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<title>Pratinidhi &amp; News Magazine &amp; : चुनाव</title>
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<description>Pratinidhi &amp; News Magazine &amp; : चुनाव</description>
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<dc:rights>Copyright 2023 Pratinidhi &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>

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<title>SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त! ममता की याचिका पर दो टूक, ‘किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं’</title>
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<description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। ममता ने 1.36 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम गलत स्पेलिंग या पते बदलने के कारण हटाने की आशंका जताई है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त 8,300 माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी सवाल उठाए हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के अधिकारी बताया गया है। कोर्ट ने बंगाल सरकार से अधिकारियों के नाम भेजने में देरी पर सवाल किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:14:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>SIR प्रक्रिया West Bengal, सुप्रीम कोर्ट आदेश, मतदाता सूची revision, Mamata Banerjee petition, West Bengal politics news, voter list discrepancies, Election Commission monitoring, micro observers controversy, Supreme Court hearing update, Bengal voter list issue</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>देश की सबसे ऊंची अदालत ने सोमवार को एक बेहद सख्त संदेश देते हुए साफ कर दिया कि विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया में अब किसी भी तरह की रुकावट या राजनीतिक दखल को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में जारी SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अहम याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे जोर के साथ कहा कि SIR प्रक्रिया हर हाल में बिना किसी व्यवधान, बिना किसी दबाव और बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरी की जानी चाहिए। अदालत ने सभी राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में सहयोग करें, वरना कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।</p>
<p>सुनवाई के दौरान कोर्ट पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर भी विचार कर रहा था, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची में मौजूद ‘तार्किक विसंगतियों’ को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। इन मुद्दों पर गहराई से चर्चा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की समय-सीमा में एक सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दे दी है।</p>
<p>ममता बनर्जी ने अदालत में दावा किया कि मतदान सूची में 1.36 करोड़ से अधिक नाम ऐसे हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने 'लॉजिकल एरर' बताकर संदेह के दायरे में रखा है, और यह संख्या किसी भी राज्य की राजनीति को हिलाने के लिए काफी है।</p>
<p>उनका कहना है कि गलत स्पेलिंग, शादी के बाद बेटियों के पते बदलने या अन्य तकनीकी त्रुटियों की वजह से लाखों लोगों के वोट काटे जाने की आशंका बन रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह सब योजनाबद्ध ढंग से किया जा रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार हो रहा है।</p>
<p>यही नहीं, ममता ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त किए गए 8,300 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि इनमें से अधिकांश केंद्र सरकार के अधिकारी हैं। उनकी मान्यता है कि इनकी तैनाती बिना संवैधानिक अधिकार और पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने की नीयत से की गई है, जिसके जरिये वोटर्स के नाम हटाने की कोशिशें की जा रही हैं।</p>
<p>इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर यह आरोप भी लगाया गया कि ममता बनर्जी का व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना और SIR मामले पर बहस करना संवैधानिक रूप से अनुचित है। चार फरवरी को वह सुप्रीम कोर्ट में दलील देने वाली देश की पहली सेवारत मुख्यमंत्री बनी थीं, जिसने देशभर में जोरदार चर्चा छेड़ दी।</p>
<p>प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजानिया की तीन जजों की पीठ ने सोमवार को इस पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई की, जिसमें ममता बनर्जी की वह याचिका भी शामिल थी जो चुनाव आयोग की SIR कवायद का जोरदार विरोध करती है।</p>
<p>सतीश कुमार अग्रवाल, जो अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं, ने याचिका दायर कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ममता की याचिका किसी निजी विवाद से नहीं जुड़ी, बल्कि यह राज्य शासन और चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकारों से संबंधित एक बड़ा मुद्दा है।</p>
<p>अग्रवाल का तर्क है कि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत क्षमता का दावा नहीं कर सकतीं, क्योंकि यह मामला पूरे राज्य और उसकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है। इसलिए बंगाल का प्रतिनिधित्व केवल अधिकृत वकीलों द्वारा ही होना चाहिए और वे पहले से ही अदालत में मौजूद हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मुंबई की सत्ता में भूकंप! BMC चुनाव के रुझानों में उद्धव सेना धराशायी, BJP+ ने बनाई तूफानी बढ़त</title>
<link>https://pratinidhi.in/bmc-election-results-2026-early-counting-bjp-ahead-uddhav-faction-behind-latest-updates</link>
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<description><![CDATA[ विभिन्न एग्जिट पोल्स ने मुंबई बीएमसी चुनावों में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन की बड़ी जीत की भविष्यवाणी की है. अब यह एग्जिट पोल्स कितने सही साबित हो पाते हैं, इसका पता अब से कुछ देर बाद चलेगा जब मतगणना शुरू होगी.  मतगणना के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और सभी काउंटिंग सेंटर्स पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 10:34:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>BMC election results 2026, मुंबई BMC chunav update, BJP Shiv Sena alliance lead, Uddhav Thackeray guth latest, Mumbai vote counting news, Maharashtra nagar nigam result, BMC ward wise results, Mumbai political update, BJP lead trends Mumbai</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>मुंबई की सत्ता की सबसे बड़ी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. सुबह 10 बजे से महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के वोटों की गिनती शुरू होते ही राजनीतिक माहौल अचानक बारूद की तरह गर्म हो गया. लेकिन सबसे ज्यादा रोमांच उस निगम पर है, जिसे देश की सबसे अमीर नगर पालिका कहा जाता है—BMC! गुरुवार को 227 वार्डों में हुई करीब 52.94% वोटिंग अब किसकी किस्मत चमकाएगी, यह आज साफ हो जाएगा.</p>
<p>मतगणना के लिए बनाए गए 23 विशाल काउंटिंग सेंटरों में सुबह से ही सियासत की धड़कनें तेज हो चुकी हैं. हर कमरे में तनाव, हर टेबल पर मुकाबला! और हम लगातार आपको दे रहे हैं हर राउंड, हर वार्ड का पल-पल का अपडेट—कौन आगे, कौन पीछे और कौन बनने वाला है मुंबई का नया ताजदार.</p>
<p>शुरुआती रुझानों ने जैसे ही स्क्रीन पर दस्तक दी, माहौल हिल गया. बीजेपी–शिवसेना गठबंधन ने जबरदस्त शुरुआत करते हुए बढ़त बना ली है. अब तक 20 वार्डों में बीजेपी आगे निकल चुकी है, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को फिलहाल 14 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई है.</p>
<p>मुंबई की सत्ता वापस हासिल करने का सपना देखने वाले बीजेपी–शिवसेना गठबंधन का रास्ता अब और साफ होता दिख रहा है. वहीं एग्जिट पोल पहली बार ठाकरे परिवार के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं, क्योंकि शिवसेना UBT और राज ठाकरे की ताकत को सिर्फ 58–68 सीटों के बीच आंका गया है—जो बीएमसी पर उनकी पकड़ के लिए बड़ा झटका हो सकता है.</p>
<p>लगातार आए एग्जिट पोल्स में साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार BMC की चाबी बीजेपी–शिंदे शिवसेना गठबंधन के हाथों में जा सकती है. दूसरी ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की एमएनएस का गठबंधन बड़ी मुश्किलों में फंसता नजर आ रहा है, जिसका असर पूरे मुंबई की राजनीति पर दिखेगा.</p>
<p>दशकों तक बीएमसी पर राज करने वाली शिवसेना के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा जैसा बन चुका है. पार्टी टूटने के बाद अब ठाकरे परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी ने इस लड़ाई को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे मुकाबला और भी तीखा हो गया है.</p>
<p>इस बार मुकाबला बिल्कुल सीधा है—बीजेपी–शिंदे शिवसेना गठबंधन बनाम उद्धव–राज ठाकरे का मोर्चा. और आज तय हो जाएगा कि मुंबई की कमान किसके हाथ जाएगी!</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ममता की ‘ग्रीन फाइल’ से खुला पावर गेम! ED के साथ खुली जंग, बंगाल उबल पड़ा</title>
<link>https://pratinidhi.in/mamata-banerjee-mysterious-file-statement-sparks-debate-over-ed-probe-in-bengal-politics</link>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले &#039;ग्रीन फाइल&#039; प्रकरण ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। आई-पैक I-PAC दफ्तर पर ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का स्वयं वहां पहुंचना और एक लैपटॉप व रहस्यमयी फाइल लेकर निकलना चर्चा का विषय बना हुआ है।  यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जिससे 2026 के चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। क्‍या है पूरा मामला? ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 17:02:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ममता बनर्जी green file, Bengal politics ED probe, I-PAC raid controversy, दीदी बनाम ईडी मामला, West Bengal election 2026, रहस्यमयी ग्रीन फाइल मामला, Mamata Banerjee ED clash, Kolkata political controversy, Bengal chunav politics, ED investigation news</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक रहस्यमयी ‘ग्रीन फाइल’ ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है कि हर तरफ इसी की चर्चा है। आई-पैक के दफ्तर पर ईडी की कार्रवाई के बीच अचानक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पहुंच जाना और उसी दौरान एक लैपटॉप के साथ यह हरी फाइल लेकर बाहर निकलना पूरे राज्य को चौंका गया। राजनीतिक हलकों में सवाल गूंज रहा है—इस फाइल में आखिर ऐसा क्या है जिसने चुनाव से ठीक पहले सियासत की धड़कनें तेज कर दीं?</p>
<p>कोलकाता की गलियों से लेकर दिल्ली की दहलीज तक ‘दीदी बनाम ईडी’ का टकराव अभी अपने चरम पर है। विधानसभा चुनाव बस कुछ महीनों दूर हैं और ऐसे समय में आई-पैक पर छापेमारी ने पूरे चुनावी समीकरण को हिला कर रख दिया है। बंगाल का इतिहास गवाह है कि हर चुनाव से पहले कोई बड़ा धमाका निश्चित तौर पर होता है—और इस बार यह ‘ग्रीन फाइल’ वही विस्फोटक ट्रिगर बनकर उभरी है।</p>
<p>2016 का नारद स्टिंग, 2021 से पहले की कोयला-मवेशी तस्करी और अब यह आई-पैक प्रकरण—हर बार बंगाल की राजनीति एक नए विवाद से हिलती रही है। लेकिन इस बार की घटना सबसे अलग और अभूतपूर्व है, क्योंकि भारतीय राजनीति में शायद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने ईडी की मौजूदगी के दौरान मौके पर जाकर सीधा हस्तक्षेप किया है। यह कदम राज्य और केंद्र के बीच टकराव को नए स्तर पर ले गया है।</p>
<p>ईडी जहां आई-पैक के ऑफिस और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर दस्तावेज खंगाल रही थी, वहीं ममता का वहां पहुंचना किसी हाई-वोल्टेज सस्पेंस फिल्म जैसा नजारा बन गया। उनकी कार से निकलते ही माहौल गर्मा गया और मिनटों में सोशल मीडिया पर ‘ग्रीन फाइल’ वायरल हो गई। छह घंटे चले इस रोमांचक ड्रामे ने जांच एजेंसी को सवालों के घेरे में डाल दिया और ममता ने इसे अपनी पार्टी की गोपनीय रणनीति पर हमला बताया।</p>
<p>मुख्यमंत्री का आरोप है कि भाजपा ईडी का इस्तेमाल कर तृणमूल की 2026 की चुनावी प्लानिंग हासिल करना चाहती है। कोलकाता में ममता का पैदल मार्च और दिल्ली में तृणमूल सांसदों का विरोध प्रदर्शन इसी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा था। उनके समर्थक इसे दीदी की जुझारू छवि की नई मिसाल बता रहे हैं, जबकि विपक्ष का दावा है कि यह सब चुनावी सहानुभूति पाने का तरीका है।</p>
<p>भाजपा ने उल्टा वार करते हुए आरोप लगाया कि ममता ने एक निजी कंसल्टेंसी फर्म को बचाने के लिए कानून को बंधक बना लिया। संबित पात्रा ने तो यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री ने बंगाल को भारत के कानूनों से बाहर कर दिया है। भ्रष्टाचार और अराजकता को इस बार भाजपा अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में है, और यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।</p>
<p>ईडी का दावा है कि कोयला तस्करी की काली कमाई से 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए आई-पैक तक पहुंचे, जिन्हें गोवा चुनाव में खर्च किया गया। दूसरी ओर बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है और कोलकाता व विधाननगर पुलिस ने ईडी पर ही ‘डेटा चोरी’ का मामला दर्ज कर लिया है। अब टकराव सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि एक संवैधानिक संघर्ष बन चुका है।</p>
<p>केंद्रीय एजेंसी बनाम राज्य की पुलिस—यह ऐसा संघर्ष है जिसकी मिसाल शायद ही कहीं मिले। बड़ा सवाल यह है कि इस राजनीतिक विस्फोट का फायदा आखिर किसे मिलेगा? भाजपा, तृणमूल की सरकार पर भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक असफलताओं को लेकर हमलावर है, वहीं माकपा भी उसी सुर में भाजपा का साथ देती दिख रही है।</p>
<p>माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने सवाल उठाया कि आखिर एक निजी कंपनी के लिए मुख्यमंत्री को सड़कों पर क्यों उतरना पड़ा। यह ममता की छवि पर सीधा हमला है, लेकिन ‘बंगाल की बेटी’ कहलाने वाली ममता हर बार हमलों को अपने पक्ष में मोड़ने में माहिर मानी जाती हैं। उनकी रणनीति साफ है—हर विवाद को बंगाली अस्मिता बनाम बाहरी ताकतों की लड़ाई में बदल देना।</p>
<p>और फिलहाल, पूरा बंगाल इसी ‘ग्रीन फाइल’ और ‘डेटा चोरी’ की गूंज में डूबा हुआ है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस करवट बैठेगा, यह तय करेगा कि 2026 के चुनावी रण में असली लाभ किसके खाते में जाएगा—दीदी के या उनके विरोधियों के।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बंगाल में 58 लाख वोटरों के नाम गायब! TMC के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ टीएमसी सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने वैध दस्तावेजों को अस्वीकार कर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटा दिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चुनाव आयोग से एक हफ्ते में जवाब मांगा है। सेन ने 58 लाख से अधिक नाम हटाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है, खासकर बंगाल विधानसभा चुनावों की आशंका के मद्देनजर। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 17:00:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>SC voter list case, पश्चिम बंगाल चुनाव विवाद, TMC 58 lakh names issue, Supreme Court EC reply, Bengal voter list hataane ka आरोप, election transparency India, Dola Sen petition, EC SIR revision controversy, Kapil Sibal arguments, draft voter list West Bengal</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल से टीएमसी सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग पर गंभीर मनमानेपन का आरोप लगाते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब जमा करने का आदेश दिया। अदालत ने साफ कहा कि यह मामला देश में चुनावी पारदर्शिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है।</p>
<p>डोला सेन का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान आयोग ने वैध दस्तावेजों को भी मान्यता देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते लाखों लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में तर्क दिया कि चुनाव आयोग अपने अधिकारियों को व्हाट्सऐप और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निर्देश भेज रहा है, जो प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>
<p>सिब्बल ने जोर देकर कहा कि सभी निर्देश लिखित और आधिकारिक रूप में जारी होने चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेही के दायरे में रहे। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की बेंच ने आयोग के वकील एकलव्य द्विवेदी से शनिवार तक जवाब जमा करने को कहा है। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी, जबकि सेन ने 15 जनवरी की डेडलाइन बढ़ाने की भी मांग की है।</p>
<p>याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि परमानेंट रेसिडेंस सर्टिफिकेट, पंचायत रेसिडेंस सर्टिफिकेट और फैमिली रजिस्टर जैसे दस्तावेजों को वोटर लिस्ट अपडेट के लिए वैध माना जाए। बंगाल में 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल ने हलचल मचा दी थी, क्योंकि इसमें 58,20,898 नाम बिना किसी पूर्व सूचना या व्यक्तिगत सुनवाई के हटा दिए गए।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, 2025 की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद वोटर्स की संख्या 7,66,37,529 थी, जो घटकर अब 7,08,16,616 रह गई है। याचिका में यह भी बताया गया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में एब्सेंटी, शिफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट (एएसडीडी) कैटेगरी के मामलों को गलत तरीके से सेंट्रल प्रोसेसिंग में डालकर 'डिस्पोज्ड - फॉर्म 7' मार्क कर दिया गया।</p>
<p>सेन को आशंका है कि जैसे ही फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी, उसके तुरंत बाद बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी जाएगी। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि चुनाव आयोग को निर्देशित किया जाए कि वह वोटर लिस्ट की पूरी प्रक्रिया दुरुस्त करे और हर योग्य मतदाता का नाम शामिल करने को सुनिश्चित करे।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>‘मैदान नहीं छोड़ूंगी!’ काराकाट से हार के बाद भी ज्योति सिंह के तेवर सख्त, क्या लड़ेंगी लोकसभा चुनाव?</title>
<link>https://pratinidhi.in/jyoti-singh-says-election-continues-after-karakat-defeat-lok-sabha-hint</link>
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<description><![CDATA[ भोजपुरी इंडस्ट्री के पावर स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने 6 जनवरी को अपना जन्मदिन मनाया था. पिछले साल हुए इलेक्शन में ज्योति सिंह को काराकाट सीट से हार का सामना करना पड़ा था. हार के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा है और उन्होंने फिर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 11:25:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>ज्योति सिंह चुनाव 2025, Karakat seat politics, पवन सिंह पत्नी ज्योति, Bihar election news, निर्दलीय उम्मीदवार बिहार, Jyoti Singh interview, CPI male Arun Kushwaha, Bihar Vidhan Sabha updates</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनावों में पावर स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह को बड़ी शिकस्त झेलनी पड़ी थी. काराकाट सीट से निर्दलीय मैदान में उतरकर उन्होंने दमदार कोशिश जरूर की, लेकिन CPI (माले) के उम्मीदवार डॉक्टर अरुण सिंह कुशवाहा ने 2836 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. नतीजों में ज्योति तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि उन्होंने पूरे जोश के साथ घर-घर जाकर वोट की अपील की थी. मेहनत और जनसंपर्क के बावजूद जीत उनकी झोली में नहीं आ सकी.</p>
<p><strong>ज्योति फिर मैदान में लौटने को तैयार</strong><br>लेकिन इस हार से ज्योति का हौसला बिल्कुल भी कमजोर नहीं पड़ा. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कर दिया कि उनका राजनीतिक सफर यहीं खत्म नहीं होने वाला. A TO Z BIHAR से बातचीत में ज्योति ने कहा कि जिंदगी में हार-जीत लगी रहती है, लेकिन मैदान छोड़ना विकल्प नहीं. उन्होंने गर्व से बताया कि लोगों ने भरोसा दिखाते हुए उन्हें 27 हजार वोट दिए, और वो इन उम्मीदों को कभी टूटने नहीं देंगी. ज्योति ने कहा—अगर मैं पीछे हट गई तो लोग यही सोचेंगे कि मैं डर गई, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है.</p>
<p>ज्योति ने आगे कहा कि काराकाट उनके लिए सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं बल्कि परिवार है. 30 दिनों के अंदर मिले 27 हजार वोटों ने उन्हें हैरान भी किया और भावुक भी. उनका कहना है कि काराकाट की जनता उनके हर सुख-दुख में साथ खड़ी रहती है, और इसलिए वह भी इस क्षेत्र को कभी नहीं छोड़ेंगी. उन्होंने साफ किया कि वो फिर से वहीं से चुनावी मैदान में उतरेंगी और मजबूती से अपनी लड़ाई लड़ेंगी.</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले चुनाव में वो कोशिश करेंगी कि इस बार किसी राजनीतिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ें. लेकिन अगर हालात अनुकूल नहीं हुए तो वो खुद रास्ता निकालेंगी. बातचीत के दौरान ज्योति ने बड़ा बयान देते हुए यह भी संकेत दे दिया कि विधानसभा के बाद वे भविष्य में लोकसभा चुनाव लड़ने पर भी विचार कर सकती हैं.</p>
<p><strong>दिल छू लेने वाला पोस्ट किया था शेयर</strong><br>चुनावी हार के बाद ज्योति ने सोशल मीडिया पर हाथ जोड़कर एक भावुक तस्वीर साझा की थी. इसके साथ उन्होंने कैप्शन में अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियां लिखकर अपनी मन:स्थिति जाहिर की—"हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा." उन्होंने कहा कि काराकाट की जनता के अपार समर्थन ने उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत और दृढ़ बना दिया है. उन्होंने सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद भी किया.</p>
<p>ज्योति ने अपने पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा था कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति को हराने या जीतने के लिए नहीं थी, बल्कि महिलाओं, शोषितों और वंचितों की आवाज बुलंद करने के लिए थी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है और हार-जीत जीवन का हिस्सा है. वो आगे भी अपने क्षेत्र के लिए लगातार काम करती रहेंगी और पूरी प्रतिबद्धता के साथ योगदान देती रहेंगी.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>EVM पर जबरदस्त भरोसा! कर्नाटक सर्वे में 83% ने कहा वोट मशीन विश्वसनीय, BJP ने राहुल गांधी पर कसा तंज</title>
<link>https://pratinidhi.in/evm-trust-83-percent-karnataka-survey-setback-bjp-attacks-rahul</link>
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<description><![CDATA[ कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर कराए गए सर्वे में जनता ने ईवीएम पर भरोसा जताते हुए इसे विश्वसनीय माना है. इससे बीजेपी को राहुल गांधी पर तंज कसने का मौका मिल गया है, जो बार-बार चुनाव प्रक्रिया की विश्वनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 13:29:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>EVM trust survey Karnataka, ईवीएम भरोसा 83 प्रतिशत, Karnataka election survey report, राहुल गांधी EVM विवाद, BJP vs Congress politics, लोकसभा चुनाव 2024 सर्वे, EVM reliability debate, Karnataka political news, election process transparency India, EVM controversy India</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए लोकसभा चुनाव 2024 से जुड़े एक बड़े सर्वे में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। इस अध्ययन में लोगों का ईवीएम पर जबरदस्त भरोसा दिखाई दिया, जिसने बीजेपी को राहुल गांधी के लगातार लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार करने का एक नया हथियार दे दिया है। कांग्रेस नेता जहां चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे, वहीं जनता का भारी बहुमत ईवीएम के पक्ष में खड़ा दिखा।</p>
<p>'लोकसभा इलेक्शन 2024–इवैल्यूएशन ऑफ इंडलाइन सर्वे ऑफ नॉलेज, एटीट्यूड एंड प्रैक्टिस ऑफ सिटिजन्स' नामक इस सर्वे में 83.61% प्रतिभागियों ने साफ कहा कि ईवीएम भरोसेमंद हैं। करीब 69.39% ने माना कि मशीनें बिल्कुल सटीक परिणाम देती हैं, जबकि 14.22% लोगों ने जोर देकर कहा कि उन्हें ईवीएम पर पूरा विश्वास है। ये आंकड़े देश में चल रही राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दे रहे हैं।</p>
<p><strong>कर्नाटक की 102 विधानसभाओं में चला विशाल सर्वे</strong></p>
<p>इस राज्यव्यापी सर्वे में बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु के प्रशासनिक डिवीजनों के 102 विधानसभा क्षेत्रों से 5,100 लोगों की राय जुटाई गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार की निगरानी में हुए इस अध्ययन ने दिलचस्प नतीजे दिए। कलबुर्गी डिवीजन ईवीएम पर सबसे ज्यादा विश्वास जताने वाला क्षेत्र बना, जहां 83.24% लोगों ने सहमति और 11.24% ने पूरी सहमति दर्ज की।</p>
<p>मैसूरु में भी भरोसे का स्तर मजबूत रहा, जहां 70.67% लोगों ने ईवीएम को विश्वसनीय बताया और 17.92% ने बेहद दृढ़ विश्वास जताया। बेलगावी में 63.90% उत्तरदाताओं ने मशीनों पर भरोसा दिखाया, जबकि 21.43% ने जोरदार समर्थन किया। बेंगलुरु डिवीजन में यह आंकड़ा क्रमश: 63.67% और 9.28% रहा। ये नतीजे राहुल गांधी के उन आरोपों के बिल्कुल विपरीत हैं, जिनमें वह ईवीएम हेरफेर और 'वोट चोरी' की बात कहते रहे हैं।</p>
<p><strong>बीजेपी बोली–कांग्रेस को मिली कड़वी सच्चाई</strong></p>
<p>सर्वे के सामने आते ही बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी सालों से देशभर में लोकतंत्र और ईवीएम को लेकर अविश्वास का माहौल बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन अपने ही राज्य में कांग्रेस सरकार के सर्वे ने उनकी कहानी को झूठा साबित कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि जनता चुनावी प्रक्रिया, ईवीएम और संस्थाओं—तीनों पर पूरा भरोसा रखती है।</p>
<p><strong>कांग्रेस सरकार पर पीछे ले जाने का आरोप</strong></p>
<p>आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार द्वारा स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने के फैसले पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब जनता इतनी स्पष्टता से ईवीएम पर भरोसा जता रही है, तब सिद्धारमैया सरकार बैलेट पेपर जैसी पुरानी, विवादित और दुरुपयोग-प्रवण प्रणाली को बढ़ावा दे रही है। उनका आरोप था कि कांग्रेस सत्ता में रहते हुए संस्थाओं को श्रेष्ठ बताती है और हार मिलने पर उन्हीं संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर देती है।</p>
<p>कुल मिलाकर, सर्वे का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही रहा कि कर्नाटक में 83.61% जनता ईवीएम को पूरी तरह विश्वसनीय मानती है, जो मौजूदा राजनीतिक घमासान के बीच एक बेहद अहम संकेत माना जा रहा है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Delhi MCD Result 2025: CM रेखा गुप्ता वाले वार्ड में भाजपा ने रचा इतिहास, अनीता जैन की प्रचंड जीत देख टेंशन में AAP</title>
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<description><![CDATA[ दिल्ली के उपचुनावों में भाजपा ने 12 में से 7 वार्डों में जीत हासिल की, आम आदमी पार्टी को केवल 3 सीटें मिलीं। जानें विस्तार से! ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 11:10:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>दिल्ली उपचुनाव, भाजपा जीत, आम आदमी पार्टी कमजोर, कांग्रेस सीटें, रेखा गुप्ता, शालीमार बाग, अनिता जैन, सुरेश चौधरी, संगम विहार, निर्दलीय उम्मीदवार, वार्ड चुनाव, वोट अंतर, राजनीतिक विश्लेषण, चुनाव परिणाम, दिल्ली राजनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हाल के उपचुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। इन उपचुनावों में भाजपा ने 12 वार्डों में से 7 सीटें जीती हैं, जबकि आम आदमी पार्टी को केवल 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा। कांग्रेस ने एक सीट पर जीत दर्ज की है, और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने सभी राष्ट्रीय दलों को चौंका दिया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने क्षेत्र में भाजपा की महत्वपूर्ण जीत सुनिश्चित की है। आम आदमी पार्टी ने यहां पूरी ताकत झोंकी, लेकिन मुकाबला एकतरफा रहा। रेखा गुप्ता शालीमार बाग बी वार्ड से पूर्व पार्षद थीं और उनके विधायक बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की अनिता जैन ने 10,101 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उन्हें कुल 16,843 वोट मिले, जबकि आप की बबिता राणा को 6,742 वोट मिले।</p>
<p>कांग्रेस के लिए ये उपचुनाव उम्मीद का संचार लेकर आए हैं। पार्टी ने संगम विहार ए वार्ड से जीत दर्ज की, जिसमें सुरेश चौधरी ने भाजपा के सुब्रजीत गौतम को 3,628 वोट से हराया। सुरेश को 12,766 वोट मिले, जबकि भाजपा को 9,138 वोट प्राप्त हुए। इससे कांग्रेस के सदन में पार्षदों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है।</p>
<p>आम आदमी पार्टी के लिए परिणाम संतोषजनक नहीं रहे, क्योंकि पार्टी केवल 3 सीटों पर जीत हासिल कर पाई। जीतने वाले वार्डों में दक्षिणपुरी, मुंडका और नारायणा शामिल हैं। दक्षिणपुरी में राम स्वरूप कनौजिया ने जीत दर्ज की, और मुंडका में आम आदमी पार्टी के अनिल ने भाजपा को हराया। नारायणा में राजन अरोड़ा ने भाजपा के चंद्रकांता शिवानी को 148 वोटों से हराया।</p>
<p><strong>भाजपा द्वारा जीती गई वार्ड-</strong> शालीमार बाग बी, अशोक विहार, चांदनी चौक, द्वारका बी, दिचाऊं कलां, ग्रेटर कैलाश, विनोद नगर।</p>
<p><strong>आम आदमी पार्टी द्वारा जीती गई वार्ड-</strong> दक्षिणपुरी, मुंडका, नारायणा।</p>
<p><strong>कांग्रेस द्वारा जीती गई वार्ड-</strong> संगम विहार ए।</p>
<p><strong>निर्दलीय द्वारा जीती गई वार्ड-</strong> चांदनी महल।</p>
<p>भाजपा के पास अब 123 पार्षद हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के पास 101 पार्षद हैं। इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 15 पार्षद, कांग्रेस के 9 पार्षद और 2 निर्दलीय पार्षद भी होंगे।</p>
<p>इन उपचुनावों में 30 नवंबर को मतदान हुआ था। इनमें से 9 वार्डों में भाजपा और बाकी वार्डों में आम आदमी पार्टी के पार्षद थे। मतदान प्रतिशत 38.51 प्रतिशत रहा, जबकि 2022 के चुनाव में यह 50.47 प्रतिशत था।</p>
<p>इन परिणामों ने दिल्ली की राजनीतिक स्थिति को एक नया मोड़ दिया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कांग्रेस का &amp;apos;न्याय पथ&amp;apos;: गुजरात जीतने की रणनीति पर फोकस</title>
<link>https://pratinidhi.in/congress-passes-nyay-path-resolution-focus-on-strategy-to-win-gujarat</link>
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<description><![CDATA[ कांग्रेस ने गुजरात में साबरमती नदी के किनारे हुए अधिवेशन में &#039;नूतन गुजरात, नूतन कांग्रेस&#039; का नारा दिया और सत्ता में वापसी के लिए कमर कस ली है। अधिवेशन में &#039;न्याय पथ&#039; नाम से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें गुजरात के विकास और सभी वर्गों के उत्थान के लिए कांग्रेस की प्रतिबद्धता दोहराई गई। शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस को सकारात्मक विमर्श और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की अपनी अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह देश की एकता, सामाजिक न्याय और वंचितों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है।पार्टी ने बीजेपी पर समाज को तोड़ने का आरोप लगाया और गुजरात से बीजेपी को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 10 Apr 2025 17:24:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>कांग्रेस, गुजरात, अधिवेशन, न्याय पथ, रणनीति</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[कांग्रेस ने गुजरात में साबरमती नदी के किनारे हुए अधिवेशन में <strong>'नूतन गुजरात, नूतन कांग्रेस'</strong> का नारा दिया। <br><br>पार्टी ने कहा कि वो अब पूरी ताकत से तीन दशक बाद गुजरात की सत्ता में वापसी करेगी। <br><br>अधिवेशन में गुजरात को लेकर एक प्रस्ताव भी पास हुआ, जिसमें ये बताया गया कि <strong>'गुजरात में कांग्रेस क्यों जरूरी है'</strong> और राज्य के लिए कई वादे किए गए। <br><br>अहमदाबाद में कांग्रेस की दो दिन की मीटिंग में जो बातें हुईं, उसे <strong>'न्याय पथ'</strong> नाम दिया गया है। <br><br>देशभर से आए लगभग 2000 कांग्रेस के खास सदस्यों के सामने पार्टी ने अपना प्लान रखा, जिसे सबने हाथ उठाकर पास किया। राजस्थान के नेता सचिन पायलट ने न्याय पथ का आइडिया दिया, तो पूर्व मंत्री शशि थरूर ने उसे सही बताया।<br><br>साबरमती के किनारे कांग्रेस ने दो बातें तय कीं- पहली, देश के लिए और दूसरी, गुजरात के लिए। थरूर ने कहा कि कांग्रेस को गुस्सा, पुरानी बातें और बुराई करने वाली पार्टी नहीं बनना चाहिए, बल्कि उम्मीद, भविष्य और अच्छी बातें करने वाली पार्टी बनना चाहिए। <br><br>कांग्रेस को उन लोगों का साथ फिर से पाना होगा, जो 2009 में पार्टी के साथ थे। पार्टी को भविष्य की पार्टी बनना होगा, सिर्फ पुरानी नहीं।<br><br>लगभग सात पेज के प्रस्ताव में कांग्रेस ने समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, राष्ट्रवाद, विदेश नीति, सभी धर्मों का सम्मान, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर बात की। <br><br>बीजेपी और संघ की तरफ से देश में अपने विचारों को बढ़ाने और दूसरी विचारधाराओं के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाने के चलते, कांग्रेस ने राष्ट्रवाद पर अपनी बात रखने की कोशिश की।<br><br>कांग्रेस ने कहा कि उनके लिए राष्ट्रवाद का मतलब है देश की एकता और यहां रहने वाले लोगों को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत करना है। <br><br>राष्ट्रवाद का मतलब है सभी देशवासियों के लिए एक जैसा न्याय और गरीबों, पीड़ितों और शोषितों के अधिकारों की रक्षा करना, साथ ही भारत की विविधता का सम्मान करना। पार्टी ने बीजेपी के राष्ट्रवाद पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस समाज को जोड़ने का काम करती है, जबकि बीजेपी और संघ समाज को तोड़ने का।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सीतारमण का DMK पर निशाना: परिसीमन के बहाने चुनाव की तैयारी</title>
<link>https://pratinidhi.in/dmk-eyes-next-year-assembly-elections-on-the-pretext-of-delimitation</link>
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<description><![CDATA[ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने DMK पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में उपलब्धियों की कमी के कारण भावनात्मक मुद्दे उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने तमिलनाडु की कानून व्यवस्था की आलोचना की और अन्ना विश्वविद्यालय के यौन उत्पीड़न मामले में DMK की भूमिका पर सवाल उठाया। सीतारमण ने DMK से तमिलनाडु के लिए किए गए कार्यों को बताने को कहा और परिसीमन में अन्याय न होने का आश्वासन दिया। उन्होंने हिंदी थोपने के आरोपों को झूठा प्रचार बताया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 07:02:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>DMK, Nirmala Sitharaman, Assembly Elections, Delimitation, Tamil Nadu Politics</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने DMK पर आरोप लगाया है कि वे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में जनता को दिखाने के लिए उनके पास कोई उपलब्धि नहीं है। <strong>इसलिए, वे हिंदी थोपने और संसदीय सीटों के परिसीमन जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठा रहे हैं।</strong><br><br>उन्होंने तमिलनाडु की कानून व्यवस्था की स्थिति की आलोचना करते हुए इसे अराजक बताया। सीतारमण ने अन्ना विश्वविद्यालय की छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में सत्तारूढ़ पार्टी से सवाल किया कि क्या आरोपी DMK कार्यकर्ता नहीं है?<br><br>सीतारमण ने DMK से पूछा कि उनकी सरकार ने तमिलनाडु के लिए क्या किया है। <strong>उन्होंने कहा कि DMK अपनी अक्षमता और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए भावनात्मक मुद्दों का सहारा ले रही है।</strong> उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि परिसीमन के मामले में किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। सीतारमण ने इसे झूठा प्रचार बताया।]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चुनाव आयोग बूथवार मत प्रतिशत पर करेगा विचार</title>
<link>https://pratinidhi.in/election-commission-to-consider-uploading-booth-wise-vote-percentage-data</link>
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<description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से बूथवार मत प्रतिशत अपलोड करने के मुद्दे पर विचार करने को कहा है, आयोग ने कहा कि वह इसके लिए तैयार है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों में प्रतिवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया। यह मामला टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें चुनाव आयोग से 48 घंटे के भीतर बूथवार मतदान डेटा वेबसाइट पर अपलोड करने का आग्रह किया गया है। नए चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस मुद्दे पर याचिकाकर्ताओं के साथ चर्चा करने को तैयार हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 10:56:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मत प्रतिशत, बूथवार, याचिका</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से उसकी वेबसाइट पर बूथवार मत प्रतिशत अपलोड करने के मुद्दे पर विचार करने को कहा है। <br><br>चुनाव आयोग ने कहा कि वह वेबसाइट पर बूथवार मत प्रतिशत का डेटा अपलोड करने की मांग पर विचार करने को तैयार है। <br><br>कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों के अंदर अपना प्रतिवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिकाओं पर सुनवाई की।<br><br>याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया था कि चुनाव आयोग को लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद 48 घंटे के भीतर बूथवार मतदान डेटा वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया जाए। चुनाव आयोग के वकील मनिंद्र सिंह ने कहा कि नए चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस मुद्दे पर याचिकाकर्ताओं के साथ चर्चा करने को तैयार हैं।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>आधार और वोटर आईडी लिंकिंग: चुनाव आयोग की बड़ी बैठक</title>
<link>https://pratinidhi.in/aadhaar-voter-id-linking-election-commission-to-meet-on-epic-final-decision</link>
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<description><![CDATA[ चुनाव आयोग अगले सप्ताह आधार और वोटर आईडी को जोड़ने के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। बैठक में गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और UIDAI के अधिकारी भाग लेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना है। चुनाव आयोग ने कहा है कि डुप्लिकेट नंबर होने का मतलब फर्जी वोटर नहीं है। आधार को EPIC से जोड़ने से फर्जी वोटिंग रुक सकती है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। हालांकि, कुछ लोग इस कदम पर प्राइवेसी की चिंता भी जता रहे हैं। चुनाव आयोग इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 08:36:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Aadhaar, Voter ID, Election Commission, Linking, EPIC</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[आधार और वोटर आईडी को लिंक करने के विषय पर चुनाव आयोग अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। <strong>इस बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और अन्य संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी भी शामिल होंगे।</strong> यह बैठक 18 मार्च को निर्धारित है। वर्तमान में, आधार और वोटर आईडी को जोड़ने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है, और इस बैठक में इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।<br><br>नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण सभा का आयोजन करने जा रहा है। <strong>इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के उच्च पदस्थ अधिकारी भाग लेंगे।</strong> चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह बैठक मुख्य रूप से आधार कार्ड को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के विषय पर केंद्रित होगी। 2021 में, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, आधार को EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) से जोड़ने की अनुमति प्रदान की गई थी। इसके बाद, चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से उनके आधार नंबर प्राप्त करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अभी तक इन दोनों डेटाबेस को आपस में जोड़ा नहीं गया है।<br><br>इस पहल का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से अमान्य नामों को हटाकर इसे स्वच्छ और त्रुटि रहित बनाना है। इसके लिए आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना अनिवार्य नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 18 मार्च को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, विधायी विभाग के सचिव राजीव मणि, और UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार के साथ विचार-विमर्श करेंगे।<br><br>इस बैठक में, आधार को EPIC से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाताओं के EPIC नंबरों में समानता का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग ने यह स्वीकार किया है कि कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने EPIC नंबर जारी करते समय गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज का उपयोग किया था।<br><br>चुनाव आयोग ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि वह तीन महीने के भीतर डुप्लिकेट नंबर वाले मतदाताओं को नए EPIC नंबर जारी करेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि डुप्लिकेट नंबर होने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता फर्जी है। केवल वे व्यक्ति ही मतदान कर सकते हैं जिनका नाम किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत है। आधार को EPIC से जोड़ने का मुख्य लक्ष्य वोटर लिस्ट को त्रुटि रहित बनाना है, जिससे फर्जी मतदाताओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी।<br><br>आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करने के कई संभावित लाभ हैं। उदाहरण के लिए, इससे फर्जी मतदान को रोका जा सकता है, और एक व्यक्ति द्वारा एक से अधिक स्थानों पर मतदान करने की संभावना कम हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति के नाम की कई बार प्रविष्टि की समस्या भी समाप्त हो जाएगी। चुनाव आयोग का मानना है कि इस कदम से चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी।<br><br>हालांकि, कुछ व्यक्तियों ने इस कदम पर गोपनीयता संबंधी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका मानना है कि इससे व्यक्तिगत जानकारी के लीक होने का खतरा बढ़ सकता है, और वे निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। उनका तर्क है कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी को वोटर आईडी से जोड़ना जोखिम भरा हो सकता है और यह नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन भी कर सकता है।<br><br>चुनाव आयोग ने इस मामले पर सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने का निर्णय लिया है। इसलिए, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, और UIDAI के अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी प्रासंगिक पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इस मुद्दे को किस प्रकार संभालता है। आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने का निर्णय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है, लेकिन नागरिकों की गोपनीयता की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। भविष्य में इस विषय पर और अधिक चर्चा होने की संभावना है।]]> </content:encoded>
</item>

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<title>चुनाव आयोग ने दलों से माँगे सुझाव</title>
<link>https://pratinidhi.in/election-commission-invites-suggestions-from-political-parties</link>
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<description><![CDATA[ चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल तक चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए सुझाव मांगे हैं। यह फैसला विपक्ष के मतदाता सूची में गड़बड़ियों के सवालों के बीच आया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर चर्चा की मांग की थी। चुनाव आयोग पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्यों के साथ भी बातचीत करेगा ताकि चुनावी प्रक्रियाओं को और भी बेहतर बनाया जा सके। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के CEO, DEO और ERO को राजनीतिक दलों के साथ नियमित रूप से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 11:37:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>चुनाव आयोग, राजनीतिक दल, मतदाता सूची, सुझाव, चुनाव प्रक्रिया</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<strong>नई दिल्ली:</strong> चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रिया को और भी मजबूत बनाने के लिए सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल तक सुझाव मांगे हैं। यह फैसला विपक्ष के मतदाता सूची में गड़बड़ियों के सवालों के बीच आया है।
<br><br>
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर चर्चा की मांग की थी। इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने यह कदम उठाया है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर 30 अप्रैल तक सुझाव देने को कहा है।
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आयोग पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्यों के साथ भी बातचीत करेगा ताकि चुनावी प्रक्रियाओं को और भी बेहतर बनाया जा सके। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के CEO, DEO और ERO को राजनीतिक दलों के साथ नियमित रूप से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन बैठकों में जो भी सुझाव मिलें, उनका समाधान कानूनी दायरे में रहकर किया जाए।]]> </content:encoded>
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<title>चुनाव आयोग का अनूठा कदम: डुप्लिकेट वोटर कार्ड की समस्या का समाधान</title>
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<description><![CDATA[ चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में डुप्लिकेट वोटर कार्ड की समस्या को हल करने के लिए प्रत्येक वोटर को एक यूनिक राष्ट्रीय EPIC नंबर जारी करेगा। यह निर्णय 2000 में हुई त्रुटियों के कारण लिया गया है, जिसके चलते कुछ मतदाताओं के पास डुप्लीकेट EPIC नंबर हैं। भारत में मतदाता सूची दुनिया का सबसे बड़ा वोटर डेटाबेस है, जिसमें 99 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड वोटर हैं। मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाता है। यदि किसी को मतदाता सूची से शिकायत है, तो वह RP अधिनियम 1950 की धारा 24 (a) और 24 (b) के तहत अपील दायर कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 12:05:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>Voter ID Card, Election Commission, Duplicate Voter Cards, EPIC Number</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में डुप्लिकेट वोटर कार्ड की समस्या को हल करने के लिए तैयार है। आयोग प्रत्येक वोटर को एक यूनिक राष्ट्रीय EPIC नंबर जारी करेगा। यह निर्णय 2000 में हुई कुछ त्रुटियों के कारण लिया गया है, जिसके चलते कुछ मतदाताओं के पास डुप्लिकेट EPIC नंबर हैं।
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आयोग के अनुसार, भारत में मतदाता सूची दुनिया का सबसे बड़ा वोटर डेटाबेस है, जिसमें 99 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड वोटर हैं। मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाता है और इसकी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए BLO और राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के एजेंटों को भी शामिल किया जाता है।
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आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को मतदाता सूची से कोई शिकायत है, तो वह RP अधिनियम 1950 की धारा 24 (a) और 24 (b) के तहत अपील दायर कर सकता है। आयोग ने यह भी माना है कि कुछ वोटर कार्ड के नंबर डबल पाए गए हैं, लेकिन जांच में यह पता चला है कि डुप्लीकेट EPIC नंबर वाले मतदाता वास्तविक मतदाता हैं।]]> </content:encoded>
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<title>केदारनाथ उपचुनाव: सीएम धामी के नेतृत्व और विकास कार्यों पर जनता की मुहर</title>
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<description><![CDATA[ केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल ने 5099 मतों से जीत दर्ज कर कांग्रेस को करारा झटका दिया। इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार की विकास नीतियों को दिया जा रहा है। नौटियाल को 23 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत 18 हजार मतों पर सिमट गए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 23 Nov 2024 13:42:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल ने 5099 मतों से जीत दर्ज कर कांग्रेस को करारा झटका दिया। इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार की विकास नीतियों को दिया जा रहा है।</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल ने 5099 मतों से जीत दर्ज कर कांग्रेस को करारा झटका दिया। इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार की विकास नीतियों को दिया जा रहा है। नौटियाल को 23 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत 18 हजार मतों पर सिमट गए।</p>
<h3>नकारात्मक प्रचार बना कांग्रेस की हार का कारण</h3>
<p>कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार में चारधाम यात्रा को लेकर नकारात्मक मुद्दों को उठाया। उन्होंने यात्रा मार्ग को बदलने, मंदिर के दान में मिले सोने पर सवाल उठाने और जातीय समीकरण बनाने की कोशिश की। इसके विपरीत, भाजपा ने विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं पर फोकस रखा, जो मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा।</p>
<h3>विकास के मुद्दे पर जनता की मुहर</h3>
<p>केदारनाथ की जनता ने विकास कार्यों को प्राथमिकता दी और कांग्रेस के नकारात्मक प्रचार को सिरे से खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किए गए विकास कार्यों और चारधाम यात्रा की सुविधाओं में सुधार को जनता ने सराहा।</p>
<h3>कांग्रेस का निगेटिव नैरेटिव फेल</h3>
<p>कांग्रेस ने जातिवाद और क्षेत्रवाद का दांव खेलते हुए भाजपा पर हमला किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल जैसे नेताओं ने मुख्यमंत्री धामी पर सीधा निशाना साधा। लेकिन विकास और परफॉर्मेंस आधारित राजनीति के दौर में मतदाताओं ने इन मुद्दों को खारिज कर दिया।</p>
<h3>मुख्यमंत्री धामी का नेतृत्व रहा प्रभावी</h3>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव प्रचार का नेतृत्व करते हुए क्षेत्र में 700 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ धाम से आत्मीय संबंध और उनकी सात यात्राओं को अपनी सभाओं में विशेष रूप से उजागर किया।</p>
<h3>भाजपा का संगठित चुनाव प्रचार</h3>
<p>भाजपा ने चुनाव प्रचार में पार्टी संगठन और कैबिनेट मंत्रियों की पूरी ताकत झोंकी। मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश संगठन ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। महिलाओं और युवाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं को भी प्रमुखता से जनता तक पहुंचाया गया।</p>
<h3>भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि</h3>
<p>केदारनाथ उपचुनाव के नतीजों ने यह साबित कर दिया कि भाजपा निगेटिव नैरेटिव को तोड़ने में सफल रही। क्षेत्रवाद और जातिवाद की राजनीति को खारिज करते हुए जनता ने डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी।</p>
<h3>भाजपा के लिए भविष्य का संदेश</h3>
<p>इस जीत से भाजपा को यह संकेत मिला है कि मतदाता अब विकास और प्रदर्शन आधारित राजनीति को तवज्जो दे रहे हैं। केदारनाथ की जीत ने यह भी साबित किया कि निगेटिव प्रचार के बजाय विकास के एजेंडे पर जनता की मुहर लगती है।</p>]]> </content:encoded>
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<title>भारी बारिश भी नहीं रोक पाई जनसैलाब, धामी की गर्जना से गूंज उठी जामताड़ा की धरती</title>
<link>https://pratinidhi.in/Even-heavy-rain-could-not-stop-the-crowd-the-land-of-Jamtara-resonated-with-Dhami-roar</link>
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<description><![CDATA[ पुष्कर सिंह धामी, जो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सख्त और निर्णायक नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं, आज राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बन चुके हैं। अपने राज्य में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और विकास कार्यों में तेजी लाने जैसे कठोर फैसलों से धामी ने अपनी पहचान बनाई है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 17:20:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>झारखंड के जामताड़ा जिले के कुंडहित में आयोजित परिवर्तन सभा में आज मौसम की मार भी जनता के जोश को कम नहीं कर पाई।</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>झारखंड के जामताड़ा जिले के कुंडहित में आयोजित परिवर्तन सभा में आज मौसम की मार भी जनता के जोश को कम नहीं कर पाई। भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोग पहुंचे, जिनमें उत्साह और उमंग की कोई कमी नहीं थी। सभी का एक ही मकसद था—उत्तराखंड के सशक्त नेतृत्वकर्ता और भाजपा के स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सुनना। धामी ने सभा में जनता को संबोधित करते हुए झारखंड के विकास और परिवर्तन के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके दौरान उपस्थित जनसमुदाय में भारी उत्साह देखने को मिला।</p>
<p>*सशक्त नेतृत्व और निर्णायक फैसलों से बनाई पहचान*</p>
<p>पुष्कर सिंह धामी, जो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सख्त और निर्णायक नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं, आज राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बन चुके हैं। अपने राज्य में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और विकास कार्यों में तेजी लाने जैसे कठोर फैसलों से धामी ने अपनी पहचान बनाई है। उत्तराखंड में उनके द्वारा लिए गए निर्णय देशभर में चर्चा का विषय बने हैं, जिससे धामी की लोकप्रियता में भारी इजाफा हुआ है। भाजपा ने धामी की इन्हीं क्षमताओं और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें झारखंड, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा जैसे राज्यों में स्टार प्रचारक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।</p>
<p>*देशभर में बढ़ती लोकप्रियता*</p>
<p>उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए धामी के द्वारा किए गए निर्णय, जैसे भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों को सख्ती से लागू करना और युवाओं के लिए अवसर पैदा करना, उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में प्रस्तुत करता है। इन फैसलों के चलते देशभर में उनकी छवि एक सशक्त और निडर नेता की बनी है। चाहे वह जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रचार हो या झारखंड जैसे राज्यों में, धामी को सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। उनके भाषणों में जनता के प्रति जुड़ाव और देशहित की प्रतिबद्धता स्पष्ट झलकती है।</p>
<p>*भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बने धामी*</p>
<p>भाजपा ने धामी की लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें कई राज्यों में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है। स्टार प्रचारक के रूप में, धामी ने पार्टी के एजेंडे को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व और प्रेरणादायक वक्तृत्व कौशल से भाजपा को इन राज्यों में बड़ा फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। जनता में उनकी छवि एक मजबूत और दृढ़ नेता के रूप में बनी हुई है, जो भाजपा की चुनावी सफलता में अहम भूमिका निभा सकती है।</p>
<p>*विकास की बातों ने जनता को किया प्रभावित*</p>
<p>धामी का झारखंड में आकर विकास और परिवर्तन की बात करना जनता के दिलों को छू गया। उनके भाषण में झारखंड के पिछड़ेपन को दूर करने और विकास कार्यों में तेजी लाने की प्रतिबद्धता साफ झलक रही थी। उन्होंने भाजपा की विकास योजनाओं का बखान करते हुए झारखंड को एक सशक्त और प्रगतिशील राज्य बनाने की बात की। उनके विचारों और योजनाओं से प्रभावित होकर भारी संख्या में उपस्थित लोग भाजपा की ओर आकर्षित हुए।</p>
<p>*आगामी चुनाव में भाजपा को होगा फायदा*</p>
<p>मुख्यमंत्री धामी के सशक्त नेतृत्व और उनकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते आगामी चुनावों में भाजपा को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। चाहे वह झारखंड हो या जम्मू-कश्मीर, धामी के प्रचार से पार्टी को मजबूत समर्थन मिल रहा है। भाजपा को विश्वास है कि धामी जैसे नेताओं के प्रभावशाली प्रचार अभियान के चलते पार्टी को इन राज्यों में बड़ी जीत हासिल होगी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>मुख्यमंत्री धामी का मिशन हरियाणा: धामी की उपस्थिति से भाजपा की स्थिति होगी मजबूत!</title>
<link>https://pratinidhi.in/CM-Dhami-Mission-Haryana-Dhami-presence-will-strengthen-the-position-of-BJP</link>
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<description><![CDATA[ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जनसभाओं को संबोधित करने जा रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Sep 2024 17:26:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>omshivjee</dc:creator>
<media:keywords>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरियाणा चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में करेंगे प्रचार</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जनसभाओं को संबोधित करने जा रहे हैं। आगामी दिनों में वे हरियाणा के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जनसभा और रोडशो के माध्यम से अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। उनकी यह पहल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि वे अपने प्रभावशाली भाषणों से पार्टी को मजबूती देने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री धामी अपने भाषणों में कानून-व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष पर तीखा हमला करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके विचारों और दृष्टिकोण से भाजपा को हरियाणा में चुनावी माहौल बनाने में मदद मिल सकती है। दूसरी राज्यों में चुनावों के दौरान उनकी सक्रिय भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, और इस बार भी उनकी उपस्थिति से भाजपा को समर्थन जुटाने में लाभ होगा।</p>
<p>पुष्कर सिंह धामी की रैलियों और जनसभाओं की योजना भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकती है। उनकी उपस्थिति से पार्टी को न केवल समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी, बल्कि हरियाणा चुनावों में भाजपा की स्थिति को भी मजबूत बनाने में सहायता मिल सकती है।</p>
<p>भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 5 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा आम चुनाव के मद्देनजर, राज्य सरकार के अधीनस्थ सभी विभागों, बोर्ड, कॉर्पोरेशन और शिक्षण संस्थानों में वैतनिक अवकाश रहेगा। यह निर्णय उन सभी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचना चाहते हैं।</p>
<p>जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सभी फैक्ट्रियों, प्राइवेट व्यवसायिक संस्थानों और दुकानों में भी कर्मचारियों के लिए वैतनिक अवकाश होगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि सभी नागरिक लोकतंत्र के इस महापर्व में सक्रिय भागीदारी कर सकें और अपने वोट डाल सकें।</p>]]> </content:encoded>
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<title>जयंत चौधरी पर विश्‍वासघात का आरोप लगाकर पश्चिमी यूपी को साधने चले अखिलेश</title>
<link>https://pratinidhi.in/Akhilesh-yadav-conquer-Western-UP-by-accusing-Jayant-Chaudhary-of-betrayal</link>
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<description><![CDATA[  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Apr 2024 12:23:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Pratinidhi</dc:creator>
<media:keywords></media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p>लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के सुर भी बदल गए हैं। कल तक जो नेता एक दूसरे के कंधे से कंधा मिलाकर मोदी सरकार को रोकने के लिए खाका तैयार कर रहे थे आज वह एक दूसरे पर जुबानी हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। पहले सपा का साथ छोड़कर बीजेपी में आए सुभासपा मुखिया ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोला। अब अखिलेश के दोस्त जयंत चौधरी ने भी गठबंधन तोड़ने की मजबूरी बताकर सपा मुखिया पर निशाना साधा है। अब जयंत चौधरी के एक बयान पर अखिलेश यादव ने पलटवार कर दिया है। अखिलेश ने जयंत का नाम लिए बगैर कहा कि हमें दो राज्यसभा सीट का नुकसान हुआ है। हमने चौ. चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया है। अगर दबाया होता तो माइनस में सीट होती, 9 सीट नहीं जीत पाते।</p>
<p>बुधवार को मुरादाबाद में सपा उम्मीदवार के समर्थन में पहुंचे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आरएलडी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जयंत चौधरी को आड़े हाथों ले लिया है। अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी का बिना नाम लिए कहा कि हम किसी को दबाते नहीं है, बल्कि आगे बढाते हैं।अगर दबाया होता तो माइनस में सीट होती। अखिलेश ने आगे कहा कि अगर दबाया होता तो जीरो से माइनस 1 होती या माइनस 2, three होती। लेकिन हमने उन्हें आगे बढ़ाया है। चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाया है। परिणाम ये हुआ कि वे eight-9 सीटें जीत गए।</p>
<p>इतना ही नहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि जयंत चौधरी को राज्यसभा की सीट भी दे दिया। एक राज्यसभा सीट 37 विधायकों के समर्थन से चुना जाता है। हमने तो एक राज्यसभा सीट दे दी और एक खो दी। उनकी वजह से हमे दो सीट का नुकसान हुआ है। विश्वासघात हुआ कि नहीं इसका आप आंकलन करिए। वहीं अखिलेश ने इशारों-इशारों में ये भी कहा कि पश्चिम से हवा चलने की बात करने वाले लोगों ने इस बार अपना रुख बदल लिया है। इस बार पश्चिम की जनता ने भाजपा का सूपड़ा साफ करने का मन बना लिया है।</p>
<p>राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी सपा के समर्थन से राज्यसभा के सांसद बने हैं। बीते दिनों मुरादाबाद पहुंचे आरएलडी मुखिया जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर हमला बोला था जयंत अखिलेश का बिना नाम लिए कहा कि मैं उनकी राजनीति और कार्यशैली से इत्तेफाक नहीं रखता हूं। हमें वह (अखिलेश यादव) दबाना चाह रहे थे, इसलिए हमने मजबूरी में गठबंधन तोड़ा है। हमलोग अब अच्छी जगह हैं। हालांकि जयंत ने अखिलेश से पारिवारिक संबंधों को लेकर कहा कि हम एक-दूसरे की इज्जत भी करते हैं। मेरी नजर में पहले की तरह ही संबंध रहेंगे।</p>]]> </content:encoded>
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