा रहा है, लेकिन इसमें स्टेल्थ क्षमताएं, उन्नत सेंसर और आधुनिक इंजन होंगे। यह स्वायत्त ड्रोन के साथ भी उड़ान भरेगा। इस विमान को बनाने में 20 बिलियन डॉलर की लागत आएगी, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि यह लागत और भी बढ़ सकती है।<br><br>जनरल डेविड डब्ल्यू ऑल्विन के अनुसार, एफ-47 दुनिया का पहला चालक दल वाला छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों से एक्स-प्लेन NGAD तकनीक का परीक्षण चल रहा है।<br><br>चीन का जे-36 तीन WS-10C टर्बोफैन इंजन से चलता है। माना जा रहा है कि यह ऊंचाई पर तेज़ गति से उड़ान भरने के लिए बनाया गया है। इसमें उन्नत हथियार और सेंसर भी होंगे। इसकी लंबाई लगभग 22 मीटर और पंखों का फैलाव 20 मीटर है। कुछ लोगों का मानना है कि इसमें दो पायलटों के लिए कॉकपिट भी हो सकता है। जे-36 के पहले परीक्षण की तस्वीरें दिसंबर 2024 में सामने आई थीं। चीन का दावा है कि यह छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, लेकिन इसकी पुष्टि करना मुश्किल है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>दक्षिण कोरिया: जंगलों की आग से शहरों में इमरजेंसी, सरकार सक्रिय</title>
<link>https://pratinidhi.in/south-korea-wildfires-emergency-declared-due-to-spreading-fires</link>
<guid>https://pratinidhi.in/south-korea-wildfires-emergency-declared-due-to-spreading-fires</guid>
<description><![CDATA[ दक्षिण कोरिया के कई क्षेत्रों में जंगल में भीषण आग लग गई है। आग तेजी से फैल रही है और कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। उत्तरी और दक्षिणी ग्येओंगसांग प्रांतों और उल्सान शहर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। बुसान और डेजॉन जैसे शहरों में भी चेतावनी जारी की गई है। आग में तीन फायर फाइटर और एक सरकारी कर्मचारी सहित चार लोगों की जान चली गई है। तेज हवाओं से आग बुझाने में मुश्किल हो रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:08:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>दक्षिण कोरिया, जंगल की आग, आपातकाल, ग्येओंगसांग प्रांत, उल्सान शहर, फायर फाइटर, हेलीकॉप्टर, प्रदूषण, मौसम, इमरजेंसी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[दक्षिण कोरिया के कई क्षेत्रों में जंगल में भीषण आग लग गई है। यह आग बहुत तेजी से फैल रही है और इसने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है।<br><br>आग के लगातार भीषण होने के बाद सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। आग लगने की वजह से लाखों की तादाद में लोग प्रभावित हैं। बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है।<br><br>आग से सबसे ज्यादा नुकसान उत्तरी और दक्षिणी ग्येओंगसांग प्रांतों और उल्सान शहर में हुआ है। कोरिया फॉरेस्ट सर्विस ने जिन जगहों पर आग लगने की चेतावनी जारी की है, उनमें बुसान और डेजॉन जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं।<br><br>इसके चलते उल्सान और बुसान को जोड़ना वाला हाईवे भी बंद कर दिया गया है। दक्षिण कोरिया के एक अधिकारी ने बताया कि आग में तीन फायर फाइटर और एक सरकारी कर्मचारी सहित चार लोगों की जान चली गई है। उन्होंने कहा कि तेज हवाओं की वजह से आग को बुझाने में मुश्किल हो रही है। आग पहाड़ियों और जंगल में फैलती जा रही है।<br><br>कोरिया फॉरेस्ट सर्विस ने बताया है कि सबसे भीषण आग सांचेओंग में लगी है। यह एक ग्रामीण इलाका है। यहां 260 लोगों को अपना घर छोड़कर अस्थायी शिविरों में जाना पड़ा है।<br><br>सांचेओंग में शुक्रवार दोपहर को आग लगी और शनिवार शाम तक 500 हेक्टेयर से ज्यादा इलाके में फैल गई। उत्तरी ग्येओंगसांग प्रांत के यूसेओंग में 400 से ज्यादा लोगों को घर छोड़ना पड़ा है। यहां आग 300 हेक्टेयर में फैल चुकी है। गिम्हे शहर में भी आग लगने की वजह से लोगों को घर छोड़ना पड़ा है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश में कट्टरवाद: यूनुस सरकार और ISI का गठजोड़, भारत के लिए बढ़ी चिंता</title>
<link>https://pratinidhi.in/islamist-surge-in-bangladesh-yunus-regime-isi-role-concerns-for-india</link>
<guid>https://pratinidhi.in/islamist-surge-in-bangladesh-yunus-regime-isi-role-concerns-for-india</guid>
<description><![CDATA[ बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार के दौरान इस्लामी कट्टरपंथ बढ़ रहा है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का दखल बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा है. यूनुस सरकार ने चरमपंथी गुटों को बढ़ावा दिया है और आतंकियों को रिहा किया है. जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों पर प्रतिबंध हटा दिया गया है, और हिज्ब उत-तहरीर के संस्थापक सदस्य को गृह सचिव बनाया गया है. ISI पर बांग्लादेश में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और कॉक्स बाजार को हथियार तस्करी का केंद्र बनाने के आरोप हैं. पाकिस्तानी सेना के पूर्व सैनिक विद्रोहियों के लिए ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं, जिससे बांग्लादेश की सामाजिक सद्भावना खतरे में है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:08:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh, ISI, Islamic fundamentalism, Muhammad Yunus, Extremism, India, Rohingya</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान इस्लामी कट्टरपंथ बढ़ रहा है. <strong>पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI</strong> का दखल भी बढ़ गया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है. <br><br>द संडे गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस सरकार में चरमपंथी गुटों को बढ़ावा दिया जा रहा है. <strong>शेख हसीना</strong> के सत्ता से हटने के बाद कई ऐसी नीतियां अपनाई गई हैं, जो कट्टरपंथी तत्वों को मजबूत कर रही हैं. इससे भारत की चिंता बढ़ गई है.<br><br>यूनुस सरकार ने जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों पर प्रतिबंध हटा दिया है, जिन पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के आरोप हैं. जमात का छात्र संगठन <strong>इस्लामी छत्र शिबिर (ICS)</strong> भी सक्रिय हो गया है, जिस पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं. यूनुस ने हिज्ब उत-तहरीर के संस्थापक सदस्य नासिमुल गनी को गृह सचिव बनाया है.<br><br>यूनुस सरकार ने कई आतंकियों को रिहा किया है, जिनमें अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के चीफ जशीमुद्दीन रहमानी भी शामिल हैं. ABT पर धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर्स की हत्या के आरोप हैं. ISI पर बांग्लादेश में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और कॉक्स बाजार को हथियार तस्करी का केंद्र बनाने के आरोप हैं. यहां से हथियार भारत के पूर्वोत्तर में विद्रोही समूहों तक पहुंचाए जाते हैं.<br><br>रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के पूर्व सैनिक कट्टरपंथियों और रोहिंग्या विद्रोहियों के लिए ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं. <strong>इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज (ICPS)</strong> के विश्लेषकों का कहना है कि इससे बांग्लादेश की सामाजिक सद्भावना खतरे में है और भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं.]]> </content:encoded>
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<title>यमन में अमेरिकी बमबारी: हूती का इजरायल पर मिसाइल हमला!</title>
<link>https://pratinidhi.in/yemen-america-airstrikes-hodeidah-airport-houthis-missile-attack-israel</link>
<guid>https://pratinidhi.in/yemen-america-airstrikes-hodeidah-airport-houthis-missile-attack-israel</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर फिर से हवाई हमले किए। इन हमलों में सहर, किताफ और मारिब प्रांत के मजार शहर को निशाना बनाया गया। हूती विद्रोहियों ने यमन से इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया, जिससे इजराइल का हवाई यातायात बाधित हुआ। अमेरिका ने यूएसएस हैरी एस ट्रूमैन नामक युद्धपोत को पश्चिम एशिया भेजा है। होदेदा शहर के हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जिसमें हूती नौसेना के कमांडर मंसूर अल-सादी की मौत हो गई। इजराइल ने यमन से आई मिसाइल को हवा में नष्ट कर दिया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:07:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यमन, अमेरिका, हूती, इजरायल, हवाई हमला, बैलेस्टिक मिसाइल, लाल सागर, होदेदा, सहर, किताफ, मारिब, तेल अवीव, बेन गुरियन हवाई अड्डा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी सेना ने एक बार फिर यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में सहर, किताफ और मारिब प्रांत के मजार शहर को निशाना बनाया गया। साथ ही, हूती विद्रोहियों ने यमन से इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया, जिसके कारण इजराइल का हवाई यातायात आधे घंटे से अधिक समय तक बाधित रहा।<br><br>गाजा, लेबनान और सीरिया में इजरायली हमलों के जवाब में, अमेरिका ने यूएसएस हैरी एस ट्रूमैन नामक एक और विमानवाहक युद्धपोत को पश्चिम एशिया में भेजा है। इसके अतिरिक्त, यूएसएस कार्ल विंसन नामक एक अमेरिकी विमानवाहक पोत अपने विध्वंसकों के साथ पहले से ही यमन के पास लाल सागर में तैनात है। इसी बीच, अमेरिकी सेना ने हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले यमन पर फिर से हवाई हमले किए।<br><br>इस बार, होदेदा शहर के हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जहाँ कम समय के अंतराल में तीन हमले किए गए। अमेरिकी विमानों ने सहर और किताफ शहरों पर भी बमबारी की, साथ ही मारिब प्रांत के मजार शहर पर भी हमले हुए। सऊदी अरब के सरकारी टेलीविजन चैनल अल अरेबिया और अल हादत के अनुसार, अमेरिकी हमले में हूती की नौसेना के कमांडर मंसूर अल-सादी की मौत हो गई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि हमलों में केवल हूती के ठिकानों को निशाना बनाया गया है।<br><br>रविवार को, हूती विद्रोहियों ने यमन से इजराइल पर एक बैलेस्टिक मिसाइल हमला किया। हूती का दावा है कि तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर दागी गई मिसाइल से हुए नुकसान का अभी पता नहीं चल पाया है। इस हमले के कारण इजराइल का हवाई यातायात आधे घंटे से अधिक समय तक रुका रहा। हालांकि, इजराइल ने कहा है कि उसने यमन से आई मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में भीषण तबाही: इजरायली हमलों में 50,000 से अधिक फिलिस्तीनी हताहत, 15,000 बच्चे शिकार</title>
<link>https://pratinidhi.in/palestinian-death-toll-in-gaza-war-crosses-50000-israeli-airstrikes-intensify</link>
<guid>https://pratinidhi.in/palestinian-death-toll-in-gaza-war-crosses-50000-israeli-airstrikes-intensify</guid>
<description><![CDATA[ गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध में मरने वालों की संख्या 50,000 के पार हो गई है। इजरायल ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए अचानक हमले किए, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इजरायली सेना ने उत्तरी गाजा में प्रवेश किया है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 50,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 1,13,000 से अधिक घायल हुए हैं। दक्षिणी गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में हमास के एक वरिष्ठ नेता और 26 अन्य फिलिस्तीनी मारे गए। इजरायली सेना राफा शहर में भी प्रवेश कर चुकी है, जिसके कारण हजारों फिलिस्तीनियों को पलायन करना पड़ा। मृतकों में 15,613 बच्चे भी शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:02:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Gaza, Israel, Palestine, Hamas, Death Toll, Airstrikes, Conflict, Middle East</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा में मानवीय संकट: इजरायली हमलों में 50,000 से अधिक फिलिस्तीनी हताहत</strong><br><br>गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष में मरने वालों की संख्या 50,000 के पार हो गई है। हाल ही में, इजरायल ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए अचानक हमले किए, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इसके बाद, इजरायली सेना ने उत्तरी गाजा में प्रवेश किया है।<br><br><strong>मुख्य बातें:</strong><br><ul><li>गाजा में युद्ध में 50,000 से ज्यादा लोगों की मौत</li><li>इजरायली हमले में हमास के एक बड़े नेता की मृत्यु</li><li>गाजा के 15,613 बच्चों ने भी अपनी जान गंवाई</li></ul><br>गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल और हमास के बीच युद्ध में मरने वाले फिलिस्तीनियों की संख्या 50,000 से अधिक हो गई है। दक्षिणी गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में हमास के एक वरिष्ठ नेता और 26 अन्य फिलिस्तीनी मारे गए। इजरायली सेना राफा शहर में भी प्रवेश कर चुकी है, जिसके कारण हजारों फिलिस्तीनियों को पलायन करना पड़ा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि 50,000 मौतों के अलावा, 1,13,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कनाडा में चुनाव की घोषणा: मार्क कार्नी ने मांगा ट्रंप से निपटने के लिए समर्थन</title>
<link>https://pratinidhi.in/canada-election-mark-carney-announces-election-to-fight-trump</link>
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<description><![CDATA[ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 28 अप्रैल को चुनाव की घोषणा की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चल रहे व्यापार युद्ध का हवाला देते हुए जनता से समर्थन मांगा है। कार्नी का मुकाबला कंजरवेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलिवरे से होगा, जिन्होंने कनाडा फर्स्ट के नारे के साथ अपना अभियान शुरू किया है। कार्नी ने ट्रंप पर कनाडा की संप्रभुता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:02:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कनाडा चुनाव, मार्क कार्नी, डोनाल्ड ट्रंप, पियरे पोइलिवरे, कनाडा की अर्थव्यवस्था, अमेरिकी राष्ट्रपति, लिबरल पार्टी, कंजर्वेटिव पार्टी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[कनाडा के प्रधानमंत्री <Strong>मार्क कार्नी</Strong> ने गवर्नर-जनरल <Strong>मैरी साइमन</Strong> से मिलकर संसद भंग करने का अनुरोध किया और <Strong>28 अप्रैल</Strong> को चुनाव की तारीख घोषित की। <br><br>लिबरल पार्टी के <Strong>मार्क कार्नी</Strong> का मुकाबला कंजरवेटिव पार्टी के नेता <Strong>पियरे पोइलिवरे</Strong> से होगा। <Strong>जस्टिन ट्रूडो</Strong> के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बने <Strong>कार्नी</Strong> ने जनता से समर्थन मांगते हुए कहा कि वह <Strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</Strong> के साथ चल रहे व्यापार युद्ध से निपटने के लिए समर्थन चाहते हैं। <br><br><Strong>कार्नी</Strong> ने कहा कि <Strong>ट्रंप</Strong> के व्यापारिक कदमों से कनाडा की संप्रभुता को खतरा है। उन्होंने कंजरवेटिव नेता <Strong>पोइलिवरे</Strong> पर <Strong>ट्रंप</Strong> की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया। <Strong>कार्नी</Strong> ने कनाडाई अर्थव्यवस्था को बेहतर करने की बात कही है।<br><br>उन्होंने कहा कि <Strong>ट्रंप</Strong> की अनुचित व्यापारिक कार्रवाइयां कनाडा की संप्रभुता के लिए खतरा हैं। <Strong>कार्नी</Strong> ने कनाडाई लोगों से <Strong>ट्रंप</Strong> से निपटने और अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि <Strong>अमेरिकी राष्ट्रपति</Strong> कनाडा को अपना हिस्सा मानते हैं और उसे तोड़ना चाहते हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे।<br><br>कंजरवेटिव नेता <Strong>पोइलिवरे</Strong> ने <Strong>कनाडा फर्स्ट</Strong> के नारे के साथ अपना चुनाव अभियान शुरू किया और <Strong>कार्नी</Strong> को <Strong>ट्रंप</Strong> से निपटने के लिए कमजोर नेता बताया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यमन में अमेरिकी हवाई हमले से तबाही, हूतियों के गढ़ में एक की मौत, 15 घायल</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-airstrike-on-yemen-capital-sana-houthi-rebels</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने यमन की राजधानी सना में हवाई हमले किए, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 15 घायल हो गए। यह हमला हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाके में हुआ। हूती विद्रोहियों ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी सेना ने लाल सागर में तैनात होकर सादा प्रांत पर भी हवाई हमले किए हैं। ये हमले हूतियों के गढ़ के पास हुए। होदेइदा हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया। ये हमले हूतियों द्वारा लाल सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत पर हमले के दावों के बाद हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:02:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यमन, अमेरिका, हूती, सना, हवाई हमला, इजरायल</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>यमन की राजधानी सना में अमेरिका ने हवाई हमले किए, जिससे शहर में तबाही मची है।</strong><br><br>यह हमला होदेदाह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी किया गया, जो हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही हूतियों के खिलाफ बड़े हमलों की घोषणा की थी। सना में हुए हवाई हमले में 15 लोग घायल हो गए हैं।<br><br><strong>हूती विद्रोहियों ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।</strong><br><br>स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सना के पश्चिमी उपनगर असर में हुए हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई और 15 लोग घायल हो गए। अल-मसीरा टीवी ने बताया कि हमले में तीन बच्चे और दो महिलाएं भी घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई इमारतें नष्ट हो गईं और बचावकर्मी मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं।<br><br><strong>लाल सागर में तैनात अमेरिकी सेना ने सादा प्रांत पर भी हवाई हमले किए हैं।</strong><br><br>ये हमले हूतियों के गढ़ माने जाने वाले सादा शहर के पास हुए। होदेइदा हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया, लेकिन वहां किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। ये हमले हूतियों द्वारा लाल सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत और इजरायल के हवाई अड्डे पर हमले के दावों के बाद हुए हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>श्रीलंका में चीनी विमान हादसा: सुरक्षा पर सवाल</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-made-plane-crash-in-sri-lanka-raises-safety-concerns</link>
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<description><![CDATA[ श्रीलंकाई वायुसेना का चीन निर्मित एक और प्रशिक्षण विमान ध्वस्त हो गया, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। वारियापोला में के-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से अन्य विमानों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है। दुर्घटना से पहले पायलट विमान से बाहर निकल गए। 15 दिसंबर, 2020 को भी श्रीलंकाई वायुसेना का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। यह विमान चीन, मिस्र, पाकिस्तान, जिम्बाब्वे और श्रीलंका समेत कई देशों की सेना में है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 07:02:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>China, Sri Lanka, Plane Crash, Chinese Made Plane, Air Force, Training Aircraft, Safety Concerns</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[श्रीलंका में चाइना में बने विमान की दुर्घटना के बाद सुरक्षा पर सवाल<br><br>श्रीलंकाई वायुसेना का एक और चाइना निर्मित प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, जिससे इसकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। वारियापोला इलाके में एक चाइना निर्मित के-8 प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से अन्य विमानों की सुरक्षा और संचालन को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुर्घटना से पहले मुख्य प्रशिक्षक पायलट और प्रशिक्षु पायलट विमान से बाहर निकल गए थे।<br><br>जीत कुमार द्वारा लिखित और संपादित, अपडेटेड: रविवार, 23 मार्च 2025, 03:00 AM (IST)<br><br>कोलंबो: श्रीलंकाई वायुसेना का चाइना निर्मित एक और प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, जिससे इसकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। वारियापोला इलाके में शुक्रवार को चाइना निर्मित के-8 प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अन्य विमानों की सुरक्षा और संचालन तैयारी को लेकर चिंता बढ़ गई है।<br><br>पहले की दुर्घटनाएं<br>15 दिसंबर 2020 को, श्रीलंकाई वायुसेना का एक पीटी-6 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें एक प्रशिक्षु पायलट की जान चली गई। 7 अगस्त 2023 को, एक पीटी-6 विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट और फ्लाइट इंजीनियर दोनों की मौत हो गई।<br><br>जांच समिति का गठन<br>मुख्य प्रशिक्षक पायलट और प्रशिक्षु पायलट दुर्घटना से पहले विमान से बाहर निकलने में सफल रहे। वर्तमान में, दोनों का कुरुनेगला टीचिंग अस्पताल में इलाज चल रहा है। श्रीलंकाई वायुसेना के कमांडर एयर मार्शल बंडू एदिरिसंघे ने दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए सात सदस्यों की एक विशेष जांच समिति का गठन किया है।<br><br>कई देशों की सेना में शामिल<br>सिंगल-इंजन काराकोरम-8 (के-8) जेट प्रशिक्षक विमान चीन, मिस्र, पाकिस्तान, जिम्बाब्वे और श्रीलंका सहित कई देशों की सेना में उपयोग किया जाता है। सितंबर 2018 में, सूडानी सेना का एक के-8 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। बोलीविया में भी एक विमान आवासीय क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, और इस साल जनवरी में पाकिस्तानी वायुसेना का पीके-8 मुश्शाक भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>लेबनान पर इजरायल का हवाई हमला, हिजबुल्लाह का कमांड सेंटर तबाह</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-airstrike-on-lebanon-hezbollah-command-center-destroyed-ceasefire-threatened</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल ने लेबनान पर हवाई हमले किए, जिसमें हिजबुल्लाह का कमांड सेंटर तबाह हो गया। यह कार्रवाई लेबनान से इजरायल पर दागे गए रॉकेटों के जवाब में की गई। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान को निशाना बनाया, जिससे युद्धविराम को खतरा पैदा हो गया है। हिजबुल्लाह ने संलिप्तता से इनकार किया है, लेकिन नेतन्याहू ने हवाई हमले का आदेश दिया। UNIFIL ने चिंता जताते हुए संयम बरतने की अपील की है। लेबनान की सेना ने रॉकेट लॉन्च साइट को नष्ट किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:59:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, लेबनान, हिजबुल्लाह, युद्धविराम, हवाई हमला, नेतन्याहू</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>तेल अवीव:</strong> इजरायल ने लेबनान पर जबरदस्त हवाई हमले किए हैं, जिसमें हिजबुल्लाह का कमांड सेंटर तबाह हो गया है। यह कार्रवाई लेबनान से इजरायल पर दागे गए रॉकेटों के जवाब में की गई।<br><br>इजरायली सेना के अनुसार, उनके तोपखाने और हवाई हमलों ने दक्षिणी लेबनान को निशाना बनाया, जिससे इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे युद्धविराम को खतरा पैदा हो गया है। इजरायल ने यह भी कहा कि लेबनान की ओर से पांच रॉकेट दागे गए, जिनमें से तीन को उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया।<br><br>हिजबुल्लाह के एक सूत्र ने इस हमले में समूह की संलिप्तता से इनकार किया है और कहा है कि वे संघर्ष विराम के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने लेबनान में आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले करने का आदेश दिया है। लेबनान की सेना ने भी कहा है कि उन्होंने इजरायल की ओर रॉकेट दागने वाली तीन अस्थायी बैटरियों को नष्ट कर दिया है।<br><br>लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति सेना (UNIFIL) ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, ताकि संघर्ष विराम समझौते को बचाया जा सके।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में कैंसर अस्पताल पर हमला: इजरायल का दावा, हमास का अड्डा था</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-blows-up-gaza-cancer-hospital-hamas-command-center</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल ने गाजा के एकमात्र कैंसर अस्पताल और पास के एक मेडिकल स्कूल को हवाई हमले में उड़ा दिया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है। इजरायल का दावा है कि इन जगहों का इस्तेमाल हमास कर रहा था, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया है। तुर्की ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे स्वास्थ्य प्रणाली को नष्ट करने जैसा बताया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:59:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Gaza, Israel, Cancer Hospital, Hamas, Attack, Palestine, Turkey</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इजरायल ने गाजा के एकमात्र कैंसर अस्पताल और पास के एक मेडिकल स्कूल को नष्ट कर दिया है। <br><br>यह हमला इजरायल द्वारा बंधक समझौते पर प्रगति न होने के बाद गाजा में किए जा रहे बड़े पैमाने पर हमलों का हिस्सा है। इजरायल का दावा है कि हमास इस अस्पताल से अपना कमांड सेंटर चला रहा था। <br><br>तेल अवीव में हुए इस हमले की मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों ने निंदा की है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मेडिकल सुविधाओं पर हमला करना मना है। हालांकि, इजरायल का कहना है कि इन जगहों का इस्तेमाल हमास के कमांड सेंटर और हथियारों के डिपो के तौर पर हो रहा था।<br><br> शुक्रवार को हुए विस्फोट में गाजा के तुर्की-फिलिस्तीनी मैत्री अस्पताल को भी नुकसान पहुंचा, जो पहले से ही इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त था। अल जजीरा के तारिक अबू अज्जूम ने बताया कि इस वजह से हजारों कैंसर मरीज इलाज से वंचित हो गए हैं। <br><br>30 अक्टूबर, 2023 को भी इस अस्पताल पर हमला हुआ था और ईंधन की कमी के कारण इसे 1 नवंबर, 2023 को बंद करना पड़ा था, जिससे 70 मरीजों की जान खतरे में पड़ गई थी और चार की मौत हो गई थी। 2017 में तुर्की ने 34 मिलियन डॉलर की मदद से इसका पुनर्निर्माण कराया था। <br><br>इजरायल ने अस्पताल को नष्ट करने की पुष्टि की है, लेकिन हमास द्वारा इस्तेमाल किए जाने का कोई सबूत नहीं दिया है। तुर्की ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे गाजा को रहने लायक न बनाने और फिलिस्तीनियों को जबरन हटाने की इजरायली नीति का हिस्सा बताया है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इजरायल के इस कदम को स्वास्थ्य प्रणाली को नष्ट करने और नरसंहार करने जैसा बताया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>दुर्लभ खनिजों पर चीन का प्रभुत्व खतरे में, अमेरिका को फायदा</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-rare-earth-dominance-could-crumble-in-10-years</link>
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<description><![CDATA[ चीनी विज्ञान अकादमी के शोधकर्ताओं का मानना है कि दुर्लभ मृदा तत्वों के बाजार में चीन का दबदबा जल्द खत्म हो सकता है, वर्तमान में चीन की हिस्सेदारी 62% है, लेकिन नए भंडारों की खोज के कारण अगले दशक में यह 28% तक गिर सकती है। इस बदलाव से अमेरिका को सबसे अधिक फायदा होगा, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्र नए केंद्र बन सकते हैं। दक्षिणी चीन के प्रमुख क्षेत्र को ग्रीनलैंड और दक्षिण अमेरिकी परियोजनाओं से चुनौती मिल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:59:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>दुर्लभ मृदा तत्व, चीन, अमेरिका, खनिज, उत्पादन, भंडार, खनन, चीनी विज्ञान अकादमी (CAS), ग्लोबल रेयर अर्थ्स</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[चीनी विज्ञान अकादमी (CAS) के शोधकर्ताओं के अनुसार, दुर्लभ मृदा तत्वों के बाजार में चीन का दबदबा जल्द ही खत्म हो सकता है। <br><br><strong>नए स्रोतों के उभरने से बदलेगा परिदृश्य</strong><br> माना जा रहा है कि वैश्विक दुर्लभ मृदा तत्व में चीन की हिस्सेदारी, जो वर्तमान में 62% है, अगले एक दशक में घटकर 28% तक रह सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि दुनिया भर में दुर्लभ मृदा तत्वों के कई नए भंडार खोजे गए हैं।<br><br><strong>अमेरिका को होगा सबसे ज्यादा फायदा</strong><br> इस बदलाव से अमेरिका को सबसे अधिक लाभ होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2040 तक चीन का उत्पादन और गिरकर 23% तक पहुंच सकता है।<br><br><strong>अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया बनेंगे नए केंद्र</strong><br> अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के विशाल भंडार की खोज से चीन की स्थिति कमजोर हो रही है। इन देशों में खनन गतिविधियों के बढ़ने से उद्योग का पूरा परिदृश्य बदल सकता है।<br><br><strong>ग्रीनलैंड और दक्षिण अमेरिकी परियोजनाएं देंगी चुनौती</strong><br> दक्षिणी चीन में स्थित दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के प्रमुख क्षेत्र को ग्रीनलैंड के क्वानेफजेल्ड और कई दक्षिण अमेरिकी परियोजनाओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है।<br><br><strong>दुर्लभ मृदा तत्वों का महत्व</strong><br> दुर्लभ मृदा तत्व स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारों जैसे आधुनिक उत्पादों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। चीन का विशाल भंडार उसे इन उद्योगों में एक मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है। हालांकि, नए स्रोतों के विकास के साथ, यह लाभ कम हो सकता है।<br><br><strong>एजेंट-आधारित मॉडलिंग का उपयोग</strong><br> अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने 2025 और 2040 के बीच वैश्विक खनन निर्णयों और औद्योगिक मांग का विश्लेषण करने के लिए 'एजेंट-आधारित मॉडलिंग' नामक एक उन्नत तकनीक का उपयोग किया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>हक्कानी के सिर से इनाम हटाया: अमेरिका&amp;तालिबान रिश्तों का राज</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-drops-bounties-on-sirajuddin-haqqani-trump-administration</link>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के अनुसार, अमेरिका ने सिराजुद्दीन हक्कानी के सिर पर इनाम हटा दिया है, पर अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की है। सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान सरकार में गृह मंत्री और हक्कानी नेटवर्क का नेता है। ट्रंप प्रशासन ने हक्कानी नेटवर्क के नेता और उसके सहयोगियों पर से इनाम हटा दिया है। अगर ऐसा होता है, तो इसे हक्कानी नेटवर्क के लिए एक बड़ी सफलता माना जाएगा। एफबीआई की वेबसाइट पर सिराजुद्दीन हक्कानी अभी भी मोस्ट वांटेड आतंकवादियों में शामिल है, उसकी गिरफ्तारी के लिए जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:59:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सिराजुद्दीन हक्कानी, ट्रंप प्रशासन, तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अफगानिस्तान, अमेरिका, इनाम, आतंकवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<b>काबुल:</b> अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका ने सिराजुद्दीन हक्कानी पर घोषित इनाम हटा लिया है, हालांकि अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की है। सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान सरकार में गृह मंत्री और हक्कानी नेटवर्क का नेता है।<br><br>कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी और उसके सहयोगियों पर से इनाम हटा दिया है। अमेरिका ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन अगर ऐसा होता है, तो इसे हक्कानी नेटवर्क के लिए एक बड़ी सफलता माना जाएगा। हक्कानी नेटवर्क एक खतरनाक आतंकवादी समूह है जिसने अफगानिस्तान में कई हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें भारतीय दूतावास पर हमला भी शामिल है।<br><br><b>अफगान सरकार का दावा:</b> टोलो न्यूज ने अफगान गृह मंत्री के करीबी सूत्रों के अनुसार बताया कि अमेरिका ने इस्लामिक अमीरात के कुछ अधिकारियों पर से इनाम हटा दिया है, जिसमें खलीफा सिराजुद्दीन हक्कानी, अब्दुल अजीज हक्कानी और याह्या हक्कानी शामिल हैं। एफबीआई इन आतंकवादियों को दो दशक से अधिक समय से खोज रही थी।<br><br>एफबीआई की वेबसाइट पर सिराजुद्दीन हक्कानी अभी भी मोस्ट वांटेड आतंकवादियों में शामिल है। वेबसाइट के अनुसार, सिराजुद्दीन हक्कानी की गिरफ्तारी के लिए जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाएगा।<br><br>माना जाता है कि हक्कानी पाकिस्तान में रहता है और तालिबान और अल कायदा के साथ उसके घनिष्ठ संबंध हैं। एफबीआई के अनुसार, हक्कानी पर आरोप है कि वह जनवरी 2008 में काबुल के एक होटल पर हुए हमले में शामिल था, जिसमें एक अमेरिकी नागरिक सहित छह लोग मारे गए थे। उस पर अफगानिस्तान में अमेरिकी और गठबंधन बलों के खिलाफ हमलों का समन्वय करने का भी आरोप है।<br><br>ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान में फिर से अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है और तालिबान के भीतर विभाजन का फायदा उठाना चाहता है। तालिबान वर्तमान में दो गुटों में विभाजित है: एक का नेतृत्व हिबतुल्लाह अखुंदजादा और दूसरे का नेतृत्व सिराजुद्दीन हक्कानी कर रहे हैं।]]> </content:encoded>
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<title>लंदन: हीथ्रो हवाई अड्डे पर बिजली गुल होने के बाद उड़ानें फिर से शुरू</title>
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<description><![CDATA[ लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर 20 घंटे की बिजली कटौती के बाद हवाई सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं। गुरुवार रात आग लगने से हवाई अड्डे पर बिजली गुल हो गई थी, जिसके कारणों की जांच अभी भी जारी है। शुक्रवार को दिन भर बंद रहने के बाद, हीथ्रो हवाई अड्डे ने शनिवार को पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर दिया। एयरलाइंस का कहना है कि उन्हें फंसे हुए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने और लंबित सेवाओं को पूरा करने में समय लगेगा। बिजली गुल होने से शुक्रवार को हवाई अड्डे से 1,351 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:59:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Heathrow Airport, London, Fire, Flight Resumption, Power Supply</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर 20 घंटे की बिजली कटौती के बाद हवाई सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं। गुरुवार की रात को आग लगने के कारण हवाई अड्डे पर बिजली गुल हो गई थी, जिसके कारणों की जांच अभी भी जारी है। हवाई अड्डा अब पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है, लेकिन एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि सामान्य स्थिति में लौटने में कुछ दिन लगेंगे।<br><br>शुक्रवार को दिन भर बंद रहने के बाद, हीथ्रो हवाई अड्डे ने शनिवार को पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर दिया। एयरलाइंस का कहना है कि उन्हें फंसे हुए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने और लंबित सेवाओं को पूरा करने में समय लगेगा।<br><br>गुरुवार की रात एक नजदीकी बिजली घर में आग लगने से हीथ्रो की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी, जिससे हवाई अड्डे पर विमानों का आवागमन ठप हो गया था। प्रबंधन ने कर्मचारियों की सराहना की है और कहा है कि वे व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए तत्पर हैं। हीथ्रो के मुख्य कार्यकारी थॉमस वोल्डबी ने कहा कि उन्हें अपने कर्मियों पर गर्व है।<br><br>बिजली गुल होने से शुक्रवार को हवाई अड्डे से 1,351 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। आग लगने के मूल कारण की जांच अभी भी जारी है, जबकि सरकार ने कहा है कि वह इस घटना की गंभीरता से जांच करवा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।<br><br>टर्मिनल पर अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है और शनिवार को 10 हजार अतिरिक्त यात्रियों की आवाजाही सुनिश्चित की गई।]]> </content:encoded>
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<title>आइसलैंड की शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: किशोर से संबंध का खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ आइसलैंड की बाल मंत्री एस्थिल्डुर लोआ थोर्सडॉटिर ने 30 साल पहले एक 15 वर्षीय लड़के से संबंध होने की बात स्वीकारने पर इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा तब आया, जब एस्मुंडसन के एक रिश्तेदार ने आइसलैंड के प्रधानमंत्री से इस मामले की शिकायत करने की कोशिश की। मंत्री ने बताया कि जब वह 22 साल की थीं, तब उनका संबंध 15 साल के एरिक अस्मुंडसन से था, जिसके कारण एक बच्चे का जन्म हुआ। एरिक अस्मुंडसन ने आरोप लगाया कि मंत्री ने 18 साल तक बाल सहायता देने के बावजूद उन्हें अपने बच्चे से मिलने नहीं दिया। आइसलैंड में, किसी वयस्क का नाबालिग से यौन संबंध बनाना गैरकानूनी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:58:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>आइसलैंड, शिक्षा मंत्री, इस्तीफा, किशोर, यौन संबंध, राजनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[आइसलैंड की बाल मंत्री एस्थिल्डुर लोआ थोर्सडॉटिर ने 30 साल पहले एक 15 वर्षीय लड़के के साथ संबंध होने की बात स्वीकार करने के बाद इस्तीफा दे दिया। <br><br>यह इस्तीफा तब आया जब एस्मुंडसन के एक रिश्तेदार ने आइसलैंड के प्रधानमंत्री से इस मामले की शिकायत करने की कोशिश की। 58 वर्षीय एस्थिल्डुर ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वह 22 साल की थीं, तब उनका संबंध 15 साल के एरिक अस्मुंडसन से था, जिसके कारण एक बच्चे का जन्म हुआ। <br><br>एरिक अस्मुंडसन ने आरोप लगाया कि एस्थिल्डुर ने 18 साल तक बाल सहायता देने के बावजूद उन्हें अपने बच्चे से मिलने नहीं दिया। उन्होंने बताया कि वह बच्चे के जन्म के समय मौजूद थे और बच्चे के साथ पहला साल बिताया, लेकिन उनसे मिलने के उनके अनुरोधों को बार-बार अस्वीकार कर दिया गया।<br><br>आइसलैंड में, किसी वयस्क का 18 साल से कम उम्र के नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाना गैरकानूनी है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल हो सकती है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>इथियोपिया में सेना का दावा: दो दिन में 300 आतंकवादी ढेर</title>
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<description><![CDATA[ इथियोपिया की सेना ने दावा किया है कि उसने उत्तरी अमहारा क्षेत्र में दो दिनों में 300 से अधिक फानो मिलिशिया के लड़ाकों को मार गिराया है। इस घटना के बाद क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ गई है। फानो मिलिशिया ने इथियोपिया और इरिट्रिया की सेनाओं के साथ गृहयुद्ध में भाग लिया था. सेना के अनुसार, फानो समूह ने अमहारा क्षेत्र में हमले किए, जिसमें 317 लड़ाके मारे गए। फानो के प्रवक्ता ने सेना के दावों का खंडन किया है। इरिट्रिया ने सैन्य लामबंदी का आदेश दिया है और इथियोपिया ने सीमा पर सैनिक तैनात किए हैं। ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/msid-119342554,imgsize-78148,width-540,height-405,resizemode-75/119342554.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:58:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इथियोपिया, फानो मिलिशिया, अम्हारा क्षेत्र, इरिट्रिया, आतंकवादी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>अदीस अबाबा:</strong> अफ्रीकी देश इथियोपिया की सेना ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने उत्तरी अमहारा क्षेत्र में दो दिनों तक चले संघर्ष में फानो सशस्त्र समूह के 300 से अधिक लड़ाकों को मार गिराया है। इस घटना के बाद क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई है।<br><br>फानो मिलिशिया ने इथियोपिया और इरिट्रिया की सेनाओं के साथ मिलकर दो साल तक गृहयुद्ध लड़ा था। इस युद्ध में अदीस अबाबा का मुकाबला टिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) से हुआ था, जो टिग्रे के उत्तरी क्षेत्र को नियंत्रित करता है। तब से इरिट्रिया और इथियोपिया के बीच मतभेद बने हुए हैं।<br><br>अब हाल के हफ्तों में हुई हिंसा के कारण एक नए युद्ध की आशंकाएं जन्म ले रही हैं। मौजूदा तनाव को देखते हुए इरिट्रिया ने देशव्यापी सैन्य लामबंदी का आदेश दिया है, जबकि इथियोपिया ने भी अपनी सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। इथियोपिया की सेना और फानो के बीच लड़ाई जुलाई 2023 में शुरू हुई थी, जिसका कारण 2022 के शांति समझौते की शर्तों को लेकर कई अमहारा लोगों में विश्वासघात की भावना थी।<br><br>इथियोपियाई सेना ने एक बयान में कहा कि फानो नामक चरमपंथी समूह ने अमहारा क्षेत्र में हमले किए थे, जिसके परिणामस्वरूप 317 फानो लड़ाके मारे गए और 125 घायल हो गए। सेना ने यह भी कहा कि वह इस समूह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।<br><br>हालांकि, वोलो बेते-अमहारा में अमहारा फानो के प्रवक्ता अबेबे फंताहुन ने सेना के इन दावों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि सेना ने उनके 30 लड़ाकों को भी नहीं मारा है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ढाका में मजदूर आंदोलन: यूनुस सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे कामगार</title>
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<description><![CDATA[ ढाका में गारमेंट मजदूरों ने यूनुस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, कारखाने बंद होने और वेतन न मिलने से मजदूर परेशान हैं। हजारों मजदूरों ने हाईवे जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ। गाजीपुर में एक फैक्ट्री के बंद होने के बाद प्रदर्शन शुरू हुआ, मजदूर बकाया वेतन और बोनस की मांग कर रहे हैं। आईएलओ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में कम वेतन वाले मजदूरों का प्रतिशत अधिक है, बढ़ती असमानता के कारण मजदूर भोजन की खपत कम करने को मजबूर हैं। यूनुस सरकार के आने के बाद से मजदूरों के विरोध प्रदर्शन बढ़े हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 06:58:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, मजदूर आंदोलन, मोहम्मद यूनुस, आर्थिक संकट, गारमेंट फैक्ट्री</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>ढाका में गारमेंट मजदूरों का प्रदर्शन:</strong> बांग्लादेश की राजधानी ढाका में गारमेंट फैक्ट्रियों के बंद होने और वेतन न मिलने से परेशान मजदूरों ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।<br><br><strong>हाईवे जाम:</strong> हजारों मजदूरों ने शनिवार को हाईवे जाम कर दिया, कारखाने दोबारा खोलने, वार्षिक अवकाश, बकाया वेतन और बोनस की मांग की। इस प्रदर्शन से यातायात बाधित हुआ और स्थानीय लोगों को परेशानी हुई।<br><br><strong>फैक्ट्री बंद होने से प्रदर्शन शुरू:</strong> गाजीपुर जिले में जायंट निट गारमेंट फैक्ट्री के मजदूरों ने फैक्ट्री बंद होने के नोटिस के बाद प्रदर्शन शुरू किया। श्रमिकों ने छुट्टी और बोनस भुगतान को लेकर पहले भी प्रदर्शन किया था, जिसके जवाब में फैक्ट्री अधिकारियों ने फैक्ट्री बंद करने का नोटिस जारी कर दिया।<br><br><strong>मजदूरों की मांगें:</strong> प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने परिवारों के साथ जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और ईद करीब होने के बावजूद उन्हें छुट्टियों के भुगतान और बोनस की कोई गारंटी नहीं है।<br><br><strong>वेतन न मिलने से आक्रोश:</strong> इस सप्ताह की शुरुआत में भी वेतन न मिलने पर मजदूरों ने हाईवे जाम कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 300 से अधिक मजदूरों को वेतन नहीं मिला और अधिकारी बिना कारण बताए वेतन में देरी कर रहे हैं।<br><br><strong>कारखानों का बंद होना:</strong> स्थानीय मीडिया के अनुसार, पिछले सप्ताह गाजीपुर के कलियाकोइर में 15 कपड़ा कारखाने बंद हो गए थे, जिसके विरोध में मजदूरों ने हाईवे ब्लॉक कर दिया था। आईएलओ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में दक्षिण एशियाई देशों में कम वेतन वाले मजदूरों का तीसरा सबसे बड़ा प्रतिशत है।<br><br><strong>आर्थिक असमानता:</strong> अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बढ़ती असमानता के कारण कम आय वाले मजदूर भोजन की खपत कम करने को मजबूर हैं। यूनुस सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही मजदूरों के विरोध प्रदर्शन और हड़तालें बढ़ गई हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेतन्याहू और अटॉर्नी जनरल में ठनी, गृह युद्ध की आशंका</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-pm-netanyahu-attorney-general-disagreement-shin-bet-chief-civil-war-threat</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल में शिन बेट के चीफ रोनन बार को हटाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिससे पीएम नेतन्याहू और अटॉर्नी जनरल आमने-सामने हैं। न्यायालय ने बार को हटाने के फैसले पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। अटॉर्नी जनरल ने नेतन्याहू को कार्रवाई से रोका और नए प्रमुख की नियुक्ति पर रोक लगाई। नेतन्याहू ने इसे खारिज करते हुए सरकार के अधिकार को स्पष्ट किया और कहा कि इससे गृह युद्ध नहीं होगा। विपक्षी दलों ने नेतन्याहू के फैसले को चुनौती दी है, आरोप है कि वह टकराव के कारण बार को हटाना चाहते हैं। बार का कार्यकाल पहले 20 अप्रैल को समाप्त होने वाला था, जिसे कैबिनेट ने 10 अप्रैल तक कर दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 20:15:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Benjamin Netanyahu, Israeli Intelligence, Shin Bet, Attorney General, Civil War</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इजरायल में, आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख रोनन बार को हटाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अटॉर्नी जनरल अब आमने-सामने हैं। पहले, अदालत ने बार को हटाने के निर्णय पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी थी। <br><br><b>यरुशलम:</b> इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अटॉर्नी जनरल गाली बहारव-मीआरा के बीच शिन बेट के प्रमुख रोनन बार को हटाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। बहारव-मीआरा ने नेतन्याहू को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोकने के लिए एक निर्देश जारी किया है। इससे पहले, न्यायालय ने बार को हटाने के फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी थी, और कहा कि नए शिन बेट प्रमुख की नियुक्ति पर प्रतिबंध है और इस पद के लिए किसी भी साक्षात्कार पर भी रोक लगा दी गई है।<br><br>नेतन्याहू ने इस निर्देश को अस्वीकार कर दिया और सरकार के सुरक्षा नियुक्तियों पर अधिकार को फिर से स्पष्ट किया। उनके कार्यालय ने कहा कि इजरायल में कानून का शासन है, और कानून के अनुसार, सरकार ही शिन बेट के प्रमुख का चयन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर कोई गृह युद्ध नहीं होगा।<br><br>उच्च न्यायालय ने बार की बर्खास्तगी पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद विपक्षी दलों ने नेतन्याहू के फैसले को चुनौती दी थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू टकराव के कारण बार को हटाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वह सरकार की सुरक्षा नीतियों की जांच से नाखुश हैं।<br><br>बार का कार्यकाल पहले 20 अप्रैल को समाप्त होने वाला था, जिसे कैबिनेट ने 10 अप्रैल तक कर दिया था। हमास-इजरायल युद्ध के बाद से नेतन्याहू और बार के बीच तनाव बढ़ गया है, क्योंकि शिन बेट ने सरकार के युद्धकालीन फैसलों और कतर-गेट मामले को प्रमुखता से उठाया था, जिसमें नेतन्याहू के सहायकों और कतरी अधिकारियों के बीच अनौपचारिक संपर्कों का आरोप था। इजरायली मीडिया के अनुसार, नेतन्याहू कैबिनेट ने बहारव-मीआरा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करने का फैसला किया है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>पोलैंड: यूरोप का आर्थिक शक्ति बनने की राह पर</title>
<link>https://pratinidhi.in/poland-poised-to-become-economic-power-in-europe-challenges-and-opportunities</link>
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<description><![CDATA[ पोलैंड यूरोप का आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, जिसके विकास को रेल नेटवर्क के विस्तार और नीतिगत सुधारों से समर्थन मिल रहा है। वर्तमान में पोलैंड की जीडीपी लगभग 75 लाख करोड़ रुपये है, जिसके 2029 तक 97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, जनसंख्या में वृद्धि की कमी और जटिल कर प्रणाली जैसी चुनौतियों से विकास दर प्रभावित हो सकती है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क निवेश को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नई योजनाओं पर बल दे रहे हैं। पोलैंड के निर्यात में जर्मनी का महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन वहां मंदी की स्थिति पोलैंड के लिए चिंता का विषय है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 19:29:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पोलैंड, अर्थव्यवस्था, डोनाल्ड टस्क, जीडीपी, यूरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>पोलैंड: यूरोप की उभरती आर्थिक शक्ति</strong><br><br>पोलैंड यूरोप का एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। यह प्रगति रेल नेटवर्क के विस्तार, नीतिगत सुधारों और तकनीकी प्रगति के कारण संभव हो पाई है।<br><br><strong>आर्थिक विकास के आंकड़े</strong><br><br>पोलैंड की वर्तमान जीडीपी लगभग 75 लाख करोड़ रुपये है, और अनुमान है कि 2029 तक यह बढ़कर 97 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी।<br><br><strong>चुनौतियां</strong><br><br>हालांकि, पोलैंड की जनसंख्या में वृद्धि की कमी और कर प्रणाली की जटिलताओं के कारण इस विकास दर में बाधा आ सकती है। इन समस्याओं का समाधान करना महत्वपूर्ण है।<br><br><strong>नई योजनाओं पर जोर</strong><br><br>पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क नई योजनाओं को लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पोलिश कंपनियां अपने उत्पादों को दुनिया भर में निर्यात करती हैं, खासकर एशिया, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका में।<br><br><strong>निवेश को बढ़ावा</strong><br><br>पोलैंड के प्रधानमंत्री निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों को आसान बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने राफेल ब्रजोस्का को अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सिफारिशें तैयार करने का काम सौंपा है।<br><br><strong>जीडीपी में वृद्धि</strong><br><br>अनुमान है कि 2029 तक पोलैंड की जीडीपी 97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। पोलैंड में उपभोक्ता खर्च स्थिर है, जिससे बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।<br><br><strong>अन्य कारक</strong><br><br>पोलिश कंपनियों की वैश्विक बाजार में अच्छी पकड़ है, और नागरिकों को उच्च वेतन मिलता है। सरकार प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है, जिससे स्थानीय बाजार को बढ़ावा मिला है। यूरोपीय संघ के फंड से सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा मिलता है, और स्मार्ट शहरों और रेलवे नेटवर्क का विकास भी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।<br><br><strong>समस्याएं</strong><br><br>पोलैंड की अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां हैं। यह जर्मनी को 27% निर्यात करता है, और जर्मनी में मंदी का असर पोलैंड पर पड़ सकता है। पोलैंड की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, जिससे भविष्य में श्रम और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, व्यापार लाइसेंस, कराधान और विनियमन संबंधी बाधाएं भी हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत&amp;पाक रिश्ते: कसूरी का कबूलनामा, मोदी से उम्मीदें बरकरार</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-pakistan-relations-worst-phase-khurshid-kasuri-statement</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को इतिहास के सबसे बुरे दौर में बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत ही मुद्दों को सुलझाने का एकमात्र जरिया है। कसूरी ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के फॉर्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की अधिकांश जनता पाकिस्तान के साथ शांति चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान-भारत संबंधों में अचानक सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं, जैसे कि 2015 में पीएम मोदी का लाहौर दौरा। कसूरी ने भविष्य में भी ऐसी चौंकाने वाली घटनाओं की संभावना जताई है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 19:29:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India-Pakistan relations, Khurshid Mahmud Kasuri, Narendra Modi, Pakistan foreign policy, बाइलेटरल रिलेशन, भारत-पाकिस्तान संबंध, खुर्शीद महमूद कसूरी, नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान विदेश नीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>भारत-पाकिस्तान के रिश्ते: सबसे बुरे दौर में, पूर्व मंत्री ने जताई हैरानी</strong><br><br>पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं।<br><br>कसूरी ने इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कनेक्टिविटी (आईपीएसी) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि आपसी बातचीत ही दोनों देशों के बीच मुद्दों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के बाद भी दोनों देश शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए बातचीत की मेज पर आ गए थे।<br><br>पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के फॉर्मूले का जिक्र करते हुए कसूरी ने कहा कि भारत की अधिकांश जनता पाकिस्तान के साथ शांति चाहती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैसे करगिल युद्ध के सूत्रधार मुशर्रफ का बाद में भारत में स्वागत किया गया था।<br><br>कसूरी ने 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाहौर दौरे का भी जिक्र किया, जब उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह के सकारात्मक बदलावों की उम्मीद जताई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2021 में पीएम मोदी की पाकिस्तान यात्रा की योजना थी, लेकिन यह हो नहीं पाई।]]> </content:encoded>
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<title>पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा में ग्रेनेड विस्फोट, तीन की मौत</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक हैंड ग्रेनेड विस्फोट में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, घटना कुर्रम जिले के पाराचिनार शहर में हुई, जहां एक निर्माणाधीन इमारत में विस्फोट हुआ। शुरुआती जांच में पता चला है कि एक व्यक्ति के पास हैंड ग्रेनेड था, और बहस के दौरान उसने विस्फोट कर दिया। मृतकों और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है। हाल के दिनों में पाकिस्तान में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 17:14:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>खैबर पख्तूनख्वा, ग्रेनेड ब्लास्ट, पाकिस्तान, आतंकी हमला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शनिवार को एक हैंड ग्रेनेड विस्फोट में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, यह घटना अफगानिस्तान सीमा के पास कुर्रम जिले के पाराचिनार शहर में एक निर्माणाधीन इमारत में हुई।</p><br><p>पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि एक व्यक्ति के पास हैंड ग्रेनेड था और बहस के दौरान उसने विस्फोट कर दिया। मृतकों और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p><br><p>हाल के दिनों में पाकिस्तान में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। शनिवार को खैबर पख्तूनख्वा में हुए इस विस्फोट ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>अमेरिका का F&amp;47: दुश्मन थर्राएंगे, खूबियां बेमिसाल</title>
<link>https://pratinidhi.in/america-building-f-47-fighter-jet-features-never-heard-before</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका एक छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-47 का निर्माण कर रहा है, जिसे बोइंग द्वारा बनाया जाएगा। यह विमान F-22 स्टील्थ वॉर प्लेन की जगह लेगा और बिना क्रू के ड्रोन के साथ काम करने में सक्षम होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि F-47 में अद्वितीय खूबियां होंगी और इसकी गति, गतिशीलता और पेलोड इसे खास बनाएंगे। सुरक्षा कारणों से कीमत का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसका परीक्षण चल रहा है और यह 2030 तक वायुसेना में शामिल होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 11:00:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>F-47 फाइटर जेट, अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप, बोइंग, अमेरिकी वायु सेना, स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज, नेक्स्ट जेनरेशन एयर डोमिनेंस (NDAG), F-22 रैप्टर</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> अमेरिका एक नए छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का निर्माण कर रहा है, जिसका नाम <strong>F-47</strong> होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस परियोजना का जिम्मा बोइंग को सौंपा है। इस सौदे का लक्ष्य <strong>F-22 स्टील्थ वॉर प्लेन</strong> को बदलना है। <br><br><strong>F-22</strong> विमान लगभग दो दशकों से सेवा में है। नया <strong>F-47</strong> अधिक उन्नत होगा और बिना क्रू के ड्रोन के साथ काम करने में सक्षम होगा। इस विमान का एक टोन्ड-डाउन संस्करण सहयोगी देशों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।<br><br>ट्रंप ने कहा कि <strong>F-47</strong> में ऐसी खूबियां होंगी जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखीं। इसकी गति, गतिशीलता और पेलोड इसे अद्वितीय बनाएंगे। कई एयरोस्पेस कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के बाद, वायु सेना ने अगली पीढ़ी के एयर डोमिनेंस (<strong>NDAG</strong>) प्लेटफॉर्म के लिए बोइंग के साथ डील की।<br><br><strong>F-47</strong> में उच्च स्तर की गतिशीलता, स्टील्थ तकनीक और सुपरक्रूज की क्षमता होगी। सुरक्षा कारणों से, सौदे की कीमत का खुलासा नहीं किया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि <strong>F-47</strong> का परीक्षण पिछले पांच महीनों से गुप्त रूप से चल रहा है, और यह 2030 तक अमेरिकी वायुसेना में शामिल हो जाएगा।]]> </content:encoded>
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<title>यूरोप में तीसरे विश्व युद्ध की आशंका: रूस के साथ तनाव के बीच तैयारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/world-war-three-europe-is-preparing-for-war-with-russia-with-survival-guides-mass-evacuations-huge-bunkers</link>
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<description><![CDATA[ यूरोपीय देश तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस यूरोप पर हमला कर सकता है। रूस से तनाव के बीच, यूरोप सर्वाइवल गाइड, बंकर और सैनिकों की भर्ती की योजना बना रहा है। यूरोपीय देशों को डर है कि पुतिन नाटो को पूर्वी यूरोप से बाहर निकालने और रूसी साम्राज्य का पुनर्निर्माण करने के लिए युद्ध के करीब हैं। फ्रांस ने अपने नागरिकों के लिए आक्रमण से बचने के लिए गाइड जारी की है। स्वीडन और फिनलैंड ने नाटो में शामिल होने के लिए अपनी तटस्थता छोड़ दी है। जर्मनी की तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी की योजनाएं ऑपरेशन ड्यूशलैंड नामक गुप्त दस्तावेज में सामने आई हैं। यूरोपीय संघ सेनाओं के पुनर्निर्माण के लिए विशाल व्यय योजना शुरू कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 10:52:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Russia Europe War, सर्वाइवल गाइड, न्यूक्लियर बंकर, सैनिकों की भर्ती, तीसरे विश्व युद्ध, यूरोप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[यूरोपीय देश तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी में जुटे हैं। उन्हें डर है कि यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन यूरोप पर आक्रमण कर सकते हैं। रूसी आक्रमण से बचाव के लिए यूरोपीय देश तैयारी कर रहे हैं, जिसमें नागरिकों को चेतावनी देना और युद्ध के लिए तैयार रहना शामिल है.<br><br>रूस से तनाव के बीच, यूरोप सर्वाइवल गाइड, बंकर और सैनिकों की भर्ती की योजना बना रहा है। यूरोपीय देशों को डर है कि पुतिन नाटो को पूर्वी यूरोप से बाहर निकालने और रूसी साम्राज्य का पुनर्निर्माण करने के लिए युद्ध के करीब हैं। यूरोपीय संघ का मानना है कि यूक्रेन में सफलता के बाद रूस 2030 के आसपास हमला कर सकता है। यूरोपीय आयोग का कहना है कि संघ को रूस के साथ बड़े पैमाने पर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।<br><br>यूरोपीय देश ब्रिटेन से यूरोपीय संघ में शामिल होने की अपील कर रहे हैं ताकि उन्हें परमाणु हथियारों से लैस देश का समर्थन मिल सके। वे अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सेनाओं में भर्ती बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। नागरिकों को रूसी टैंकों के घुसने और पैराट्रूपर्स के उतरने की स्थिति के लिए तैयार किया जा रहा है।<br><br>फ्रांस ने अपने नागरिकों के लिए आक्रमण से बचने के लिए गाइड जारी की है, जिसमें नागरिकों को रिजर्व यूनिटों में शामिल होकर गणतंत्र की रक्षा करने की सलाह दी गई है। इसमें सर्वाइवल किट बनाने के लिए आवश्यक वस्तुओं की जानकारी भी दी गई है।<br><br>फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि हाइपरसोनिक परमाणु मिसाइलों से लैस फ्रांसीसी लड़ाकू विमान जर्मनी की सीमा पर तैनात हैं, जो जर्मनी को परमाणु सुरक्षा देंगे। पोलैंड भी फ्रांस या अमेरिका से परमाणु हथियार सुरक्षा चाहता है और अनिवार्य सैन्य ट्रेनिंग लागू करने के लिए तैयार है। बाल्टिक और नॉर्डिक देश भी रूस के खतरे से अवगत हैं और भर्ती लागू कर रहे हैं।<br><br>नॉर्वे के अधिकारी नागरिकों के लिए सामूहिक निकासी अभ्यास की तैयारी कर रहे हैं। नॉर्वे नाटो अभ्यास की मेजबानी करेगा और चाहता है कि नागरिक भी इसमें भाग लें। स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और डेनमार्क ने भी नागरिकों को युद्ध की स्थिति में तैयार रहने की चेतावनी दी है और सर्वाइवल गाइड प्रदान की हैं।<br><br>स्वीडन और फिनलैंड ने नाटो में शामिल होने के लिए अपनी तटस्थता छोड़ दी है। जर्मनी की तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी की योजनाएं ऑपरेशन ड्यूशलैंड नामक गुप्त दस्तावेज में सामने आई हैं। सरकार नागरिकों के लिए बंकरों की सूची तैयार कर रही है।<br><br>जर्मनी के आंतरिक मंत्रालय ने घोषणा की कि भूमिगत स्टेशन, कार पार्क और निजी संपत्ति सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बर्लिन 200,000 वाहनों और 800,000 नाटो सैनिकों को ले जाने के लिए तैयार है। बाल्टिक देश रूस के साथ सीमा पर रक्षा रेखा बना रहे हैं। पोलैंड और बाल्टिक देशों ने एंटी-पर्सनल लैंडमाइन पर प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। यूरोपीय संघ सेनाओं के पुनर्निर्माण और यूक्रेन का समर्थन करने के लिए विशाल व्यय योजना शुरू कर रहा है और बाल्टिक से काला सागर तक ड्रोन शील्ड बनाने पर विचार कर रहा है ताकि पुतिन के लिए आक्रमण की संभावना को दर्दनाक बनाया जा सके।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>क्वेटा अस्पताल से विद्रोहियों के शव लेकर भागे प्रदर्शनकारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/baloch-protesters-ran-away-with-bodies-of-jaffar-express-train-hijackers-from-quetta-hospital</link>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में, प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल में घुसकर जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमले में मारे गए विद्रोहियों के शवों को अपने कब्जे में ले लिया। प्रदर्शनकारी अस्पताल के मुर्दाघर में जबरन घुसे और कम से कम पांच शवों को लेकर भाग गए। ये शव बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के सदस्य बताए जा रहे हैं। लापता व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों ने शवों की पहचान की अनुमति मांगी थी। पुलिस ने क्वेटा में छापेमारी कर तीन शव बरामद किए हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया है। पाकिस्तान, बीवाईसी और महरंग बलूच की जांच कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 10:52:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Balochistan, Quetta, Jaafar Express, BLA, Protest</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के एक अस्पताल में, प्रदर्शनकारियों ने घुसकर उन विद्रोहियों के शवों को अपने कब्जे में ले लिया, जो जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमले में मारे गए थे।<br><br>प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के मुर्दाघर में जबरन प्रवेश किया और कम से कम पांच शवों को लेकर भाग गए। ये शव बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के सदस्यों के माने जा रहे हैं, जिन्होंने बोलन में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला किया था। प्रदर्शन का नेतृत्व बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) कर रही थी, जिसके नेता महरंग बलूच हैं।<br><br>लापता व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों ने शवों की पहचान की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शव जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के हमलावरों के थे। प्रांतीय सरकार के अनुसार, मारे गए लोग आतंकवादी थे और बीएलए से जुड़े थे। बीवाईसी कार्यकर्ताओं ने कहा कि लापता लोगों के परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पताल आए थे।<br><br>बीवाईसी के एक सदस्य ने बताया कि वे परिवारों को समझाने की कोशिश कर रहे थे कि शव उनके प्रियजनों के नहीं हैं। पुलिस ने क्वेटा में छापेमारी कर तीन शव बरामद किए हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया है। पाकिस्तान, बीवाईसी और महरंग बलूच की जांच कर रहा है, क्योंकि उन पर बीएलए के साथ मिलकर सैन्य प्रतिष्ठान और सरकारी नीतियों को निशाना बनाने का आरोप है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में हमास के खुफिया प्रमुख को इजरायल ने मार गिराया</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-claims-to-have-killed-hamas-military-intelligence-chief-in-gaza-amidst-fierce-fighting</link>
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<description><![CDATA[ इजरायली सेना ने दक्षिणी गाजा में हमास के सैन्य खुफिया प्रमुख ओसामा तबाश को मारने का दावा किया है। सेना के अनुसार, तबाश आतंकवादी समूह की निगरानी और लक्ष्यीकरण इकाई का प्रमुख था। इजराइल रक्षा बलों ने कहा कि हमास और फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद के तीन सदस्यों को भी मार गिराया गया है। इस बीच, इजरायल की शीर्ष अदालत ने आंतरिक सुरक्षा प्रमुख रोनेन बार की बर्खास्तगी पर रोक लगा दी है। गाजा में रात भर हुए इजरायली हमलों में 91 फलस्तीनी मारे गए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 08:21:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Israel, Hamas, गाजा, इजरायल, हमास, military intelligence, IDF, Netanyahu</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>यरुशलम।</strong> इजरायली सेना ने दावा किया है कि दक्षिणी गाजा में हमास के सैन्य खुफिया प्रमुख ओसामा तबाश को मार गिराया गया है। सेना के अनुसार, तबाश आतंकवादी समूह की निगरानी और लक्ष्यीकरण इकाई का प्रमुख था। हालांकि, हमास की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p><br><p>इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने कहा कि हमास और फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद के तीन सदस्यों को भी मार गिराया गया है। खान यूनिस क्षेत्र में हमास के जनरल सिक्योरिटी अपैरेटस के प्रमुख राशिद जहजौह और अयमान अत्सिला भी मारे गए। आईडीएफ के अनुसार, जहजौह ने गाजा में हमास के शासन को वैध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।</p><br><p>इस बीच, इजरायल की शीर्ष अदालत ने आंतरिक सुरक्षा प्रमुख रोनेन बार की बर्खास्तगी पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि जब तक उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक बर्खास्तगी पर रोक रहेगी। यह फैसला कैबिनेट द्वारा नेतन्याहू के रोनेन को बर्खास्त करने के फैसले पर मुहर लगाने के कुछ घंटे पहले आया है।</p><br><p>अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कैबिनेट के पास रोनेन बार को बर्खास्त करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। नेतन्याहू के कार्यालय ने पहले कहा था कि रोनेन की बर्खास्तगी 10 अप्रैल से प्रभावी होगी, क्योंकि नेतन्याहू ने कहा था कि उन्होंने 'शिन बेट' प्रमुख रोनेन से विश्वास खो दिया है।</p><br><p>गाजा में रात भर हुए इजरायली हमलों में 91 फलस्तीनी मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इजरायली सेना का कहना है कि उसने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि हमास ने इजरायल पर रॉकेट दागे।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कनाडा: ट्रूडो के बाद भी भारत&amp;कनाडा रिश्तों में जमी बर्फ</title>
<link>https://pratinidhi.in/canada-india-relations-still-frozen-after-trudeau</link>
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<description><![CDATA[ कनाडा में सरकार बदलने के बाद भी भारत-कनाडा के रिश्तों में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक कनाडा भारत विरोधी तत्वों पर कार्रवाई नहीं करता, तब तक रिश्ते सामान्य नहीं होंगे। जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे, और नई सरकार से भी कोई बदलाव के संकेत नहीं हैं। भारत चाहता है कि कनाडा अपनी धरती पर अलगाववादियों को समर्थन देना बंद करे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत आपसी भरोसे से रिश्तों को सुधारना चाहता है। ट्रूडो ने भारत पर कनाडाई नागरिकों की हत्या का आरोप लगाया था, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 08:18:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भारत-कनाडा संबंध, जस्टिन ट्रूडो, मार्क कार्नी, विदेश मंत्रालय, भारत विरोधी तत्व, अलगाववादी, रणधीर जायसवाल, हरजीत सिंह निज्जर, खालिस्तानी आतंकवादी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[कनाडा में सत्ता परिवर्तन के बावजूद, भारत और कनाडा के संबंधों में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते।
<br><br>
जस्टिन ट्रूडो के भारत पर गंभीर आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। अब नई सरकार की तरफ से भी कोई नीतिगत बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। भारत का कहना है कि कनाडा को अपनी धरती पर अलगाववादियों और चरमपंथियों को समर्थन देना बंद करना होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत आपसी भरोसे और संवेदनशीलता के आधार पर रिश्तों को फिर से बनाना चाहता है।
<br><br>
ट्रूडो ने 2023 में भारत पर आरोप लगाया था कि उसकी एजेंसियों ने कनाडाई नागरिकों की हत्या करवाई है, जिसमें हरजीत सिंह निज्जर भी शामिल था, जो एक खालिस्तानी आतंकवादी था। भारत ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>क्या फिर शुरू होगी मानसरोवर यात्रा? भारत&amp;चीन वार्ता में प्रगति</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-china-talks-progress-positively-kailash-mansarovar-yatra-may-resume-soon</link>
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<description><![CDATA[ भारत और चीन के बीच संबंध सुधारने की दिशा में बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने को लेकर चर्चा चल रही है। कजान में मोदी-शी की मुलाकात के बाद विदेश मंत्रियों और अधिकारियों के बीच रचनात्मक वार्ता हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और जल्द ही कुछ ठोस फैसले लिए जाएंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और चीन के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कजान में पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया जारी है। विदेश मंत्रियों के स्तर पर बहुत ही रचनात्मक बातचीत हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 08:18:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>India-China relations, Mansarovar Yatra, MEA, Narendra Modi, Xi Jinping, Foreign Minister, Randhir Jaiswal</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<b>भारत और चीन के बीच संबंध सुधारने की दिशा में बातचीत सही मार्ग पर है।</b> दोनों देशों के बीच मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने को लेकर चर्चा चल रही है। कजान में मोदी-शी की मुलाकात के बाद विदेश मंत्रियों और अधिकारियों के बीच रचनात्मक वार्ता हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और जल्द ही कुछ ठोस फैसले लिए जाएंगे।<br><br>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कजान में पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया जारी है। विदेश मंत्रियों के स्तर पर बहुत ही रचनात्मक बातचीत हुई है।<br><br>रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि जनवरी माह में विदेश सचिव ने भी बीजिंग की यात्रा की थी। जी-20 देशों की जोहांसबर्ग में हुई बैठक के दौरान भी दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई है। सही दिशा में दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उनको लागू करने को लेकर उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फैसला हो जाएगा।<br><br>पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर की तरफ से चीन के साथ रिश्तों को सुधारने को लेकर दिए गए सकारात्मक संकेतों के बाद विदेश मंत्रालय की तरफ से यह बयान आया है। पीएम मोदी ने चीन के साथ रिश्तों को सुधारने की अहमियत को रेखांकित किया था। बाद में इसका चीन के विदेश मंत्रालय ने स्वागत भी किया था।]]> </content:encoded>
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<title>फ्लोरिडा में महिला ने कुत्ते को एयरपोर्ट के बाथरूम में डुबोकर मारा</title>
<link>https://pratinidhi.in/florida-woman-drowns-dog-in-airport-bathroom-after-being-denied-boarding</link>
<guid>https://pratinidhi.in/florida-woman-drowns-dog-in-airport-bathroom-after-being-denied-boarding</guid>
<description><![CDATA[ फ्लोरिडा के ऑरलैंडो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। एक महिला को विमान में कुत्ते को ले जाने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उसने कुत्ते को एयरपोर्ट के बाथरूम में डुबोकर मार डाला। बताया जा रहा है कि महिला के पास कुत्ते के आवश्यक दस्तावेज नहीं थे, जिसके कारण उसे विमान में चढ़ने से रोका गया। पशु क्रूरता के आरोप में महिला को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। एयरपोर्ट के कैमरों में महिला को कुत्ते के साथ बाथरूम में जाते और फिर अकेले बाहर आते हुए देखा गया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 08:18:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>फ्लोरिडा, कुत्ता, एयरपोर्ट, बाथरूम, महिला, विमान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[फ्लोरिडा के एक एयरपोर्ट पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है।<br><br>एक महिला, जिसे अपने कुत्ते को विमान में ले जाने की अनुमति नहीं दी गई, उसने कथित तौर पर कुत्ते को एयरपोर्ट के बाथरूम में डुबोकर मार डाला। यह घटना पिछले साल दिसंबर में ऑरलैंडो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई थी।<br><br>बताया जा रहा है कि महिला के पास कुत्ते के आवश्यक दस्तावेज नहीं थे, जिसके कारण उसे विमान में चढ़ने से रोका गया। इसके बाद उसने गुस्से में आकर कुत्ते को बाथरूम में डुबो दिया।<br><br>एक केयरटेकर को कुत्ते का शव कूड़े के थैले में मिला, जिसकी पहचान माइक्रोचिप से हुई। पशु क्रूरता के आरोप में महिला को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। एयरपोर्ट के कैमरों में महिला को कुत्ते के साथ बाथरूम में जाते और फिर अकेले बाहर आते हुए देखा गया था।]]> </content:encoded>
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<title>चीन पर हमले की तैयारी में अमेरिका, मस्क को मिलेगी पेंटागन की खुफिया जानकारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-to-attack-china-elon-musk-will-have-access-to-pentagon-secret-plan</link>
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<description><![CDATA[ एलन मस्क की शक्ति में वृद्धि होने जा रही है क्योंकि उन्हें पेंटागन की गुप्त फ़ाइलों तक पहुंच मिलेगी। पेंटागन द्वारा मस्क को चीन के साथ संभावित युद्ध के लिए अमेरिकी सेना की योजना के बारे में जानकारी दी जाएगी। मस्क रक्षा विभाग के कार्यालयों का दौरा करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, उन्हें चीन के खिलाफ संभावित युद्ध की योजना के बारे में जानकारी दी जाएगी, जिसमें 20 से 30 स्लाइड की प्रस्तुति शामिल है कि अमेरिका युद्ध कैसे लड़ेगा। पेंटागन ने मस्क के दौरे की पुष्टि की है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 08:16:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>एलन मस्क, पेंटागन, चीन, अमेरिका, रक्षा विभाग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>US to attack China: एलन मस्क को मिलेगी पेंटागन की खुफिया जानकारी</strong><br><br>अरबपति एलन मस्क की शक्ति में और वृद्धि होने जा रही है। मस्क को पेंटागन की गुप्त फाइलों तक पहुंच प्राप्त होगी। शुक्रवार को, पेंटागन मस्क को चीन के साथ संभावित युद्ध के लिए अमेरिकी सेना की योजना के बारे में जानकारी देगा। मस्क आज रक्षा विभाग के कार्यालयों का दौरा करेंगे।<br><br><strong>रायटर, वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से पद संभाला है, उन्होंने अपने करीबी सहयोगी एलन मस्क को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब मस्क की शक्ति और बढ़ने वाली है।<br><br>न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मस्क को चीन के खिलाफ संभावित युद्ध की योजना के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्हें एक प्रस्तुति दी जाएगी जिसमें 20 से 30 स्लाइड होंगी, जो बताएंगी कि अमेरिका युद्ध कैसे लड़ेगा। पेंटागन ने पुष्टि की है कि मस्क शुक्रवार को आएंगे, लेकिन कोई और जानकारी नहीं दी।<br><br>पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा, रक्षा विभाग शुक्रवार को पेंटागन में एलन मस्क का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। मस्क को सचिव पीट हेगसेथ ने आमंत्रित किया है, और वे दौरे पर आएंगे। इस गुप्त सैन्य योजना तक पहुंच मस्क की भूमिका को और शक्तिशाली बनाती है। मस्क अभी अमेरिकी सरकार के खर्च में कटौती के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।]]> </content:encoded>
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<title>चरमपंथी समूहों से पाकिस्तान को खतरा</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-army-knees-by-terrorist-groups</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान अपने ही बनाए संकट में फंसा है, अर्थव्यवस्था कर्ज़ पर निर्भर है। हर नेता कर्ज़ जुटाने की चुनौती से जूझ रहा है। पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, जिसका नतीजा आज भुगत रहा है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकवादी हमले बढ़े हैं। टीटीपी ने 482 हमले किए, जिसमें 558 लोग मारे गए। अफगान तालिबान टीटीपी को शरण दे रहा है, और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने भी हमले तेज़ कर दिए हैं। इस्लामिक स्टेट भी पाकिस्तान में बढ़ रहा है, जिससे देश की सुरक्षा स्थिति और खराब हो रही है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Mar 2025 23:12:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, आतंकवाद, टीटीपी, बीएलए, आईएसआईएस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान आजकल अपने ही बनाए हुए संकट में फंसा हुआ है। <strong>देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कर्ज़ पर निर्भर है।</strong> पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने वाले हर नेता के सामने एक ही चुनौती होती है कि कैसे भीख मांगकर देश के लिए कर्ज़ जुटाया जाए।<br><br>पाकिस्तान आज अपने किए की सज़ा भुगत रहा है। <strong>यह सज़ा इतनी भयानक है कि पाकिस्तान को बर्बाद कर रही है।</strong> फिर भी, यह देश सुधरने को तैयार नहीं है और आने वाली पीढ़ी के दिमाग में वही आतंकवाद का बीज बो रहा है। पाकिस्तान अपनी स्थापना से ही आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। पाकिस्तान की सेना ने इस आतंकवाद को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन आज वही आतंकवाद पाकिस्तान को नुकसान पहुंचा रहा है। इसका ताज़ा उदाहरण ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की 2025 की रिपोर्ट है।<br><br>ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (जीटीआइ) 2025 के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकवादी हमले 2023 में 517 से बढ़कर 2024 में 1,099 हो गए। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने 482 हमले किए, जिसमें 558 लोग मारे गए, जो पिछले साल की तुलना में 91% ज़्यादा है। टीटीपी का फिर से उभरना कोई संयोग नहीं है। <strong>यह पाकिस्तान की गलत विदेश नीति, सेना की नाकामी और अच्छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद के खेल का नतीजा है।</strong><br><br>पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सालों से आतंकवादी समूहों को "रणनीतिक संपत्ति" के तौर पर इस्तेमाल किया है। पाकिस्तान ने इन आतंकवादियों का इस्तेमाल अफगानिस्तान और भारत में अशांति फैलाने के लिए किया। 2021 में जब अफगान तालिबान ने काबुल पर कब्ज़ा किया, तो पाकिस्तान के जनरलों ने खुशी मनाई, क्योंकि उन्हें लगा कि उन्होंने अपने पड़ोसी देश में अपनी कठपुतली सरकार बना ली है। लेकिन, जल्द ही उनका यह भ्रम टूट गया और वे आज तक उस गलती की कीमत चुका रहे हैं।<br><br>अफगान तालिबान अब खुले तौर पर टीटीपी को शरण दे रहा है, जिससे उन्हें फिर से संगठित होने और पाकिस्तान पर हमला करने के लिए सुरक्षित ठिकाना मिल रहा है। कभी तालिबान को अपने इशारों पर चलाने वाला पाकिस्तान आज टीटीपी को रोकने के लिए उनसे भीख मांग रहा है। हालांकि, तालिबान ने पाकिस्तान के आरोपों को साफ तौर पर नकार दिया है। तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी अंदरूनी समस्या के लिए अफगानिस्तान को दोषी ठहरा रहा है।<br><br>बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने अपने विद्रोह को और तेज़ कर दिया है। इस समूह ने 2024 में 504 हमले किए, जबकि 2023 में यह संख्या सिर्फ 116 थी। 11 मार्च, 2025 को जाफर एक्सप्रेस में हुए बम धमाके में 21 नागरिक और चार सैनिक मारे गए। बीएलए ने इस ट्रेन को अगवा कर लिया था। इस घटना से पूरी दुनिया में पाकिस्तान की बदनामी हुई थी। बीएलए ने दावा किया था कि उसने 150 से ज़्यादा पाकिस्तानी सुरक्षाबलों को अगवा करके मार डाला था। इस बीच, आईएसआईएस-के, हाफिज गुल बहादुर का गुट और 75 से ज़्यादा छोटे आतंकवादी संगठन पाकिस्तान की कमज़ोरी का फायदा उठा रहे हैं।<br><br>इस्लामिक स्टेट भी पाकिस्तान में तेज़ी से बढ़ रहा है। हालांकि, ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने इस्लामिक स्टेट के साथ एक गुप्त समझौता किया है। इस समझौते के तहत पाकिस्तानी सेना इस्लामिक स्टेट की मदद कर रही है। बदले में इस्लामिक स्टेट अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ हमले कर रहा है। इससे अफगानिस्तान में तालिबान के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो रही हैं और पाकिस्तान इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान में हुए कई आतंकवादी हमलों में इस्लामिक स्टेट का नाम सामने आया है。]]> </content:encoded>
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<item>
<title>रूस&amp;पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती: भारत के लिए चिंता का विषय</title>
<link>https://pratinidhi.in/russia-pakistan-military-exercise-putin-befriending-enemies-of-india</link>
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<description><![CDATA[ रूस और पाकिस्तान के बीच सैन्य संबंध मजबूत हो रहे हैं, जिससे भारत की चिंता बढ़ सकती है। दोनों देशों ने अरब सागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया, जिसमें रूसी नौसेना के युद्धपोत कराची पहुंचे। रूस ने पहले भारत से दोस्ती के कारण पाकिस्तान से दूरी रखी थी, लेकिन भू-राजनीतिक बदलावों के कारण वे करीब आ रहे हैं। उन्होंने मालवाहक जहाजों के जरिए सीधा व्यापार शुरू किया है और पाकिस्तान रूस से तेल और गैस खरीद रहा है। पाकिस्तानी और रूसी नौसेना ने &#039;अरेबियन मानसून-VI&#039; अभ्यास किया, जिसमें दोनों देशों के युद्धपोतों और विमानों ने भाग लिया। रूसी अधिकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और जिन्ना की मजार पर श्रद्धांजलि अर्पित की। रूसी युद्धपोत लंबे समय बाद पाकिस्तान पहुंचे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Mar 2025 23:12:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, पाकिस्तान, सैन्य अभ्यास, भारत, नौसेना, संबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[रूस और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ रहा है। हाल ही में, दोनों देशों ने अरब सागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया, जिसमें रूसी नौसेना के तीन युद्धपोतों ने कराची बंदरगाह पर भाग लिया। इस बढ़ती दोस्ती को भारत के लिए एक संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है।<br><br>मॉस्को से मिली जानकारी के अनुसार, रूस और पाकिस्तान के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं। पहले, रूस ने भारत के साथ अपनी दोस्ती के कारण पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन अब भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के कारण दोनों देश करीब आ रहे हैं। दोनों देशों ने हाल ही में एक नौसैनिक अभ्यास किया, जिसमें रूसी नौसेना के तीन युद्धपोत शामिल थे। पिछले साल, रूस और पाकिस्तान ने मालवाहक जहाजों के माध्यम से सीधा व्यापार भी शुरू किया, और पाकिस्तान ने रूस से सीमित मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदी है।<br><br>पाकिस्तानी नौसेना और रूसी नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में 'अरेबियन मानसून-VI' नामक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करना था। अभ्यास में दोनों देशों के कई युद्धपोतों और संपत्तियों ने भाग लिया, जिसमें पाकिस्तानी नौसेना का एक डिस्ट्रॉयर, एक ऑफशोर पेट्रोल वेसल, एक फास्ट अटैक क्राफ्ट (मिसाइल), एक समुद्री गश्ती विमान और एक मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) शामिल थे।<br><br>पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) के लड़ाकू विमानों ने भी विभिन्न परिचालन श्रृंखलाओं में भाग लिया। अभ्यास में समुद्री युद्धाभ्यास और अंतर-संचालन को बढ़ाने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए समन्वित गश्त शामिल थी। समुद्री चरण से पहले, रूसी नौसेना के जहाजों को कराची में होस्ट किया गया, जहां क्रॉस-शिप विज़िट, हार्बर ड्रिल और टेबलटॉप चर्चाएँ हुईं। रूसी नौसेना के अधिकारियों ने पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और मजार-ए-कायद पर पुष्पांजलि अर्पित कर पाकिस्तान के संस्थापक को श्रद्धांजलि दी। रूसी युद्धपोतों में फ्रिगेट आरएफएस रेज्की, आरएफएस अल्दार त्सिडेंजापोव और मध्यम समुद्री टैंकर आरएफएस पेचेंगा शामिल थे। रूसी नौसेना के युद्धपोत एक लंबे अंतराल के बाद पाकिस्तान पहुंचे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>इजरायल की गाजा पर कब्जे की धमकी</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-threatens-gaza-annexation-amidst-hamas-conflict</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने हमास को चेतावनी दी है कि अगर उसने बंधकों को रिहा नहीं किया तो गाजा के और इलाके इजरायल के कब्जे में चले जाएंगे। उन्होंने गाजा के चारों ओर बफर जोन बनाने की भी धमकी दी है। इजरायल हमास को हराने तक हमले तेज करने की योजना बना रहा है। इस बीच, हमास अभी भी कैदियों की रिहाई और युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौते पर विचार कर रहा है। यूएनआरडब्ल्यूए ने गाजा में सहायता आपूर्ति में कमी पर चिंता व्यक्त की है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Mar 2025 23:12:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Israel, Hamas, Gaza, IDF, Israel Katz, इजरायल, गाजा, हमास, इजरायली रक्षा मंत्री, इजरायली सेना, फिलिस्तीन, राफा, मिस्र, UNRAW, स्टीव विटकॉफ, डोनाल्ड ट्रंप, तेल अवीव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>तेल अवीव:</strong> इजरायल ने गाजा को आंशिक रूप से अपने देश में मिलाने की धमकी दी है। इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने कहा कि उन्होंने सेना को गाजा में और क्षेत्र पर कब्जा करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हमास बंधकों को मुक्त करने से इनकार करेगा तो इजरायल उस क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लेगा।<br><br>कैट्ज ने यह भी धमकी दी कि अगर हमास ने उनकी बात नहीं मानी तो वे गाजा के आसपास बफर जोन का विस्तार करेंगे ताकि इजरायली नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों और सैनिकों की रक्षा की जा सके। उन्होंने हमास को हराने के लिए नागरिक और सैन्य दबाव बिंदुओं का उपयोग करते हुए हमले को बढ़ाने की कसम खाई है।<br><br>इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा कि वे हवाई, नौसैनिक और जमीनी गोलाबारी के साथ-साथ जमीनी अभियान का विस्तार करके लड़ाई को तेज करेंगे, जब तक कि बंधकों को मुक्त नहीं कर दिया जाता और हमास को हरा नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को लागू करना शामिल है जिसमें अमेरिका द्वारा गाजा को भूमध्यसागरीय रिसॉर्ट के रूप में पुनर्विकसित करने का प्रस्ताव है।<br><br>गुरुवार को, इजरायली सेना ने कहा कि सैनिकों ने मिस्र की सीमा के पास गाजा के सबसे दक्षिणी शहर राफा के शबूरा क्षेत्र में जमीनी गतिविधि का संचालन शुरू कर दिया है। इसने कहा कि इसने क्षेत्र के मुख्य उत्तर-दक्षिण मार्ग को भी बंद कर दिया है क्योंकि इसने जमीनी अभियानों का विस्तार किया है जो बुधवार को फिर से शुरू हुए।<br><br>हमास ने शुक्रवार को कहा कि वह अभी भी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसका उद्देश्य कैदियों को रिहा करने, गाजा में युद्ध को समाप्त करने और फिलीस्तीनी क्षेत्र से इजराइली सेना की वापसी के लिए एक समझौते पर पहुंचना है।<br><br>फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) ने कहा कि गाजा में स्थिति गंभीर रूप से चिंताजनक है, क्योंकि सहायता आपूर्ति के वितरण में भारी कमी आई है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>सूर्यग्रहण 2025: कब और कहां दिखेगा साल का पहला सूर्यग्रहण?</title>
<link>https://pratinidhi.in/surya-grahan-2025-when-and-where-to-watch-solar-eclipse</link>
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<description><![CDATA[ साल 2025 का पहला सूर्यग्रहण 29 मार्च को होगा, जो आंशिक होगा। चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरेगा, लेकिन पूरी तरह से सूर्य को नहीं ढकेगा। यह ग्रहण अमेरिका में सुबह 4:50 बजे शुरू होगा और भारतीय समय के अनुसार दोपहर 2:20 बजे। सूर्य का 93% भाग ढका हुआ दिख सकता है। दुर्भाग्य से, यह भारत में नहीं दिखेगा, पर नासा का लाइव टेलीकास्ट देखा जा सकता है। साल का दूसरा आंशिक सूर्यग्रहण 21 सितंबर को होगा, जो ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में दिखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Mar 2025 22:32:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सूर्यग्रहण, 2025, आंशिक सूर्यग्रहण, चंद्रमा, पृथ्वी, अंतरिक्ष, खगोलविद, नासा, भारत में सूर्यग्रहण, Solar Eclipse, India, Date and Time, March Solar Eclipse</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[साल 2025 में होने वाला पहला सूर्यग्रहण खगोल प्रेमियों के लिए एक अद्भुत खगोलीय घटना होने वाली है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी पर अपनी छाया डालेगा, जिससे सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो जाएगी।<br><br>यह सूर्यग्रहण 29 मार्च 2025 को होगा और यह आंशिक सूर्यग्रहण होगा। आंशिक सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, लेकिन यह सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता, जिसके कारण सूर्य का कुछ भाग ही ढका हुआ दिखाई देता है।<br><br>वैज्ञानिकों के अनुसार, आंशिक सूर्यग्रहण साल में लगभग दो बार होता है। साल 2025 का दूसरा आंशिक सूर्यग्रहण 21 सितंबर को होगा, जिसे ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।<br><br>नासा के अनुसार, अमेरिका में यह आंशिक ग्रहण सुबह 4:50 बजे शुरू होगा, 6:47 बजे चरम पर होगा और 8:43 बजे समाप्त होगा। भारतीय समय के अनुसार, यह दोपहर 2:20 बजे शुरू होगा और शाम 4:17 बजे चरम पर होगा। इस दौरान सूर्य का 93% भाग ढका हुआ दिखाई दे सकता है।<br><br>दुर्भाग्यवश, यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण का छाया पथ भारतीय उपमहाद्वीप से होकर नहीं गुजरेगा। हालांकि, नासा इसका लाइव टेलीकास्ट करेगा, जिसे ऑनलाइन देखा जा सकता है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>अमेरिका में छात्र बदर खान सूरी की गिरफ्तारी: वीजा रद्द, हमस समर्थन का आरोप</title>
<link>https://pratinidhi.in/indian-student-badar-khan-suri-arrested-in-america-visa-canceled-allegation-of-supporting-hamas</link>
<guid>https://pratinidhi.in/indian-student-badar-khan-suri-arrested-in-america-visa-canceled-allegation-of-supporting-hamas</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के पोस्टडॉक्टरल फेलो बदर खान सूरी को आव्रजन अधिकारियों ने हिरासत में लिया। उन पर हमास का समर्थन करने और इजराइल के प्रति अमेरिकी विदेश नीति का विरोध करने का आरोप है। उनका वीजा रद्द कर दिया गया है। वह एक अमेरिकी नागरिक से विवाहित हैं और इमिग्रेशन कोर्ट में सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। 2009 से अब तक 15,952 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि सरकार 295 लोगों की नागरिकता जांच रही है, जिन्हें अमेरिका ने हिरासत में लिया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 11:15:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, भारतीय छात्र, गिरफ्तारी, वीजा रद्द, हमास, बदर खान सूरी, आव्रजन अधिकारी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका में एक भारतीय छात्र बदर खान सूरी, जो जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं, को आव्रजन अधिकारियों ने हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका के विरोध में हमास का समर्थन किया। उन्हें वर्जीनिया स्थित उनके घर के बाहर से हिरासत में लिया गया।<br><br>बदर खान सूरी को सूचित किया गया कि उनका वीजा रद्द किया जा रहा है, क्योंकि सरकार का आरोप है कि उन्होंने इजराइल के प्रति अमेरिकी विदेश नीति का विरोध किया। सूरी एक अमेरिकी नागरिक से विवाहित हैं और उनके वकील के अनुसार, वह इमिग्रेशन कोर्ट में अपनी सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रहे हैं।<br><br>रिपोर्ट्स के अनुसार, 2009 से अब तक 15,952 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत सरकार उन 295 लोगों की नागरिकता की जांच कर रही है जिन्हें अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन ने हिरासत में लिया है। अमेरिकी सरकार ने इन लोगों को वापस भेजने के आदेश जारी किए हैं। जयशंकर ने राज्यसभा को बताया कि केवल उन्हीं लोगों को निर्वासित करने के लिए स्वीकार किया जाएगा जिनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो जाएगी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>खुलासा: भारत में CIA के गुप्त ठिकाने</title>
<link>https://pratinidhi.in/cia-hidden-bases-in-india-jfk-files-reveal-us-intelligence-secrets</link>
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<description><![CDATA[ हाल ही में जारी JFK की हत्या से जुड़े दस्तावेजों से पता चला है कि CIA ने नई दिल्ली और कोलकाता में गुप्त ठिकाने बनाए थे। CIA का न्यूयॉर्क डिवीजन भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी गुप्त ठिकाने चलाता था। कुछ ठिकानों पर बंदियों को बिना आरोप के रखने के आरोप हैं। ट्रंप के आदेश के बाद ये दस्तावेज जारी किए गए, जिनसे पता चलता है कि CIA की गुप्त फैसिलिटीज निगरानी और जासूसी के लिए इस्तेमाल होती थीं। शीत युद्ध के दौरान भारत का CIA से संबंध रहा है, और भारत ने अपने खुफिया ढांचे को विकसित करने में अमेरिका से मदद भी मांगी थी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 11:13:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>CIA, India, JFK, Assassination, Delhi, Kolkata, Intelligence, America</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> हाल ही में जारी किए गए राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या से जुड़े दस्तावेजों से पता चला है कि सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) ने 1963 में ही नई दिल्ली और कोलकाता में अपने गुप्त ठिकाने बना लिए थे।<br><br>इन दस्तावेजों के अनुसार, CIA का न्यूयॉर्क डिवीजन भारत के अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, ईरान, दक्षिण कोरिया और जापान में भी गुप्त ठिकानों की देखरेख करता था। कुछ ठिकानों पर बंदियों को बिना औपचारिक आरोप या ट्रायल के रखने के आरोप भी लगे हैं।<br><br>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद, यूएस नेशनल आर्काइव्स ने लगभग 2,200 क्लासिफाइड दस्तावेज जारी किए थे। CIA की गुप्त फैसिलिटीज का इस्तेमाल निगरानी, जासूसी और आतंकवादियों की हिरासत जैसे कामों के लिए होता रहा है। CIA पर रूस के खिलाफ जासूसी अड्डे बनाने के आरोप भी लगे हैं।<br><br>बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, शीत युद्ध के दौरान भारत का CIA के साथ संबंध रहा है। 2013 में पता चला कि भारत ने 1962 में चीनी क्षेत्र पर निगरानी के लिए CIA को ओडिशा में एयरबेस इस्तेमाल करने दिया था। स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपने खुफिया ढांचे को विकसित करने में अमेरिका से मदद मांगी थी।]]> </content:encoded>
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<title>विश्व में 2024 का सबसे गर्म साल, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने तापमान के बारे में चेतावनी दी</title>
<link>https://pratinidhi.in/world-experienced-hottest-weather-in-2024-un-warns-about-temperature</link>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपनी वार्षिक जलवायु स्थिति रिपोर्ट में कहा कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है, जिसने 2023 के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। वैश्विक तापमान 1850-1900 के आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। 2014-2023 का दशक सबसे गर्म रहा, जिसमें हीटवेव से महासागरों और ग्लेशियरों को नुकसान हुआ। चक्रवात, बाढ़ और सूखे के कारण 36 मिलियन से अधिक लोग विस्थापित हुए। प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 11:11:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>global warming, climate change, heatwave, संयुक्त राष्ट्र, मौसम विज्ञान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र (UN) के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी वार्षिक जलवायु स्थिति रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है। <br><br>रिपोर्ट के अनुसार, 2024 ने 2023 में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। WMO ने बताया कि 2024 में पहली बार वैश्विक तापमान 1850-1900 में निर्धारित आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। <br><br>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2014 से 2023 का दशक सबसे गर्म रहा, जिसमें हीटवेव ने महासागरों को प्रभावित किया और ग्लेशियरों को भारी नुकसान हुआ। 2024 में चक्रवात, बाढ़ और सूखे के कारण 36 मिलियन से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा। <br><br>ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गई है जहाँ शुद्ध शून्य उत्सर्जन अब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान किया।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>बलूच महिलाओं पर जैद हामिद का विवादित बयान</title>
<link>https://pratinidhi.in/zaid-hamid-derogatory-comments-against-baloch-women</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के &#039;लाल टोपी&#039; जैद हामिद ने बलूच महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की, और पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया. जैद हामिद ने कहा कि बलूच महिलाएं अपनी बेइज्जती को सार्वजनिक करके बेशर्मी दिखा रही हैं. उन्होंने फिलिस्तीनी और अफगानी महिलाओं का उदाहरण दिया. पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान में बलूच नागरिकों के नरसंहार में शामिल होने के आरोप हैं। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि बलूचिस्तान में सेना ने लोगों पर अत्याचार किए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 08:34:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>जैद हामिद, बलूच महिलाएं, पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तान, बलूचिस्तान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान के कुख्यात 'लाल टोपी' जैद हामिद ने बलूच समुदाय के खिलाफ जहर उगला है। पाकिस्तानी सेना की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने बलूच महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। <br><br>जैद हामिद, जो पहले सऊदी अरब में गिरफ्तार हो चुके हैं, बलूच लोगों के खिलाफ अपने विवादित बयानों के कारण फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने बलूच महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। <br><br>जैद हामिद ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तानी सेना बलूच महिलाओं की रक्षा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बलूच महिलाएं अपनी बेइज्जती को सार्वजनिक रूप से उजागर करके बेशर्मी दिखा रही हैं।<br><br>हामिद ने आगे कहा कि इजरायल ने फिलिस्तीनी महिलाओं पर अत्याचार किए, लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। उन्होंने अफगानी महिलाओं का भी उदाहरण दिया और कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना के अत्याचारों के बारे में कभी कुछ नहीं कहा। हामिद ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने बलूच महिलाओं के साथ कुछ नहीं किया है, फिर भी वे सड़कों पर चिल्ला रही हैं।<br><br>पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान में बलूच नागरिकों के नरसंहार में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि बलूचिस्तान में सेना ने लोगों पर अत्याचार किए हैं और उन्हें जबरन गायब किया है।]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप&amp;जेलेंस्की वार्ता: पुतिन से बातचीत के बाद जेलेंस्की ने मांगी ट्रंप से जानकारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-zelensky-talk-after-putin-call-details-and-implications</link>
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<description><![CDATA[ यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की, जिसके बाद ट्रंप ने इसे &#039;बहुत अच्छा&#039; बताया। यह वार्तालाप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ यूक्रेन में युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा के एक दिन बाद हुआ। जेलेंस्की ने अमेरिका से युद्धविराम की निगरानी करने की अपील की है, क्योंकि रूस का ऊर्जा अवसंरचनाओं पर हमले न करने का वादा वास्तविकता से दूर है। ट्रंप ने कहा कि उनकी चर्चा पुतिन के साथ हुई कॉल पर आधारित थी और वे सही रास्ते पर हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 08:34:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Trump, Zelensky, Putin, Ukraine, Russia, War, Ceasefire</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वॉशिंगटन:</strong> यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बातचीत को <strong>"बहुत अच्छा"</strong> बताया और कहा कि यह लगभग एक घंटे तक चली। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब ट्रंप ने एक दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ यूक्रेन में युद्धविराम पर चर्चा की थी। जेलेंस्की ने अमेरिका से रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम की निगरानी करने का आग्रह किया है। अमेरिका ने रूस को यूक्रेन में 30 दिनों के लिए संघर्ष विराम का प्रस्ताव दिया है।<br><br>ट्रंप ने कहा कि उनकी चर्चा मुख्य रूप से पुतिन के साथ हुई कॉल पर आधारित थी, ताकि रूस और यूक्रेन दोनों को उनकी मांगों के अनुसार समायोजित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वे <strong>"पूरी तरह से सही रास्ते पर हैं"</strong>। ट्रंप ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज से इस मामले पर विस्तृत जानकारी देने का अनुरोध किया है।<br><br>जेलेंस्की ने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ऊर्जा अवसंरचनाओं पर हमले न करने का वादा <strong>‘हकीकत से कोसों दूर’</strong> है। उन्होंने कहा कि वह ट्रंप से बात करके युद्धविराम के बारे में पुतिन के साथ हुई बातचीत को समझने की कोशिश करेंगे।<br><br>जेलेंस्की ने हेलसिंकी में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ कहा कि पुतिन ने यूक्रेनी ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के आदेश देने के बावजूद रात भर में 150 ड्रोन हमले किए गए। रूस ने कहा कि उसने यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना बंद कर दिया है, लेकिन कीव पर एक पाइपलाइन के पास उपकरणों पर हमला करने का आरोप लगाया है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>गाजा में इजरायल का नया जमीनी अभियान: हमास के ठिकानों पर हमला</title>
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<description><![CDATA[ इजरायली सेना ने गाजा पट्टी में जमीनी अभियान फिर से शुरू किया और नेत्जारिम कॉरिडोर पर नियंत्रण बढ़ाया। रक्षा मंत्री कैट्ज ने बंधकों की रिहाई न होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ हमलों को तेज करने का आदेश दिया, जिससे पहले 48 फलस्तीनी मारे गए। सेना का कहना है कि अभियान का उद्देश्य गाजा को विभाजित करना और बफर जोन बनाना है, जबकि हमास ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में एक हमले में अपने कर्मचारी की मौत की सूचना दी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 08:34:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Israel-Hamas War, गाजा, इजरायल, हमास, जमीनी अभियान, नेत्जारिम कॉरिडोर, बंधक, फलस्तीनी, नेतन्याहू, युद्धविराम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा में इजरायल का नया जमीनी अभियान: हमास के ठिकानों पर हमला</strong><br><br>इजरायली सेना ने गाजा पट्टी के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में अपना जमीनी अभियान फिर से शुरू कर दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के परिणामस्वरूप, इजरायली सेना ने बुधवार को नेत्जारिम कॉरिडोर के केंद्र पर अपना नियंत्रण फिर से स्थापित किया है। <br><br>इजरायल के रक्षा मंत्री, इजरायल कैट्ज ने चेतावनी दी है कि यदि गाजा में बंधकों को रिहा नहीं किया जाता है, तो इजरायल पहले कभी नहीं देखे गए पैमाने पर कार्रवाई करेगा।<br><br><strong>नेतन्याहू का हमास पर कड़ा रुख</strong><br><br>समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हमास के प्रति अपनी कठोर नीति जारी रखी है। बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने हाल ही में शुरू किए गए हमलों को तेज करने का आदेश दिया है। इजरायली सेना ने घोषणा की है कि उसके बलों ने गाजा पट्टी के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में जमीनी अभियान फिर से शुरू कर दिया है। इन अभियानों से ठीक पहले, हवाई हमलों में कम से कम 48 फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए थे।<br><br>इजरायली सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य नेत्जारिम कॉरिडोर पर इजरायल के नियंत्रण को बढ़ाना है, जो गाजा को दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करता है। इस युद्धाभ्यास का लक्ष्य एन्क्लेव के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के बीच एक बफर जोन बनाना है। हमास ने इजरायल की इस कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया है।<br><br>संयुक्त राष्ट्र ने गाजा शहर में हुई एक घटना की सूचना दी, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी की जान चली गई और पांच अन्य घायल हो गए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा पर इजरायली सेना का हमला, 20 फलस्तीनी नागरिकों की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/israeli-army-launches-ground-action-in-gaza-palestinians-killed</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल ने गाजा पर दूसरे दिन हमले किए, जिसमें 20 फलस्तीनी मारे गए। सेना नेत्जारिम कॉरिडोर पर नियंत्रण बढ़ा रही है। रक्षा मंत्री ने बंधकों की रिहाई न होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इजरायली सेना ने गाजा पट्टी में जमीनी अभियान फिर से शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्र दो भागों में विभाजित हो गया है। बुधवार को गाजा में 20 फलस्तीनी मारे गए। सेना ने हमास द्वारा हमले की तैयारी को निशाना बनाया। जार्डन के राजा अब्दुल्ला ने युद्धविराम का आह्वान किया, जबकि प्रियंका गांधी ने इजरायली सरकार की आलोचना की। विदेश मंत्रालय ने गाजा की स्थिति पर चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र परिसर पर हमले में एक कर्मी की मौत हो गई। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 08:31:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, गाजा, फलस्तीन, हमास, नेतन्याहू, युद्धविराम, संयुक्त राष्ट्र</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इजरायल ने गाजा पर लगातार दूसरे दिन हमले जारी रखे हैं, जिसमें 20 फलस्तीनी नागरिकों की जान गई है। इजरायली सेना ने नेत्जारिम कॉरिडोर पर अपना नियंत्रण फिर से स्थापित कर लिया है। रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने चेतावनी दी है कि यदि गाजा में बंधकों को रिहा नहीं किया गया, तो इजरायल कड़ी कार्रवाई करेगा।<br><br><strong>गाजा में इजरायली सेना का अभियान</strong><br>रॉयटर्स के अनुसार, इजरायली सेना ने मध्य और दक्षिणी गाजा पट्टी में जमीनी अभियान को फिर से शुरू कर दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद, नेत्जारिम कॉरिडोर के केंद्र पर नियंत्रण बढ़ा दिया गया है, जो गाजा पट्टी को दो भागों में बांटता है। युद्धविराम के बाद इजरायल ने इस गलियारे से खुद को अलग कर लिया था।<br><br><strong>फलस्तीनी हताहत</strong><br>बुधवार को गाजा में 20 फलस्तीनी मारे गए, जबकि एक दिन पहले 400 लोग मारे गए थे। इजरायली सेना का कहना है कि उसने उत्तरी गाजा में हमास द्वारा इजरायली क्षेत्र में हमले की तैयारी को निशाना बनाया। सेना ने बेत हनून और खान यूनिस के निवासियों को चेतावनी दी और तुरंत इलाका खाली करने के लिए कहा।<br><br><strong>अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया</strong><br>फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक में जार्डन के राजा अब्दुल्ला ने युद्धविराम बहाल करने की मांग की। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इजरायली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इजरायल के लिए मानवता कोई मायने नहीं रखती। विदेश मंत्रालय ने गाजा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और बंधकों की रिहाई की मांग की।<br><br><strong>संयुक्त राष्ट्र परिसर पर हमला</strong><br>संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि मध्य गाजा में उसके परिसर पर इजरायली हवाई हमले में एक विदेशी कर्मचारी की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि इजरायल को पता था कि यह संयुक्त राष्ट्र का परिसर है और यहां लोग ठहरे हुए थे और काम कर रहे थे। इजरायली सेना ने परिसर पर हमले से इनकार किया है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई वार्ता, रूस&amp;यूक्रेन युद्ध पर हुई चर्चा</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-and-zelensky-discussed-russia-ukraine-war-peace-agreement</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से बात की। ट्रंप ने कहा कि उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रूस और यूक्रेन के अनुरोधों और जरूरतों को पूरा करना है। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन और ट्रंप एक दूसरे पर विश्वास रखते हैं और अमेरिका-रूस संबंधों को सुधारने के लिए उत्सुक हैं। हालांकि, बातचीत के बाद भी रूस और यूक्रेन ने एक दूसरे पर हवाई हमले किए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 23:45:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Trump, Zelensky, Putin, Russia, Ukraine, War, Peace Agreement</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से बात की।<br><br>ट्रंप ने <strong>ट्रुथ सोशल</strong> पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रूस और यूक्रेन के अनुरोधों और जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन और ट्रंप एक दूसरे पर विश्वास रखते हैं और अमेरिका-रूस संबंधों को सुधारने के लिए उत्सुक हैं।<br><br>हालांकि, ट्रंप और पुतिन के बीच हुई बातचीत के कुछ ही समय बाद, रूस और यूक्रेन ने एक दूसरे पर हवाई हमले किए। दोनों देशों ने ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगाए।<br><br>जेलेंस्की ने कहा कि रूस शांति के लिए तैयार नहीं है, जबकि क्रेमलिन ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचों पर योजनाबद्ध हमलों को रद्द कर दिया था। क्रेमलिन ने कीव पर हमलों को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पुतिन और ट्रंप एक दूसरे को समझते हैं और अमेरिका-रूस संबंधों को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं।]]> </content:encoded>
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<title>टेस्ला कारों पर हमला: एलन मस्क ने बताया आतंकवाद, ट्रम्प ने दिए जांच के आदेश</title>
<link>https://pratinidhi.in/tesla-cars-set-on-fire-in-las-vegas-elon-musk-calls-it-terrorism</link>
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<description><![CDATA[ लास वेगास के टेस्ला सर्विस सेंटर पर हमलावरों ने कई वाहनों को आग लगा दी और गोलीबारी की, जिसमें एलन मस्क ने इसे आतंकवाद बताया। एफबीआई और पुलिस मिलकर जांच कर रहे हैं। हमलावरों ने &#039;प्रतिरोध&#039; लिखा और मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल किया। इस बीच, सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी के जश्न के बीच मस्क के लिए यह बुरी खबर आई। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हमलों की निंदा की। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 19:55:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>टेस्ला, एलन मस्क, लास वेगास, हमला, आतंकवाद, डोनाल्ड ट्रम्प</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>लास वेगास में टेस्ला सर्विस सेंटर पर हमला: एलन मस्क ने बताया आतंकवाद</strong><br><br>लास वेगास के एक टेस्ला सर्विस सेंटर में अज्ञात हमलावरों ने कई वाहनों को आग लगा दी और गोलीबारी की। हमलावरों ने गेट पर 'प्रतिरोध' लिखा और मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल किया। एफबीआई इस घटना की जांच कर रही है। एलन मस्क ने इस घटना को 'आतंकवाद' बताया है। अमेरिका में टेस्ला पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं।<br><br>स्पेसएक्स के रॉकेट ने सुनीता विलियम्स को सुरक्षित वापस लाने में मदद की, लेकिन इस खुशी के बीच एलन मस्क के लिए बुरी खबर आई। लास वेगास के एक सर्विस सेंटर में कई टेस्ला वाहनों में आग लगा दी गई और गोलीबारी की गई। टेस्ला कोलिजन सेंटर पर हुए इस हमले में कम से कम पांच गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनमें से दो पूरी तरह जल गईं।<br><br>एफबीआई की ज्वाइंट टेरेरिज्म टास्क फोर्स और लास वेगास मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग मिलकर अपराधी की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल किया और वाहनों पर गोलियां चलाईं। एलन मस्क ने कहा कि हिंसा 'पागलपन' है और 'गलत' है। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हमलों की निंदा की है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिकी सेना में ट्रांसजेंडरों की भर्ती पर कोर्ट का फैसला</title>
<link>https://pratinidhi.in/court-rules-in-favor-of-transgenders-joining-us-army-against-donald-trump-order</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ट्रांसजेंडरों को सैन्य सेवा से प्रतिबंधित करने का प्रावधान था। न्यायाधीश एना रेयेस ने कहा कि ट्रंप का यह आदेश ट्रांसजेंडर सैनिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है। ट्रंप ने 27 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें ट्रांसजेंडर सैन्यकर्मियों की यौन पहचान को सैनिकों की जीवनशैली के साथ टकराव बताया था। वादी के वकीलों का तर्क है कि ट्रंप का आदेश ट्रांसजेंडर लोगों के समान संरक्षण के अधिकारों का उल्लंघन करता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 19:21:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रांसजेंडर, अमेरिकी सेना, डोनाल्ड ट्रंप, कोर्ट, सैन्य सेवा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ट्रांसजेंडरों को सैन्य सेवा से प्रतिबंधित करने का प्रावधान था।<br><br>न्यायाधीश एना रेयेस ने कहा कि ट्रंप का यह आदेश ट्रांसजेंडर सैनिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है। उन्होंने प्रशासन को अपील के लिए तीन दिन का समय दिया है।<br><br>ट्रंप ने 27 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें ट्रांसजेंडर सैन्यकर्मियों की यौन पहचान को सैनिकों की जीवनशैली के साथ टकराव बताया था। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक नीति जारी की, जिसमें लिंग डिस्फोरिया वाले लोगों को सैन्य सेवा से अयोग्य घोषित किया गया।<br><br>वादी के वकीलों का तर्क है कि ट्रंप का आदेश ट्रांसजेंडर लोगों के समान संरक्षण के अधिकारों का उल्लंघन करता है। वहीं, सरकारी वकीलों का कहना है कि सैन्य अधिकारियों को सेवा सदस्यों को नियुक्त करने का अधिकार है।]]> </content:encoded>
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<title>सुनीता विलियम्स की भारत यात्रा: बहन ने बताया खास प्लान</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-return-to-earth-india-visit-plan-revealed-by-sister</link>
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<description><![CDATA[ नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 19 मार्च को धरती पर लौटीं। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन बाद धरती पर वापस आए। उनकी वापसी के लिए भारत में कई जगहों पर प्रार्थनाएँ की गईं। स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल की सफल लैंडिंग के बाद गुजरात में सुनीता विलियम्स के पैतृक गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी चचेरी बहन फाल्गुनी पंड्या ने मंदिर में पूजा की और इसे अविस्मरणीय क्षण बताया। फाल्गुनी पंड्या ने सुनीता के घर वापस आने पर खुशी जताई और साथ में छुट्टियां मनाने की योजना बताई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 11:08:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, SpaceX Crew Dragon, Gujarat, NASA, India visit, पीएम नरेंद्र मोदी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><b>डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।</b> भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री <b>सुनीता विलियम्स (Sunita Williams)</b> आज (19 मार्च) सुबह धरती पर वापस लौट चुकी हैं।<br><br>9 महीने और 14 दिन बिताने के बाद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती पर वापस आए। भारत में कई जगहों पर सुनीता विलियम्स की सफल वापसी के लिए पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p><b>स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल</b> की सुरक्षित लैंडिंग के बाद गुजरात स्थित सुनीता विलियम्स की पैतृक गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सुनीता की सफल लैंडिंग के बाद उनकी चचेरी बहन <b>फाल्गुनी पंड्या</b> ने मंदिर जाकर पूजा की। उन्होंने कहा कि यह एक 'अविस्मरणीय क्षण' था।</p>
<p><b>फाल्गुनी पंड्या</b> ने कहा,"मैं भगवान की बहुत आभारी हूं और सुनीता के घर वापस आने पर बहुत खुश हूं। यह एक लंबा इंतजार था। कोई घबराहट नहीं थी। मैंने प्रार्थना की और प्रतिज्ञा की कि सब कुछ ठीक होने के बाद मैं मंदिर में आऊंगी और मैं यहां हूं।"</p>]]> </content:encoded>
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<title>रूस&amp;यूक्रेन युद्ध: ट्रंप की मध्यस्थता से 30 दिनों के युद्धविराम पर सहमत हुए पुतिन</title>
<link>https://pratinidhi.in/russian-president-vladimir-putin-agrees-to-ceasefire-after-talks-with-donald-trump</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 30 दिनों के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, जिसका उद्देश्य रूस और यूक्रेन को एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने से रोकना है। पुतिन ने रूसी सेना को हमले रोकने के आदेश जारी किए हैं। पुतिन ने कहा कि स्थायी शांति समझौता तभी संभव है जब यूक्रेन को विदेशी सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी देना बंद किया जाएगा। रूस और यूक्रेन 175-175 युद्धबंदियों का आदान-प्रदान करेंगे, और रूस 23 घायल सैनिकों को कीव को सौंपेगा। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेता सभी ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 11:01:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, यूक्रेन, युद्धविराम, पुतिन, ट्रंप, शांति वार्ता, ऊर्जा संयंत्र</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बातचीत के बाद, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 30 दिनों के युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं। इस युद्धविराम का उद्देश्य दोनों देशों को एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने से रोकना है।<br><br><b>रूस-यूक्रेन युद्ध:</b> तीन साल से जारी इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो गया है। पुतिन ने रूसी सेना को हमले रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह निर्णय ट्रंप के साथ हुई एक घंटे से अधिक की फोन वार्ता के बाद लिया गया, जिसमें दोनों नेताओं ने संघर्ष के समाधान पर चर्चा की।<br><br>पुतिन ने संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थायी शांति समझौता तभी संभव है जब यूक्रेन को विदेशी सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी देना बंद किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, रूस और यूक्रेन 175-175 युद्धबंदियों का आदान-प्रदान करेंगे, और रूस 23 गंभीर रूप से घायल यूक्रेनी सैनिकों को कीव को सौंपेगा।<br><br>ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पुतिन के साथ उनकी बातचीत बहुत अच्छी रही। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि दोनों नेता सभी ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए हैं।<br><br>व्हाइट हाउस ने इस सीमित युद्धविराम को शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे लड़ाई पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन इस युद्धविराम योजना से सहमत है या नहीं।<br><br>क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने ट्रंप से यूक्रेन को विदेशी सैन्य और खुफिया सहायता बंद करने का भी आग्रह किया। दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने और पूर्ण संघर्ष विराम समझौते पर शांति वार्ता के लिए विशेषज्ञ समूह स्थापित करने पर सहमति जताई है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>गाजा पर इजरायल की बमबारी: नेतन्याहू का हमास को कड़ा संदेश</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-bombs-gaza-heavily-netanyahu-sends-strong-message-to-hamas</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल ने गाजा पट्टी पर हमास के बंधकों को रिहा न करने के चलते भीषण बमबारी की, जिसमें 400 से अधिक फलस्तीनी मारे गए। हमास के एक नेता भी मारे गए, जिससे युद्धविराम टूटने का खतरा बढ़ गया है। नेतन्याहू ने कहा कि हमले जारी रहेंगे और बंधकों की रिहाई तक सैन्य दबाव बना रहेगा। गाजा के अस्पतालों में शवों का ढेर है, और मानवीय संकट गहरा गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है। हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसके बाद से यह संघर्ष जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 11:01:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, गाजा, हमास, नेतन्याहू, बमबारी, युद्धविराम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>यरुशलम:</strong> हमास द्वारा बंधकों को रिहा न करने पर इजरायल ने गाजा पट्टी पर भीषण बमबारी की, जिसमें 400 से अधिक फलस्तीनी मारे गए और 560 से ज्यादा घायल हो गए। जनवरी में युद्धविराम के बाद यह इजरायल का सबसे बड़ा हवाई हमला है। रमजान के दौरान, लोग जब सुबह सहरी की तैयारी कर रहे थे, तब यह हमला हुआ।</p><br><p>इजरायली सेना ने बताया कि हमलों में हमास के प्रधानमंत्री की हैसियत रखने वाले एस्साम दीब अब्दुल्ला अल-दलिस भी मारे गए हैं, जो गाजा पट्टी में हमास का शासन संभालते थे। इन हमलों से युद्धविराम खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।</p><br><p>प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल बंधकों को छुड़ाने के लिए और ताकत का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि गाजा पर हवाई हमले अभी तो शुरुआत हैं, और युद्धविराम के लिए बातचीत युद्ध के दौरान ही होगी। नेतन्याहू ने साफ किया कि इजरायल अपने लक्ष्यों को हासिल करने तक आगे बढ़ता रहेगा, जिसमें हमास का सफाया और बंधकों की रिहाई शामिल है।</p><br><p>नेतन्याहू ने कहा कि पहले भी सैन्य दबाव के चलते बंधक रिहा हुए हैं। हमास ने इजरायल पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि मिस्र ने संयम बरतने की अपील की है। मंगलवार तड़के हुए हवाई हमलों में पूरे गाजा को निशाना बनाया गया, और इजरायली टैंकों ने सीमा पर गोलों की बौछार की।</p><br><p>इजरायली सेना ने कहा कि उन्होंने कई ठिकानों पर हमले किए हैं और जरूरत पड़ने तक जारी रहेंगे। सेना ने पूर्वी गाजा खाली करने के निर्देश दिए हैं, जिससे जमीनी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। गाजा के अस्पतालों में शवों का ढेर लग गया है, और स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 404 लोग मारे गए हैं और 560 से ज्यादा घायल हैं। इजरायल ने दो सप्ताह से गाजा में सहायता आपूर्ति रोक रखी है, जिससे हालात और खराब हो गए हैं।</p><br><p>गाजा सिटी की रहने वाली 65 वर्षीय रबीहा जमाल ने बताया कि यह भयावह रात थी, जब धमाकों से इमारतें हिल गईं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इजरायली बमबारी पर चिंता जताई है।</p><br><p>गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था, जिसमें 1,200 लोग मारे गए थे और 251 को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसमें 48 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए थे। जनवरी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम हुआ था, लेकिन हमास के कब्जे में अभी भी 59 बंधक हैं।</p><br><p>व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने बताया कि इजरायल ने हमले से पहले अमेरिका से बात की थी। रूस ने भी गाजा में लोगों के हताहत होने पर चिंता जताई है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स का 286 दिनों का सफर</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-butch-wilmore-nasa-astronauts-nine-months-in-space</link>
<guid>https://pratinidhi.in/sunita-williams-butch-wilmore-nasa-astronauts-nine-months-in-space</guid>
<description><![CDATA[ भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। नासा के दोनों अंतरिक्ष यात्री भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 3:27 बजे धरती पर उतरे। सुनीता और बुच ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर नौ महीने बिताए और अंतरिक्ष से ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया। सुनीता विलियम्स ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि &#039;अनपेक्षित&#039; हालात का सामना करना उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है, इसलिए वे आराम से अंतरिक्ष में वक्त गुजार रही हैं। सुनीता ने अंतरिक्ष से बताया था कि वे सुबह 06:30 बजे उठती हैं और हर दिन दो घंटे व्यायाम करती हैं। क्रिसमस पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से उन्होंने पृथ्वी पर अपने दोस्तों और परिवार को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी थीं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 10:59:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, Butch Wilmore, NASA, ISS, अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यात्री</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। नासा के दोनों अंतरिक्ष यात्री भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 3:27 बजे धरती पर उतरे।<br><br><strong>सुनीता और बुच ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर नौ महीने बिताए और अंतरिक्ष से ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया। विलियम्स ने खुद को व्यस्त रखने के लिए कई काम किए।</strong><br><br>वाशिंगटन: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर नौ महीने बिताने के बाद नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर पृथ्वी पर वापस आए हैं। हालांकि, उनके लिए यह मिशन आसान नहीं था क्योंकि वे आठ दिन के लिए अंतरिक्ष में गए थे। पिछले साल जून में सुनीता विलियम्स आठ दिन के मिशन पर अंतरिक्ष में गईं थीं। तकनीकी खराबी और कई समस्याओं के कारण वे अंतरिक्ष में फंस गईं और उन्हें वहां 286 दिन रहना पड़ा। आठ दिन के मिशन की तैयारी के साथ जाकर नौ महीने से ज्यादा समय तक रहना अंतरिक्ष यात्रियों के लिए आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने खुद को व्यस्त रखने के लिए कई काम किए।<br><br>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने आईएसएस पर 9 महीने से ज्यादा समय तक स्टेशन के रखरखाव में मदद की। उन्होंने लगातार स्पेसवॉक भी किए और अंतरिक्ष यान की मरम्मत की। सुनीता और बुच ने एक साथ मिलकर स्टेशन के उपकरणों की मरम्मत करते हुए एनआईसीईआर एक्स-रे टेलीस्कोप पर लाइट फिल्टर लगाए और एक अंतरराष्ट्रीय डॉकिंग एडेप्टर पर एक रिफ्लेक्टर डिवाइस को भी बदला। इतना ही नहीं, उन्होंने अंतरिक्ष से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वोट भी डाला।<br><br>सुनीता विलियम्स ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि 'अनपेक्षित' हालात का सामना करना उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है, इसलिए वे आराम से अंतरिक्ष में वक्त गुजार रही हैं। उन्होंने बताया था कि आईएसएस हर 24 घंटे में पृथ्वी की 16 परिक्रमा करता है। ऐसे में अंतरिक्ष यात्रियों को हर 45 मिनट में एक सूर्योदय या सूर्यास्त देखने को मिलता है, जो काफी रोमांचक होता है। सुनीता ने तब कहा था कि पृथ्वी से बहुत से लोग उन्हें संदेश भेजते हैं, जिससे उन्हें घर जैसा महसूस होता है।<br><br>बुच, सुनीता, डॉन पेटिट और निक हेग को पिछले साल के अमेरिकी चुनाव में वोट डालने का मौका मिला। अंतरिक्ष से वोट डालने के लिए ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल सेंटर ने आईएसएस को एन्क्रिप्टेड ईमेल के माध्यम से मतपत्र भेजे थे। अंतरिक्ष यात्रियों ने उन्हें भरकर सैटेलाइट को ट्रांसमिट किया। सैटेलाइट ने उन्हें न्यू मैक्सिको में एक ग्राउंड टर्मिनल पर भेजा। वहां से लैंडलाइन ने मतपत्रों को मिशन कंट्रोल को भेजा, जिन्होंने उन्हें अंतरिक्ष यात्रियों के काउंटी क्लर्कों को फाइल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा।<br><br>सुनीता ने अंतरिक्ष से बताया था कि वे सुबह 06:30 बजे उठती हैं और हर दिन दो घंटे व्यायाम करती हैं। यह व्यायाम उन्हें अंतरिक्ष में रहने से होने वाली हड्डियों के घनत्व के नुकसान से बचाने में मदद करता है। अंतरिक्ष में शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहने के प्रभाव को कम करने के लिए तीन अलग-अलग मशीनों का इस्तेमाल वे करती थीं। इसके बाद लगातार रिसर्च से जुड़ा काम भी दोनों एस्ट्रोनॉट करते रहे।<br><br>क्रिसमस पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से उन्होंने पृथ्वी पर अपने दोस्तों और परिवार को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी थीं। पूरी टीम ने सांता टोपी और रेनडियर एंटलर पहने थे। इस तरह वे भी क्रिसमस की खुशियों में शामिल हुए थे। ये सब उनके लिए जरूरी था ताकि वे अलगाव महसूस न करें। यही सब वजह थी कि जब सुनीता ने धरती पर वापसी की तो स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बावजूद वे मुस्कुराती दिखीं。]]> </content:encoded>
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<title>फ्रांस के परमाणु हथियार: क्या रूस से यूरोप की रक्षा कर पाएगा फ्रांस?</title>
<link>https://pratinidhi.in/can-france-nuclear-umbrella-protect-europe-from-russia-attacks-understanding-frances-nuclear-capabilities</link>
<guid>https://pratinidhi.in/can-france-nuclear-umbrella-protect-europe-from-russia-attacks-understanding-frances-nuclear-capabilities</guid>
<description><![CDATA[ यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं क्योंकि अमेरिका से सुरक्षा आश्वासन कम हो रहा है। यूरोपीय देश अब फ्रांस की परमाणु क्षमता पर निर्भर हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कई यूरोपीय देशों को अमेरिका पर शक है। नीदरलैंड के रक्षा मंत्री रूबेन ब्रेकेलमैन्स ने कहा कि अमेरिका एशिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, इसलिए यूरोप को मिलकर काम करना चाहिए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूरोप का भविष्य वाशिंगटन या मॉस्को में तय नहीं होना चाहिए। पोलैंड और जर्मनी भी फ्रांस के साथ इस विषय पर बात कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 10:58:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>France, Nuclear Weapons, Europe, Russia, Nuclear Umbrella, Macron, NATO, America, Defense</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[यूरोप को अमेरिका से सुरक्षा आश्वासन कम होने के चलते फ्रांस की परमाणु क्षमता पर निर्भरता बढ़ रही है। ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण यूरोपीय देशों को चिंता है कि अमेरिका शायद उनकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएगा। ऐसे में, फ्रांस की परमाणु क्षमता ही यूरोप को बचाने की उम्मीद है।<br><br>यूरोप अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहा है, और नाटो सदस्य होने के बावजूद कई देशों को अमेरिका पर शक है। ट्रंप की आलोचनाओं और अमेरिका द्वारा न्यूक्लियर अंब्रेला प्रदान न करने की आशंका ने इस डर को और बढ़ाया है। इसलिए सवाल उठता है कि क्या फ्रांस, अमेरिका के बिना, यूरोप की रक्षा कर सकता है।<br><br>नीदरलैंड के रक्षा मंत्री रूबेन ब्रेकेलमैन्स ने रायसीना डायलॉग में कहा कि अमेरिका एशिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, इसलिए यूरोप को एकजुट होकर काम करना होगा। हालांकि, विशेषज्ञों को संदेह है कि क्या फ्रांस का परमाणु छत्र यूरोप को सुरक्षा दे पाएगा।<br><br>रूस और अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागार हैं, जिनमें लगभग 10,000 हथियार हैं। फ्रांस के पास लगभग 300 परमाणु हथियार हैं, जबकि ब्रिटेन के पास 250 हैं। फ्रांस ने अपने हथियार खुद विकसित किए हैं, जबकि ब्रिटेन अमेरिकी तकनीकी जानकारी पर निर्भर है।<br><br>फ्रांस पनडुब्बियों, लड़ाकू जेटों और बमवर्षक विमानों से हमला करने में सक्षम है। प्रोफेसर क्रिस्टोफ़ वासिंस्की के अनुसार, फ्रांस का शस्त्रागार स्वायत्त है, जबकि ब्रिटेन को अमेरिकी मदद की आवश्यकता है। ब्रिटेन के परमाणु हथियारों पर अमेरिका का नियंत्रण है, और कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के विरोध करने पर ब्रिटेन इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। फ्रांस ने केवल अपने महत्वपूर्ण हितों को खतरे में पड़ने पर ही परमाणु हथियारों का उपयोग करने की कसम खाई है।<br><br>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के राष्ट्रीय हितों के “एक यूरोपीय आयाम” की बात कही है और यूरोपीय सहयोगियों की रक्षा के लिए रणनीतिक बहस की घोषणा की है। मैक्रों का मानना है कि यूरोप का भविष्य वाशिंगटन या मॉस्को में तय नहीं होना चाहिए, जिससे पता चलता है कि फ्रांस यूरोप को अपने परमाणु छत्र के नीचे लेने के लिए तैयार है।<br><br>पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा है कि उनका देश फ्रांस के साथ गंभीरता से बात कर रहा है, और जर्मनी के संभावित चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी इसी तरह की बातचीत के लिए तत्परता दिखाई है। मर्ज ने कहा कि यूरोप को अपनी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए, ताकि वह अपने दम पर यूरोपीय महाद्वीप की रक्षा कर सके।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप&amp;पुतिन वार्ता: यूक्रेन में शांति की दिशा में एक कदम</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-putin-talks-ukraine-peace-efforts</link>
<guid>https://pratinidhi.in/trump-putin-talks-ukraine-peace-efforts</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच यूक्रेन में युद्धविराम को लेकर एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई। रूस ने घोषणा की है कि वह अगले 30 दिनों तक यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर हमला नहीं करेगा, जिसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि वे जब्त की गई भूमि पर चर्चा करेंगे। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने ऊर्जा अवसंरचना पर हमले रोकने के ट्रम्प के विचार का समर्थन किया। व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों नेताओं ने स्थायी शांति और बेहतर संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने रणनीतिक हथियारों के प्रसार और इजरायल-ईरान तनाव को कम करने पर भी बात की। ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/119173945/trump-putuin-talks-on-ukraine-ceasefire-119173945.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 10:58:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, रूस, ट्रंप, पुतिन, युद्धविराम, शांति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><b>मॉस्को/वॉशिंगटन:</b> यूक्रेन में युद्धविराम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई। इस वार्ता के बाद, रूस ने घोषणा की कि वह अगले 30 दिनों तक यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर हमला नहीं करेगा। इसे अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p><br><p>हालांकि, अमेरिका पहले रूस को 30 दिनों के लिए यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा था। डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन के साथ बातचीत से पहले कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वे तीन साल के युद्ध के दौरान जब्त की गई भूमि और बिजली संयंत्रों पर चर्चा करेंगे।</p><br><p>क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने यूक्रेन और रूस द्वारा 30 दिनों के लिए ऊर्जा अवसंरचना पर हमले रोकने के ट्रम्प के विचार का समर्थन किया है। रूस ने फरवरी 2022 में आक्रमण के बाद से यूक्रेन के ऊर्जा ग्रिड को कई बार नुकसान पहुंचाया है, जिससे यूक्रेन की बिजली आपूर्ति को भारी नुकसान हुआ है। जवाब में, यूक्रेन ने भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले किए हैं।</p><br><p>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि ट्रंप और पुतिन ने यूक्रेन में शांति और युद्धविराम की आवश्यकता पर चर्चा की। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि इस संघर्ष को स्थायी शांति के साथ समाप्त किया जाना चाहिए और अमेरिका-रूस के बीच बेहतर संबंधों की उम्मीद है।</p><br><p>व्हाइट हाउस ने ट्रंप के पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि यूक्रेन और रूस दोनों ने इस युद्ध में जो खून और पैसा खर्च किया है, उसे अपने लोगों की जरूरतों पर खर्च करना बेहतर होगा। दोनों नेताओं ने रणनीतिक हथियारों के प्रसार और इजरायल-ईरान तनाव को कम करने पर भी बात की।</p><br><p>दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि अमेरिका और रूस के बीच बेहतर संबंधों से भविष्य में बड़ा लाभ होगा, जिसमें शांति स्थापना, आर्थिक समझौते और भू-राजनीतिक स्थिरता शामिल हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>होंडुरास में विमान दुर्घटना, 12 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/honduras-plane-crash-kills-12-near-roatan-island</link>
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<description><![CDATA[ होंडुरास के रोआतान द्वीप के पास एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में संगीतकार औरेलियो मार्टिनेज सुआजो भी शामिल हैं। होंडुरास एयरलाइन लान्हसा द्वारा संचालित विमान का मलबा तट से एक किलोमीटर दूर मिला। विमान में अमेरिकी, फ्रांसीसी नागरिक और दो नाबालिग सवार थे। एक अन्य घटना में, डेनमार्क जा रहा एक विमान स्विस आल्प्स में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 10:56:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Plane crash, Honduras, Roatan Island, Jetstream aircraft, Lanhsa airline, Aurelio Martinez Suazo, La Ceiba airport</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>होंडुरास में विमान दुर्घटना, 12 की मौत</strong><br><br>होंडुरास के रोआतान द्वीप से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 12 लोगों की जान चली गई, जबकि 5 को बचा लिया गया और 1 अभी भी लापता है। मरने वालों में गारिफुना संगीतकार औरेलियो मार्टिनेज सुआजो भी शामिल हैं।<br><br>यह विमान होंडुरास एयरलाइन लान्हसा द्वारा संचालित था, जिसका मलबा तट से लगभग एक किलोमीटर दूर पाया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, विमान में अमेरिकी और फ्रांसीसी नागरिकों के साथ-साथ दो नाबालिग भी सवार थे। विमान ला सेइबा हवाई अड्डे की ओर जा रहा था।<br><br>एक अन्य घटना में, डेनमार्क जा रहा एक छोटा विमान स्विट्जरलैंड के आल्प्स में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई।]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप की महाभियोग की मांग को चीफ जस्टिस ने किया खारिज</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-impeachment-demand-rejected-by-us-chief-justice</link>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप ने एक संघीय जज पर महाभियोग चलाने की मांग की थी, जिन्होंने अवैध प्रवासियों के निर्वासन को रोकने की कोशिश की थी। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने ट्रंप की इस मांग को खारिज कर दिया, और कहा कि न्यायिक फैसलों से असहमति के लिए महाभियोग उचित नहीं है। ट्रंप ने जज जेम्स बोसबर्ग को &#039;अनिर्वाचित उपद्रवी&#039; बताया था, जिन्होंने अवैध प्रवासियों के निर्वासन में तेजी लाने की ट्रंप की योजना पर रोक लगा दी थी। ट्रंप प्रशासन ने स्वीकार किया कि उसने लगभग 25,000 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था, और अब उन्हें बहाल किया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 10:54:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, महाभियोग, अमेरिकी जिला जज जेम्स बोसबर्ग, चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स, अवैध प्रवासी, निर्वासन, ट्रूथ सोशल, न्यायिक निर्णय, संघीय न्यायपालिका, ओबामा जज, 25 हजार कर्मचारी, बर्खास्त, बाल्टीमोर, संघीय नियम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक संघीय जज के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की थी, जिन्होंने अवैध प्रवासियों के निर्वासन को रोकने का प्रयास किया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जज जेम्स बोसबर्ग को 'अनिर्वाचित उपद्रवी' बताया था।<br><br>हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने ट्रंप की इस मांग को खारिज कर दिया। रॉबर्ट्स ने कहा कि न्यायिक फैसलों से असहमति के लिए महाभियोग उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा टकराव अमेरिका में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच असामान्य है।<br><br>ट्रंप ने पहले 18वीं सदी के एक कानून का उपयोग करके अवैध प्रवासियों के निर्वासन में तेजी लाने की घोषणा की थी, लेकिन बोसबर्ग ने इस पर अस्थायी रोक लगा दी थी। रॉबर्ट्स ने पहले भी न्यायपालिका की स्वतंत्रता का बचाव किया था, जब ट्रंप ने एक जज को 'ओबामा जज' कहा था।<br><br>रायटर के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने स्वीकार किया कि उसने लगभग 25,000 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था, और अब एक जज के आदेश के बाद उन्हें बहाल किया जा रहा है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>&amp;apos;5 दिन ऑफिस नहीं&amp;apos;, लंदन में भारतीय कर्मचारी का इनकार</title>
<link>https://pratinidhi.in/indian-employee-in-london-refuses-to-work-5-days-in-office</link>
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<description><![CDATA[ 25 वर्षीय भारतीय महिला तरुणा विनायकिया ने लंदन में महंगे जीवनशैली और करियर में उन्नति के सीमित अवसरों के कारण सप्ताह में 5 दिन ऑफिस जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह लंदन के महंगे सफर पर अपनी पूरी आय खर्च नहीं करना चाहती हैं। विनायकिया ने यह भी कहा कि अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी के बावजूद, वह हर महीने अपने बिलों का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने फ्रीलांसिंग की ओर रुख किया और सुझाव दिया कि काम का भविष्य पारंपरिक कॉर्पोरेट संरचनाओं में काम करने के बजाय व्यक्तिगत करियर बनाने में निहित हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 17:03:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>London, Indian Employee, Work Culture, Gen Z, Freelancing</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>लंदन:</strong> 25 वर्षीय भारतीय महिला, तरुणा विनायकिया ने लंदन के महंगे जीवनशैली और करियर में उन्नति के सीमित अवसरों के कारण सप्ताह में 5 दिन ऑफिस जाने से इनकार कर दिया है।<br><br>लिंक्डइन पर एक वायरल पोस्ट में, विनायकिया ने कार्यालय लौटने के आदेशों, बढ़ते खर्चों और जेन-जेड पेशेवरों को प्रभावित करने वाले स्थिर वेतन के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह ऑफिस में 5 या 4 दिन काम नहीं करेंगी, क्योंकि वह लंदन के महंगे सफर पर अपनी पूरी आय खर्च नहीं करना चाहती हैं।<br><br>विनायकिया ने यह भी कहा कि अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी के बावजूद, वह हर महीने अपने बिलों का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने फ्रीलांसिंग की ओर रुख किया और सुझाव दिया कि काम का भविष्य पारंपरिक कॉर्पोरेट संरचनाओं में काम करने के बजाय व्यक्तिगत करियर बनाने में निहित हो सकता है।]]> </content:encoded>
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<title>सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से वापसी: नासा का लाइव टेलिकास्ट</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-return-from-space-nasa-live-telecast</link>
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<description><![CDATA[ भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष यान में सवार हो गए हैं। नासा ने सुनीता विलियम्स के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से प्रस्थान का वीडियो साझा किया है। अंतरिक्ष यात्रियों की यह यात्रा 17 घंटे की होगी, जिसके बाद वे पृथ्वी पर लौटेंगे। नासा के वीडियो में, दोनों क्रू9 के सदस्यों को स्टेशन से रवाना होने की तैयारी करते हुए दिखाया गया है। विलमोर, विलियम्स और दो अन्य अंतरिक्ष यात्री आज सुबह आईएसएस से अलग हो गए और कल सुबह 3:30 बजे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। नासा स्पेसएक्स क्रू-9 के पृथ्वी पर लौटने का सीधा प्रसारण दिखा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 17:03:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, NASA, SpaceX, International Space Station, ISS, Crew-9</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>सुनीता विलियम्स की वापसी: नासा का लाइव प्रसारण</strong><br><br>भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष यान में सवार हो गए हैं। नासा ने सुनीता विलियम्स के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से प्रस्थान का वीडियो साझा किया है। अंतरिक्ष यात्रियों की यह यात्रा 17 घंटे की होगी, जिसके बाद वे पृथ्वी पर लौटेंगे। नासा के वीडियो में, दोनों क्रू9 के सदस्यों को स्टेशन से रवाना होने की तैयारी करते हुए दिखाया गया है।<br><br>सुनीता विलियम्स अब पृथ्वी पर लौटने के लिए तैयार हैं। नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद, नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता और बुच विल्मोर अंतरिक्ष यान में सवार हो गए हैं। यह यात्रा 17 घंटे की होगी। सुनीता विलियम्स का अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से प्रस्थान का नासा ने एक वीडियो भी जारी किया है। अंतरिक्ष यात्रियों का यह सफर 17 घंटे का है और वे जल्द ही पृथ्वी पर उतरेंगे।<br><br>विलमोर, विलियम्स और दो अन्य अंतरिक्ष यात्री आज सुबह आईएसएस से अलग हो गए और कल सुबह 3:30 बजे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। अंतरिक्ष यात्री दल, जिसमें निक हेग और रोस्कोस्मोस अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव शामिल हैं, स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर लौटेंगे। नासा के लाइव प्रसारण में, निक हेग, सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर और अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव को क्रू9 के स्पेस स्टेशन से प्रस्थान की तैयारी करते हुए, सामान पैक करते हुए और हैच बंद करते हुए देखा गया।<br><br>निक हेग ने कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन को अपना घर कहना, मानवता के लिए अनुसंधान करने की इसकी 25 साल की विरासत में अपनी भूमिका निभाना और दुनिया भर के सहकर्मियों के साथ काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा स्पेसएक्स क्रू-9 के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी पर लौटने का सीधा प्रसारण दिखा रही है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जिनपिंग का अमेरिका दौरा: ट्रंप ने कहा, चीनी राष्ट्रपति जल्द आएंगे</title>
<link>https://pratinidhi.in/xi-jinping-visit-us-donald-trump-says-china-president-xi-jinping-visit-us-soon-amid-brewing-trade-tensions</link>
<guid>https://pratinidhi.in/xi-jinping-visit-us-donald-trump-says-china-president-xi-jinping-visit-us-soon-amid-brewing-trade-tensions</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही वाशिंगटन का दौरा करेंगे, ऐसे समय में जब अमेरिका ने चीन से आयात पर टैरिफ बढ़ाया है। ट्रंप ने चीन पर अमेरिका में अवैध फेंटानिल के लिए भी आरोप लगाया है। दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव को कम करने के लिए जिनपिंग का दौरा जून में होने की उम्मीद है। ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग बहुत जल्द आने वाले हैं, जो उनके दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल में पहली मुलाकात होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका-चीन का टैरिफ युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:24:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Xi Jinping, Donald Trump, US-China relations, trade tensions, tariff</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही वाशिंगटन का दौरा करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने चीन से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा दिया है। ट्रंप ने अमेरिका में अवैध फेंटानिल के लिए भी चीन को जिम्मेदार ठहराया है। इस संभावित मुलाकात के मुख्य बिंदु हैं कि जिनपिंग जल्द ही वाशिंगटन आएंगे और यह दौरा जून में हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव कम हो सकता है।<br><br>अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर चल रही तनातनी के बीच रिश्तों को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि शी जिनपिंग जल्दी ही वाशिंगटन आएंगे, और उनका दौरा जून में संभावित है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ट्रंप ने पद संभालने के बाद रूस के साथ संबंधों को सुधारने पर जोर दिया और अब चीनी नेता के साथ बातचीत करने की बात कही है।<br><br>एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग बहुत जल्द आने वाले हैं, जो उनके दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल में पहली मुलाकात होगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी है कि दोनों देशों के अधिकारी जून में एक शिखर सम्मेलन पर विचार कर रहे हैं, ताकि टैरिफ मुद्दे पर कोई समाधान निकल सके। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध चल रहा है, जिसमें ट्रंप ने चीनी सामान पर टैक्स 20% तक बढ़ा दिया है, जिस पर चीन ने फेंटेनल के मुद्दे को बहाना बताते हुए नाराजगी जताई है और अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैक्स लगाया है।<br><br>चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका फेंटेनल मुद्दे पर गलत जानकारी फैलाकर चीन को बदनाम कर रहा है। व्यापार और अन्य मुद्दों पर बातचीत निचले स्तर पर है, लेकिन ट्रंप और जिनपिंग की संभावित मुलाकात से समाधान की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन का टैरिफ युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि दोनों देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इसलिए, जिनपिंग और ट्रंप के बीच मुलाकात के प्रयास जारी हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में इजरायल का हवाई हमला, 100 फलस्तीनी मारे गए</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-hamas-war-major-airstrike-in-gaza-palestinians-killed</link>
<guid>https://pratinidhi.in/israel-hamas-war-major-airstrike-in-gaza-palestinians-killed</guid>
<description><![CDATA[ गाजा पट्टी में इजरायली सेना ने फिर से हमला किया, जिसमें 100 फलस्तीनियों के मारे जाने की खबर है। नेतन्याहू की सेना के हवाई हमलों और रॉकेट हमलों में कई बच्चों की जान गई है। इजरायली सेना ने कहा कि गाजा में उनका सैन्य अभियान जारी रहेगा, जिसमें हमास कमांडरों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। हमास ने चेतावनी दी है कि इजरायल के हमले युद्धविराम का उल्लंघन करते हैं और बंधकों के भाग्य को खतरे में डालते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:22:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Israel Hamas War, Gaza, Airstrike, Palestinians, Hamas, Israel</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>रायटर, काहिरा।</strong> गाजा पट्टी में इजरायली सेना ने फिर से हमला किया है। नेतन्याहू की सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों में 100 फलस्तीनियों की मौत की खबर है। रॉकेट हमले में कई बच्चे भी मारे गए हैं। इजरायली सेना ने हवाई हमले के बाद कहा कि गाजा में उनका सैन्य अभियान हवाई हमलों से आगे भी जारी रहेगा।<br><br>इजरायली सेना ने कहा कि वह गाजा में हमास कमांडरों को मारने के साथ-साथ उनके आतंकी ठिकानों को भी निशाना बनाएगी। सेना ने कहा कि जब तक जरूरत होगी, हमले जारी रहेंगे और हवाई हमलों से आगे भी अभियान का विस्तार किया जाएगा।<br><br>हमास ने चेतावनी दी है कि गाजा में इजरायल के नए हमले युद्धविराम का उल्लंघन करते हैं और बंधकों के भाग्य को खतरे में डालते हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पुतिन और ट्रंप की यूक्रेन युद्ध पर वार्ता: संभावित घोषणाएँ</title>
<link>https://pratinidhi.in/putin-and-trump-to-discuss-ukraine-war-tuesday</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को यूक्रेन युद्ध पर बातचीत होने वाली है। यह वार्ता फोन कॉल के माध्यम से होगी, जिसमें यूक्रेन में चल रहे युद्ध और रूस द्वारा यूक्रेनी जमीन पर किए गए कब्जे जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि इस वार्ता से यूक्रेन में शांति स्थापित हो सकेगी।क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सोमवार की सुबह दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को होने वाली बातचीत की पुष्टि की। ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/msid-119127226,imgsize-16119,width-540,height-405,resizemode-75/119127226.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:22:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पुतिन, ट्रंप, यूक्रेन युद्ध, वार्ता, शांति, रूस, अमेरिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार को यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह वार्तालाप फोन के माध्यम से होगा। इस दौरान, यूक्रेन में चल रहे युद्ध और रूस द्वारा यूक्रेनी क्षेत्र पर किए गए कब्जे जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस वार्ता से यूक्रेन में शांति स्थापित होने की उम्मीद जताई है।<br><br>यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के प्रयास जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। यह कदम संघर्ष में एक संभावित महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यह ट्रंप के लिए अमेरिकी विदेश नीति को नए सिरे से परिभाषित करने का एक अवसर भी हो सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार की शाम को 'एयरफोर्स वन' में संवाददाताओं को इस संबंध में जानकारी दी, जब वह फ्लोरिडा से वाशिंगटन जा रहे थे।<br><br>ट्रंप ने कहा कि वह देखेंगे कि क्या मंगलवार तक उनके पास घोषणा करने के लिए कुछ है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति पुतिन से बात करेंगे और सप्ताहांत में इस मुद्दे पर बहुत काम किया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह देखना चाहते हैं कि क्या वे इस युद्ध को समाप्त कर सकते हैं।<br><br>क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सोमवार की सुबह दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को होने वाली बातचीत की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि वे घटनाओं से पहले कुछ नहीं कहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच बातचीत की विषय-वस्तु किसी पूर्व चर्चा का विषय नहीं होती है।<br><br>यूरोपीय सहयोगी, पुतिन के प्रति ट्रंप के आकर्षण और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के प्रति उनके सख्त रवैये को लेकर चिंतित हैं। जेलेंस्की को लगभग दो सप्ताह पहले तब कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब वह 'ओवल ऑफिस' आए थे। रूस ने लगभग तीन साल पहले यूक्रेन पर आक्रमण किया था।<br><br>ट्रंप ने कहा कि युद्ध को समाप्त करने के लिए भूमि और बिजली संयंत्र बातचीत का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि वे जमीन और बिजली संयंत्रों के बारे में बात करेंगे। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में मॉस्को का दौरा किया था।<br><br>रूस ने 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद यूक्रेन के चार क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इनमें डोनेत्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र, जो पूर्व में स्थित हैं, और खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्र, जो देश के दक्षिण-पूर्व में स्थित हैं, शामिल हैं। हालांकि, रूस का इन चारों क्षेत्रों में से किसी पर भी पूरी तरह से नियंत्रण नहीं है। पिछले साल, पुतिन ने शांति की मांगों में से एक के रूप में कीव के सैनिकों को सभी चार क्षेत्रों से वापस बुलाने की बात कही थी। 2014 में, रूस ने यूक्रेन से क्रीमिया को भी अपने में मिला लिया था।<br><br>जापोरिज्जिया क्षेत्र के कब्जे वाले हिस्से में, मॉस्को जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र को नियंत्रित करता है, जो यूरोप में सबसे बड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने संभावित परमाणु आपदा की आशंकाओं के बीच संयंत्र के बारे में अक्सर चिंता व्यक्त की है। ट्रंप ने 'एयरफोर्स वन' में पत्रकारों से कहा कि हाल ही में शेयर बाजार में उथल-पुथल और आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता के बावजूद, वह दो अप्रैल को शुल्क लगाने की अपनी योजना को आगे बढ़ाएंगे।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>पाकिस्तानी कैफे में एलन मस्क का हमशक्ल!</title>
<link>https://pratinidhi.in/elon-musk-lookalike-spotted-in-pakistan-eating-with-friends-video-goes-viral</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में एलन मस्क के हमशक्ल का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो खैबर पख्तूनख्वा के एक स्थानीय भोजनालय में रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें मस्क के हमशक्ल को दोस्तों के साथ खाना खाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने उसे &#039;एलन मस्क लाइट&#039; बुलाया तो कुछ ने &#039;पठानों का एलन मस्क&#039; बताते हुए चुटकी ली। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के नाक-नक्श एलन मस्क से काफी मिलते-जुलते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:22:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>एलन मस्क, हमशक्ल, पाकिस्तान, वायरल वीडियो, सोशल मीडिया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान में एलन मस्क का हमशक्ल दिखा!

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पाकिस्तान में एलन मस्क की तरह दिखने वाला एक युवक अपने दोस्तों के साथ खाना खाते हुए नजर आ रहा है।

वीडियो में दिख रहे शख्स का चेहरा एलन मस्क के युवावस्था से काफी मिलता-जुलता है। वह अपने दोस्तों के साथ चावल खा रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

वीडियो खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) क्षेत्र के एक स्थानीय भोजनालय में रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में, मस्क का हमशक्ल अपने दोस्तों के साथ भोजन का आनंद ले रहा है। वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर शेयर किया गया था।

वीडियो में, मस्क जैसा दिखने वाला व्यक्ति अपने दोस्तों के साथ दिखाई दे रहा है, जिनमें से एक उसे पश्तो में "एलन मस्क" कहकर बुलाता है। वीडियो को पहले इंस्टाग्राम पर अपलोड किया गया था और बाद में एक्स पर शेयर किया गया। वीडियो के कैप्शन में लिखा है, "पाकिस्तान के केपीके में एलन मस्क के इस हमशक्ल को देखिए। एलन मस्क खान यूसुफजई।" पाकिस्तानी शख्स के जबड़े से लेकर आंखों तक, चेहरे की विशेषताएं मस्क से मिलती जुलती हैं।

वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के नाक-नक्श एलन मस्क से मिलते जुलते हैं, जिस कारण ये लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो रहा है। कुछ यूजर्स ने इसे एलन मस्क लाइट बुलाया तो कुछ ने इसे पठानों का एलन मस्क बताते हुए चुटकियां लीं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का नया आदेश: बाइडन के बच्चों को नहीं मिलेगी सुरक्षा</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-orders-removal-of-secret-service-protection-for-biden-children</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो बाइडन के बच्चों, हंटर और एश्ले बाइडन की सीक्रेट सर्विस सुरक्षा को रद्द कर दी है। ट्रंप ने कहा कि हंटर बाइडन को लंबे समय से सीक्रेट सर्विस सुरक्षा मिली हुई थी, जिसका खर्च अमेरिकी करदाताओं द्वारा वहन किया जा रहा था। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की। यह फैसला एक रिपोर्टर द्वारा हंटर बाइडन की सीक्रेट सर्विस के बारे में पूछे जाने के बाद आया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:18:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडन, हंटर बाइडन, एश्ले बाइडन, सीक्रेट सर्विस प्रोटेक्शन, टैक्सपेयर्स, अमेरिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद कदम उठाते हुए जो बाइडन के बच्चों, हंटर और एश्ले बाइडन की सीक्रेट सर्विस सुरक्षा को रद्द कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की। <br><br>ट्रंप ने कहा कि हंटर बाइडन को लंबे समय से सीक्रेट सर्विस सुरक्षा मिली हुई थी, जिसका खर्च अमेरिकी करदाताओं द्वारा वहन किया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि एश्ले बाइडन, जिनके पास 13 एजेंट हैं, को भी सुरक्षा सूची से हटा दिया जाएगा।<br><br>यह फैसला एक रिपोर्टर द्वारा हंटर बाइडन की सीक्रेट सर्विस के बारे में पूछे जाने के बाद आया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन वे इसकी जांच करेंगे। व्हाइट हाउस के पास हुई एक घटना में, सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने एक युवक को गोली मार दी थी, जो व्हाइट हाउस में घुसने की कोशिश कर रहा था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मोदी के बयान से पाकिस्तान में खलबली, कश्मीर पर फिर अलापा राग</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-reacts-to-pm-modi-podcast-on-kashmir-dispute</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पॉडकास्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कश्मीर मुद्दे पर उनके बयानों को भ्रामक बताया है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने एक बयान जारी कर पीएम मोदी के दावों को खारिज किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर का विवाद सात दशकों से अनसुलझा है, क्योंकि भारत ने अपने वादों को पूरा नहीं किया। पाकिस्तान ने भारत पर पाकिस्तानी जमीन पर संकट पैदा करने और जम्मू-कश्मीर में सरकारी दमन करने का आरोप लगाया है। पीएम मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ शांति प्रयासों को हमेशा शत्रुता से नाकाम किया गया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:18:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Narendra Modi, Kashmir, podcast, Lex Fridman</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पॉडकास्ट के बाद पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर पीएम मोदी के बयानों को भ्रामक और एकतरफा बताया है।<br><br>पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने एक बयान जारी कर पीएम मोदी के दावों को खारिज किया है। पाकिस्तान का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद सात दशकों से अनसुलझा है, क्योंकि भारत ने संयुक्त राष्ट्र, पाकिस्तान और कश्मीरी लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। <br><br>पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भारत पर पाकिस्तानी जमीन पर संकट पैदा करने और जम्मू-कश्मीर में सरकारी दमन करने का आरोप लगाया है। पीएम मोदी ने हाल ही में एक अमेरिकी पॉडकास्टर को दिए इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के प्रयासों को हमेशा शत्रुता और धोखे से नाकाम किया गया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूक्रेन ने बदला आर्मी चीफ, ह्नातोव को मिली कमान</title>
<link>https://pratinidhi.in/ukraine-president-zelenskyy-appoints-andriy-gnatov-as-chief-of-general-staff</link>
<guid>https://pratinidhi.in/ukraine-president-zelenskyy-appoints-andriy-gnatov-as-chief-of-general-staff</guid>
<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एंड्री ह्नातोव को सेना का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है। वह अनातोली बार्गीलेविच की जगह लेंगे। रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने कहा कि सेना में यह फेरबदल युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए किया गया है। ह्नातोव के पास 27 साल से ज्यादा का सैन्य अनुभव है और उन्होंने पहले कई महत्वपूर्ण कमान संभाली हैं। वहीं, बार्गीलेविच को सैन्य मानकों के अनुपालन और अनुशासन को मजबूत करने का काम सौंपा गया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:18:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, जेलेंस्की, ह्नातोव, आर्मी चीफ, सैन्य अनुभव</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एंड्री ह्नातोव को सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ का प्रमुख नियुक्त किया है। <br><br>यह नियुक्ति अनातोली बार्गीलेविच के स्थान पर हुई है, जिन्हें रक्षा मंत्रालय के मुख्य निरीक्षक के पद पर भेजा गया है। <br><br>यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने कहा कि यह कदम यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं की युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।<br><br><b>ह्नातोव का सैन्य अनुभव</b><br><br>रूस्तम उमरोव के अनुसार, ह्नातोव के पास 27 वर्षों से अधिक का सैन्य अनुभव है। उन्होंने पहले समुद्री ब्रिगेड, पूर्वी ऑपरेशनल कमान और यूक्रेनी सशस्त्र बलों के संयुक्त बलों की कमान संभाली है।<br><br>रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बार्गीलेविच को सैन्य मानकों के अनुपालन और सशस्त्र बलों में अनुशासन को मजबूत करने का कार्य सौंपा गया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की नौ महीने बाद पृथ्वी पर वापसी</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-and-butch-wilmore-return-to-earth-after-nine-months</link>
<guid>https://pratinidhi.in/sunita-williams-and-butch-wilmore-return-to-earth-after-nine-months</guid>
<description><![CDATA[ सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर लगभग नौ महीने अंतरिक्ष में बिताने के बाद 18 मार्च को पृथ्वी पर लौटेंगे। क्रू 9 और सुनीता विलियम के प्रतिस्थापन क्रू-10 को रविवार 16 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जोड़ा गया। नासा ने घोषणा करते हुए कहा है कि अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर मंगलवार शाम को पृथ्वी पर लौट आएंगे। विलियम्स और विल्मोर निक हेग और रोस्कोस्मोस अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव के साथ स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन पर सवार होकर वापसी करेंगे। नासा और स्पेसएक्स ने एजेंसी के क्रू-9 मिशन की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से वापसी के लिए फ्लोरिडा के तट पर मौसम का आकलन किया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:18:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर, अंतरिक्ष स्टेशन, नासा, स्पेसएक्स, क्रू-9, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर करीब नौ महीने अंतरिक्ष में बिताने के बाद 18 मार्च को धरती पर लौटेंगे। रविवार, 16 मार्च को क्रू 9 और सुनीता विलियम्स के रिप्लेसमेंट क्रू-10 को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जोड़ा गया। मिशन के अधिकारी क्षेत्र के मौसम पर लगातार नजर रख रहे हैं, क्योंकि ड्रैगन की वापसी कई चीजों पर निर्भर करती है।<br><br>नासा ने बताया है कि सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर मंगलवार शाम को धरती पर वापस आएंगे। वे दोनों नौ महीने से ज्यादा समय से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में फंसे हुए थे। विलियम्स और विल्मोर, निक हेग और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव के साथ स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन में वापस आएंगे। नासा, स्पेसएक्स क्रू-9 की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से धरती पर वापसी का लाइव कवरेज देगा।<br><br>नासा और स्पेसएक्स ने क्रू-9 मिशन की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से वापसी के लिए फ्लोरिडा के तट पर मौसम और पानी में लैंडिंग की स्थितियों का जायजा लेने के लिए रविवार को मीटिंग की। मिशन के अधिकारी 18 मार्च की शाम को मौसम के अच्छे रहने की उम्मीद के साथ क्रू-9 की जल्द वापसी की तैयारी कर रहे हैं। ड्रैगन की अनडॉकिंग कई बातों पर डिपेंड करती है, इसलिए मिशन के अधिकारी मौसम पर नजर बनाए हुए हैं।<br><br>इनमें स्पेस यान की तैयारी, रिकवरी टीम की तैयारी, मौसम, समुद्र की स्थिति और दूसरे फैक्टर्स शामिल हैं। नासा और स्पेसएक्स, क्रू-9 की वापसी के नजदीक लैंडिंग की सही जगह की जानकारी देंगे।<br><br>इस बीच, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया है। मस्क ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें विलियम्स ने कहा कि हम जल्द ही वापस आ रहे हैं, इसलिए मेरे बिना कोई प्लानिंग मत करना। हम जल्द ही वापस आएंगे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>स्पेन: अदालत ने बेटी की इच्छामृत्यु रोकने की पिता की याचिका खारिज की</title>
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<description><![CDATA[ स्पेन की एक अदालत ने लकवाग्रस्त युवती की इच्छामृत्यु रोकने की पिता की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि युवती इच्छामृत्यु की शर्तों को पूरा करती है, जिसे 2021 में स्पेन में वैध कर दिया गया था। युवती ने 2022 में आत्महत्या का प्रयास किया था और तब से वह लकवाग्रस्त है। पिता ने तर्क दिया कि उसकी बेटी मानसिक रूप से बीमार है और सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अब पिता फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:15:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इच्छामृत्यु, स्पेन, अदालत, याचिका, बेटी, पिता, मानसिक डिसऑर्डर, पैरालिसिस, कैटेलोनिया, बोर्ड, कानून</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[स्पेन में, एक अदालत ने 24 वर्षीय लकवाग्रस्त महिला की इच्छामृत्यु पर रोक लगाने के लिए उसके पिता द्वारा दायर याचिका को अस्वीकार कर दिया। महिला ने इच्छामृत्यु का अनुरोध किया था, जिसे इच्छामृत्यु बोर्ड ने पहले ही स्वीकार कर लिया था।<br><br>पिता ने तर्क दिया कि उसकी बेटी मानसिक बीमारी से पीड़ित है और सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संकेत हैं कि उसने अपना मन बदल लिया है और उसकी बीमारी में असहनीय शारीरिक या मनोवैज्ञानिक पीड़ा शामिल नहीं है। अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।<br><br>अदालत ने अपने फैसले में कहा कि महिला इच्छामृत्यु के लिए सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है, जिसे स्पेन में 2021 में वैध कर दिया गया था। न्यायाधीश ने लिखा कि इस प्रक्रिया में शामिल सभी पेशेवर सहमत हैं कि महिला एक गंभीर और लाइलाज बीमारी से पीड़ित है। अदालत ने यह भी कहा कि महिला अपना फैसला लेने में सक्षम है और उसके पिता को इसे चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।<br><br>अब, पिता के फैसले के खिलाफ अपील करने की उम्मीद है। कई संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है। महिला 2022 में आत्महत्या के प्रयास में एक इमारत से कूद गई थी और तब से लकवाग्रस्त है। उसने पिछले साल अप्रैल में अदालत से इच्छामृत्यु का अनुरोध किया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिकी अधिकारियों के डर से भारतीय छात्रा ने छोड़ा अमेरिका, रूममेट ने बचाया!</title>
<link>https://pratinidhi.in/indian-student-ranjani-srinivasan-escaped-detention-center-us</link>
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<description><![CDATA[ भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन को हमास के समर्थन के आरोप में अमेरिका छोड़ना पड़ा। उनका वीजा रद्द कर दिया गया था, और उन्हें अमेरिकी अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए जाने का डर था। रंजनी ने बताया कि कैसे उनकी रूममेट ने अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के अधिकारियों से उन्हें बचाया, जो उनके दरवाजे पर आ धमके थे। रंजनी ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है ताकि वह अपनी पीएचडी पूरी कर सकें। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने भी उनका नामांकन रद्द कर दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:15:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Ranjani Srinivasan, Indian Student, US Visa, Deportation, ICE, Columbia University, Hamas, Student Visa</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[Here is the rewritten article:

<br><br>
In a recent incident, Indian student <strong>Ranjani Srinivasan</strong>, who was pursuing her PhD at <strong>Columbia University</strong> in New York, had to leave the United States. The reason? Allegations of supporting <strong>Hamas</strong> led to the revocation of her student visa. Fearing action from <em>American authorities</em>, she reportedly chose self-deportation. Ranjani recounted the tense moment when <em>officials</em> arrived at her doorstep.
<br><br>
<strong>Highlights of the incident:</strong>
<br>
<ul>
 <li>Ranjani Srinivasan shares her ordeal after leaving the U.S. due to visa cancellation.</li>
 <li>She recounts the moment when <strong>ICE</strong> officials arrived at her door, and her roommate stepped in to handle the situation.</li>
 <li>Ranjani believes that opening the door would have led to her detention.</li>
</ul>
<br><br>
<strong>What exactly happened?</strong>
<br><br>
Ranjani received an email from the embassy informing her about the visa cancellation. According to <em>The News Minute</em>, the U.S. Consulate in Chennai sent the email on March 5th at 11:45 PM local time. Upon seeing the email the next morning, Ranjani contacted the <strong>ISSO</strong> on campus. She feared violating visa regulations and needed to make immediate arrangements if she had to leave the country. However, she received no immediate response.
<br><br>
She then emailed the Dean of Academic and Student Affairs, who ensured that <strong>Maria Renoso</strong>, the ISSO's compliance director, would respond. Renoso suggested an online meeting with an ISSO advisor, initially scheduled for March 11th. After Ranjani explained her urgency, the appointment was moved to March 7th.
<br><br>
During the online meeting on March 7th, Ranjani was informed that her <strong>Form I-20</strong>, or ‘Certificate of Eligibility for Non-immigrant Student Status,’ was still valid, meaning her presence in the country was still legal. However, this relief was short-lived. A knock came at the door of her flat on campus. Ranjani said, "My roommate recognized the knock as being from law enforcement and knew how to respond. Without opening the door, she asked them to identify themselves."
<br><br>
The people at the door did not identify themselves as <strong>ICE</strong>, but claimed to be police officers. They allegedly shouted through the door that Ranjani's visa had been cancelled and they only wanted to talk.
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Ranjani explained to TNM that <strong>ICE</strong> can use tricks to enter a home. Opening the door implies consent for search and arrest. This had happened to someone named Khalil. However, <strong>ICE</strong> requires a judicial warrant to force entry.
<br><br>
Since Ranjani did not open the door and there was no warrant, the agents had to leave. This interaction occurred while Ranjani was still on the call with the ISSO advisor.
<br><br>
<strong>'If I had been alone...'</strong>
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Ranjani said, "If I had been alone, I would have opened the door. I would have been taken to a detention center, and deportation proceedings would probably be underway right now. I was talking to the advisor who was saying everything was fine, but <strong>ICE</strong> was at my door. I told her this, and she said 'Oh'."
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The advisor then muted herself and started making frantic calls. Eventually, she seemed somewhat relieved, ended the calls, turned to Ranjani, and gave her a list of lawyers. She also told her to call Public Safety, the campus security guards. Public Safety advised Ranjani to avoid opening the door for <strong>ICE</strong> officers and said they would file a report.
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<strong>'I realized no one was helping'</strong>
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Ranjani stated that <strong>ICE</strong> cannot enter a private building without a judicial warrant, but they were on campus. She added, "At this point, I realized that no one was really helping me. So I quietly decided to leave the flat, even though I was still confused. I was told that my Form I-20 was still valid, meaning my stay in America was still legal."
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Ranjani alleges that <strong>ICE</strong> tried to enter the flat again on March 8th and 9th, after she had already left. On March 9th, the <strong>ISSO</strong> informed Ranjani that her student status had been revoked. Columbia also cancelled her enrollment and asked her to vacate university housing. Fearing detention, Ranjani left for Canada on March 11th. After Ranjani left the U.S., her lawyers informed <strong>ICE</strong> on March 14th that she had left the country.
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<strong>ICE</strong> responded and asked for proof. Her lawyers were still gathering proof of departure when DHS Secretary <strong>Kristi Noem</strong> posted a viral CCTV clip of Ranjani at the airport and referred to the former doctoral candidate as a 'Hamas supporter' in the caption.
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<strong>'University is cooperating with authorities'</strong>
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On March 13th, DHS officers allegedly went to Ranjani's flat with a warrant. Ranjani says the officers were surprised to find the bedroom empty and clean. Columbia also sent an official email to students informing them that the university was cooperating with the relevant authorities.
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<strong>Ranjani hopes for help from the Indian government</strong>
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Regarding her current situation, Ranjani says, "The fact that this has escalated so much even for someone like me is scary. I've just shared some social media posts and signed some letters on academic repression; it's really somewhat disheartening. I don't have that kind of access."
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She remains hopeful and said, "I would request the Ministry of External Affairs to please restore my visa and allow me to re-enroll at Columbia. I also appeal to the Indian government to support me and protect other Indian students. I am six months away from completing my PhD. As you can see, the whole process was very arbitrary. The risk of staying there and appealing was so high that I could not go through the judicial process there. I just hope that both the Indian government and the Tamil Nadu state government can work together and help me solve this problem."]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश को पाकिस्तान में वापस आने का जैद हामिद का प्रस्ताव</title>
<link>https://pratinidhi.in/zaid-hamid-invites-bangladesh-to-join-pakistan-to-correct-mistakes-of-1971-war</link>
<guid>https://pratinidhi.in/zaid-hamid-invites-bangladesh-to-join-pakistan-to-correct-mistakes-of-1971-war</guid>
<description><![CDATA[ पाकिस्तान के लाल टोपी के नाम से कुख्यात जैद हामिद ने बांग्लादेश को 1971 से पहले की तरह पाकिस्तान में वापस मिलने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को अलग करने का फैसला वर्तमान पीढ़ी का नहीं था, बल्कि पिछली पीढ़ी का था। जैद हामिद ने बांग्लादेशियों को गले लगाने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान उन्हें खुले हाथों से स्वीकार करेगा और उनके दिलों में कोई नफरत नहीं है। उन्होंने 1971 से पहले की तरह फिर से साथ मिलकर यात्रा शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव मोहम्मद यूनुस सरकार के दौरान आया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 10:15:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, बांग्लादेश, जैद हामिद, 1971 युद्ध, लाल टोपी, गजवा-ए-हिंद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान के कुख्यात <strong>लाल टोपी</strong> के नाम से मशहूर <strong>जैद हामिद</strong> ने बांग्लादेश को एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को <strong>1971 से पहले</strong> की तरह पाकिस्तान में मिल जाना चाहिए।</p><br><p>जैद हामिद ने यह भी कहा कि बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग करने का फैसला वर्तमान बांग्लादेशियों ने नहीं किया था, बल्कि यह उनकी <strong>पुरानी पीढ़ी</strong> का फैसला था। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश फिर से पाकिस्तान में शामिल होता है, तो वह बांग्लादेशियों को गले लगाने के लिए तैयार हैं।</p><br><p>जैद हामिद का यह बयान <strong>मोहम्मद यूनुस सरकार</strong> के कार्यकाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संबंधों में बढ़ रही गर्मजोशी के बीच आया है।</p><br><p>जैद हामिद ने बांग्लादेश से पाकिस्तान में वापस आने और फिर से एकजुट होने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान उन्हें खुले हाथों से स्वीकार करेगा और उनके दिलों में कोई नफरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे 1971 से पहले की तरह फिर से साथ मिलकर यात्रा शुरू कर सकते हैं। </p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप ने पीएम मोदी के पॉडकास्ट को सराहा, पीएम ने ट्रंप को बताया दिलेर</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-shared-pm-modi-podcast-pm-modi-called-trump-a-brave-man</link>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पॉडकास्ट को डोनाल्ड ट्रंप ने शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी ने लेक्स फ्रिडमैन से कई मुद्दों पर बात की, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती शामिल है। मोदी ने ह्यूस्टन में &#039;हाउडी मोदी&#039; कार्यक्रम के दौरान ट्रंप के व्यवहार की प्रशंसा की और रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में शांति के लिए प्रतिबद्ध है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 17:02:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>PM Modi, Donald Trump, Podcast, Lex Fridman, India, America, Politics</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया पॉडकास्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने लेक्स फ्रिडमैन से कई मुद्दों पर बात की, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती शामिल है।</p><br><p>पीएम मोदी ने बताया कि कैसे ट्रंप ने ह्यूस्टन में 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम के दौरान उनका भाषण सुना और उनके साथ स्टेडियम का चक्कर लगाने के लिए तुरंत तैयार हो गए। मोदी ने कहा कि ट्रंप का यह व्यवहार उनके दिल को छू गया।</p><br><p><strong>रूस-यूक्रेन संघर्ष पर पीएम मोदी</strong></p><br><p>पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। भारत इस मामले में शांति के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और वह दोनों देशों से युद्ध को समाप्त करने का आग्रह कर सकते हैं।</p><br><p>पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वह 'भारत फर्स्ट' की विचारधारा का पालन करते हैं, जबकि ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' की विचारधारा का पालन करते हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<item>
<title>अमेरिका में बुजुर्ग भारतीय ग्रीन कार्ड धारकों पर दबाव</title>
<link>https://pratinidhi.in/elderly-indians-targeted-in-america-green-card-holders-forced-to-surrender</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में, इमिग्रेशन वकीलों ने ग्रीन कार्ड धारकों की संख्या में वृद्धि देखी है, जिन्हें हवाई अड्डों पर हिरासत में रखा जा रहा है। कुछ पर ग्रीन कार्ड छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है, खासकर बुजुर्ग भारतीय जो सर्दियों में भारत जाते हैं। वकीलों ने ग्रीन कार्ड सरेंडर न करने की सलाह दी है, क्योंकि धारक को इमिग्रेशन जज द्वारा सुनवाई का अधिकार है। एक वकील ने कहा कि CBP ने बुजुर्ग भारतीय ग्रीन कार्ड धारकों को निशाना बनाया है और उन पर फॉर्म I-407 पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला है। अमेरिका में सेल्फ-डिपोर्टेशन एप लाया गया है, जिसका समर्थन एलन मस्क ने किया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 16:58:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ग्रीन कार्ड, भारतीय बुजुर्ग, अमेरिका, इमिग्रेशन, कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन, सेल्फ-डिपोर्टेशन एप, एलन मस्क</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका में, इमिग्रेशन वकीलों ने ग्रीन कार्ड धारकों, जिनमें भारतीय भी शामिल हैं, की संख्या में वृद्धि देखी है, जो यूएस कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) अधिकारियों द्वारा प्रवेश के हवाई अड्डों पर दोहरे निरीक्षण और रात भर हिरासत में रहने से गुजर रहे हैं।<br><br>कुछ लोगों पर स्वेच्छा से अपना ग्रीन कार्ड छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है, खासकर बुजुर्ग भारतीय जो अपने बच्चों के साथ अमेरिका में रहते हैं लेकिन सर्दियों के महीने भारत में बिताते हैं। वकीलों ने सलाह दी है कि अपना ग्रीन कार्ड सरेंडर न करें, क्योंकि ग्रीन कार्ड धारक को इमिग्रेशन जज द्वारा सुनवाई का अधिकार है।<br><br>आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (आईएनए) के तहत, एक वैध स्थायी निवासी (एलपीआर), जिसे ग्रीन कार्ड धारक भी कहा जाता है, जो 180 दिनों से अधिक समय तक अमेरिका से बाहर रहता है, उसे 'पुनः प्रवेश' चाहने वाला माना जाता है।<br><br>फ्लोरिडा के एक इमिग्रेशन वकील अश्विन शर्मा ने कहा कि उन्होंने ऐसे मामले संभाले हैं जहां CBP ने बुजुर्ग भारतीय ग्रीन कार्ड धारकों को निशाना बनाया है और उन पर फॉर्म I-407 पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला है। सिएटल स्थित इमिग्रेशन वकील कृपा उपाध्याय ने ग्रीन कार्ड को सरेंडर न करने के महत्व पर जोर दिया।<br><br>एनपीजेड लॉ ग्रुप की मैनेजिंग अटॉर्नी स्नेहल बत्रा ने कहा कि केवल एक इमिग्रेशन जज ही ग्रीन कार्ड वापस ले सकता है, इसलिए व्यक्तियों को इस फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।<br><br>आर्लिंगटन स्थित इमिग्रेशन अटॉर्नी राजीव एस खन्ना ने चेतावनी दी है कि ग्रीन कार्ड धारकों को अमेरिका में एक स्थायी घर बनाने और बनाए रखने की आवश्यकता होती है।<br><br>अमेरिका में सेल्फ-डिपोर्टेशन एप लाया गया है, जिसका समर्थन एलन मस्क ने किया है। कोलंबिया विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन द्वारा सीबीपी होम ऐप का उपयोग करके अमेरिका से स्व-प्रवास किए जाने के बाद मस्क का यह समर्थन आया है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ढाका हाईकोर्ट ने 20 छात्रों की फांसी की सजा बरकरार रखी</title>
<link>https://pratinidhi.in/bangladesh-high-court-upholds-death-penalty-for-20-students</link>
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<description><![CDATA[ ढाका हाईकोर्ट ने 2019 में एक छात्र की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 20 छात्रों की मौत की सजा बरकरार रखी है। मृतक छात्र ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ फेसबुक पर पोस्ट किया था। निचली अदालत ने 2021 में छात्रों को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है। इसके अतिरिक्त, पांच छात्रों की आजीवन कारावास की सजा भी बरकरार रखी गई है। फहद के परिवार ने संतोष व्यक्त किया है, जबकि बचाव पक्ष के वकील ने ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। इस मामले में एक दोषी, मुंतसिर, जेल से फरार है। ये सभी छात्र बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (BUET) के थे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:46:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, हाईकोर्ट, छात्र, सजा, अबरार फहद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ढाका हाईकोर्ट ने 2019 के एक हत्याकांड में 20 छात्रों की मौत की सजा को बरकरार रखा है। ये छात्र अबरार फहद की हत्या के दोषी पाए गए थे, जिसमें अभियोजक ने 20 छात्रों को मौत और 5 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बीच, बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है।<br><br>ढाका हाईकोर्ट ने 2019 में छात्र अबरार फहद की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 20 छात्रों की मौत की सजा बरकरार रखी है। फहद ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ फेसबुक पर पोस्ट किया था, जिसके बाद अवामी लीग के छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने उसे मार डाला। निचली अदालत ने 2021 में छात्रों को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है। इसके अतिरिक्त, पांच छात्रों की आजीवन कारावास की सजा भी बरकरार रखी गई है। फहद के परिवार ने संतोष व्यक्त किया है, जबकि बचाव पक्ष के वकील ने ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। इस मामले में एक दोषी, मुंतसिर, जेल से फरार है। ये सभी छात्र बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (BUET) के थे।<br><br>इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, क्योंकि दोषी छात्र बांग्लादेश छात्र लीग (BCL) के सदस्य थे, जो शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की छात्र शाखा है। फहद की पोस्ट में सरकार की आलोचना की गई थी, जिससे BCL के छात्र भड़क गए थे। हालांकि, मामले के बाद इन सभी को पार्टी से निकाल दिया गया था। दिसंबर 2021 में, ढाका की एक निचली अदालत ने दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, और अब हाईकोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा है। जस्टिस असदुज्जमान और जस्टिस सैयद एनायत हुसैन की पीठ ने कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।<br><br>फहद के भाई फैयाज ने फैसले पर संतोष जताया और कहा कि उन्हें इतनी जल्दी फैसले की उम्मीद नहीं थी, लेकिन अभी भी कई कानूनी प्रक्रियाएं बाकी हैं। बचाव पक्ष के वकील अजीजुर रहमान दुलु ने निराशा व्यक्त की और कहा कि वे अपीलीय विभाग में अपील करेंगे, जहां उन्हें न्याय की उम्मीद है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बलूचिस्तान: महरंग बलोच की शांतिपूर्ण क्रांति</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान में लंबे समय से अशांति है, और महरंग बलोच गांधीवादी तरीके से पाकिस्तानी सरकार और सेना की ज्यादतियों का विरोध कर रही हैं। वह अहिंसक आंदोलनों के माध्यम से बलूच लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। डॉक्टर महरंग बलोच, BYC की नेता, पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अहिंसक प्रदर्शन कर रही हैं। पाकिस्तानी सेना पर बलूच लोगों के अपहरण, यातना और हत्या के आरोप हैं। महरंग 2006 से इन घटनाओं के खिलाफ लड़ रही हैं, हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखती हैं। 2003 से 2024 तक 50,000 बलूचों का अपहरण किया गया और 25,000 की हत्या कर दी गई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:46:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>महरंग बलोच, बलूचिस्तान, पाकिस्तान, मानवाधिकार, अहिंसक आंदोलन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>बलूचिस्तान में अशांति और महरंग बलोच का उदय</strong><br><br>पाकिस्तान का बलूचिस्तान लंबे समय से अशांति का केंद्र रहा है। यहां दशकों से सरकार के विरुद्ध आवाजें उठती रही हैं। हाल ही में, बलूच लिबरेशन फोर्स (BLA) ने पाकिस्तानी सेना पर हमले तेज कर दिए हैं। जाफर एक्सप्रेस ट्रेन की घटना ने विश्व का ध्यान खींचा है।<br><br>बलूचिस्तान में, जहाँ BLA जैसे सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, वहीं 32 वर्षीय महरंग बलोच गांधीवादी तरीके से सरकार और सेना की ज्यादतियों का विरोध कर रही हैं। वह अहिंसक आंदोलनों के माध्यम से बलूच लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं।<br><br><strong>महरंग बलोच: एक मानवाधिकार कार्यकर्ता</strong><br><br>डॉक्टर महरंग बलोच, BYC की नेता, पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अहिंसक प्रदर्शन कर रही हैं। पाकिस्तानी सेना पर बलूच लोगों के अपहरण, यातना और हत्या के आरोप हैं। महरंग 2006 से इन घटनाओं के खिलाफ लड़ रही हैं, हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखती हैं।<br><br>महरंग, पेशे से डॉक्टर, अब एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उनके पिता, एक राजनीतिक कार्यकर्ता, 2009 में गायब हो गए थे और बाद में उनका शव मिला। 2019 में, उन्होंने BYC की स्थापना की और 2024 में सरकार के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।<br><br>महरंग का कहना है कि 2011 में अपने पिता के शव की पहचान करने के बाद उन्होंने मौत का डर त्याग दिया। बलूचिस्तान में महिलाओं के अधिकारों की कमी के बावजूद, वह न केवल खुद लड़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं।<br><br>महरंग के अनुसार, 2003 से 2024 तक 50,000 बलूचों का अपहरण किया गया और 25,000 की हत्या कर दी गई है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप प्रशासन का विवादित कदम: वेनेजुएला गैंग सदस्यों को अल सल्वाडोर भेजा</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-deports-venezuelan-gang-members-to-el-salvador-controversy-over-wartime-law</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 200 से अधिक वेनेजुएला के कथित गैंग सदस्यों को अल सल्वाडोर की जेल में भेज दिया, जबकि एक न्यायाधीश ने इस निर्वासन को रोकने का आदेश दिया था। वेनेजुएला ने इस कदम की निंदा की है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने 200 से अधिक लोगों के आने की पुष्टि की है, जिन्हें CECOT जेल में रखा गया है। ट्रंप प्रशासन ने 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट का इस्तेमाल किया, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया। नायब बुकेले ने सोशल मीडिया पर कैदियों का एक वीडियो साझा किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:46:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>वेनेजुएला, अल सल्वाडोर, डोनाल्ड ट्रंप, निर्वासन, गैंग, अमेरिकी कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वॉशिंगटन:</strong> अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक विवादास्पद कदम उठाते हुए 200 से अधिक वेनेजुएला के कथित गैंग सदस्यों को अल सल्वाडोर की जेल में भेज दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई, जब एक संघीय न्यायाधीश ने प्रशासन को इस निर्वासन को सही ठहराने के लिए सदियों पुराने युद्धकालीन कानून का उपयोग करने से रोक दिया था। हालांकि, अदालत के आदेश से पहले ही विमान अल सल्वाडोर के लिए रवाना हो चुके थे।
<br><br>
वेनेजुएला की सरकार ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने भी अमेरिका से 200 से अधिक लोगों के आने की पुष्टि की है। इन कैदियों को टेरोरिज्म कनफाइनमेंट सेंटर (CECOT) में रखा गया है, जो एक उच्च सुरक्षा वाली जेल है।
<br><br>
ट्रंप प्रशासन ने 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट का इस्तेमाल किया, जो राष्ट्रपति को दुश्मन देश के नागरिकों को हिरासत में लेने या निर्वासित करने का अधिकार देता है। इस कानून का उपयोग पहले केवल तीन बार बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के दौरान किया गया था। वेनेजुएला के साथ अमेरिका का कोई युद्ध नहीं होने के बावजूद इस कानून का इस्तेमाल विवाद का विषय बन गया है।
<br><br>
नायब बुकेले ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया जिसमें 238 कथित गैंग सदस्यों को हथकड़ी और बेड़ियों में बंधे हुए विमान से कड़ी सुरक्षा में ले जाया जा रहा है। इन कैदियों के सिर मुंडवाए गए और उनके हाथ पीछे बंधे हुए थे। उन्हें राजधानी सैन सल्वाडोर से 75 किलोमीटर दूर जंगल में स्थित CECOT जेल में रखा गया है। बुकेले ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ एक बैठक में अमेरिकी कैदियों को अपने देश में रखने की पेशकश की थी, जिसमें ट्रेन डे अरागुआ और अल सल्वाडोर के MS-13 गैंग के सदस्य शामिल थे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तानी सेना में भगदड़: BLA के डर से 2500 सैनिकों ने छोड़ी नौकरी</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistani-soldiers-flee-army-amid-rising-insecurity-and-ongoing-military-casualties</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में सेना और सुरक्षाबलों पर लगातार हमले हो रहे हैं, खासकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में। विद्रोही गुट बीएलए के हमलों के बीच, बड़ी संख्या में पाक फौजी सेना की नौकरी छोड़ रहे हैं। एक हफ्ते में करीब 2,500 सैनिकों ने सेना छोड़ दी है। पाकिस्तान में बढ़ती असुरक्षा, जवानों की मौतें और बिगड़ती आर्थिक स्थिति सैनिकों के नौकरी छोड़ने की वजहें हैं। पाक सेना छोड़ने वाले ज्यादातर सैनिक सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई में काम करने चले गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना के भीतर हालात खराब हैं। बलूचिस्तान में हाल ही में ट्रेन को हाईजैक कर सैनिकों को निशाना बनाया गया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:46:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तानी सेना, BLA, सैनिक, नौकरी, पाकिस्तान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><b>इस्लामाबाद:</b> पाकिस्तान में सेना और सुरक्षाबलों पर लगातार हमले हो रहे हैं। खासकर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में पाक सेना पर भीषण हमले हुए हैं, जिनमें कई जानें गई हैं।</p><br><p>विद्रोही गुट बीएलए के हमलों के बीच, यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में पाक फौजी सेना की नौकरी छोड़ रहे हैं। काबुल फ्रंटलाइन के अनुसार, एक हफ्ते में करीब 2,500 सैनिकों ने सेना छोड़ दी है।</p><br><p>पाकिस्तान में बढ़ती असुरक्षा, जवानों की मौतें और बिगड़ती आर्थिक स्थिति सैनिकों के नौकरी छोड़ने की वजहें हैं। पाक सेना छोड़ने वाले ज्यादातर सैनिक सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई में काम करने चले गए हैं। वे विदेश जाकर आर्थिक सुरक्षा को चुन रहे हैं।</p><br><p>रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना के भीतर हालात खराब हैं, जिससे सैनिकों का मनोबल टूट रहा है। सैनिकों का पलायन सेना की ताकत पर सवाल उठाता है, खासकर ऐसे समय में जब सुरक्षा चुनौतियां हैं। इससे भविष्य में पाक सेना की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।</p><br><p>बलूचिस्तान में हाल ही में ट्रेन को हाईजैक कर सैनिकों को निशाना बनाया गया, और नोशकी में सैन्य काफिले पर हमला हुआ। इन हमलों में कई सैनिक मारे गए।</p><br><p>हालांकि, पाकिस्तानी मीडिया या पाक फौज ने सैनिकों के नौकरी छोड़ने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की सुरक्षित वापसी की तैयारी पूरी</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-and-buch-willmore-safe-return-preparations-complete</link>
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<description><![CDATA[ अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी की तैयारी अंतिम चरण में है। नासा ने घोषणा की है कि दोनों 19 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से सफलतापूर्वक लौटेंगे, और उनकी वापसी का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। वे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे, और इस मिशन में नासा के निक हेग और रोस्कोस्मोस के अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी शामिल हैं। स्पेसएक्स ने Crew-10 मिशन के तहत फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragon कैप्सूल को भेजा था। अमेरिकी राष्ट्रपति के आग्रह पर इस मिशन को जल्दी पूरा किया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:44:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, Buch Willmore, NASA, SpaceX, Crew Dragon, ISS</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी की तैयारी अब अंतिम चरण में है। नासा ने बताया है कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को 19 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से सफलतापूर्वक धरती पर वापस लाया जाएगा। नासा ने उनकी वापसी को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है।<br><br>नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 18 मार्च (मंगलवार) को फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। नासा इस पूरे घटनाक्रम का लाइव टेलीकास्ट करेगा, जिसकी शुरुआत ड्रैगन अंतरिक्ष यान के हैच को बंद करने की तैयारी के साथ होगी। इस मिशन में नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रोस्कोस्मोस (रूस) के अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी ड्रैगन कैप्सूल से वापस आएंगे।<br><br>स्पेसएक्स ने 14 मार्च को Crew-10 मिशन लॉन्च किया था, जिसके तहत फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragon कैप्सूल को भेजा गया था। यह NASA के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के अंतर्गत ISS के लिए ग्यारहवीं क्रू फ्लाइट है। पहले सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को मार्च के अंत तक वापस आना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एलन मस्क से जल्दी वापसी के आग्रह के बाद इस मिशन को तेज कर दिया गया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा: भारत&amp;बांग्लादेश संबंधों पर क्या होगा असर?</title>
<link>https://pratinidhi.in/muhammad-yunus-china-visit-impact-on-india-bangladesh-relations</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस 28 मार्च को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात करेंगे। चीनी राजदूत याओ वेन ने इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया है। प्रोफेसर यूनुस &#039;बदलते विश्व में एशिया: साझा भविष्य की ओर&#039; विषय पर भाषण देंगे, जिसमें चीन के उपप्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। पेकिंग विश्वविद्यालय प्रोफेसर यूनुस को मानद डॉक्टरेट की उपाधि देगा। सौर पैनल निर्माता कंपनी लोंगी बांग्लादेश में सौर पैनल विनिर्माण में निवेश करेगी। हाल ही में बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं की सूचना दी है, और महिलाओं के खिलाफ हिंसा में भी वृद्धि हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:42:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>मोहम्मद यूनुस, शी चिनफिंग, बांग्लादेश, चीन, भारत-बांग्लादेश संबंध, चीनी निवेश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>ढाका:</strong> बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख <strong>मोहम्मद यूनुस</strong> जल्द ही चीन के राष्ट्रपति <strong>शी चिनफिंग</strong> से मुलाकात करेंगे। यह दौरा <strong>28 मार्च</strong> को संभावित है। इस दौरान दोनों देशों के बीच एक संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद है।<br><br>चीनी राजदूत <strong>याओ वेन</strong> ने इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया है। प्रोफेसर यूनुस 'बदलते विश्व में एशिया: साझा भविष्य की ओर' विषय पर एक भाषण देंगे, जिसमें चीन के उपप्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। <br><br><strong>पेकिंग विश्वविद्यालय</strong> प्रोफेसर यूनुस को मानद डॉक्टरेट की उपाधि देगा। इसके अतिरिक्त, सौर पैनल निर्माता कंपनी <strong>लोंगी</strong> बांग्लादेश में सौर पैनल विनिर्माण में निवेश करने की योजना बना रही है।<br><br>दूसरी ओर, बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद ने हाल ही में 92 घटनाओं की सूचना दी है, जिनमें हत्या, दुष्कर्म, मंदिरों पर हमले और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा शामिल है। बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में भी वृद्धि हुई है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जाफर ट्रेन हाईजैक: भारत के खिलाफ सबूत पर पाक सेना की पोल खुली</title>
<link>https://pratinidhi.in/zafar-train-hijack-arzoo-kazmi-says-pakistan-has-no-sufficient-proof-against-india</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की सरकार और सेना ने बलूचिस्तान में हुए ट्रेन हाईजैक के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है। पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी ने अपनी ही सेना के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान को नाकामी छुपाने के लिए दूसरों पर दोष नहीं मढ़ना चाहिए। उन्होंने भारत पर आरोप लगाने से पहले मजबूत सबूत पेश करने की बात कही है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:42:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>जाफर एक्सप्रेस, ट्रेन हाईजैक, पाकिस्तान, भारत, बलूचिस्तान, पाक सेना, आरजू काजमी, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), अजित डोभाल, आतंकवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> पाकिस्तान की सरकार और सेना ने बलूचिस्तान में हुए ट्रेन हाईजैक के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। इस घटना की जिम्मेदारी बलूचिस्तान के विद्रोही गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है।<br><br>पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले में भारत और अफगानिस्तान में बैठे लोगों का हाथ है। बीते मंगलवार को हुई इस हाईजैकिंग के बाद, शुक्रवार को पाक सेना और बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत पर आरोप लगाया।<br><br>हालांकि, पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी ने अपनी ही सेना और सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पाक सेना का यह कहना कि भारतीय मीडिया ट्रेन हाईजैक पर झूठ बोल रहा था, गलत है। उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का मीडिया इस घटना पर बोल रहा था।<br><br>आरजू काजमी ने आगे कहा कि पाकिस्तान को अपनी नाकामी छुपाने के लिए दूसरों पर दोष नहीं मढ़ना चाहिए। अगर भारत गड़बड़ी कर रहा है, तो पाकिस्तानी संस्थानों को उसे रोकना चाहिए। उन्होंने पाक सेना द्वारा चलाए गए अजित डोभाल के पुराने वीडियो पर भी सवाल उठाए और कहा कि पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने से पहले मजबूत सबूत पेश करने चाहिए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पंजाब में भी सेना का विरोध... BLA चीफ की धमकी, पाकिस्तान में तनाव!</title>
<link>https://pratinidhi.in/punjab-army-opposition-bla-chief-threat-pakistan-tension</link>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस पर हमले के बाद, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करने का ऐलान किया है। बीएलए नेता बशीर जेब ने एक वीडियो संदेश जारी कर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जंग को और बढ़ाने की कसम खाई है, और पंजाब के लोगों से भी सेना के खिलाफ लड़ने की अपील की है। बशीर ने कहा कि उनकी रणनीति पंजाब के लोगों को पाकिस्तानी सेना के साथ सीधे टकराव के लिए मजबूर करेगी। जेब 2018 में बीएलए का प्रमुख बनाया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:42:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>BLA, Pakistan Army, Balochistan, Punjab, Zafar Express, Bashir Zeb</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> बलूचिस्तान में <strong>जाफर एक्सप्रेस</strong> पर हुए हमले के बाद, <strong>बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए)</strong> ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करने का ऐलान किया है।<br><br>बीएलए नेता <strong>बशीर जेब</strong> ने एक वीडियो संदेश जारी कर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जंग को और बढ़ाने की कसम खाई है। उन्होंने बलूचिस्तान के साथ-साथ पंजाब के लोगों से भी सेना के खिलाफ लड़ने की अपील की है।<br><br>न्यूज एक्स के अनुसार, बशीर ने कहा कि उनकी रणनीति पंजाब के लोगों को पाकिस्तानी सेना के साथ सीधे टकराव के लिए मजबूर करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के लोग सड़कों पर उतरेंगे और अपनी सेना का विरोध करेंगे।<br><br><strong>2018 में संभाली थी कमान:</strong><br>40 वर्षीय बशीर जेब, नुश्की कस्बे के रहने वाले हैं और हसनी जनजाति से हैं। उन्होंने क्वैटा डिग्री कॉलेज से पढ़ाई की और 2012 में बीएलए में शामिल हो गए। दिसंबर 2018 में असलम बलोच की मृत्यु के बाद उन्हें बीएलए का प्रमुख बनाया गया था।<br><br>जेब के नेतृत्व में, बीएलए ने पाकिस्तानी सेना और चीनी सैनिकों पर कई हमले किए हैं, जिसके चलते वे चर्चा में बने हुए हैं।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>सऊदी अरब में अनैतिक कृत्यों पर कार्रवाई, MBS के आदेश पर नई सुरक्षा इकाई गठित</title>
<link>https://pratinidhi.in/saudi-arabia-new-security-unit-formed-to-combat-immorality</link>
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<description><![CDATA[ सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर नई पुलिस यूनिट बनी है, जिसने 50 से अधिक लोगों को देह व्यापार और भीख मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस यूनिट का उद्देश्य मानव तस्करी रोकना और सामुदायिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, यूनिट ने 11 महिलाओं को देह व्यापार के आरोप में गिरफ्तार किया है, जो सऊदी अरब में इस तरह की पहली सार्वजनिक स्वीकृति है। कुछ लोगों का मानना है कि यह धार्मिक पुलिस की वापसी है, जबकि अन्य इसे नैतिकता बनाए रखने के लिए जरूरी मानते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:42:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सऊदी अरब, मोहम्मद बिन सलमान, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी, अनैतिक कृत्य, नई पुलिस यूनिट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>रियाद:</strong> सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर एक नई पुलिस यूनिट का गठन किया गया है। इस यूनिट ने देह व्यापार और भीख मांगने के आरोप में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।<br><br>इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य 'अनैतिक' गतिविधियों पर नजर रखना और मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करना है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह यूनिट सामुदायिक सुरक्षा को बढ़ावा देने और सामाजिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए बनाई गई है।<br><br><em>फाइनेंशियल टाइम्स</em> की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई यूनिट ने 11 महिलाओं को देह व्यापार के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह पहली बार है जब सऊदी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से देश में देह व्यापार की बात स्वीकार की है। यूनिट ने कई विदेशियों को भी गिरफ्तार किया है, जो मसाज पार्लर में 'अनैतिक' गतिविधियों में शामिल थे और महिलाओं-बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर कर रहे थे।<br><br>कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस यूनिट का गठन धार्मिक पुलिस बल की वापसी का संकेत है, जबकि अन्य का कहना है कि यह सऊदी समाज में नैतिकता बनाए रखने के लिए जरूरी है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस कदम का स्वागत किया है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर हमला: बीएलए का दावा, 90 सैनिक ढेर</title>
<link>https://pratinidhi.in/balochistan-liberation-army-attack-on-pakistan-military-convoy-in-noshki</link>
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<description><![CDATA[ बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान के नोशकी में पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर हमला किया और 90 सैनिकों को मारने का दावा किया। उन्होंने हमले का एक वीडियो जारी किया जिसमें सेना के वाहन हवा में उड़ते और सैनिक भागते दिख रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने 7 सैनिकों के नुकसान की पुष्टि की है, लेकिन बीएलए के दावों का खंडन किया है। बीएलए ने कहा कि उनके मजीद ब्रिगेड और फतेह स्क्वाड ने संयुक्त रूप से इस हमले को अंजाम दिया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:42:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Bla Attack Pakistan Army Convoy Video, बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर हमले का वीडियो आया सामने, बीएलए ने किया जारी, दुनिया को दिखा सच, balochistan liberation army release video of attack on pakistan military convoy in noshki, Navbharat Times</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर हमला: बीएलए का दावा, 90 सैनिक ढेर</strong><br><br>बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान के नोशकी में पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर हमला किया। बीएलए ने दावा किया है कि हमले में 90 सैनिकों की मौत हुई है, और उन्होंने हमले में आईईडी और आरपीजी का इस्तेमाल किया। बीएलए ने हमले का एक वीडियो भी जारी किया है।<br><br>बीएलए के अनुसार, उनके मजीद ब्रिगेड और फतेह स्क्वाड ने संयुक्त रूप से इस हमले को अंजाम दिया, जिसमें 90 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि हमले में उनके 7 सैनिक मारे गए। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच, बीएलए ने हमले का पहला वीडियो जारी किया है। वीडियो में पाकिस्तानी सेना के वाहन हवा में उड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं, और हमले के बाद सेना की बसें आग के गोले में बदल गईं और सैनिक जान बचाने के लिए भाग रहे हैं।<br><br>बीएलए ने कहा कि नोशकी में आठ बसों और दो वाहनों के सैन्य काफिले पर हमला किया गया। एक बस को आईईडी से भरे वाहन से उड़ा दिया गया, जबकि दूसरे वाहन पर आरपीजी से हमला किया गया। विस्फोट के बाद, फतेह स्क्वाड ने काफिले को घेर लिया और सैनिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। बीएलए का दावा है कि मजीद ब्रिगेड और फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने 90 पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला।<br><br>पाकिस्तानी सेना ने हमले की पुष्टि की है लेकिन बीएलए के दावों का खंडन किया है। सेना का कहना है कि उनके 7 सैनिक मारे गए और 21 घायल हुए हैं। सेना के अनुसार, क्वेटा से तफ्तान जा रहे सुरक्षा बलों के काफिले पर हमला किया गया। सात बसों और दो वाहनों के काफिले को निशाना बनाया गया। एक बस आईईडी से लदे वाहन से टकरा गई, जो एक आत्मघाती हमला था। दूसरी बस पर आरपीजी से हमला किया गया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप के विदेशी शत्रु अधिनियम पर फेडरल कोर्ट की रोक</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-alien-enemies-act-federal-court-block</link>
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<description><![CDATA[ फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम को लागू करने के फैसले पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने कहा कि अधिनियम राष्ट्रपति की घोषणा के लिए आधार नहीं है, क्योंकि &#039;आक्रमण&#039; शब्द का तात्पर्य किसी राष्ट्र द्वारा किए गए शत्रुतापूर्ण कृत्यों से है। ट्रंप ने वेनेजुएला के गिरोह ट्रेन डे अरागुआ के सदस्यों के निर्वासन में तेजी लाने के लिए अधिनियम लागू किया था, लेकिन एक संघीय न्यायाधीश ने युद्धकालीन कानून के तहत निर्वासन को रोक दिया। वेनेजुएला सरकार ने भी इसकी निंदा की। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:39:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>विदेशी शत्रु अधिनियम, डोनाल्ड ट्रंप, फेडरल कोर्ट, निर्वासन, वेनेजुएला, ट्रेन डी अरागुआ</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन:</strong> राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम को लागू करने के फैसले पर फेडरल कोर्ट ने रोक लगा दी है।</p><br><p>न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने कहा कि यह अधिनियम राष्ट्रपति की घोषणा के लिए आधार नहीं है, क्योंकि 'आक्रमण' शब्द का तात्पर्य किसी राष्ट्र द्वारा किए गए शत्रुतापूर्ण कृत्यों से है।</p><br><p>ट्रंप ने इस अधिनियम को वेनेजुएला के गिरोह ट्रेन डे अरागुआ के सदस्यों के निर्वासन में तेजी लाने के लिए लागू किया था।</p><br><p>हालांकि, एक संघीय न्यायाधीश ने युद्धकालीन कानून के तहत होने वाले निर्वासन को अस्थायी रूप से रोक दिया। वेनेजुएला सरकार ने भी इस अधिनियम की निंदा की है।</p><br><p>अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के वकील ने कहा कि यह खतरनाक है कि प्रशासन युद्धकालीन अधिकार का उपयोग आव्रजन उद्देश्यों के लिए कर रहा है।</p><br><p>इस बीच, अमेरिकी-अरब भेदभाव विरोधी समिति ने फलस्तीनी अधिकारों के लिए विरोध करने वाले छात्रों को निर्वासित करने के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;लोकतंत्र में रिवर्स गियर नहीं होता&amp;apos;: नेपाल में राजशाही की मांग पर पीएम ओली का कटाक्ष</title>
<link>https://pratinidhi.in/democracy-has-no-reverse-gear-says-nepal-pm-kp-sharma-oli-as-takes-dig-at-pro-monarchists</link>
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<description><![CDATA[ नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने राजशाही समर्थकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोकतंत्र राजमार्ग है, जिसमें रिवर्स गियर नहीं होता। उन्होंने कहा कि कभी-कभार अंधे मोड़ के कारण पीछे हटना पड़ता है। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों ने काठमांडू में रैली की। ओली ने महिला नेतृत्व शिखर सम्मेलन में कहा कि हमें आगे बढ़ना चाहिए, पीछे नहीं। संसद में राजशाही की वापसी की मांग पर बहस हुई। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:39:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, केपी शर्मा ओली, राजशाही, लोकतंत्र, ज्ञानेंद्र शाह, काठमांडू, महिला नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2025</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने राजशाही के समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र एक राजमार्ग के समान है, जिसमें पीछे जाने का कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने कहा कि कभी-कभी किसी कठिन परिस्थिति के कारण थोड़ा पीछे हटना पड़ सकता है, लेकिन हमेशा आगे बढ़ने पर ध्यान देना चाहिए। पिछले सप्ताह, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के कई समर्थकों ने काठमांडू में उनका स्वागत किया और एक रैली का आयोजन किया।<br><br>77 वर्षीय ज्ञानेंद्र जब देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के बाद पोखरा से त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, तो उनके समर्थकों ने उनके समर्थन में नारे लगाए। इस रैली का मुख्य उद्देश्य नेपाल में राजशाही को फिर से स्थापित करने के लिए समर्थन दिखाना था। रविवार को महिला नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2025 में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ओली ने राजशाही का समर्थन करने वाले समूहों के हालिया विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया और कहा कि हमें हमेशा प्रगति करनी चाहिए और पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिवर्स गियर का उपयोग केवल तभी किया जाता है जब सड़क पर बहुत तेज मोड़ हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजमार्ग पर कोई रिवर्स गियर नहीं होता है, और लोकतंत्र ही हमारा राजमार्ग है। इसके अतिरिक्त, रविवार को संसद में सत्तारूढ़ दल और विपक्षी सांसदों के बीच राजशाही को वापस लाने की बढ़ती मांग को लेकर जोरदार बहस हुई।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूक्रेन में शांति सेना: मैक्रों का रूस को कड़ा संदेश</title>
<link>https://pratinidhi.in/europe-ready-to-deploy-troops-in-ukraine-macron-says-russia-wont-decide-on-peacekeepers</link>
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<description><![CDATA[ फ्रांस और ब्रिटेन ने यूक्रेन में शांति सैनिकों की तैनाती का एलान किया है। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन में शांति सैनिकों की तैनाती का निर्णय रूस नहीं बल्कि यूक्रेनी सरकार लेगी। मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन एक संप्रभु राष्ट्र है। अगर वह अपने क्षेत्र में सहयोगी देशों की संयुक्त सेना की तैनाती के लिए कहता है तो वह उसका निर्णय होगा। ब्रिटिश पीएम किएर स्टार्मर ने मैक्रों और गैर अमेरिकी सहयोगी देशों के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक की। यूक्रेन और रूस ने युद्धविराम पर सहमति जताई है कि लेकिन लड़ाई जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:37:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, रूस, फ्रांस, मैक्रों, शांति सेना, यूक्रेन संकट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। फ्रांस और ब्रिटेन ने यूक्रेन में शांति सैनिकों की तैनाती का एलान किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि शांति सैनिकों की तैनाती का फैसला रूस नहीं, बल्कि यूक्रेन की सरकार करेगी।<br><br>मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे यह अधिकार है कि वह अपने क्षेत्र में सहयोगी देशों की सेना की तैनाती के लिए कहे। इस मामले में रूस की स्वीकृति आवश्यक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त सेना में प्रत्येक सहयोगी देश से कुछ हजार सैनिक हो सकते हैं, जिन्हें रणनीतिक महत्व के स्थानों पर तैनात किया जाएगा।<br><br>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने भी मैक्रों और अन्य सहयोगी देशों के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक की। यूक्रेन और रूस ने युद्धविराम पर सहमति जताई है, लेकिन लड़ाई और हवाई हमले अभी भी जारी हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यमन में अमेरिकी हमले: हूतियों की जवाबी धमकी, ईरान को चेतावनी</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-airstrikes-in-yemen-houthi-threats-and-iran-warning</link>
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<description><![CDATA[ यमन में अमेरिकी हवाई हमलों में 31 लोगों की मौत हुई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। हूती विद्रोहियों के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों पर हवाई हमलों का आदेश दिया और ईरान को चेतावनी दी कि अगर समुद्री गलियारे पर हमले बंद नहीं किए, तो अमेरिका पूरी ताकत से कार्रवाई करेगा। हूती विद्रोहियों ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 23:45:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यमन, अमेरिकी हमला, हूती, ईरान, डोनाल्ड ट्रंप, हवाई हमला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>सना:</strong> यमन में अमेरिकी हवाई हमलों के परिणामस्वरूप मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हूती विद्रोहियों के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबाही ने बताया कि हमलों में 101 लोग घायल हुए हैं।<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों पर हवाई हमलों का आदेश दिया था। ट्रंप ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने समुद्री गलियारे पर हमले बंद नहीं किए, तो अमेरिका पूरी ताकत से कार्रवाई करेगा।<br><br>हूती विद्रोहियों ने पहले बताया था कि इन हमलों में 18 नागरिक मारे गए थे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी सैनिक जलमार्गों और वायु संपत्तियों की रक्षा के लिए आतंकवादियों के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी आतंकी समूह अमेरिकी वाणिज्यिक पोतों को जलमार्गों पर स्वतंत्र रूप से आने-जाने से नहीं रोक पाएगा।<br><br>ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि विद्रोही संगठन का समर्थन बंद करे, अन्यथा उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। हूती विद्रोहियों ने सना और सादा में हवाई हमले होने की सूचना दी। उन्होंने होदीदा, बायदा और मारिब प्रांतों में भी हमले होने की जानकारी दी।<br><br>स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सना में 13 और सादा में पांच लोगों सहित 18 लोग मारे गए थे, जबकि 24 अन्य घायल हुए थे। बाद में, मृतक संख्या बढ़कर 31 हो गई और 101 लोग घायल हो गए। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि हूती ठिकानों पर हवाई हमलों की शुरुआत है और आगे भी हमले किए जाएंगे। हूती मीडिया कार्यालय के उप प्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने कहा कि हवाई हमले उन्हें रोक नहीं पाएंगे और वे जवाबी कार्रवाई करेंगे।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर हमला, 90 जवान ढेर</title>
<link>https://pratinidhi.in/balochistan-pakistan-army-convoy-attack-bla-claims-killing-90-soldiers</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर बड़ा हमला हुआ है, जिसकी जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। बलूचिस्तान के नोशकी जिले में हुए इस हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने काफिले को निशाना बनाया, जिसके बाद भारी गोलीबारी हुई। बीएलए ने 90 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया है, जबकि खुरासान डायरी के अनुसार, स्वतंत्र स्रोतों ने 7 लोगों की मौत और लगभग 35 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। काफिले में आठ बसें थीं, जिनमें से एक आत्मघाती हमले में नष्ट हो गई। यह हमला एक सप्ताह के भीतर बलूच विद्रोहियों का दूसरा बड़ा हमला है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 23:43:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Balochistan, Pakistan Army, BLA, Attack, Noshki, Train Hijack</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>क्वेटा:</strong> पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक बार फिर पाकिस्तानी सेना के काफिले को निशाना बनाया गया है। बलूचिस्तान के नोशकी जिले में हुए एक आत्मघाती हमले के बाद भारी गोलीबारी हुई। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक करने वाले अलगाववादी सशस्त्र समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है।<br><br>बीएलए ने दावा किया है कि इस हमले में 90 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। हालांकि, मीडिया आउटलेट खुरासान डायरी के अनुसार, स्वतंत्र स्रोतों ने 7 लोगों की मौत और लगभग 35 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है।<br><br>बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने एक बस को निशाना बनाया और उसके बाद दूसरी बस पर गोलीबारी की गई। काफिले में आठ बसें थीं, जिनमें से एक आत्मघाती हमले में पूरी तरह नष्ट हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि हमले के बाद बीएलए के फतह दस्ते ने बस को घेर लिया और उसमें मौजूद सभी सैनिकों को मार डाला।<br><br>खुरासान डायरी की रिपोर्ट के अनुसार, काफिले में 8 बसें और दो कारें शामिल थीं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक बस को व्हीकल बॉर्न आईईडी से निशाना बनाया गया, जबकि दूसरी बस को रॉकेट से संचालित ग्रेनेड से। घायलों को नोशकी ले जाया गया है।<br><br>यह हमला एक सप्ताह के भीतर बलूच विद्रोहियों का दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले, बीएलए ने क्वेटा से पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का अपहरण कर लिया था, जिसमें 450 से ज्यादा यात्री सवार थे।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से वापसी: क्रू&amp;10 ड्रैगन पहुंचा ISS</title>
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<description><![CDATA[ नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की धरती पर वापसी का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि नासा का क्रू-10 ड्रैगन सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंच गया है। इस मिशन का लक्ष्य चालक दल के सदस्यों को बदलना है, जिससे सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर की वापसी हो सके। क्रू ड्रैगन की आईएसएस पर सफलता ने विलियम्स और विल्मोर की वापसी की संभावना को मजबूत किया है। विलियम्स और विल्मोर अब 19 मार्च से पहले फ्लोरिडा तट पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 23:43:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, SpaceX, Crew-10 Dragon, ISS, NASA, Astronauts</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की धरती पर वापसी का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि नासा का क्रू-10 ड्रैगन सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंच गया है। 16 मार्च को, स्पेसएक्स का क्रू-10 ड्रैगन चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ISS पहुंचा। इस मिशन का लक्ष्य चालक दल के सदस्यों को बदलना है, जिससे सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर की वापसी हो सके। दोनों अंतरिक्ष यात्री पिछले साल जून से अंतरिक्ष में हैं।<br><br>स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन को नासा के कमर्शियल मिशन प्रोग्राम के तहत फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। लगभग 29 घंटे बाद, क्रू ड्रैगन कैप्सूल आईएसएस से जुड़ा, और नासा ने एक वीडियो जारी किया जिसमें अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन में प्रवेश कर रहे हैं।<br><br>क्रू ड्रैगन की आईएसएस पर सफलता ने विलियम्स और विल्मोर की वापसी की संभावना को मजबूत किया है। वे पिछले साल जून से आईएसएस पर हैं, जब उनके अंतरिक्ष यान को प्रणोदन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। रविवार को, विलियम्स और अन्य सदस्यों ने क्रू-10 का स्वागत किया। नासा के अंतरिक्ष यात्री डॉन पेटिट ने एक फुटेज पोस्ट की, जिसमें क्रू ड्रैगन को पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए दिखाया गया है। विलियम्स और विल्मोर अब 19 मार्च से पहले फ्लोरिडा तट पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>उत्तरी मेसेडोनिया नाइट क्लब में भीषण आग, 51 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/north-macedonia-nightclub-fire-51-killed-hundreds-injured</link>
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<description><![CDATA[ उत्तरी मेसेडोनिया के कोकानि शहर में एक नाइट क्लब में आग लगने से 51 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए। आग सुबह 2:35 बजे एक पॉप ग्रुप के कॉन्सर्ट के दौरान लगी, जब युवाओं द्वारा आतिशबाजी का इस्तेमाल किया गया। प्रधानमंत्री ने घटना पर दुख जताया और इसे देश के लिए एक दुखद दिन बताया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 15:38:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>North Macedonia, Night Club Fire, 51 Deaths, Kokani, Abhinav Tripathi</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>स्कोप्जे:</strong> उत्तरी मेसेडोनिया के एक नाइट क्लब में रविवार तड़के भीषण आग लगने से 51 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक घायल हो गए। यह घटना कोकानि शहर में हुई।<br><br>आंतरिक मंत्री पंचे तोशकोवस्की के अनुसार, आग सुबह करीब 2:35 बजे एक स्थानीय पॉप ग्रुप के कॉन्सर्ट के दौरान लगी। क्लब में मौजूद युवाओं द्वारा आतिशबाजी के इस्तेमाल से छत में आग लग गई।<br><br>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद क्लब में अफरा-तफरी मच गई। युवा धुएं से बचने के लिए भाग रहे थे, और हर कोई जल्द से जल्द बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था।<br><br>उत्तरी मेसेडोनिया के प्रधानमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह मेसेडोनिया के लिए एक कठिन और दुखद दिन है, और इतने सारे युवाओं की जान जाना एक अपूरणीय क्षति है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>फ्लाइट में पास्ता खाने से यात्री की हुई बुरी हालत</title>
<link>https://pratinidhi.in/passenger-becomes-ill-eating-pasta-in-flight-vomited-multiple-times</link>
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<description><![CDATA[ एक ब्रिटिश नागरिक, कैमरून कैलाघन, एतिहाद एयरलाइंस की फ्लाइट में पास्ता खाने के बाद बीमार हो गए। उन्हें छह घंटे की यात्रा में 30 बार उल्टियां हुईं। कैमरून ने एयरलाइन पर बदबूदार पास्ता परोसने का आरोप लगाया है, जिसके कारण उन्हें फूड पॉइजनिंग हो गई। हालांकि, एतिहाद एयरलाइन ने कहा कि उनके विमान का भोजन कैमरून की बीमारी के लिए जिम्मेदार नहीं है। एयरलाइन ने मामले की जांच करने की बात कही है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 15:38:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>फ्लाइट, पास्ता, उल्टी, एयरलाइन, फूड पॉइजनिंग, यात्रा, एतिहाद एयरलाइंस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[फ्लाइट में एक यात्री को पास्ता खाने के बाद गंभीर समस्या हुई। ब्रिटिश नागरिक कैमरून कैलाघन ने एतिहाद एयरलाइंस की मैनचेस्टर से अबू धाबी जाने वाली फ्लाइट में पास्ता खाया, जिसके बाद उन्हें छह घंटे की यात्रा में 30 बार उल्टियां हुईं। <br><br>कैमरून ने एयरलाइन पर बदबूदार पास्ता परोसने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पास्ता में अजीब गंध आ रही थी और उन्हें फूड पॉइजनिंग हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि उड़ान में पांच घंटे की देरी हुई थी, जिसके बाद यात्रियों को पास्ता परोसा गया था।<br><br>हालांकि, एतिहाद एयरलाइन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कैमरून कैलाघन के फूड पॉइजनिंग के लिए उनके विमान का भोजन जिम्मेदार नहीं हो सकता है। एयरलाइन का कहना है कि वे ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हैं और गहन जांच करते हैं। एतिहाद के प्रवक्ता ने बताया कि उनकी सभी उड़ानों में भोजन सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त तापमान-नियंत्रित परिस्थितियों में तैयार और संग्रहित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अन्य यात्रियों से बीमारी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, जिन्हें वही भोजन परोसा गया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का बड़ा एक्शन: वॉइस ऑफ अमेरिका चैनल बंद, 1300 कर्मचारी छुट्टी पर</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-shuts-down-voice-of-america-news-channel</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर वॉइस ऑफ अमेरिका न्यूज चैनल को बंद करने का आदेश दिया है, जिसके चलते चैनल के लगभग 1300 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। वीओए के निदेशक माइकल अब्रामोविट्ज ने कहा कि 83 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब वीओए को चुप करा दिया गया है। यह आदेश चैनल की पेटेंट कंपनी के साथ अनुबंध रद्द करने और सत्तावादी शासनों को प्रसारित करने वाली दो अमेरिकी समाचार सेवाओं के लिए फंडिंग समाप्त करने से संबंधित है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 15:38:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, वॉइस ऑफ अमेरिका, न्यूज चैनल, कर्मचारी, कार्यकारी आदेश</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वॉशिंगटन:</strong> राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए न्यूज चैनल वॉइस ऑफ अमेरिका (VOA) को बंद करने का आदेश दिया है। इस फैसले से चैनल के लगभग 1300 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है।<br><br>VOA के निदेशक माइकल अब्रामोविट्ज ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें यह बताते हुए दुख हो रहा है कि 83 वर्षों में पहली बार वॉइस ऑफ अमेरिका को चुप करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि चैनल के लगभग सभी 1300 कर्मचारियों को प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया है, जिसमें वे खुद भी शामिल हैं।<br><br>यह कार्यकारी आदेश वॉइस ऑफ अमेरिका की पेटेंट कंपनी के साथ अनुबंध रद्द करने और चैनल को बंद करने से संबंधित है। इस आदेश के बाद चैनल के कर्मचारियों को 15 मार्च से छुट्टी पर भेज दिया गया। इसके साथ ही, सत्तावादी शासनों को प्रसारित करने वाली दो अमेरिकी समाचार सेवाओं के लिए फंडिंग भी समाप्त कर दी गई है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सुनीता विलियम्स ने किया नए मेहमानों का जोरदार स्वागत</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-welcomes-new-crew-members-at-iss-crew-10-reaches-space-station</link>
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<description><![CDATA[ सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में विस्तारित प्रवास के बाद पृथ्वी पर लौटने के लिए तैयार हैं। स्पेसएक्स का क्रू-10 उन्हें वापस लाने के लिए पहुंच गया है, जिसमें चार नए अंतरिक्ष यात्री हैं जिनका विलियम्स और उनकी टीम ने स्वागत किया। नया क्रू 19 मार्च को विलियम्स और विल्मोर के प्रस्थान करने से पहले विलियम्स से एक अभिविन्यास प्राप्त करेगा। उनकी वापसी बोइंग स्टारलाइनर के साथ मुद्दों के कारण अप्रत्याशित रूप से फंसे रहने के बाद हुई है, और उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के पुन: समायोजन में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 15:36:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, ISS, SpaceX, Crew-10, NASA, अंतरिक्ष, स्पेस स्टेशन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर के साथ, स्पेसएक्स के क्रू-10 अंतरिक्ष यान के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने के बाद पृथ्वी पर लौटने की तैयारी कर रही हैं। क्रू-10 विमान पर सवार होकर चार अंतरिक्ष यात्रियों का विलियम्स और उनके सहयोगियों ने आईएसएस में गर्मजोशी से स्वागत किया। नए अंतरिक्ष यात्री 19 मार्च को विलियम्स और विल्मोर के प्रस्थान करने से पहले विलियम्स से एक अभिविन्यास प्राप्त करेंगे। नासा के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम के हिस्से के रूप में स्पेसएक्स ने फाल्कन-9 रॉकेट पर क्रू-10 मिशन लॉन्च किया। ड्रैगन अंतरिक्ष यान नासा के ऐनी McClain, पायलट Ayers, JAXA के Takuya Onishi, और Roscosmos के Kiril Peskov को ले जाता है। अंतरिक्ष यान के अटलांटिक महासागर में उतरने की उम्मीद है। विलियम्स और विल्मोर पिछले साल 5 जून से आईएसएस में हैं, जो बोइंग स्टारलाइनर के मुद्दों के कारण उम्मीद से ज्यादा समय तक हैं। लौटने पर, उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होने में कुछ कठिनाई हो सकती है। नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री Leroy Chiao ने उल्लेख किया कि ऐसा शरीर के संतुलन को फिर से समायोजित करने के कारण है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>सुनीता विलियम्स की वापसी: Crew&amp;10 पहुंचा ISS, 19 मार्च को होंगी वापस</title>
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<description><![CDATA[ सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को वापस लाने के लिए Crew Dragon अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में पहुंच चुका है, डॉकिंग की प्रक्रिया 16 मार्च को पूरी हुई। दोनों 19 मार्च को धरती पर लौटेंगे। SpaceX ने 14 मार्च को Crew-10 मिशन लॉन्च किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुनीता विलियम्स की वापसी पर अपडेट लिया। Dragon स्पेसक्राफ्ट में नासा के कमांडर ऐनी मैक्कलेन समेत चार नए अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मर 9 महीने से अधिक समय से ISS में फंसे हुए थे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 15:35:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, ISS, Crew Dragon, NASA, SpaceX, Crew-10</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। उन्हें वापस लाने के लिए भेजा गया <strong>Crew Dragon</strong> अंतरिक्ष स्टेशन <strong>(ISS)</strong> में पहुंच चुका है।<br><br>भारतीय समयानुसार 16 मार्च को रात 11:30 बजे <strong>डॉकिंग</strong> की प्रक्रिया पूरी हो गई। दोनों अंतरिक्ष यात्री 19 मार्च को धरती पर लौटेंगे। इस मिशन के लिए <strong>SpaceX</strong> ने 14 मार्च को <strong>Crew-10</strong> मिशन लॉन्च किया था।<br><br>डॉकिंग के बाद अंतरिक्ष यात्री स्पेससूट से बाहर निकलकर कार्गो उतारने की तैयारी करेंगे। <strong>नासा</strong> Crew-10 के स्वागत समारोह का सीधा प्रसारण करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुनीता विलियम्स की वापसी पर अपडेट लिया और एलन मस्क से जल्द कदम उठाने का अनुरोध किया था।<br><br><strong>Dragon</strong> स्पेसक्राफ्ट में नासा के कमांडर ऐनी मैक्कलेन, पायलट अयर्स, जापान की स्पेस एजेंसी <strong>JAXA</strong> के ताकुया ओनिशी और रूस की कोस्मोनॉट किरिल पेसकोव भी शामिल हैं। यह स्पेसक्राफ्ट अटलांटिक महासागर में उतरेगा। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मर पिछले साल 5 जून को <strong>ISS</strong> गए थे, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में खराबी के कारण 9 महीने से अधिक समय से वहां फंसे हुए थे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>क्वेटा में आईईडी ब्लास्ट, एक जवान शहीद</title>
<link>https://pratinidhi.in/ied-blast-in-quetta-pakistan-soldier-killed</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के क्वेटा में शनिवार को एक आईईडी ब्लास्ट में एटीएफ के एक जवान की मौत हो गई, छह अन्य घायल हो गए। करणी इलाके में बरोरी रोड पर गश्त कर रहे एटीएफ के एक वाहन को निशाना बनाया गया था। एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, एटीएफ वाहन को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में सात जवान घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। 11 मार्च को बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बोलन घाटी में क्वेटा से पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था। पाकिस्तानी सेना ने 33 विद्रोहियों को मार गिराया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:47:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>IED Blast, Quetta, ATF, Pakistan, Balochistan, BLA</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>क्वेटा में आईईडी ब्लास्ट, एक जवान शहीद</strong></p><br><p>पाकिस्तान के क्वेटा में शनिवार को एक बड़ा हमला हुआ, जिसमें आतंकवाद निरोधी बल (ATF) के एक जवान की मौत हो गई। यह हमला आईईडी (Improvised Explosive Device) ब्लास्ट के माध्यम से किया गया।</p><br><p><strong>हमले का विवरण</strong></p><br><p>क्वेटा के करणी इलाके में बरोरी रोड पर एटीएफ के वाहन को निशाना बनाया गया। इस विस्फोट में एक जवान शहीद हो गया, जबकि छह अन्य घायल हो गए। घायल जवानों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और जांच शुरू कर दी है।</p><br><p><strong>जाफर एक्सप्रेस पर हमला</strong></p><br><p>इस बीच, जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले के बाद क्वेटा डिवीजन में ट्रेन संचालन स्थगित कर दिया गया है। 11 मार्च को बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने क्वेटा से पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था, जिसमें 200 सुरक्षाकर्मी और 500 से अधिक यात्री थे।</p><br><p><strong>BLA का दावा और सेना की कार्रवाई</strong></p><br><p>बलूच विद्रोहियों ने 214 बंधकों की हत्या करने का दावा किया है। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 33 विद्रोहियों को मार गिराया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका का यमन पर हमला: हाउती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई, 19 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/america-launches-strikes-against-yemen-houthis-19-killed</link>
<guid>https://pratinidhi.in/america-launches-strikes-against-yemen-houthis-19-killed</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका ने यमन में हाउती विद्रोहियों के खिलाफ ताबड़तोड़ हमले शुरू किए, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। यह कार्रवाई लाल सागर में व्यावसायिक जहाजों पर हाउती विद्रोहियों के हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिकी हमलों में यमन की राजधानी सना पर 19 लोग मारे गए। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को भी विद्रोहियों का समर्थन बंद करने की चेतावनी दी है। हाउती विद्रोहियों ने नवंबर 2023 से शिपिंग को निशाना बनाते हुए 100 से अधिक हमले किए हैं, जिससे वैश्विक वाणिज्य बाधित हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:45:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, यमन, हाउती विद्रोही, डोनाल्ड ट्रंप, ईरान, लाल सागर, सना, युद्ध अपराध, व्यावसायिक जहाज, हवाई हमला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका ने यमन में ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों के खिलाफ शनिवार को ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। यह कार्रवाई लाल सागर में हाउती विद्रोहियों द्वारा लगातार व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के जवाब में की गई है।</p><br><p>हाउती द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यमन की राजधानी सना पर हुए अमेरिकी हमलों में कम से कम 19 लोग मारे गए और नौ घायल हो गए। हाउती के राजनीतिक ब्यूरो ने इन हमलों को युद्ध अपराध बताया है।</p><br><p>अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि हाउती विद्रोहियों के हमले नहीं रुके तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को भी विद्रोहियों का समर्थन बंद करने की चेतावनी दी है।</p><br><p>हाउती के प्रवक्ता ने बताया कि इन हमलों में नौ नागरिकों की जान गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने सना पर हवाई हमले करने का आदेश दिया है और यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हाउती विद्रोही समुद्री गलियारे को निशाना बनाना बंद नहीं कर देते।</p><br><p>नवंबर 2023 से हाउती विद्रोही शिपिंग को निशाना बनाकर 100 से अधिक हमले कर चुके हैं, जिससे वैश्विक वाणिज्य बाधित हुआ है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कनाडा अमेरिका से F&amp;35 डील तोड़ सकता है</title>
<link>https://pratinidhi.in/canada-reconsidering-f35-fighter-jet-purchase-amid-tensions-with-trump</link>
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<description><![CDATA[ कनाडा सरकार अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमानों की खरीद डील तोड़ सकती है, जिसकी वजह ट्रंप के टैरिफ और कनाडा को अमेरिका में मिलाने की धमकी है। कनाडा 88 में से 16 विमानों के लिए भुगतान कर चुका है। रक्षा मंत्री ब्लेयर एफ-35 के अलावा अन्य विकल्प देख रहे हैं, जिनमें स्वीडिश कंपनी साब का ग्रिपेन विमान शामिल है। कनाडा ऐसे विमानों को चाहता है, जो उसके एक्सपर्ट कनाडा में ही बनाएं। अगर कनाडा खरीद पूरी नहीं करता है, तो उसे जुर्माना देना होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:43:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>F-35, कनाडा, अमेरिका, रक्षा सौदा, डोनाल्ड ट्रंप, मार्क कार्नी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[कनाडा की सरकार अमेरिका के साथ 19 अरब डॉलर की F-35 लड़ाकू विमानों की खरीद डील को तोड़ सकती है। कनाडाई रक्षा मंत्री बिल ब्लेयर ने इसके संकेत दिए हैं। कनाडा ने अमेरिका को 88 F-35 जेट का ऑर्डर दिया था, लेकिन अब वह दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहा है। सौदे में खटास की मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और कनाडा को अमेरिका में मिलाने की धमकी है।

कनाडा 88 में से 16 विमानों के लिए भुगतान कर चुका है, जिनकी डिलीवरी अगले साल शुरू होनी है। रक्षा मंत्री ब्लेयर ने कहा कि वह F-35 के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें कनाडा में ही विमानों को असेंबल करने का मौका मिले। स्वीडिश कंपनी साब का ग्रिपेन विमान भी एक विकल्प हो सकता है।

ब्लेयर ने कहा कि कनाडा के हित और देश की रक्षा के लिए सबसे अच्छा क्या है, इस पर वह सेना के साथ बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वायु सेना ने F-35 को अपनी जरूरत के हिसाब से सही विमान बताया था, लेकिन अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। ब्लेयर ने संकेत दिया कि कुछ F-35 विमान स्वीकार किए जा सकते हैं और बाकी के लिए यूरोपीय निर्माताओं की ओर रुख किया जा सकता है। प्रधानमंत्री कार्नी ने उन्हें दूसरे स्रोतों से बात करने के लिए कहा है। कनाडा ऐसे विमानों को देख रहा है, जिनको उसके एक्सपर्ट कनाडा में ही बनाएं क्योंकि F-35 जेट का रखरखाव और सॉफ्टवेयर अपग्रेड अमेरिका में ही होता है। अगर कनाडा खरीद पूरी नहीं करता है, तो उसे जुर्माना भी देना पड़ सकता है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में इजरायली हवाई हमलों में 9 फलस्तीनी मारे गए</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-airstrike-kills-palestinians-including-journalists-in-gaza</link>
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<description><![CDATA[ गाजा के बीत लाहिया में इजरायली हवाई हमले में तीन पत्रकारों समेत नौ फलस्तीनी मारे गए। शनिवार को हुए इस हमले के समय इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की वार्ता चल रही थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। हमास ने अमेरिकी नागरिकता वाले बंधक को छोड़ने का प्रस्ताव रखा, लेकिन इजरायल ने हमले जारी रखे। हमास ने मध्यस्थों से इजरायल की हरकतों को रोकने का आग्रह किया है। अमेरिका, मिस्र और कतर इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं। 19 जनवरी से युद्धविराम लागू होने के बावजूद 150 फलस्तीनी मारे गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:41:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, गाजा, फलस्तीन, हमास, युद्धविराम, हवाई हमला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा में इजरायली हवाई हमले में तीन पत्रकारों समेत नौ फलस्तीनी मारे गए</strong><br><br>गाजा के बीत लाहिया में इजरायली हवाई हमले में तीन पत्रकारों सहित नौ फलस्तीनी मारे गए। यह हमला ऐसे समय पर हुआ जब इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की वार्ता चल रही थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। हमास ने एक अमेरिकी नागरिकता वाले बंधक को रिहा करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन इजरायल ने हमले जारी रखे। 19 जनवरी को युद्धविराम होने के बावजूद, 150 फलस्तीनी मारे गए हैं।<br><br>शनिवार को गाजा में इजरायल के हवाई हमले में नौ फलस्तीनी मारे गए, जिनमें तीन पत्रकार भी शामिल हैं, और कई घायल हो गए। यह हमला उत्तरी गाजा के बीत लाहिया शहर में हुआ, उसी समय इजरायल और हमास के बीच दूसरे चरण के युद्धविराम के लिए बातचीत चल रही थी, जो विफल रही। हमास ने प्रस्ताव दिया कि यदि युद्धविराम वार्ता आगे बढ़ती है, तो वे इजरायली-अमेरिकी नागरिकता वाले बंधक एडेन एलेक्जेंडर और चार अन्य बंधकों के शव इजरायल को सौंप सकते हैं।<br><br>गाजा में 19 जनवरी से छह सप्ताह के लिए युद्धविराम का पहला चरण शुरू हुआ था। 2 मार्च को पहले चरण के अंत से पहले, दोनों पक्षों ने युद्धविराम के दूसरे चरण के लिए बातचीत शुरू की, लेकिन इजरायली सेना ने लगातार हमले जारी रखे। उन्होंने हालिया हमले का कोई कारण नहीं बताया है। हमास ने इसे युद्धविराम शर्तों का उल्लंघन कहा है और कहा है कि 19 जनवरी से इजरायली हमलों में 150 फलस्तीनी मारे गए हैं।<br><br>हमास ने मध्यस्थों से इस पर विरोध जताया है और उनसे इजरायल की हरकतों को रोकने का आग्रह किया है। यह ज्ञात है कि अमेरिका, मिस्र और कतर इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>स्पेन में ड्राइवरलेस मिनी बस का परीक्षण, यात्रियों को मुफ्त सवारी का आनंद</title>
<link>https://pratinidhi.in/driverless-minibuses-tested-in-spain-free-rides-for-passengers</link>
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<description><![CDATA[ स्पेन के बार्सिलोना में ड्राइवरलेस मिनी बस का परीक्षण शुरू हुआ है, जहाँ यात्रियों को मुफ्त सवारी का आनंद मिल रहा है। रेनो द्वारा संचालित, यह बस 2.2 किमी की दूरी तय करती है और व्यस्त शहर में सुरक्षित रूप से चलने में सक्षम है। इलेक्ट्रिक बस 120 किमी तक चल सकती है। सैन फ्रांसिस्को और टोक्यो जैसे शहरों में भी ऐसे वाहन परीक्षण हो रहे हैं। यह पहल यूरोप को ड्राइवरलेस तकनीक में आगे बढ़ाने का प्रयास है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:41:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ड्राइवरलेस मिनी बस, बार्सिलोना, स्पेन, रेनो, वीराइड, चालक रहित वाहन प्रौद्योगिकी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[स्पेन के बार्सिलोना में <strong>चालक रहित मिनी बस</strong> का परीक्षण शुरू हो गया है। इस सप्ताह, यात्रियों को <strong>मुफ्त सवारी</strong> का आनंद मिला। बस स्टॉप से यात्रियों को लेकर रवाना हुई, लेन बदलने से पहले ब्रेक लगाई और धीमी गति से चलती हुई दिखाई दी। बार्सिलोना में परीक्षण के दौरान, बस चार स्टॉप के साथ 2.2 किमी की दूरी तय कर रही है।<br><br>यह परीक्षण <strong>रेनो</strong> द्वारा किया जा रहा है। फ्रांसीसी कार निर्माता ने इस प्रोटोटाइप मिनी बस के लिए <strong>वीराइड</strong> के साथ मिलकर काम किया है। कंपनी का कहना है कि बस बार्सिलोना जैसे व्यस्त शहर के बीच से सुरक्षित रूप से किसी दिए गए मार्ग पर चलने में सक्षम है। <strong>इलेक्ट्रिक बस</strong> बिना रिचार्ज के 120 किलोमीटर तक चल सकती है और 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है।<br><br><strong>सैन फ्रांसिस्को</strong> से लेकर <strong>टोक्यो</strong> तक अन्य शहरों में भी कंपनियां चालक रहित टैक्सियों और बसों का परीक्षण कर रही हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जाफर एक्सप्रेस हाईजैकिंग: पाकिस्तानी सेना और ISI की नाकामी उजागर</title>
<link>https://pratinidhi.in/jaffar-express-hijack-pakistan-army-isi-failure-adil-raja</link>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस पर हमले के बाद, पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल राजा ने पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नाकारा और आईएसआई को भ्रष्ट बताया है। राजा ने कहा कि हमले ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र की कलई खोल दी है और पूरे सिस्टम में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने आईएसआई पर राजनीतिक हस्तक्षेप और खुफिया जानकारी को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया है। राजा ने इस घटना को पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी बताया और सुरक्षा तंत्र में सुधार की मांग की है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:41:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Balochistan, Jaafar Express, ISI, Army, Adil Raja</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हुए हमले ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र की कलई खोल दी है। पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल राजा ने इस घटना को सेना प्रमुख आसिम मुनीर की नाकामी और आईएसआई में फैले भ्रष्टाचार का नतीजा बताया है।<br><br>आदिल राजा, जो यूके में रहते हैं, ने कहा कि जाफर एक्सप्रेस पर हमला पाकिस्तानी सेना की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था का प्रमाण है। सेना बंधकों को छुड़ाने में नाकाम रही, जिससे जनरल मुनीर के नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजा ने आईएसआई पर राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं, जिससे स्थिति और भी बदतर हो गई है।<br><br>आदिल राजा के अनुसार, बलूचिस्तान में लंबे समय से अशांति है और जाफर एक्सप्रेस पर हमला खुफिया विफलता का एक और उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना आतंकवाद विरोधी क्षमताओं का ढिंढोरा पीटती रही है, लेकिन इस हमले ने उसकी पोल खोल दी है।<br><br>राजा का मानना है कि आसिम मुनीर के सेना प्रमुख बनने के बाद से रणनीतिक गलतियां बढ़ी हैं। उन्होंने खुफिया जानकारी को नजरअंदाज करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए आईएसआई की आलोचना की। आदिल राजा ने इस हमले को पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी बताया है और सुरक्षा तंत्र में सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि सेना, सरकार और आईएसआई को अपने निजी हितों से ऊपर उठकर देश के बारे में सोचना होगा।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में हवाई हमले: इजरायल की बमबारी में पत्रकार समेत आठ की मौत</title>
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<description><![CDATA[ गाजा पट्टी में इजरायली हवाई हमलों में एक स्थानीय पत्रकार सहित आठ लोग मारे गए। यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब कतर में युद्धविराम समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। हमास ने कहा है कि वह तभी बंधकों के शव देगा जब इजरायल युद्धविराम समझौते को लागू करेगा और मानवीय सहायता प्रदान करेगा। हमास बंधकों के बदले और अधिक फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है। हमास के पास अभी भी 59 बंधक हैं, जिनमें से 35 के शव होने का अनुमान है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:41:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, गाजा, युद्धविराम, हमास, फिलिस्तीन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा में इजरायली हवाई हमलों में 8 की मौत, पत्रकार भी शामिल</strong><br><br>गाजा पट्टी में इजरायली वायु सेना ने हवाई हमले किए, जिसमें एक स्थानीय पत्रकार सहित कम से कम आठ लोग मारे गए। फिलिस्तीनी डॉक्टरों ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब कतर में युद्धविराम समझौते को लेकर बातचीत चल रही है।<br><br><strong>हमास की प्रतिक्रिया</strong><br><br>हमास ने कहा है कि वह तभी बंधकों के शव देगा जब इजरायल युद्धविराम समझौते को लागू करेगा। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इजरायल से मानवीय सहायता रोकने और मिस्र के साथ गाजा सीमा पर रणनीतिक गलियारे से हटने की मांग की है। हमास बंधकों के बदले और अधिक फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है। हमास के पास अभी भी 59 बंधक हैं, जिनमें से 35 के शव होने का अनुमान है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मंगल पर मस्क का यान: 2026 में पहला कदम, 2031 में मानव उतरेगा</title>
<link>https://pratinidhi.in/elon-musk-to-send-rocket-to-mars-next-year-human-landing-update</link>
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<description><![CDATA[ एलन मस्क ने घोषणा की है कि स्पेसएक्स अगले साल मंगल ग्रह पर रॉकेट भेजने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि मंगल ग्रह पर मानव लैंडिंग 2031 में शुरू हो सकती है। स्पेसएक्स का स्टारशिप और हेवी बूस्टर 2026 तक मंगल ग्रह के लिए लॉन्च हो सकता है। मस्क ने बताया कि स्टारशिप टेस्ला ह्यूमनाइड रोबोट ऑप्टिमस को अगले साल के अंत तक मंगल ग्रह पर ले जाएगा। अगर लैंडिंग सफल होती है और परिस्थितियां मनुष्यों के लिए अनुकूल होती हैं, तो मानव लैंडिंग 2029 तक शुरू हो सकती है, लेकिन 2031 तक मानव को भेजे जाने की संभावना अधिक है। मस्क की योजना दस लाख लोगों को मंगल ग्रह पर ले जाने की है। स्टारशिप, जो 30 फुट चौड़ा और 397 फुट ऊंचा है, मस्क के मंगल ग्रह पर लोगों को ले जाने के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है। स्टारशिप में सुपर हेवी नामक एक विशाल प्रथम चरण बूस्टर और स्टारशिप नामक 50 मीटर का ऊपरी चरण का अंतरिक्ष यान शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:39:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>एलन मस्क, स्पेसएक्स, मंगल ग्रह, रॉकेट, मानव लैंडिंग, स्टारशिप, टेस्ला, ऑप्टिमस, सुपर हेवी, अंतरिक्ष यान</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने घोषणा की है कि उनकी कंपनी अगले साल मंगल ग्रह पर रॉकेट भेजने की तैयारी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्यों को मंगल ग्रह पर उतारने का काम 2031 तक शुरू हो सकता है। स्पेसएक्स का स्टारशिप और हेवी बूस्टर 2026 तक मंगल ग्रह के लिए लॉन्च किया जा सकता है।<br><br>एलन मस्क ने बताया कि स्टारशिप टेस्ला ह्यूमनाइड रोबोट ऑप्टिमस को अगले साल के अंत तक मंगल ग्रह पर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर लैंडिंग सफल होती है और परिस्थितियां मनुष्यों के लिए अनुकूल होती हैं, तो मानव लैंडिंग 2029 तक शुरू हो सकती है, लेकिन 2031 तक मानव को भेजे जाने की संभावना अधिक है।<br><br>स्टारशिप, जो 30 फुट चौड़ा और 397 फुट ऊंचा है, मस्क के मंगल ग्रह पर लोगों को ले जाने के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है। स्टारशिप में सुपर हेवी नामक एक विशाल प्रथम चरण बूस्टर और स्टारशिप नामक 50 मीटर का ऊपरी चरण का अंतरिक्ष यान शामिल है। मस्क ने पिछले साल बताया था कि उनकी योजना दस लाख लोगों को मंगल ग्रह पर ले जाने की है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चीनी नौसेना: प्रशिक्षण में लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित</title>
<link>https://pratinidhi.in/chinese-naval-jet-crashes-during-training-exercise-in-china-2025</link>
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<description><![CDATA[ चीन में शनिवार को एक नौसेना का लड़ाकू विमान प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पायलट सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकलने में सफल रहा। दक्षिणी थिएटर कमांड का जेट विमान हैनान के दक्षिणी द्वीप पर जियालाई शहर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, पायलट सुरक्षित था और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) घटना की जांच कर रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:34:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चीनी नौसेना, लड़ाकू विमान, दुर्घटना, प्रशिक्षण अभ्यास, पायलट, दक्षिणी थिएटर कमांड, हैनान, जियालाई शहर, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), जांच</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीजिंग:</strong> शनिवार को चीन में एक नौसेना का लड़ाकू विमान प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।</p><br><p>हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, क्योंकि पायलट सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकलने में सफल रहा। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिणी थिएटर कमांड का जेट विमान हैनान के दक्षिणी द्वीप पर जियालाई शहर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ।</p><br><p>हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, पायलट सुरक्षित था और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) घटना की जांच कर रही है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सुनीता विलियम्स की वापसी में फिर देरी, एलन मस्क की कंपनी को मिली जिम्मेदारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-return-postponed-again-elon-musk-failed</link>
<guid>https://pratinidhi.in/sunita-williams-return-postponed-again-elon-musk-failed</guid>
<description><![CDATA[ सुनीता विलियम्स की आईएसएस से वापसी फिर टल गई है। नासा और स्पेसएक्स मिलकर उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण देरी हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह जिम्मा एलन मस्क को सौंपा था, लेकिन उनकी कंपनी अभी तक असफल रही है। 12 मार्च को फाल्कन 9 रॉकेट की लॉन्चिंग हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी के कारण टल गई थी, अब 15 मार्च को फिर से लॉन्चिंग की जाएगी। अगर यह सफल रहा, तो सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 19 मार्च तक धरती पर वापस आ सकेंगे। अंतरिक्ष से वापसी के दौरान कई खतरे भी हैं, और धरती पर आने के बाद एस्ट्रोनॉट को चलने में भी दिक्कत हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:34:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, SpaceX, Nasa, Falcon 9, International Space Station</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[सुनीता विलियम्स की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से धरती पर वापसी एक बार फिर टल गई है। नासा और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स मिलकर सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण वापसी में देरी हुई है।<br><br>खबरों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुनीता विलियम्स को अंतरिक्ष से वापस लाने का जिम्मा एलन मस्क को सौंपा था। हालांकि, मस्क की कंपनी इस जिम्मेदारी को पूरा करने में अभी तक असफल रही है।<br><br>12 मार्च को फ्लोरिडा स्थित नासा के स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट को लॉन्च करने की तैयारी थी, लेकिन ग्राउंड क्लैंप आर्म के हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी के कारण इसे टाल दिया गया। अब 15 मार्च को भारतीय समय के अनुसार सुबह 4 बजे फिर से लॉन्चिंग की जाएगी। अगर यह सफल रहा, तो सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 19 मार्च तक धरती पर वापस आ सकेंगे।<br><br>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर पिछले साल 5 जून को स्पेस मिशन पर गए थे। उन्हें 8 दिन में वापस आना था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते उन्हें 9 महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में ही रहना पड़ा है।<br><br>अंतरिक्ष से धरती पर वापसी के दौरान कई खतरे भी हैं। स्पेसक्राफ्ट को वायुमंडल में 28 हजार किमी प्रतिघंटा की गति से प्रवेश करना होता है, और घर्षण के कारण 1500 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्मी उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण धरती पर आने के बाद एस्ट्रोनॉट को चलने में भी दिक्कत हो सकती है।]]> </content:encoded>
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<title>अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स की वापसी, SpaceX का मिशन</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-return-from-iss-after-9-months-spacex-falcon-mission</link>
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<description><![CDATA[ नासा ने सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से अपना अंतरिक्ष यान रवाना किया। यह क्रू-10 मिशन है, जिसका लक्ष्य पिछले नौ महीने से अंतरिक्ष में फंसे इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से वापस लाना है। विलियम्स और विल्मोर पिछले जून से अंतरिक्ष में हैं, जब बोइंग के स्टारलाइनर में तकनीकी समस्याएँ आई थीं। स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट से क्रू-10 के सदस्य रवाना हुए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:34:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर, नासा, अंतरिक्ष, आईएसएस, स्पेसएक्स, फाल्कन-9 रॉकेट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>केप कैनवेरल:</strong> नासा ने अंतरिक्ष में नौ महीने से फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को सुरक्षित वापस लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से अपने अंतरिक्ष यान को रवाना कर दिया है। यह मिशन, क्रू-10, इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर वापस लाएगा।<br><br>विलियम्स और विल्मोर पिछले जून से अंतरिक्ष में हैं, जब बोइंग के स्टारलाइनर में तकनीकी समस्याएँ आई थीं। क्रू-10 के अंतरिक्ष यात्री, जिनमें नासा के निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव शामिल हैं, बुधवार सुबह 4 बजे विल्मोर और विलियम्स के साथ रवाना होंगे। हेग और गोरबुनोव सितंबर में क्रू ड्रैगन क्राफ्ट पर दो खाली सीटों के साथ आईएसएस के लिए उड़ान भरेंगे, ताकि विलियम्स और विल्मोर को वापस लाया जा सके।<br><br>फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट ने उड़ान भरी, जिसमें नासा के अंतरिक्ष यात्री ऐनी मैकक्लेन और निकोल एयर्स, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के ताकुया ओनिशी और रोस्कोस्मोस के किरिल पेसकोव आईएसएस के लिए रवाना हुए। इस मिशन को पहले 13 मार्च को लॉन्च करने की योजना थी, लेकिन ग्राउंड सपोर्ट क्लैंप आर्म में हाइड्रोलिक सिस्टम की समस्या के कारण इसे रद्द कर दिया गया था।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>महिलाओं पर AI और ड्रोन से नजर रख रहा ईरान, UN की रिपोर्ट में खुलासा</title>
<link>https://pratinidhi.in/iran-using-ai-and-drones-to-monitor-women-for-hijab-compliance-un-report-reveals</link>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान हिजाब कानूनों को लागू करने के लिए AI और ड्रोन का उपयोग कर रहा है। फेस रिकॉग्निशन और &#039;नाजर&#039; ऐप से उल्लंघन करने वालों की निगरानी की जा रही है। बार-बार उल्लंघन करने पर वाहन जब्त किए जा सकते हैं। कानून का दायरा बढ़ाकर एम्बुलेंस और सार्वजनिक परिवहन को भी शामिल किया गया है। उल्लंघन करने पर मौत की सजा का भी प्रावधान है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:16:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, हिजाब कानून, एआई, ड्रोन, फेस रिकॉग्निशन, संयुक्त राष्ट्र, नाजर ऐप, निगरानी, महिलाएं, तकनीक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में हिजाब कानून का उल्लंघन करने वाली महिलाओं पर निगरानी रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ईरान सरकार अनिवार्य हिजाब कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए फेस रिकॉग्निशन तकनीक और मोबाइल ऐप का उपयोग कर रही है। नाजर नामक एक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है, जो नागरिकों और पुलिस को हिजाब कानूनों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है। इस ऐप के माध्यम से, वाहनों के लाइसेंस प्लेट नंबर, स्थान और उल्लंघन का समय अधिकारियों तक पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त, ईरानी सरकार ने तेहरान और दक्षिणी क्षेत्रों में हिजाब नियमों की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात किए हैं। हिजाब कानून ईरान के सुरक्षा बलों को नियमों को लागू करने के लिए विस्तारित अधिकार प्रदान करता है, और इस्लामी दंड संहिता के तहत महिलाओं को मौत की सजा भी मिल सकती है।]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप ने बताया क्यों बदलवाया पीएम मोदी के लिए रास्ता</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-reveals-reason-for-changing-route-for-pm-modi-in-washington-dc</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेता वाशिंगटन डीसी में संघीय इमारतों के पास लगे टेंट और भित्तिचित्र देखें, इसलिए उन्होंने सफाई का आदेश दिया। ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी के मेयर म्यूरियल बोसर की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वाशिंगटन शहर की सफाई का आदेश दिया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि पीएम मोदी फेडरल बिल्डिंग के पास टेंट और भित्तिचित्र देखें। उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजधानी चाहते हैं जिसके बारे में पूरी दुनिया में चर्चा हो। पीएम मोदी ने 13 फरवरी को डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए व्हाइट हाउस का दौरा किया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:13:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Narendra Modi, Washington D.C., Cleanliness, Federal Buildings, PM Modi, America</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेता वाशिंगटन डीसी में संघीय इमारतों के पास लगे टेंट और भित्तिचित्र देखें। इसलिए उन्होंने अमेरिकी राजधानी की सफाई का आदेश दिया। ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी के मेयर म्यूरियल बोसर की सराहना करते हुए कहा कि वह राजधानी की सफाई का अच्छा काम कर रही हैं।<br><br>डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वाशिंगटन शहर की सफाई का आदेश दिया है क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि पीएम मोदी फेडरल बिल्डिंग के पास टेंट और भित्तिचित्र देखें। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्टेट डिपार्टमेंट के सामने लगे टेंटों को हटाने का आदेश दिया था, जिसे मेयर ने तुरंत हटा दिया। ट्रंप ने कहा कि वह ऐसी राजधानी चाहते हैं जिसके बारे में पूरी दुनिया में चर्चा हो।<br><br>ट्रंप ने कहा कि वह अपने शहर की सफाई कर रहे हैं और अपराध, भित्तिचित्रों और टेंटों को हटाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है और वाशिंगटन डीसी के मेयर राजधानी की सफाई का अच्छा काम कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि वह एक अपराध-मुक्त राजधानी बनाने जा रहे हैं जहाँ लोगों को लूटा, गोली मारी या बलात्कार नहीं किया जाएगा।<br><br>ट्रंप ने कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति और यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री उनसे मिलने आए, तो उन्होंने रूट का निरीक्षण किया और वह नहीं चाहते थे कि वे टेंट, भित्तिचित्र, टूटे हुए अवरोध और गड्ढे देखें। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसे सुंदर बनाया और उनके पास एक अपराध-मुक्त राजधानी होगी जो पहले से कहीं अधिक साफ, बेहतर और सुरक्षित होगी।<br><br>पीएम मोदी ने 13 फरवरी को डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए व्हाइट हाउस का दौरा किया था। ट्रंप ने इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जापानी प्रधान मंत्री शिगेरू इशिबा और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय की भी मेजबानी की थी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिकी यूनिवर्सिटी से भारतीय छात्रा का स्व&amp;निर्वासन, ट्रंप प्रशासन ने वीजा किया रद्द</title>
<link>https://pratinidhi.in/ranjani-srinivasan-columbia-university-indian-student-self-deport-after-trump-administration-revokes-her-visa</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश विभाग ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी की भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का वीजा रद्द कर दिया था, क्योंकि उन पर हमास का समर्थन करने का आरोप था। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने बताया कि रंजनी ने स्व-निर्वासन के जरिए देश छोड़ दिया है। रंजनी कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्बन प्लानिंग में डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रही थीं और उन्होंने F-1 छात्र वीजा पर अमेरिका में प्रवेश किया था। होमलैंड सिक्योरिटी का दावा है कि रंजनी उन गतिविधियों में शामिल हो गई थीं, जिन्हें हमास का समर्थन करने वाला माना जाता था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:11:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Ranjani Srinivasan, Columbia University, Indian Student, Self Deport, Trump Administration, Visa Revoked, Hamas</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी विदेश विभाग ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी की भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का वीजा रद्द कर दिया था। रंजनी पर हमास का समर्थन करने का आरोप था।<br><br>डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने बताया कि रंजनी श्रीनिवासन ने स्व-निर्वासन के जरिए देश छोड़ दिया है। विभाग ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें रंजनी जाती हुई दिखाई दे रही हैं।<br><br>रंजनी कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्बन प्लानिंग में डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने F-1 छात्र वीजा पर अमेरिका में प्रवेश किया था। होमलैंड सिक्योरिटी का दावा है कि रंजनी श्रीनिवासन उन गतिविधियों में शामिल हो गई थीं, जिन्हें हमास का समर्थन करने वाला माना जाता था।<br><br>रंजनी श्रीनिवासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ डिजाइन से डिजाइन में मास्टर और CEPT यूनिवर्सिटी से डिजाइन में बैचलर ऑफ डिजाइन की डिग्री हासिल की है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ट्रेन हाईजैक: बलूच विद्रोहियों का दावा, सभी बंधक मारे गए</title>
<link>https://pratinidhi.in/all-hostages-killed-baloch-rebels-claim-pakistan-train-hijack-pak-army-lying</link>
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<description><![CDATA[ बलूच विद्रोहियों ने जाफ़र एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण के बाद 214 बंधकों की हत्या का दावा किया है, जिसके लिए उन्होंने पाकिस्तान की सरकार को दोषी ठहराया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को 48 घंटे की अंतिम चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। बीएलए ने युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए पाकिस्तानी सेना को एक अल्टीमेटम दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप सभी 214 बंधकों को मार दिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:11:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, ट्रेन, हाईजैक, बलूच विद्रोही, बंधक, हत्या, बीएलए, जाफर एक्सप्रेस, आईएस पीआर, आतंकवादी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इस्लामाबाद:</strong> बलूच विद्रोहियों ने जाफ़र एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण के बाद सभी 214 बंधकों की हत्या करने का दावा किया है। उन्होंने पाकिस्तान की सरकार पर बातचीत से बचने और उनकी मांगों को अनसुना करने का आरोप लगाया है।

<strong>बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए)</strong> के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को 48 घंटे का अंतिम चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप 214 बंधकों की मौत हो गई।

बीएलए ने यह भी दावा किया कि उन्होंने युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए पाकिस्तानी सेना को एक अल्टीमेटम दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इस जिद के परिणामस्वरूप सभी 214 बंधकों को मार दिया गया।

हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि उसने सभी 33 विद्रोहियों को मार गिराया है जो ट्रेन के अपहरण में शामिल थे। सेना ने यह भी कहा कि वे आतंकवादियों और उनके समर्थकों को देश के अंदर और बाहर दोनों जगह चुनौती देंगे।

इस घटना के बाद, पाकिस्तान और बलूच विद्रोहियों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पुतिन की चेतावनी: सरेंडर करो या जान से जाओ</title>
<link>https://pratinidhi.in/putin-calls-ukrainian-soldiers-to-surrender-in-kursk-region-after-trump-appeal</link>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कुर्स्क में यूक्रेनी सैनिकों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया है, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ऐसा करने का आग्रह किया था। पुतिन ने कहा कि अगर यूक्रेनी सैनिक हथियार डालते हैं तो उनकी जान बख्शी जाएगी। ट्रंप और पुतिन दोनों का कहना है कि रूसी सेना ने कुर्स्क में यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया है, जबकि कीव इससे इनकार करता है। जेलेंस्की ने माना कि उनकी सेना पर दबाव है। पुतिन ने ट्रंप के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि यूक्रेनी सेना को हथियार डालने का आदेश दिया जाना चाहिए। यूक्रेन ने दावों का खंडन किया, लेकिन ज़ेलेंस्की ने माना कि स्थिति कठिन है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 18:09:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Putin, Russia, Ukraine, Kursk, War</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मॉस्को:</strong> रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कुर्स्क क्षेत्र में लड़ रहे यूक्रेनी सैनिकों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यदि यूक्रेनी सैनिक हथियार डालते हैं, तो उनकी जान बचाई जाएगी।<br><br>यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पुतिन से यूक्रेनी सैनिकों को बख्श देने का आग्रह किया था। ट्रंप और पुतिन दोनों का कहना है कि रूसी सेना ने कुर्स्क में यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया है, हालांकि कीव ने इन दावों का खंडन किया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्वीकार किया है कि उनकी सेना पर दबाव बढ़ रहा है।<br><br>पुतिन ने टेलीविजन पर दिए एक बयान में कहा कि वह ट्रंप की अपील का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना को हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया जाना चाहिए ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान को प्रभावी बनाया जा सके।<br><br>रूस ने हाल ही में कुर्स्क में अपना अभियान तेज कर दिया है और यूक्रेन से पश्चिमी सीमा क्षेत्र में जमीन वापस ले ली है। यूक्रेनी सेना ने पिछले साल अगस्त में कुर्स्क के बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया था, लेकिन रूसी सेना अभी तक इसे पूरी तरह से वापस नहीं ले पाई है। ट्रंप द्वारा अमेरिकी सैन्य सहायता रोकने के बाद यूक्रेनी सेना पर दबाव बढ़ गया है।<br><br>ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पुतिन से अपील की थी कि रूसी सेना द्वारा घिरे हुए यूक्रेनी सैनिकों की जान बख्श दी जाए। उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे भयानक नरसंहार बताया था।<br><br>यूक्रेन ने ट्रंप और पुतिन के दावों का खंडन किया है, लेकिन ज़ेलेंस्की ने माना है कि कुर्स्क क्षेत्र में स्थिति कठिन है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप प्रशासन का 41 देशों पर यात्रा प्रतिबंध, पाकिस्तान समेत कई मुल्कों की बढ़ी टेंशन</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-administration-weighs-travel-ban-on-41-countries</link>
<guid>https://pratinidhi.in/donald-trump-administration-weighs-travel-ban-on-41-countries</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन 41 देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और सीरिया जैसे देश शामिल हैं। इन देशों को तीन लिस्ट में बांटा गया है। पहली लिस्ट में 10 देशों के नागरिकों को अमेरिका में यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी, जबकि दूसरी लिस्ट में शामिल देशों पर आंशिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। तीसरी लिस्ट में शामिल देशों के लिए वीजा जारी करने पर रोक लगाने पर विचार किया जा रहा है। ट्रंप ने पहले कार्यकाल में भी 7 मुस्लिम देशों पर बैन लगाया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:14:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप, यात्रा प्रतिबंध, पाकिस्तान, अमेरिका, ट्रैवल बैन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन 41 देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इस लिस्ट में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और सीरिया समेत कई देश शामिल हैं।</p><br><p>न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने 41 देशों की तीन लिस्ट बनाई हैं। पहली लिस्ट में अफगानिस्तान, सीरिया, ईरान, क्यूबा और नॉर्थ कोरिया जैसे 10 देश हैं, जिनके नागरिकों को अमेरिका में यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी।</p><br><p>दूसरी लिस्ट में इरिट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और दक्षिणी सूडान जैसे पूर्वी अफ्रीकी देश शामिल हैं। इन देशों के नागरिकों पर आंशिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जिससे टूरिस्ट, स्टूडेंट वीजा और कुछ इमीग्रेंट वीजा प्रभावित होंगे।</p><br><p>तीसरी लिस्ट में पाकिस्तान, भूटान और म्यांमार समेत 26 देश हैं। इन देशों के लिए अमेरिकी वीजा जारी करने पर आंशिक रोक लगाने पर विचार किया जा रहा है, अगर वहां की सरकारें 60 दिनों में कमियों को दूर करने के लिए प्रयास नहीं करती हैं।</p><br><p>डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी 7 मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन लगाया था। अब दूसरे कार्यकाल में इमीग्रेशन पर सख्ती बरतते हुए उन्होंने कैबिनेट सदस्यों को 21 मार्च तक उन देशों की लिस्ट देने का निर्देश दिया है, जिनसे यात्रा आंशिक या पूरी तरह से निलंबित की जानी चाहिए।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेतन्याहू ने पूर्व सुरक्षा प्रमुख के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत</title>
<link>https://pratinidhi.in/netanyahu-files-complaint-against-former-israeli-security-chief-argaman</link>
<guid>https://pratinidhi.in/netanyahu-files-complaint-against-former-israeli-security-chief-argaman</guid>
<description><![CDATA[ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पूर्व आईएसए प्रमुख नदाव अर्गामन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें जबरन वसूली का आरोप लगाया गया है। नेतन्याहू के वकील ने कहा कि अर्गामन आपराधिक तरीकों का उपयोग कर रहे थे, जबकि अर्गामन ने कहा कि अगर नेतन्याहू ने गैरकानूनी काम किया तो वह सब कुछ बता देंगे। आईएसए ने आरोपों से इनकार किया है, और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। नेतन्याहू और आईएसए के बीच तनाव 7 अक्टूबर के हमले के बाद से बढ़ गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:12:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नेतन्याहू, इजरायल, अर्गामन, आईएसए, जबरन वसूली, शिकायत, पुलिस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पूर्व इजरायली सुरक्षा एजेंसी (आईएसए) प्रमुख नदाव अर्गामन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। नेतन्याहू के वकील ने पुलिस को बताया कि अर्गामन, आपराधिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए नेतन्याहू से जबरन वसूली करने की कोशिश कर रहे थे।</p><br><p>यह आरोप अर्गामन के उस इंटरव्यू के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर नेतन्याहू ने गैरकानूनी काम किया तो वे सब कुछ बता देंगे। नेतन्याहू का कहना है कि अर्गामन उन्हें 7 अक्टूबर को आईएसए की विफलता के बाद जरूरी फैसले लेने से रोकने के लिए ब्लैकमेल कर रहे हैं।</p><br><p>आईएसए ने इन आरोपों का खंडन किया है। पुलिस ने अर्गामन के बयान की जांच शुरू कर दी है। नेतन्याहू और आईएसए के बीच तनाव तब से बढ़ गया है, जब 7 अक्टूबर को हमास ने हमला किया था।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप की मध्यस्थता: पुतिन से बातचीत, युद्ध रोकने की अपील</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-vladimir-putin-talks-ukraine-war-ceasefire</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ &lt;strong&gt;यूक्रेन&lt;/strong&gt; युद्ध को समाप्त करने को लेकर चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि उनकी बातचीत से युद्ध खत्म होने का रास्ता खुल सकता है और पुतिन से &lt;strong&gt;यूक्रेन&lt;/strong&gt; में युद्धविराम और रूसी सेना से घिरे यूक्रेनी सैनिकों के साथ रियायत बरतने की अपील की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन से लगातार संपर्क किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वे जंग रोकने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:10:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Vladimir Putin, Ukraine, यूक्रेन युद्ध, युद्धविराम, रूसी सेना, यूक्रेनी फौजी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वॉशिंगटन:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ <strong>यूक्रेन</strong> युद्ध को समाप्त करने को लेकर चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि उनकी बातचीत से युद्ध खत्म होने का रास्ता खुल सकता है। <br><br>ट्रंप ने पुतिन से <strong>यूक्रेन</strong> में युद्धविराम और रूसी सेना से घिरे यूक्रेनी सैनिकों के साथ रियायत बरतने की अपील की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन से लगातार संपर्क किया है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी भी <strong>सऊदी</strong> में मिल चुके हैं।<br><br>ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी पुतिन के साथ सार्थक बातचीत हुई और उन्हें युद्ध खत्म होने की संभावना दिखती है। उन्होंने कहा कि हजारों यूक्रेनी सैनिक रूसी सेना से घिरे हैं और उन्होंने पुतिन से उनकी जान बख्शने का आग्रह किया है, क्योंकि यह एक भयानक नरसंहार होगा।<br><br>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वे जंग रोकने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे <strong>यूक्रेन</strong> के साथ युद्धविराम के अमेरिकी प्रस्ताव से सहमत हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इससे स्थायी शांति हो और संकट की जड़ को दूर किया जाए।]]> </content:encoded>
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<title>इराकी सेना और गठबंधन बलों ने IS के कमांडर अबू खदीजा को मार गिराया</title>
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<description><![CDATA[ इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) के प्रमुख अब्दुल्ला माकी मुस्लेह अल रिफाई उर्फ अबू खदीजा को इराकी और अमेरिकी सेना ने मार गिराया। इराकी पीएम मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने ट्विटर पर इसकी घोषणा की। यह ऑपरेशन पश्चिमी इराक के अनबर प्रांत में हवाई हमलों के माध्यम से किया गया। इराकी अधिकारी सीरिया में आईएस के फिर से उभरने को लेकर चिंतित हैं। अबू खदीजा, आईएस का डिप्टी खलीफा था, और इराक और सीरिया का गवर्नर भी था। अमेरिका और इराक ने गठबंधन के सैन्य मिशन को समाप्त करने पर सहमति जताई है, पर आईएस को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। सीरिया, इराकी सरकार से आईएस के खिलाफ लड़ाई में मदद की उम्मीद कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:10:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इस्लामिक स्टेट, अबू खदीजा, इराक, सीरिया, आतंकवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) के प्रमुख <strong>अब्दुल्ला माकी मुस्लेह अल रिफाई उर्फ अबू खदीजा</strong> को इराकी खुफिया सेवा और अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने मार गिराया है। इराक के प्रधानमंत्री <strong>मोहम्मद शिया अल-सुदानी</strong> ने ट्विटर पर यह जानकारी दी। <br><br>यह ऑपरेशन पश्चिमी इराक के अनबर प्रांत में खदीजा के ठिकानों पर हवाई हमलों के माध्यम से किया गया। इराकी अधिकारी सीरिया में IS के फिर से उभरने को लेकर चिंतित हैं, खासकर बशर अल-असद के पतन के बाद।<br><br>अल-सुदानी ने कहा कि इराकी सेना ने आतंकी ताकतों पर प्रभावशाली जीत जारी रखी है। अबू खदीजा, जो इस्लामिक स्टेट का डिप्टी खलीफा था, इराक और सीरिया का गवर्नर भी था। इराकी पीएम ने कहा कि अबू खदीजा इराक और दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक था, और इस उपलब्धि पर इराकी नागरिकों को बधाई दी। अमेरिका और इराक ने सितंबर तक IS से लड़ने वाले गठबंधन के सैन्य मिशन को समाप्त करने पर सहमति जताई है, लेकिन अमेरिकी सेना के इराक छोड़ने से पहले IS को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।<br><br>सीरिया के अंतरिम विदेश मंत्री असद हसन अल शिबानी ने बगदाद में अपने इराकी समकक्ष से मुलाकात की, जिसमें इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई पर चर्चा हुई। सीरिया, इराकी सरकार से इस लड़ाई में मदद की उम्मीद कर रहा है।]]> </content:encoded>
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<title>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की धरती पर वापसी: नासा का क्रू&amp;10 मिशन</title>
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<description><![CDATA[ नासा और स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाने के लिए क्रू-10 मिशन लॉन्च किया। फाल्कन 9 रॉकेट ने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। विलियम्स और विल्मोर पिछले साल जून में आईएसएस पर फंस गए थे क्योंकि बोइंग के स्टारलाइनर में तकनीकी दिक्कतें आईं। नासा ने कहा कि क्रू-10 के स्टेशन से जुड़ने के बाद क्रू-9 के सदस्य पृथ्वी पर लौटेंगे। पहले 13 मार्च को लॉन्च करने की योजना थी, लेकिन मौसम और तकनीकी समस्याओं के कारण देरी हुई। अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से तालमेल बिठाने में कठिनाई होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:09:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, NASA, SpaceX, Crew-10, ISS, Falcon 9, Boeing Starliner</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> नासा और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष में पिछले साल से फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाने के लिए <strong>क्रू-10 मिशन</strong> लॉन्च किया। <strong>फाल्कन 9 रॉकेट</strong>, जो <strong>ड्रैगन अंतरिक्ष यान</strong> लेकर गया, ने <strong>नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर</strong> से उड़ान भरी।<br><br>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर पिछले साल जून में <strong>अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस)</strong> पर फंस गए थे। वे आठ दिन के मिशन पर गए थे, लेकिन <strong>बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान</strong> में तकनीकी दिक्कतों के चलते उन्हें वहां रुकना पड़ा।<br><br>नासा ने अपने एक्स हैंडल पर कहा कि क्रू-10 के 15 मार्च को स्टेशन से जुड़ने के बाद, क्रू-9 के निक हेग, सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर और अलेक्जेंडर गोरबुनोव कुछ दिनों बाद धरती पर लौटेंगे।<br><br>पहले नासा ने क्रू-10 को 13 मार्च को लॉन्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन लॉन्चिंग पैड पर तेज हवाओं और बारिश के कारण देरी हुई। इसके अतिरिक्त, स्पेसएक्स इंजीनियरों को <strong>लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A</strong> में फाल्कन 9 रॉकेट के लिए ग्राउंड सपोर्ट क्लैंप आर्म के हाइड्रोलिक सिस्टम में समस्या आई।<br><br>अंतरिक्ष में 9 महीने बिताने के बाद, पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से तालमेल बिठाना मुश्किल होता है। पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने कहा कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप संतुलन नहीं बना पाते। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के पैर धरती पर लौटने के बाद <strong>बेबी फीट</strong> जैसे हो जाते हैं, क्योंकि वे पैरों के तलवों पर चलने के लिए ज़रूरी त्वचा का मोटा हिस्सा खो देते हैं।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>टेक्सास में भीषण सड़क हादसा: पांच की मौत, 11 घायल</title>
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<description><![CDATA[ टेक्सास के ऑस्टिन में गुरुवार रात को एक भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई और 11 घायल हो गए। दुर्घटना आई-35 के 13100 ब्लॉक में हुई, जहां 17 गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिनमें एक सेमी-ट्रक भी शामिल था। मृतकों में एक बच्चा और एक शिशु भी हैं, जबकि दो घायलों की हालत गंभीर है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:05:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सड़क दुर्घटना, टेक्सास, ऑस्टिन, अमेरिका, कार दुर्घटना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[टेक्सास के ऑस्टिन में एक भयानक सड़क हादसा हुआ, जिसमें पांच लोगों की जान चली गई और 11 घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में एक बच्चा और एक शिशु भी शामिल हैं।<br><br>यह दुर्घटना गुरुवार की रात करीब 11 बजे आई-35 के 13100 ब्लॉक में हुई, जब 17 गाड़ियां आपस में टकरा गईं। ऑस्टिन पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में एक सेमी-ट्रक भी शामिल था और घटनास्थल पर मंजर ऐसा था जैसे गाड़ियों का ढेर लग गया हो।<br><br>घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>इराक में मारा गया खूंखार आतंकी अबू खदीजा</title>
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<description><![CDATA[ इराक के प्रधानमंत्री ने इस्लामिक स्टेट के खूंखार आतंकी अबू खदीजा के मारे जाने की पुष्टि की है। इराकी राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने कार्रवाई करते हुए अबू खदीजा को मार गिराया। अबू खदीजा को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था और वह इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट का नेता था। इराक के पीएम मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने बताया कि अबू खदीजा, जिसका असली नाम अब्दुल्ला मक्की मुस्लीह अल-रुफई था, इराकी सुरक्षाबलों द्वारा मारा गया। अल-सुदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अबू खदीजा तथाकथित उप खलीफा था। अबू खदीजा का जन्म 1991 में इराक के सलाहुद्दीन राज्य में हुआ था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:05:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अबू खदीजा, इराक, आतंकवादी, इस्लामिक स्टेट, ISIS</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इराक के प्रधानमंत्री ने इस्लामिक स्टेट (IS) के खूंखार आतंकी अबू खदीजा के मारे जाने की पुष्टि की है। <br><br>इराकी राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने संयुक्त ऑपरेशन कमांड और अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बलों के साथ मिलकर कार्रवाई करते हुए अबू खदीजा को मार गिराया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी।<br><br>अबू खदीजा को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था। वह इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के नेता थे और दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक माने जाते थे।<br><br>इराक के पीएम मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने बताया कि अबू खदीजा, जिसका असली नाम अब्दुल्ला मक्की मुस्लीह अल-रुफई था, इराकी सुरक्षाबलों द्वारा मारा गया। इस ऑपरेशन में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन का भी समर्थन था।<br><br>अल-सुदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अबू खदीजा तथाकथित उप खलीफा था और इराक और सीरिया के गवर्नर के पद पर भी था।<br><br> इस्लामिक स्टेट ने सीरिया और इराक में लाखों लोगों पर कट्टरपंथी इस्लामी शासन लागू किया था। पूर्व इस्लामिक स्टेट नेता अबू बकर अल-बगदादी ने 2014 में इराक और सीरिया के एक चौथाई हिस्से पर खिलाफत की घोषणा की थी।<br><br>अबू खदीजा का जन्म 1991 में इराक के सलाहुद्दीन राज्य में हुआ था। अमेरिका ने 2023 में उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;व्यावसायिक पोशाक न पहने&amp;apos;, ब्रिटेन के सांसद ने होली पर लोगों को क्यों दी ऐसी सलाह?</title>
<link>https://pratinidhi.in/british-mp-advice-on-holi-attire-and-festival-significance</link>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने होली पर व्यावसायिक पोशाक न पहनने की सलाह दी, क्योंकि रंगों को निकालना मुश्किल होता है। उन्होंने हाउस ऑफ कॉमन्स में होली की शुभकामनाएं दीं और राधा-कृष्ण के प्रेम और अच्छाई की जीत का वर्णन किया। भारत में भी होली धूमधाम से मनाई गई, लोगों ने रंग लगाए और मिठाइयां बांटी। होली का त्योहार राधा और कृष्ण के शाश्वत और दिव्य प्रेम का जश्न मनाता है। रंगों का यह त्यौहार आपके जीवन में खुशियां और खुशियां लेकर आए! ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 11:05:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Holi, Bob Blackman, UK, Parliament, Festival, Colors</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने लोगों को होली के उत्सव में व्यावसायिक पोशाक न पहनने की सलाह दी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी कि इस त्योहार में इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों को कपड़ों से निकालना मुश्किल है। <br><br>सांसद ने हाउस ऑफ कॉमन्स में होली की शुभकामनाएं भी दीं और त्योहार के पीछे की कहानी के बारे में बात की, जिसमें राधा और कृष्ण के शाश्वत प्रेम और बुराई पर अच्छाई की जीत के बारे में बताया गया। <br><br>उन्होंने कहा कि होली का त्योहार राधा और कृष्ण के शाश्वत और दिव्य प्रेम का जश्न मनाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है! रंगों का यह त्यौहार आपके जीवन में खुशियां और खुशियां लेकर आए!<br><br>देश भर में शुक्रवार धूमधाम से होली मनाई गई। सुबह से ही लोगों ने एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाए। इसके साथ ही एक-दूसरे को बधाई और मिठाइयां देकर इस उत्सव का आनंद लिया। होली के मौके पर घरों में पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाया गया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूनुस: नायक या महाठग? बांग्लादेश के राजदूत ने सरकार पर लगाए आरोप</title>
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<description><![CDATA[ मोरक्को में बांग्लादेश के राजदूत हारुन अल रशीद ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रशीद का कहना है कि यूनुस के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश अराजकता का सामना कर रहा है, जहाँ सांस्कृतिक और धर्मनिरपेक्ष पहचान खतरे में है। ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/msid-119006500,imgsize-78321,width-540,height-405,resizemode-7/119006500.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 00:44:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, मोहम्मद यूनुस, हारुन अल रशीद, अंतरिम सरकार, राजनीति, कूटनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[मोरक्को में बांग्लादेश के राजदूत हारुन अल रशीद ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रशीद का कहना है कि यूनुस के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश अराजकता का सामना कर रहा है, जहाँ सांस्कृतिक और धर्मनिरपेक्ष पहचान खतरे में है।<br><br>रशीद ने यूनुस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने देश में अराजकता फैलाई, सेक्युलर ढांचे को तोड़ा, कट्टरपंथियों का समर्थन किया और शेख हसीना की सरकार को गिराने की साजिश रची। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और देश लगातार पतन की ओर जा रहा है, लेकिन दुनिया चुप है। रशीद ने पश्चिमी देशों से यूनुस के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है।<br><br>फेसबुक पर एक पोस्ट में, रशीद ने दावा किया कि बांग्लादेश आतंक और अराजकता की गिरफ्त में है, मीडिया को दबाया जा रहा है और अत्याचार की खबरें सामने नहीं आ रही हैं, जिससे कट्टरपंथियों को खुली छूट मिल गई है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष और सांस्कृतिक पहचान को मिटा रहे हैं, संग्रहालयों, मूर्तियों, सांस्कृतिक प्रतीकों, सूफी दरगाहों और हिंदू मंदिरों को नष्ट कर रहे हैं।<br><br>रशीद ने कहा कि यूनुस के शासन में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं, अल्पसंख्यक डर में जी रहे हैं, और हिजब-उत-तहरीर, इस्लामिक स्टेट और अल कायदा जैसे संगठन इस्लामी शासन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जुलाई में हसीना की सरकार गिराने के समय से ही देश की एकता कमजोर हो रही है, जिसे अब यूनुस का समर्थन मिल रहा है।<br><br>रशीद ने यह भी कहा कि यूनुस सरकार बंगबंधु मुजीबुर्रहमान पर बंगाली उपन्यास लिखने के कारण उनसे नाराज है। उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में बना था, लेकिन इस्लामवादी इस पहचान को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि शेख मुजीबुर्रहमान और शेख हसीना दोनों ही चरमपंथियों का शिकार हुए हैं।<br><br>रशीद ने निष्कर्ष में कहा कि सत्ता हथियाने के बाद यूनुस ने अपना मुखौटा उतार दिया है और अब वह एक अत्याचारी शासक के रूप में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यूनुस ने शेख हसीना द्वारा बनाए गए बांग्लादेश के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है और इतिहास उन्हें नायक नहीं, बल्कि एक धोखेबाज के रूप में याद रखेगा।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पोलैंड में परमाणु हथियारों की तैनाती: रूस के खतरे से निपटने की तैयारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/poland-seeks-us-nuclear-weapons-amid-russian-threat</link>
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<description><![CDATA[ पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने अमेरिका से अपने देश में परमाणु हथियार तैनात करने का आग्रह किया है, क्योंकि उन्हें रूस से हमले का डर है। उन्होंने कहा कि रूस को रोकने के लिए परमाणु हथियार जरूरी हैं। डूडा ने यह भी कहा कि रूस आज सोवियत संघ की तरह आक्रामक है और उसकी नीतियां यूरोप के लिए खतरा हैं। पोलैंड ने अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और दक्षिण कोरिया से हथियार खरीदने पर भी जोर दिया है। ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/msid-119009529,imgsize-16919,width-540,height-405,resizemode-75/119009529.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 00:44:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पोलैंड, रूस, परमाणु हथियार, अमेरिका, यूक्रेन युद्ध, आंद्रेज डूडा, डोनाल्ड ट्रंप, बेलारूस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वारसॉ:</strong> पोलैंड के राष्ट्रपति <strong>आंद्रेज डूडा</strong> ने <strong>अमेरिका</strong> से फिर एक बार अपने देश में परमाणु हथियार तैनात करने की मांग की है। उनका कहना है कि रूस को रोकने के लिए परमाणु हथियार जरूरी हैं, इसलिए अमेरिका को अपने हथियार <strong>पोलैंड</strong> में तैनात करने चाहिए। इससे पहले, 2022 में भी उन्होंने ऐसी अपील की थी। <br><br><strong>यूक्रेन युद्ध</strong> के बाद से पोलैंड को रूस से खतरा महसूस हो रहा है। उन्हें डर है कि रूस यूक्रेन से आगे बढ़कर उनके देश तक भी हमला कर सकता है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> इस पर क्या फैसला लेंगे। <br><br>डूडा का मानना है कि रूस आज सोवियत संघ की तरह आक्रामक है और पुतिन की नीतियां यूरोप के लिए खतरा हैं। पोलैंड में अमेरिकी परमाणु हथियारों की तैनाती को वे एक जरूरी कदम मानते हैं, जिससे रूस के सामने पोलैंड मजबूत दिखेगा। यह बेलारूस में रूसी परमाणु हथियारों की तैनाती का जवाब भी होगा। <br><br><strong>बीबीसी</strong> को दिए इंटरव्यू में डूडा ने कहा कि रूस, <strong>पुतिन</strong> के नेतृत्व में, पोलैंड के लिए एक बड़ा खतरा है। रूस यूक्रेन में नागरिकों को मार रहा है और शहरों पर बम गिरा रहा है। वह अपने परमाणु हथियार बेलारूस ले जा रहा है, इसलिए पोलैंड भी परमाणु हथियारों की मेजबानी के लिए तैयार है। <br><br>यह पूछे जाने पर कि परमाणु हथियार पोलैंड को कैसे सुरक्षित करेंगे, डूडा ने कहा कि इससे पोलैंड की सुरक्षा के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दिखेगी। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति <strong>इमैनुएल मैक्रों</strong> के नाटो देशों तक फ्रांसीसी परमाणु हथियारों की सुरक्षा बढ़ाने के प्रस्ताव का भी स्वागत किया और बताया कि पोलैंड ने अपना रक्षा बजट भी बढ़ा दिया है। पोलैंड ने अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और दक्षिण कोरिया से हथियार खरीदने पर भी जोर दिया है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>इंडोनेशिया की सफरवादी गुफा: मक्का तक रहस्यमय सुरंग का दावा</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया के जावा द्वीप में स्थित सफरवादी गुफा इन दिनों चर्चा में है। इस गुफा के बारे में मान्यता है कि यहाँ से एक सुरंग सीधे मक्का तक जाती है। बड़ी संख्या में मुसलमान इसे आस्था का केंद्र मानते हैं। लोग मानते हैं कि शेख अब्दुल मुहई ने इस गुफा के रास्ते मक्का की यात्रा की थी। गरीब लोग हज पर जाने की उम्मीद में यहां आते हैं और मानसिक शांति का अनुभव करते हैं। मानव विज्ञानी अमानाह नुरिश के अनुसार, यह मामला पूरी तरह से आस्था पर आधारित है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 00:43:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सफरवादी गुफा, इंडोनेशिया, मक्का, सुरंग, इस्लाम, अब्दुल मुहई</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित सफरवादी गुफा इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। पश्चिमी जावा के तसिकमालय में स्थित इस गुफा में हर दिन सैकड़ों लोग आते हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी धार्मिक स्थल पर आते हैं। इस गुफा के बारे में कई साल पुरानी मान्यता है कि इसके अंदर एक सुरंग है जो सीधे मक्का तक जाती है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में मुसलमान यहां आते हैं और इसे आस्था की जगह मानते हैं।<br><br>बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सफरवादी गुफा 284 मीटर लंबी है और इसके दो प्रवेश द्वार हैं। बहुत से लोग इसे पवित्र गुफा मानते हैं। लोगों का कहना है कि शेख अब्दुल मुहई ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके इस गुफा के रास्ते मक्का की यात्रा की थी। अब्दुल मुहई 17वीं सदी के एक प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान थे, जिन्होंने पश्चिमी जावा में इस्लाम का प्रचार किया था। लोग उन्हें बहुत सम्मान देते हैं और मानते हैं कि वह सुरंग आज भी मौजूद है, जिससे होकर मुहई मक्का गए थे।<br><br>सफरवादी गुफा में लोग इस उम्मीद में आते हैं कि शायद वे भी यहां से मक्का पहुंच जाएंगे। खासकर गरीब लोग यहां आते हैं, जिनके लिए हज का खर्च उठाना मुश्किल होता है। यह मान्यता है कि जो व्यक्ति सुरंग के पत्थरों में अपना सिर फिट कर लेता है, वह मक्का तक पहुंच सकता है। यहां हमेशा पानी टपकता रहता है, जिसे लोग पवित्र मानते हैं और कहते हैं कि यह आब-ए-जमजम की तरह शुद्ध है। इस जगह से जुड़ी कई अन्य मान्यताएं भी हैं।<br><br>सऊदी अरब और इंडोनेशिया के बीच की दूरी लगभग आठ हजार किलोमीटर है। इसलिए यह सोचना अजीब लगता है कि लोग मक्का जाने की उम्मीद में इस गुफा में आते हैं। फिर भी, यह स्थान आस्था का केंद्र बना हुआ है। कई लोग सिर्फ उस जगह को छूने के लिए आते हैं जहां कभी अब्दुल मुहई रुके थे। स्थानीय कहानियाँ भी लोगों को इस गुफा की ओर आकर्षित करती हैं।<br><br>मानव विज्ञानी अमानाह नुरिश का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से आस्था पर आधारित है। उनके अनुसार, कई मुसलमान मक्का जाना चाहते हैं और उस धरती को देखना चाहते हैं जहां कभी पैगंबर मोहम्मद ने कदम रखे थे। लेकिन सऊदी अरब की यात्रा करना कई लोगों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता। इसलिए यह गुफा उन लोगों को आकर्षित करती है जो हज नहीं कर सकते। गरीब लोग यहां आकर अच्छा महसूस करते हैं और मानसिक शांति का अनुभव करते हैं। कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि उन्हें हज करने जैसा अनुभव होता है।]]> </content:encoded>
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<title>पाकिस्तान में BLA का कहर: चीन को खून के आंसू रुला रहा ये संगठन</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) पाकिस्तान में सक्रिय एक विद्रोही समूह है, जिसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर कई हमले किए हैं। हाल ही में, BLA ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया, जिसमें 100 से अधिक सैनिकों को बंधक बनाया गया। 2024 में, BLA के हमलों में 225 लोगों की जान गई। BLA ने क्वेटा, ग्वादर, टर्बट, नोशकी, कलात और अन्य क्षेत्रों में कई हमले किए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में रॉकेट हमले, गोलीबारी और अपहरण शामिल हैं। BLA को पाकिस्तान के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Mar 2025 15:38:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Balochistan Liberation Army, BLA, Pakistan, attacks, Balochistan</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहर बरपाया हुआ है। मंगलवार को विद्रोहियों ने बोलन जिले के पास जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया, जिसमें 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों समेत कई यात्री बंधक बनाए गए।<br><br>पाकिस्तान सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में BLA द्वारा किए गए हमलों में 225 मौतें हुईं। बलूचिस्तान में BLA और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे विद्रोही समूहों ने 119% अधिक हमले किए, जिनमें 171 घटनाएं शामिल थीं। BLA के निशाने पर पाकिस्तानी सुरक्षाबल हैं।<br><br><b>BLA के हमलों की टाइमलाइन:</b><br><br><b>30 जनवरी, 2024:</b> BLA ने क्वेटा के पास माच शहर में रॉकेटों से हमला किया, जिसमें 24 विद्रोही मारे गए।<br><br><b>20 मार्च, 2024:</b> BLA ने ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी कॉलोनी में घुसने की कोशिश की, जिसमें 8 विद्रोही और 2 सैनिक मारे गए।<br><br><b>26 मार्च, 2024:</b> BLA ने टर्बट में PNS सिद्दीकी पर हमला किया, जिसे नौसेना ने विफल कर दिया।<br><br><b>13 अप्रैल, 2024:</b> BLA ने नोशकी के पास 9 पंजाबी यात्रियों की हत्या कर दी।<br><br><b>10 मई, 2024:</b> BLA ने ग्वादर के पास 7 मजदूरों की हत्या कर दी।<br><br><b>23 जून, 2024:</b> BLA ने हरनाई जिले में 14 लोगों का अपहरण कर लिया।<br><br><b>27 जून, 2024:</b> BLA ने कलात जिले में तेल और गैस स्थल पर हमला किया, जिसमें 2 सुरक्षाकर्मी मारे गए।<br><br><b>13 अगस्त, 2024:</b> BLA ने मस्तुंग के पास उपायुक्त की हत्या कर दी।<br><br><b>26-27 अगस्त, 2024:</b> BLA ने बलूचिस्तान में 50 लोगों की हत्या कर दी, जिसमें 14 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।<br><br><b>7 अक्टूबर, 2024:</b> BLA ने कराची हवाई अड्डे के बाहर चीनी काफिले पर बम हमला किया, जिसमें 2 चीनी कर्मचारी मारे गए।<br><br><b>30 अक्टूबर, 2024:</b> BLA ने पांजगुर जिले में बांध निर्माण स्थल पर 5 सुरक्षा गार्डों की हत्या कर दी।<br><br><b>9 नवंबर, 2024:</b> BLA ने क्वेटा रेलवे स्टेशन पर आत्मघाती हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए।<br><br><b>17 नवंबर, 2024:</b> BLA ने कलात में एक चेक पोस्ट पर हमला किया, जिसमें 7 सुरक्षाकर्मी मारे गए।<br><br><b>5 जनवरी, 2025:</b> BLA ने टर्बट में एक कोच पर विस्फोटक से हमला किया, जिसमें 6 लोग मारे गए।<br><br><b>9 जनवरी, 2025:</b> BLA ने खुजदार में सरकारी इमारतों और एक बैंक पर हमला किया।<br><br><b>1 फरवरी, 2025:</b> BLA ने कलात जिले में 18 सैनिकों की हत्या कर दी।<br><br><b>19 फरवरी, 2025:</b> BLA ने बरखान जिले में 7 यात्रियों की हत्या कर दी।<br><br><b>3 मार्च, 2025:</b> BLA आजाद ने कलात में एक काफिले पर आत्मघाती हमला किया, जिसमें 1 सैनिक मारा गया।]]> </content:encoded>
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<title>पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस: बंधक संकट में 21 की मौत, सेना का अभियान खत्म</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-jaffar-express-train-hijack-operation-concluded</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस में यात्रियों को बंधक बनाने की घटना के बाद सेना का ऑपरेशन खत्म हो गया है। सेना ने 33 विद्रोहियों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन 21 बंधक और चार जवान भी मारे गए। सुरक्षा बलों ने 190 यात्रियों को बचाया और 33 उग्रवादियों को मार गिराया। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमले की जिम्मेदारी ली। अभियान में कई बंधक यात्रियों को बचाया गया, लेकिन हमले में कई उग्रवादी मारे गए। पाकिस्तान के एक मंत्री ने अभियान के समापन के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई है। आत्मघाती जैकेट पहने उग्रवादियों ने महिलाओं और बच्चों को अपने पास बैठने के लिए मजबूर किया। घायल हुए 30 लोगों को अस्पताल भेजा गया है। यह पहली बार है जब बलूचिस्तान में किसी उग्रवादी समूह ने यात्री ट्रेन को &#039;हाइजैक&#039; किया है। पाकिस्तान रेलवे ने पेशावर और क्वेटा रेलवे स्टेशन पर आपातकालीन डेस्क स्थापित किया है। अमेरिकी दूतावास ने हमले की निंदा की और कहा कि अमेरिका अपने सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के पाकिस्तान के प्रयासों में उसका दृढ़ भागीदार बना रहेगा。 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Mar 2025 15:36:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Jaffar Express, Train Hijack, Balochistan, BLA, Terrorism</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस में यात्रियों को बंधक बनाने की घटना के बाद सेना का ऑपरेशन खत्म हो गया है। सेना ने दावा किया है कि उन्होंने 33 विद्रोहियों को मार गिराया है, लेकिन 21 बंधक और फ्रंटियर कोर के चार जवान भी मारे गए हैं। कुछ बंधकों को दूसरे स्थानों पर ले जाया गया था, जिनकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।<br><br>बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 190 यात्रियों को बचाया और 33 उग्रवादियों को मार गिराया। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ने बताया कि इस दौरान 21 बंधक और फ्रंटियर कोर के चार जवान भी मारे गए। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, बलूच उग्रवादियों ने मंगलवार को एक सुरंग में हमला करके ट्रेन पर कब्जा कर लिया था। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ बुधवार को भी जारी रही।<br><br>जाफर एक्सप्रेस ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी, जिसमें लगभग 400 यात्री सवार थे। उग्रवादियों ने विस्फोटकों का इस्तेमाल करके ट्रेन को पटरी से उतार दिया और उस पर कब्जा कर लिया। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। उग्रवादियों ने छह सैनिकों की हत्या कर दी थी, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।<br><br>रक्षा सूत्रों के अनुसार, उग्रवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान खत्म हो गया है। महिलाओं और बच्चों सहित कई बंधक यात्रियों को बचाया गया है। हमले की शुरुआत में मारे गए यात्रियों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। घटनास्थल पर मौजूद कई उग्रवादी मारे गए हैं और जल्द ही अधिक जानकारी उपलब्ध होगी।<br><br>पाकिस्तान के एक मंत्री ने अभियान के समापन के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई है, लेकिन इसे जल्द से जल्द पूरा करने का संकल्प लिया है। गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने बताया कि हमले में 70 से 80 उग्रवादी शामिल थे। उन्होंने फर्जी खबरों के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि इलाके में मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क काम नहीं कर रहा है।<br><br>बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने कहा कि जब तक सभी यात्रियों को बचा नहीं लिया जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। बंधक स्थिति के कारण सुरक्षा बल अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि आत्मघाती जैकेट पहने कुछ उग्रवादियों ने महिलाओं और बच्चों को अपने पास बैठने के लिए मजबूर किया था।<br><br>सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, बचाव अभियान में अब तक 30 उग्रवादी मारे गए हैं जबकि 190 यात्रियों को बचा लिया गया है। घायल हुए लगभग 30 लोगों को अस्पताल भेजा गया है। अभियान के दौरान ट्रेन के मुख्य इंजन में सवार दो चालक और आठ सुरक्षाकर्मी मारे गए।<br><br>बीबीसी उर्दू सेवा के अनुसार, मुश्ताक मुहम्मद ने बताया कि जब उग्रवादियों ने ट्रेन पर हमला किया था, तब वहां बहुत बड़ा विस्फोट हुआ और गोलीबारी हुई, ऐसा दृश्य जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता।<br><br>यह पहली बार है जब बलूचिस्तान में बीएलए या किसी भी उग्रवादी समूह ने यात्री ट्रेन को 'हाइजैक' किया है। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि हमले में कितने उग्रवादी शामिल हैं, लेकिन उनमें से कुछ सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।<br><br>पाकिस्तान रेलवे ने पेशावर और क्वेटा रेलवे स्टेशन पर आपातकालीन डेस्क स्थापित किया है। पाकिस्तानी मीडिया ने उस सुरंग के पास भीषण गोलीबारी और विस्फोट की खबर दी है, जहां उग्रवादियों ने ट्रेन पर हमला किया।<br><br>विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने महिलाओं और बच्चों को मुक्त कर दिया है, लेकिन अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया है। अमेरिकी दूतावास ने हमले की निंदा की है।<br><br>पेशावर रेलवे स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारी तारिक महमूद ने कहा कि लोगों को सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बीएलए ने एक बयान में चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान की सेना कोई अभियान चलाती है, तो ''सभी बंधकों को मार दिया जाएगा।'' इस समूह पर पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका में प्रतिबंध है।<br><br>बलूचिस्तान में पिछले एक साल में उग्रवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा: दो महीनों में 11 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/violence-against-minorities-continues-in-bangladesh-11-deaths-in-two-months</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जारी है, जहाँ पिछले दो महीनों में 92 घटनाओं में 11 लोगों की हत्या हुई है। बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद ने एंटोनियो गुटेरस की यात्रा से पहले चिंता जताई। इन घटनाओं में हत्या, दुष्कर्म, मंदिरों पर हमले, और संपत्ति की लूटपाट शामिल है। 4 अगस्त से 31 दिसंबर 2024 तक अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,184 घटनाएं हुईं। हाल ही में, शिक्षकों पर लाठीचार्ज हुआ और महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ी है, साथ ही बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले भी सामने आए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Mar 2025 15:36:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश, अल्पसंख्यक, हिंसा, मानवाधिकार, संयुक्त राष्ट्र, एंटोनियो गुटेरस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पिछले दो महीनों में 92 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें अल्पसंख्यकों पर हमले और उन्हें प्रताड़ित किया गया है। इन घटनाओं में 11 लोगों की हत्या हुई है, 3 दुष्कर्म की घटनाएं हैं, और 25 मंदिरों पर हमले किए गए हैं। एक मामले में धार्मिक आधार पर अपमानित करने का मामला भी सामने आया है। <br><br>बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। परिषद ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस की बांग्लादेश यात्रा से पहले एक बयान जारी कर इन घटनाओं पर प्रकाश डाला। परिषद के अनुसार, इन 92 घटनाओं में 11 हत्याएं, 3 दुष्कर्म, 25 मंदिरों पर हमले, धार्मिक आधार पर अपमान, और 38 मामले अल्पसंख्यकों की संपत्ति की लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ से संबंधित हैं। <br><br>इसके अतिरिक्त, दो मामलों में धार्मिक भेदभाव के चलते अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नौकरी से निकाला गया। 4 अगस्त से 31 दिसंबर 2024 तक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उन्हें जान-माल की हानि पहुंचाने की 2,184 घटनाएं हुई थीं। ये घटनाएं शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद हुई हैं। हाल ही में, ढाका में प्राइमरी स्कूलों के राष्ट्रीयकरण की मांग कर रहे शिक्षकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और पानी की बौछार की।<br><br>देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा भी बढ़ रही है, और कई जिलों में बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले सामने आ रहे हैं। यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों की उम्र 6 से 14 वर्ष के बीच है। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न की शिकार एक किशोरी ने झूठे आरोप और बदनामी के बाद आत्महत्या कर ली।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>अमेरिका पर जवाबी टैरिफ: कनाडा, ईयू का एलान</title>
<link>https://pratinidhi.in/canada-and-eu-announce-retaliatory-tariffs-on-the-us-amid-global-trade-tensions</link>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत कई देशों से स्टील और एल्यूमीनियम पर 25% टैरिफ लगाने के बाद, कनाडा और यूरोपीय संघ ने जवाबी टैरिफ का एलान किया है। कनाडा 20 बिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ 28 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान पर शुल्क लगाएगा। आस्ट्रेलिया ने इसे अनुचित बताया है, पर जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, जबकि ब्रिटेन सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। भारत सरकार ने घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं और अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Mar 2025 15:36:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>टैरिफ, अमेरिका, कनाडा, यूरोपीय संघ, स्टील, एल्युमीनियम, व्यापार युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>अमेरिका पर जवाबी टैरिफ: कनाडा, ईयू का एलान</strong><br><br>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले के बाद, जिसमें उन्होंने भारत समेत कई देशों से आने वाले स्टील और एल्यूमीनियम पर 25% टैरिफ लगाया, कनाडा और यूरोपीय संघ (ईयू) ने भी जवाबी टैरिफ लगाने का एलान किया है। ब्रिटेन ने भी कहा है कि वो सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।<br><br>कनाडा के वित्त मंत्री डोमिनिक लेब्लांक के अनुसार, कनाडा अमेरिका से आने वाले 20 बिलियन डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाएगा। यूरोपीय संघ (ईयू) ने भी अमेरिका से आने वाले 28 बिलियन डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने की बात कही है, जिसमें स्टील, एल्यूमीनियम, कपड़े और कृषि उत्पाद शामिल हैं।<br><br>आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अलबनिजी ने कहा कि अमेरिका का ये शुल्क अनुचित है, लेकिन वो जवाबी कार्रवाई नहीं करेंगे। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा कि वो सभी विकल्पों पर विचार करेंगे और एक समझदारी भरा रुख अपनाएंगे।<br><br>भारत सरकार ने कहा है कि वो अपने घरेलू स्टील उत्पादकों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। सरकार अमेरिका के साथ व्यापार को बेहतर बनाने के लिए बातचीत भी कर रही है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पुतिन का कुर्स्क दौरा: सेना को मिला क्षेत्र मुक्त कराने का आदेश</title>
<link>https://pratinidhi.in/putin-visits-kursk-orders-army-to-liberate-region-ukraine-war-ceasefire-talks</link>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुर्स्क क्षेत्र का दौरा किया और सेना को यूक्रेनी सैनिकों से क्षेत्र को मुक्त कराने का आदेश दिया। यह दौरा यूक्रेनी सेना द्वारा कुछ क्षेत्रों पर कब्जा करने के बाद पहली बार हुआ है। जेलेंस्की ने कुर्स्क में सैनिकों के घिराव पर यूक्रेनी कमांडरों से बात की है। रूसी सेना ने 800 वर्ग किलोमीटर भूमि को वापस ले लिया है। पेरिस में 30 से अधिक देशों के सैन्य अधिकारी यूक्रेन में शांति सेना के गठन पर विचार करेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Mar 2025 15:36:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पुतिन, कुर्स्क, यूक्रेन, रूसी सेना, जेलेंस्की, युद्धविराम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मॉस्को:</strong> राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी रूसी क्षेत्र कुर्स्क का दौरा किया, जो यूक्रेनी सेना द्वारा कुछ क्षेत्रों पर कब्जा करने के बाद उनकी पहली यात्रा है। उन्होंने रूसी सेना द्वारा उपयोग किए जा रहे एक नियंत्रण केंद्र का दौरा किया और जनरल स्टाफ के प्रमुख वालेरी गेरासिमोव से जानकारी प्राप्त की, जिन्होंने बताया कि कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया गया है। <br><br>रूसी समाचार एजेंसियों के अनुसार, पुतिन ने रूसी सेना को जल्द से जल्द इस क्षेत्र को यूक्रेनी सैनिकों से पूरी तरह से मुक्त करने का आदेश दिया है। <br><br>यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कुर्स्क में हजारों सैनिकों के घिरने के बाद यूक्रेनी सेना के सर्वोच्च कमांडर जनरल के साथ चर्चा की। यूक्रेनी सेना ने अगस्त 2024 में कुर्स्क पर हमला करके 1,300 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया था, लेकिन रूसी सेना ने बाद में 800 वर्ग किलोमीटर भूमि को वापस ले लिया। <br><br>ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, रूसी सुरक्षा बलों ने कुर्स्क में तीन प्रमुख ठिकानों को फिर से हासिल कर लिया है, जिससे यूक्रेनी सेना का नियंत्रण कुछ सौ वर्ग किलोमीटर तक सीमित हो गया है। <br><br>यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब सऊदी अरब में युद्धविराम पर चर्चा के लिए यूक्रेनी विदेश मंत्री अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलने वाले हैं। इस दौरान अमेरिका और यूक्रेन के बीच खनिज समझौते पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। <br><br>फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 से अधिक देशों के सैन्य अधिकारी यूक्रेन में अंतर्राष्ट्रीय शांति सेना के गठन पर विचार करेंगे, जो यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी के रूप में कार्य करेगी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी में देरी</title>
<link>https://pratinidhi.in/nasa-delays-return-of-suni-williams-and-butch-wilmore-from-iss</link>
<guid>https://pratinidhi.in/nasa-delays-return-of-suni-williams-and-butch-wilmore-from-iss</guid>
<description><![CDATA[ नासा ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी को तकनीकी समस्या के कारण फिर से स्थगित कर दिया है। उनके 13 मार्च को लौटने की उम्मीद थी, लेकिन यान के ग्राउंड साइड पर हाइड्रोलिक सिस्टम में समस्या के कारण इसे रद्द कर दिया गया। इस देरी के कारण उन्हें पृथ्वी पर चलने में कठिनाई हो सकती है, क्योंकि माइक्रोग्रैविटी में लंबे समय तक रहने से उनके शरीर पर असर पड़ा है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है, लेकिन नासा ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Mar 2025 15:36:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>NASA, Sunita Williams, Butch Wilmore, ISS, Space Mission, Delayed Return</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में नौ महीने से अधिक समय से फंसे अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की घर वापसी में और देरी हो सकती है। नासा ने एक तकनीकी समस्या के कारण उनके वापसी मिशन को फिर से स्थगित कर दिया है।
<br><br>
नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को 13 मार्च को पृथ्वी पर वापस आना था। तकनीकी खराबी के कारण मिशन को रोकना पड़ा। प्रक्षेपण के टिप्पणीकार डेरोल नेल ने कहा कि यान के ग्राउंड साइड पर हाइड्रोलिक सिस्टम में दिक्कत थी, जबकि रॉकेट और अंतरिक्ष यान ठीक थे।
<br><br>
मिशन में हो रही देरी के कारण सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को पृथ्वी पर लौटने के बाद चलने में कठिनाई हो सकती है। माइक्रोग्रैविटी में लंबे समय तक रहने के कारण उनके शरीर पर बुरा असर पड़ा है। पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने बताया कि अंतरिक्ष यात्री वापस लौटने पर बच्चों की तरह महसूस करते हैं। एक अन्य पूर्व अंतरिक्ष यात्री, टेरी वर्ट्स ने बताया कि धरती के गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठाने में शरीर को हफ्तों लग सकते हैं।
<br><br>
विलंब ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने नासा की आलोचना की है। नासा ने कहा है कि सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नासा की नई दूरबीन खोलेगी ब्रह्मांड के रहस्य</title>
<link>https://pratinidhi.in/nasa-new-telescope-unlock-mysteries-of-universe-spherex-telescope-galaxy-map</link>
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<description><![CDATA[ नासा ने नई अंतरिक्ष दूरबीन स्फीरेक्स लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य पूरे आकाश का नक्शा बनाना और ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करना है। 488 मिलियन डॉलर के इस मिशन का लक्ष्य आकाशगंगाओं के निर्माण और विकास को समझना है। यह दूरबीन हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के करीब, सितारों के बीच बर्फीले बादलों में पानी और जीवन के तत्वों की खोज करेगी। स्फीरेक्स, हबल और वेब स्पेस टेलीस्कोप की तरह विस्तृत छवियों के बजाय, ब्रह्मांड की कुल चमक का निरीक्षण करेगा, जिससे वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की शुरुआत के बारे में जानकारी मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 16:31:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>NASA, SPHEREx, Telescope, Galaxy Map, Universe</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नासा की नई दूरबीन से खुलेंगे ब्रह्मांड के अनसुलझे राज</strong><br><br>नासा ने हाल ही में एक नई अंतरिक्ष दूरबीन लॉन्च की है जो पूरे आकाश का नक्शा बनाने के लिए तैयार है। स्पेसएक्स ने कैलिफोर्निया से स्फीरेक्स वेधशाला को लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी के ध्रुवों के ऊपर से उड़ान भरना है। इस दूरबीन के साथ, सूर्य का अध्ययन करने के लिए सूटकेस के आकार के चार उपग्रह भी भेजे गए हैं।<br><br><strong>क्या है स्फीरेक्स मिशन?</strong><br><br>488 मिलियन डॉलर के स्फीरेक्स मिशन का मुख्य लक्ष्य यह पता लगाना है कि अरबों वर्षों में आकाशगंगाएं कैसे बनीं और विकसित हुईं, साथ ही यह समझना है कि ब्रह्मांड अपने शुरुआती क्षणों में इतनी तेज़ी से कैसे फैला। स्फीरेक्स, हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के करीब, सितारों के बीच बर्फीले बादलों में पानी और जीवन के अन्य तत्वों की खोज करेगा, जहाँ नए सौर मंडल बन रहे हैं।<br><br><strong>कैसे काम करेगा स्फीरेक्स?</strong><br><br>स्फीरेक्स, नासा के हबल और वेब स्पेस टेलीस्कोप की तरह विस्तृत रूप से आकाशगंगाओं को नहीं देख पाएगा। यह आकाशगंगाओं की गिनती करने या उन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, पूरे समूह द्वारा उत्पादित कुल चमक का निरीक्षण करेगा, जिसमें ब्रह्मांड बनाने वाले बिग बैंग के बाद बनी सबसे शुरुआती आकाशगंगाएं भी शामिल हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अंतरिक्ष से सुनीता विलियम्स की वापसी: नासा का मिशन</title>
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<description><![CDATA[ नासा और स्पेसएक्स क्रू-10 मिशन के साथ सुनीता विलियम्स को पृथ्वी पर लाने की तैयारी कर रहे हैं। तकनीकी कारणों से मिशन में देरी हुई, लेकिन अब स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल से वापसी की उम्मीद है। क्रू-10, जिसमें नासा, जाक्सा और रोस्कोस्मोस के सदस्य शामिल हैं, 13 मार्च को लॉन्च होने वाला है। माइक्रोग्रैविटी में लंबे समय तक रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विलियम्स और विल्मोर की वापसी में देरी ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया, लेकिन नासा ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 15:43:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Sunita Williams, NASA, ISS, SpaceX, Crew-10 Mission</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>नासा और स्पेसएक्स, क्रू-10 मिशन के सदस्यों के साथ, 13 मार्च को होने वाले लॉन्च के लिए तैयार हैं। इस मिशन के साथ, भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विल्मोर के अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। आइए जानते हैं कि नासा का सुनीता विलियम्स को आईएसएस से पृथ्वी पर वापस लाने का पूरा मिशन क्या है।</p><br><p>सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर, नासा के अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष में एक महत्वपूर्ण समय बिताने के बाद अब पृथ्वी पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। हालाँकि उनका प्रारंभिक मिशन केवल दस दिनों का था, लेकिन बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में तकनीकी समस्याओं के कारण, यह लगभग दस महीनों तक बढ़ गया। अब, वे स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल पर सवार होकर अपनी वापसी की यात्रा करेंगे, और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वे अगले सप्ताह तक पृथ्वी पर लौट सकते हैं।</p><br><p>उनकी वापसी क्रू ट्रांजिशन का एक भाग है। क्रू-10 मिशन में नासा के अंतरिक्ष यात्री ऐनी मैकक्लेन और निकोल एयर्स, जाक्सा अंतरिक्ष यात्री ताकुया ओनिश्ी, और रोस्कोस्मोस कॉस्मोनॉट किरिल पेसकोव शामिल हैं। नासा का क्रू-10 मिशन 13 मार्च को सुबह 5:18 बजे आईएसटी पर लॉन्च होने के लिए तैयार है। यह दल क्रू-9 को हटा देगा, जिससे विलियम्स और विल्मोर की वापसी हो सकेगी। एक बार क्रू-10 के आने और प्रक्रिया शुरू होने के बाद, जिसमें एक सप्ताह तक का समय लग सकता है, विलियम्स और विल्मोर क्रू ड्रैगन फ्रीडम अंतरिक्ष यान में सवार हो जाएंगे। आईएसएस से उनका प्रस्थान अस्थायी रूप से 16 मार्च को शाम 6:30 बजे आईएसटी पर निर्धारित है, लेकिन मौसम की स्थिति के आधार पर इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है।</p><br><p>माइक्रोग्रैविटी में लगभग दस महीने बिताने से उनके शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने उल्लेख किया कि अंतरिक्ष यात्री वापसी पर बच्चों के पैरों के समान महसूस करते हैं, क्योंकि अंतरिक्ष में पैरों के कॉलस गायब हो जाते हैं। चियाओ ने कहा, 'आप अनिवार्य रूप से अपनी त्वचा का मोटा हिस्सा खो देते हैं।' इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष यात्री अक्सर चक्कर आना और मतली का अनुभव करते हैं।</p><br><p>एक अन्य पूर्व अंतरिक्ष यात्री टेरी वर्ट्स ने इसे चक्कर आने जैसा बताया। शरीर को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के साथ समायोजित होने में हफ्तों लगते हैं। विलियम्स और विल्मोर को घर वापस लाने में हुई देरी ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने बाइडन प्रशासन की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि नासा ने स्थिति को हल करने के लिए पर्याप्त तेजी से कार्रवाई नहीं की। हालाँकि, नासा ने जोर देकर कहा है कि सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप के फैसलों पर विवाद, USAID फंडिंग पर रोक से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-violated-constitutional-rights-by-stopping-usaid-funding</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर विवाद है, जहां एक जज ने USAID फंड पर रोक लगाने के लिए उनकी आलोचना की है। जज ने कहा कि ट्रंप ने अमेरिकी मानवीय और विकास कार्यों पर रोक लगाकर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है, और प्रशासन संसद द्वारा आवंटित फंड को रोक नहीं सकता। हालांकि, जज ने उन अनुबंधों को बहाल करने का आदेश नहीं दिया जिन्हें रद्द कर दिया गया था। विदेश मंत्री ने USAID के 83% कार्यक्रमों को समाप्त करने और शेष को विदेश विभाग के तहत लाने की घोषणा की। ट्रंप ने एलन मस्क को विदेशी सहायता की समीक्षा करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद USAID को निशाना बनाया गया। एक अन्य जज ने ट्रंप प्रशासन को सरकारी खर्चों में कटौती से जुड़े गोपनीय अभियानों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:43:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>USAID, Donald Trump, अमेरिकी जज, विदेशी सहायता, अमेरिकी एजेंसी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों को लेकर विवाद गहरा गया है। एक अमेरिकी जज ने USAID फंड पर ट्रंप द्वारा लगाई गई रोक की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिकी मानवीय और विकास कार्यों पर रोक लगाकर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। जज ने कहा कि प्रशासन संसद द्वारा आवंटित अरबों डॉलर के फंड को रोक नहीं सकता.<br><br>हालांकि, वाशिंगटन के जिला जज आमिर अली ने ट्रंप प्रशासन को उन हजारों अनुबंधों को बहाल करने का आदेश नहीं दिया, जिन्हें अचानक रद्द कर दिया गया था। ये अनुबंध USAID के मानवीय और विकास कार्यों से जुड़े थे।<br><br>इससे पहले, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने घोषणा की थी कि प्रशासन ने USAID के 83% कार्यक्रमों को समाप्त कर दिया है और शेष कार्यक्रमों को विदेश विभाग के तहत लाया जाएगा। USAID के तहत लगभग 120 देशों में विभिन्न योजनाएं चल रही थीं। ट्रंप ने पदभार संभालने के बाद एलन मस्क को अमेरिकी विदेशी सहायता की समीक्षा करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद इस एजेंसी को निशाना बनाया गया। ट्रंप ने दावा किया था कि विदेशी सहायता का ज्यादातर हिस्सा बर्बाद हो रहा है।<br><br>एक अन्य अमेरिकी जज क्रिस्टोफर कूपर ने ट्रंप प्रशासन को सरकारी खर्चों में कटौती से जुड़े गोपनीय अभियानों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने सरकारी दक्षता विभाग का गठन किया और मस्क को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को किया ढेर, 100 यात्री सुरक्षित</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistani-army-kills-terrorists-jaffar-express-hostage-rescue-operation</link>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान के बोलन जिले में क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हमले की जिम्मेदारी ली। पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई करते हुए 16 बीएलए लड़ाकों को मार गिराया और 100 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बचाया। रात भर सेना और आतंकियों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें कुछ यात्री घायल हुए। सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा बंधकों को छुड़ा लिया, जिनमें 43 पुरुष, 26 महिलाएं और 11 बच्चे शामिल हैं। घायल यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:43:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Train Hijack, BLA, Balochistan, Terrorist attack</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>बलूचिस्तान में जाफ़र एक्सप्रेस पर आतंकी हमला, सेना ने 16 आतंकियों को मार गिराया</strong><br><br>बलूचिस्तान के बोलन जिले के नजदीक, क्वेटा से पेशावर जा रही एक यात्री ट्रेन पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया और उसे हाईजैक कर लिया। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। समा टीवी के अनुसार, अब तक 16 बीएलए लड़ाके मारे जा चुके हैं और 100 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।<br><br>मंगलवार को बलूचिस्तान के बोलन जिले में क्वेटा से पेशावर जा रही एक यात्री ट्रेन पर आतंकवादियों ने हमला किया और उसे हाईजैक कर लिया। पाकिस्तानी सेना ने यात्रियों को बचाने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। समा टीवी के मुताबिक, अब तक 16 बीएलए लड़ाके मारे गए हैं और 100 से अधिक यात्रियों को बचाया गया है।<br><br>समा टीवी के अनुसार, बीएलए के लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना के बीच रात से ही लगातार भारी गोलीबारी हो रही है, जिसमें कई यात्री घायल हुए हैं। रेडियो पाकिस्तान ने खबर दी है कि सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा बंधकों को छुड़ा लिया है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, बचाए गए लोगों में 43 पुरुष, 26 महिलाएं और 11 बच्चे शामिल हैं, और अभी भी गिनती जारी है।<br><br>रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों के ऑपरेशन के चलते आतंकवादी छोटे-छोटे समूहों में बंट गए हैं। घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया है, और अतिरिक्त सुरक्षा बल इलाके में ऑपरेशन में भाग ले रहे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच वार्ता, भारत की अहम भूमिका</title>
<link>https://pratinidhi.in/talks-underway-between-mauritius-and-uk-over-chagos-archipelago</link>
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<description><![CDATA[ मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच चागोस द्वीपसमूह को लेकर वार्ता चल रही है, जिसमें मॉरीशस अपनी संप्रभुता बहाल करने के लिए समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार करने पर जोर दे रहा है। विदेश मंत्री रामफल ने भारत और अमेरिका सहित सभी हितधारकों के सर्वोत्तम हित में एक निर्णायक समझौते की आवश्यकता पर बल दिया है। चागोस मुद्दे पर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच समझौते में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि दोनों देशों के हिंद महासागर में सुरक्षा के मामले में समान हित हैं। प्रधानमंत्री मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री रामगुलाम के बीच इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:39:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चागोस द्वीपसमूह, मॉरीशस, ब्रिटेन, भारत, धनंजय रामफल, डिएगो गार्सिया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच चागोस द्वीपसमूह को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मॉरीशस की नई सरकार इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता स्थापित करने के लिए समझौते की शर्तों पर फिर से विचार करने पर जोर दे रही है। मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफल का कहना है कि सरकार ऐसा समझौता चाहती है जो भारत और अमेरिका समेत सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद हो।<br><br>धनंजय रामफल ने कहा कि चागोस के स्थायी समाधान के लिए समझौता होना सभी देशों के हित में है। उन्होंने डिएगो गार्सिया में चल रहे सैन्य ठिकाने के संबंध में स्थिरता लाने की बात कही। इस समझौते पर शुरुआती बातचीत मॉरीशस में आम चुनावों से पहले हुई थी। रामफल ने कहा कि उनकी सरकार इस समझौते पर नए सिरे से विचार करना चाहती है क्योंकि वे चागोस पर अपनी संप्रभुता चाहते हैं।<br><br>रामफल ने कहा कि इस बातचीत में हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है, खासकर डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के संचालन को लेकर। उनके अनुसार, चागोस के मुद्दे पर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच समझौते में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में सुरक्षा के मामले में भारत और मॉरीशस के हित समान हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 मार्च को पोर्ट लुई में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ बातचीत करेंगे, जिसमें चागोस का मुद्दा भी उठ सकता है।<br><br>विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा था कि चागोस मुद्दे को संबंधित पक्षों के बीच सुलझा लिया जाएगा। रामफल ने मॉरीशस पर विदेशी प्रभाव की चिंताओं के बीच चीन के बारे में मॉरीशस के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मॉरीशस के आसपास कोई चीनी नौसैनिक अड्डा नहीं है और चीन आर्थिक और व्यापारिक मामलों में अधिक रुचि रखता है।<br><br>चागोस द्वीपसमूह 1968 में मॉरीशस की आजादी के बाद से विवाद का केंद्र रहा है, क्योंकि इस पर अब भी ब्रिटेन का नियंत्रण है। बाद में, ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया को अमेरिका को पट्टे पर दे दिया, जहाँ अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा बनाया है।<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीपसमूह में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने के भविष्य को लेकर मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच समझौते का समर्थन किया था। चागोस द्वीपसमूह हिंद महासागर में 60 से अधिक द्वीपों की सात श्रृंखलाएं हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>दुतेर्ते की गिरफ्तारी: अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का वारंट और फिलीपींस में राजनीतिक तनाव</title>
<link>https://pratinidhi.in/rodrigo-duterte-arrest-icc-warrant-political-tension-in-philippines</link>
<guid>https://pratinidhi.in/rodrigo-duterte-arrest-icc-warrant-political-tension-in-philippines</guid>
<description><![CDATA[ फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते को मनीला में गिरफ्तार किया गया, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) ने उनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में वारंट जारी किया था। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस के कार्यालय ने बताया कि दुतेर्ते को हांगकांग से आने के बाद हिरासत में लिया गया। आईसीसी दुतेर्ते के कार्यकाल में नशीली दवाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई में हुई हत्याओं की जांच कर रहा है। दुतेर्ते ने 2019 में रोम अधिनियम से फिलीपीन को अलग कर लिया था। मार्कोस जूनियर ने आईसीसी में फिर से शामिल नहीं होने का फैसला किया है, लेकिन कहा है कि अगर आईसीसी रेड नोटिस के माध्यम से दुतेर्ते को हिरासत में लेने के लिए कहता है तो वे सहयोग करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:39:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रोड्रिगो दुतेर्ते, फिलीपीन सरकार, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय, ICC, मानवता के विरुद्ध अपराध, फर्डिनेंड मार्कोस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मनीला:</strong> फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते को मनीला के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों के बाद की गई है।<br><br>राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस के कार्यालय ने बताया कि दुतेर्ते को हांगकांग से आने के बाद हिरासत में लिया गया। आईसीसी दुतेर्ते के कार्यकाल में नशीली दवाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई में हुई हत्याओं की जांच कर रहा है।<br><br>आईसीसी ने 1 नवंबर, 2011 से 16 मार्च, 2019 तक की घटनाओं की जांच शुरू की है, जब दुतेर्ते दावो शहर के मेयर थे। दुतेर्ते ने 2019 में रोम अधिनियम से फिलीपीन को अलग कर लिया था, जिसे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जवाबदेही से बचने का प्रयास बताया था।<br><br>जुलाई 2023 में, आईसीसी के न्यायाधीशों ने जांच को फिर से शुरू करने का फैसला सुनाया। आईसीसी उन मामलों में हस्तक्षेप करता है जहां देश जघन्य अपराधों पर मुकदमा चलाने में अनिच्छुक होते हैं।<br><br>मार्कोस जूनियर, जो 2022 में राष्ट्रपति बने, का दुतेर्ते के साथ राजनीतिक तनाव रहा है। मार्कोस ने आईसीसी में फिर से शामिल नहीं होने का फैसला किया है, लेकिन कहा है कि अगर आईसीसी रेड नोटिस के माध्यम से दुतेर्ते को हिरासत में लेने के लिए कहता है तो वे सहयोग करेंगे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तान के नहरों पर बवाल: बिलावल और जरदारी ने सरकार को घेरा</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-canal-projects-controversy-bilawal-bhutto-zardari-criticizes-government</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में &#039;स्वेज नहर&#039; कहे जाने वाली एक नहर परियोजना को लेकर विवाद बढ़ गया है, जिस पर बिलावल भुट्टो जरदारी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने चिंता जताई है। बिलावल ने शहबाज शरीफ सरकार पर सिंधु नदी नहर परियोजनाओं पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया, जिससे जनता को नुकसान होगा। उन्होंने जल वितरण नीतियों में सुधार की मांग की और कहा कि निर्णय सामूहिक सहमति से होने चाहिए। बिलावल ने खैबर-पख्तूनख्वा में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सरकार को घेरा और सुरक्षा बनाए रखने में प्रांतीय सरकार की विफलता की आलोचना की। उन्होंने अपने पिता की प्रशंसा करते हुए कहा कि पीपीपी नई नहरों के मुद्दे पर चिंता जताने वाली पहली पार्टी थी और सरकार से जल परियोजनाओं को पारदर्शिता और प्रांतीय सहमति से लागू करने का आग्रह किया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:39:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, बिलावल भुट्टो जरदारी, स्वेज नहर, आसिफ अली जरदारी, शहबाज शरीफ, सिंधु नदी, नहर परियोजना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान में एक नहर परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिसे 'स्वेज नहर' कहा जा रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस परियोजना पर चिंता व्यक्त की है। बिलावल भुट्टो ने शहबाज शरीफ सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सिंधु नदी पर बन रही नहर परियोजनाओं पर सरकार ने एकतरफा फैसले लिए हैं, जिससे जनता को नुकसान होगा।<br><br>बिलावल ने जल वितरण नीतियों में सुधार की मांग की और कहा कि ऐसे निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाने चाहिए, न कि किसी एक प्राधिकरण द्वारा। एक्सप्रेस न्यूज के अनुसार, बिलावल ने अपने पिता आसिफ अली जरदारी की चेतावनी को दोहराया, जिसमें उन्होंने सिंधु नदी से नहरों के निर्माण पर एकतरफा निर्णय लेने के खिलाफ सरकार को आगाह किया था। बिलावल ने कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवन रेखा है और इसके प्रबंधन से जुड़े किसी भी निर्णय में सभी प्रांतों की सलाह शामिल होनी चाहिए। जरदारी ने जल की कमी, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों के उचित वितरण को लेकर चिंता जताई है।<br><br>बिलावल ने खैबर-पख्तूनख्वा (के-पी) में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर भी सरकार को घेरा और चेतावनी दी कि अगर प्रांतीय सरकार कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो संघीय सरकार को हस्तक्षेप करना होगा। उन्होंने कहा कि पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सुरक्षा संकट पर मिलकर विचार करेंगे। बिलावल ने के-पी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रही है।<br><br>बिलावल ने अपने पिता की तारीफ करते हुए कहा कि जरदारी का संसद को संबोधित करना ऐतिहासिक था और उन्होंने अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन जैसे सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि पीपीपी नई नहरों के मुद्दे पर चिंता जताने वाली पहली पार्टी थी और उन्होंने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया। बिलावल ने सरकार से जरदारी की चिंताओं को सुनने और जल परियोजनाओं को पारदर्शिता और प्रांतीय सहमति से लागू करने का आग्रह किया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जाफर एक्सप्रेस हाईजैक: बलूच विद्रोहियों ने किया हमला, 20 सैनिक ढेर</title>
<link>https://pratinidhi.in/jaffar-express-hijacked-by-baloch-rebels-in-pakistan-20-soldiers-killed</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया, जिसमें 20 सैनिकों की हत्या हो गई। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 182 से अधिक यात्रियों को बंधक बनाने का दावा किया है। हमला गुदलार और पीरू कोनेरी इलाकों के बीच हुआ, जिसके बाद बलूचिस्तान सरकार ने आपातकालीन कदम उठाने के निर्देश दिए। बचाव दल और सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं, और स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल घोषित किया गया है। बीएलए ने पाकिस्तानी वायु सेना से लड़ने और बंधकों को मारने की धमकी भी दी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:35:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Baloch rebels, Jaffar Express, Pakistan, Train hijack, Balochistan Liberation Army</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान के बलूचिस्तान में <strong>जाफर एक्सप्रेस</strong> ट्रेन को बलूच विद्रोहियों ने हाईजैक कर लिया। इस घटना में <strong>20 सैनिकों की हत्या</strong> की गई है।

<strong>विद्रोहियों का दावा:</strong>
<ul>
 <li>उन्होंने 182 से अधिक यात्रियों को बंधक बनाया है।</li>
 <li>ट्रेन पर हमला गुदलार और पीरू कोनेरी इलाकों के बीच हुआ।</li>
 <li>बलूचिस्तान सरकार ने आपातकालीन कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।</li>
 <li>सुरक्षा बल और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं।</li>
 <li>स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल घोषित किया गया है।</li>
</ul>

बीएलए ने यह भी दावा किया कि उनके लड़ाके पाकिस्तानी वायु सेना से एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम के साथ लड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सेना ने कोई सैन्य कार्रवाई की तो सभी बंधकों को मार दिया जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन चालक के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि की है। पाकिस्तान के गृह मंत्री ने हमले की निंदा की है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप से तारीफ के बाद पाकिस्तान की किरकिरी, अमेरिका ने राजदूत को लौटाया</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-ambassador-denied-entry-into-usa</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की अमेरिका में किरकिरी हुई जब तुर्कमेनिस्तान के लिए उसके राजदूत को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिला और उन्हें लॉस एंजिलिस एयरपोर्ट से लौटा दिया गया। यह घटना तब हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले में लिप्त एक आतंकी की गिरफ्तारी में मदद के लिए पाकिस्तान की प्रशंसा की थी। वैध वीजा होने के बावजूद राजदूत केके वैगन को प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे राजनयिक प्रोटोकॉल को लेकर चिंताएं पैदा हो गईं। विदेश मंत्रालय ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:21:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, अमेरिका, राजदूत, डोनाल्ड ट्रंप, वीजा, निर्वासन, केके वैगन, काबुल, आतंकी, Turkmenistan</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[पाकिस्तान को अमेरिका में उस समय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब तुर्कमेनिस्तान में उसके राजदूत को अमेरिका में प्रवेश करने से रोक दिया गया और लॉस एंजिल्स हवाई अड्डे से वापस भेज दिया गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने काबुल हवाई अड्डे पर अगस्त 2021 के हमले में शामिल एक आतंकवादी को पकड़ने में मदद करने के लिए हाल ही में पाकिस्तान को धन्यवाद दिया था। हमले में 13 अमेरिकी सैनिक और 170 अफगान मारे गए।<br><br>स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तानी राजदूत को प्रवेश से वंचित कर दिया और उन्हें लॉस एंजिल्स से निर्वासित कर दिया। राजनयिक सूत्रों ने कहा कि राजदूत केके वैगन को अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने लॉस एंजिल्स हवाई अड्डे पर रोक दिया था, भले ही उनके पास वैध अमेरिकी वीजा और सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेज थे।<br><br>विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजदूत केके वैगन को आप्रवासन संबंधी आपत्तियों के कारण अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया था। उन्हें अपनी अंतिम प्रस्थान स्थिति पर लौटने के लिए मजबूर किया गया, जिससे राजनयिक प्रोटोकॉल और निर्णय के बारे में चिंताएं बढ़ गईं।<br><br>मंत्रालय ने पुष्टि की है कि राजदूत वैगन एक निजी यात्रा पर अमेरिका गए थे, और मामले की जांच चल रही है। सूत्रों ने पहले सुझाव दिया था कि अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने वैगन को विवादास्पद वीजा संदर्भों के लिए चिह्नित किया, जिसके कारण उन्हें तुरंत निर्वासित कर दिया गया। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के फैसले के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है। वैगन एक अनुभवी राजनयिक हैं और उनके पास पाकिस्तान के विदेश सेवा में एक लंबा करियर है.]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अफगानिस्तान पर भारत की नजर, तालिबान से बातचीत जारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/india-keeps-eye-on-afghanistan-situation-talks-with-taliban-continue</link>
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<description><![CDATA[ भारत ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि वह तालिबान सरकार के साथ कई मुद्दों पर बातचीत कर रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से दुबई में मुलाकात की। भारत, अफगानिस्तान के हालात पर नजर रखे हुए है और देश में शांति और स्थिरता लाने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग कर रहा है। भारत विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ मिलकर अफगान लोगों की मदद कर रहा है, जिनमें स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, खेल और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। 2021 से, भारत ने अफगानिस्तान में 27 टन राहत सामग्री भेजी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:21:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>अफगानिस्तान, भारत, तालिबान, संयुक्त राष्ट्र, UNSC, पर्वतनेनी हरीश, विक्रम मिसरी, आमिर खान मुत्तकी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अफगानिस्तान के हालात पर जताई चिंता</strong><br><br>भारत ने संयुक्त राष्ट्र को सूचित किया है कि वह अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान के कार्यकारी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से दुबई में मुलाकात की थी। भारत पहले से ही अफगानिस्तान की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है।<br><br><strong>भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर भारत का रुख</strong><br><br>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ उसके संबंध, वहां के लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित हैं। संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान असिस्टेंस मिशन की बैठक में पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी और आमिर खान मुत्तकी के बीच दुबई में हुई मुलाकात में क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा हुई। अफगानिस्तान ने भारतीय नेतृत्व की सराहना की और अफगानी लोगों को मदद करने के लिए धन्यवाद दिया। भारत निकट भविष्य में अफगानिस्तान में विकास परियोजनाएं शुरू करने और मानवीय सहायता कार्यक्रम चलाने पर विचार करेगा।<br><br><strong>अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए भारत तत्पर</strong><br><br>पी. हरीश ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते सदियों पुराने और खास हैं। भारत, अफगानिस्तान के हालात पर करीब से नजर रखे हुए है और देश में शांति और स्थिरता लाने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग कर रहा है। भारत स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, खेल और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ मिलकर अफगान लोगों की मदद कर रहा है। 2021 से, भारत ने अफगानिस्तान में 27 टन राहत सामग्री, 50 हजार टन गेहूं, 40 हजार लीटर कीटनाशक और 300 टन से ज्यादा दवाइयां व मेडिकल उपकरण भेजे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप ने खरीदी टेस्ला: मस्क की मदद, वामपंथियों पर निशाना</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलन मस्क के साथ मिलकर एक लाल रंग की टेस्ला कार खरीदी। मस्क ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को कार चुनने में मदद की। ट्रंप ने मस्क को &#039;महान व्यक्ति&#039; और &#039;देशभक्त&#039; बताया। ट्रंप ने कहा कि मस्क देश की मदद के लिए आगे आ रहे हैं, जबकि कुछ वामपंथी उनका विरोध कर रहे हैं। ट्रंप ने कार बिना किसी छूट के लगभग 80,000 डॉलर में खरीदी। ट्रंप ने मस्क की तारीफ करते हुए कहा कि मस्क को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:17:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, टेस्ला कार, एलन मस्क, अमेरिकी राष्ट्रपति, इलेक्ट्रिक वाहन, ह्वाइट हाउस, राजनीतिक एजेंडा, कट्टरपंथी वामपंथी दल, देशभक्त, इनोवेशन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलन मस्क के साथ मिलकर एक लाल रंग की टेस्ला कार खरीदी। एलन मस्क ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को कार चुनने में मदद की।<br><br>यह कार मस्क की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी के समर्थन में खरीदी गई। ट्रंप ने कहा कि मस्क देश की मदद के लिए आगे आ रहे हैं, जबकि कुछ वामपंथी उनका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मस्क को 'महान व्यक्ति' और 'देशभक्त' बताया।<br><br>मॉडल एक्स की ड्राइवर सीट पर बैठते हुए ट्रंप ने कहा, 'वाह, यह खूबसूरत है।' मस्क ने मजाक में कहा कि सीक्रेट सर्विस को दिल का दौरा पड़ सकता है, क्योंकि यह कार कुछ सेकंड में 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है।<br><br>ट्रंप ने कार का टेस्ट नहीं किया, लेकिन कहा कि वे इसे व्हाइट हाउस में छोड़ देंगे ताकि उनके कर्मचारी इसे चला सकें। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने कार बिना किसी छूट के लगभग 80,000 डॉलर में खरीदी। उन्होंने कहा कि मस्क उन्हें छूट दे सकते थे, लेकिन वे नहीं चाहते थे कि लोग कहें कि उन्हें लाभ मिला।<br><br>टेस्ला खरीदने के बाद ट्रंप ने मस्क की तारीफ करते हुए कहा कि मस्क को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, वह गलत है। उन्होंने कहा कि यह कदम उनके समर्थन का संकेत है और मस्क ने अमेरिका में इनोवेशन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जेडी वेंस और पत्नी उषा वेंस का भारत दौरा: द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगा बढ़ावा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मार्च के अंत में भारत दौरे पर आ सकते हैं। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा होगी, साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बात हो सकती है। वेंस की पत्नी उषा वेंस भी उनके साथ होंगी, जिनके माता-पिता भारतीय मूल के हैं। यह यात्रा कूटनीतिक और व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दोनों देशों के संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा। फरवरी में, वेंस और पीएम मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा के लिए भारत को अमेरिकी समर्थन पर चर्चा की थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:13:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>जेडी वेंस, उषा वेंस, भारत यात्रा, अमेरिका-भारत संबंध, रूस-यूक्रेन युद्ध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जल्द ही भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। संभावना है कि वह मार्च के अंतिम सप्ताह में भारत पहुंचेंगे। इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर विचार किया जाएगा, साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर भी चर्चा हो सकती है। <br><br>यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए सक्रिय हैं। वेंस की इस यात्रा का कूटनीतिक और व्यक्तिगत महत्व है, क्योंकि यह अमेरिका-भारत संबंधों को और भी प्रगाढ़ करने का अवसर प्रदान करेगी। <br><br>उषा वेंस, जिनके माता-पिता भारतीय मूल के हैं, उनके साथ आने से इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और विश्वास को दर्शाती है। हाल के वर्षों में, अमेरिका और भारत के संबंध मजबूत हुए हैं, खासकर व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्र में। दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।<br><br>फरवरी में, जेडी वेंस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में मुलाकात की थी, जहाँ उन्होंने स्वच्छ और विश्वसनीय परमाणु प्रौद्योगिकी के साथ भारत के ऊर्जा विविधीकरण के लिए अमेरिकी समर्थन पर चर्चा की थी।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मॉरीशस का सर्वोच्च सम्मान पीएम मोदी को</title>
<link>https://pratinidhi.in/mauritius-announces-highest-award-to-narendra-modi</link>
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<description><![CDATA[ मॉरीशस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा की है। मॉरीशस के पीएम नवीनचंद्र रामगुलाम ने यह घोषणा की। पीएम मोदी को &#039;द ग्रांड कमांडर ऑफ ऑर्डर ऑफ स्टार एंड की ऑफ इंडियन ओशन&#039; से सम्मानित किया जाएगा, जो भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को दर्शाता है। उन्हें कुवैत, बारबाडोस, गुयाना, डोमिनिका, नाइजीरिया, रूस, भूटान, ग्रीस, फ्रांस, मिस्र, पापुआ न्यू गिनी, अमेरिका, बहरीन, यूएई, मालदीव, फिलिस्तीन, अफगानिस्तान और सऊदी अरब से भी सम्मानित किया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:13:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Narendra Modi, Mauritius, Awards, International Awards</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[मॉरीशस ने पीएम नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा की है। इससे पहले, पीएम मोदी ने मॉरीशस के पीएम नवीन रामगुलाम और उनकी पत्नी को ओसीआई कार्ड सौंपकर सद्भावना का परिचय दिया था। यह घोषणा मॉरीशस के पीएम नवीनचंद्र रामगुलाम ने की है। पीएम मोदी को 'द ग्रांड कमांडर ऑफ ऑर्डर ऑफ स्टार एंड की ऑफ इंडियन ओशन' से सम्मानित किया जाएगा। मोदी पहले भारतीय हैं जिन्हें यह सम्मान मिलेगा, और वे ऐसे पांचवें विदेशी नागरिक हैं। यह सम्मान भारत और मॉरीशस के बीच मजबूत संबंधों के प्रति उनके योगदान को दर्शाता है।<br><br>पीएम मोदी को अन्य देशों से भी कई सम्मान मिले हैं। दिसंबर 2024 में उन्हें कुवैत के सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर' से नवाजा गया। 2024 में ही उन्हें बारबाडोस के 'मानद ऑर्डर ऑफ फ्रीडम' से सम्मानित किया गया। गुयाना ने उन्हें 'ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस' दिया, जबकि डोमिनिका ने 'डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया। नाइजीरिया ने उन्हें 'ग्रैंड कमांडर ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द नाइजर' से सम्मानित किया।<br><br>रूस ने पीएम मोदी को 'ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू' से सम्मानित किया, और भूटान ने 'ऑर्डर ऑफ़ द ड्रुक ग्यालपो' से सम्मानित करने का फैसला किया है। ग्रीस ने उन्हें 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ ऑनर' से सम्मानित किया, जबकि फ्रांस ने 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर' से सम्मानित करने का फैसला किया है। मिस्र ने उन्हें 'ऑर्डर ऑफ द नाइल' से सम्मानित किया, और पापुआ न्यू गिनी ने 'ऑर्डर ऑफ लोगोहू के ग्रैंड कम्पैनियन' से सम्मानित किया। अमेरिका ने उन्हें 'लीजन ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया। बहरीन ने 'किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां', यूएई ने 'ऑर्डर ऑफ जायद', मालदीव ने 'निशान इज्जुद्दीन का शासन', फिलिस्तीन ने 'फिलिस्तीन राज्य का ग्रैंड कॉलर', अफगानिस्तान ने 'अमीर अमानुल्लाह खान पुरस्कार', और सऊदी अरब ने 'किंग अब्दुलअज़ीज़ सैश' से सम्मानित किया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रेन हाईजैक: बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना को दी धमकी, 214 बंधक खतरे में</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान में, बलूच लिबरेशन आर्मी ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया, जिसमें 214 लोग बंधक हैं। पाकिस्तानी सेना का बचाव अभियान विफल रहा। BLA ने कैदियों की रिहाई के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, ऐसा न करने पर हर घंटे 5 बंधकों को मारने की धमकी दी है। सेना के बचाव के दावे का खंडन करते हुए, BLA का कहना है कि अधिकांश बंधक सैनिक हैं, और वे किसी भी आक्रामकता पर बंधकों को मार देंगे। BLA ने बंधकों के बदले राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:13:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, बलूचिस्तान, ट्रेन हाईजैक, बंधक, बलूच लिबरेशन आर्मी, पाकिस्तानी सेना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>क्वेटा:</strong> पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के विद्रोहियों ने यात्रियों से भरी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया है। 18 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पाकिस्तानी सेना अभी तक ट्रेन में सवार लोगों को BLA के कब्जे से छुड़ाने में सफल नहीं हो पाई है।
<br><br>
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन में 400 से अधिक यात्री थे। यह घटना तब हुई जब ट्रेन बलूचिस्तान के इलाके में एक टनल से गुजर रही थी, तभी बलूच विद्रोहियों ने हमला कर ट्रेन को अपने नियंत्रण में ले लिया। वर्तमान में, 214 लोगों को बलूच विद्रोहियों ने बंधक बना रखा है।
<br><br>
ट्रेन हाईजैक होने के बाद, पाकिस्तानी सेना ने बंधकों को छुड़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया। रेडियो पाकिस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 104 बंधकों को चरमपंथियों से छुड़ा लिया है, जिनमें 58 पुरुष, 31 महिलाएं और 15 बच्चे शामिल हैं। यह भी दावा किया गया है कि इस दौरान 16 बलूच चरमपंथी मारे गए।
<br><br>
हालांकि, बलूच लिबरेशन आर्मी ने एक बयान जारी कर पाकिस्तानी सेना के बंधकों को छुड़ाने के दावों का खंडन किया है, इसे पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा करार दिया है। BLA ने कहा कि उन्होंने महिलाओं और बच्चों को रिहा कर दिया है क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हैं। समूह ने पाकिस्तानी सेना के अभियान की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने इसे विफल कर दिया है, और उनके सभी लड़ाके सुरक्षित हैं। BLA ने यह भी दावा किया कि बंधकों में अब ज्यादातर पाकिस्तानी सुरक्षा बल के जवान हैं।
<br><br>
BLA ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि इससे पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना बंधकों के बारे में किसी भी गंभीर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने धमकी दी कि यदि पाकिस्तानी सेना ने कोई भी आक्रामक कार्रवाई की या एक भी गोली चलाई, तो वे 10 बंधक सैनिकों को मार देंगे।
<br><br>
बलूच लिबरेशन आर्मी ने बंधकों के बदले बलूच राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की है और इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समूह ने कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे समय सीमा समाप्त होने के बाद हर घंटे 5 बंधकों को मार देंगे, और यह सिलसिला अंत तक जारी रहेगा। बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, समूह के पास वर्तमान में 214 बंधक हैं।]]> </content:encoded>
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<title>यूक्रेन युद्धविराम के लिए तैयार, ट्रंप ने गेंद पुतिन के पाले में डाली</title>
<link>https://pratinidhi.in/ukraine-ready-to-accept-immediate-30-days-ceasefire-with-russia-us-donald-trump-put-ball-in-putin-court</link>
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<description><![CDATA[ सऊदी अरब में एक बैठक के बाद यूक्रेन रूस के साथ 30 दिनों के युद्धविराम के लिए सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले का स्वागत किया है और पुतिन से भी सहमत होने का आग्रह किया है। अमेरिका रूस के सामने प्रस्ताव पेश करेगा, जिसमें बातचीत को युद्ध समाप्त करने का एकमात्र तरीका बताया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:13:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन, रूस, युद्धविराम, डोनाल्ड ट्रंप, पुतिन, जेद्दा, वार्ता, युद्ध, अमेरिका, सऊदी अरब</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[सऊदी अरब के जेद्दा शहर में अमेरिकी और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच आठ घंटे की बैठक के बाद, यूक्रेन रूस के साथ 30 दिनों के युद्धविराम के लिए सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि अब पुतिन को जवाब देना है। ट्रम्प ने दोनों पक्षों के हताहतों को रोकने के लिए युद्धविराम तक पहुंचने के महत्व पर जोर दिया। इस समझौते से पहले, कीव ने मास्को पर एक ड्रोन हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप हताहत हुए और घायल हुए। जवाब में, रूस ने ओडेसा पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की। अमेरिका अब युद्धविराम प्रस्ताव को रूस के सामने पेश करेगा, जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन बातचीत के लिए तैयार है। मार्को रुबियो ने जोर देकर कहा कि युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका बातचीत है।<br><br><b>यूक्रेन तत्काल 30 दिनों के युद्धविराम के लिए तैयार</b><br><br>अमेरिका के साथ जेद्दा में बातचीत के दौरान यूक्रेन ने दी सहमति<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के फैसले का किया स्वागत]]> </content:encoded>
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<title>ट्रेन में बंधक: बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला</title>
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<description><![CDATA[ बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान में क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला किया, जिसमें 100 से अधिक यात्रियों को बंधक बनाया गया। यह घटना क्वेटा से 125 किमी दूर बोलन स्टेशन के पास हुई। मुठभेड़ में छह पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, और ट्रेन का लोको पायलट घायल हो गया। BLA ने हमले की जिम्मेदारी ली और सेना को बंधकों को मारने की धमकी दी अगर कोई सैन्य कार्रवाई की गई। BLA ने दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया, लेकिन हवाई हमले जारी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हवाई बमबारी न रोकी गई तो बंधकों को मार दिया जाएगा। बंधकों में पाकिस्तानी सैनिक भी शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 18:19:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बलूच लिबरेशन आर्मी, जाफर एक्सप्रेस, पाकिस्तान, बंधक, आतंकी हमला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बड़ा हमला करते हुए क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाया। इस हमले में, BLA ने ट्रेन में सवार 100 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रेन के 9 कोचों में लगभग 450 यात्री थे, और यह घटना क्वेटा से लगभग 125 किमी दूर बोलन स्टेशन के पास हुई।<br><br>मीडिया सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ में पाकिस्तानी सेना के छह जवान भी मारे गए हैं, और आतंकियों की गोलीबारी में ट्रेन का लोको पायलट भी घायल हुआ है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने सुरक्षा बलों सहित ट्रेन में मौजूद लोगों को बंधक बना लिया है।<br><br>BLA ने पाकिस्तानी सेना को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने कोई सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो वे बंधकों को मार देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हवाई हमले नहीं रोके गए तो भी वे सभी बंधकों को मार देंगे। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में, BLA ने दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया है, लेकिन हवाई हमले अभी भी जारी हैं। भारी हमले के बाद पाकिस्तानी सेना पीछे हटने पर मजबूर हो गई है, लेकिन अब हेलीकॉप्टर और ड्रोन से जवाबी हमले कर रही है। BLA ने सेना को चेतावनी दी है कि अगर हवाई बमबारी तुरंत नहीं रोकी गई, तो वे अगले एक घंटे में सभी बंधकों को मार देंगे।<br><br>खबरों के मुताबिक, बंधकों में कई पाकिस्तानी सैनिक भी शामिल हैं। BLA के मजीद ब्रिगेड, एसटीओएस, फतेह स्क्वाड और जिराब यूनिट के लड़ाके पाकिस्तानी सेना का मुकाबला कर रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के पास अभी भी हवाई हमलों को रोकने और अपने लोगों को बचाने का अवसर है, अन्यथा सभी की मौत के लिए वे जिम्मेदार होंगे।]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप के टैरिफ पर भारत का पलटवार: वाणिज्य सचिव ने किया अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का खंडन</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-tariff-claim-rejected-by-india-commerce-secretary-clarifies</link>
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<description><![CDATA[ वाणिज्य सचिव सुनील बरथवाल ने संसदीय पैनल को बताया कि भारत ने अमेरिका से टैरिफ में कटौती का कोई वादा नहीं किया है। ट्रंप ने दावा किया था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स कम करेगा, लेकिन बरथवाल ने स्पष्ट किया कि कोई प्रतिबद्धता नहीं दी गई। भारत मुक्त व्यापार का समर्थक है और अपने हितों की रक्षा करेगा। ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको पर 25% और चीन पर 10-20% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसकी डेडलाइन उन्होंने एक महीने बढ़ाई है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 16:00:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Tariff, India, US, Commerce Secretary, Sunil Barthwal</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, जागरण डेस्क।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी दावों को भारत ने खारिज कर दिया है। वाणिज्य सचिव सुनील बरथवाल ने संसदीय पैनल को बताया कि भारत ने अमेरिका से टैरिफ में कटौती का कोई वादा नहीं किया है।<br><br>ट्रंप ने दावा किया था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स कम करेगा, लेकिन बरथवाल ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, पर कोई प्रतिबद्धता नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत मुक्त व्यापार का समर्थक है और अपने हितों की रक्षा करेगा।<br><br>ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको पर 25% और चीन पर 10-20% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसकी डेडलाइन उन्होंने एक महीने बढ़ाई है। बरथवाल का यह बयान ट्रंप के दावों को सीधे तौर पर नकारता है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>&amp;apos;मैं टेस्ला कार खरीद रहा हूं क्योंकि...&amp;apos; Elon Musk के काम से क्यों गदगद हो उठे राष्ट्रपति ट्रंप?</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-to-buy-tesla-car-amid-elon-musk-protests</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेस्ला कार खरीदने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि एलन मस्क देश के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, लेकिन कुछ वामपंथी टेस्ला का बायकॉट कर रहे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मस्क शानदार काम कर रहे हैं और कट्टरपंथी वामपंथी उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। ट्रंप ने सरकारी फिजूलखर्ची रोकने के लिए DOGE की स्थापना की है, जिसके मुखिया मस्क हैं। इस बीच, अमेरिका में मस्क के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 15:26:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Tesla Car, Elon Musk, बायकाट, DOGE</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेस्ला कार खरीदने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि एलन मस्क हमारे देश के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, लेकिन कुछ वामपंथी उनकी कंपनी का बहिष्कार कर रहे हैं ताकि उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सके। ट्रंप ने मस्क के समर्थन में टेस्ला खरीदने का फैसला किया है।<br><br>ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा कि एलन मस्क राष्ट्र की मदद के लिए शानदार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी वामपंथी टेस्ला का बहिष्कार कर रहे हैं ताकि मस्क को नुकसान पहुंचाया जा सके। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने 2024 के चुनाव में उन्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।<br><br>राष्ट्रपति ट्रंप ने सरकारी एजेंसियों की फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) की स्थापना की है, जिसका मुखिया एलन मस्क को बनाया गया है। DOGE के अधिकारी ट्रंप सरकार को सरकारी पैसों की फिजूलखर्ची रोकने के बारे में सलाह देते हैं।<br><br>इस बीच, अमेरिका में एलन मस्क के विरोध में हजारों लोग उतर आए हैं। उदारवादी समूह छंटनी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। टेस्ला के खिलाफ 'बर्न ए टेस्ला: सेव डेमोक्रेसी' नामक एक अभियान भी चलाया जा रहा है। हाल ही में न्यूयॉर्क शहर में टेस्ला के बाहर प्रदर्शन के दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।]]> </content:encoded>
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<title>जेलेंस्की ने ट्रंप से मांगी माफी: व्हाइट हाउस विवाद पर तोड़ी चुप्पी</title>
<link>https://pratinidhi.in/zelensky-apologizes-to-trump-for-white-house-spat</link>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वॉइट हाउस में हुई बैठक के दौरान हुए विवाद के लिए पत्र लिखकर माफी मांगी है। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने इस बात की पुष्टि की है। जेलेंस्की ने ओवल ऑफिस में हुई घटना के लिए माफी मांगी है, जिसे विटकॉफ ने एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। ट्रंप ने भी जेलेंस्की के पत्र का जिक्र किया और कहा कि वह इसकी सराहना करते हैं। जेलेंस्की ने विवाद को अफसोसजनक बताया और शांति की बात कही। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 13:03:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>जेलेंस्की, ट्रंप, व्हाइट हाउस, यूक्रेन, अमेरिका, माफी, विवाद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वॉशिंगटन:</strong> यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर वॉइट हाउस में हुई एक घटना के लिए माफी मांगी है। <br><br>ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि जेलेंस्की ने राष्ट्रपति को पत्र भेजा और ओवल ऑफिस में हुई घटना के लिए माफी मांगी। विटकॉफ ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।<br><br>ट्रंप ने भी जेलेंस्की के पत्र का जिक्र किया था और कहा था कि वह इसकी सराहना करते हैं। यह पत्र अमेरिकी सैन्य सहायता रोकने के कुछ दिनों बाद भेजा गया था। विटकॉफ ने इसे 'प्रगति' के तौर पर देखा है।<br><br>जेलेंस्की ने इस विवाद को अफसोसजनक बताया और कहा कि वह अमेरिका के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। इन घटनाक्रमों के बीच जेलेंस्की और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो युद्धविराम वार्ता पर चर्चा के लिए सऊदी अरब पहुंचे।<br><br>मंगलवार को यूक्रेनी अधिकारी और अमेरिकी टीम के बीच बातचीत होने वाली है। जेलेंस्की ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन केवल शांति चाहता है और युद्ध जारी रहने का एकमात्र कारण रूस है।<br><br>जेलेंस्की ने अमेरिकी सैन्य सहायता को रोके जाने के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि वह इसे हल करने की उम्मीद करते हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अगर सऊदी बैठक के नतीजे संतोषजनक रहे तो यूक्रेन को सैन्य सहायता फिर शुरू हो सकती है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस मिसाइल पर दिया बयान, चीन का &amp;apos;दुश्मन&amp;apos; बोला</title>
<link>https://pratinidhi.in/indonesia-statement-on-brahmos-missile-deal-with-india</link>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की अटकलों पर पहली बार बयान दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। वियतनाम के रक्षा मंत्री के साथ मीटिंग के बाद ब्रह्मोस और अन्य मिसाइल सिस्टम्स पर विचार किया जा रहा है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने 2023 में कहा था कि जकार्ता के साथ 200 से 350 मिलियन डॉलर की डील पर बातचीत चल रही है। इंडोनेशिया, ब्रह्मोस के कोस्टल और युद्धपोत वर्जन में इंटरेस्ट दिखा रहा है। कई देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल में इंटरेस्ट दिखाया है और फिलीपींस को मिसाइलों की डिलीवरी भी हो चुकी है। भारत ने फिलीपींस को 290 किलोमीटर रेंज वाली ब्रह्मोस दी है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:33:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ब्रह्मोस मिसाइल, इंडोनेशिया, रक्षा मंत्रालय, भारत, रूस, फिलीपींस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>जकार्ता:</strong> इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की अटकलों पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने अभी तक ब्रह्मोस एयरोस्पेस से मिसाइलें खरीदने का कोई फैसला नहीं किया है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता फ्रेगा वेनास ने बताया कि वियतनाम के रक्षा मंत्री के साथ मीटिंग के बाद ब्रह्मोस के साथ-साथ अन्य मिसाइल सिस्टम्स पर भी विचार किया जा रहा है, लेकिन उन्होंने दूसरी कंपनियों के नाम नहीं बताए।<br><br><strong>ब्रह्मोस पर इंडोनेशिया का विचार:</strong><br>साल 2023 में, ब्रह्मोस एयरोस्पेस, जो भारत और रूस की जॉइंट वेंचर है, ने कहा था कि जकार्ता के साथ 200 से 350 मिलियन डॉलर की डील पर बातचीत चल रही है। वेनास ने कहा कि अभी यह मामला विचाराधीन है और जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, वे कोई आधिकारिक बयान नहीं दे सकते।<br><br><strong>कई देशों की ब्रह्मोस में दिलचस्पी:</strong><br>इंडोनेशिया, ब्रह्मोस के कोस्टल वर्जन और युद्धपोतों पर लगने वाले वर्जन को खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। साउथ-ईस्ट एशिया और मिडिल ईस्ट के कई देशों ने भी ब्रह्मोस मिसाइल में इंटरेस्ट दिखाया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने 2022 में फिलीपींस के साथ पहला विदेशी समझौता किया था। फिलीपींस को मिसाइलों की डिलीवरी भी हो चुकी है। माना जा रहा है कि फिलीपींस ने इन मिसाइलों को साउथ चाइना सी में तैनात किया है, जिससे चीनी युद्धपोतों को निशाना बनाया जा सके। भारत ने फिलीपींस को जो ब्रह्मोस दी है, उसकी रेंज 290 किलोमीटर है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष में रिकॉर्ड, 62 घंटे स्पेसवॉक और 900 घंटे रिसर्च!</title>
<link>https://pratinidhi.in/sunita-williams-spending-time-in-space-records-spacewalk-research</link>
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<description><![CDATA[ सुनीता विलियम्स, भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री, जून से अंतरिक्ष में फंसी हैं, लेकिन अगले हफ्ते धरती पर लौटने वाली हैं। उन्होंने तीन अंतरिक्ष मिशनों में 600 से ज्यादा दिन बिताए हैं, और 62 घंटे से अधिक स्पेसवॉक किया है। अंतरिक्ष में, उन्होंने 900 घंटे से ज्यादा समय रिसर्च में बिताया, बोइंग स्टारलाइनर को उड़ाने में मदद की, आईएसएस में कई चीजों को बदला, और अंतरिक्ष में पौधों की बागवानी में मदद की। उनके साथ बैरी विल्मोर भी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:33:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सुनीता विलियम्स, अंतरिक्ष, स्पेसवॉक, रिसर्च, अंतरिक्ष मिशन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष में फंसी, फिर भी रच रहीं रिकॉर्ड</strong><br><br>भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पिछले साल जून से अंतरिक्ष में हैं और अगले हफ्ते धरती पर लौटने वाली हैं। उनके पृथ्वी पर लौटने में देरी हुई है, लेकिन इस दौरान उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए हैं। सुनीता ने तीन अंतरिक्ष मिशनों में 600 से ज्यादा दिन बिताए हैं।<br><br><strong>900 घंटे से ज्यादा रिसर्च</strong><br><br>सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में 900 घंटे से ज्यादा समय रिसर्च में बिताया है। उन्होंने बोइंग स्टारलाइनर को उड़ाने में मदद की, जो नासा को 4.2 अरब डॉलर में पड़ा। उन्होंने आईएसएस में कई चीजों को बदला, सफाई की और कचरा वापस भेजने में मदद की। सुनीता विलियम्स के साथ बैरी विल्मोर भी अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं। दोनों पिछले साल 5 जून को बोइंग के स्टारलाइनर से अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे।<br><br><strong>अंतरिक्ष में बागवानी</strong><br><br>सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में पौधों की बागवानी में मदद की और जल पुनर्प्राप्ति तकनीक पर भी काम किया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत के विरुद्ध चीन: पाकिस्तान और बांग्लादेश का इस्तेमाल, एक गुप्त रणनीति</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-secret-strategy-against-india-using-pakistan-bangladesh</link>
<guid>https://pratinidhi.in/china-secret-strategy-against-india-using-pakistan-bangladesh</guid>
<description><![CDATA[ चीन, बांग्लादेश को साधने की कोशिश कर रहा है और पाकिस्तान को मोहरा बना रहा है। भारत के खिलाफ चीन गहरी चाल चल रहा है, जिसमें MSS और ISI क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को बदल रहे हैं। चीन-पाकिस्तान का गठबंधन रणनीतिक साझेदारी में बदल गया है, जिससे चीन बांग्लादेश पर प्रभाव बढ़ा रहा है। चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश मिलकर भारत के खिलाफ खतरनाक जोड़ी बन रहे हैं। चीन म्यांमार सीमा पर भी भारत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है और मालदीव के सहारे हिंद महासागर में भी। अमेरिका भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को खतरा मानता है, क्योंकि चीन के खुफिया अभियान बांग्लादेश में फैल रहे हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश के लिए लॉन्चिंग पैड बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:27:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चीन, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, गुप्त युद्ध, कूटनीति, सीमा सुरक्षा, भू-राजनीति, आर्थिक प्रभाव, सैन्य रणनीति, अंतर्राष्ट्रीय संबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[चीन आजकल बांग्लादेश को अपने नियंत्रण में करने की कोशिश कर रहा है, जिसके लिए उसने पाकिस्तान को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया है। चीन जानता है कि सीधे बांग्लादेश में हस्तक्षेप करने से स्थिति उसके खिलाफ हो सकती है। इसलिए, वह पाकिस्तान को आगे करके अपनी योजनाओं को पूरा कर रहा है।

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भारत के विरोध में, चीन एक गहरी चाल चल रहा है। यदि यह सफल होता है, तो भारत को एक साथ तीन सीमाओं पर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। चीन का खुफिया नेटवर्क, जिसमें राज्य सुरक्षा मंत्रालय (MSS) और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) शामिल हैं, इस क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को बदल रहा है। चीन और पाकिस्तान का यह सहयोग अब एक रणनीतिक साझेदारी में बदल गया है। इसलिए, चीन पाकिस्तान की मदद से बांग्लादेश पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इस प्रकार, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश तीनों मिलकर भारत के खिलाफ एक खतरनाक गठबंधन बना रहे हैं।

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भारत की सीमाएं चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश तीनों से जुड़ी हुई हैं। इसलिए, सीमा पर थोड़ी सी भी अशांति होने पर भारत को एक साथ तीन मोर्चों पर उलझना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, चीन अब इतना शक्तिशाली हो गया है कि वह म्यांमार की सीमा पर भी भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसके अतिरिक्त, वह मालदीव के माध्यम से दक्षिण में हिंद महासागर में भी भारत की समस्याओं को बढ़ा सकता है। यह सब कुछ न केवल भारत के लिए, बल्कि अमेरिका के लिए भी संभालना मुश्किल हो सकता है।

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अमेरिका के अधिकारी भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को वैश्विक राजनीति में सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। चीन के खुफिया अभियान अब पाकिस्तान से आगे बढ़कर बांग्लादेश में फैल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन गतिविधियों को देखते हुए भारत को सतर्क और सक्रिय रहना चाहिए ताकि इस सुरक्षा चुनौती का सामना किया जा सके। ये खतरे केवल जमीनी सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि समुद्र में भी दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में, पाकिस्तान भारत में नशीली दवाओं की तस्करी का सबसे बड़ा स्रोत है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान में अवैध हथियारों की आपूर्ति के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

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चीन ने बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान को एक लॉन्चिंग पैड बना दिया है। चीन जानता है कि यदि वह सीधे बांग्लादेश में हस्तक्षेप करता है, तो इसका विरोध होगा, जिसका फायदा भारत उठाएगा। इसलिए, वह पाकिस्तान के माध्यम से बांग्लादेश को अपने नियंत्रण में करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेता वर्तमान में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ सीधे संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि इसके पीछे चीन की रणनीति काम कर रही है, जिसके तहत वह बांग्लादेश को अपने प्रभाव में लेकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है।]]> </content:encoded>
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<title>ट्रंप की परमाणु चेतावनी: विश्व विनाश का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियारों के खतरे को पर्यावरण से बड़ा बताया है। उन्होंने जेलेंस्की को एहसान फरामोश कहते हुए बाइडन पर अमेरिकी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन युद्ध नहीं होता और न ही इजरायल पर हमास का हमला होता। उन्होंने इन सबके लिए बाइडन की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:27:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, nuclear weapons, Volodymyr Zelensky, Ukraine war, Joe Biden</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>न्यूयॉर्क, एएनआई।</strong> अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियारों के खतरे को लेकर दुनिया को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि यह खतरा पर्यावरण में हो रहे बदलाव से कहीं ज्यादा बड़ा है।<br><br>ट्रंप ने 'संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स' के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि परमाणु हथियारों का खतरा किसी भी अन्य खतरे से ज्यादा विनाशकारी है। उन्होंने पर्यावरण की बात करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि वे परमाणु हथियारों के खतरे को अनदेखा कर रहे हैं।<br><br>यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए ट्रंप ने जेलेंस्की को एहसान फरामोश बताया और कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को 350 अरब डॉलर की मदद दी, जबकि यूरोपीय देशों ने सिर्फ 100 अरब डॉलर दिए। उन्होंने बाइडन के शासनकाल में अमेरिकी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।<br><br>ट्रंप ने यूक्रेन के साथ खनिज सौदे पर कहा कि उन्हें लगता है कि सौदा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन युद्ध नहीं होता, न ही इजरायल पर हमास का हमला होता और न ही अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी अपमानजनक तरीके से होती। उन्होंने इन सबके लिए बाइडन की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।]]> </content:encoded>
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<title>उत्तरी सागर में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज की टक्कर</title>
<link>https://pratinidhi.in/oil-tanker-and-cargo-ship-collide-in-north-sea-in-north-sea-many-casualties-reported-and-vessels-on-fire</link>
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<description><![CDATA[ उत्तरी सागर में ब्रिटेन के पास तेल टैंकर और मालवाहक जहाज की टक्कर में 36 लोग घायल हो गए। टक्कर के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई, जिसके बाद तटरक्षक बल ने कई लोगों को बचाया। दुर्घटना की जांच जारी है। यह घटना उत्तरी इंग्लैंड के तट के नजदीक हुई, जिसमें 36 लोग घायल हो गए। घायलों को बंदरगाह पायलट नौका से लाया गया, जबकि कुछ चालक दल के सदस्य अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान में जीवनरक्षक नौकाएं, हेलीकॉप्टर और अग्निशमन जहाजों को शामिल किया गया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:27:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>तेल टैंकर, मालवाहक जहाज, टक्कर, घायल, उत्तरी सागर, ब्रिटेन, आग, बचाव अभियान, जांच, समुद्री एवं तटरक्षक एजेंसी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ब्रिटेन के उत्तरी सागर में एक तेल टैंकर और मालवाहक जहाज की टक्कर हो गई, जिसमें 36 लोग घायल हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों जहाजों में आग लग गई। तटरक्षक बल ने तत्परता दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाई और अब इस दुर्घटना की जांच चल रही है।<br><br>ब्रिटेन के ग्रिम्सबी ईस्ट बंदरगाह के प्रमुख ने बताया कि उत्तरी इंग्लैंड के तट के पास उत्तरी सागर में सोमवार को एक तेल टैंकर और मालवाहक जहाज आपस में टकरा गए, जिससे 36 लोग घायल हो गए। ब्रिटिश आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, टक्कर के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाना पड़ा।<br><br>ग्रिम्सबी ईस्ट बंदरगाह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्टिन बॉयर्स ने जानकारी दी कि घायलों को बंदरगाह पायलट नौका द्वारा लाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि चालक दल के कुछ सदस्य अभी भी लापता हैं। ब्रिटेन की समुद्री और तटरक्षक एजेंसी ने बताया कि कई जीवनरक्षक नौकाएं, एक तटरक्षक बचाव हेलीकॉप्टर, एक तटरक्षक विमान और अग्निशमन क्षमता वाले नजदीकी जहाजों को घटनास्थल पर भेजा गया है।<br><br>आरएनएलआई लाइफ बोट एजेंसी के अनुसार, टक्कर के बाद कई लोगों ने जहाज छोड़ दिया और दोनों जहाजों में आग लग गई। एजेंसी ने यह भी बताया कि तीन जीवनरक्षक नौकाएं तटरक्षक बल के साथ मिलकर घटनास्थल पर खोज और बचाव कार्य में जुटी हैं।<br><br>जहाजों पर नजर रखने वाली वेबसाइट वेसल फाइंडर के मुताबिक, माना जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त टैंकर अमेरिकी ध्वज वाला रसायन और तेल उत्पाद वाहक एम.वी. स्टेना इमैक्युलेट है, जो घटना के समय लंगर डाले हुए था। मालवाहक जहाज की पहचान 'सोलोंग' के रूप में हुई है, जो स्कॉटलैंड के ग्रेंजमाउथ से नीदरलैंड के रॉटरडैम जा रहा था।<br><br>तटरक्षकों ने बताया कि ग्रीनविच मानक समय के अनुसार सुबह 9:48 बजे (भारतीय समयानुसार दोपहर 3:18 बजे) आपातकालीन संदेश प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि टक्कर लंदन से लगभग 250 किलोमीटर उत्तर में हल तट के पास हुई।]]> </content:encoded>
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<title>जर्मनी में हड़ताल से विमान सेवाएं प्रभावित, यात्री परेशान</title>
<link>https://pratinidhi.in/germany-airport-strike-causes-flight-cancellations</link>
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<description><![CDATA[ जर्मनी में हवाईअड्डा कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विमान सेवाएं बाधित हुई हैं। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जर्मनी के 13 हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर 1116 में से 1054 उड़ानें रद्द कर दी गईं। फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख और अन्य हवाई अड्डों पर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सोमवार को उड़ानें रद्द रहीं। बर्लिन और हैम्बर्ग हवाई अड्डों पर भी उड़ानों पर असर पड़ा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:27:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>जर्मनी, हड़ताल, एयरपोर्ट, उड़ानें, कर्मचारी, वेतन, फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[जर्मनी में हवाईअड्डा कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उड़ानें रद्द हो गई हैं। कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से जर्मनी के 13 मुख्य एयरपोर्ट्स पर उड़ानों को कैंसिल करना पड़ा है। ये कर्मचारी वेतन में बढ़ोत्तरी की मांग कर रहे हैं, जिनमें ग्राउंड स्टाफ, पायलट और केबिन क्रू शामिल हैं। फ्रैंकफर्ट हवाईअड्डे पर 1116 में से 1054 उड़ानें रद्द कर दी गईं। <br><br> फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख समेत जर्मनी के 13 हवाई अड्डों पर कर्मचारियों ने हड़ताल की, जिसके चलते उड़ानों को रद्द करना पड़ा। हवाई अड्डों पर काम करने वाले कर्मचारियों ने 24 घंटे की हड़ताल की घोषणा की थी। <br><br> जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार, फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर 1,116 उड़ानों में से 1,054 रद्द कर दी गईं। बर्लिन हवाई अड्डे से सभी प्रस्थान और आगमन रद्द कर दिए गए हैं, जबकि हैम्बर्ग हवाई अड्डे से कोई उड़ान नहीं भरी जाएगी। कोलोन/बान हवाई अड्डे पर सोमवार को कोई यात्री सेवा नहीं होगी और म्यूनिख हवाई अड्डे ने उड़ानों में कमी की घोषणा की है।]]> </content:encoded>
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<title>नेपाल में योगी आदित्यनाथ के पोस्टर से बवाल</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल की राजधानी काठमांडू में पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के स्वागत में आयोजित राजशाही समर्थक रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें दिखाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। रैली का उद्देश्य नेपाल में राजशाही की बहाली के लिए समर्थन प्रदर्शित करना था। ज्ञानेंद्र की तस्वीर के साथ योगी आदित्यनाथ की तस्वीर दिखाए जाने की विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ इंटरनेट मीडिया पर आम जनता ने भी कड़ी आलोचना की। आरपीपी प्रवक्ता ज्ञानेंद्र शाही ने आरोप लगाया कि आदित्यनाथ की तस्वीर का प्रदर्शन केपी ओली के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राजशाही समर्थक आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:27:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, योगी आदित्यनाथ, राजशाही, रैली, ज्ञानेंद्र शाह, केपी ओली, राजनीतिक विवाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, काठमांडू, पोस्टर, विरोध, राजनीतिक दल, इंटरनेट मीडिया, आलोचना</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>काठमांडू, पीटीआई।</strong> नेपाल की राजधानी में पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के स्वागत में आयोजित एक राजशाही समर्थक रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें दिखाए जाने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया है।

देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों का दौरा करने के बाद ज्ञानेंद्र शाह (77 वर्ष) रविवार को पोखरा से सिमरिक एयर हेलीकॉप्टर में सवार होकर त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। वहां, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों समर्थकों ने उनके समर्थन में नारे लगाए।

रैली का मुख्य उद्देश्य नेपाल में राजशाही की पुनर्स्थापना के लिए समर्थन जताना था। हवाई अड्डे के बाहर, सड़क के दोनों ओर ज्ञानेंद्र की तस्वीर और राष्ट्रीय ध्वज लिए मोटरसाइकिलों पर सवार होकर सैकड़ों समर्थकों ने उनका स्वागत किया। कुछ समर्थकों ने ज्ञानेंद्र की तस्वीर के साथ योगी आदित्यनाथ की तस्वीर भी प्रदर्शित की।

हालांकि, ज्ञानेंद्र की तस्वीर के साथ भाजपा नेता योगी आदित्यनाथ की तस्वीर दिखाए जाने पर विभिन्न राजनीतिक दलों और आम जनता ने कड़ी आपत्ति जताई। इस आलोचना के बाद, आरपीपी प्रवक्ता ज्ञानेंद्र शाही ने आरोप लगाया कि आदित्यनाथ की तस्वीर का प्रदर्शन केपी ओली के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राजशाही समर्थक आंदोलन को बदनाम करने का एक सोचा-समझा प्रयास था।

शाही ने ओली सरकार पर इस कार्य को घुसपैठ के माध्यम से अंजाम देने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि प्रधानमंत्री केपी ओली के मुख्य सलाहकार बिष्णु रिमल के निर्देश पर और ओली की सलाह पर रैली में योगी आदित्यनाथ की तस्वीर प्रदर्शित की गई। हालांकि, रिमल ने इन आरोपों का खंडन किया।]]> </content:encoded>
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<title>कुर्स्क में रूसी सेना का दबदबा, यूक्रेन पीछे हटा</title>
<link>https://pratinidhi.in/russian-forces-advance-in-kursk-ukrainian-army-retreats-amidst-ceasefire-talks</link>
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<description><![CDATA[ रूसी सेना कु‌र्स्क में आगे बढ़ रही है, जिससे यूक्रेनी सेना को पीछे हटना पड़ रहा है। रूसी कमांडो ने कु‌र्स्क इलाके में गैस पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचकर हमला किया, जिसके बाद रूसी सुरक्षा बलों ने वहां मौजूद यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया। जेलेंस्की ने इस स्थिति पर यूक्रेनी सेना के सर्वोच्च कमांडर जनरल से बात की है। रूसी सेना ने बाद में 800 वर्ग किलोमीटर भूमि मुक्त करवा ली थी। फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 से ज्यादा देशों के सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय शांति सेना के गठन पर विचार करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:25:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, यूक्रेन, कुर्स्क, जेलेंस्की, ट्रंप, युद्धविराम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव में, रूसी सेना कु‌र्स्क में आगे बढ़ रही है, जिससे यूक्रेनी सेना को पीछे हटना पड़ रहा है। यह स्थिति रूसी कमांडो यूनिट द्वारा रविवार को किए गए हमले के बाद बनी है।</p><br><p>रूसी कमांडो ने कु‌र्स्क इलाके में गैस पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचकर हमला किया, जिसके बाद रूसी सुरक्षा बलों ने वहां मौजूद यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया। घिरे हुए सैनिकों पर रूसी वायुसेना हवाई हमले कर रही है।</p><br><p>यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस स्थिति पर यूक्रेनी सेना के सर्वोच्च कमांडर जनरल से बात की है। यूक्रेनी सेना ने अगस्त 2024 में कु‌र्स्क पर कब्जा किया था, लेकिन रूसी सेना ने बाद में 800 वर्ग किलोमीटर भूमि मुक्त करवा ली थी।</p><br><p>ताजा कार्रवाई में, रूसी सुरक्षा बलों ने कु‌र्स्क में तीन प्रमुख ठिकाने मुक्त करवा लिए हैं, जिससे यूक्रेनी सेना अब कुछ सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सिमटकर रह गई है।</p><br><p>यह घटनाक्रम उस समय हो रहा है जब यूक्रेन के विदेश मंत्री सऊदी अरब में युद्धविराम पर वार्ता के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलने वाले हैं।</p><br><p>इसके अलावा, यूक्रेन में युद्धविराम की संभावना के बीच, फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 से ज्यादा देशों के सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय शांति सेना के गठन पर विचार करेंगे।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>असद के वफादारों के खिलाफ सीरिया में सैन्य अभियान खत्म करने का एलान</title>
<link>https://pratinidhi.in/end-of-military-operation-against-assad-loyalists-in-syria-after-killing-of-1130-people</link>
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<description><![CDATA[ सीरिया में अंतरिम सरकार ने असद के वफादारों के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने का एलान किया है। यह फैसला अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के खिलाफ हिंसा के बाद लिया गया है। संघर्ष में 1,130 लोग मारे गए, जिनमें 830 नागरिक शामिल हैं। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने का संकल्प लिया और जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की घोषणा की। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल हसन अब्देल-गनी ने असद के वफादारों को चेतावनी दी है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 09:23:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सीरिया, असद, अलावी समुदाय, अहमद अल-शरा, अंतरिम सरकार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>दमिश्क:</strong> सीरिया में, अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के बाद, अंतरिम सरकार के सुरक्षा बलों और अपदस्थ राष्ट्रपति बशर असद के समर्थकों के बीच संघर्ष में 1,130 लोगों की जान गई है, जिनमें 830 आम नागरिक हैं। ब्रिटेन स्थित युद्ध निगरानी संस्था सीरियन आब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने यह जानकारी दी है।
<br><br>
सीरिया की अंतरिम सरकार ने असद के वफादारों के खिलाफ सैन्य अभियान की समाप्ति की घोषणा की है। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का वादा किया है। उन्होंने झड़पों और हत्याओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने की बात कही है।
<br><br>
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल हसन अब्देल-गनी ने असद के वफादारों को चेतावनी दी है कि यदि वे लौटते हैं, तो उन्हें उन लोगों का सामना करना पड़ेगा जो पीछे हटना नहीं जानते और जिनके हाथ निर्दोषों के खून से रंगे हैं, उन पर दया नहीं करेंगे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कनाडा के नए पीएम: मार्क कार्नी</title>
<link>https://pratinidhi.in/mark-carney-new-prime-minister-of-canada-liberal-party-leader</link>
<guid>https://pratinidhi.in/mark-carney-new-prime-minister-of-canada-liberal-party-leader</guid>
<description><![CDATA[ कनाडा की लिबरल पार्टी ने मार्क कार्नी को नया नेता चुना है, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना बढ़ गई है। अर्थशास्त्री के रूप में पहचाने जाने वाले कार्नी के सामने अर्थव्यवस्था को सुधारने, महंगाई और बेरोजगारी से निपटने, और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने जैसी चुनौतियां होंगी। उनका पीएम बनना कनाडा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 13:09:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>मार्क कार्नी, कनाडा, जस्टिन ट्रूडो, लिबरल पार्टी, प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[कनाडा की लिबरल पार्टी ने मार्क कार्नी को अपना नया नेता चुना है, जिससे वह कनाडा के अगले प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं। <br><br>मार्क कार्नी की पहचान राजनीतिज्ञ के तौर पर नहीं है, बल्कि वह एक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने विश्व की प्रतिष्ठित हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की है। <br><br>कनाडा के अगले प्रधानमंत्री के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाना होगा। महामारी के बाद कनाडा की अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई है, और बढ़ती महंगाई तथा बेरोजगारी भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। <br><br>इसके अतिरिक्त, कार्नी को अमेरिका के साथ संबंधों को भी संभालना होगा, क्योंकि अमेरिका का कनाडा के प्रति रुख सख्त रहा है। ऐसे में, कार्नी का प्रधानमंत्री बनना कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सीरिया में खूनी तांडव: असद समर्थकों पर हमला, महिलाओं के साथ क्रूरता</title>
<link>https://pratinidhi.in/syria-bloody-violence-assad-supporters-attacked-women-cruelty</link>
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<description><![CDATA[ सीरिया में अंतरिम सरकार और असद समर्थकों के बीच भीषण हिंसा में 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अलावियों पर अत्याचार की खबरें हैं, महिलाओं को नग्न घुमाया गया और सामूहिक हत्याएं हुई हैं। लताकिया में बिजली-पानी बंद है। SOHR के अनुसार, 745+ नागरिक मारे गए। सरकार असद समर्थकों को दोषी मानती है, जो रूस में शरण लिए है। 2011 से जारी गृहयुद्ध में लाखों लोग हताहत और विस्थापित हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 13:09:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सीरिया, असद, हिंसा, अलावी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[सीरिया में भीषण हिंसा जारी है, जिसमें अब तक 1000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाली सरकार के सुरक्षाबलों (HTS) ने असद समर्थकों, विशेषकर अलावी समुदाय के लोगों पर भारी हमले किए हैं।<br><br>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिलाओं को नग्न करके सड़कों पर घुमाया गया और फिर गोली मार दी गई। यहां तक कि एक लड़के को अपने ही परिवार को मारने के लिए मजबूर किया गया। ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (SOHR) के अनुसार, इन हमलों में 745 से अधिक आम नागरिक मारे गए हैं।<br><br>लताकिया शहर के आसपास बिजली और पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। बानियास के एक निवासी ने बताया कि सुरक्षाबलों ने लोगों को सड़कों पर लाकर गोली मार दी। मृतकों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।<br><br>नई सरकार ने इन हमलों के लिए असद के वफादारों को दोषी ठहराया है, जबकि असद रूस में शरण लिए हुए हैं। सीरिया में 2011 से गृहयुद्ध चल रहा है, जिसमें लाखों लोग मारे गए और विस्थापित हुए हैं।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>व्हाइट हाउस के पास बंदूक लहरा रहा था शख्स, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने मारी गोली</title>
<link>https://pratinidhi.in/man-waving-gun-near-white-house-american-secret-service-shot-him</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में व्हाइट हाउस के पास एक व्यक्ति को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने गोली मार दी। यह घटना 9 मार्च की रात लगभग 12 बजे हुई। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व्हाइट हाउस में मौजूद नहीं थे, वे फ्लोरिडा में थे। शनिवार को एजेंटों को इंडियाना से वाशिंगटन की यात्रा करने वाले एक संदिग्ध के बारे में चेतावनी दी गई थी। सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने संदिग्ध के वाहन का पता लगाया और उसे पैदल चलते हुए पाया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 08:03:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>White House, सीक्रेट सर्विस, गोलीबारी, डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका से एक चौंकाने वाली खबर आई है। व्हाइट हाउस के नजदीक, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को गोली मार दी। यह घटना 9 मार्च को रात लगभग 12 बजे हुई, और उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व्हाइट हाउस में उपस्थित नहीं थे, वे फ्लोरिडा में थे।</p><br><p>यह घटना व्हाइट हाउस से लगभग एक ब्लॉक दूर आइजनहावर कार्यकारी कार्यालय भवन के पश्चिमी भाग में हुई। शनिवार को, स्थानीय पुलिस ने एजेंटों को इंडियाना से वाशिंगटन की यात्रा करने वाले एक संभावित आत्मघाती हमलावर के बारे में सूचित किया था। इसके बाद, सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने 17वीं और एफ स्ट्रीट, एनडब्ल्यू के पास संदिग्ध के वाहन का पता लगाया और उस व्यक्ति को पैदल चलते हुए पाया, जिसकी जानकारी पहले से दी गई थी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;ये समझौते मुझे पसंद नही&amp;apos;: ट्रंप ने अमेरिका&amp;कनाडा सीमा पर फिर से विचार करने के संकेत दिए</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-hints-at-reconsidering-the-demarcation-of-the-us-canada-border</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव जारी है। ट्रंप ने अमेरिका-कनाडा सीमा के सीमांकन पर पुनर्विचार करने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्हें दोनों देशों के बीच सीमा संधि पर विश्वास नहीं है और वे सीमा को संशोधित करना चाहते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने फरवरी की शुरुआत में ट्रूडो को फोन करके कहा था कि उन्हें दोनों देशों के बीच साझा जल समझौते पसंद नहीं हैं। ट्रूडो ने कहा कि ट्रंप कनाडा की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त होते देखना चाहते हैं, ताकि अमेरिका के लिए कनाडा को अपने साथ मिलाना आसान हो जाए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:57:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ट्रंप, अमेरिका, कनाडा, सीमा, संधि, टैरिफ, जस्टिन ट्रूडो, सीमांकन, पुनर्विचार, समझौते, व्यापार, सैन्य सहयोग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव जारी है। इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-कनाडा सीमा के सीमांकन पर पुनर्विचार करने के संकेत दिए हैं।<br><br>ट्रंप ने कहा कि उन्हें दोनों देशों के बीच सीमा संधि पर विश्वास नहीं है और वे सीमा को संशोधित करना चाहते हैं। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ बातचीत में यह मुद्दा उठाया।<br><br>न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने फरवरी की शुरुआत में ट्रूडो को फोन करके कहा था कि उन्हें दोनों देशों के बीच साझा जल समझौते पसंद नहीं हैं।<br><br>ट्रूडो ने हाल ही में कहा था कि ट्रंप कनाडा की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त होते देखना चाहते हैं, ताकि अमेरिका के लिए कनाडा को अपने साथ मिलाना आसान हो जाए।<br><br>3 फरवरी को वाशिंगटन और ओटावा के बीच हुई बातचीत में ट्रंप ने कनाडा के संरक्षित डेयरी क्षेत्र और कनाडा में व्यापार करने में अमेरिकी बैंकों के सामने आने वाली कठिनाइयों जैसे मुद्दों पर भी अपनी शिकायतें रखीं।<br><br>ट्रंप ने जिस सीमा संधि का उल्लेख किया, वह 1908 में हुई थी। उन्होंने झीलों और नदियों के बंटवारे पर फिर से विचार करने का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह कनाडा को फाइव आइज नामक खुफिया-साझाकरण समूह से भी बाहर करना चाहते थे।<br><br>इसके अतिरिक्त, ट्रंप दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग की भी समीक्षा कर रहे हैं।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>व्हाइट हाउस पर हमला: सीक्रेट सर्विस ने किया हमलावर को ढेर</title>
<link>https://pratinidhi.in/secret-service-shoots-armed-man-near-white-house-attempted-breach</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने व्हाइट हाउस के पास एक हथियारबंद व्यक्ति को गोली मार दी, जब उसने हथियार लेकर व्हाइट हाउस में घुसने की कोशिश की। स्थानीय पुलिस ने सीक्रेट सर्विस को एक &#039;आत्मघाती हमलावर&#039; की सूचना दी थी, जो इंडियाना से वाशिंगटन डीसी की यात्रा कर रहा था। सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने हथियार निकाल लिया, जिसके बाद उसे गोली मार दी गई। घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया है, और घटना की जांच मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग द्वारा की जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:57:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Secret Service, White House, shooting, armed man, आत्मघाती हमलावर, वॉशिंगटन, डोनाल्ड ट्रंप, इंडियाना, बन्दूक</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[व्हाइट हाउस के पास एक 'आत्मघाती हमलावर' घुसने की कोशिश कर रहा था, जिसे सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने गोली मार दी।<br><br>अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने व्हाइट हाउस के नजदीक एक हथियारबंद व्यक्ति को गोली मार दी। यह घटना तब हुई जब वह व्यक्ति हथियार लेकर व्हाइट हाउस में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था। सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन उसने हथियार निकाल लिया, जिसके परिणामस्वरूप उसे गोली मार दी गई। उस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस समय व्हाइट हाउस में मौजूद नहीं थे।<br><br>स्थानीय पुलिस ने सीक्रेट सर्विस को सूचित किया था कि एक संदिग्ध 'आत्मघाती हमलावर' इंडियाना से वाशिंगटन डीसी की यात्रा कर रहा है। सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने 17वीं और एफ स्ट्रीट, एनडब्ल्यू के पास उस व्यक्ति के वाहन को देखा और उसकी पहचान की। जब एजेंटों ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने हथियार निकाल लिया, जिसके बाद उसे गोली मार दी गई।<br><br>सीक्रेट सर्विस के प्रवक्ता एंथनी गुइग्लिल्मी ने बताया कि घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया है, लेकिन उसकी हालत के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे ही अधिकारियों ने उससे संपर्क किया, उसने बंदूक लहराई, जिसके कारण गोलीबारी हुई। इस घटना में कोई भी सीक्रेट सर्विस कर्मी घायल नहीं हुआ है, और मामले की जांच मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग द्वारा की जा रही है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूक्रेन युद्ध: एलन मस्क ने की सीजफायर की अपील, रूस का पक्ष लेने के आरोपों को नकारा</title>
<link>https://pratinidhi.in/ukraine-war-elon-musk-appeals-for-ceasefire</link>
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<description><![CDATA[ एलन मस्क ने रूस और यूक्रेन के बीच तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि अगर स्टारलिंक सेवा बंद कर दी जाती है, तो यूक्रेन का फ्रंटलाइन तबाह हो जाएगा। मस्क ने रूस का पक्ष लेने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह यूक्रेन में हो रहे नरसंहार को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सेना स्टारलिंक पर बहुत अधिक निर्भर है, और इसे बंद करने से यूक्रेन को रूस से हारने में देर नहीं लगेगी। मस्क और ट्रंप दोनों ही युद्धविराम का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि मस्क रूस का समर्थन कर रहे हैं। मस्क ने धनी यूक्रेनी व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने का भी सुझाव दिया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:50:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Elon Musk, Russia, Ukraine, War, सीजफायर, यूक्रेन, एलन मस्क, रूस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[एलन मस्क ने यूक्रेन और रूस के बीच तत्काल युद्धविराम का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर स्टारलिंक सेवा बंद कर दी जाती है, तो यूक्रेन का फ्रंटलाइन पूरी तरह से तबाह हो जाएगा। मस्क ने यह भी स्पष्ट किया कि वह रूस का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि यूक्रेन में हो रही मानवीय क्षति को रोकना चाहते हैं।<br><br>टेस्ला और स्टारलिंक के सीईओ एलन मस्क ने उन आरोपों का खंडन किया है कि वह रूस का पक्ष ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सेना स्टारलिंक सैटेलाइट सिस्टम पर बहुत अधिक निर्भर है, और यदि इसे बंद किया गया तो यह देश के लिए विनाशकारी होगा। मस्क ने कहा कि अगर स्टारलिंक ने यूक्रेन में काम करना बंद कर दिया, तो यूक्रेन को रूस से हारने में देर नहीं लगेगी। मस्क और ट्रंप दोनों ही रूस-यूक्रेन के बीच युद्धविराम का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि मस्क रूस का समर्थन कर रहे हैं।<br><br>एक्स पर एक यूजर को जवाब देते हुए मस्क ने लिखा कि उन्होंने यूक्रेन पर पुतिन को आमने-सामने की लड़ाई के लिए चुनौती दी थी, और उनका स्टारलिंक सिस्टम यूक्रेनी सेना की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि अगर वह इसे बंद कर देते हैं, तो उनकी पूरी अग्रिम पंक्ति ध्वस्त हो जाएगी। मस्क ने रूस-यूक्रेन युद्ध की आलोचना करते हुए कहा कि वह वर्षों से चल रहे नरसंहार से परेशान हैं, जिसमें यूक्रेन अनिवार्य रूप से हार जाएगा। उन्होंने कहा कि जो कोई भी वास्तव में परवाह करता है, वह इस स्थिति को समाप्त करना चाहेगा और तत्काल शांति का समर्थन करेगा।<br><br>मस्क के इस सुझाव के बाद एक नई बहस शुरू हो गई है कि यूक्रेन के सबसे धनी व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने से युद्ध को समाप्त करने में मदद मिल सकती है, खासकर उन लोगों पर जिनकी मोनाको में आलीशान संपत्तियां हैं। उन्होंने पोस्ट किया, "यही पहेली की कुंजी है।"<br><br>एक यूजर ने भ्रष्टाचार को लक्षित करने के बारे में सहमति व्यक्त की, लेकिन मस्क पर संघर्ष में रूस की भूमिका को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। यूजर ने लिखा कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, लेकिन मस्क को यह दिखावा करना बंद कर देना चाहिए कि पुतिन हमलावर नहीं हैं। यूजर ने कहा कि यूक्रेन पीड़ित है, और मस्क को केवल यूक्रेन की आलोचना करने के बजाय पुतिन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।<br><br>मस्क की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सैन्य सहायता पर रोक लगा दी है, जिससे युद्ध के मैदान में कीव की स्थिति और भी अनिश्चित हो गई है। ट्रंप ने दावा किया है कि अगर उन्हें मौका मिले तो वे रूस और यूक्रेन के बीच एक त्वरित शांति समझौता करा सकते हैं, हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि वे ऐसा समझौता कैसे करेंगे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा को इजरायल की बिजली कटौती: रमजान में अंधेरे में डूबे फिलिस्तीनी</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-stops-electricity-supply-to-gaza-eli-cohen-announces</link>
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<description><![CDATA[ इजरायल ने गाजा को बिजली की आपूर्ति बंद करने की घोषणा की है। ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने कहा कि यह कदम हमास पर बंधकों को रिहा करने का दबाव बनाने के लिए उठाया गया है। गाजा में पहले से ही वस्तुओं की आपूर्ति बंद है और अब बिजली कटौती से स्थिति और खराब हो सकती है, खासकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों के लिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:50:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>इजरायल, गाजा, बिजली, हमास, फिलिस्तीन, ऊर्जा मंत्री, एली कोहेन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने घोषणा की है कि इजरायल गाजा को तत्काल बिजली की आपूर्ति बंद कर देगा।</strong><br><br>इस फैसले का उद्देश्य हमास पर दबाव बनाना है ताकि इजरायल के बंधकों को छुड़ाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमास युद्ध के बाद गाजा में सत्ता में न रहे। <br><br>यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब इजरायल ने पहले ही गाजा में सभी प्रकार की वस्तुओं की आपूर्ति बंद कर दी है। गाजा में बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर और सौर पैनलों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस कदम से क्षेत्र के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित हो सकते हैं, जिन्हें पीने के पानी के उत्पादन के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। <br><br>ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने गाजा को बिजली की आपूर्ति रोकने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, इजरायल की योजना है कि हमास पर दबाव बनाने के लिए गाजा में माल और आपूर्ति के प्रवेश को रोका जाए, जिसके बाद बिजली और पानी बंद कर दिया जाए।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेपाल में राजशाही की वापसी: ज्ञानेंद्र काठमांडू में, समर्थकों का भव्य स्वागत</title>
<link>https://pratinidhi.in/return-of-monarchy-in-nepal-gyanendra-shah-welcomed-in-kathmandu</link>
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<description><![CDATA[ काठमांडू में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के आगमन पर राजशाही समर्थकों ने रैलियां कीं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेताओं ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया, जहां समर्थकों ने &#039;हमें अपना राजा वापस चाहिए&#039; जैसे नारे लगाए। ज्ञानेंद्र शाह धार्मिक यात्राओं के बाद काठमांडू लौटे थे। सुरक्षा बलों ने नारायणहिती पैलेस संग्रहालय की सुरक्षा बढ़ा दी थी। समर्थक 2008 में समाप्त हुई राजशाही को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भी सोशल मीडिया पर ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में ट्वीट किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:50:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, ज्ञानेंद्र शाह, राजशाही, काठमांडू, राजनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>काठमांडू में राजशाही समर्थकों का प्रदर्शन: ज्ञानेंद्र शाह का भव्य स्वागत</strong><br><br>रविवार को, नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के काठमांडू आगमन पर राजशाही समर्थकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) और अन्य समर्थक संगठनों ने रैलियां कीं। पार्टी अध्यक्ष राजेंद्र लिंगडेन और कमल थापा ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।<br><br><strong>समर्थन में नारे और तख्तियां</strong><br><br>हवाई अड्डे पर, समर्थकों ने 'हमें अपना राजा वापस चाहिए' जैसे नारे लगाए। ज्ञानेंद्र शाह (77) देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक यात्राओं के बाद काठमांडू लौटे थे। सड़कों पर, समर्थकों ने उनकी तस्वीरों और झंडों के साथ मोटरसाइकिल रैलियां कीं।<br><br><strong>सुरक्षा व्यवस्था</strong><br><br>सुरक्षा बलों ने नारायणहिती पैलेस संग्रहालय की सुरक्षा बढ़ा दी थी। अफवाह थी कि ज्ञानेंद्र शाह वहां प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन भीड़ निर्मल निवास की ओर चली गई।<br><br><strong>देशव्यापी रैलियां</strong><br><br>समर्थक 2008 में समाप्त हुई राजशाही को बहाल करने की मांग कर रहे हैं और देश भर में रैलियां कर रहे हैं।<br><br><strong>मनीषा कोइराला का समर्थन</strong><br><br>अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भी सोशल मीडिया पर ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में ट्वीट किया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रूडो युग समाप्त, मार्क कार्नी बने कनाडा के नए प्रधानमंत्री</title>
<link>https://pratinidhi.in/mark-carney-becomes-new-prime-minister-of-canada-after-justin-trudeau-steps-down</link>
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<description><![CDATA[ कनाडा को नया प्रधानमंत्री मिल गया है। मार्क कार्नी, जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे, कार्नी एक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और उन्होंने दो बड़े देशों में गवर्नर के पद पर काम किया है। कनाडा के पीएम पद की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे था। उन्हें 2007 में कनाडा का गवर्नर बनाया गया था। ट्रूडो ने लिबरल पार्टी के नेता का पद छोड़ दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह लिबरल पार्टी के नेता के रूप में उसी उम्मीद और मेहनत के साथ विदा ले रहे हैं, जैसे उन्होंने शुरुआत की थी। ट्रूडो ने जनवरी में ही पार्टी से नया प्रधानमंत्री चुनने को कहा था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:50:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>मार्क कार्नी, जस्टिन ट्रूडो, कनाडा, प्रधानमंत्री, लिबरल पार्टी, भारत, अर्थशास्त्री, गवर्नर, बैंक ऑफ इंग्लैंड, बैंक ऑफ कनाडा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[कनाडा को नया प्रधानमंत्री मिल गया है। मार्क कार्नी, जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे। कार्नी एक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और उन्होंने दो बड़े देशों में गवर्नर के पद पर काम किया है।<br><br>कनाडा के पीएम पद की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे था। उन्हें 2007 में कनाडा का गवर्नर बनाया गया था। ट्रूडो ने लिबरल पार्टी के नेता का पद छोड़ दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह लिबरल पार्टी के नेता के रूप में उसी उम्मीद और मेहनत के साथ विदा ले रहे हैं, जैसे उन्होंने शुरुआत की थी।<br><br>उन्होंने आगे लिखा कि इस पार्टी और देश के लिए बहुत उम्मीदें हैं, क्योंकि लाखों कनाडाई हर दिन साबित करते हैं कि बेहतर हमेशा मुमकिन है। ट्रूडो ने जनवरी में ही पार्टी से नया प्रधानमंत्री चुनने को कहा था।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप की चेतावनी के बाद हमास के रुख में नरमी</title>
<link>https://pratinidhi.in/gaza-hostage-deal-possible-after-trump-warning-hamas-talks</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और हमास के बीच चल रही बातचीत के बाद कुछ ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद हमास के भी तेवर नरम पड़ गए हैं, और अब अमेरिका भी पहली बार हमास से सीधी बातचीत कर रहा है। हमास के राजनीतिक सलाहकार ताहेर अल-नोनो ने अमेरिकी दूत एडम बोहेलर से वार्ता होने की पुष्टि की है। बोहेलर ने भी हमास के अधिकारियों के साथ वार्ता होने की पुष्टि की है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:47:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>हमास, ट्रंप, बंधक, इजरायल, अमेरिका, युद्धविराम</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा में युद्धविराम जारी रखने को लेकर आज वार्ता, ट्रंप की चेतावनी के बाद हमास के रुख में नरमी</strong><br/><br/>अमेरिका और हमास के बीच चल रही बातचीत के बाद कुछ ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद हमास के भी तेवर नरम पड़ गए हैं, और अब अमेरिका भी पहली बार हमास से सीधी बातचीत कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि हमास बंधकों की रिहाई के लिए तैयार हो सकता है।<br/><br/>रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बंधकों की रिहाई को लेकर हमास को चेतावनी देने के बाद, फलस्तीनी संगठन अमेरिकी बंधक की रिहाई को लेकर वार्ता कर रहा है। हमास के राजनीतिक सलाहकार ताहेर अल-नोनो ने अमेरिकी दूत एडम बोहेलर से वार्ता होने की पुष्टि की है।<br/><br/>नोनो ने कहा कि दोहरी नागरिकता वाले बंधकों की रिहाई को लेकर हमारा रुख सकारात्मक है, और उसी के लिए हमारी वार्ता चल रही है। बोहेलर ने भी हमास के अधिकारियों के साथ वार्ता होने की पुष्टि की है। विदित हो कि अमेरिका ने हमास को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है, और यह अमेरिका और हमास के बीच पहली सीधी वार्ता है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चीन का रक्षा बजट: संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए 249 अरब डॉलर</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-defends-249-billion-dollar-defense-budget-amid-sovereignty-concerns</link>
<guid>https://pratinidhi.in/china-defends-249-billion-dollar-defense-budget-amid-sovereignty-concerns</guid>
<description><![CDATA[ चीन ने 2025 के राष्ट्रीय बजट में रक्षा खर्च के लिए 1,810 अरब युआन आवंटित किए, जो 2024 से 7.2% अधिक है। चीन ने अपने 249 अरब डॉलर के बजट को सही ठहराते हुए कहा कि उसे संप्रभुता की रक्षा में चुनौती है, और इस राशि का उपयोग सेना के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा। प्रधानमंत्री ली क्विंग ने घोषणा की कि इस वर्ष का रक्षा व्यय लगभग 249 अरब डॉलर है। प्रवक्ता वू कियान ने कहा कि सेना को संप्रभुता की रक्षा में कठिनाई हो रही है। चीन का रक्षा बजट अमेरिका के बाद सबसे अधिक है, और भारत के रक्षा बजट से तीन गुना ज्यादा है, जिससे भारत चिंतित है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 07:47:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चीन, रक्षा बजट, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, आधुनिकीकरण, भारत</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[चीन ने 2025 के राष्ट्रीय आम सार्वजनिक बजट में रक्षा खर्च के लिए 1,810 अरब युआन आवंटित किए हैं। <b>इससे रक्षा बजट में 2024 की तुलना में 7.2% की वृद्धि हुई है।</b><br><br> इसमें केंद्र सरकार का व्यय 1,780 अरब युआन है, जो 2024 से 7.2% अधिक है। <br><br>चीन ने 249 अरब डॉलर के रक्षा बजट को सही ठहराया और कहा कि उसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। <b>बढ़ी हुई राशि का उपयोग सेना के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा।</b><br><br> प्रधानमंत्री ली क्विंग ने संसद में घोषणा की कि इस वर्ष का रक्षा व्यय लगभग 249 अरब अमेरिकी डॉलर है। <br><br>रक्षा प्रवक्ता वू कियान ने कहा कि चीनी सेना को राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। <br><br>पिछले साल चीन ने रक्षा बजट 7.2% बढ़ाकर लगभग 232 अरब डॉलर किया था, जो अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे अधिक है। अमेरिका का प्रस्तावित रक्षा खर्च 890 अरब डॉलर से अधिक है। <br><br>चीन अमेरिकी रक्षा बजट का हवाला देता है, लेकिन उसका बढ़ता रक्षा खर्च पड़ोसियों, खासकर भारत पर दबाव डाल रहा है। चीन का रक्षा खर्च भारत के 78.8 अरब डॉलर से तीन गुना ज्यादा है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है। चीन और भारत के बीच सीमा पर दशकों पुराना विवाद है और दोनों देश 1962 में युद्ध भी लड़ चुके हैं।]]> </content:encoded>
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<title>कराची में अफगान कैंप में छत गिरने से बड़ा हादसा, 6 की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/accident-in-karachi-afghan-camp-6-people-died-four-injured</link>
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<description><![CDATA[ कराची के बाहरी इलाके में एक अफगान शिविर में छत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, घटना गुलशन-ए-मयमार इलाके में हुई और चार लोग घायल हो गए। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अफगान नागरिक कार्ड धारकों को 31 मार्च तक देश छोड़ना होगा, जिसके बाद निर्वासन शुरू हो जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान में लगभग 3 मिलियन अफगान नागरिक रहते हैं, और नवंबर 2023 से 8,00,000 से अधिक अफगानों को वापस भेजा गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 14:27:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कराची, अफगान कैंप, छत गिरना, पाकिस्तान, एसीसी धारक, निर्वासन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कराची:</strong> कराची के बाहरी इलाके में स्थित एक अफगान शिविर में रविवार को एक दुखद घटना घटी। जंजाल गोथ अफगान कैंप में एक घर की छत गिरने से छह लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।</p><br><p>एआरवाई न्यूज के अनुसार, यह घटना गुलशन-ए-मयमार इलाके में हुई। पुलिस ने बताया कि इस हादसे में चार लोग घायल भी हुए हैं। प्रभावित परिवार खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू का रहने वाला था। फिलहाल, अधिकारी घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं।</p><br><p>इस बीच, पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिक कार्ड (एसीसी) धारकों को 31 मार्च तक देश छोड़ना होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल से अफगान नागरिकों को निर्वासित किया जाएगा।</p><br><p>गृह मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि पाकिस्तान देश से सभी अफगानों को निकालने की योजना बना रहा है। मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अवैध विदेशियों के प्रत्यावर्तन कार्यक्रम (आईएफआरपी) को 1 नवंबर, 2023 से लागू किया गया है।</p><br><p>मंत्रालय ने यह भी कहा कि सभी अवैध विदेशियों और एसीसी धारकों को 31 मार्च, 2025 से पहले स्वेच्छा से देश छोड़ने की सलाह दी जाती है, जिसके बाद 1 अप्रैल, 2025 से निर्वासन शुरू हो जाएगा। आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि उनकी सम्मानजनक वापसी के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है।</p><br><p>एआरवाई न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान में लगभग 3 मिलियन अफगान नागरिक रहते हैं। नवंबर 2023 में पाकिस्तान द्वारा अभियान शुरू किए जाने के बाद से 8,00,000 से अधिक अफगानों को वापस उनके देश भेजा गया है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>Cyclone Alfred का कहर: ऑस्ट्रेलिया में तबाही</title>
<link>https://pratinidhi.in/cyclone-alfred-lashes-queensland-australia-causes-power-outages-and-flood-alerts</link>
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<description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में Cyclone Alfred ने भारी तबाही मचाई है, जिससे 3 लाख से ज्यादा घरों में बिजली गुल हो गई और बाढ़ की चेतावनी जारी करनी पड़ी। गोल्ड कोस्ट शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 112,000 से अधिक घरों में बिजली नहीं थी। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स में गंभीर स्थिति बताई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भारी बारिश और 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका जताई है, जिससे ब्रिसबेन समेत कई शहरों में बाढ़ आ सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 14:25:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Cyclone Alfred, Australia, Queensland, Flooding, Power Outage</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया में <strong>Cyclone Alfred</strong> ने मचाया तांडव, 3 लाख से ज्यादा घरों में अंधेरा छाया। क्वींसलैंड में भारी बारिश और तूफानी हवाओं के चलते बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है।<br><br><strong>क्वींसलैंड</strong> के दक्षिण-पूर्व में लगभग 316,540 घरों में बिजली गुल हो गई, जबकि <strong>गोल्ड कोस्ट</strong> शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 112,000 से अधिक घरों में बिजली नहीं थी।<br><br>यह तूफान 16 दिनों तक चक्रवात के रूप में रहने के बाद शनिवार को क्वींसलैंड के तट पर पहुंचा, जिसके चलते लाखों लोगों को तैयारी करने पर मजबूर होना पड़ा। राज्य की राजधानी <strong>ब्रिसबेन</strong> और दक्षिणी पड़ोसी <strong>न्यू साउथ वेल्स</strong> में भी इसका असर महसूस किया गया।<br><br>प्रधानमंत्री <strong>एंथनी अल्बानीज</strong> ने कहा कि क्वींसलैंड और उत्तरी न्यू साउथ वेल्स में अचानक बाढ़ और तेज हवाओं के कारण हालात गंभीर हैं। उन्होंने आने वाले दिनों में भारी बारिश और तूफानी हवाओं के जारी रहने की आशंका जताई है। मौसम विज्ञान ब्यूरो ने रविवार को भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे ब्रिसबेन, इप्सविच, सनशाइन कोस्ट और जिमपी में बाढ़ आ सकती है। राज्य में लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>यूक्रेन पर रूसी आक्रमण: हवाई हमलों में 25 से अधिक लोगों की जान गई</title>
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<description><![CDATA[ रूस ने यूक्रेन पर हवाई हमले किए, जिसमें 25 यूक्रेनी नागरिक मारे गए। यूक्रेन के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, पूर्वी शहर डोब्रोपिलिया और खार्किव क्षेत्र में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें पाँच बच्चे भी शामिल हैं, और 37 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। डोनेट्स्क क्षेत्र में हुए हमले में 11 लोग मारे गए और छह बच्चों समेत 40 लोग घायल हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस के इरादे नहीं बदले हैं, इसलिए वायु रक्षा को मज़बूत करना और रूस पर प्रतिबंध बढ़ाना ज़रूरी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 10:54:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Russia, Ukraine, War, Strikes, Casualties, US Military Aid, Zelensky, Trump</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[रूस ने यूक्रेन पर हवाई हमले तेज़ कर दिए हैं, जिसके चलते 25 यूक्रेनी नागरिकों की जान चली गई। यूक्रेन के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, पूर्वी शहर डोब्रोपिलिया और खार्किव क्षेत्र में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें पाँच बच्चे भी शामिल हैं, और 37 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर है।<br><br>डोनेट्स्क क्षेत्र में हुए हमले में 11 लोगों की मौत हुई और छह बच्चों समेत 40 लोग घायल हो गए। खार्किव और ओडेसा में भी नुकसान हुआ है। रूसी सेना ने डोब्रोपिलिया पर बैलिस्टिक मिसाइलों, रॉकेटों और ड्रोन से हमला किया, जिससे कई इमारतें और गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं। खार्किव क्षेत्र में ड्रोन हमले में तीन नागरिक मारे गए और सात घायल हो गए।<br><br>यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस के इरादे नहीं बदले हैं, इसलिए वायु रक्षा को मज़बूत करना और रूस पर प्रतिबंध बढ़ाना ज़रूरी है। उन्होंने पुतिन के युद्ध के वित्तपोषण को रोकने की बात कही।<br><br>अमेरिका द्वारा खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक लगाने के बाद, रूस ने यूक्रेनी ऊर्जा और गैस ढाँचे को निशाना बनाया। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी मदद रुकने से यूक्रेन की वायु रक्षा कमज़ोर हो सकती है।<br><br>डोब्रोपिलिया, जहाँ पहले 28,000 लोग रहते थे, डोनेट्स्क क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति से कुछ ही दूर है, जहाँ रूसी सैनिक लगातार हमले कर रहे हैं। इन हमलों से शांति वार्ता प्रभावित हो सकती है।<br><br>एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि यूक्रेन के ड्रोन हमले में रूस की किरिशी तेल रिफाइनरी का एक टैंक क्षतिग्रस्त हो गया। रूसी सेना ने कुर्स्क से यूक्रेनी सैनिकों को हटाने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं, जबकि रूसी मंत्रालय ने कुर्स्क क्षेत्र के तीन गाँवों पर कब्ज़ा करने का दावा किया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सीरिया में फिर गृहयुद्ध, असद समर्थकों और विद्रोहियों में भीषण संघर्ष</title>
<link>https://pratinidhi.in/syria-civil-war-rebels-asad-supporters-clash</link>
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<description><![CDATA[ सीरिया में सुन्नी विद्रोहियों और बशर अल असद के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध फिर से शुरू हो गया है, जिसमें पिछले दो दिनों में 600 लोगों की जान जा चुकी है। सरकार समर्थक विद्रोही, असद के समर्थकों को निशाना बना रहे हैं। सुरक्षा बलों और अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में 600 से अधिक लोग मारे गए हैं। ताज़ा झड़पें तब शुरू हुईं जब सुरक्षा बलों ने जबलेह के पास एक वांछित व्यक्ति को हिरासत में लेने की कोशिश की, जिसके दौरान असद के वफादारों ने घात लगाकर हमला किया। इसके बाद, सरकार के प्रति वफादार सुन्नी मुस्लिम बंदूकधारियों ने अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के लोगों की हत्याएं शुरू कर दीं, जिससे दोनों पक्षों में झड़पें और तेज हो गईं। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, 428 अलावी, 120 असद समर्थक लड़ाके और 89 सुरक्षा बल के जवान मारे गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 10:54:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सीरिया, गृहयुद्ध, असद, विद्रोही, संघर्ष, अलावी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>सीरिया में गृहयुद्ध फिर से भड़का, विद्रोहियों और असद समर्थकों में संघर्ष, 600 की मौत</strong><br><br>सीरिया में सुन्नी विद्रोहियों और बशर अल असद के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध फिर से शुरू हो गया है, जिसमें पिछले दो दिनों में 600 लोगों की जान जा चुकी है। सरकार समर्थक विद्रोही, असद के समर्थकों को निशाना बना रहे हैं, घरों में घुसकर उन्हें गोलियां मार रहे हैं, जिससे सड़कों और खेतों में बड़ी संख्या में शव पाए जा रहे हैं।<br><br>बेरूत में, युद्ध निगरानीकर्ताओं के अनुसार, सुरक्षा बलों और अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में 600 से अधिक लोग मारे गए हैं। यह हिंसा, सीरिया में 14 साल पहले हुए संघर्ष के बाद सबसे घातक है। यह झड़प, असद को सत्ता से बेदखल करने के तीन महीने बाद दमिश्क की नयी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार का कहना है कि वे असद के समर्थकों के हमलों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इस हिंसा के लिए 'अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा की गई कार्रवाइयों' को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।<br><br>ताजा झड़पें तब शुरू हुईं जब सुरक्षा बलों ने जबलेह के पास एक वांछित व्यक्ति को हिरासत में लेने की कोशिश की, जिसके दौरान असद के वफादारों ने घात लगाकर हमला किया। इसके बाद, सरकार के प्रति वफादार सुन्नी मुस्लिम बंदूकधारियों ने अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के लोगों की हत्याएं शुरू कर दीं, जिससे दोनों पक्षों में झड़पें और तेज हो गईं। इस घटनाक्रम से हयात तहरीर अल-शाम को बड़ा झटका लगा है, जिसने असद के शासन का तख्तापलट किया था।<br><br>अलावी गांवों के निवासियों ने बताया कि बंदूकधारियों ने समुदाय के पुरुषों को सड़कों पर या घरों के दरवाजों पर गोली मार दी। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, 428 अलावी, 120 असद समर्थक लड़ाके और 89 सुरक्षा बल के जवान मारे गए हैं। रामी अब्दुररहमान ने बताया कि बदला लेने की यह कार्रवाई शनिवार तड़के रुक गई, हालांकि कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका ने पाकिस्तान को बताया खतरनाक देश, नागरिकों को यात्रा से बचने की दी सलाह</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-pakistan-travel-advisory</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका पाकिस्तानियों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है, जिसके चलते पाकिस्तान को खतरनाक देश घोषित कर दिया गया है और अमेरिकी नागरिकों को यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि चरमपंथी समूह बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में हमलों की योजना बना रहे हैं। ट्रंप प्रशासन जल्द ही एक नए प्रतिबंध को लागू कर सकता है जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोकेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 10:54:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>US Pakistan Travel Advisory, अमेरिका, पाकिस्तान, ट्रैवल एडवाइजरी, यात्रा प्रतिबंध, आतंकवाद, सुरक्षा खतरा, अमेरिकी नागरिक, वीजा प्रतिबंध, डोनाल्ड ट्रंप, balochistan, khyber pakhtunkhwa, visa ban</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका, पाकिस्तानियों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले, अमेरिका ने पाकिस्तान को एक खतरनाक देश घोषित किया है और अमेरिकी नागरिकों के लिए एक यात्रा परामर्श जारी किया है।</p><br><br><strong>मुख्य बातें:</strong><br><ul><li>अमेरिका ने पाकिस्तान को खतरनाक देशों की सूची में रखा है।</li><li>अमेरिकी नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।</li><li>पाकिस्तानियों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोकने की तैयारी चल रही है।</li></ul><br><br><p>इस्लामाबाद: अमेरिका ने पाकिस्तान को खतरनाक देशों की श्रेणी में रखा है और अमेरिकी नागरिकों को वहां की यात्रा से बचने की सलाह दी है। वाशिंगटन ने पाकिस्तान के लिए एक नया यात्रा परामर्श जारी किया है। अमेरिकी नागरिकों को आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष की संभावना सहित सुरक्षा जोखिमों के कारण देश की यात्रा पर पुनर्विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में चेतावनी दी है कि चरमपंथी समूह विशेष रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में हमले करने की योजना बना रहे हैं। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन पाकिस्तानियों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोकने की योजना को लागू करने की तैयारी कर रहा है।</p><br><br><strong>आतंकवादी हमलों की चेतावनी</strong><br><p>यात्रा परामर्श में कहा गया है कि आतंकवादी बिना किसी चेतावनी के हमले कर सकते हैं और परिवहन केंद्रों, शॉपिंग मॉल, सैन्य प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, विश्वविद्यालयों और पूजा स्थलों जैसे विभिन्न स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सलाह में पाकिस्तान में अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को बढ़ते खतरे के कारण अधिकांश बड़े समारोहों में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया है।</p><br><br><p>सलाह में राजधानी इस्लामाबाद जैसे प्रमुख शहरों के बारे में भी चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति अस्थिर बनी हुई है और इसमें तेजी से बदलाव की संभावना है। नतीजतन, अमेरिकी नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया है।</p><br><br><strong>पाकिस्तानियों का अमेरिका में प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा</strong><br><p>यह चेतावनी अमेरिका में संभावित यात्रा प्रतिबंधों के बारे में चल रही चर्चाओं के बीच आई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी है कि ट्रंप प्रशासन जल्द ही एक नए प्रतिबंध को लागू कर सकता है जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोकेगा। यह देशों की सुरक्षा और स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं के व्यापक मूल्यांकन के बाद किया गया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>कैलिफोर्निया के मंदिर में तोड़फोड़, दीवारों पर भारत विरोधी नारे</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-hindu-temple-vandalized-california-baps-temple-anti-india-slogans</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले जारी हैं। कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई और दीवारों पर हिंदू विरोधी नारे लिखे गए। बीएपीएस संगठन ने घटना का विरोध किया और कहा कि वे नफरत को जड़ नहीं जमाने देंगे। यह घटना लॉस एंजिल्स में होने वाले &#039;खालिस्तानी जनमत संग्रह&#039; से पहले हुई है, जिससे स्थानीय हिंदू समुदाय में चिंता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 09:39:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>US Hindu Temple vandalized, कैलिफोर्निया, BAPS हिंदू मंदिर, हिंदू विरोधी नारे, Anti-India slogans</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़, दीवारों पर लिखे भारत विरोधी नारे</strong><br><br>अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले लगातार जारी हैं। ताजा घटना में, कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। मंदिर में तोड़फोड़ की गई और दीवारों पर हिंदू विरोधी नारे लिखे गए, जैसे कि 'हिंदू वापस जाओ'।<br><br>बीएपीएस संगठन ने इस घटना का विरोध किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा कि वे नफरत को जड़ नहीं जमाने देंगे और शांति बनाए रखने के लिए काम करते रहेंगे। यह घटना लॉस एंजिल्स में होने वाले 'खालिस्तानी जनमत संग्रह' से कुछ दिन पहले हुई है, जिससे स्थानीय हिंदू समुदाय में चिंता है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>चीन का कनाडा पर टैरिफ पलटवार: कृषि उत्पादों पर 100% शुल्क</title>
<link>https://pratinidhi.in/china-imposes-100-percent-tariff-on-canadian-agricultural-products-amid-trade-tensions</link>
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<description><![CDATA[ चीन ने कनाडा के 2.6 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया है, जवाब में ओटावा द्वारा चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों और स्टील पर शुल्क लगाया गया था। चीन कनाडा से रेपसीड तेल, ऑयल केक और मटर पर 100% टैरिफ लगाएगा, साथ ही जलीय उत्पादों और पोर्क पर 25% शुल्क लगेगा। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध को बढ़ा सकता है। ट्रंप ने भारत की टैरिफ व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:48:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चीन, कनाडा, टैरिफ, कृषि उत्पाद, व्यापार युद्ध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[चीन ने कनाडा पर जवाबी कार्रवाई करते हुए 2.6 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला ओटावा द्वारा चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों और स्टील पर लगाए गए शुल्क के जवाब में लिया गया है।<br><br><strong>कनाडा के उत्पादों पर शुल्क:</strong> चीन कनाडा से आने वाले रेपसीड तेल, ऑयल केक और मटर पर 100% टैरिफ लगाएगा। इसके अलावा, जलीय उत्पादों और पोर्क पर 25% शुल्क लगेगा। ये नए नियम 20 मार्च से लागू होंगे।<br><br><strong>व्यापार युद्ध का खतरा:</strong> चीन, कनाडा का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध बढ़ने की आशंका है। पहले ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा, मैक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाए हैं।<br><br><strong>ट्रंप का भारत पर बयान:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की टैरिफ व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भारत में भारी शुल्क के कारण कुछ भी बेचना मुश्किल है, लेकिन भारत टैरिफ कम करने के लिए तैयार हो गया है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>कोविड के तथ्य छिपाने पर चीन दोषी, 24 अरब डॉलर का जुर्माना</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-judge-blames-china-for-hiding-covid-facts-imposes-24-billion-dollar-fine</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के एक जज ने चीन को कोविड-19 महामारी की शुरुआत को लेकर तथ्यों को छिपाने का दोषी पाया है। मिसौरी के संघीय जज ने चीन पर 24 अरब डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया है। जज ने कहा कि चीन ने दुनिया को गुमराह किया और सुरक्षात्मक उपकरणों की जमाखोरी की। इस फैसले के बाद मिसौरी के अधिकारी चीनी संपत्तियों को जब्त कर सकते हैं। मुकदमे में चीनी सरकार पर वायरस के प्रसार के बारे में जानकारी छिपाने और पीपीई की आपूर्ति में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:48:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कोविड-19, चीन, अमेरिका, जज, जुर्माना, महामारी, मिसौरी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिका के एक जज ने चीन को कोविड-19 महामारी की शुरुआत में तथ्यों को छिपाने का दोषी पाया है। मिसौरी के संघीय जज ने चीन पर 24 अरब डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया है।\n\nजज ने कहा कि चीन ने दुनिया को गुमराह किया और सुरक्षात्मक उपकरणों की जमाखोरी की। इस फैसले के बाद मिसौरी के अधिकारी चीनी संपत्तियों को जब्त कर सकते हैं। मुकदमे में चीनी सरकार पर वायरस के प्रसार के बारे में जानकारी छिपाने और पीपीई की आपूर्ति में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था।\n\nजज स्टीफन एन. लिंबाघ जूनियर ने कहा कि चीन कोविड-19 महामारी के खतरे को लेकर दुनिया को गुमराह कर रहा था और पीपीई की जमाखोरी करने के लिए एकाधिकारवादी कार्रवाइयों में लगा हुआ था। मिसौरी के अटार्नी जनरल एंड्रयू बेली ने कहा कि चीन ने अदालत में पेश होने से इन्कार कर दिया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अनगिनत दुख और आर्थिक तबाही मचाने से बच जाएंगे।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिकी फंडिंग रोकने से UN एजेंसियों में छंटनी, कई सेवाएं प्रभावित</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका द्वारा विदेशी सहायता में कटौती के कारण संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को कर्मचारियों की छंटनी और कार्यक्रमों में कटौती करनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित UNHCR, WHO और मानवीय मामलों के कार्यालय हैं। अफगानिस्तान में 90 लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो जाएंगे, और यूक्रेन में नकद सहायता निलंबित कर दी गई है। WHO का खसरा और रूबेला नेटवर्क खतरे में है। EPA में 50,000 डॉलर से अधिक के खर्च के लिए एलन मस्क की मंजूरी जरूरी होगी। ट्रंप ने सार्वजनिक सेवा ऋण माफी कार्यक्रम में भी बदलाव किए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:46:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>UN, funding, America, agencies, job cuts, aid</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>जिनेवा:</strong> अमेरिका द्वारा विदेशी सहायता में कटौती करने के कारण संयुक्त राष्ट्र (UN) की विभिन्न एजेंसियों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से उन्हें अपने कर्मचारियों की छंटनी करने और कई कार्यक्रमों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।<br><br>सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली एजेंसियों में शरणार्थी एजेंसी (UNHCR), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय शामिल हैं। UNHCR को पिछले साल अपने बजट का 40% से अधिक हिस्सा अमेरिका से मिला था।<br><br>अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) को 2023 में अपने 3.4 अरब डॉलर के बजट का 40% से अधिक अमेरिका से प्राप्त हुआ था। अमेरिका के इस कदम से अफगानिस्तान, सूडान और यूक्रेन जैसे देशों में चल रहे सहायता कार्यक्रमों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।<br><br>महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बताया कि अफगानिस्तान में 90 लाख से ज्यादा लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो जाएंगे। इसके अलावा, यूक्रेन में पिछले साल 10 लाख लोगों को दी जाने वाली नकद सहायता भी रोक दी गई है। WHO का कहना है कि वैश्विक खसरा और रूबेला प्रयोगशाला नेटवर्क के ध्वस्त होने का खतरा है, क्योंकि इसे मिलने वाली 80 लाख डॉलर की सहायता पूरी तरह से अमेरिका द्वारा वित्तपोषित है।<br><br>नए दिशानिर्देशों के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) में 50,000 डॉलर से अधिक के खर्च के लिए अब एलन मस्क के सरकारी दक्षता विभाग से अनुमति लेनी होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक सेवा ऋण माफी कार्यक्रम में भी बदलाव किए हैं, जिससे गैर-लाभकारी समूहों के कर्मचारियों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सीरिया में अल्पसंख्यक समुदाय पर हिंसा, हजारों पलायन</title>
<link>https://pratinidhi.in/syria-violence-alawite-minority-killed-thousands-flee-government-crackdown</link>
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<description><![CDATA[ सीरिया में सुरक्षा बलों ने 340 से अधिक अलावी नागरिकों की हत्या कर दी, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। यह हिंसा 13 साल पुराने गृहयुद्ध में सबसे भीषण है। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, यह घटना जाबलेह, बनियास और आसपास के इलाकों में हुई। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद शरा ने दमन का समर्थन किया और कहा कि नागरिकों के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। हजारों अलावी और ईसाई घर छोड़कर भाग गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:46:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सीरिया, अल्पसंख्यक, हत्या, पलायन, असद, अलावी, गृहयुद्ध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दमिश्क (रायटर)।</strong> सीरिया में सुरक्षा बलों और संबद्ध बंदूकधारियों द्वारा तटीय क्षेत्र में रहने वाले अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के 340 से अधिक लोगों की हत्या की गई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यह जानकारी युद्ध निगरानी संस्था के प्रमुख ने दी है।</p><br><p>सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के रामी अब्दुलरहमान ने बताया कि अलावी गढ़ जाबलेह, बनियास और आसपास के इलाकों में हुई यह हिंसा 13 साल पुराने गृहयुद्ध में सबसे भीषण है।</p><br><p>नए सत्तारूढ़ प्राधिकार ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के समर्थकों के विद्रोह को कुचलने के लिए कार्रवाई की है। एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि संघर्ष में सुरक्षा बलों के कई जवान भी मारे गए हैं।</p><br><p>अंतरिम राष्ट्रपति अहमद शरा ने दमन का समर्थन करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों को प्रतिक्रिया में अतिशयोक्ति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों और बंदियों के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। रक्षा मंत्रालय और आंतरिक सुरक्षा एजेंसी ने तटीय क्षेत्र में शांति बहाल करने की कोशिश कर रही है। हजारों अलावी और ईसाई जान बचाने के लिए घर छोड़कर भाग गए हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा को लेकर ट्रंप की संपत्ति पर हमला, फिलिस्तीनियों का विरोध</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-scotland-golf-course-vandalised-by-palestine-supporters</link>
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<description><![CDATA[ फिलिस्तीनी समर्थकों ने गाजा से फिलिस्तीनियों को निकालने के ट्रंप के प्रस्ताव के विरोध में, स्कॉटलैंड में उनके टर्नबेरी गोल्फ कोर्स को तोड़ दिया। उन्होंने गोल्फ कोर्स के लॉन पर &#039;गाजा बिक्री के लिए नहीं है&#039; लिखकर विरोध जताया, जिसके बाद पुलिस जांच कर रही है। फलस्तीन एक्शन ग्रुप ने कहा कि वे गाजा के साथ ट्रंप के व्यवहार को संपत्ति की तरह अस्वीकार करते हैं और यह प्रदर्शित करने के लिए कि उनकी संपत्ति सुरक्षित नहीं है, कोर्स पर विरोध प्रदर्शन किया। ट्रंप ने 2014 में गोल्फ कोर्स खरीदा था, जिसके बाद से यहां कोई आयोजन नहीं हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:46:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Scotland, Golf Course, Palestine, Gaza, Vandalism</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>गाजा पर फिलिस्तीनी विरोध: ट्रंप के गोल्फ कोर्स में तोड़फोड़</strong><br><br>फिलिस्तीनी समर्थकों ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने के डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव के खिलाफ स्कॉटलैंड में उनके टर्नबेरी गोल्फ कोर्स पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने गोल्फ कोर्स के लॉन पर <strong>'गाजा बिक्री के लिए नहीं है'</strong> लिखकर अपनी असहमति व्यक्त की। पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह घटना 2014 में ट्रंप द्वारा गोल्फ कोर्स की खरीद के बाद हुई है।<br><br><b>समूह का दावा</b><br>फलस्तीन एक्शन ग्रुप ने कहा कि वे गाजा के साथ ट्रंप के व्यवहार को संपत्ति की तरह अस्वीकार करते हैं, जिसे वह अपनी मर्जी से बेच सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति प्रतिरोध के कृत्यों से सुरक्षित नहीं है।<br><br>टर्नबेरी गोल्फ कोर्स उन 10 कोर्सों में से एक है, जो ब्रिटिश ओपन की मेजबानी करता है। ट्रंप ने 2014 में इसे खरीदा था, जिसके बाद से यहां कोई आयोजन नहीं हुआ है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>तालिबान का अफगान महिलाओं के अधिकारों पर जोर</title>
<link>https://pratinidhi.in/taliban-emphasizes-on-protecting-the-rights-of-afghan-women</link>
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<description><![CDATA[ तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कहा कि अफगान महिलाएं सुरक्षित हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं पर प्रतिबंधों की निंदा की। तालिबान ने इस्लामिक कानून के अनुसार महिलाओं के अधिकार बरकरार रखने की बात कही। संयुक्त राष्ट्र ने सामाजिक जीवन में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया। तालिबान प्रवक्ता ने महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता बताया। 2021 में कब्जे के बाद तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक जीवन पर रोक लगाई। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:46:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>तालिबान, अफगानिस्तान, महिला अधिकार, संयुक्त राष्ट्र, जबीहुल्लाह मुजाहिद, रोजा ओटुनबायेवा</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दिया संदेश:</strong> अफगानिस्तान में महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित। उनके अधिकार भी सुरक्षित हैं। संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं के लिए रोजगार एवं शिक्षा पर लगाए प्रतिबंधों की निंदा की।
<br><br>
तालिबान ने कहा: इस्लामिक कानून और अफगान समाज की परंपराओं के अनुसार महिलाओं के मौलिक अधिकार बरकरार।
<br><br>
<strong>संयुक्त राष्ट्र का तालिबान पर बयान:</strong>
2021 में अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों को छठी कक्षा से आगे पढ़ने, नौकरी करने और सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर रोक लगाई। पिछले अगस्त में महिलाओं की स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाने वाले कानून बने।
<br><br>
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा: महिलाओं की गरिमा, सम्मान और कानूनी अधिकार हमारी प्राथमिकता।
<br><br>
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन की प्रमुख रोजा ओटुनबायेवा ने कहा: सामाजिक जीवन में महिलाओं और लड़कियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सार्वजनिक जीवन से महिलाओं और लड़कियों को दूर करने की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पाकिस्तान: वाट्सएप ग्रुप से निकाला तो एडमिन की गोली मारकर हत्या</title>
<link>https://pratinidhi.in/pakistan-man-shoots-admin-after-being-removed-from-whatsapp-group</link>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पेशावर में व्हाट्सएप ग्रुप से निकाले जाने पर एक व्यक्ति ने एडमिन की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान मुश्ताक अहमद के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी अशफाक को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, अशफाक को व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया था, जिसके बाद उसने गुस्से में आकर मुश्ताक की हत्या कर दी। यह घटना सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल और उससे जुड़े विवादों को दर्शाती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:46:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>पाकिस्तान, वाट्सएप ग्रुप, एडमिन, हत्या, पेशावर, खैबर पख्तूनख्वा, अशफाक, मुश्ताक अहमद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान के पेशावर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक व्यक्ति को व्हाट्सएप ग्रुप से हटाने पर एक एडमिन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच कर रही है।</p><br/><p>पुलिस के अनुसार, मृतक मुश्ताक अहमद को गुरुवार शाम को पेशावर में गोली मारी गई थी। वह खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी का रहने वाला था। पुलिस ने बताया कि आरोपी अशफाक ने मुश्ताक को व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच बहस हुई थी।</p><br/><p>मुश्ताक के भाई ने बताया कि अशफाक गुस्से में था और उसने मुश्ताक की हत्या कर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।</p><br/><p>यह घटना पाकिस्तान में सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़े विवादों को उजागर करती है। व्हाट्सएप ग्रुप से हटाने पर एक व्यक्ति की हत्या कर देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूक्रेन के कुर्स्क में रूसी सेना का घेराव, जेलेंस्की के सैनिक खतरे में</title>
<link>https://pratinidhi.in/russian-army-surrounds-ukrainian-soldiers-in-kursk</link>
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<description><![CDATA[ रूसी सेना ने कुर्स्क में हजारों यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया है, जिससे यूक्रेन की शांति वार्ता में रूस पर दबाव बनाने की उम्मीदों को झटका लगा है। ओपन सोर्स मैप्स के अनुसार, कुर्स्क में यूक्रेन की स्थिति पिछले तीन दिनों में तेजी से बिगड़ी है, क्योंकि रूसी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र के एक बड़े हिस्से पर फिर से नियंत्रण कर लिया है। अमेरिका ने भी कीव के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया है, जिससे यूक्रेनी सेना की स्थिति और कमजोर हो गई है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेनी सेना को जल्द ही घेरा जा सकता है या पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:38:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, यूक्रेन, कुर्स्क, जेलेंस्की, सेना, युद्ध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>मॉस्को:</strong> रूसी सेना ने पिछले साल गर्मियों में रूस के कुर्स्क क्षेत्र में प्रवेश करने वाले हजारों यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया है। यह यूक्रेन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि इससे शांति वार्ता में रूस पर दबाव बनाने की उसकी उम्मीदें कम हो गई हैं।<br><br><strong>कुर्स्क में स्थिति गंभीर:</strong> ओपन सोर्स मैप्स के अनुसार, पिछले तीन दिनों में कुर्स्क में यूक्रेन की स्थिति तेजी से बिगड़ी है। रूसी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुर्स्क के एक बड़े हिस्से पर फिर से नियंत्रण कर लिया है, जिससे यूक्रेनी सेना दो भागों में बंट गई है और उसकी आपूर्ति लाइनें कट गई हैं।<br><br><strong>अमेरिका का समर्थन कम:</strong> वाशिंगटन ने कीव के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया है, जिससे यूक्रेनी सेना को वापसी के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप सैनिकों के पकड़े जाने या मारे जाने का खतरा बढ़ गया है।<br><br><strong>रूसी सेना का आक्रमण:</strong> युद्ध के मैदान में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, कीव पर रूस के साथ युद्धविराम करने का दबाव बना रहा है। रूसी सेना यूक्रेन के अंदर कुछ हिस्सों में आगे बढ़ रही है। सैन्य विश्लेषक पासी पैरोइनेन ने कहा कि कुर्स्क में यूक्रेन की स्थिति बहुत गंभीर है और यूक्रेनी सेना को जल्द ही घेरा जा सकता है या पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा सकता है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यून सुक योल: महाभियोग के बाद जेल से रिहा, राजनीतिक भविष्य अनिश्चित</title>
<link>https://pratinidhi.in/yoon-suk-yeol-released-from-jail-after-impeachment-political-future-uncertain</link>
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<description><![CDATA[ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल, जिन्हें महाभियोग के बाद गिरफ्तार किया गया था, जेल से रिहा हो गए हैं। उन्हें दिसंबर में मार्शल लॉ लगाने के आदेश के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए मतदान किया, जिसके बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया। अब संवैधानिक न्यायालय यह तय करेगा कि उन्हें पद पर बहाल किया जाए या नहीं। अगर संवैधानिक न्यायालय यून के महाभियोग को बरकरार रखता है, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:38:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Yoon Suk Yeol, South Korea, Impeachment, Jail Release, Political Future</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल, जो महाभियोग का सामना कर रहे हैं, को जेल से रिहा कर दिया गया है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को रद्द कर दिया, जिससे वह जेल से बाहर रहकर मुकदमे का सामना कर सकेंगे। उन्हें दिसंबर में मार्शल लॉ लगाने के आदेश के सिलसिले में विद्रोह भड़काने के आरोप में जनवरी में गिरफ्तार किया गया था।<br><br>शनिवार को रिहा होने के बाद, यून ने अपने समर्थकों का अभिवादन किया, जिन्होंने उनका नाम लेकर और दक्षिण कोरिया और अमेरिका के झंडे लहराकर उनका समर्थन किया। उन्होंने सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले की सराहना की और अपने समर्थकों से भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया।<br><br>विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए मतदान किया, जिसके बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया। अब संवैधानिक न्यायालय यह तय करेगा कि उन्हें पद पर बहाल किया जाए या नहीं। यदि न्यायालय महाभियोग को बरकरार रखता है, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा और दो महीने के भीतर उत्तराधिकारी चुनने के लिए चुनाव होंगे।<br><br>सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून को रिहा करने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया, क्योंकि उनके मामले की जांच की वैधता पर सवाल थे। उनके वकीलों का तर्क है कि जांच एजेंसी के पास विद्रोह के आरोपों की जांच करने का कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने से पहले हिरासत में लिया गया था.]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका की घातक सेंटिनल मिसाइल: दुश्मन को करेगी तबाह, 5500 किमी तक मारक क्षमता</title>
<link>https://pratinidhi.in/us-sentinel-icbm-nuclear-missile-program-development-and-testing</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी वायुसेना सेंटिनल मिसाइल को विकसित करने के करीब है, जिसका हाल ही में महत्वपूर्ण परीक्षण हुआ। यह मिसाइल अमेरिकी सेना के परमाणु त्रिकोण के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है और 5500 किलोमीटर तक हमला कर सकती है। अमेरिकी वायुसेना और नॉर्थ्राप ग्रुप्मन कॉरपोरेशन ने मिसाइल के विकास में महत्वपूर्ण परीक्षण किए हैं। यह परीक्षण मिसाइल कार्यक्रम को उत्पादन और तैनाती के करीब ले जाने में महत्वपूर्ण है। सेंटिनल सिस्टम 400 मिनटमैन 3 ICBM के मौजूदा बेड़े की जगह लेगा। अमेरिका की नई मिसाइल LGM-35A की रेंज 5500 किलोमीटर से ज्यादा होने का दावा किया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:38:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सेंटिनल मिसाइल, परमाणु हथियार, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल, अमेरिकी वायुसेना, रक्षा प्रौद्योगिकी</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी वायुसेना सेंटिनल मिसाइल को विकसित करने के करीब है, जिसे नॉर्थाम्पन ग्रुम्मन कारपोरेशन के साथ मिलकर बनाया जा रहा है। हाल ही में इसका महत्वपूर्ण परीक्षण हुआ है। यह मिसाइल अमेरिकी सेना के परमाणु त्रिकोण के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है।<br><br>इस मिसाइल की कुछ मुख्य बातें हैं: अमेरिका परमाणु प्रलय मिसाइल सेंटिनल के करीब पहुंच गया है, सेंटिनल परमाणु मिसाइल दुश्मन के होश उड़ा देगी, और यह 5500 किलोमीटर तक हमला कर सकती है।<br><br>अमेरिका अगली पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) सेंटिनल को तैयार करने के करीब है, जिसमें परमाणु हथियार से तबाही लाने की क्षमता है। अमेरिकी वायुसेना और नॉर्थ्राप ग्रुप्मन कॉरपोरेशन ने मिसाइल के विकास में महत्वपूर्ण परीक्षण किए हैं। यह परीक्षण मिसाइल कार्यक्रम को उत्पादन और तैनाती के करीब ले जाने में महत्वपूर्ण है। ब्रिगेडियर जनरल विलियम रोजर्स ने इस परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।<br><br>जनरल रोजर्स ने कहा कि वे अपने परमाणु त्रिकोण का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। यह परीक्षण पुराने मिनटमैन 3 आईसीबीएम को बदलने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है। सेंटिनल आईसीबीएम का उद्देश्य अमेरिकी परमाणु त्रिकोण के जमीनी हिस्से को बढ़ाना है, जो प्रतिरोधक क्षमताओं को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। कर्नल अमांडा ओकेसन ने कहा कि टीम एक बेजोड़ रणनीतिक निवारक प्रदान करने के अपने वादे को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सेंटिनल सिस्टम 400 मिनटमैन 3 ICBM के मौजूदा बेड़े की जगह लेगा, जो आधी सदी से भी ज्यादा समय से सेवा में है। मिनटमैन 3 को पहली बार 1970 के दशक की शुरुआत में तैनात किया गया था और इसके कुछ घटकों को अपडेट किया गया है।<br><br>अमेरिका की नई मिसाइल LGM-35A की रेंज 5500 किलोमीटर से ज्यादा होने का दावा किया गया है। इसे भविष्य में एक रणनीतिक प्रतिरोध प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। सेंटिनल मिसाइल कार्यक्रम को बढ़ाने के लिए यूटा में हिल एयर फ़ोर्स बेस और अन्य राज्यों में रखरखाव और प्रशिक्षण गतिविधियां होंगी।]]> </content:encoded>
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<title>म्यांमार में सेना का ऐलान: 2026 में होंगे आम चुनाव, जुंटा प्रमुख ने दी जानकारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/myanmar-election-junta-chief-announces-election-2026</link>
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<description><![CDATA[ म्यांमार में सेना प्रमुख ने 2026 तक आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब सेना को विद्रोही बलों से नुकसान हो रहा है। चुनाव दिसंबर तक या जनवरी 2026 तक होने की उम्मीद है। 53 राजनीतिक दलों ने भागीदारी के लिए आवेदन किया है। आलोचकों का मानना है कि सेना के नियंत्रण में होने वाले चुनाव स्वतंत्र नहीं होंगे। आंग सान सू की की सरकार का तख्तापलट करने के बाद सेना ने चुनाव कराने की बात कही है, लेकिन प्रक्रिया में देरी की है। सू की को 27 साल की जेल हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:37:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>म्यांमार, चुनाव, जुंटा, सेना, मिन आंग, आंग सान सू की</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>म्यांमार में सेना प्रमुख का ऐलान: 2026 में होंगे आम चुनाव</strong><br><br>म्यांमार में गृहयुद्ध के चलते सेना प्रमुख ने देश में आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। जनरल मिन आंग ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब सेना को विद्रोही बलों से भारी नुकसान हुआ है। म्यांमार की सरकारी मीडिया के अनुसार, चुनाव अगले 10 महीनों में हो सकते हैं, संभवत: दिसंबर तक या जनवरी 2026 तक।<br><br>जनरल मिन आंग ने बेलारूस में कहा कि 53 राजनीतिक दलों ने भागीदारी के लिए आवेदन किया है, लेकिन उन्होंने चुनाव की तारीख नहीं बताई। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों और जातीय समूहों ने सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ रखा है, जिससे सेना को कई क्षेत्रों में नियंत्रण खोना पड़ा है।<br><br>फरवरी 2021 में, सेना ने आंग सान सू की की सरकार का तख्तापलट कर दिया, जिससे देश में व्यापक संघर्ष शुरू हो गया। सेना ने बार-बार चुनाव कराने की बात कही है, लेकिन प्रक्रिया में देरी की है। आलोचकों का मानना है कि सेना के नियंत्रण में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होंगे, क्योंकि स्वतंत्र मीडिया पर प्रतिबंध है और आंग सान सू की के नेतृत्व वाली नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। सू की को 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।<br><br>आम चुनाव की योजना को सेना के कब्जे को वैध बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।]]> </content:encoded>
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<title>लैंगिक असमानता: पाकिस्तान की फिसली रैंकिंग, भारत की स्थिति जानें</title>
<link>https://pratinidhi.in/global-gender-gap-equality-pakistan-ranks-second-last-india-and-bangladesh-ranking</link>
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<description><![CDATA[ विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 2024 की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट में दुनिया भर के देशों में महिलाओं की स्थिति का पता चला है। इस सूची में पाकिस्तान नीचे से दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत 129वें स्थान पर है। 146 देशों की सूची में पाकिस्तान 145वें स्थान पर है, केवल सूडान उससे नीचे है। बांग्लादेश 99वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2006 में रिपोर्ट की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर लगभग सभी देशों में आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में लैंगिक समानता में काफी सुधार हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 07:37:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Global Gender Gap Equality Report, Global Gender Equality Index, Pakistan, India, Bangladesh, WEF, Gender inequality, Women&#039;s rights, Economic equality, Political representation, South Asia, Gender pay gap</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 2024 की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट में दुनिया भर के देशों में महिलाओं की स्थिति का पता चला है। इस सूची में पाकिस्तान नीचे से दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका मध्य स्थान पर हैं। अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई देशों की स्थिति सबसे खराब है।<br><br>पाकिस्तान, मोहम्मद अली जिन्ना का देश, महिलाओं के लिए और भी खराब होता जा रहा है। WEF की 2024 की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 146 देशों की सूची में पाकिस्तान नीचे से दूसरे, यानी 145वें स्थान पर है। पाकिस्तान से नीचे एकमात्र देश सूडान है। ऐसे में सवाल उठता है कि वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट में भारत और पड़ोसी देशों की रैंकिंग क्या है।<br><br>ग्लोबल जेंडर गैप इक्वलिटी रिपोर्ट में बांग्लादेश 99वें और भारत 129वें स्थान पर है। 2006 में रिपोर्ट की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर लगभग सभी देशों में आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में लैंगिक समानता में काफी सुधार हुआ है। वरिष्ठ नेतृत्व, मंत्रिस्तरीय और संसदीय पदों पर समानता लगभग दोगुनी हो गई है। WEF के अध्ययन में कहा गया है कि आबादी का लगभग आधा हिस्सा होने के बावजूद, दक्षिण एशियाई देशों में महिलाओं को महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक असमानताओं का सामना करना पड़ता है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>ईरान ने ट्रंप के लेटर को नकारा, परमाणु वार्ता से इनकार</title>
<link>https://pratinidhi.in/iran-denies-receiving-letter-from-trump-rejects-nuclear-talks</link>
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<description><![CDATA[ ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का खंडन करते हुए कहा कि उन्हें ट्रंप का कोई पत्र नहीं मिला है। ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता की संभावना को भी खारिज कर दिया है, जब तक कि वाशिंगटन अपने प्रतिबंधों को नहीं हटाता। ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को पत्र भेजा था, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने का आग्रह किया गया था, लेकिन ईरान ने इस दावे को नकार दिया है। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी &#039;अधिकतम दबाव&#039; की नीति जारी रखेगा, तब तक कोई सीधी बातचीत नहीं होगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 20:44:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>डोनाल्ड ट्रंप, ईरान, परमाणु वार्ता, खामेनेई, अमेरिका, अयातुल्ला अली खामेनेई, अमेरिकी प्रतिबंध, पत्र, तेहरान, सैन्य कार्रवाई, अब्बास अराघची</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का खंडन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को पत्र भेजा था। ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। इसके साथ ही, ईरान ने वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका के साथ किसी भी परमाणु वार्ता की संभावना को भी खारिज कर दिया है।<br><br>ईरानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि तेहरान को अमेरिकी राष्ट्रपति से कोई संदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने वाशिंगटन द्वारा लगाए गए मौजूदा प्रतिबंधों को बातचीत के लिए एक बड़ी बाधा बताया है।<br><br>ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने खामेनेई को एक पत्र भेजा था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कूटनीति विफल रही तो सैन्य कार्रवाई भी संभव है। व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के इस दावे का समर्थन किया था।<br><br>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी 'अधिकतम दबाव' की नीति और धमकियां जारी रखेगा, तब तक ईरान अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं करेगा। खामेनेई ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को 'बुद्धिमानी, समझदारी और सम्मान से रहित' बताया है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>हंतावायरस: कारण, लक्षण और बचाव</title>
<link>https://pratinidhi.in/hantavirus-pulmonary-syndrome-cause-symptoms-and-prevention</link>
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<description><![CDATA[ अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की मृत्यु हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम से हुई। यह वायरस चूहों से फैलता है और फेफड़ों को प्रभावित करता है। अमेरिका में 1993 से 2022 के बीच 834 मामले सामने आए, जिनमें सबसे अधिक न्यू मैक्सिको में थे। बचाव के लिए चूहों से दूर रहें और सफाई करते समय सावधानी बरतें। वायरस के संपर्क में आने के बाद थकान, बुखार और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 20:44:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Hantavirus Pulmonary Syndrome, जीन हैकमैन, बेट्सी अराकावा, हंतावायरस</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अकादमी पुरस्कार विजेता अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा का निधन हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम से हो गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बेट्सी की मृत्यु न्यू मैक्सिको स्थित उनके घर में हुई। <br><br>हंटावायरस एक दुर्लभ बीमारी है जो चूहों जैसे कृन्तकों से मनुष्यों में फैलती है। यह बीमारी फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, अमेरिका में हंटावायरस फैलाने में डियर रैट प्रजाति सबसे महत्वपूर्ण है। <br><br>यह वायरस इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता है। सीडीसी के डेटा के अनुसार, 1993 से 2022 के बीच अमेरिका में हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम के 834 मामले सामने आए हैं, जिनमें से अधिकांश पश्चिमी राज्यों से हैं। न्यू मैक्सिको में इस वायरस के सबसे अधिक मामले पाए गए हैं, जिनमें से लगभग 41% रोगियों की मृत्यु हो गई।<br><br>विशेषज्ञों का कहना है कि हंटावायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका चूहों के संपर्क से बचना और उनके आवासों की सफाई करते समय सावधानी बरतना है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>वैज्ञानिक ने गणितीय सूत्र से साबित किया भगवान का अस्तित्व</title>
<link>https://pratinidhi.in/harvard-scientist-claims-god-exists-proved-with-mathematical-formula</link>
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<description><![CDATA[ हावर्ड के वैज्ञानिक डॉ. विली सून ने भगवान के अस्तित्व को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने एक गणितीय सूत्र को भगवान के अस्तित्व का अंतिम प्रमाण बताया है। डॉ. सून के अनुसार, ब्रह्मांड के रहस्य गणित की नींव में छिपे हैं, और &#039;फाइन ट्यूनिंग आर्गुमेंट&#039; बताता है कि ब्रह्मांड के नियम जीवन के लिए इतने सटीक हैं कि यह संयोग नहीं हो सकता। उन्होंने पॉल डिराक के सूत्र का उल्लेख करते हुए गणित और ब्रह्मांड के बीच सामंजस्य की बात कही। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 17:00:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भगवान, गणित, विज्ञान, भौतिकी, खगोल भौतिकी, पॉल डिराक, ब्रह्मांड</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, जागरण डेस्क।</strong> हावर्ड के खगोल भौतिक वैज्ञानिक और एयरोस्पेस इंजीनियर डॉ. विली सून ने भगवान के अस्तित्व को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि एक गणितीय सूत्र भगवान के अस्तित्व का अंतिम प्रमाण हो सकता है।
<br><br>
डॉ. सून के अनुसार, ब्रह्मांड के रहस्य केवल तारों में ही नहीं, बल्कि गणित की नींव में भी छिपे हो सकते हैं। उनके सिद्धांत का केंद्र 'फाइन ट्यूनिंग आर्गुमेंट' है, जो बताता है कि ब्रह्मांड के भौतिक नियम जीवन को समर्थन देने के लिए इतने सटीक हैं कि यह संयोग नहीं हो सकता।
<br><br>
उन्होंने कैम्ब्रिज के गणितज्ञ पॉल डिराक के सूत्र का उल्लेख किया, जो दर्शाता है कि ब्रह्मांडीय स्थिरांक अद्भुत सटीकता के साथ मेल खाते हैं। डॉ. सून ने अपनी किताब में इस बात का भी जिक्र किया है कि किस तरह ब्रह्मांड के निर्माण में गणित का उपयोग किया गया। उन्होंने पॉडकास्ट में डिराक के सिद्धांत का हवाला देते हुए भगवान के अस्तित्व को समझाया और गणित एवं ब्रह्मांड के बीच सामंजस्य की बात कही।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का दावा: भारत टैरिफ कम करने को तैयार</title>
<link>https://pratinidhi.in/trump-claims-india-agreed-to-cut-tariffs-after-criticism</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की टैरिफ व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि उच्च टैरिफ के चलते भारत को कुछ भी बेचना लगभग नामुमकिन है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत टैरिफ कम करने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका पर भारी शुल्क लगाता है, जिससे वहां कुछ भी बेचना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने 2 अप्रैल से उन देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने की बात कही जो अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:59:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>टैरिफ, भारत, डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति, शुल्क, कनाडा, मेक्सिको, व्यापार, चीन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की टैरिफ नीति की आलोचना करते हुए कहा कि उच्च टैरिफ के कारण भारत को कुछ भी बेचना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत टैरिफ कम करने के लिए तैयार हो गया है, क्योंकि अब कोई उनकी असलियत सामने ला रहा है।
<br><br>
ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका पर भारी शुल्क लगाता है, जिससे वहां कुछ भी बेचना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, भारत अब टैरिफ में कटौती करने को इच्छुक है। रॉयटर के अनुसार, ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको को कुछ वस्तुओं पर 25% टैरिफ से छूट दी है ताकि ऑटो निर्माताओं को मदद मिल सके, लेकिन यह छूट अस्थायी है और टैरिफ बढ़ सकते हैं।
<br><br>
ट्रंप ने यह भी कहा कि 2 अप्रैल से उन देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाए जाएंगे जो अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाते हैं, जैसे कि भारत और चीन। उन्होंने कनाडा पर भी दुग्ध उत्पादों और लकड़ी पर उच्च टैरिफ लगाने का आरोप लगाया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नोबेल शांति पुरस्कार: ट्रंप समेत 338 दावेदार</title>
<link>https://pratinidhi.in/nobel-peace-prize-338-contenders-including-donald-trump-pope-francis-and-antonio-guterres</link>
<guid>https://pratinidhi.in/nobel-peace-prize-338-contenders-including-donald-trump-pope-francis-and-antonio-guterres</guid>
<description><![CDATA[ नार्वेजियन नोबेल संस्थान ने 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 338 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें 244 व्यक्ति और 94 संगठन शामिल हैं। प्रमुख दावेदारों में डोनाल्ड ट्रंप, पोप फ्रांसिस, एंटोनियो गुटेरस और जेन्स स्टोलटेनबर्ग शामिल हैं। ट्रंप का नामांकन रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों के कारण महत्वपूर्ण है। मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच भी नामित हैं। नोबेल समिति नामों की पुष्टि नहीं करती, विजेताओं की घोषणा अक्टूबर में होगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:59:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>नोबेल शांति पुरस्कार, डोनाल्ड ट्रंप, पोप फ्रांसिस, एंटोनियो गुटेरस, जेन्स स्टोलटेनबर्ग, महरंग बलूच</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नोबेल शांति पुरस्कार: ट्रंप समेत 338 दावेदार, पोप फ्रांसिस और गुटेरस के नाम भी शामिल</strong><br/><br/>नार्वेजियन नोबेल संस्थान ने 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 338 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें 244 व्यक्ति और 94 संगठन शामिल हैं। पुरस्कार के लिए नामित प्रमुख हस्तियों में पोप फ्रांसिस, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस और नाटो के पूर्व महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग शामिल हैं।<br/><br/><strong>ट्रंप का नामांकन क्यों महत्वपूर्ण है?</strong><br/><br/>दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से ट्रंप विदेश नीति संबंधी कई फैसले ले रहे हैं, जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने और इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों को देखते हुए ट्रंप का नामांकन महत्वपूर्ण है।<br/><br/><strong>नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 338 उम्मीदवार</strong><br/><br/>2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 338 उम्मीदवार नामांकित हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 31 जनवरी थी। पिछले साल 286 उम्मीदवार नामांकित थे, जबकि 2016 में सबसे अधिक 376 उम्मीदवार नामांकित हुए थे। नोबेल समिति नामांकित व्यक्तियों के नामों की पुष्टि नहीं करती है।<br/><br/><strong>महरंग बलूच भी नामित</strong><br/><br/>पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वालीं महरंग बलूच को भी 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नामांकन उन हजारों बलूचों के लिए है, जिन्हें जबरन गायब कर दिया गया है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>मस्क ने कहा, संघीय कर्मचारियों को निकालने के लिए मैं जिम्मेदार नहीं</title>
<link>https://pratinidhi.in/elon-musk-denies-responsibility-for-federal-worker-firings</link>
<guid>https://pratinidhi.in/elon-musk-denies-responsibility-for-federal-worker-firings</guid>
<description><![CDATA[ एलन मस्क ने संघीय कर्मचारियों को निकालने के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि वह जिम्मेदार नहीं हैं। ट्रंप प्रशासन ने सरकारी खर्चों में कटौती के लिए सरकारी दक्षता विभाग बनाया था, जिसका नेतृत्व मस्क को सौंपा गया। मस्क ने रिपब्लिकन सांसदों से कहा कि कर्मचारियों को एजेंसियों ने निकाला। ट्रंप प्रशासन यूक्रेन युद्ध को हल करने के लिए रूस पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ईरान के सर्वोच्च नेता को एक पत्र लिखा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:59:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>एलन मस्क, डोनाल्ड ट्रंप, रिपब्लिकन पार्टी, संघीय कर्मचारी, बर्खास्तगी, सरकारी दक्षता विभाग</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>वाशिंगटन:</strong> एलन मस्क ने सरकारी कर्मचारियों को निकाले जाने के मामले में अपनी भूमिका पर सफाई दी है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों से कहा कि वह हजारों संघीय कर्मचारियों की बर्खास्तगी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। <br><br>डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने सरकारी खर्चों को कम करने के लिए सरकारी दक्षता विभाग बनाया था, जिसका नेतृत्व एलन मस्क को सौंपा गया था। मस्क ने कहा कि कर्मचारियों को एजेंसियों द्वारा निकाला गया था, न कि उनके द्वारा। <br><br>कैपिटल हिल में रिपब्लिकन सांसदों के साथ एक रात्रिभोज में, मस्क ने कहा कि उन्होंने किसी को नहीं निकाला। सांसद रिचर्ड हडसन ने कहा कि एलन लोगों को नौकरी से नहीं निकालते। मस्क ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन युद्ध को हल करने के लिए रूस पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। इसके अतिरिक्त, ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ईरान के सर्वोच्च नेता को एक पत्र लिखा था।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>जयशंकर ने बेलफास्ट में किया नए भारतीय वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन</title>
<link>https://pratinidhi.in/eam-jaishankar-inaugurates-new-indian-consulate-in-belfast-strengthening-india-uk-ties</link>
<guid>https://pratinidhi.in/eam-jaishankar-inaugurates-new-indian-consulate-in-belfast-strengthening-india-uk-ties</guid>
<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बेलफास्ट में नए भारतीय महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह भारत और ब्रिटेन के संबंधों की मजबूती का प्रतीक है। दूतावास का मुख्य उद्देश्य भारतीय समुदाय की सेवा करना, आर्थिक अवसरों को बढ़ाना और शिक्षा व प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करना है। जयशंकर ने यूके के साथ भारत के बढ़ते संबंधों और क्वींस यूनिवर्सिटी द्वारा भारत में उपस्थिति स्थापित करने के निर्णय का भी उल्लेख किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:59:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>एस जयशंकर, बेलफास्ट, भारतीय वाणिज्य दूतावास, भारत-ब्रिटेन संबंध, प्रवासी समुदाय</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>बेलफास्ट में भारतीय महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया</strong><br><br>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में नए भारतीय महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, उन्होंने कहा कि यह भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत होते संबंधों और प्रवासी समुदाय के योगदान का प्रतीक है।<br><br><strong>मुख्य उद्देश्य:</strong><br><ul><li>भारतीय समुदाय की सेवा करना</li><li>आर्थिक अवसरों को बढ़ाना</li><li>शिक्षा और प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करना</li></ul><br>जयशंकर ने कहा कि यूके के साथ भारत के संबंध गहरे हो रहे हैं, जिससे आर्थिक अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्वींस यूनिवर्सिटी ने भारत में अपनी उपस्थिति स्थापित करने का निर्णय लिया है।]]> </content:encoded>
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<title>टोरंटो पब में गोलीबारी: 11 घायल, हमलावर फरार</title>
<link>https://pratinidhi.in/firing-in-canada-toronto-pub-shooting-injures-11-police-search-for-suspect</link>
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<description><![CDATA[ कनाडा के टोरंटो में एक पब में हुई गोलीबारी में 11 लोग घायल हो गए। यह घटना शुक्रवार रात को प्रोग्रेस एवेन्यू और कॉर्पोरेट ड्राइव के पास हुई। पुलिस के अनुसार, हमलावर मौके से फरार हो गया और घायलों को अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने अभी तक हमलावर के मकसद और इस्तेमाल किए गए हथियार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है और मामले की जांच जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:48:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Canada, Toronto, Firing, Pub, Injured, Police</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>टोरंटो, कनाडा:</strong> शुक्रवार की रात, टोरंटो के एक पब में हुई गोलीबारी में 11 लोग घायल हो गए। यह घटना प्रोग्रेस एवेन्यू और कॉर्पोरेट ड्राइव के पास रात 10:30 बजे हुई। अधिकारियों के अनुसार, हमलावर मौके से फरार हो गया, और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।<br><br>पुलिस ने अभी तक हमलावर के मकसद और इस्तेमाल किए गए हथियार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। घटनास्थल के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जनता से सहयोग की अपील की है।<br><br>यह खबर लगातार अपडेट हो रही है। जागरण आपको पल-पल की खबरों से अपडेट रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए जागरण के साथ।]]> </content:encoded>
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<title>गणित के सूत्र से भगवान की खोज?</title>
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<description><![CDATA[ हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. विली सून ने भगवान को खोजने का दावा किया है और एक गणितीय सूत्र का खुलासा किया है। उनका कहना है कि ब्रह्मांड एक उन्नत गणितीय सिद्धांत की तरह डिजाइन किया गया है और भगवान को जानने का सूत्र सितारों में नहीं, बल्कि गणित में है। डॉ. सून ने &quot;फाइन ट्यूनिंग तर्क&quot; का हवाला देते हुए कहा कि ब्रह्मांड के भौतिक नियम जीवन को सहारा देने के लिए इतने सटीक रूप से कैलिब्रेट किए गए हैं कि यह केवल संयोग से नहीं हो सकता। गणितज्ञ पॉल डिराक ने भी ब्रह्मांड के भौतिक नियमों के संतुलन को गणितीय सिद्धांत से जोड़कर देखा था और कहा था कि ईश्वर ने ब्रह्मांड के निर्माण में बहुत एडवांस गणित का उपयोग किया है। डॉ. सून ने कहा कि गणित और ब्रह्मांड के बीच का संबंध दर्शाता है कि इसे एक निश्चित पैटर्न पर जानबूझकर डिजाइन किया गया है, जो ईश्वर ने ही किया होगा. ]]></description>
<enclosure url="http://navbharattimes.indiatimes.com/thumb/msid-118800528,imgsize-16199,width-540,height-405,resizemode-75/harvard-scientist-dr-willie-soon-claims-god-is-real-discovered-mathematical-formula-to-prove-it.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:41:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>भगवान, गणित, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक, फॉर्मूला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक ने भगवान को खोजने का दावा किया है और पहली बार एक गणितीय सूत्र का खुलासा किया है।</strong><br><br>वैज्ञानिक हमेशा से विज्ञान और धर्म को एक साथ जोड़ने से हिचकिचाते रहे हैं, लेकिन इस वैज्ञानिक का कहना है कि ब्रह्मांड का अध्ययन करने पर पता चलता है कि इसे एक उन्नत गणितीय सिद्धांत की तरह डिजाइन किया गया है।<br><br><strong>डॉ. विली सून ने एक गणितीय सूत्र का हवाला देते हुए भगवान को खोजने का दावा किया है।</strong> उनका कहना है कि भगवान को जानने का सूत्र सितारों में नहीं, बल्कि गणित में है। डॉ. सून, जो एक खगोलशास्त्री और एयरोस्पेस इंजीनियर हैं, ने दावा किया है कि एक गणितीय सूत्र ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण देता है। उन्होंने टकर कार्लसन नेटवर्क से बात करते हुए अपना सूत्र दुनिया के सामने पेश किया और सुझाव दिया कि ब्रह्मांड के रहस्य केवल सितारों में ही नहीं, बल्कि गणित की थ्योरी में भी लिखे जा सकते हैं।<br><br>डॉ. विली सून के सिद्धांत के केंद्र में "फाइन ट्यूनिंग तर्क" है। यह तर्क बताता है कि ब्रह्मांड के भौतिक नियम जीवन को सहारा देने के लिए इतने सटीक रूप से कैलिब्रेट किए गए हैं कि यह केवल संयोग से नहीं हो सकता। इस सूत्र को सबसे पहले कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गणितज्ञ पॉल डिराक ने प्रस्तावित किया था, जिन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि कैसे कुछ ब्रह्मांडीय स्थिरांक आश्चर्यजनक सटीकता के साथ एक दूसरे के साथ मिले होते हैं। यह एक ऐसी घटना है जिसने वैज्ञानिकों को दशकों से हैरान कर रखा है।<br><br>गणितज्ञ पॉल डिराक ने अनुमान लगाया है कि ब्रह्मांड के भौतिक नियमों का सही संतुलन गणितीय सिद्धांत को आधार बनाकर उसका विश्लेषण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह बहुत सुंदर और शक्तिशाली है, लेकिन इसे समझना अत्यंत मुश्किल है और इसके लिए किसी के पास काफी ज्यादा बुद्धि और सोचने-समझने की ताकत होनी चाहिए। डिराक ने 1963 में अपनी किताब में लिखा था कि ईश्वर एक बहुत बड़े गणितज्ञ हैं और उन्होंने ब्रह्मांड के निर्माण में बहुत एडवांस गणित का उपयोग किया है। डिराक को 'एंटीमैटर का जनक' माना जाता है।<br><br>डॉ. सून ने पॉडकास्ट में भगवान के अस्तित्व के बारे में अपनी बात समझाने के लिए डिराक की थ्योरी का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी शक्तियां हैं जो हमारे जीवन को रोशन करने लायक बनाती हैं। डॉ. सून ने तर्क दिया है कि गणित और ब्रह्मांड के बीच के संबंध को जानने से पता चलता है कि इसे एक निश्चित पैटर्न पर जानबूझकर डिजाइन किया गया है, जो ईश्वर ने ही किया होगा। उन्होंने कहा कि भगवान ने हमें यह प्रकाश दिया है, ताकि हम प्रकाश को फॉलो करें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।]]> </content:encoded>
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<title>जेफ बेजोस और लॉरेन सांचेज जल्द करेंगे शादी, यूरोप में होगी डेस्टिनेशन वेडिंग</title>
<link>https://pratinidhi.in/jeff-bezos-and-lauren-sanchez-are-getting-married-soon-destination-wedding-in-europe</link>
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<description><![CDATA[ अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस जल्द ही लॉरेन सांचेज के साथ शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। दोनों की सगाई दो साल पहले हुई थी और शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस साल गर्मी के मौसम में दोनों शादी कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, जेफ बेजोस और लॉरेन सांचेज की डेस्टिनेशन वेडिंग यूरोप में हो सकती है। सांचेज ने अपनी शादी की पोशाक ऑस्कर डे ला रेंटा से पहले ही खरीद ली है। इस शादी में करीब 600 मिलियन डॉलर खर्च होने की उम्मीद है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:38:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>जेफ बेजोस, लॉरेन सांचेज, शादी, डेस्टिनेशन वेडिंग, Amazon, Jeff Bezos, Lauren Sanchez, Marriage, Destination Wedding</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।</strong> दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस जल्द ही अपनी मंगेतर लॉरेन सांचेज के साथ शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।<br><br>खबरों के मुताबिक, दोनों की सगाई दो साल पहले हुई थी और शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस साल गर्मी के मौसम में दोनों शादी के बंधन में बंध सकते हैं।<br><br>सूत्रों के अनुसार, जेफ बेजोस और लॉरेन सांचेज की डेस्टिनेशन वेडिंग यूरोप में हो सकती है। सांचेज ने अपनी शादी की पोशाक ऑस्कर डे ला रेंटा से पहले ही खरीद ली है। इस शादी में करीब 600 मिलियन डॉलर खर्च होने की उम्मीद है।<br><br>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के हाई-प्रोफाइल हस्तियों को शादी में आने का निमंत्रण भेजा जा चुका है। शादी में बिल गेट्स, लियोनार्डो डिकैप्रियो जैसे शख्सियत शामिल हो सकते हैं। जेफ बेजोस ने शादी वेन्यू के तौर पर केविन कॉस्टनर को चुना है।<br><br>लॉरेन सांचेज एक जर्नलिस्ट, टीवी होस्ट और हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उन्होंने 2005 में हॉलीवुड एजेंट पैट्रिक व्हाइटसेल से शादी रचाई थी, जिनसे 2019 में उनका तलाक हो गया। 2018 से लॉरेन और जेफ रिश्ते में हैं।]]> </content:encoded>
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<title>यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए रूस पर ट्रंप का सख्त रुख</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-considers-sanctions-and-tariffs-on-russia-until-ukraine-peace-deal</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की बात कही है, जब तक यूक्रेन के साथ युद्धविराम और शांति समझौता नहीं हो जाता। ट्रंप ने रूस से यूक्रेन पर हमलों को रोकने का आग्रह किया है। ट्रंप का यह बयान उनके पहले के रुख से अलग है, जिसमें वे रूस के प्रति नरम और यूक्रेन के प्रति सख्त दिख रहे थे। रूस और यूक्रेन से जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने का भी आग्रह किया। ट्रंप ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह शांति समझौते के लिए केवल यूक्रेन पर दबाव नहीं डाल रहे हैं। इसे ट्रंप द्वारा खुद को निष्पक्ष दिखाने का प्रयास माना जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 13:09:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>रूस, यूक्रेन, डोनाल्ड ट्रंप, प्रतिबंध, टैरिफ, युद्धविराम, शांति समझौता</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर बड़े प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की बात कही है। <strong>यूक्रेन</strong> के साथ युद्धविराम और शांति समझौता नहीं होने तक रूस पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं। <br><br>ट्रंप ने रूस से <strong>यूक्रेन</strong> पर हमलों को रोकने का आग्रह किया है। ट्रंप का यह बयान उनके पहले के रुख से अलग है, जिसमें वे रूस के प्रति नरम और <strong>यूक्रेन</strong> के प्रति सख्त दिख रहे थे।<br><br>ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि रूस लगातार <strong>यूक्रेन</strong> पर हमले कर रहा है, इसलिए वे रूस पर बैंकिंग प्रतिबंध और टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं, जब तक कि युद्धविराम और शांति समझौता नहीं हो जाता। उन्होंने रूस और <strong>यूक्रेन</strong> से जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने का भी आग्रह किया। ट्रंप का यह बयान <strong>यूक्रेन</strong> पर रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद आया है।<br><br>ओवल ऑफिस में ट्रंप ने कहा कि रूस अभी भी <strong>यूक्रेन</strong> पर बमबारी कर रहा है और उन्होंने इस पर बयान जारी किया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध और टैरिफ कैसे काम करेंगे, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। रूस पर पहले से ही अमेरिका और पश्चिमी देशों ने कई प्रतिबंध लगाए हैं, जो रूस के तेल निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार को लक्षित करते हैं। हालांकि, रूस ने भारत और चीन को रियायती तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखा है।<br><br>जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या <strong>यूक्रेन</strong> पर हमला अमेरिका के सैन्य सहयोग रोकने के कारण हुआ, तो उन्होंने कहा कि पुतिन वही कर रहे हैं जो कोई और करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह जानना चाहते हैं कि क्या <strong>यूक्रेन</strong> समझौता करना चाहता है। ट्रंप ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह शांति समझौते के लिए केवल <strong>यूक्रेन</strong> पर दबाव नहीं डाल रहे हैं। इसे ट्रंप द्वारा खुद को निष्पक्ष दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का भारत पर टैरिफ को लेकर यू&amp;टर्न: दिल्ली उत्पादों पर टैरिफ कम करने को राजी</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-says-india-agreed-to-cut-their-tariffs-way-down-on-us-products</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर राजी हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलता है, जो एक तरह से बैन के समान है। ट्रंप की यह टिप्पणी भारत के अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की बात कहने के कुछ घंटों बाद आई है। पीएम मोदी और ट्रंप ने 13 फरवरी को वॉशिंगटन डीसी में बातचीत की थी, जिसमें दोनों पक्ष इस साल के अंत तक एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत करने और 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वार्षिक व्यापार का लक्ष्य रखने पर सहमत हुए थे। अमेरिका की ओर से दबाव के बाद भारत सरकार ने हालिया बजट में कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने की घोषणा की है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 13:09:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, India, Tariff, Trade, US Products</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ को लेकर लगातार दबाव बनाया है। उन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र में भारत, चीन और कनाडा को घेरा और कहा कि भारत अमेरिकी वाहनों पर 100% टैरिफ लगाता है।</p><br><p>ट्रंप ने कहा है कि भारत टैरिफ कम करने पर राजी हो गया है क्योंकि उन्होंने भारत की टैरिफ नीति पर बात की थी। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलता है, जो एक तरह से बैन के समान है। अब भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में कटौती करना चाहता है।</p><br><p>ट्रंप की यह टिप्पणी भारत के अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की बात कहने के कुछ घंटों बाद आई है, जिसमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना शामिल है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात हुई थी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी अमेरिका में द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की है।</p><br><p>ट्रंप ने पद संभालने के बाद से ही टैरिफ के मामले में भारत को घेरा है और कहा है कि भारत की ओर से अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ बहुत ज्यादा है। पीएम मोदी और ट्रंप ने 13 फरवरी को वॉशिंगटन डीसी में बातचीत की थी, जिसमें दोनों पक्ष इस साल के अंत तक एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत करने और 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वार्षिक व्यापार का लक्ष्य रखने पर सहमत हुए थे।</p><br><p>अमेरिका की ओर से दबाव के बाद भारत सरकार ने हालिया बजट में कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत का उद्देश्य व्यापार को बढ़ाना और व्यापार घाटे को कम करना है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>फ्रांस को मिला अरबों का खजाना, तेल की चिंता खत्म</title>
<link>https://pratinidhi.in/france-uncovers-largest-hydrogen-deposit-worth-trillions</link>
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<description><![CDATA[ फ्रांस ने ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोजन भंडार को खोजने का दावा किया है। मोसेल क्षेत्र में स्थित इस भंडार में 46 मिलियन टन प्राकृतिक हाइड्रोजन मौजूद है, जिसकी अनुमानित कीमत 92 ट्रिलियन डॉलर है। इस खोज से फ्रांस जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। जियोरिसोर्सेज प्रयोगशाला और सीएनआरएस के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह भंडार अप्रत्याशित रूप से मिला, जब वे मीथेन की खोज कर रहे थे। सफेद हाइड्रोजन, जो हरे और ग्रे हाइड्रोजन से अलग है, बिना किसी जटिल औद्योगिक प्रक्रिया और CO2 उत्सर्जन के प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह खोज ऊर्जा उत्पादन में क्रांति ला सकती है, क्योंकि यह स्वच्छ, कम लागत वाला और कुशल विकल्प प्रदान करता है। इस खोज के बाद, लोरेन क्षेत्र हाइड्रोजन उत्पादन का केंद्र बन सकता है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और फ्रांस यूरोप की ऊर्जा स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 12:34:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>हाइड्रोजन भंडार, फ्रांस, ग्रीन एनर्जी, जीवाश्म ईंधन, लोरेन</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[फ्रांस ने जमीन के नीचे दबे एक बड़े खजाने का पता लगाया है, जिससे अब उसे तेल खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी। फ्रांस ने दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोजन भंडार को खोजने का दावा किया है, जिसमें 46 मिलियन टन प्राकृतिक हाइड्रोजन मौजूद है। इस भंडार की अनुमानित कीमत 92 ट्रिलियन डॉलर है, जो भविष्य में और भी बढ़ सकती है। इस खोज से फ्रांस की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता समाप्त हो सकती है।<br><br>फ्रांस ने ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाते हुए दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोजन भंडार की खोज की घोषणा की है। यह भंडार मोसेल क्षेत्र में फोल्सविलर की मिट्टी के नीचे स्थित है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्राकृतिक हाइड्रोजन भंडार की कुल मात्रा 46 मिलियन टन है, जिसकी वर्तमान कीमत 92 ट्रिलियन डॉलर है और यह समय के साथ कई गुना बढ़ सकती है। इस खोज को फ्रांस के लिए एक छिपे हुए खजाने के रूप में देखा जा रहा है, जो ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है।<br><br>जियोरिसोर्सेज प्रयोगशाला और सीएनआरएस के शोधकर्ताओं ने इस खोज को अंजाम दिया है। उन्होंने बताया कि यह खोज अप्रत्याशित थी। वैज्ञानिक मीथेन की खोज कर रहे थे, लेकिन उन्हें 1,250 मीटर भूमिगत प्राकृतिक हाइड्रोजन का विशाल भंडार मिला। यह खोज दुनिया के सालाना ग्रे हाइड्रोजन उत्पादन के आधे से अधिक का प्रतिनिधित्व करती है, बिना कार्बन उत्सर्जन के।<br><br>यह सफेद हाइड्रोजन, हरे और ग्रे हाइड्रोजन से अलग है, क्योंकि इसके लिए जटिल औद्योगिक उत्पादन की आवश्यकता नहीं होती और न ही यह CO2 उत्सर्जन उत्पन्न करता है। यह प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद है और इसका दोहन किया जाना बाकी है। सही तरीके से दोहन करने पर, यह संसाधन दुनिया भर में ऊर्जा के उत्पादन और उपभोग के तरीके को बदल सकता है।<br><br>हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था वर्षों से दो प्रमुख बाधाओं से रुकी हुई थी: ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की लागत और जटिलता, जिसके लिए नवीकरणीय बिजली की आवश्यकता होती है, और ग्रे हाइड्रोजन से जुड़ा प्रदूषण, जो जीवाश्म ईंधन से प्राप्त होता है। सफेद हाइड्रोजन इन चुनौतियों को आसानी से हल कर सकता है। यह पहले से ही मौजूद है और निकाले जाने के लिए तैयार है, जो एक स्वच्छ, कम लागत वाला और कुशल विकल्प प्रदान करता है। इसमें ऊर्जा इलेक्ट्रोलिसिस और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि यह बिजली का एक प्राकृतिक स्रोत है, जिसका उपयोग किया जा सकता है।<br><br>इसकी क्षमता बहुत अधिक है। यदि ऐसी ही भूवैज्ञानिक संरचनाएं अन्य जगहों पर भी मौजूद हैं, तो यह सस्टेनेबल एनर्जी प्रोडक्शन में वैश्विक क्रांति ला सकता है। दुनिया भर के देशों को बिना महंगे हाइड्रोजन उत्पादन बुनियादी ढांचे में निवेश किए स्वच्छ ईंधन स्रोत मिल सकता है। हाइड्रोजन की दौड़ में फ्रांस का रणनीतिक लाभ है। ऊर्जा नवाचार के बारे में सोचते समय लोरेन शायद पहली जगह न हो, लेकिन यह खोज इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण बना सकती है।<br><br>कोयला और इस्पात उद्योगों का केंद्र रहे लोरेन के पास अब हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी बनने का अवसर है। इसके परिणाम बहुत बड़े होंगे, क्योंकि निष्कर्षण से लेकर हाइड्रोजन आधारित उद्योगों तक, रोजगार सृजन में वृद्धि हो सकती है। स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का पुनरुद्धार संभव है और परित्यक्त खनन क्षेत्रों को ऊर्जा केंद्रों में बदला जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर, फ्रांस यूरोप की ऊर्जा स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर सकता है। यदि फ्रांस तेजी से आगे बढ़ता है, तो वह सफेद हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी बन सकता है, अपनी विशेषज्ञता का निर्यात कर सकता है और इस क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान बना सकता।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पुतिन के बाद खामेनेई... ट्रंप की विदेश नीति देखें, ईरानी सर्वोच्च नेता को लिखी चिट्ठी, परमाणु कार्यक्रम पर क्या कहा</title>
<link>https://pratinidhi.in/donald-trump-iran-nuclear-deal-khamenei-trump-foreign-policy</link>
<guid>https://pratinidhi.in/donald-trump-iran-nuclear-deal-khamenei-trump-foreign-policy</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को पत्र लिखकर परमाणु समझौते पर बातचीत का प्रस्ताव दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान बातचीत के लिए सहमत होगा, क्योंकि यह उनके लिए बेहतर होगा। व्हाइट हाउस ने ट्रंप की टिप्पणियों की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी तो यह भयानक होगा। ईरान ने हमेशा कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में परमाणु हथियारों को आगे बढ़ाने की संभावना पर संकेत दिया गया है। खामेनेई के कार्यालय से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 12:15:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Iran, Nuclear Deal, Ayatollah Ali Khamenei, US Foreign Policy, Iran Nuclear Program, Negotiations</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने बातचीत के लिए सहमत होने की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने कहा कि बातचीत ईरान के लिए बेहतर होगी।<br><br><b>ट्रंप ने खामनेई को लिखी चिट्ठी</b><br><br>तेहरान में, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को संभावित परमाणु समझौते के बारे में एक पत्र भेजा है। फॉक्स बिजनेस न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने परमाणु समझौते पर बातचीत करने के लिए ईरानी नेतृत्व से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खामनेई को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने बातचीत करने की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी तो यह भयानक होगा।<br><br><b>ट्रंप ने खामेनेई को भेजी चिट्ठी</b><br><br>व्हाइट हाउस ने ट्रंप की टिप्पणियों की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों को बातचीत का प्रस्ताव देते हुए एक पत्र भेजा है। ट्रंप ने कहा कि वह एक समझौते पर बातचीत करना पसंद करेंगे और उन्हें यकीन है कि हर कोई उनसे सहमत होगा। उन्होंने कहा कि वे एक ऐसा सौदा कर सकते हैं जो सैन्य जीत जितना ही अच्छा होगा।<br><br><b>ट्रंप ने ईरान को दी धमकी</b><br><br>ट्रंप ने कहा कि अब समय आ गया है और किसी न किसी तरह से कुछ तो होगा ही। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान बातचीत करेगा क्योंकि यह उनके लिए बहुत बेहतर होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि दूसरा विकल्प यह है कि उन्हें कुछ करना होगा क्योंकि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते।<br><br><b>ईरान ने परमाणु हथियारों से किया है इनकार</b><br><br>ईरान ने हमेशा कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि, प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका के साथ तनाव जारी रहने और गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल के युद्ध में नाजुक संघर्ष विराम के कारण, ईरानी अधिकारियों ने परमाणु हथियारों को आगे बढ़ाने की संभावना पर संकेत दिया है।<br><br><b>खामेनेई ने नहीं दिया कोई जवाब</b><br><br>ट्रंप के बयान पर खामेनेई के कार्यालय से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के महत्व पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था की एक हालिया रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि ईरान ने हथियार-स्तर के यूरेनियम का उत्पादन तेज कर दिया है।]]> </content:encoded>
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<title>ईरान ने दिखाई हथियारों की ताकत, अमेरिका&amp;इजरायल में मची खलबली</title>
<link>https://pratinidhi.in/iran-showcases-new-weapons-amid-us-israel-tensions</link>
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<description><![CDATA[ ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के बीच अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। उसने पहली बार कई नए हथियार दुनिया के सामने पेश किए हैं, जिनमें मिसाइलें, युद्धपोत, तेज गति से हमला करने वाले क्राफ्ट, ड्रोन, लड़ाकू विमान और भूमिगत सैन्य सुविधाएं शामिल हैं। ईरान को आशंका है कि इजरायल उसके परमाणु ठिकानों पर हमला कर सकता है। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) पिछले कुछ महीनों से बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, जिसमें नए रक्षात्मक और आक्रामक हथियारों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इन अभ्यासों में, ईरानी सेना, नौसेना और वायु सेना ने &#039;इक्तेदार&#039;, &#039;ज़ोल्फ़कार&#039; और &#039;ग्रेट प्रोफेट&#039; जैसे युद्धाभ्यास किए। ईरान ने भूमिगत सैन्य ठिकानों का भी खुलासा किया है और विभिन्न प्रकार की मिसाइलों, युद्धक विमानों और नौसैनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 12:15:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, हथियार, मिसाइल, इजरायल, अमेरिका, युद्धपोत, ड्रोन, सैन्य अभ्यास</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>ईरान ने दिखाई हथियारों की ताकत, अमेरिका-इजरायल में मची खलबली</strong><br><br>ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है। उसने पहली बार कई नए हथियार दुनिया के सामने पेश किए हैं। इनमें मिसाइलें, युद्धपोत, तेज गति से हमला करने वाले क्राफ्ट, ड्रोन, लड़ाकू विमान और भूमिगत सैन्य सुविधाएं शामिल हैं। ईरान को आशंका है कि इजरायल उसके परमाणु ठिकानों पर हमला कर सकता है।<br><br><strong>ईरान की सैन्य प्रदर्शनी</strong><br><br>तेहरान: ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) पिछले कुछ महीनों से बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, जिसमें नए रक्षात्मक और आक्रामक हथियारों का प्रदर्शन और परीक्षण किया जा रहा है। ये सैन्य तैयारी अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, ऊर्जा के बुनियादी ढांचे और सैन्य स्थलों पर बमबारी की धमकी के बीच हो रही है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्ष भी पिछले वर्षों की तरह ही उथल-पुथल भरे हो सकते हैं। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त युद्धाभ्यास के जवाब में ईरान ने अपने दुश्मनों पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।<br><br>ईरानी सेना, नौसेना और वायु सेना 'इक्तेदार', 'ज़ोल्फ़कार' और 'ग्रेट प्रोफेट' जैसे युद्धाभ्यास कर रही है। ये अभ्यास ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में हुए हैं। हथियारों के परीक्षण से पता चलता है कि ईरान, इजरायल और पश्चिमी देशों के खिलाफ अपनी सैन्य तैयारी को मजबूत कर रहा है। उसने डोनाल्ड ट्रंप की 'अधिकतम दबाव' नीति के तहत अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया है। इसके अलावा, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को भी तेज कर दिया है।<br><br><strong>गुप्त मिसाइल शहर</strong><br><br>आईआरजीसी ने तीन भूमिगत सैन्य ठिकानों का खुलासा किया है। ईरानी कमांडरों ने कहा है कि वे लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई के लिए तैयार हैं। सरकारी टेलीविजन पर दिखाए गए फुटेज में बंकरों में सैकड़ों मिसाइलें दिखाई गईं। ईरानी सेना ने इसे 'मिसाइल मेगासिटी' का नाम दिया। इस बंकर जैसे ढांचे के अंदर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दिखाई दीं, जिनमें से कुछ को तुरंत तैनात करने के लिए लांचर पर रखा गया था।<br><br><strong>कौन-कौन सी मिसाइलें दिखीं</strong><br><br><strong>खोर्रमशहर-4:</strong> यह एक तरल ईंधन वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज 2,000 किमी है और यह दो टन तक के वारहेड ले जा सकती है।<br><br><strong>जहाद:</strong> यह एक तरल ईंधन वाली मिसाइल है, जो 650 किलोग्राम के वारहेड के साथ 1,000 किमी तक जा सकती है।<br><br><strong>एल360:</strong> यह एक ठोस ईंधन वाली मिसाइल है, जो 150 किलोग्राम विस्फोटक के साथ 180 किमी तक जा सकती है।<br><br><strong>क़द्र:</strong> यह दो चरणों वाली मिसाइल है, जो 2,000 किलोमीटर तक जा सकती है और 750 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है।<br><br><strong>इमाद:</strong> यह एक तरल ईंधन वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज लगभग 1,800 किलोमीटर है और यह 750 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है।<br><br><strong>भूमिगत नौसेना बेस</strong><br><br>आईआरजीसी नौसेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर एक गुप्त भूमिगत नौसैनिक अड्डे का प्रदर्शन किया। इसके अंदर, मिसाइल ले जाने वाली कई स्पीडबोट और एंटी-शिप माइंस के साथ-साथ एक नई क्रूज मिसाइल 'क़द्र-380' भी दिखाई गई। यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक निशाना साध सकती है, जिसका मतलब है कि ईरान अपने क्षेत्र के अंदर से जहाजों पर हमला करने में सक्षम होगा। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि उसके पास 2,000 किलोमीटर की रेंज वाली एक नई एंटी-शिप सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे वह जल्द ही प्रदर्शित करेगा।<br><br><strong>युद्धक विमान</strong><br><br>ईरान ने अपने लड़ाकू विमानों का भी प्रदर्शन किया, जिनमें कुछ घरेलू मॉडल जैसे 'सैकेह' और 'अजारख्श' शामिल थे, साथ ही कई पुराने अमेरिकी और रूसी मॉडल भी थे जो ईरान की 1979 की क्रांति से पहले के हैं। उसने अभ्यास के दौरान दुश्मन के ड्रोन को रोकने के लिए मिग-29 लड़ाकू विमानों और नए रूसी याक-130 विमानों का भी इस्तेमाल किया।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>सीरिया में भीषण संघर्ष: असद समर्थकों और सरकार के बीच लड़ाई में 180 से अधिक की मौत</title>
<link>https://pratinidhi.in/syria-face-worst-violence-since-ouster-of-assad-regime-hundreds-killed-in-clashes</link>
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<description><![CDATA[ सीरिया में असद समर्थकों और सरकार के बीच भीषण संघर्ष जारी है, जिसमें दो दिनों में 180 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। सरकार का कहना है कि असद के वफादार लड़ाकों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद हिंसा शुरू हुई। वहीं, सुरक्षाबलों पर रिहाइशी इलाकों पर बमबारी करने का आरोप है। इस हिंसा पर सऊदी अरब, तुर्की, रूस, ईरान और संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी 180 लोगों की मौत की पुष्टि की है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 11:35:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>सीरिया, असद, संघर्ष, मौत, चिंता, हिंसा, सुरक्षाबल, विद्रोह, अलवी समुदाय, अहमद अल-शरा, अबू मोहम्मद अल जुलानी, HTS, दमिश्क, लताकिया, बशर अल असद</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>दमिश्क:</strong> सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थकों और अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (अबू मोहम्मद अल जुलानी) की सरकार के सुरक्षाबलों के बीच भीषण लड़ाई हो रही है। असद के अलावी समुदाय के लड़ाकों और सरकारी सुरक्षाबलों की झड़पों में दो दिनों में 180 से अधिक लोग मारे गए हैं।<br><br>सरकार का कहना है कि असद के वफादार लड़ाकों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। वहीं, सुरक्षाबलों पर रिहाइशी इलाकों पर बमबारी करने के आरोप लगे हैं। दिसंबर में बशर अल असद को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद यह सबसे भीषण हिंसक झड़प है। इस हिंसा पर सऊदी अरब, तुर्की, रूस, ईरान और संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है।<br><br><em>पश्चिमी सीरिया में स्थिति तनावपूर्ण:</em> सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी सीरिया के तटीय क्षेत्र में अलवी समुदाय के लड़ाकों को काबू करने के लिए सीरियाई सुरक्षाबलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (SOHR) ने इस हिंसा में 180 लोगों की मौत की पुष्टि की है। यह इलाका अलवी समुदाय का गढ़ माना जाता है, और पूर्व राष्ट्रपति असद भी इसी समुदाय से हैं। असद को पिछले साल दिसंबर में अल जुलानी के नेतृत्व में HTS ने सत्ता से बेदखल कर दिया था, और वे फिलहाल रूस में शरण लिए हुए हैं।<br><br><em>आरोप-प्रत्यारोप:</em> सीरियाई अधिकारियों का कहना है कि हिंसा तब शुरू हुई जब असद के वफादार लड़ाकों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया। असद समर्थक मिलिशिया समूहों ने जबलेह क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा गश्ती दल और चौकियों को निशाना बनाया। जवाब में, सुरक्षाबलों ने अलावी समुदायों के गांवों में बमबारी की।<br><br>अलवी मौलवियों के समूह, अलवी इस्लामिक काउंसिल ने सरकार पर हिंसा का आरोप लगाते हुए कहा कि सीरियाई लोगों को आतंकित किया जा रहा है। काउंसिल ने अलावी क्षेत्र को संयुक्त राष्ट्र के संरक्षण में रखने की मांग की है।]]> </content:encoded>
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<item>
<title>इजरायल पर करम और यूक्रेन पर सितम; डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति का क्या है चीन कनेक्शन</title>
<link>https://pratinidhi.in/israel-karma-and-ukraine-sitam-donald-trump-strategy-china-connection</link>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद विदेश नीति में बदलाव आए हैं। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को फटकार लगाई और फंडिंग रोक दी, जबकि इजरायल के लिए 4 अरब डॉलर का फंड मंजूर किया। बाइडेन सरकार का इजरायल को हथियार फंडिंग रोकने का फैसला पलटा गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप यूक्रेन को युद्ध रोकने के लिए मनाकर रूस को साधना चाहते हैं, ताकि चीन के साथ ट्रेड वॉर में मुकाबला किया जा सके। इजरायल को फंडिंग जारी है क्योंकि उसने सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन से संबंध बना लिए हैं। ईरान से अमेरिका की अदावत के चलते इजरायल की फंडिंग बढ़ाई जा रही है, क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि हमास से जंग में इजरायल को अस्तित्व का खतरा है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड एफ. बेंसेल के अनुसार, यूक्रेन का मामला धार्मिक नहीं है, इसलिए उससे दूरी बनाने से अमेरिका को नुकसान नहीं है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायल को तत्काल 4 अरब डॉलर का फंड जारी करने का आदेश दिया है, क्योंकि बाइडेन प्रशासन ने हथियारों की सप्लाई पर रोक लगा दी थी, जिसे अब हटा दिया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Mar 2025 13:59:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>World News In Hindi, Donald Trump, Israel</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में, घरेलू और विदेश नीति दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं।<br><br>ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान अपनी असहमति व्यक्त की और यूक्रेन के लिए फंडिंग रोक दी, जबकि इजरायल के लिए 4 बिलियन डॉलर की सहायता राशि मंजूर की गई।<br><br>बाइडेन सरकार के उस फैसले को पलट दिया गया, जिसमें इजरायल को हथियारों की फंडिंग रोकने का प्रावधान था।<br><br>ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका इजरायल के लिए फंडिंग क्यों बढ़ा रहा है और यूक्रेन के साथ विपरीत व्यवहार क्यों कर रहा है? <br><br>विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी यूक्रेन को युद्ध रोकने के लिए मनाकर रूस को साधना चाहते हैं।<br><br>एक रणनीति यह है कि रूस को साथ लेकर चीन के साथ व्यापार युद्ध (Trade War) में मुकाबला किया जाए, जिसके चलते यूक्रेन से संबंध सीमित किए जा रहे हैं।<br><br>इजरायल को फंडिंग जारी रखने का कारण यह है कि इजरायल ने पहले ही सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों के साथ संबंध स्थापित कर लिए हैं। <br><br>अमेरिका के लिए यूक्रेन युद्ध जैसी कोई मजबूरी नहीं है। इजरायल के मामले में सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देश तटस्थ भूमिका में हैं, जबकि हमास को ईरान से समर्थन मिल रहा है।<br><br>ईरान के साथ अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण हैं, इसलिए अमेरिका ईरान और उसके समर्थक आतंकवादी संगठनों (हमास, हिजबुल्लाह) से निपटने के लिए इजरायल की फंडिंग बढ़ा रहा है।<br><br>ट्रंप ने कहा है कि हमास के साथ युद्ध में इजरायल अपने अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहा है, इसलिए इस युद्ध को निर्णायक रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।<br><br>कॉर्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रिचर्ड एफ. बेंसेल के अनुसार, यूक्रेन का मामला धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिए उससे दूरी बनाने से अमेरिका को कोई नुकसान नहीं है।<br><br>इससे न तो नैरेटिव खराब होता है और न ही आर्थिक नुकसान होता है। अमेरिका में यूक्रेनी लॉबी भी इतनी मजबूत नहीं है कि सरकार पर दबाव बना सके।<br><br>अमेरिका इजरायल का खुलकर समर्थन कर रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 4 बिलियन डॉलर की तत्काल फंडिंग जारी करने का आदेश दिया है। यह फंड इजरायल को सैन्य सहायता के लिए है।<br><br>रुबियो ने कहा कि बाइडेन प्रशासन ने इजरायल को हथियारों की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी, जो कि एक गलत फैसला था, जिसे अब बदल दिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप से बड़ा इजरायल का कोई हितैषी नहीं है।]]> </content:encoded>
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<title>दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बना ढाका, हर साल Pollution से जा रही लाखों लोगों की जान</title>
<link>https://pratinidhi.in/dhaka-most-polluted-city</link>
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<description><![CDATA[ ढाका दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां हर साल प्रदूषण से लाखों लोगों की जान जा रही है। IQAir की रिपोर्ट के अनुसार, चीन का बीजिंग, उज्बेकिस्तान का ताशकंद और इराक का बगदाद क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। 151 और 200 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को अस्वस्थ माना जाता है, जबकि 201-300 को बहुत अस्वस्थ और 301-400 को खतरनाक माना जाता है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के एक अध्ययन के अनुसार, बांग्लादेश में वायु प्रदूषण के कारण सालाना 102,456 मौतें होती हैं। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण से दुनिया भर में हर साल लाखों लोग मारे जाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:27:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Pollution, Dhaka, Bangladesh, Air Quality, WHO</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर: प्रदूषण से हर साल लाखों लोगों की जान जा रही है</strong></p><br><p><strong>ढाका:</strong> पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजधानी ढाका दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में सबसे ऊपर है। प्रदूषण के चलते बांग्लादेश में हर साल लाखों लोगों की जान जा रही है। IQAir की रिपोर्ट के अनुसार, चीन का बीजिंग, उज्बेकिस्तान का ताशकंद और इराक का बगदाद क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।</p><br><p><strong>खतरनाक वायु गुणवत्ता सूचकांक:</strong></p><br><p>151 और 200 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को अस्वस्थ माना जाता है, जबकि 201-300 को बहुत अस्वस्थ और 301-400 को खतरनाक माना जाता है। AQI की गणना पांच प्रमुख वायु प्रदूषकों के लिए की जाती है, जिसमें पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन शामिल हैं।</p><br><p><strong>प्रदूषण से सालाना लाखों मौतें:</strong></p><br><p>सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के एक अध्ययन के अनुसार, बांग्लादेश में वायु प्रदूषण के कारण सालाना 102,456 मौतें होती हैं।</p><br><p><strong>WHO की रिपोर्ट:</strong></p><br><p>विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण से दुनिया भर में हर साल लाखों लोग मारे जाते हैं। WHO के आंकड़ों से पता चलता है कि 10 में से 9 लोग उच्च स्तर के प्रदूषकों वाली हवा में सांस लेते हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जय श्री राम के नारे लगाते बांग्लादेशी हिंदू, BSF से भारत में आने की कर रहे गुहार</title>
<link>https://pratinidhi.in/Bangladeshi-Hindus-chanting-Jai-Shri-Ram-and-requesting-BSF-to-let-them-enter-India</link>
<guid>https://pratinidhi.in/Bangladeshi-Hindus-chanting-Jai-Shri-Ram-and-requesting-BSF-to-let-them-enter-India</guid>
<description><![CDATA[ बांग्लादेश में फैली अशांति ने हजारों बांग्लादेशी हिंदुओं को अपने घरों से विस्थापित कर दिया है, और अब ये लोग बंगाल के कूचबिहार के सितालकुची में बॉर्डर के नजदीक जमा हो रहे हैं। अपनी जान बचाने के लिए ये लोग भारत में प्रवेश की गुहार लगा रहे हैं। बीएसएफ, जो सीमा सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है, ने इन प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए हर कदम पर नजर बनाए रखी है। खासकर उत्तर 24 परगना के इलाकों में, पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश से लोगों के आने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे सीमा पर तनाव का माहौल बन गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 10 Aug 2024 11:30:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>बांग्लादेश में फैली अशांति ने हजारों बांग्लादेशी हिंदुओं को अपने घरों से विस्थापित कर दिया है, और अब ये लोग बंगाल के कूचबिहार के सितालकुची में बॉर्डर के नजदीक जमा हो रहे हैं।</media:keywords>
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